हल्दी के औषधीय गुण व लाभ



हल्दी के औषधीय गुणों से प्राय: सभी लोग परिचित होते हैं। हल्दी शरीर में रक्त को शुद्ध करने के साथ-साथ तीनों दोषों यानी वात्त-पित्त-कफ का भी शमन करती है। यह शरीर की काया और रंग को सुधारने में एक महत्त्वपूर्ण देशी औषधि के रूप में कारगर भूमिका अदा करती है।
लिवर को करती है डिटॉक्सीफाई
हल्दी के औषधीय गुण के रूप में आप इसका इस्तेमाल शरीर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए कर सकते हैं। मेरीलैंड मेडिकल सेंटर यूनिवर्सिटी के अनुसार, करक्यूमिन गाल ब्लैडर यानी पित्त मूत्राशय में बाइल (पित्त) के उत्पादन को बढ़ाता है। लिवर इस बाइल का प्रयोग विषैले जीवाणुओं को बाहर निकालने में करता है। इसके अलावा, बाइल के कारण लिवर में जरूरी सेल्स का निर्माण भी होता है, जो हानिकारक तत्वों को खत्म करने का काम करते हैं। करक्यूमिन की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया इतनी प्रभावशाली है कि इसका इस्तेमाल मरकरी के संपर्क में आए व्यक्ति का इलाज करने तक में किया जा सकता है
प्रतिरोधक क्षमता में सुधार-
हल्दी के गुण में इसका प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करना भी शामिल है। हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो प्रतिरोधक प्रणाली को बेहतर कर सकते हैं। वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि करक्यूमिन ह्रदय रोग व मोटापे का कारण बनने वाले सेल्स को बनने से रोकता है। साथ ही यह प्रतिरोधक प्रणाली को एक्टिव कर टीबी का कारण बनने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता है। हल्दी में करक्यूमिनोइड्स नामक यौगिक भी होता है, जो टी व बी सेल्स (श्वेत रक्त कोशिकाएं) जैसे विभिन्न इम्यून सेल्स की कार्यप्रणाली को बेहतर करता है। इससे प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है
डायबीटीज़ मे उपयोगी -
वैज्ञानिकों के अनुसार, करक्यूमिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम कर सकता है । इससे डायबिटीज से आराम मिल सकता है। एक अन्य शोध के तहत, डाबिटीज के मरीज को करीब नौ महीने तक करक्यूमिन को दवा के रूप में दिया गया। इससे मरीज में सकारात्मक परिणाम नजर आए । इन अध्ययनों के आधार पर वैज्ञानिकों ने माना कि हल्दी के सेवन से टाइप-1 डायबिटीज से ग्रस्त मरीज का इम्यून सिस्टम बेहतर हो सकता है। डायबिटीज से ग्रस्त चूहों पर हुए अध्ययन में भी पाया गया कि करक्यूमिन सप्लीमेंट्स के प्रयोग से ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम किया जा सकता है। शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस का स्तर बढ़ने से ह्रदय संबंधी रोग भी हो सकते हैं । इस लिहाज से हल्दी खाने के फायदे में डायबिटीज को ठीक करना भी है।
कैंसर
हल्दी में एंटीकैंसर गुण भी पाए जाते हैं। कई वैज्ञानिक शोधों में भी माना गया है कि कैंसर की रोकधाम में हल्दी का प्रयोग किया जा सकता है । शोध के दौरान पाया गया कि कुछ कैंसर ग्रस्त मरीजों को हल्दी देने से उनके ट्यूमर का आकार छोटा हो गया था। इतना ही नहीं कैंसर को खत्म करने में सक्षम इम्यून सिस्टम में मौजूद केमिकल भी एक्टिव हो जाते हैं। एक चाइनीज अध्ययन के अनुसार, करक्यूमिन ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करने में भी कारगर है । इसलिए, कैंसर की रोकथाम के लिए हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।
वजन नियंत्रण व मेटाबॉलिज्म-
यह तो आप सभी जानते हैं कि मोटापा कई बीमारियों की जड़ है। इसके कारण न सिर्फ आपकी हड्डियां कमजोर होती हैं, बल्कि शरीर में कई जगह सूजन भी आ जाती है। इससे डायबिटीज व ह्रदय रोग जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं, हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी व अन्य गुण होते हैं, जो इन समस्याओं से आपको राहत दिला सकते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल व उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कर सकती है। इन दो परिस्थितियों में भी वजन बढ़ने लगता है। हल्दी के गुण में वजन को नियंत्रित करना भी है।
जब आपका वजन बढ़ता है, तो फैट टिशू फैल जाते हैं और नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण होता है। ऐसे में करक्यूमिन इन नई रक्त वाहिकाओं को बनने से रोकता है, जिससे वजन कम हो सकता है। फिलहाल, यह शोध अभी तक सिर्फ चूहों पर किया गया है। यह मनुष्यों के लिए कितना कारगर है, उस पर रिसर्च किया जाना बाकी है।
एक कोरियन स्टडी के अनुसार, हल्दी मेटाबॉलिज्म प्रणाली को बेहतर करती है और नए फैट को बनने से रोकती है। इसके अलावा, हल्दी कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी नियंत्रित करती है, जिससे वजन का बढ़ना रुक सकता है। प्रोटीन से भी शरीर का वजन बढ़ता है, ऐसे में हल्दी अधिक प्रोटीन के निर्माण में बाधा पहुंचाती है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि हल्दी वजन कम करने और मोटापे के कारण होने वाली बीमारियों से बचाने में हमारी मदद करती है । यहां स्पष्ट कर दें कि हल्दी फैट सेल्स को तो कम करती है, लेकिन भूख को किसी तरह से प्रभावित नहीं करती है। इसलिए, हल्दी का प्रयोग पूरी तरह से सुरक्षित है
हल्दी शरीर के तापमान को भी नियंत्रित रखती है, जिससे मेटाबॉलिज्म में सुधार हो सकता है। मोटापे के लिए कुछ हद तक लिपिड मेटाबॉलिज्म भी जिम्मेदार होता है, जिसे हल्दी का सेवन कर संतुलित किया जा सकता है
प्राकृतिक दर्द निवारक-
भारत में सदियों से हल्दी को प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। चोट लगने पर हल्दी को लेप के रूप में लगाया जाता है। वहीं, दूध में हल्दी मिक्स करके पीने से न सिर्फ दर्द कम होता है, बल्कि यह एंटीसेप्टिक का काम भी करता है। हल्दी किसी भी दर्द निवारक दवा से ज्यादा कारगर है। इसके अलावा, हल्दी में पाए जाने वाले यौगिक करक्यूमिन से तैयार किए गए उत्पाद हड्डियों व मांसपेशियों में होने वाले दर्द से राहत दिला सकते हैं। साथ ही हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो किसी भी तरह के दर्द व सूजन से राहत दिला सकते हैं। यही कारण है कि गठिया रोग से पीड़ित मरीजों को हल्दी का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है । इस प्रकार प्राकृतिक दर्द निवारक दवा के रूप में हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।
मासिक धर्म में दर्द से राहत-
कई महिलाओं को मासिक धर्म के समय अधिक दर्द व पेट में ऐंठन का सामना करना पड़ता है। इससे बचने के लिए आप हल्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं। ईरान में हुए एक शोध के अनुसार, करक्यूमिन में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होता है, जो मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकता है। भारत व चीन में प्राचीन काल से इसका उपयोग मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए किया जा रहा है । इस दौरान हल्दी वाला दूध या फिर हल्दी और अदरक की चाय पीने से फायदा हो सकता है। हल्दी खाने के फायदे में मासिक धर्म में होने वाले दर्द से राहत पाना भी है।
एंटीइंफ्लेमेटरी-
जैसा कि आप जान ही चुके हैं कि हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन प्रमुख यौगिक है। यह एंटीइंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है। यह शरीर में आई किसी भी तरह की सूजन को कम कर सकता है। अर्थराइटिस फाउंडेशन के अनुसार, गठिया के इलाज में करक्यूमिन का प्रयोग किया जा सकता है। यह प्रतिरोधक प्रणाली को बेहतर करता है, जिससे जड़ों में आई सूजन कम हो सकती है । यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हल्दी प्राकृतिक रूप से सूजन का मुकाबला करती है।
आर्थरायटीज़ मे लाभकारी -
जैसा कि आप जान ही चुके हैं कि हल्दी किसी भी तरह की सूजन को कम कर सकती है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। इसके प्रयोग से अर्थराइटिस के कारण जोड़ों में आई सूजन व दर्द से राहत मिलती है। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को नष्ट कर देते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं । इसलिए, हल्दी के उपयोग में अर्थराइटिस को ठीक करना भी शामिल है।
खांसी-
हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीबैक्टीरियल व एंटीवायरल गुण होते हैं, जो इसे खास बनाते हैं। आयुर्वेद में भी इसे गुणकारी औषधि माना गया है। यह बैक्टीरिया और वायरल के कारण होने वाली बीमारियों पर प्रभावी तरीके से काम करती है। हल्दी के एंटीइंफ्लेमेटरी गुण न सिर्फ चेस्ट कंजेशन से बचाते हैं, बल्कि पुरानी से पुरानी खांसी को भी ठीक कर सकते हैं। आप खांसी होने पर हल्दी वाले दूध का सेवन कर सकते हैं । इस प्रकार कहा जा सकता है कि हल्दी के उपयोग में खांसी को ठीक करना भी शामिल है।
 प्राकृतिक एंटीसेप्टिक-
हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो ई. कोली, स्टैफीलोकोकक्स ऑरियस और साल्मोनेला टाइफी जैसे कई तरह के बैक्टीरिया से बचाते हैं । एक अन्य अध्ययन में साबित किया गया है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिनोइड्स आठ तरह के बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ सकता है। इतना ही नहीं, यह कई तरह के फंगस और वायरस से भी बचाता है । इसके अलावा, हल्दी दांत दर्द में भी इलाज कर सकती है
मस्तिष्क का स्वास्थ्य-
आप यह जानकर हैरानी होगी कि हल्दी मस्तिष्क के लिए भी फायदेमंद है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन मस्तिष्क में जरूरी सेल्स के निर्माण में मदद करता है। हल्दी में कुछ अन्य बायोएक्टिव यौगिक भी होते हैं, जो मस्तिष्क में मौजूद न्यूरल स्टीम सेल का करीब 80 प्रतिशत तक विकास कर सकते हैं। हल्दी में मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मस्तिष्क को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
हल्दी में करक्यूमिन के अलावा टरमरोन नामक जरूरी घटक भी होता है। यह मस्तिष्क में कोशिकाओं को नुकसान होने से बचाता है और उनकी मरम्मत भी करता है। साथ ही अल्जाइमर में याददाश्त को कमजोर होने से बचाता है। इस लिहाज से यह अल्जाइमर जैसी बीमारी में कारगर घरेलू उपचार है।
