आँख से ज्यादा पानी गिरने (आँसू) के घरेलू उपचार

                                                 


    आँखों में पानी आने का कारण आंसुओं का ज्यादा बनना, सूजन या सामान्य आंसुओं का पूरी तरह नहीं निकल पाना है। इसके इलाज के लिए कुछ घरेलू नुस्खे फायदेमंद है। आंखों की सूजन को कम करने के आसान घरेलू उपचार आँखों से पानी आना (अश्रुपात) वह स्थिति है जिसमें बिना किसी कारण के आँसू पैदा होते हैं और पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाते हैं।इसका समाधान घरेलू इलाज से हो सकता है
ठंडे या गरम कपड़े से दबाना आंसू नलिकाओं की रुकावट आँखों में पानी का प्रमुख कारण है। ठंडे या गरम कपड़े से दबाने से आँखों से यह परत हट जाती है, जिससे जहरीले पदार्थ भी बाहर निकाल जाते हैं और आँख की ललाई और जलन ठीक हो जाती है।

धनिया का इस्तेमाल –

 धनिया हमारे स्वस्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है अगर आपको आँख से जुडी कोई परेशानी हो तो ऐसे में धनिया और चीनी को मिलाकर पीस ले|और अब इसे पानी में मिलाकर उबाल ले|जब उबल जाये तो ठंडा करके इसे छान ले|अब इसे आप इस्तेमाल करे ऐसा कुछ दिन करने से आपको बहुत लाभ होगा|

इलाइची –

हम सभी के शरीर को स्वस्थ रखने में इलाइची बहुत मदद करती है अगर किसी को आँख से रिलेटेड कोई दिक्कत हो तो ऐसे में आप इलाइची को पीस ले|अब इसे आप गरम दूध में मिलाकर सेवन करे आप अगर रात में इसका सेवन करेगे तो फायदा अधिक होगा|

बादाम –

बादाम हमारे सेहत के लिए बहुत उपयोगी होता है|बादाम हमारी आँख के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है|रात को सोते समय आप बादाम को दूध के साथ मिलाकर रख दे|सुबह उठकर आप बादाम को खा ले और उस दूध में चन्दन मिलाकर अच्छे से आँखों और पलकों की धुलाई करे ऐसा करने से आँख की लालिमा ख़तम तो हो ही जाएगी साथ ही आँख से अगर पानी गिर रहा हो तो उससे भी राहत मिल जाती है|यदि कोई धूल मिट्टी चली गई हो यदि आपको लगे कि कोई बाहरी तत्व या धूल, मिट्टी आँखों में चली गई है तो आप गीले कपड़े से इसे साफ कर सकते हैं। आंसुओं को हाथों के बजाय गीले कपड़े से ही साफ करें क्यों कि हाथों में कई बैक्टीरिया होते हैं। 
नारियल का तेल हम सब जानते हैं कि नारियल का तेल एक अच्छा मोश्चुराइजर है। इसे आँखों के आस पास रगड़ने से आराम मिलेगा।

नमक और पानी का घोल 

आँखों में पानी होने पर जलन और खुजली चलती है। ऐसे में आप नमक और पानी का घोल घर पर बनाकर इलाज कर सकते हैं। नमक एक एंटी-बैक्टीरियल होने के कारण यह जहरीले बैक्टीरिया को आँखों से बाहर निकाल देता है। इसे 3 दिन तक दिन में कई बार लगाएँ।

टी बैग 

ठंडे या गरम कपड़े से दबाने की तरह ही टी बैग भी एक अच्छा घरेलू उपाय है। टी बैग को कुछ देर गर्म पानी में रखें। जब यह गर्म हो जाये तो इसे आँखों पर रखें। कैमोमाइल, पेपरमिंट और स्पेयरमिंट पानी भरी आँखों के इलाज के लिए कारगर हैं।

बेकिंग सोडा – 


बेकिंग सोडा हमारी आँखों के लिए बहुत लाभकारी होता है अगर किसी की आँखों में कोई भी परेशानी हो जैसे आँख में जलन और दर्द या लालिमा और फिर आँख से पानी आने जैसे परेशानी में आप बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कर सकते है इसका इस्तेमाल आपको बताये की आप गरम पानी में सोडे को मिला ले|जब पानी ठंडा हो जाये तो उसी से अपने आँख और पलकों की अच्छे से धुलाई करे ऐसा नियमित रूप से करने से आपको बहुत राहत मिलेगी और मै उम्मीद के साथ कह सकता हू की आपको बहुत फायदा होगा|

नसों को ब्लाकेज से बचाने वाले भोजन पदार्थ

                             

                     

    तेज रफ्तार में भागती जिंदगी ने हमारी जीवनशैली को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है। खान-पान की गलत आदतों के चलते आज हम कम उम्र में सेहत से जुड़ी कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रैशर, कोलेस्ट्रॉल, अस्थमा, हार्ट से जुड़ी समस्याएं आम हो गई है। इसी के साथ नसों की ब्लाकेज की समस्या भी काफी सुनने को मिल रही है। आकड़ों की मानें तो उत्तरी भारत में लगभग 40 प्रतिशत लोगों की धमनियां कमजोर है। 20 प्रतिशत महिलाओं को गर्भावस्था के बाद यह परेशानी होती है। इसकी पहचान सही समय पर नहीं हो पाती, जिसका असर वैरिकाज वेंस (varicose veins) के रूप में सामने आता है। पैरों में सूजन व नसों के गुच्छे बनने शुरू हो जाते हैं।
    दरअसल, नसों की कमजोरी और ब्लॉकेज होने का कारण हमारी डाइट में पोषक तत्वों की कमी है। संतुलित की बजाए बाहर का तला भूना व फास्ट फूड खाने से हमारे रक्त में अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती हैं जो नसों के ब्लड सर्कुलेशन में रूकावट डालना शुरू कर देते हैं। इससे शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है, जिससे नसों में खून का प्रवाह अच्छे से नहीं होता और थका जमना शुरू हो जाता है जो बाद में ब्लाकेज का रूप ले लेता है। हार्ट व शरीर के अन्य हिस्सों में ब्लॉकेज खोलने के लिए सर्जरी व दवाओं का सहारा लिया जाता है जो काफी महंगा इलाज है।
किन लोगों को होती है ब्लाकेज की परेशानी
वेन ब्लॉकेज की परेशानी तब होती है जब खून संचारित होकर दिल तक नहीं पहुंचता जो बाद में गांठों और गुच्छे के रूप में हमारे सामने आता है। यह परेशानी उन लोगों को होती हैं जो लगातार कई घटों रोजाना एक ही पोस्चर में बैठकर काम करते हैं। वैरिकॉज की परेशानी पैरों की धमनियों में अधिक होती हैं क्योंकि यहां खून के प्रवाह का भार अधिक होता है।
आहार जो करते हैं धमनियों की नैचुरल सफाई
    मेडिटेरेनियन डाइट प्लान जिसमें कम मात्रा में कोलेस्ट्रॉल हो लेकिन फाइबर की मात्रा भरपूर हो। शुगर व नमक का कम सेवन करें और मक्खन की जगह आलिव ऑयल वसा का इस्तेमाल करें। धमनियों के अनुकूल खाद्य पदार्थ व हर्ब जैसे चने, अनार, जई, एवाकाडो, लहसुन, केसर, हल्दी, कैलामस, हरी सब्जियों व फलों का सेवन करें। खाना खाने के बाद गुनगुना गर्म पानी का सेवन जरूर करें क्योंकि इसे नसों में ब्लाकेज का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। मैटाबॉलिज्म को बढ़ाने के लिए एरोबिक एक्सरसाइज का सहारा लें।

