हाथ -पैर व अंग सुन्न हो जाने के उपचार


                                          



कभी-कभी बैठे-बैठे या काम करते हुए शरीर का कोई अंग या त्वचा सुन्न हो जाती है| कुछ लोग देर तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करते या पढ़ते-लिखते रहते हैं| इस कारण रक्तवाहिनीयों तथा मांसपेशियों में शिथिलता आ जाने से शरीर सुन्न हो जाता है|
शरीर के अंग सुन्‍ना पड़ जाना एक आम सी समस्‍या है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे लगातार हाथों और पैरों पर प्रेशर, किसी ठंडी चीज को बहुत देर तक छूते रहना, तंत्रिका चोट, बहुत अधिक शराब का सेवन, थकान, धूम्रपान, मधुमेह, विटामिन या मैग्‍नीशियम की कमी आदि।
शरीर के किसी अंग के सुन्न होने का प्रमुख कारण वायु का कुपित होना है| इसी से वह अंग भाव शून्य हो जाता है| लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि खून के संचरण में रुकावट पैदा होने से सुन्नता आती है| यदि शरीर के किसी विशेष भाग को पूरी मात्रा में शुद्ध वायु नहीं मिलती तो भी शरीर का वह भाग सुन्न पड़ जाता है|
जो अंग सुन्न हो जाता है, उसमें हल्की झनझनाहट होती है| उसके बाद लगता है कि वह अंग सुन्न हो गया है| सुई चुभने की तरह उस अंग में धीरे-धीरे लपकन-सी पड़ती है, लेकिन दर्द नहीं मालूम पड़ता|
अगर यह समस्‍या कुछ मिनटों तक रहती है तो कोई परेशानी की बात नहीं है लेकिन अगर यही कई कई घंटों तक बनी रहे तो आपको डॉक्‍टर के पास जाने की आवश्‍यकता है। हो सकता है कि किसी बड़ी बीमारी का लक्षण हो।हाथ पैर का सुन्‍न हो जाना बड़ा ही कष्‍टदायक होता है क्‍योंकि ऐसे में फिर आपका कहीं मन नहीं लगता। पर आप चाहें तो इस समस्‍या को घरेलू उपचार से ठीक कर सकते हैं।
कभी-कभी बैठे-बैठे या काम करते हुए शरीर का कोई अंग या त्वचा सुन्न हो जाती है| कुछ लोग देर तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करते या पढ़ते-लिखते रहते हैं| इस कारण रक्तवाहिनीयों तथा मांसपेशियों में शिथिलता आ जाने से शरीर सुन्न हो जाता है|
शरीर सुन्न हो जाने का कारण
शरीर के किसी अंग के सुन्न होने का प्रमुख कारण वायु का कुपित होना है| इसी से वह अंग भाव शून्य हो जाता है| लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि खून के संचरण में रुकावट पैदा होने से सुन्नता आती है| यदि शरीर के किसी विशेष भाग को पूरी मात्रा में शुद्ध वायु नहीं मिलती तो भी शरीर का वह भाग सुन्न पड़ जाता है|
शरीर सुन्न हो जाने की पहचान
जो अंग सुन्न हो जाता है, उसमें हल्की झनझनाहट होती है| उसके बाद लगता है कि वह अंग सुन्न हो गया है| सुई चुभने की तरह उस अंग में धीरे-धीरे लपकन-सी पड़ती है, लेकिन दर्द नहीं मालूम पड़ता|-
शरीर सुन्न हो जाने के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:
पपीता और सरसों-
पपीते या शरीफे के बीजों को पीसकर सरसों के तेल में मिलाकर सुन्न होने वाले अंगों पर धीरे-धीरे मालिश करें|
सोंठ, लहसुन और पानी-
सुबह के समय शौच आदि से निपट कर सोंठ तथा लहसुन की दो कलियों को चबाकर ऊपर से पानी पी लें| यह प्रयोग आठ-दस दिनों तक लगातर करने से सुन्न स्थान ठीक हो जाता है|
अजवायन, लहसुन और तिली तेल-
तिली के तेल में एक चम्मच अजवायन तथा लहसुन की दो पूतियां कुचलकर डालें| फिर तेल को पका-छानकर शीशी में भर लें| इस तेल से सुन्न स्थान की मालिश करें|
बादाम-
बादाम का तेल मलने से सुन्न स्थान ठीक हो जाता है|
पीपल और सरसों-
पीपल के पेड़ की चार कोंपलें सरसों के तेल में मिलाकर आंच पर पकाएं| फिर छानकर इस तेल को काम में लाएं|
सोंठ, पीपल, लहसुन और पानी-