इतना ही नहीं हल्दी के सेवन से मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। इसके अलावा, अल्जाइमर के बढ़ने की गति धीमी हो जाती है और बाद में यह रोग धीरे-धीरे कम होने लगता है
डाइजेशन-
पेट में गैस कभी भी और किसी को भी हो सकती है। कई बार यह गैस गंभीर रूप ले लेती है, जिस कारण गेस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) का सामना करना पड़ सकता है। इसका इलाज एंटीइंफ्लेमेरी व एंटीऑक्सीडेंट के जरिए किया जा सकता है और हल्दी में ये दोनों ही गुण पाए जाते हैं। हल्दी भोजन नलिका में एसिड के कारण होने वाली संवदेनशीलता को भी कम कर सकती है।
कई प्रीक्लिनिकल ट्रायल में यह साबित हो चुका है कि हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को नुकसान होने से बचाते हैं। इसके अलावा, हल्दी बदहजमी के लक्षणों को भी ठीक कर सकती है। साथ ही अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित मरीजों की स्थिति में सुधार हो सकता है । हल्दी के लाभ में बेहतर डाइजेशन भी शामिल है।
 एंटीऑक्सीडेंट-
हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाया जाता है, जो शरीर से फ्री रेडिकल्स को साफ करने, पेरोक्सीडेशन को रोकने और आयरन के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करता है । हल्दी पाउडर के साथ-साथ इसके तेल में भी एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं
वहीं, चूहों पर की गई एक स्टडी के अनुसार, हल्दी डायबिटीज के कारण होने वाले ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को रोकने में सक्षम है । एक अन्य अध्ययन में दावा किया गया है कि करक्यूमिन में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट गुण मनुष्यों की स्मरण शक्ति को बढ़ा सकता है
ह्रदय रोग में लाभदायक
हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण ह्रदय को विभिन्न रोगों से बचाए रखते हैं, खासकर जो डायबिटीज से ग्रस्त हैं। हल्दी का मुख्य यौगिक करक्यूमिन खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है। इससे ह्रदय को स्वथ्य बनाए रखने में मदद मिलती है
मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी ने भी अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि करक्यूमिन धमनियों में रक्त के थक्के बनने नहीं देता, जिससे खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। इससे ह्रदय अच्छी तरह काम कर पाता है । यूनिवर्सिटी ऑफ इंडोनेशिया ने भी अपनी स्टडी में करक्यूमिन के फायदे को वर्णित किया है। उन्होंने पाया कि एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम से पीड़ित मरीज को करक्यूमिन देने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगा । इसलिए, कहा जा सकता है कि हल्दी के गुण में ह्रदय को स्वस्थ रखना भी शामिल है।
 सोरायसिस-
त्वचा संबंधी विकारों का उपचार करने में हल्दी कारगर घरेलू उपचार है। इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीसेप्टिक व एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सोरायसिस जैसी समस्या को भी ठीक कर सकते हैं। सोरायसिस में त्वचा पर पपड़ी जमने लगती है। इसके अलावा, हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं, जिस कारण यह सोरायसिस के कारण त्वचा पर हुए जख्मों को जल्द भर सकती है। साथ ही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है
कील-मुंहासों के लिए-
हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या को ठीक कर सकते हैं। यहां तक कि कील-मुंहासों का इलाज भी हल्दी से किया जा सकता है। यही कारण है कि भारत में सदियों से शादी से पहले दूल्हा और दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है। यह दाग-धब्बों को हल्का कर त्वचा को जवां और निखरा हुआ बनाती है। हल्दी कील-मुंहासों के कारण चेहरे पर आई सूजन व लाल निशानों को कम कर सकती है । इस प्रकार कील-मुंहासों के लिए हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।
सामग्री :
एक से दो चम्मच हल्दी पाउडर
आधा नींबू
बनाने की विधि :
नींबू के रस में हल्दी पाउडर को मिक्स करके अच्छी तरह पेस्ट बना लें।
फिर इसे चेहरे पर लगाकर करीब 30 मिनट के लिए सूखने दें।
जब यह सूख जाए, तो पानी से इसे धो लें।
कब-कब लगाएं :
आप इसे हर दूसरे दिन लगा सकते हैं।
प्रक्रिया नंबर-1
सामग्री :
एक चम्मच हल्दी पाउडर
चार कप पानी
शहद/नींबू (स्वादानुसार)
बनाने की विधि :
हल्दी पाउडर को पानी में मिक्स करके करीब 10 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें।
जब पानी सामान्य हो जाए, तो उसमें जरूरत के अनुसार शहद या नींबू डालकर चाय की तरह पिएं।
कब-कब करें :
आप ऐसा रोज कर सकते हैं।
प्रक्रिया नंबर-2
सामग्री :
तीन-चार चम्मच हल्दी पाउडर
हल्दी से दुगना पानी
बनाने की विधि :
हल्दी पाउडर व पानी को एकसाथ फ्राई पैन में डालकर धीमी आंच पर तब तक उबालें, जब तक कि गाढ़ा पेस्ट न बन जाए।
फिर जब पेस्ट ठंडा हो जाए, तो उसे स्टोर करके रख लें और जरूरत पड़ने पर लगाएं।
कब-कब लगाएं :
आप यह पेस्ट रोजाना प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं।
पिगमेंटेशन-
त्वचा में मेलानिन की मात्रा बढ़ने से डार्क स्पॉट व जगह-जगह पैच नजर आने लगते हैं। चिकित्सीय भाषा में इसे पिगमेंटेशन कहा जाता है। हल्दी में पाया जाने वाले करक्यूमिन इन डार्क स्पॉट को हटाकर त्वचा में निखार ला सकता है। वहीं, हल्दी को शहद के साथ मिलाकर प्रयोग करने से त्वचा में मॉइस्चराइजर बना रहता है।
सामग्री :
एक चम्मच हल्दी पाउडर
एक चम्मच शहद
बनाने की विधि :
इन दोनों सामग्रियों को आपस में मिक्स करके पेस्ट तैयार कर लें।
अब इसे प्रभावित जगह पर अच्छी तरह से लगाकर करीब 20 मिनट के लिए छोड़ दें।
जब पेस्ट सूख जाए, तो इसे हल्के गुनगुने पानी से धो लें और बाद में मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं।
कब-कब लगाएं :
इस पेस्ट को प्रतिदिन लगाया जा सकता है।
झुर्रियां-
हल्दी में पाए जाने वाले करक्यूमिन में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो शरीर से फ्री रेडिकल्स को खत्म करने का काम करते हैं। कुछ हद तक ये फ्री रेडिकल्स चेहर पर झुर्रियों का कारण बनते हैं । अगर आप हल्दी को योगर्ट के साथ इस्तेमाल करते हैं, तो झुर्रियों से आपको जल्द फायदा हो सकता है। झुर्रियों के लिए हल्दी का प्रयोग कैसे करना है, हम यहां उसकी विधि बता रहे हैं :
सामग्री :
¼ चम्मच हल्दी पाउडर
एक चम्मच योगर्ट
बनाने की विधि :
हल्दी और योगर्ट को एक बाउल में डालकर मिक्स कर लें।
फिर इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर करीब 20 मिनट के लिए सूखने दें।
इसके बाद पानी से चेहरे को धो लें।
कब-कब लगाएं :
करीब एक महीन तक हफ्ते में दो से तीन बार इस पेस्ट को लगाएं।
स्ट्रेच मार्क्स-
हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीऑक्सीडेंट के साथ-साथ त्वचा को साफ कर उसकी रंगत निखारने के गुण भी होते हैं । इसे नियमित रूप से उपयोग करने से प्रेग्नेंसी व प्रेग्नेंसी के बाद नजर आने वाले स्ट्रेच मार्क्स धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। कुछ हफ्तों तक इसे लगातार लगाने से स्ट्रेच मार्क्स खत्म भी हो सकते हैं।
सामग्री :
एक चम्मच हल्दी पाउडर
एक चम्मच योगर्ट
बनाने की विधि :
हल्दी को योगर्ट में मिक्स करके गाढ़ा पेस्ट बना लें।
फिर इसे स्ट्रेच मार्क्स वाली जगह पर लगाएं और 10-15 मिनट के लिए सूखने दें।
सूखने के बाद पानी से साफ कर लें और मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं।
कब-कब लगाएं :
अगर आप इसे हर दूसरे दिन लगाते हैं, तो जल्द अच्छे परिणाम नजर आएंगे।
फटी एड़ियों के लिए
हल्दी में एंटीबैक्टीरियल व एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जिस कारण ये फंगल इंफेक्शन पर प्रभावी तरीके से काम कर सकती है। इसलिए, आप फटी एड़ियों की समस्या के लिए हल्दी का प्रयोग कर सकते हैं।
सामग्री :
तीन चम्मच हल्दी पाउडर
नारियल तेल की कुछ बूंदें
बनाने की विधि :
हल्दी पाउडर और नारियल तेल को मिक्स करके पेस्ट बना लें।
अब इसे फटी एड़ियों पर लगाकर करीब 30 मिनट के लिए छोड़ दें।
कब-कब लगाएं :
जब तक एड़ियां ठीक न हो जाएं, आप इसे रोज लगा सकते हैं।
 एक्सफोलिएटर
हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी के साथ-साथ एक्सफोलिएट गुण भी होता है। चेहरे को एक्सफोलिएट करने के लिए घर में ही हल्दी का फेस पैक बनाया जा सकता है।
सामग्री :
दो चम्मच हल्दी पाउडर
चार चम्मच चने का आटा
चार-पांच चम्मच दूध/पानी
बनाने की विधि :
सबसे पहले तो चेहरे को पानी से अच्छी धोकर सुखा लें।
एक बाउल में सभी सामग्रियों को डालकर मिक्स कर लें, ताकि एक पेस्ट बन जाएं।
अब इस स्क्रब को चेहरे पर लगाएं और हल्के-हल्के हाथों से चेहरे की मालिश करें।
इसके बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें और बाद में मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं।
कब-कब लगाएं :
आप हफ्ते में एक या दो बार प्रयोग कर सकते हैं।
यहां हम विभिन्न तरीके बता रहे हैं, जिनके जरिए आप प्रतिदिन हल्दी का सेवन कर सकते हैं :
अगर आप शाम को स्नैक्स के तौर पर उबली हुई सब्जियां खाने के शौकिन हैं, तो उस पर चुटीक भर हल्दी डाल सकते हैं।
आप ग्रीन सलाद पर भी थोड़ी सी हल्दी डाल सकते हैं। इससे सलाद में पौष्टिक तत्व बढ़ सकते हैं।
अगर आप सूप पीते हैं, तो उसमें भी थोड़ी हल्दी मिक्स की जा सकती है।
स्मूदी में भी हल्दी को घोलकर सेवन किया जा सकता है।
हल्दी की चाय भी बना सकते हैं। इसमें स्वाद के लिए आप थोड़ा-सा शहद मिक्स कर सकते हैं।
आप खाना बनाते समय सब्जी या दाल में भी थोड़ी हल्दी का प्रयोग कर सकते हैं। इससे न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ता है, बल्कि पोषक तत्वों में भी इजाफा होता है।
आजकल विभिन्न हेयर व स्किन केयर प्रोडक्ट्स में भी हल्दी का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही टूथपेस्ट में हल्दी इस्तेमाल की जा रही है।