लहसुन


लहसुन कोलेस्ट्रॉल को घटाने में काफी लाभदायक है इसलिए अपने आहार में लहसुन को जरूर शामिल करें। बंद धमनियों की समस्या होने पर 3 लहसुन की कली को 1 कप दूध में उबाल कर पीएं।

एवोकाडो

एवोकाडो में मौजूद मिनरल्स, विटामिन A, E और C कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखते है। इससे रक्त कोशिकाओं में कोलेस्ट्रॉल जमा नहीं होता और आप ब्लाकेज की समस्या से बचे रहते है।

ओट्स

ओट्स का रोजाना सुबह नाश्ते में सेवन भी ब्लाकेज की समस्या को दूर करता है। इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है

पर्याप्त नींद

इसके अलावा भरपूर नींद लें क्योंकि नींद लेने से हार्मोंनल संतुलन नहीं बिगड़ता।

धूम्रपान को कहें ना 

धूम्रपान भी नसों की ब्लाकेज का मुख्य कारण है। इसलिए अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो उसे आज ही ना कर दें। 

एक्सरसाइज

रोजाना 30 मिनट योग एरोबिक या हल्का फुल्का व्यायाम जरूर करें इससे नसों में हलचल होती रहती हैं जिससे ब्लाकेज का खतरा कम रहता है।

मोटापे पर रखें कंट्रोल 

मोटापे को बीमारियों की जड़ कहा जाता है। नसों की ब्लाकेज के लिए भी आपका बढ़ता वजन जिम्मेदार है इसलिए बटर, चीज, क्रीम, केक, रैड मीट जैसी फैटी डाइट का सेवन कम करें। 

अनार

एंटीऑक्सीडेंट, नाइट्रिक और ऑक्साइड के गुणों से भरपूर अनार के 1 गिलास जूस का रोजाना सेवन आपको धमनियों की ब्लोकेज के साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम से दूर रखता है।

ड्राई फ्रूट्स


रोजाना कम से कम 50-100 ग्राम बादाम, अखरोट और पेकन (Pecan) का सेवन आपकी रक्त कोशिकाओं में कोलेस्ट्रॉल जमा नहीं होने देता। इससे आप ब्लाकेज की समस्या से बचे रहते है

आयुर्वेदिक हर्ब्स

लहसुन, शहद, हल्दी, केसर, कैमलस और कुसुरा फूल को मिलाकर पीस लें। इसके रोजाना सेवन करने से आप ब्लाकेज की समस्या के साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम से बच सकते है।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि



बवासीर (पाईल्स) के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार


                                           

    बवासीर का घरेलू इलाज अथवा बवासीर दूर करने के उपाय आयुर्वेद में है या नहीं इस बात को लेकर लोग हमेशा शंकाग्रस्त रहते है। आइये आज हम आपको पाइल्स के सफल आयुर्वेदिक इलाज बताते है जिन्हें अपनाकर आप स्वस्थ लाइफ जी सकते हैं। बवासीर दो प्रकार की होती है, खूनी बवासीर और बादी वाली 

बवासीर:

    खूनी बवासीर में मस्से खूनी सुर्ख होते है,और उनसे खून गिरता है,जबकि बादी वाली बवासीर में मस्से काले रंग के होते है,और मस्सों में खाज पीडा और सूजन होती है,अतिसार संग्रहणी और बवासीर यह एक दूसरे को पैदा करने वाले होते है।

अदरक से उपचार:

बवासीर के रोगी को बादी और तले हुये पदार्थ नही खाने चाहिये,जिनसे पेट में कब्ज की संभावना हो,हरी सब्जियों का ज्यादा प्रयोग करना चाहिये,बवासीर से बचने का सबसे सरल उपाय यह है कि शौच करने उपरान्त जब मलद्वार साफ़ करें तो गुदा द्वार को उंगली डालकर अच्छी तरह से साफ़ करें,इससे कभी बवासीर नही होता है।
इसके लिये आवश्यक है कि मलद्वार में डालने वाली उंगली का नाखून कतई बडा नही हो,अन्यथा भीतरी मुलायम खाल के जख्मी होने का खतरा होता है,प्रारंभ में यह उपाय अटपटा लगता है,पर शीघ्र ही इसके अभ्यस्त हो जाने पर तरोताजा महसूस भी होने लगता है, बवासीर के घरेलू उपचार इस प्रकार से है।

बवासीर की बीमारी और आयुर्वेदिक इलाज

जीरे को जरूरत के अनुसार भून कर उसमे मिश्री मिलाकर मुंह में डालकर चूंसने से तथा बिना भुने जीरे को पीस कर मस्सों पर लगाने से बवासीर की बीमारी में फ़ायदा होता है
    पके केले को बीच से चीरकर दो टुकडे कर लें और उसपर कत्था पीसकर छिडक दें,इसके बाद उस केले को खुले आसमान के नीचे शाम को रख दें,सुबह को उस केले को प्रात:काल की क्रिया करके खालें,एक हफ़्ते तक इस प्रयोग को करने के बाद भयंकर से भयंकर बवासीर समाप्त हो जाती है।
छोटी पिप्पली को पीस कर चूर्ण बना ले,और शहद के साथ लेने से आराम मिलता है
एक चम्मच आंवले का चूर्ण सुबह शाम शहद के साथ लेने पर बवासीर में लाभ मिलता है,इससे पेट के अन्य रोग भी समाप्त होते है
  खूनी बवासीर में नींबू को बीच से चीर कर उस पर चार ग्राम कत्था पीसकर बुरक दें,और उसे रात में छत पर रख दें,सुबह दोनो टुकडों को चूस लें,यह प्रयोग पांच दिन करें खूनी बवासीर का शर्तिया घरेलू उपचार है
पचास ग्राम रीठे तवे पर रखकर कटोरी से ढक दें,और तवे के नीचे आग जला दें,एक घंटे में रीथे जल जायेंगे,ठंडा होने पर रीठों को खरल कर ले या सिल पर पीस लें,इसके बाद सफ़ेद कत्थे का चूर्ण बीस ग्राम और कुश्ता फ़ौलाद तीन ग्राम लेकर उसमें रीठे बीस ग्राम भस्म मिला दें,उसे सुबह शाम मक्खन के साथ खायें,ऊपर से दूध पी लें,दोनो प्रकार के बवासीर में दस से पन्द्रह दिन में आराम आ जाता है,गुड गोस्त ,शराब ,आम और अंगूर का परहेज करें।
खूनी बवासीर में गेंदे के हरे पत्ते नौ ग्राम काली मिर्च के पांच दाने और कूंजा मिश्री दस ग्राम लेकर साठ ग्राम पानी में पीस कर मिला लें,दिन में एक बार चार दिन तक इस पानी को पिएं,गरम चीजों को न खायें,खूनी बवासीर खत्म हो जायेगा।
पचास ग्राम बडी इलायची तवे पर रख कर जला लें,ठंडी होने पर पीस लें,रोज सुबह तीन ग्राम चूर्ण पंद्रह दिनो तक ताजे पानी से लें,बवासीर में लाभ होता है
हारसिंगार के फ़ूल तीन ग्राम काली मिर्च एक ग्राम और पीपल एक ग्राम सभी को पीसकर उसका चूर्ण जलेबी की पचास ग्राम चासनी में मिला लें,रात को सोते समय पांच छ: दिन तक इसे खायें,यह खूनी बवासीर का शर्तिया घरेलू उपचार है,मगर ध्यान रखें कि कब्ज करने वाले भोजन को न करें
दूध का ताजा मक्खन और काले तिल दोनो एक एक ग्राम को मिलाकर खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है
 

नागकेशर मिश्री और ताजा मक्खन इन तीनो को रोजाना सम भाग खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है
जंगली गोभी की तरकारी घी में पकाकर उसमें सेंधा नमक डालें,इस तरकारी को आठ दिन रोटी के साथ खाने से बवासीर में आराम मिलता है
कमल केशर तीन मासे,नागकेशन तीन मासे शहद तीन मासे चीनी तीन मासे और मक्खन तीन मासे (तीन ग्राम) इन सबको मिलाकर खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है
नीम के ग्यारह बीज और छ: ग्राम शक्कर रोजाना सुबह को फ़ांकने से बवासीर में आराम मिलता है
पीपल का चूर्ण छाछ में डालकर पीने से बवासीर में आराम मिलता है
कमल का हरा पत्ता पीसकर उसमे मिश्री मिलाकर खायें,बवासीर का खून आना बन्द हो जाता है
सुबह शाम को बकरी का दूध पीने से बवासीर से खून आना बन्द हो जाता है
प्रतिदिन दही और छाछ का प्रयोग बवासीर का नाशक है
प्याज के छोटे छोटे टुकडे करने के बाद सुखालें,सूखे टुकडे दस ग्राम घी में तलें,बाद में एक ग्राम तिल और बीस ग्राम मिश्री मिलाकर रोजाना खाने से बवासीर का नाश होता है
गुड के साथ हरड खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है
बवासीर में छाछ अम्रुत के समान है,लेकिन बिना सेंधा नमक मिलाये इसे नही खाना चाहिये
मूली का नियमित सेवन बवासीर को ठीक कर देता है



मुख की दुर्गंध के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार

                                             


     किसी व्यक्ति की स्माइल से उस व्यक्ति के व्यक्तित्व पर दुसरे के सामने अच्छा इम्प्रैशन पड़ता है | आपकी छोटी सी मुस्कराहट और हँसी बड़े बड़े काम कर सकती है लेकिन बहुत बार लोग खुल कर हस नहीं पाते जिसके दो मुख्य कारण हो सकते हैं दांतों का पीलापन और मुंह या सांस की बदबू |
ऐसे में आपके दोस्त आपसे दूर रहना शुरू कर देते हैं आपके दोस्त आपको बता भी नहीं पाते की आपके मुंह से दुर्गंध आ रही है | ऐसे में आपका आत्मविशवास कम होने लगता है आप अपने चाहने वालों से दूर हो जाते हैं | लोग आपकी पीठ पीछे आपका मजाक बनाने लगते हैं | ऐसे में आपको अपने आत्मविश्वास को बनाये रखना है |
सबसे पहले आपको जानने की कोशिश करनी है की क्या आपके मुह से badboo आ रही है | इसके लिए आप अपने मुह से कुछ दूरी पर अपना दायाँ हाथ रखकर मुह से सांस छोड़ें | इससे सांस आपके नाक तक पहुंचेगी और आपको पता चल जाएगा की आपके मुह से badbu आ रही है या नहीं | आप अपना हाथ भी सूंघकर देखे इससे आपको पता चल जाएगा की साँसों से दुर्गन्ध आ रही है या नहीं |

बदबूदार पदार्थ खाना (प्याज,लहसुन)
दवाओं का प्रयोग करने के दौरान
तम्बाकू वाले पदार्थ इस्तेमाल करने से

कब्ज की समस्या
लीवर से जुडी कोई बीमारी
बहुत कम पानी पीना
पेट से जुडी कोई समस्या
टोन्सिल की समस्या के कारन
मुहं में इन्फेक्शन
दांतों की समस्या
ब्रश नहीं करना
जीभ की सफाई नहीं करना


मुख की  बदबू दूर करने ke उपाय

लौंग मुह और दांतों की बहुत सी समस्याओं में लाभकारी होती है | मुह से बदबू आने पर लौंग को चबाने से बदबू नहीं आएगी और दांत में दर्द दांत की सेंसिटिविटी की समस्या से भी छुटकारा मिलता है |

छोटी इलाइची :

अगर आपको कहीं बाहर जाना है और आप चाहते हैं आपके मुह से बदबू की जगह खुशबू आये तो घर के kitchen में मौजूद छोटी इलाइची भी एक कारगर उपाय है | छोटी इलायची चबाने से मुह से दुर्गन्ध नहीं आती है |


गेहूं के जवारे का रस :

गेहूं के जवारे का रस पायरिया और मुह से आने वाली दुर्गन्ध को दूर करने का अच्छा उपाय है | इसलिए गेहू के जवारे का रस पिने से भी मुह की बदबू से छुटकारा मिलता है |

निम्बू का रस :

निम्बू के रस से मुह में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया मर जाते हैं क्यूंकि निम्बू का रस एंटी बैक्टीरियल की तरह से काम करता है | इसे प्रयोग करने के लिए एक गिलास पानी में कुछ बुँदे निम्बू का रस मिला ले और इस पानी से दिन में दो बार कुल्ला करने से मुह से बदबू आनी बंद हो जाएगी |

दालचीनी का प्रयोग :

घर में इस्तेमाल की जाने वाली दालचीनी मुह और साँसों में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को ख़तम करने का काम भी करती है | इसे इस्तेमाल करने के लिए दालचीनी और थोड़ी सी अजवायन को पानी में उबाल लें और इस पानी से दिन में दो बार गरारे और कुल्ला करें |

नीम और बबूल :

नीम में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो मुह में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को ख़तम करने में सक्षम है | इसलिए रोजाना नीम या बबूल का दातुन करने से भी मुह की बदबू से छुटकारा मिलता है | नीम के पत्तों को पानी में उबाल कर उस पानी से गरारे करने से भी muh ki badboo दूर होती है |

पानी से 

शरीर के किसी भी हिस्से से बदबू आने का मतलब है शरीर में विषेले पदार्थों का जमा होना | शरीर में विषेले पदार्थों के जमा होने से रोकने के लिए जरूरी है हमारा लीवर और किडनी सही तरह से काम करते रहे | इनकी कार्यप्रणाली और विषेले पदार्थो को शरीर से बाहर निकालने के लिए दिन में 8 से 10 गिलास पानी पिए इससे भी मुह की दुर्गन्ध से छुटकारा मिलेगा |

सरसों का तेल :

सरसों के तेल और नमक का मिश्रण मुह और दांतों सम्बंधित समस्याओं को दूर करने का जबरदस्त नुस्खा है | इसे इस्तेमाल करने के लिए हथेली पर थोडा सा सरसों का तेल लेकर इसमें नमक मिला लें और उंगली के साथ दांतों पर मसाज करें | इससे भी मुह की दुर्गन्ध से छुटकारा मिलेगा |