अखरोट खाने के स्वास्थ्य लाभ व नुकसान


अखरोट के फायदे जानने से पहले आपको बता दे की अखरोट खाने में दुसरे कड़वे फलो की तुलने में अमृत के समान होता है अगर बात करे करेले की जो स्वास्थ लाभो से तो भरपूर होता है पर खाने में एकदम कड़वा होता है इसके विपरीत अखरोट अच्छा लगने के साथ साथ अनेक औषधीय गुणों से भरपूर है। अखरोट का सेवन छोटे से लेकर बड़े हर वर्ग के लोगो के लिए फायदेमंद होता है। अखरोट तो सभी खाते है, लेकिन बहुत कम लोग है जिनको अखरोट के चमत्कारी गुणों के बारे में पता है। आज हम आपको अखरोट खाने के फायदे और नुकसान बताएँगे जिन्हें जानने के बाद आप अपनी सेहत को और अच्छा बनाकर अनेक बीमारियों से छुटकारा पा सकते है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि ड्राई फ्रूट्स सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। स्वस्थ आहार के साथ-साथ अगर आप अपनी दिनचर्या में ड्राईफ्रूट्स शामिल करते हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए अच्छा है। बादाम, किशमिश, खजूर व अखरोट के साथ-साथ कई ऐसे ड्राई फूट्स हैं, जो आपकी सेहत बनाए रखने में मदद करते हैं। फिलहाल हम बात करते हैं सिर्फ अखरोट की, जो कई गुणों का खजाना है।
अखरोट को अंग्रेजी में वॉलनट, तेलुगू में अकरूट काया, मलयालम में अक्रोथंदी, कन्नड़ में अक्रोटा, तमिल में अकरोट्टू, मराठी में अकरोड़ और गुजराती में अक्रोट कहा जाता है। विभिन्न भाषाओं में अखरोट के जितने नाम हैं, उसके फायदे भी उतने ही हैं। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम अखरोट खाने के फायदे बताएंगे
अखरोट के फायदे
अखरोट न सिर्फ सेहत, बल्कि त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। नीचे हम आपको पहले सेहत के लिए अखरोट के फायदे बताएंगे, उसके बाद बताएंगे कि यह त्वचा के लिए किस प्रकार लाभकारी है।
जानिए, सेहत को किस तरह से फायदा पहुंचाता है अखरोट।
दिल के स्वास्थ्य के लिए
अखरोट दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसमें प्रचुर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो आपकी हृदय प्रणाली के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा, यह भी पाया गया है कि जिन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, उनके लिए भी अखरोट लाभकारी होता है। आपको बता दें कि ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल के निर्माण में मदद करता है, जो हृदय के लिए फायदेमंद होता है
वजन कम करे
आपको जानकर हैरानी होगी कि अखरोट वजन कम करने में अहम भूमिका निभाता है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन व कैलोरी होती है, जो वजन को नियंत्रित रखने में मदद करती है। शोध में भी यह बात साबित हो चुकी है कि अखरोट का सेवन न सिर्फ वजन कम करता है, बल्कि उसे नियंत्रित भी रखता है
बालों पर अखरोट के फायदे
अखरोट में ओमेगा फैटी एसिड्स की मात्रा होती है जिनकी मदद से बालों के फॉलिकल्स (follicles) काफी मज़बूत होते हैं।
रोज़ाना अखरोट का सेवन करने से, अखरोट तेल से बालों से जुड़ी तमाम समस्याएं जैसे डैंड्रफ (dandruff), गंजापन और बालों का झड़ना आदि पूरी तरह दूर हो जाती हैं।
अखरोट तेल के निरंतर प्रयोग से बालों का रंग स्वास्थ्यकर एवं आकर्षक होता है। अखरोट में कलरिंग एजेंट (coloring agent) होते हैं जिनसे बालों में प्राकृतिक रंग आता है तथा वे स्वस्थ और अच्छे रूप से उगते हैं।गर्भावस्था
गर्भावस्था में अखरोट खाना भी फायदेमंद हो सकता है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड बच्चे के दिमागी विकास में मदद करता है। आप डॉक्टर की सलाह पर सही मात्रा में अखरोट का सेवन कर सकते हैं।
पुरुषों के लिए अखरोट लाभ
अखरोट खाने से स्पर्म काउंट बढ़ता हैं. जो व्यक्ति पिता बनने की चाहत रखते हैं उनके लिए अखरोट काफ़ी लाभकारी होता हैं।मर्दाना शक्ति वर्धक के रूप में इसका उपयोग करने के लिए आप इसे दूध में उबाल ले फिर मिश्री को पीसकर इसमें मिला ले फिर कुछ केसर की पतीयाँ इसमें डाले जब यह अच्छे से उबाल जाये तो इसे हल्का गुनगुना होने पर पी लें।
हड्डियों के लिए
अखरोट हड्डियों को मजबूत करने का भी काम करता है। इसमें अल्फा-लिनोलेनिक एसिड होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है। इसके अलावा, अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड सूजन को भी दूर करता है
खाली पेट अखरोट खाने के फायदे उम्र के प्रभाव का करें कम
शरीर में फ्री रेडिकल्स के कारण उम्र बढ़ने के कारण कई बदलाव नजर आने लगते है। जैसे त्वचा की झुर्रियां , पाचन की कमजोरी , आँखों की रौशनी में कमी , हड्डी की कमजोरी आदि। इसके अलावा भी कई प्रकार की शारीरिक समस्याएं हो सकती है। लीवर पर भी इसका प्रभाव पड़ता है जो शरीर की कई महत्त्वपूर्ण कार्य का केंद्र है। इन उम्र के प्रभावों को कम करने में एंटीऑक्सीडेंट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। Akhrot में पाये जाने वाले विशेष प्रकार के ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट उम्र के साथ होने वाले नुकसान से बचाने में सक्षम होते है। सुखद और लम्‍बे जीवन के लिए अखरोट का सेवन करना अच्‍छा रहता है।
मधुमेह मे उपयोगी 
अखरोट शरीर के ग्लूकोस के स्तर (glucose level) को नियंत्रित करने में आपकी सहायता करता है। अखरोट काफी मात्रा में पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (polyunsaturated fatty acid) से भरपूर होता है। अखरोट के गुण, ये फैटी एसिड्स गुर्दे में इन्सुलिन (insulin) का उत्पादन करने में मदद करते हैं। अखरोट खाने का तरीका, अखरोट मिनरल्स और फाइबर (minerals & fiber) से भी युक्त होता है जिससे कि ग्लूकोस के स्तर को तोड़ने में आपको सहायता मिलती है।
अखरोट के सेवन के लाभ उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करे
अखरोट में मौजूद एमिनो एसिड्स (amino acids) रक्तचाप को नियंत्रित करने में आपकी सहायता करते हैं। इसमें भी काले अखरोट रक्तचाप का स्तर कम करने में काफी अहम भूमिका निभाते हैं।
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए
अखरोट में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और आपको बीमारियों में बचाने में मदद करते हैं। इसलिए, खुद को बीमारियों से बचाने के लिए और तंदुरुस्त रहने के लिए अपनी रोजाना की डायट में अखरोट जरूर शामिल करें
मस्तिष्क के लिए
अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड न सिर्फ दिल, बल्कि मस्तिष्क के लिए भी फायदेमंद होता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें खाने से आपकी तंत्रिका प्रणाली ठीक तरह से काम करती है, जिससे स्मरणशक्ति में सुधार आता है
तनाव खत्म और बेहतर नींद
अखरोट का सेवन आपको तनाव से दूर कर बेहतर नींद भी प्रदान करता है। अखरोट में मेलाटोनिन होता है, जो बेहतर नींद लाने में मदद करता है
अखरोट का लाभ स्तन की समस्या को दूर करने में सहायक
अखरोट (Walnut) स्तन की विभिन्न गंभीर समस्याओं जैसे स्तन के कैंसर (breast cancer) के खतरे को कम करने में आपकी काफी सहायता करता है। ऐसा करने में एसेंशियल फैटी एसिड्स (essential fatty acids) आपकी काफी मदद करते हैं, जिनसे स्तन से जुड़ी समस्याओं की संभावनाओं को कम करने में मदद मिलती है।
अखरोट खाने के नुकसान-
आपको नट्स से एलर्जी है तो आपको अखरोट नही खाना चाहिए| क्योंकि ऐसा करने से आपको side effects जैसे स्किन rash, hives, गले मे जकड़न, साँस लेने मे दिक्कत आदि हो सकती है|
अखरोट मे कुछ तत्व ऐसे होते हैं, जो दवाइयों से प्रतिक्रिया कर सकते हैं या उन मेडिसिन्स का असर कम कर सकते हैं| इसलिए अगर आप दवाइयों का सेवन कर रहे है तो आपको डॉक्टर से पूछ कर ही इन्हें खाना चाहिए ताकि आपको कोई नुकसान ना हो|
काले अखरोट मे phylates पाए जाते हैं जो आयरन के अवशोषण को घटाकर आप मे आइरन डिफीशियेन्सी यानी खून की कमी (anemia) कर सकते हैं|
खाँसी मे अखरोट का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि ये शरीर मे पानी की कमी पैदा करते हैं (और पढ़े – खांसी का घरेलू उपचार, ड्राई कफ हो या वेट कफ)
अगर आप गर्भवती है तो इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से आपका वज़न बढ़ सकता है।