बेकिंग सोडा :

बेकिंग सोडे को पानी में डालकर कुल्ला करे | बेकिंग सोडा मुह में बदबू पैदा करने वाले कीटाणुओं से लड़ता है और मुह की बदबू से छुटकारा दिलाता है |

सेब का सिरका :

सेब का सिरका भी मुह से आने वाली बदबू को दूर करने का अच्छा उपाय है | मुह से बदबू आने की स्थिति में पानी में थोडा सा सेब का सिरका मिला कर गरारे करें | इससे साँसों की बदबू से छुटकारा मिलता है |


ग्रीन टी :

ग्रीन टी में एंटी ओक्सिडेंट गुण पाए जाते हैं | ग्रीन टी के सेवन से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और मुह की बदबू से छुटकारा मिलता है | Bad breathing problem को दूर करने के लिए दिन में एक से दो कप ग्रीन टी का सेवन मुह के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है |

तुलसी के पत्ते :

तुलसी बहुत सी बिमारियों को दूर करने का अच्छा उपाय है | मुह की समस्याएँ, गले की समस्याएँ और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में तुलसी बहुत कारगर है | मुह और सांसो की बदबू को दूर करने के लिए तुलसी की पत्तियों को चबा कर खाए इससे मुह की बदबू से छुटकारा मिलता है |

सौंफ :

खाने खाने के बाद कुल्ला जरूर करें और मुह की दुर्गन्ध को दूर करने के लिए सौंफ और मिश्री को मिलाकर खाने से हाजमा सही रहता है और मुह से खाने की दुर्गन्ध भी नहीं आती |
मुह से आने वाली बदबू अगर पेट की समस्या की वजह से है तो रात को त्रिफला चूर्ण का इस्तेमाल करें | दिन में दो बार ब्रश करें और रात को सोने से पहले ब्रश जरूर करें | ज्यादा सख्त तारों वाला ब्रश का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए | खाना खाने के बाद कुल्ला करें जिससे खाना मुह में नहीं रहेगा जो सड़ कर बदबू पैदा नहीं करेगा |
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मूंग की दाल के स्वास्थ्य लाभ // Health Benefits of Moong Dal


                                                       


    मूंग की दाल सिर्फ बीमारी में ही नहीं बल्कि हेल्थ को मेंटेन करने के लिए भी जरूरी है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और फास्फोरस होता है। इस दाल के पापड़, लड्डू और हलवा भी बनता है। इस दाल को अपनी डाइट में शामिल करने से मसल्स मजबूत होती हैं और एनीमिया दूर होता है।

  जरूरी नहीं कि स्‍वाद में जो अच्‍छा हो, वो स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक भी हो। अक्‍सर ऐसा ही होता है, जो चीज खाने में बिल्‍कुल अच्‍छी नहीं लगती है वो गुणों से भरपूर ही होती है। स्‍वादिष्‍ट भोजन करने से पहले हर किसी को शरीर के विकास के लिए विटामिन और खनिज की जरूरत होती है। आयुर्वेद के चिकित्सक डॉ. सत्य प्रकाश मिश्र के मुताबिक दालों में सबसे पौष्टिक दाल, मूंग की होती है, इसमें विटामिन ए, बी, सी और ई की भरपूर मात्रा होती है। साथ ही पौटेशियम, आयरन, कैल्शियम की मात्रा भी मूंग में बहुत होती है। इसके सेवन से शरीर में कैलोरी भी बहुत नहीं बढ़ती है। अगर अंकुरित मूंग दाल खाएं तो शरीर में कुल 30 कैलोरी और 1 ग्राम फैट ही पहुंचता है।
स्‍प्राउट खाने से होता है स्‍वास्‍थ्‍य लाभ: अंकुरित मूंग दाल में मैग्‍नीशियम, कॉपर, फोलेट, राइबोफ्लेविन, विटामिन, विटामिन सी, फाइबर, पोटेशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन बी -6, नियासिन, थायमिन और प्रोटीन होता है। मूंग की दाल के स्‍प्राउट ऐसे ही कुछ लाभकारी गुण निम्‍न प्रकार है। मूंग की दाल के स्‍प्राउट में ग्‍लूकोज लेवल बहुत कम होता है इस वजह से मधुमेह रोगी इसे खा सकते हैं।


* मूंग की दाल को उत्तम आहार माना गया है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त करती है और पेट में ठंडक पैदा करती है, जिससे पाचन और पेट में गर्मी बढ़ने की समस्या नहीं होती।
*मूंग की दाल के स्‍प्राउट में ओलियोसाच्‍चाराइडस होता है जो पॉलीफिनॉल्‍स से आता है। ये दोनों की घटक, गंभीर रोगों से लड़ने की क्षमता को प्रबल करते हैं। कैंसर के रोगी भी इसका सेवन आराम से कर सकते हैं।
*मूंग की दाल में ऐसे गुण होते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देते हैं और उसे बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं। इसमें एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफलामेट्री गुण होते हैं, जो शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाते हैं।
*मूंग की दाल के स्‍प्राउट में शरीर के टॉक्सिक को निकालने के गुण होते हैं। इसके सेवन से शरीर में विषाक्‍त तत्‍वों में कमी आती है।

*कब्ज की समस्या होने पर मूंग की छिलके वाली दाल का सेवन बेहद लाभप्रद होता है, इसके सेवन से पेट साफ होने में मदद मिलती है।
*शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर मूंग दाल का सेवन लाभकारी होता है, यह अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को शरीर से हटाने में मददगार होती हैवजन कम करने की चाह रखने वालों के लिए मूंगदाल का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है, इसमें 100 से भी कम कैलोरी होती है और इसे खाने के बाद पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है जिससे आप अतिरिक्त कैलोरी नहीं लेते।
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टांगों मे होने वाली ऐंठन और दर्द के उपचार

                                     


कमजोरी की वजह से अक्सर महिलाओं को रात के समय पैरों या फिर टांगों में ऐंठन पड़ने की समस्या हो जाती है। वैसे तो इसका कोई खास कारण नहीं है लेकिन शारीरिक कमजोरी, उठने-बैठने का गलत तरीका और बैलेंस डाइट की अनदेखी इसकी वजहें हो सकती है। कई बार को टांगों में होने वाली इस ऐंठन से थोडी देर में आराम मिल जाता है लेकिन लगातार इस तरह की समस्या बनी रहे तो आगे चलकर दिक्कत हो सकती है। इससे बचने के लिए दवाइयां खाने से बेहतर है कि घरेलू तरीकों को अपनाया जाए।
कैल्शियम से भरपूर आहार का सेवन
यह हड्डियों से जुड़ी कमजोरी मानी जाती है। इससे छुटकारा पाने के लिए कैल्शियम से भरपूर आहारों का सेवन करना शुरु करें। हर रोज कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करने से फायदा मिलता है। दूध,हरी पत्तेदार सब्जियां,फल और सूप को डाइट में शामिल करें।

थकान दूर करने के उपाय

गर्म दूध का सेवन

हर रोज रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध का सेवन करें। इसे बैस्ट सुपरफूड्स में से एक माना गया है। इसके सेवन से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। इससे ऐंठन की समस्या से निजात मिलती है।  
 
*गुनगुने पानी से स्नान भी टांगों की ऐंठन से आराम दिलाने में मददगार है। इससे मांसपेशियों की ऐंठन से आराम मिलता है। तुरंत राहत पाने के लिए आप पैरों के लिए हॉट पैड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

रोजाना खाएं केला

केले में मौजूद कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए लाभकारी है। इसमें बहुत से पोषक तत्व शरीरिक कमजोरी को दूर करने में मददगार है। ऐंठन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए हर रोज केले का सेवन करें।

सरसों के तेल की मसाज

सरसों के तेल में एसिटीक एसिड किसी भी तरह की दर्द से राहत पाने में मददगार है। इससे कोई साइड इफैक्ट भी नहीं होता। इस तेल को गुनगुना करके इससे पैरों की मसाज करें।

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खूनी या बादी बवासीर के मस्सो का इलाज

                                                          


बवासीर के मस्सो पर लगाने के लिए तेल
एरंडी के तेल को थोड़ा गर्म कर आग से नीचे उतार कर उसमे कपूर मिलाकर व घोलकर रख ले। अगर कपूर की मात्रा १० ग्राम हो तो अरंडी का तेल ८० ग्राम होना चाहिए। मतलब ८ गुना अगर कपूर ५ ग्राम हैं तो तेल ४० ग्राम।
पाखाना करने के बाद मस्सो को धोकर और पोछकर इस तेल को दिन में दो बार नर्मी से मस्सो पर इतना मलें की मस्सो में शोषित हो जायें। इस तेल की नर्मी से मालिश से मस्सो की तीव्र शोथ, दर्द, जलन, सुईयां चुभने को आराम आ जाता ही और निरंतर प्रयोग से मस्सो खुश्क हो जाते है।
बवासीर के मस्से सूजकर संगर की भांति मोटे हो जाते है और कभी-कभी गुदा से बाहर निकल आते है। ऐसी अवस्था में यदि उन पर इस तेल को लगाकर अंदर किया जाये तो दर्द नही होता और मस्से नरम होकर आसानी से गुदा के अंदर प्रवेश किये जा सकते है।
 
सहायक उपचार.

बवासीर की उग्र अवस्था में भोजन में केवल दही और चावल, मूंग की खिचड़ी ले। देसी घी प्रयोग में लाएं। मल को सख्त और कब्ज न होने दे। अधिक तेज मिर्च-मसालेदार, उत्तेजक और गरिष्ठ पदार्थो के सेवन से बचे।
खुनी बवासीर में छाछ या दही के साथ कच्चा प्याज ( या पीसी हुयी प्याज की चटनी ) खाना चहिए।
रक्तस्रावी बवासीर में दोपहर के भोजन के एक घटे बाद आधा किलो अच्छा पपीता खाना हितकारी है।
बवासीर चाहे कैसी भी हो बड़ी हो अथवा खुनी, मूली भी अक्सीर है। कच्ची मूली ( पत्तो सहित ) खाना या इसके रस का पच्चीस से पचास ग्राम की मात्रा से कुछ दिन सेवन बवासीर के अतिरिक्त रक्त के दोषो को निकालकर रक्त को शुद्ध करता है।

बवासीर में विशेष

बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।
एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी ( जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन ) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से बचना परम आवश्यक है।
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जेतून के तेल के अनजाने फायदे


                                                        


1. त्वचा के लिए जैतून का तेल बहुत फायदेमंद है। रोजाना चेहरे पर इसकी मसाज करने से त्वचा की झुर्रियां समाप्त हो जाती हैं और त्वचा में नमी और चमक बनी रहती है।
2. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध के अनुसार जैतून का तेल आंत में होने वाले कैंसर से बचाव करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

3. विटमिन ए, बी, सी, डी और ई के साथ-साथ जैतून के तेल में आयरन और पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो बालों की कोमलता और मजबूती बढ़ाने में मदद करते हैं। यह ओलेइक एसिड और ओमेगा-9 फैटी एसिड का भी अच्छा स्रोत है।
4.जैतून के तेल में फैटी एसिड की पर्याप्त मात्रा होती है जो हृदय रोग के खतरों को कम करती है। मधुमेह रोगियों के लिए यह काफी लाभदायक है। शरीर में शुगर की मात्रा को संतुलित बनाए रखने में इसकी खास भूमिका है। इसलिए आहार में भी इस तेल का प्रयोग किया जाता है।
5. लंबे समय तक जैतून के तेल को आहार में शामिल करने पर यह शरीर में मौजूद वसा को खुद ब खुद कम करने लगता है। इससे आपका मोटापा कम होता है, वह भी हेल्दी तरीके से।
6.जैतून के तेल में कैल्शि‍यम की काफी मात्रा पाई जाती है, इसलिए भोजन में इसका उपयोग या अन्य तरीकों से इसे आहार में लेने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से निजात मिलती है।

7. जैतून के तेल को मेकअप रिमूवर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके प्रयोग से त्वचा रूखी भी नहीं होती और त्वचा का रंग गोरा होता है। यह त्वचा को पोषण प्रदान करता है।
8. जैतून के तेल में संतृप्त वसा लगभग ना के बराबर होता है जिससे यह आपके शुुगर लेवल को नियंत्रि‍त करता है। साथ ही इसे खाने से बॉर्डर लाइन डायबीटिज होने का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है।
9. जैतून के तेल में एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा भी काफी होती है। इसमें विटामिन ए, डी, ई, के और बी-कैरोटिन की मात्रा अधिक होती है। इससे कैंसर से लड़ने में आसानी होती है साथ ही यह मानसिक विकार दूर कर आपको जवां बनाए रखने में भी मदद करता है
10.इसमें संतृप्त वसा की मात्रा कम होती है जिससे शरीर में कॉलेस्टेरोल की मात्रा को भी संतुलित बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे हृदयाघात का खतरा काफी कम हो जाता है।

    मालिश के लिए नारियल और सरसों के तेल के साथ-साथ जैतून के तेल को भी बेहतर माना जाता है.
प्राचीन काल से ही जैतून के तेल (ऑलिव ऑयल) को अत्यधिक गुणकारी एवं स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है. यह तेल बालों, त्वचा एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हुआ है. ऐसा माना जाता है कि नवजात शिशु की जैतून के तेल की मालिश करने से वह रोगमुक्त हो जाता है. यह तेल विभिन्न कार्यों जैसे खाना बनाने, त्वचा की मालिश, हाथ-पैर के दर्द आदि के काम में भी लाया जा सकता है.जैतून के तेल की सिर पर नियमित रूप से मालिश करने से बाल मजबूत एवं घने होते हैं, साथ ही साथ बालों का झड़ना व बालों में दोमुँहें होने की समस्या का भी निवारण हो जाता है.
इसे बालों में कंडीशनर की तरह प्रयोग में लाया जा सकता है जिससे डैंड्रफ की समस्या का समाधान होता है व बाल मुलायम हो जातें हैं. 