सोयाबीन खाने के फायदे और नुकसान

                          
प्रोटीन और कई पोषक तत्वों से भरपूर सोयाबीन और उसके व्यंजनों को आप मजेदार स्वाद के लिए जरूर खाते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सोयाबीन सेहत और सौंदर्य से जुड़े बेहतरीन फायदे भी दे सकता है।
सोयाबीन गुणों का खजाना हैं यह बात पूरी तरह सच हैं लेकिन हर एक चीज को उपयोग करने का एक तरीका होता हैं और अगर उसे सही तरीके से उपयोग ना किया जाये तो वह फायदे के साथ साथ नुकसान भी कर सकती हैं आईए यहाँ जाने सोयाबीन के फायदे उपयोग और नुकसान (Soybean benefits uses and side effects in Hindi) के बारे में। सोया प्रोटीन और आइसोप्लेवोंस से भरपूर डाइट होती हैं जिसके सेवन से हडडियों को कमजोर होने के खतरे से बचाया जा सकता है| सोयाबीन से बनी चीजो में आइसोप्लेबोंस नामक रसायन होता है जिससे महिलाओ को आस्टियोपोरेसिस के खतरे से बचाया जा सकता हैं|
यहाँ जाने सोयाबीन को उपयोग करने का सही तरीका क्या है।
सोयाबीन एक प्रकार का बीज होता हैं जिसको आप गैहू के साथ में पिसवाकर या भिगोकर खाने के काम में ले सकते है|
सोयाबीन को आप रात भिगोने के बाद उबाल के भी खाने में उपयोग ले सकते है।
गेहूँ के साथ भी पिसवाकर रोटियां बना के खा सकते हो सोयाबीन को पानी में भिगोकर पानी से निकालकर सुखाकर आटा पिसवाकर गेहूँ के आटे में भी मिलाकर तैयार कर खाया जा सकता है।
सोयाबीन खाने के फायदे
उच्च रक्तचाप में
सोयाबीन के फायदे अनेक है और अगर आप उच्च रक्तचाप ग्रसित हैं सोयाबीन उच्च रक्तचाप को कम करने में लाभदायक होता है इसके साथ साथ वो रक्तचाप को बढने भी नहीं देता है। रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए आप कम नमक के साथ भुना हुआ सोयाबीन खा सकते है नमक के साथ साथ आप काली र्मिच भी डाल के भी सेवन कर करते है सोयाबीन 5-6 प्रतिशत उच्च रक्तचाप को कम करता है। तले हुए सोयाबीन का सेवन यदि महिलाएं करे तो उनको उच्च रक्तचाप में निजात प्राप्त होता है।
एनीमिया में
एनीमिया यानी की शरीर में रक्त की कमी , और यह एक भयानक रोग है जिसका इलाज सोयाबीन में छुपा हुआ है | आप रोजाना सोयाबीन के तेल से बनी सब्जी का सेवन कीजिए या फिर इसके दूध का सेवन कीजिए जिससे आपके शरीर में रक्त की भरपूर मात्रा होगी और आपको एनीमिया से मुक्ति मिलेगी |गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भावस्था में भी महिलाओं को सोयाबीन सेवन करना चाहिए| सोयाबीन में आयरन की मात्रा पायी जाती हैं यह खून बढ़ाने में भी सहायक होता हैं! सोयाबीन से बनी चीजों में आईसोप्लेबोंस नामक रसायन होता है जिससे महिलाओं को अस्टियोपोरेसिस के खतरे से बचाया जा सकता हैं|
मासिक धर्म में
महिलाओं के मासिक धर्म बन्द होने से शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा कम होने लगती है जिससे घुटनों में दर्द पेट का भारी होना कमर में दर्द रहने लगता है| इस स्थिति में महिलाओं के लिए सोयाबीन बहुत ही लाभकारी होता है। कुछ समय तक सोयाबीन का उपयोग करने से महिलाओं की समस्याएं कम होती है। इसके साथ सोयाबीन का सेवन मासिक धर्म में होने वाले सूजन, कमर में दर्द पेट में दर्द जैसी समस्याओं में निजात दिलाता है।
हड्डियों की मजबूती
सोयाबीन हड्ड‍ियों के लिए लाभदायक है। यह हड्ड‍ियों को पोषण देता है जिससे वे कमजोर नहीं होती और हड्डी टूटने का खतरा भी कम होता है। इसका सेवन हड्ड‍ियों की सघनता को बढ़ाने में सहायक है।
सोयाबीन में मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम हमारे शरीर में जाकर हमारी हड्डियों की मजबूत बनाता है | अगर आपके शरीर में कैल्शियम को कमी है या फिर आपकी हड्डियाँ कमजोर है तो आप इसका सेवन रोजाना करे जिससे आराम मिलेगा |
सोयाबीन के तेल के फायदे
Soybean सोयाबीन के खाने फायदे से तो अब आप अच्छी तरह वाकिफ हो ही चुके होगें। सोयाबीन से बने तेल के बारे में ज्यादातर घरों में सब्जी पराठें आदि बनाने में सोयाबीन का तेल उपयोग में लिया जाता है यह हदृय रोगियों के साथ साथ यह सभी के लिए भी लाभदायक है। सोयाबीन का तेल सोयाबीन के बीजों से निकाला जाता है। सोयाबीन का तेल अन्य खाद्य तेलों की उपेक्षा हमारे शरीर के लिए ज्यादा लाभकारी होता है। चिकित्सक भी आजकल सोयाबीन से बने तेल का ही उपयोग करने की सलाह देत है। हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने में मानसिक तनाव को कम करने में लाभदायक है तथा नियमित सेवन से याददाश्त बढाने में मदद मिलती है।
मधुमेह के रोगियों को सोयाबीन के तेल से बनी चीजों का ही सेवन अत्यधिक लाभदायक है। सोयाबीन के तेल में विटामिन ई अधिक पाया जाता है। हम गर्मी में धूप में बाहर निकलते है धूप की तेज किरण हमारी त्वचा में जलन पैदा करती है सोयाबीन के तेल उपयोग करने से त्वचा की जलन से छूटकारा मिलता है।
गठिया रोग
Soybean सोयाबीन से बना दूध व रोटियां गठिया रोग में भी लाभदायक होता हैं|
मधुमेह रोग में
मुधमेह रोगियों को सोयाबीन का सेवन करने से मूत्र सम्बन्धित परेशानी से निजात मिलता है मधुमेह रोगी को सोयाबीन से बनी रोटी आदि का सेवन करना लाभदायक है।
अंकुरित सोयाबीन
सोयाबीन को अंकुरित करके खाना भी हमारी सेहत के लिए लाभदायक होता है! खून को बढ़ाने पेट की बीमारियों को ठीक करने हमारे शरीर में आयरन की मात्रा को बढ़ाने व वजन बढाने में भी अंकुरित सोयाबीन फायदेमंद होता है।
शारीरिक विकास में
अगर आपका शारीरिक विकास नहीं हो रहा है या नाखून बाल आदि नहीं बढ रहे है तो सोयाबीन का सेवन इनके विकास में भी सहायक है। सोयाबीन मिर्गी याददाश्त बढ़ाने व दिमागी कमजोरी को दूर करता है।
सोयाबीन खाने के नुकसान
हर चीज की अति बुरी होती है सोयाबीन का ज्यादा उपयोग भी हमारे शरीर के लिए लाभदायक होने के साथ साथ हानिकारक भी होता है। सोयाबीन खाने के लाभ के साथ साथ सोयाबीन खाने के कुछ नुकसान भी होते है आईए अब हम सोयाबीन के नुकसान के बारे में भी जाने|
दिल की बिमारी वाले लोगो को सोयाबीन का उपयोग कम करना चाहिए या सीमित मात्रा में करना चाहिए।
सोयाबीन में टांस फैट होता है जो की हाई कालेस्ट्राल और दिल की बीमारियों को बढ़ाता है।
सोयाबीन के अधिक सेवन से शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है।
यदि आप फैमली प्लानिंग करने के बारे में सोच रहे है या फैमली प्लानिंग करना चाहते है तो सोयाबीन के सेवन से बचे क्योंकि सोयाबीन स्पर्म की संख्या को कम करता है।
सोयाबीन  की ज्यादा मात्रा से सेक्स प्रॉब्लम हो जाती है और उनके हार्मोन, लिबिडो पावर, स्‍पर्म और प्रजनन पॉवर का स्तर प्रभावित हो सकता है।
गुणों का खजाना होने के साथ साथ हानिकारक भी होता है। सोयाबीन के अधिक सेवन वजन भी बढ़ता है व अधिक सेवन से किडनी की समस्या वाले लोगो को इसके सेवन से बचना चाहिए|

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उड़द की दाल के फायदे और नुकसान

                                                 

क्या आपको पता है उरद की दाल को दालों की महारानी क्यों कहा जाता है क्योंकि उड़द को एक अत्यंत पौष्टिक दाल के रूप में जाना जाता है छिलकों वाली उड़द की दाल में विटामिन, खनिज लवण तो खूब पाए जाते हैं और कोलेस्ट्रॉल नगण्य मात्रा में होता है|
उड़द दाल के फायदे और नुकसान जानना हमारे लिए बहुत ही आवश्‍यक है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि भारत जैसे देश में उड़द दाल का खाद्य आहार के रूप में बहुत अधिक उपयोग होता है। भारतीय व्‍यंजनों में उड़द दाल का अपना एक विशेष स्‍थान है। यह बहुत ही पौष्टिक भी होती है जो विभिन्‍न प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य गुणों से भरपूर है। उड़द दाल का उपयोग मधुमेह, हृदय स्‍वास्‍थ्‍य, दस्‍त, त्‍वचा समस्‍याओं आदि के उपचार में किया जाता है। आइए विस्‍तार जाने उड़द दाल के फायदे, नुकसान और उड़द के उपयोग के बारे में।
ब्‍लैक ग्राम (उड़द दाल) जिसे स्प्लिट ब्‍लैक ग्राम भी कहा जाता है। इसका वनस्‍पतिक नाम विग्ना मुन्गो है जो भारतीय व्‍यंजनों में प्रसिद्ध मसूरों में से एक है। इसमें बहुत से पोषक तत्‍व, विटामिन और खनिज पदार्थ अच्‍छी मात्रा में होते हैं जो हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। उड़द दाल को गर्भवती महिलाओं के लिए एक आदर्श खाद्य पदार्थ के रूप में जाना जाता है। औषधीय गुण होने के कारण उड़द दाल का उपयोग न केवल खाद्य आहार के रूप में बल्कि आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में भी उपयोग किया जाता है। आइए जाने उड़द दाल में मौजूद पोषक तत्‍व क्‍या हैं।
उड़द दाल के पोषक तत्‍व
विशेष रूप स्‍वादिष्टि पकवान बनाने के लिए उड़द दाल का उपयोग किया जाता है। उड़द दाल को इसकी पौष्टिकता के आधार पर साबूत, छिल्‍के वाली दाल और बिना छिल्‍के वाली दाल के रूप में उपयोग किया जाता है। विभिन्‍न प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाने वाले उड़द दाल में आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, मैग्‍नीशियम और पोटेशियम की अच्‍छी मात्रा होती है।
उड़द दाल के फायदे और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ
औषधीय और उपचारात्‍मक गुणों के कारण उड़द दाल को विभिन्‍न आयुर्वेदिक दवाओं के लिए बड़ी मात्रा में उपयोग किया जाता है। उड़द दाल का उपभोग कर आप अपने पाचन स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं क्‍योंकि यह फाइबर से भरी हुई होती है। साथ ही यह कब्‍ज और पेट की अन्‍य समस्‍याओं को भी दूर करने में मदद करती है। इसके अलावा यह हड्डियों, मधुमेह, मुंहासे जैसी समस्‍या का भी उपचार करने में सहायक होती है। आइए जाने उड़द दाल खाने के फायदे और उपयोग क्‍या हैं।
उरद की दाल के गुण त्‍वचा को स्‍वस्‍थ्‍य रखे

आप अपनी त्‍वचा को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए कई प्रकार की रासायनिक दवाओं और उत्‍पादों का उपयोग करते हैं। संभवत: इनके कुछ न कुछ दुष्‍प्रभाव भी आपको हो सकते हैं। लेकिन यदि आप उड़द की दाल का नियमित सेवन करते हैं तो यह आपके संपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद हो सकती है। उड़द दाल में खनिजों और विटामिन की अच्‍छी मात्रा होती है जो आपकी त्‍वचा की जलन और अन्‍य समस्‍याओं को दूर कर सकती है। इसके अलावा उड़द दाल का सेवन कर आप अपने चेहरे में डार्क स्‍पोट को भी दूर कर सकते हैं। उड़द दाल आपके शरीर और त्‍वचा में रक्‍त प्रवाह को बढ़ाता है जिससे पर्याप्‍त पोषण और ऊर्जा आपके चेहरे की त्‍वचा को चमकदार बनाते हैं।
काली उड़द दाल का उपयोग ऊर्जा शक्ति बढ़ाए
आप अपनी शारीरिक क्षमता को बढ़ाने के लिए काली उड़द दाल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। उड़द दाल में लौह सामग्री उच्‍च मात्रा में होती है जो आपके शरीर में समग्र ऊर्जा के स्‍तर को बढ़ाने में सहायक होती है। आयरन आपके शरीर में लाल रक्‍त कोशिकाओं के उत्‍पादन को बढ़ाता है जो कि आपके पूरे शरीर में ऑक्‍सीजन पहुंचाने में मदद करते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म के कारण खून की कमी हो सकती है। इसलिए गर्भवती और सामान्‍य महिलाओं को नियमित रूप से उड़द दाल का सेवन करना चाहिए। उड़द का नियमित सेवन ऊर्जा को बढ़ावा देता है।
सिरदर्द में फायदेमंद उड़द दाल 
अगर आपको काम के तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी के वजह से सिरदर्द की शिकायत रहती है तो उड़द का घरेलू उपाय बहुत लाभकारी सिद्ध होगा। 50 ग्राम उड़द को 100 मिली दूध में पकाकर उसमें घी डालकर खाने से वात के कारण जो सिर दर्द होता है उससे राहत मिलती है। उरद दाल के फायदे यौन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए
जिन लोगों को यौन स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित कामेच्‍छा में कमी होती है उनके लिए उड़द दाल बहुत ही फायदेमंद होती है। उड़द की दाल को प्राकृतिक कामोद्दीपक के रूप में माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि उड़द यौन क्षमता की कमी का इलाज कर सकती है। यौन कमजोरी को दूर करने के लिए पानी में उड़द दाल को 5-6 घंटों तक भिगो दें और फिर इस दाल को घी में फ्राई करें। नियमित रूप से घी में फ्राई उड़द का सेवन यौन जीवन को बढ़ाने में मदद करता है।
रूसी से छुटकारा दिलाये उड़द दाल
उड़द को जलाकर उसकी भस्म बनाकर, उसमें चतुर्थांश अर्कदूध तथा सरसों तेल मिलाकर लेप बना लें। इसको सिर पर लगाने से सिर के रोग, गंजापन, बालों की सफेदी आदि कम होती है।
उड़द दाल खाने के फायदे मूत्रवर्धक के लिए
ब्‍लैक ग्राम का एक अन्‍य लाभ यह है कि यह एक मूत्रवर्धक है। इसका मतलब यह है कि यह पेशाब को उत्‍तेजित कर आपके शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को बाहर करने में मदद करता है। नियमित रूप से उड़द का सेवन करने पर यह आपके गुर्दे में संग्रहित हानिकारक विषाक्‍त पदार्थ, यूरिक एसिड, अतिरिक्‍त पानी, अतिरिक्‍त वसा और आपके शरीर में मौजूद अतिरिक्‍त कैल्शियम जो पथरी का कारण बनती है। इन्‍हें बाहर करने में मदद करता है। इसलिए आपको अपने शरीर के अच्‍छे विकास और स्‍वस्‍थ्‍य बनाए रखने के लिए नियमित रूप से उड़द दाल का सेवन करना चाहिए।
नकसीर में फायदेमंद उड़द दाल