• इसकी आँखों के चारों ओर मालिश से आँखों के नीचे काले घेरे एवं दाग नहीं होते. इससे रतौंधी की समस्या भी दूर होती है.
• जैतून के तेल में विटामिन E भरपूर मात्रा में पाए जाने के कारण यह त्वचा को कई बाहरी कारकों से सुरक्षित रखता है एवं त्वचा की सेंसिटिविटी को कम करता है.• जैतून के तेल की शरीर पर मालिश, शरीर को स्फूर्तिदायक एवं स्वस्थ बनाती है. इसका नित्य प्रयोग त्वचा की झुर्रियों एवं काले धब्बों को खत्म कर त्वचा को सौन्दर्यवान बनाता है.
• इसकी नियमित मालिश से शरीर पर कील, मुँहासे, दाग-धब्बे आदि नहीं होते. इसके अतिरिक्त यह स्किन कैंसर एवं स्किन सम्बन्धी अन्य बीमारियों के निवारण में भी सहायक सिद्ध होता है.
• जैतून के तेल का प्रयोग फेसपैक, बॉडी लोशन एवं स्क्रब के रूप में भी किया जाता है. इसके प्रयोग से त्वचा पर निखार आता है व त्वचा कोमल एवं मुलायम होती है.

• इसमें विटामिन्स एवं मिनरल्स होने के कारण यह त्वचा के अंदर जाकर उसे खूबसूरत बनाता है. इसकी मालिश शरीर को स्फूर्तिदायक एवं दिमाग को तनावमुक्त करती है।
• जैतून के तेल की मालिश से त्वचा को पोषण मिलता है. इससे वह रूखी व शुष्क नहीं होती एवं त्वचा पर चमक बनी रहती है. इसके प्रयोग से त्वचा साफ़ हो जाती है.
 
इसकी मालिश से नवजात शिशु की हड्डियाँ मजबूत होतीं हैं. इसकी नियमित मालिश बच्चे को बढ़ने में सहायता प्रदान करती है.
• नहाने के थोड़ी देर बाद जैतून के तेल की मालिश करने से त्वचा का कालापन दूर हो जाता है एवं त्वचा दमकने लगती है.

• इसकी मालिश से होठों के फटने की समस्या भी दूर होती है व होंठ मुलायम होते है. जैतून के तेल की मालिश से नाखूनों में मजबूती और चमक भी आती है.
इस तरह जैतून के तेल की मालिश कई तरह से शरीर के लिए लाभप्रद है.
 • रात को सोने से पहले पैर की एड़ियों एवं जोड़ों पर जैतून का तेल मलने से एड़ियों व जोड़ों का दर्द दूर होता है. इससे एड़ियाँ कोमल व मुलायम होतीं हैं.
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महिलाओं के लिए शेविंग टिप्स // Shaving tips for women

                                                        

      आजकल पुरुष और महिलाएं दोनों ही अनचाहे बालों को हटाने के लिए शेविंग विधि का अधिक उपयोग करने लगी है. धीरे धीरे इस विधि का प्रचलन महिलायों के बीच बढ़ने के कई कारण है, जैसे इससे न केवल वैक्सिंग से होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है बल्कि इस विधि में समय भी नहीं लगता. आजकल की व्यस्त दिनचर्या में किसी के पास अधिक समय नहीं होता, सबको अपना हर एक पल बचाना अच्छा लगता है. विशेषकर कामकाजी महिलाये तो अधिकतर शेविंग विधि को ही प्राथमिकता देती है. क्यूंकि उन्हें अपने घर के साथ साथ अपने ऑफिस के काम को भी पूरा करना होता है. और शेविंग से बड़ी आसानी व जल्दी से अनचाहे बालों से निजात पाया जा सकता है, अतः 80% कामकाजी महिलायों द्वारा तो यह एक बेहतर उपाय माना जाता है.


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   सर्द इलाको की अपेक्षा गर्म देशों में इस तरह की विधियों को अपनाकर अनचाहे बालों को हटाकर स्वच्छ और तरोताज़ा महसूस करने का अहसास बढ़ जाता है. शेविंग विधि के सन्दर्भ में एक बहुत प्रचलित भ्रान्ति है, जिसके रहते अधिकतर महिलाएं इस विधि को अपनाने में हिचकती है. वो यह कि शेव करने से नये आने वाले बाल अपेक्षाकृत अधिक कड़े, मोटे और काले होते है. इसके साथ साथ यह भी कि इससे त्वचा अधिक कड़ी हो जाती है. इसके विपरीत तथ्य तो यह है कि बालों की मोटाई, उनका रंग तथा उनकी संरचना जिस तत्व (हेयर फौलिकल) पर निर्भर करता है वो हमारी त्वचा के नीचे बीच की परत में स्थित होता है. जोकि शेविंग करने से प्रभावित ही नहीं हो सकता. अतः शेविंग करने से बालों की संरचना में कोई अंतर नहीं आता है. बल्कि जिन महिलायों की त्वचा अधिक संवेदनशील हो उन महिलायों को तो शेविंग विधि का ही प्रयोग करना चाहिए क्यूंकि संवेदनशील त्वचा पर वैक्स का प्रयोग करने से उस पर रेशिस पड़ सकते है.


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     शेव करने से त्वचा रुखी व पपड़ीदार नहीं होती, बल्कि इससे उपरी मृत त्वचा हट जाती है और नई त्वचा झलकती है. हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि हम सही प्रकार का रेजर प्रयोग कर रहे है. सदैव महिलायों के लिए बने रेजर का प्रयोग करें क्यूंकि महिलायों के बाल पुरुषों के मुकाबलें कोमल व मुलायम होते है. महिलायों के लिए शेव करने के लिए अलग तरह के अर्थात अलग डिज़ाईन के रेजर जो विशेषकर महिलायों के उपयोग के लिए होते है, बाज़ार में उपलब्ध होते है. रेजर भी दो तरह के होते है, एक इलेक्ट्रोनीक रेजर जिनका बार बार उपयोग किया जा सकता है और एक डिस्पोजेबल रेजर होते है. यदि आप डिस्पोजेबल रेजर का प्रयोग कर रहे है तो ध्यान रहे कि उसका उपयोग आप एक या दो बार से ज्यादा न करें.