कुछ लोगों को अत्यधिक गर्मी या ठंड के कारण भी नाक से खून बहने की समस्या होती है। उड़द दाल से बना घरेलू उपाय नाक से खून बहना कम करने में काम आता है। उड़द के आटे का तालू पर लेप करने से नाक से खून (नकसीर) आना कम होता है।
उड़द की दाल के लड्डू के फायदे मधुमेह से बचाए
डायबिटीज एक घातक समस्‍या है जो कई बीमारियों का प्रमुख कारण मानी जाती है। मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण यह है कि आप अपने द्वारा लिये जाने वाले आहार पर ध्‍यान दें। मधुमेह की समस्‍या अक्‍सर अनियंत्रित खान-पान के कारण और अधिक बढ़ सकती है। उड़द दाल का सेवन आपको मधुमेह के प्रभाव से बचा सकता है क्‍योंकि इसमें फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है। फाइबर की अच्‍छी मात्रा आपके पाचन को बढ़ावा देती है और पाचन तंत्र द्वारा अवशोषित पोषक तत्‍वों की मात्रा को विनियमित करने में मदद करती है। यह आपके शरीर में शर्करा और ग्‍लूकोज के स्‍तर को भी नियंत्रित रखती है जिससे आपके मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है।
लकवे में फायदेमंद उड़द दाल
उड़द दाल का औषधीय गुण लकवे के परेशानी से राहत दिलाने में फायदेमंद होता है।
उड़द, बला, केवाँच, कत्तृण, रास्ना, अश्वगंधा तथा एरण्ड को समान मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बनाएं फिर 25-30 मिली काढ़े में हींग तथा सेंधानमक मिलाकर पिएं तथा भोजन करने के 12 घण्टे बाद जिस तरफ में दर्द है उस तरफ के नाक के छेद द्वारा 5-10 मिली की मात्रा में ग्रहण करने से लकवा, गर्दन की जकड़ाहट, कान का दर्द (कर्णशूल) एवं अर्दित रोग (Facial paralysis) में 1 सप्ताह में आराम मिलने लगता है।
समान मात्रा में उड़द, अतिविषा, कपिकच्छु, एरण्ड, रास्ना, सौंफ तथा सेंधानमक के पेस्ट में चार गुना तेल, सोलह गुना उड़द तथा बला का काढ़ा मिलाकर विधिवत् तेल पकाकर प्रयोग करने से पक्षाघात या लकवे में लाभ होता है।
उड़द के 20-25 मिली जूस में 500 मिग्रा सोंठ चूर्ण मिलाकर पिलाने से पक्षाघात या लकवे में लाभ होता है।
उड़द दाल के लाभकारी गुण दर्द को कम करे
आयुर्वेद उपचार विधि में लोगों के दर्द और सूजन को दूर करने के लिए उड़द का व्‍यापक उपयोग किया जाता है। उड़द में बड़ी मात्रा में विटामिन और खनिज पदार्थ मौजूद रहते हैं जो चयापचय को बढ़ावा देते हैं। इसका नियमित सेवन करने से यह ऑक्‍सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद करता है। आप उड़द से बने पेस्‍ट का इस्‍तेमाल सूजन से प्रभावित क्षेत्र में कर सकते हैं। यह सूजन और दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है।
जोड़ों के दर्द में फायदेमंद उड़द दाल 
अक्सर उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में दर्द होने की परेशानी शुरू हो जाती है लेकिन उड़द दाल का सेवन करने से इससे आराम मिलता है।
प्रतिदिन उड़द, कपिकच्छु, एरण्ड तथा बलामूल से बने 10-20 मिली काढ़ा में हींग तथा सेंधा नमक मिलाकर पीने से वात की बीमारी कम होती है।
सेंधानमक एवं उड़द के काढ़े को भोजन के बाद पीने से अंगों की जकड़ाहट तथा सिरदर्द कम होता है।
माष तेल, बृहन्माष तेल तथा महामाष तेल का 1-2 बूंद नस्य लेने से (नाक में डालने पर) या मालिश आदि विविध-प्रकार से बाहरी एवं भीतरी प्रयोग करने से वात संबंधी रोग से राहत मिलती है।
माषादि तेल का नस्य लेने से या स्नान करने से ग्रीवास्तम्भ, गर्दन की जकड़ाहट, हाथ का दर्द, दौरे पड़ना, हाथ पैरों का कंपन, सिर का हिलना, तथा अन्य वात की बीमारियों में फायदेमंद होता है।
उड़द के 20-25 मिली जूस में एरण्ड छाल को पकाकर, छानकर पिलाने से गठिया में लाभ होता है।
उरद की दाल के फायदे दिल के लिए

कार्डियोवैस्‍कुलर स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले सारे गुण उड़द दाल में मौजूद होते हैं। उड़द दाल में फाइबर, मैग्‍नीशियम और पोटेशियम की अच्छी मात्रा होती है जो हमारे हृदय स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। उड़द दाल हमारे शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल को नियंत्रित करने और एथेरोस्‍क्‍लेरोसिस को रोकने में मदद करते हैं जो हमारे हृदय और रक्‍तवाहिकाओं संबंधी स्‍वास्‍थ्‍य को बढावा देते हैं। उड़द में मौजूद पोटेशियम आपके शरीर की रक्‍त परिसंचरण को स्‍वस्‍थ्‍य रखता है और आपकी धमनीयों की आंतरिक परत को नुकसान से बचाता है। इस तरह यह दिल की समस्‍याओं को कम करने में सहायक होती है।
अल्सर में फायदेमंद उड़द दाल 
कभी-कभी अल्सर का घाव सूखने में बहुत देर लगता है या फिर सूखने पर पास ही दूसरा घाव निकल आता है, ऐसे में उड़द की दाल का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद होता है। उड़द को पीसकर घाव/ व्रण के ऊपर बांधने से पीब निकल जाता है तथा घाव ठीक हो जाता है।
अंकुरित उड़द के फायदे पाचन के लिए
खराब पाचन आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए गंभीर हो सकता है। पेट की खराबी कई बीमारियो को जन्‍म दे सकती है। उड़द दाल फाइबर में समृद्ध है जिसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही प्रकार के फाइबर मौजूद रहते हैं। इस कारण उड़द का नियमित सेवन हमारे पाचन को ठीक करने में मदद करता है। यदि आप दस्‍त, कब्‍ज, पेट की ऐंठन या सूजन से परेशान हैं तो इन समस्‍याओं से निजात पाने का सबसे अच्‍छा तरीका उड़द है। आप अपने आहार में उड़द को शामिल करें। इसके अलावा उड़द दाल वबासीर, पेट के दर्द को ठीक करने के साथ ही आपके यृकत स्‍वास्‍थ्‍य को भी बढ़ाता है।

स्पर्म काउन्ट बढ़ाने में मददगार उड़द दाल 

आजकल की जीवनशैली और आहार का बुरा असर सेक्स लाइफ पर पड़ रहा है जिसके कारण सेक्स संबंधी समस्याएं होने लगी हैं। स्पर्म काउन्ट बढ़ाने के लिए उड़द दाल का इस तरह से सेवन करने पर जल्दी लाभ मिलता है।
साठी चावल के भात में घी मिलाकर, उड़द जूस के साथ सेवन करने के बाद दूध पीने से वीर्य की वृद्धि तथा वीर्य संबंधी रोगों के उपचार में सहायता मिलती है।
उड़द की दाल को दूध में पकाकर, घी से छौंक कर सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है।
समान मात्रा में उड़द, विदारीकन्द तथा सफेद गुञ्जा के 5 ग्राम चूर्ण में मधु एवं घी मिलाकर सेवन करने के बाद दूध पीने से वीर्य की वृद्धि होती है।
उड़द एवं केवाँच फल की खीर बनाकर उसमें घी, मधु एवं शर्करा मिलाकर सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है।
उड़द की दाल की खीर खाने के फायदे ह‍ड्डीयों के मजबूत करे

जिन लोगों को हड्डीयों की समस्‍या या संभावना होती है उनके लिए उड़द दाल बहुत फायदेमंद आहार माना जाता है। उड़द दाल में मैग्‍नीशियम, आयरन, फॉस्‍फोरस, कैल्शियम और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज अच्‍छी मात्रा में होते हैं। ये खनिज पदार्थ हड्डीयों के घनत्‍व में सुधार कर उन्‍हें मजबूत बनाते हैं। अक्‍सर बुजुर्ग व्‍यक्तियों और 40 वर्ष से अधिक उम्र वाली महिलाएं कमजोर हड्डियों की समस्‍या से ग्रसित रहती हैं। ऐसी स्थिति में उड़द दाल का नियमित सेवन कर हड्डीयों से संबंधित समस्‍याओं से बचा जा सकता है। आप इसके लिए उड़द दाल से बनने बाले विभिन्‍न व्‍यंजनों का सेवन कर सकते हैं।
नुकसान-

पौष्टिक गुणों से भरपूर उड़द हमें कई प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाती है। लेकिन यदि अधिक मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो यह हमें नुकसान भी पहुंचा सकती है। अधिक मात्रा में इसका सेवन शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को बढ़ाता है। परिणामस्‍वरूप यह गुर्दे में कैल्फिकेशन पत्‍थरों को उत्‍तेजित कर सकता है। इसलिए उड़द दाल का अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन निम्‍न परेशानियों को बढ़ा सकता है।
गुर्दे के पत्‍थर से ग्रसित लोगों द्वारा उड़द की दाल का बहुत ही कम मात्रा में सेवन करना चाहिए।
गल्‍स्‍टोन या गठिया पीड़ित लोगों के लिए उड़द की अधिक मात्रा खतरा बढ़ा सकती है।
यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो उड़द की उचित खुराक के लिए अपने डॉक्‍टर से सलाह लेना फायदेमंद होगा।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


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कुर्सी के व्यायाम (चेयर एक्सरसाइज)



क्या आपको पता है कि कुर्सी न सिर्फ बैठने के लिए बल्कि आपको फिट रखने के काम में भी आ सकती है। चौंकिये मत जनाब! अभी तक आपने कुर्सी पर लगातार बैठने के नुकसानों के बारे में सुना होगा, लेकिन हम आपको कुर्सी की मदद से किये जाने वाले कुछ ऐसे व्यायाम बता रहे हैं, जिन्हे कर आप फिट एंड फाइन रह सकते हैं।
बैठकर करें चेस्ट प्रेस