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इसके अलावा शेविंग करते समय और भी अनेक बातों को ध्यान में रखना जरूरी होता है. जैसे :-
1.. शरीर के जिस हिस्से पर शेव की है उस हिस्से को सुखाकर, उस पर तुरंत कोई मोइश्चराइजर लगायें. इसके बाद थोड़ा टेलकॉम पाउडर छिडकें.
2. सर्दियों की अपेक्षा गर्मियों के दिनों में बालों की वृद्धि अधिक तेजी से होती है, ऐसे में गर्मियों में कम दिनों के अंतराल पर अर्थात ३ या ४ दिन बाद रेजर का प्रयोग करना पड़ सकता है, ऐसे में त्वचा को आद्रता/नमी पहुंचाना न भूलें. हलके हाथों से चलायें.
3. कभी भी रुखी त्वचा पर रेजर न चलायें. रुखी त्वचा पर रेजर चलाने से एक तो आपको शेविंग करने में दिक्कत आ सकते है और दूसरा शेविंग के बाद आपकी त्वचा और रुखी लग सकती है.
4. हमेशा स्नान करने के बाद ही शेविंग करें. बालों को दो से तीन मिनट गर्म पानी में भिगोने से बाल तकरीबन 70% तक मुलायम हो जाते है. इससे उन्हें साफ़ करने में आसानी हो जाती है.
5. शेव करने वाले स्थान पर साबुन का प्रयोग न करने तो अधिक अच्छा होगा, इसके अलावा आप कोई भी शेविंग फोम्म क्रीम या किसी शैम्पू का प्रयोग कर सकती है. ऐसा करने से त्वचा पर रेजर आसानी से चलेगा और त्वच भी रुखी नहीं लगेगी.
6. शरीर के संवेदेनशील अंगो पर शेव करने के लिए शेविंग माध्यम (फोम आदि) का उपयोग करें, और यदि आवश्यकता हो तो उस स्थान पर आप शेविंग माध्यम का दुबारा इस्तेमाल कर सकती है.
7. शरीर के कुछ कठिन क्षेत्र जैसे घुटने, कोहनियाँ, एडियाँ आदि जहां पर हड्डी त्वचा के काफी नजदीक होती है और वहां कटने का डर अधिक होता है, उन हिस्से को बाद के लिए छोड़ दें. उन पर शेविंग माध्यम लगाकर अपेक्षाकृत ज्यादा देर के लिए छोड़ दें, इससे बाल हटाना आसन हो जाता है. 
8. रेजर का प्रयोग करने के बाद उसे तुरंत धो लें तथा सुखा भी दें. रेजर को हमेशा साफ़ करके ही रखना चाहिए, ताकि अगली बार उसे पुनः प्रयोग करने से आपको किसी प्रकार की एलर्जी न हो.


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9. रेजर के ब्लेड के किनारों को तौलिए या टिश्यू पेपर आदि से नहीं पौंछना चाहिए, ऐसा करने से ब्लेड के किनारे खराब हो जाते है. साथ ही ब्लेड का धार कम होने पर उसे अवश्य बदल दें.
10. इस बात का ध्यान रखे कि शेविंग करते समय रेजर को १०. एक और बात जिस पर आपको विशेष ध्यान देना चाहिए वो यह कि कभी भी किसी और द्वारा प्रयोग किये हुए रेजर का प्रयोग नहीं करना चाहिए. और ना ही अपना रेजर किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए देना चाहिए, ऐसा करना न केवल आपको बल्कि दूसरे व्यक्ति को भी नुकसान पहुंचा सकता है.
11. रेजर को चलाने की दिशा बालों के उगने की दिशा के विपरीत होनी चाहिए. अर्थात जिस हिस्से पर आप शेव करना चाह रहे है यदि उस हिस्से पर बालों की दिशा उपर से नीचे की ओर है तो वहाँ रेजर को उपर से नीचे की ओर न चलाकर बालों के विपरीत नीचे से उपर की ओर चलाये.

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इलायची के फायदे ,उपयोग // Benefits of Cardamom,

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 इलायची का आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। प्राचीन काल से ही इलाइची का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता रहा है। इलाइची के इस्तेमाल ना सिर्फ भोजन और व्यंजनों को और स्वादिष्ट बनाया जाता है बल्कि इसके इस्तेमाल से आपको कई स्वस्थ लाभ भी होते हैं।
     एक इलायची बहुत कुछ कर सकती है। जी हां दोस्तों सिर्फ 6 दिन सोते वक्त दो इलायची खाने से ऐसा चमत्कार होता है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। 
अब हम आपको इलाइची से होने वाले स्वस्थ लाभ के बारे में बताएंगे कि कैसे रात में सोने से पहले इलाइची खाना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। 
 
पेशाब का इंफेक्शन खत्म करता है
अगर आपको पेशाब एक संक्रमण है तो आपको इलायची का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। इसके निरंतर इस्तेमाल से पेशाब का इन्फेक्शन भी ठीक हो जाता है।

हाजमे को दुरुस्त रखता है
अक्सर देखा गया है कि लोगो में खान पान को लेकर चाव होने के बावजूद वे खाने से परहेज़ करते हैं। ऐसा करने कि मुख्य वजह है उनका हाजमा दुरुस्त ना होना। ऐसे में अगर व्यक्ति लगातार इलायची का प्रयोग करता है तो उसका हाजमा दुरुस्त हो जायेगा। एक शोध में ऐसा पाया गया है कि इलाइची पाचन तंत्र को सुधरने में बेहद कारगर है।


वजन बढ़ाने में मदद करता है

अगर आपका वजन नहीं बढ़ रहा है तो इलायची का प्रयोग आपके लिए नए दरवाज़े खोल सकता है। एक शोध में पाया गया कि इलायची का प्रयोग आपकी भूख को बढ़ाता है। इलाइची खाने से आपकी भूख भी बढ़ेगी और आपका पाचन तंत्र भी दुरुस्त होगा जिससे आप भोजन को बेहतर तरीके से पचा सकेंगे।

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आक ,मदार के टोटके

                                                                     
                                                 


   तंत्र शास्त्र, यह भले ही प्राचीन गुप्त विद्याओं में शुमार रहा है, लेकिन कलियुग में जब ना तो किसी के पास सात्विक क्रियाओं के परिणाम हासिल करने का धैर्य बचा है और ना ही हिम्मत। इसलिए तंत्र विद्याओं के सहारे मनुष्य जीवन की बहुत सी परेशानियों को सुलझाया जा सकता है बशर्ते उनपर विश्वास किया जाए।
तांत्रिक क्रियाओं में बहुत सी ऐसी चीजों का सहारा लिया जाता है तो सामान्य तौर पर आपको उपोअलब्ध होते हैं।

 किसी को वश में करना हो या किसी को गंभीर बीमारी से निजात दिलवानी हो, पति को किसी दूसरी स्त्री के चंगुल से छुड़ाना हो या किसी को बड़ी समस्या से छुटकारा दिलवाना हो... इन सभी कार्यों में तांत्रिक विद्याओं का सहारा लिया जाता है। नारियल से लेकर हल्दी तक... इन सभी का अलग-अलग तरीके से प्रयोग किया जाता है। लेकिन हम आपको सफेद आक के पौधे बारे में बताएंगे जिसका प्रयोग तांत्रिक क्रियाओं की काट के तौर पर किया जाता है।
सफेद आक का पौधा अन्य सामान्य आक के पौधों से अलग होता है, तांत्रिक क्रियाओं से बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जानकारों के अनुसार जिस घर में यह पौधा लगा होता है उस घर पर कोई बुरी नजर नहीं लगती और वह काली शक्तियों से भी मुक्त रहता है। उस घर में रहने वाले लोगों पर किसी जादू-टोने का असर नहीं होता।

इस पौधे से भी ज्यादा शक्तिशाली और प्राभावी होती है इससे निर्मित गणेश जी की प्रतिमा। तंत्र शास्त्र के अनुसार अगर आक के इस पौधे से गणेश जी की प्रतिमा बनवाकर, विशि-विधान से उसकी पूजा-अर्चना की जाए तो ये सभी कष्ट कर लेते है। लेकिन इस पूजा के नियम होते हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है, इनके बिना अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हो पाता।
* मदार की जड़:- रविपुष्प नक्षत्र में लाई गई मदार की जड़ को दाहिने हाथ में धारण करने से आर्थिक समृधि में वृद्धि होती हैं।