कुर्सी पर चेस्ट प्रेस करने के लिए पहले उस पर सीधा बैठें। अब एक्सरसाइज बैंड को अपनी पीठ पर लपेटें और बैंड के दोनों कोनों को हाथों में पकड़ते हुए अपने हाथों को बगलों के ठीक नीचे रख लें। अब अपने हाथों को तब तक बाहर की ओर खींचे जब तक कि आपकी कोहनी बिल्कुल सीधी न हो जाए। अब धीरे से अपने हाथों को अंदर की ओर लाएं जब तक कि आपके हाथ कांखों के ठीक नीचे वापस पहले वाली मुद्रा में न आ जाएं।


चेयर लेग प्रेस

चेयर लेग प्रेस करने के लिए एक कुर्सी पर सीधा बैठ जाएं। अब अपने एक पैर पर व्यायाम बैंड को लपेटें और बैंड के दोनों कोनों को हाथों में पकड़ लें। अब अपने पैर को आराम से बाहर की ओर खींचे जब तक आपका घुटना पूरी तरह सीधा न हो जाए (ध्यान रहे कि अपने घुटनों के बीच की दूरी को बनाए रखें वरना चोट भी लग सकती है)। इसके बाद धीरे-धीरे अपने पैर को वापस पहली स्थिति में लाएं (इस दौरान बैंड़ पर अपनी पकड़ बनाए रखें)। ठीक यही अपने दूसरे पैर के साथ भी दोहराएं।

बाइसेप्स कर्ल

चेयर बाइसेप्स कर्ल करने के लिए एक कुर्सी पर सीधा बैठें और अपने पैरों को साधा कर सामने जमीन पर रखें (आपकी जांघों जमीन से समानांतर-रेखा पर हों)। अब एक्सरसाइज बैंड को अपने दोनों पैरों के नीचे रखें और बैंड के दोनों कोनों को अपने हाथों में पकड़ें। इसके बाद अपने हाथों को सीधा रखें और अपनी कोहनी को मोड़ते हुए अपने हाथों को कंधों तक लाएं। फिर अपनी कोहनी को सीधा रखते हुए धीरे से अपने हाथों को नीचे लाएं, जब तक आपके हाथ आपकी जांघों से न छू जाएं। इसके लिए आप बैंड की जगह हल्के डम्बल भी ले सकते हैं।

एक्टिव आर्म्स

कुर्सी पर एक्टिव आर्म्स एक्सरसाइज करने के लिए उस पर सीधे बैठ जाएं। अब बाजुओं को कोहनी से मोड़ते हुए छाती के पास लाएं और दोनों हथेलियों को मिला लें। इसके बाद अपनी एक हथेली से दूसरी पर दबाव डालते हुए कलाई को पीछे की तरफ मोड़ें। अब दूसरी तरफ से भी इस प्रक्रिया को दोहराएं।
क्रन्चस विध चेयर

कुर्सी पर क्रन्चस करने के लिए एक कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं। अब अपनी बाजुओं में बाजू डालकर आराम से बैठें और अपने कंधों को कुर्सी से सटाते हुए थोड़ा पीछे की ओर झुकें। कुछ सेकंड तक इस पोजीशन में रहें (ध्यान रहे कि इस दौरान आप लगातार गहरी सांस लेते रहें) और इसके बाद आराम से वापस पहले वाली मुद्रा में आ जाएं।
सीटड रो

कुर्सी पर सीटड़ रो करने के लिए उस पर सीधा बैठ जाएं। अब अपने घुटनों को मोड़े और अपने पैरों को जमीन से समानांतर सीधा कर लें। इसके बाद अपने पैरों मे एक्सरसाइज बैंड फंसाकर उन्हें सामने की ओर थोड़ा खींचे। अब अपने हाथों को पीछे की ओर बैन्ड़-आर्म रोइंग की स्थिति में खींचे (ऐसे में ध्यान रखें कि पीछे से कंधे एक दूसरे को छूने की कोशिश करते रहें)। अब धीरे से अपने हाथों को वापस पुरानी मुद्रा में ले आएं।
वेस्ट स्ट्रेच ऑन चेयर

इसे करने के लिए कुर्सी पर साधे बैठें और बाजुओं को सिर से ऊपर की ओर उठाते हुए अपने कूल्हे पर रखें। अब शरीर के ऊपरी भाग को आराम से एक तरफ घुमाएं और फिर इसकी विपरीत दिशा में घुमाएं। इसे दिन में कई बार करें। ध्यान रखें कि इसे करते समय कुर्सी पूरी तरह स्थिर हो, पहिए वाली कुर्सी पर ये एक्सरसाइज कतई न करें।
टेंशन रिलीज एक्सरसाइज


तनाव और थकान का असर अक्सर कंधों में दर्द के रूप में देखने को मिलता है। इससे बचने के लिए एक कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं, कंधों को कान की सीध में ऊपर की ओर उठाएं और हाथओं को बिल्कुल सीधा कर लें। थोड़ी देर तक ऐसे ही रहें और फिर सामान्य स्थिति में आ जाएं और फिर दोबारा यही प्रक्रिया दोहराएं।
बैक ट्विस्ट

बैक ट्विस्ट करने के लिए कुर्सी पर सीधे होकर बैठ जाएं। और फिर अपने बाएं बाजुओं को बाएं कूल्हे की तरफ रख लें, ध्यान रहे कि हथेली सीट पर नीचे की तरफ रहें। अब थोड़ा पीछे की ओर मुड़ें और थोड़ी देर तक इसी स्थिति में रहें। अब इसे क्रिया को दूसरी तरफ से भी दोहराएं।

जामुन फल खाने के स्वास्थ्य लाभ व हानियाँ



जामुन गर्मी के मौसम में पाया जाने वाला एक फल है। जामुन को अंग्रेजी में ब्लैक प्लम (Black plum) कहते हैं। जामुन का फल आमतौर पर काले या गहरे गुलाबी रंग का होता है और बहुत सारे औषधीय गुणों से युक्त होता है। जामुन के फायदे और स्वास्थ्य की दृष्टि से कई विकारों को दूर करने के लिए आयुर्वेद में भी जामुन के फल, छाल, पत्तियों एवं बीजों का उपयोग जड़ी-बूटी के रूप में किया जाता है। ज्यादातर घरों में अच्छी सेहत के लिए लोग जामुन का उपयोग स्नैक्स के रूप में भी करते हैं। जामुन की गुठली के फायदे भी अनेक है जामुन का उपयोग सिरका (vinegar) बनाने में भी किया जाता है जो कई विकारों को दूर करने में इस्तेमाल किया जाता है।
 जामुन के फल में ग्लूकोज, फ्रक्टोज, विटामिन C, A, राइबोफ्लेविन, निकोटिन एसिड, फोलिक एसिड, सोडियम और पोटैशियम के अलावा कैल्शियम, फॉस्फोरस और जिंक एवं आयरन मौजूद होता है। इसके साथ ही जामुन के छाल (bark)और शाखाओं में टैनिन, गैलिक एसिड, रेसिन, फाइटोस्टीरॉल मौजूद होता है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। जामुन के बीज में ग्लाइकोसाइड, जंबोलिन और गैलिक एसिड पाया जाता है जो बीमारियों के इलाज में सहायता करता है।
* जामुन में विटामिन C और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिसकी वजह से जामुन खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है। शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ने से रक्त शरीर के विभिन्न हिस्सों में अधिक ऑक्सीजन का फ्लो होता है जिसकी वजह से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है। जामुन में पाया जाने वाला आयरन रक्त को शुद्ध करने का काम करता है।
*विटामिन A आंखों के लिए लाभकारी होता है और यह जामुन में बहुतायत पाया जाता है। इसके अलावा जामुन में खनिज और विटामिन सी भी पाया जाता है जो त्वचा के लिए भी अच्छा माना जाता है।
*मसूढ़ों एवं दांतों के लिए भी जामुन बहुत फायदेमंद होता है। जामुन की पत्तियों में एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो मसूढ़ों से खून निकलने से बचाने में मदद करती हैं। जामुन की पत्तियों को सुखाकर और इसका पावडर तैयार करके दांतों को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह संक्रमण और मसूढ़ों से खून निकलने को रोकता है। जामुन के पेड़ की छाल कसैली होती है जो मुंह के अल्सर से सुरक्षा प्रदान करती है
 *जामुन में जीवाणुरोधी, संक्रमणरोधी और मलेरिया रोधी गुण पाया जाता है। जामुन के फल में मैलिक एसिड, गैलिक एसिड, ऑक्जैलिक एसिड और बेटुलिक एसिड पाया जाता है। जामुन का फल सामान्य संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसलिए संक्रमण से बचाव के लिए जामुन का सेवन किया जाता है।
*जामुन डायबिटीज के लक्षणों, अधिक पेशाब और भूख को कम करने में मदद करता है। यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स को कम करता है और ब्लड शुगर को सामान्य बनाए रखता है। जामुन की पत्तियां (leaves), छाल और बीज डायबिटीज के इलाज में उपयोग किए जाते हैं। यह इंसुलिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए जामुन के सीजन में इसके फल का सेवन डायबिटीज रोगियों को खूब करना चाहिए।
*जामुन के बीज में प्लैनॉयड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कि एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह शरीर से सिर्फ मुक्त कणों को ही बाहर नहीं निकालता है बल्कि एंटीऑक्सीडेंट एंजाइमों को अधिक प्रभावी बनाता है। यही कारण है कि जामुन शरीर की अशुद्धियों और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और इम्यून सिस्टम के कार्यों को बेहतर बनाता है।
*जामुन की छाल और बीज का पावडर पेट में गैस की समस्याओं को दूर करने में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा यह डायरिया, अपच और पेचिश के इलाज में भी बहुत प्रभावी रूप से काम करता है। इसलिए लोग पेट की इन समस्याओं के निजात पाने के लिए जामुन का उपयोग करते हैं।
*चेहरे के मुंहासे के इलाज में भी जामुन का प्रयोग किया जाता है। जामुन के बीज को पीसकर इसमें गाय को दूध मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें और रात में सोने से पहले इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने के थोड़ी देर बाद चेहरे को पानी से धोकर पोंछ ले। मुंहासे कुछ ही दिनों में दूर हो जाते हैं।
*गुर्दे की समस्या को दूर करने में भी जामुन का उपयोग किया जाता है। अगर आपके गुर्दे में किसी तरह की दिक्कत है तो जामुन के बीज का पावडर तैयार कर लें और इसे दही में मिलाकर खाने से किडनी के स्टोन सहित किडनी की अन्य दिक्कतें भी दूर हो जाती हैं।
*दाद  के इलाज में भी जामुन बहुत फायदेमंद होता है। जामुन के रस को थोड़े से पानी में मिलाकर त्वचा पर लोशन के रूप में लगाने से दाद की समस्या ठीक हो जाती है।
*शरीर की कमजोरी को दूर करने और खून की कमी  की समस्या में जामुन का रस बहुत फायदेमंद होता है। यह यादाश्त भी बढ़ाता और और सेक्सुअल कमजोरी की परेशानी को दूर करता है। एक चम्मच जामुन के रस  में एक चम्मच शहर और एक चम्मच आंवला का रस मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाने से यौनशक्ति बढ़ती है।
सभी चीजों को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह का प्रभाव पड़ता है। इसलिए अगर स्वास्थ्य की बात हो तो जामुन के नुकसान के बारे में भी जानना जरूरी हो जाता है।
*जामुन के बीज, छाल और पत्तियों से बने उत्पादों का सेवन अधिक मात्रा में करने से यह डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर लेवल को घटा सकता है जिससे उनकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
*सर्जरी से कुछ दिन पहले और कुछ दिन बाद तक जामुन का सेवन नहीं करना चाहिए अन्यथा शरीर ब्लड शुगर का स्तर घट सकता है।
*जामुन का सेवन खाली पेट करने से कब्ज की दिक्कत हो जाती है इसलिए यह जरूर ध्यान रखें।
लगातार शरीर में सूजन बना हो या लगातार उल्टी की समस्या हो जामुन नहीं खाना करना चाहिए। अत्यधिक जामुन खाने से शरीर में दर्द और बुखार भी हो जाता है।
दूध पीने के एक घंटे पहले या पीने के एक घंटे बाद जामुन खाने से यह नुकसान करता है।