* मदार की जड़:- 

रविपुष्प में उसकी मदार की जड़ को बंध्या स्त्री भी कमर में बंधे तो संतान होगी।
 मदार की जड़ कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय हेतु आर्द्रा नक्षत्र में आक की जड़ लाकर तावीज की तरह गले में बांधें।



पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

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जोड़ों के दर्द का अनुपम उपचार -तेल लगी रोटी // Joint pain disappears from oil bread

                                                     

    जोड़ों का दर्द आज के समय में आम बीमारी बनी हुई है। यह समस्या अब बुजुर्गों तक ही नहीं रही, इसके शिकार युवक व अधेड़ उम्र के लोग भी हो रहे है। इसका कारण खानपान, अनियमित दिनचर्या और अन्य कई तरह के कार्य है, जो जोड़ों के दर्द को बढ़ावा देता है। आज हम आपको बताते हैं कि घरेलू आयुर्वेदिक इलाज से आप जोड़ों के दर्द से कैसे छुटकारा पा सकते हैं। साधारण सा उपाय है और आपकी रसोई में उपलब्ध चीजों से निर्मित है, इसके लिए आपको अतिरिक्त कुछ भी खरीदकर नहीं लाना है। 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

 आजकल की जीवनशैली में लोगों का खानपान पूरी तरह बिगड़ चुका है, जिसकी वजह से अकसर लोगों को तरह-तरह की शिकायतें रहने लगी हैं। स्ट्रेस, बाहर का अनहेल्दी खाना, जंक फूड आदि पेट की विभिन्न बीमारियों को पैदा करता है।
    लेकिन हम आपको आप आयुर्वेद के एक ऐसे नुस्खे से रू-ब-रू कराने जा रहे हैं, जिसको करने से आप अपने जोड़ों के दर्द से निजात पा सकते हैं। यह एक ऐसा घरेलू नुस्खा है, जहां, आप केवल एक ही रात में ज्वॉइंट्स पैन से छुटकारा दिलाने में कारगर है।

जोड़ों का दर्द और तेल लगी कच्ची रोटी

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

   रात में 1 कच्ची रोटी लें, उस पर सरसों का तेल और हींग लगा लें। इसके बाद ये रोटी की पट्टी अपने शरीर के उन हिस्सों पर रखकर बांधें, जहां आपको जोड़ों का दर्द महसूस होता है। यकीन मानिए आपका जोड़ों का दर्द केवल 1 रात में ही गायब हो जाएगा। इसके अलावा आप अगर पेपर टेप पर थोड़ी-सी साबुत मेथी दाना लगाते हैं और उसे उस जगह पर शरीर पर चिपकाते हैं जहां आपको दर्द महसूस हो रहा है, उससे भी आपको लाभ मिलेगा।
रोटी का घरेलू नुस्खा एक ऐसा नुस्खा है जो आपके जोड़ों के दर्द में आपको राहत दिला सकता है। अगर आपको भी घुटने में या हाथ में दर्द हो, तो आप भी यह नुस्खा अपना सकते हैं। आज भी बड़े-बूढ़ें इस नुस्खे को दर्द भगाने में इस्तेमाल करते हैं। एक बार आप भी करके देख लीजिए।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार






साँप और बिच्छू के जहर उतारने के मंत्र// Mantra for snake and scorpion poisoning




ॐ नमो आदेश गुरु का,काला बिच्छू कंकरीयाला,

सोना का डंक ,रुपे का भाला,उतरे तो उतारूँ,

चढ़े तो मारूं।नीलकंठ मोर ,गरुड़ का आयेगा,

मोर खायेगा तोड़ ,जा रे बिच्छू डंक छोड़,

मेरी भक्ति ,गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र ,ईश्वरो वाचा।

इस मन्त्र का १०८ झाडा नीम की डाल का लगाना है। और मन्त्र को पढ़ना हैं, चाहे कितना भी विषैला बिच्छु हो जहर उतर जायेगा. पर ध्यान रहे इस मन्त्र को सिद्ध करने की जरुरत पड़ती है,


गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

सर्प विश उतारने का मंत्र 

ॐ नमो पर्वताग्रे रथो आंती,

विटबड़ा कोटि तन्य बीरडर पंचनशपनं

पुरमुरी अंसडी तनय तक्षक नागिनी आण,रुद्रिणी आण,

गरुड़ की आण। शेषनाग की आण,

विष उड़नति,फुरु फुरु फुरु ॐ डाकू रडती,

भरडा भरडती विष तू दंती उदकान

    यह मन्त्र २१ या १०८ बार पानी या काली मिर्च पर अभिमंत्रित करके देना. काली मिर्च चबाने को कहना, रोगी को पानी पिलाना तथा पानी मुह पर छोड़ना तो कैसा भी विष हो फ़ौरन उतर जायेगा. यह मंत्र नागपंचमी के दिन सिद्ध किया जाता है, उस इन साधक उपवास रखे, खीर शक्कर और घी से युक्त मिठाई बनाकर नागमुर्ती के आगे भोग लगावें और उस दिन आनंद के साथ भोजन करें. नाग देवता की स्तुति करें, ऐसा करने से मंत्र सिद्ध हो जाता हैं

मंत्र सिद्धि कैसे की जाती है?

मंत्र को सिद्ध करने के दो उपाय है – जात सूतक निवृत्ति और मृत सूतक निवृत्ति।

1. जात सूतक निवृत्ति : इसके लिए जप के प्रारंभ से एक सौ आठ बार ॐ कार से पुटित करके इष्ट मंत्र का जप करना चाहिए।

2. मृत सूतक निवृत्ति : इसके लिए भूत लिपि विधान करे।

नियम :

1. इस प्रकार नित्य एक हजार जप एक महीने तक करने से ही मंत्र जागरित होता है।

2. पूर्व में तीन प्राणायाम और अंत में भी तीन प्राणायाम करने चाहिए।

3. प्राणायाम का नियम यह है की चार मंत्र से पूरक, सोलह मंत्र से कुंभक और आठ मंत्र से रेचक करना चाहिए।

4. जप पूरा होने पर मानसिक रूप से उसे इष्ट देवता के दाहिने हाथ में समर्पित कर लेना चाहिए। यदि देवी इष्ट स्वरुप हो तो उसके बाएं हाथ में समर्पित करना चाहिए।

5. प्रतिदिन अनुष्ठान के अंत में जप का दंशांश हवन, हवन का दंशांश तर्पण, तर्पण का दंशांश अभिषेक और यथाशक्ति ब्राह्मण भोजन करना चाहिए।

 
6. यदि नियम संख्या पांच का पालन किसी वजह से संभव न हो सके तो जितना होम हुआ है, उससे चौगुना जप ब्राह्मणों को, छः गुना क्षत्रियों को तथा आठ गुना वैश्य को करना चाहिए।

7. अनुष्ठान के 5 अंग : जप, होम, तर्पण, अभिषेक और ब्राह्मण भोजन।

यदि होम तर्पण अभिषेक न हो तो ब्राह्मण या गुरु के आशीर्वाद मात्र से भी ये कार्य सम्पन्न माने जा सकते है।

8. स्त्रियों को होम-तर्पण आदि की आवश्यकता नहीं है। केवल मात्र से ही उन्हें सफलता मिल जाती है।