खीरा एक फायदे अनेक

                                      

खीरा खाने के फायदे अनेक है ककड़ी खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है आपको बता दें कि खीरा जिसे आप अभी तक सब्जी समझ रहे थे वह एक फल है खीरे में पोषक तत्व की मात्रा अधिक होती है साथ ही इसमें एंटीआक्सीडेंट भी पाए जाते हैं जो आपको कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं खीरा में बहुत कम कैलोरी होती है लेकिन इस में पानी की मात्रा और सॉल्युबल फाइबर अधिक होते हैं जिससे यह वजन कम करने का कारगर तरीका मानी जाती है
ककड़ी कैलोरी में कम लेकिन कई महत्वपूर्ण विटामिन और खनिजों में उच्च हैं।
एक 11-औंस (300-ग्राम) बिना छिलके वाले, कच्चे खीरे में निम्नलिखित पोषक तत्व शामिल हैं
कैलोरी: 45
कुल वसा: 0 ग्राम
कार्ब्स: 11 ग्राम
प्रोटीन: 2 ग्राम
फाइबर: 2 ग्राम
विटामिन सी: RDI का 14%
विटामिन K: RDI का 62%
मैग्नीशियम: RDI का 10%
पोटेशियम: RDI का 13%
मैंगनीज: RDI का 12%
नोट – अनुशंसित दैनिक सेवन, आरडीए (RDI) के लिए एक शब्द।
हालांकि, सामान्य खाने में हम ककड़ी का लगभग एक तिहाई भाग खा पाते है, इसलिए खीरा का एक मानक भाग खाने से हमें लगभग एक तिहाई पोषक तत्व के ऊपर मिलेंगे।
इसके अतिरिक्त, खीरे में पानी की मात्रा अधिक होती है। वास्तव में, खीरे लगभग 96% पानी से बने होते हैं।
उनकी पोषक सामग्री को अधिकतम करने के लिए, खीरे को बिना पका हुआ खाया जाना चाहिए। उन्हें छीलने से फाइबर की मात्रा कम हो जाती है, साथ ही कुछ विटामिन और खनिज भी कम हो जाते है।
Cucumber खीरा में कैलोरी कम होती है लेकिन इस में महत्वपूर्ण विटामिन और खनिज उच्च मात्रा में पाए जाते हैं खीरे मैं पानी की मात्रा अधिक होती है खीरे में लगभग 96% पानी होता है अगर आप इसके पोषक तत्वों को पूरा लेना चाहते है तो खीरे को छीलकर नहीं खाएं खीरा को छीलने पर उसमें मौजूद फाइबर की मात्रा कम हो जाती है साथ ही कुछ विटामिन और खनिज भी कम हो जाते है आइये जानते है खीरा खाने के फायदे क्या है।
हमारे शरीर में हानिकारक मुक्त कणों के संचय से कई प्रकार की पुरानी बीमारी हो सकती है वास्तव में, मुक्त कणों की वजह से तनाव, कैंसर, हृदय रोग, फेफड़े के रोग और ऑटोइम्यून बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इन सब से बचने के लिए एंटीऑक्सीडेंट की आवश्यकता होती है फल और सब्जियां, खीरे सहित, विशेष रूप से लाभप्रद एंटीऑक्सीडेंट में समृद्ध होती हैं जो इन स्थितियों के जोखिम को कम कर सकती हैं।
खीरे में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जिसमें फ्लेवोनोइड और टैनिन होता है, जो हानिकारक मुक्त कणों के संचय को रोकते हैं और पुरानी बीमारी के जोखिम को कम कर सकते हैं। इसलिए आप खुद को इन बीमारियों से बचाने के लिए खीरे का सेवन जरूर करें।

खीरे सलाद और सैंडविच में ताजगी और स्वाद जोड़ सकते हैं और उच्च कैलोरी विकल्प के प्रतिस्थापन के रूप में भी इस्तेमाल किये जा सकता है। एक अध्ययन में पाया गया कि उच्च पानी और कम कैलोरी सामग्री वाले खाद्य पदार्थ खाने से शरीर के वजन को कम किया जा सकता है ।
पानी आपके शरीर के सभी कार्य के लिए महत्वपूर्ण है और शरीर के शुचारू रूप से कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। यह तापमान को नियंत्रित करने और अपशिष्ट उत्पादों और पोषक तत्वों के परिवहन जैसी प्रक्रियाओं में शामिल होता है। वास्तव में, उचित हाइड्रेशन शारीरिक प्रदर्शन से लेकर चयापचय तक सब को प्रभावित कर सकता है।
जब आप पीने के पानी या अन्य तरल पदार्थों द्वारा अपनी तरल जरूरतों को पूरा करते हैं, तो कुछ लोगों को भोजन से उनके कुल पानी के सेवन का 40% मिलता है। फलों और सब्जियां, विशेष रूप से, आपके आहार में पानी का एक अच्छा स्रोत हो सकती हैं खीरे लगभग 96% पानी से बने होते हैं, वे हाइड्रेशन को बढ़ावा देने में विशेष रूप से प्रभावी होते हैं और आपकी दैनिक पानी की ज़रूरतों को पूरा करने में आपकी सहायता कर सकते हैं।
                                                      


इसलिए यदि आप अपना वजन कम करना चाहते है तो खीरा खाकर वजन कम करना आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि खीरे कैलोरी में कम हैं, पानी में उच्च और कई व्यंजनों के लिए कम कैलोरी टॉपिंग के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। ये सभी वजन घटाने में सहायता कर सकते हैं
कई अध्ययनों से पता चला है कि खीरे रक्त शर्करा के स्तर को कम करने और मधुमेह की कुछ जटिलताओं को रोकने में मदद कर सकते हैं। अध्ययन में खीरे को रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावी ढंग से कम करने और नियंत्रित करने के लिए दिखाया गया था। मधुमेह के रोगियों को ककड़ी के छिलके को जरूर खाना चाहिए क्योंकि ककड़ी के छिलके में ज्यादातर मधुमेह से जुड़े रोगों को ठीक करने के गुण होते है और रक्त शर्करा में कमी भी आती है।

खीरा संभवतः आपको कुछ अलग-अलग तरीकों से अपना वजन कम करने में मदद कर सकता है। क्योंकि सबसे पहले, वे कैलोरी में कम हैं। एक कप (104 ग्राम) खीरे में सिर्फ 16 कैलोरी होती हैं, जबकि 300 ग्राम की ककड़ी में केवल 45 कैलोरी होती है। इसका मतलब यह है कि आप अतिरिक्त कैलोरी लिए बिना बहुत सारे खीरे खा सकते हैं क्योंकि अधिक कैलोरी ही वजन बढ़ने का कारण होती है।
इसके अलावा, एक अध्ययन में पाया गया कि ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और मधुमेह से संबंधित जटिलताओं को रोकने में खीरे का सेवन करना प्रभावी हो सकती है। ककड़ी से रक्त शर्करा को कम करने में मदद मिल सकती है और मधुमेह संबंधी जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है, हालांकि इसपर अभी अतिरिक्त शोध की आवश्यकता है।

खीरे में एक एंटी इंफ्लेमेटरी फ्लेवोनोल होता है जिसे फ़िसेटिन (fisetin) कहा जाता है जो मस्तिष्क स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अपनी याददाश्त में सुधार और आयु से संबंधित गिरावट से आपके तंत्रिका कोशिकाओं की सुरक्षा करता है इसके अलावा, फ़िसेटिन (fisetin) को स्मृति को कमजोर होने से रोकने और अल्जाइमर रोग को ठीक करने में सक्षम पाया गया है।
                                                                  


यदि आप पेट की समस्या से परेशान है और कब्ज जैसी समस्या का सामना कर रहे है तो खीरे को अपने भोजन में शामिल कर आप इन परेशानियों से बच सकते है। पानी की कमी (निर्जलीकरण) कब्ज का एक प्रमुख कारण होता है, क्योंकि यह आपके पेट में जल संतुलन को बदल सकता है और मल के मार्ग को मुश्किल बना सकता है। खीरे पानी में उच्च हैं और जल निकासी को बढ़ावा देते हैं। हाइड्रेटेड रहने से मल स्थिरता में सुधार हो सकता है, जिससे यह कब्ज को ठीक करने और पाचन को सही बनाए रखने में मदद मिलती है।
इसके अलावा, खीरे में फाइबर होता है , जिससे आंत्र में होने वाली परेशानियों को नियंत्रित करने में मदद करता है। विशेष रूप से, पेक्टिन, जो की एक घुलनशील फाइबर का प्रकार है खीरे में पाया जाता है, आंत्र की क्रियाशीलता को बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए खीरे में फाइबर और पानी की अच्छी मात्रा होती है, जिससे यह दोनों कब्ज को रोकने और पाचन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
में पोटेशियम होता हैं, जो निम्न रक्तचाप के स्तर से जुड़ा होता है। अपने शरीर के अंदर और बाहर दोनों जगह पोटेशियम का एक उचित संतुलन आपके शरीर को ठीक से काम करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए आप खीरे का सेवन कर अपने दिल को स्वस्थ्य रख सकते है
अगर आप सांसो की बदबू से परेशान है तो अपने मुंह में एक ककड़ी का टुकड़ा डालकर रखने से गंध उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया से मुक्ति पा सकते है आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार, खीरा खाने से आपके पेट की अधिक गर्मी को कम करने में मदद मिल सकती है, जिसे बुरी सांस का एक प्रमुख कारण कहा जाता है।
खीरा में लिग्नांस (पनीरसिनोल, लारिकिरसिनोल और सेकोइलिसिसरीसरिनॉल) नामक पॉलीफेनोल होते हैं, जो स्तन, गर्भाशय, डिम्बग्रंथि और प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा ककड़ी में ककुर्बितासिन्स (cucurbitacins) नामक फ़िओनोट्रियन्ट्स भी होते हैं, जिनमें कैंसर को दूर करने का गुण होता है।
 खीरे में बहुत सारे बी विटामिन होते हैं जिनमें विटामिन बी 1, विटामिन बी 5 और विटामिन बी 7 (बायोटिन) शामिल हैं। बी विटामिन चिंता की भावनाओं को कम करने और तनाव के कुछ हानिकारक प्रभावों को दूर करने के लिए जाने जाते हैं। इसलिए ककड़ी का सेवन कर आप तनाव से दूर रह सकते है।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


ठंडे पानी से नहाने के लाभ


गर्मी के मौसम में नहाने के लिए ठंडा पानी मिल जाये तो शायद ही कोई मना करे। ये तो हम सब जानते है कि गर्मियों में ठन्डे पानी से नहाना अच्छा लगता है लेकिन आज हम आपको बता रहे है गर्मियों में ठंडा पानी सेहत के लिए कितना लाभदायक होता है। आपको बता दे की अगर आप ठंडे पानी से स्नान करेंते है तो इससे आपकी सेहत को कई लाभ मिलेंगे। सुबह-सुबह ठंडे पानी में नहाने से शरीर तरोताज़ा तो हो ही जाता है इसके साथ ही हमे एनर्जी भी मिलती है।
ठंडा पानी सेहत के लिए कई मायनों में लाभदायक भी है। यह शरीर को कई ऐसे रोगों से बचाता है जिनके बारे में आप सोच भी नहीं सकते। शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ठंडे से पानी से नहाने वाले पुरुषों की प्रजनन क्षमता बहुत तेज होती है। वहीं दूसरी ओर गर्म पानी से स्नान करने से अंडकोष पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि संभवतः गर्म पानी से नहाना शुक्राणुओं की संख्या कम कर सकता है। यदि आप घर में नए बच्चे को लाने की तैयारी कर रहे हैं तो ठंडे पानी से ही नहाएं।
ठंडे पानी से नहाने के लाभ
ठंडा पानी कीटाणुओं को अधिक तेजी से मारता है। ठंडा पानी शरीर को साफ करने के साथ ही कई तरह के इंफेक्शन से भी बचाता है। डॉक्टर्स कहते हैं कि ठंडा पानी मांसपेशियों के लचीलेपन में सुधार करता है और दर्द से भी छुटकारा दिलाता है। आयुर्वेद के अनुसार, नहाने के लिए ठंडे पानी का इस्तेमाल करने से व्यक्ति दिनभर पर फ्रेश और एक्टिव रहता है। साथ ही इससे हॉर्मोन्स भी तेजी से चार्ज होते हैं।
हेयर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि गर्म पानी की बजाय ठंडे पानी से बाल धोने से बालों की उम्र कई गुना तक बढ़ती है। यही नहीं ठंडे पानी से सिर धोने पर बालों की ठीक प्रकार से सफई हो जाती है और वे आकर्षक लगते हैं।
ठंडे पानी से नहाने से रक्तसंचार तो अच्छा रहता ही है, साथ ही ठंडे पानी से आपकी इम्युनिटी अर्थात प्रतिरक्षा प्रणाली भी मजबूत होती है। इम्युनिटी के मज़बूत होने से शरीर में वाइट ब्लड सेल्स बढ़ती हैं जो कई प्रकार की बिमारियों से लड़ने में मदद करती हैं।
हमारे शरीर में दो तरह का फैट होता है, पहला वाइट फैट जो शरीर के लिए बुरा होता है और दूसरा होता है ब्राउन फैट जो शरीर के लिए अच्छा होता है। वाइट फैट वह फैट है जिसे हम अपने भोजन में खाते हैं, यह हमारे शरीर के कई हिस्सों में जमा हो जाता है। विशषज्ञों के मुताबिक जब हम बहुत ज्यादा ठंडे पानी से नहाते हैं तो हमारी कैलोरी बर्न होने लगती है और हम वजन कम कर पाते हैं।
स्किन एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ठंडे पानी से नहाने पर बालों के साथ-साथ त्वचा भी चमकदार बनती है। अगर आप मुहांसों से परेशान हैं तो ठंडे पानी से नहाएं। इससे अपकी त्वचा रूखी और बेजान होने से बचेगी। ठंडा पानी आपकी त्वचा को चमकदार बनता है।
सुबह को ठंडे पानी से नहाने से आलस तो दूर होता ही है, आप पूरे दिन तरो-ताजा भी महसूस करते हैं। एक शोध में ये बात सामने आई है कि ठंडे पानी से नहाने से मूड फ्रेश रहता है। दरअसल जब आप ठंडे पानी से नहाते हैं, तो हल्का सा शॉक जैसा लगा है जिससे आपकी सांसे तेज़ चलने लगती है और दिल की धड़कन भी थोड़ी बढ़ जाती हैं। इससे आपके शरीर कार रक्त प्रवाह बढ़ जाता है और आप तरोताज़ा महसूस करने लगते हैं।
  नियमित रूप से ठंडे पानी से नहाने से क्रोनिक दर्द भी कम होता है। नियमित रूप से ठंडे पानी से स्नान करने से शरीर की सूजन और दर्द भी धीर-धीरे जाते रहते हैं।
  ठंडे पानी में नहाने की एक खास बात यह है कि इससे आपको डिप्रेशन से राहत मिलती है। कहा जाता है कि व्यायाम के बाद ठंडे पानी के साथ नहाने से पूरा दिन ताज़गी महसूस होती है। गर्मी के मौसम में कोल्‍ड शॉवर का नाम सुनते ही सबके चेहरे पर सुकून आ जाता है। यदि आप गर्मियों में रात को सोने से पहले स्नान करते है तो यकीन मानिये आपको बहुत अच्छी नींद आने वाली है और आपकी दिनभर की थकान उड़नछू हो जायेगी।

फटी एड़ियाँ फिर से भरने के कुछ खास उपाय

                                         
जैसे-जैसे सर्दी का मौसम अपने शबाब पर पहुंचता है, पैरों की खूबसूरती को बनाए रखना मुश्किल होता जाता है। पैरों की चमड़ी का सख्त हो जाना और एड़ियों का फटना जैसी समस्याएं इस मौसम में आम तौर पर उभरकर सामने आती हैं। इससे बचने के लिए कुछ बातों का ख्याल रखना आवश्यक है।
क्या है एड़ियां फटने की मुख्य वजह -
एड़ियां फटने की मुख्य वजह शरीर में कैल्शियम और चिकनाई की कमी होती है। एड़ी व तलवों की त्वचा मोटी होती है, इसलिए शरीर के अंदर बनने वाला सीबम यानी कुदरती तेल पैर के तलवों की बाहरी सतह तक नहीं पहुंच पाता। फिर पौष्टिक तत्व व चिकनाई न मिल पानेकी वजह से ही एड़ियां खुरदरी-सी हो जाती हैं और इनमें दरार पड़ने लगती है।
एड़िया ज्यादा फटने से दर्द और जलन तो होती ही है, कभी-कभी खून भी निकल आता है।
अक्सर अनियमित खानपान, विटामिन ई की कमी, कैल्शियम व आयरन की पर्याप्त मात्रा न मिल पाने के कारण एड़ियां फट जाती हैं|

ठंड में फटी एड़ियों से छुटकारा पाने के नुस्खे-
* डेढ़ चम्मच वैसलीन में एक छोटा चम्मच बोरिक पावडर डालकर अच्छी तरह मिला लें और इसे फटी एड़ियों पर अच्छी तरह से लगा लें, कुछ ही दिनों में फटी एड़ियां फिर से भरने लगेंगी।
* अगर एड़ियां ज्यादा फटी हुई हों तो मैथिलेटिड स्पिरिट में रुई के फाहे को भिगोकर फटी एड़ियों पर रखें। ऐसा दिन में तीन-चार बार करें, इससे एड़ियां ठीक होने लगेंगी।
* गुनगुने पानी में थोड़ा शैंपू, एक चम्मच सोड़ा और कुछ बूंदें डेटॉल की डालकर मिला लें। इस पानी में पैरों को 10 मिनट तक भिगोकर रखें। त्वचा फूलने पर मैथिलेटिड स्पिरिट लगाकर एड़ियों को प्यूमिक स्टोन या झांवे से रगड़कर साफ कर लें। इससे एड़ियों की मृत त्वचा साफ हो जाएगी। फिर साफ तौलिए से पोंछकर गुनगुने जैतून या नारियल के तेल से मालिश करें।
*पेट्रोलियम जैली का प्रयोग इसका सबसे आसान तरीका है। इसके लिए डेढ़ चम्मच वैसलीन में एक छोटा चम्मच बोरिक पावडर डालकर अच्छी तरह मिला लें और इसे रात को सोते समय फटी एड़ियों पर अच्छी तरह से लगा लें, ताकि रातभर यह असर कर पाए। कुछ ही दिनों में फटी एड़ियां फिर से भरने लगेंगी।
* अमचूर का तेल, फटी एड़ियों के इलाज के लिए रामबाण औषधी है। यह गाढ़ा होता है जिसे पिघलाकर आप रात में एड़ियों पर लगाएं और सुबह धो लें। कुछ ही दिनों में एड़ियां बिल्कुल चिकनी हो जाएंगी।
*नारियल का तेल
रात को सोने से पहले एक बड़ा चम्मच नारियल तेल लेकर उसे फटी हुई एड़ियों पर लगाइए. चाहें तो इसे हल्का गर्म भी कर सकती है. इसकी मसाज से थकान भी कम होगी. उसके बाद जुराबें पहनकर सो जाएं. सुबह उठकर पैरों पानी से धो लें. करीब 10 दिन तक इस उपाय को लगातार करने से एड़ियां मुलायम हो जाएंगी.
*शहद
शहद एक बहुत अच्छा मॉइश्चराइजर है, जो पैरों को हाइड्रेट रखने के साथ ही उनका पोषण भी करता है. पानी में आधा कप शहद मिलाकर उसमें कुछ देर तक पैर को डुबोकर रखे रहें. लगभग 20 मिनट बाद पैरों को बाहर निकालकर मुलायम तौलिए से हल्के हाथों से पोछ लें. आपके पैर कोमल हो जाएंगे.
* ऑलिव ऑयल
ऑलिव ऑयल के इस्तेमाल से भी एड़ियां कोमल और मुलायम होती हैं. हथेली पर तेल की कुछ मात्रा लेकर हल्के हाथों से मसाज करें. इसके बाद पैरों को आधे घंटे के लिए वैसे ही छोड़ दें. इस प्रक्रिया को हफ्ते में एक बार जरूर करें.
*ग्लिसरीन और गुलाब जल
ज्यादा फटी एड़ियों के लिए यह बेहतरीन उपाय है. दोनों ही चीजें एड़ियों को नमी देकर कोमल बनाती हैं. तीन-चौथाई मात्रा में गुलाब जल और एक-चौथाई मात्रा में ग्लिसरीन लेकर मिश्रण बनाएं और कुछ देर तक एड़ियों पर लगा रहने दें और उसके बाद गुनगुने पानी से उसे साफ कर लें. कुछ दिनों तक ऐसा करने के बाद आपको फर्क दिखना शुरू हो जाएगा.


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नसों के ब्लाकेज का अनुपम उपचार





नसों की ब्लॉकेज का इलाज : नसों में दर्द बहुत परेशान करने वाली समस्या है। इसके चलते इंसान
चलने फिरने में भी तकलीफ महसूस करता है। इसके अलावा जब रक्त में अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा
बढ़ जाती है तो इससे नसों में खून के स्राव में रुकावट आने लगती है। जिससे हार्ट अटैक और लकवा
का खतरा भी बढ़ जाता है।
अगर आप को भी एसी परेशानी है तो डॉक्टरी जांच जरुर करवानी चाहिए लेकिन इसके साथ-साथ आप
एक घरेलू उपाय अपनाकर नसों की ब्लॉकेज से छु़टकारा पा सकते है।
सामग्री
1 ग्राम दाल चीनी
10 ग्राम काली मिर्च साबुत
10 ग्राम तेज पत्ता
10 ग्राम मगज
10 ग्राम मिश्री
10 ग्राम अखरोट
10 ग्राम अलसी
विधि-
1. सबसे पहले इन सबको मिक्सी में बारीक पीस लें।
2. फिर इसकी 10 पुडियां बना लें।
3. इसे हर रोज सुबह खाली पेट खाएं और ध्यान रहें इसे खाने के बाद 1 घंटे तक कुछ न खाएं।