सोंठ, पीपल तथा लहसुन - सभी बराबर की मात्रा में लेकर सिल पर पानी के साथ पीस लें| फिर इसे लेप की तरह सुन्न स्थान पर लगाएं|
बादाम-
बादाम घिसकर लगाने से त्वचा स्वाभाविक हो जाती है|
कालीमिर्च और इलायची-
कालीमिर्च तथा लाल इलायची को पानी में पीसकर त्वचा पर लगाएं|
नारियल और जायफल-
100 ग्राम नारियल के तेल में 5 ग्राम जायफल का चूर्ण मिलाकर त्वचा या अंग विशेष पर लगाएं|
लहसुन और पानी-
एक गांठ लहसुन और एक गांठ शुंठी पीस लें| इसके बाद पानी में घोलकर लेप बना लें| इस लेप को त्वचा पर लगाएं|
दालचीनी-
दालचीनी में कैमिकल और न्‍यूट्रियंट्स होते हैं जो हाथ और पैरों में ब्‍लड फ्लो को बढ़ाते हैं। एक्‍सपर्ट बताते हैं रोजाना 2-4 ग्राम दालचीनी पावडर को लेने से ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है। इसको लेने का अच्‍छा तरीका है कि एक गिलास गरम पानी में 1 चम्‍मच दालचीनी पावडर मिलाएं और दिन में एक बार पियें। दूसरा तरीका है कि 1 चम्‍मच दालचीनी और शहद मिला कर सुबह कुछ दिनों तक सेवन करें।
घी-
रात को सोते समय तलवों पर देशी घी की मालिश करें| इससे पैर का सुन्नपन खत्म हो जाएगा|
चोपचीनी, पीपरामूल, मक्खन और दूध
5 ग्राम चोपचीनी, 2 ग्राम पीपरामूल और 4 ग्राम मक्खन - तीनों को मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें|
बेल, पीपल, चित्रक और दूध
बेल की जड़, पीपल और चित्रक को बराबर की मात्रा में लेकर आधा किलो दूध में औटाएं| फिर रात को सोते समय उसे पी जाएं|
 व्‍यायाम-
व्‍यायाम करने से शरीर में ब्‍लड र्स्‍कुलेशन होता है और वहां पर ऑक्‍सीजन की मात्रा बढ़ती है। रोजाना हाथ और पैरों का 15 मिनट व्‍यायाम करना चाहिये। इसके अलावा हफ्ते में 5 दिन के लिये 30 मिनट एरोबिक्‍स करें,


जिससे आप हमेशा स्‍वस्‍थ बने रहें।
हल्‍दी-
हल्‍दी में ऐसे तत्‍व पाए जाते हैं जो ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं। साथ ही यह सूजन, दर्द और परेशानी को भी कम करती है। एक गिलास दूध में 1 चम्‍मच हल्‍दी मिक्‍स कर के हल्‍की आंच पर पकाएं। आप इसमें हल्‍दी भी मिला सकते हैं। इसे पीने से काफी राहत मिलेगी। आप हल्‍दी और पानी के पेस्‍ट से प्रभावित स्‍थान की मसाज भी कर सकते हैं।
गरम पानी का सेंक-
सब
मैग्‍नीशियम से पहले प्रभावित जगह पर गरम पानी की बोतल का सेंक रखें। इससे वहां की ब्‍लड सप्‍पलाई बढ़ जाएगी। इससे मासपेशियां और नसें रिलैक्‍स होंगी। एक साफ कपड़े को गरम पानी में 5 मिनट के लिये भिगोएं और फिर उससे प्रभावित जगह को सेंके। आप चाहें तो गरम पानी से स्‍नान भी कर सकती हैं।



मैग्‍नीशियम का सेवन करें-
हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां, मेवे, बीज, ओटमील, पीनट बटर, ठंडे पानी की मछलियां, सोया बीन, अवाकाडो, केला, डार्क चॉकलेट और लो फैट दही आदि खानी चाहिये। आप रोजाना मैग्‍नीशियम 350 एम जी की सप्‍पलीमेंट भी ले सकती हैं। -
प्रभावित हिस्‍से को ऊपर उठाएं-
हाथ और पैरों के खराब ब्‍लड सर्कुलेशन से ऐसा होता है। इसलिये उस प्रभावित हिस्‍से को ऊपर की ओर उठाइये जिससे वह नार्मल हो सके। इससे सुन्‍न वाला हिस्‍सा ठीक हो जाएगा। आप अपने प्रभावित हिस्‍से को तकिये पर ऊंचा कर के भी लेट सकते हैं।
मसाज-
जब भी हाथ पैर सन्‍न हो जाएं तब उन्‍हें मसाज देना शुरु कर दें। इससे ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है। गरम जैतून तेल, नारियल तेल या सरसों के तेल से मसाज करें।
अगर हाथ पैरों में जन्‍नाहट होती है तो अपने आहार में ढेर सारे विटामिन बी, बी6 और बी12 को शामिल करें। इनके कमी से हाथ, पैरों, बाजुओं और उंगलियों में सुन्‍नता पैदा हो जाती है। आपको अपने आहार में अंडे, अवाकाडो, मीट, केला, बींस, मछली, ओटमील, दूध, चीज़, दही, मेवे, बीज और फल शामिल करने चाहिये। आप चाहें तो vitamin B-complex supplement भी दिन में दो बार खा सकते हैं

केले की चाय के चमत्कारी फायदे // Miracle Benefits of Banana Tea


आपने लेमन टी,तुलसी की चाय, ब्लैक टी या ग्रीन टी तो बहुत पी होगी। लेकिन क्या आपने कभी केले की चाय पी है? नहीं! तो पीजिए जनाब क्योंकि यही तो जापान के लोगों की लंबी उम्र का राज है। इसके साथ ही ये कई बीमारियों को दूर भी करती है। केले की चाय पीने से कई सारी समस्याएं दूर होती हैं। यह एक अचूक घरेलू उपाय है रोगों से बचने का।
केले की चाय को किस तरह से बनाया जाता है-

सामग्री-
*एक मध्यम या छोटे आकार का केला
*एक कप पानी
*दालचीनी चूर्ण
सबसे पहले आप एक कप पानी को गैस या चूले में उबालें इसके बाद स्वाद के हिसाब से इसमें दालचीनी पाउडर को डाल दें। और फिर केला का छिलका उतार कर उबलते हुए पानी में डाल दें। दस मिनट के बाद इसे छानकर इसे किसी कप डालकर पीजिए। बहुत ही कम समय में बन जाती है यह चाय ।
अब जानते हैं केले की चाय से मिलने वाले फायदों के बारे में-


कब्ज की समस्या में-

आप दूध की चाय की बजाए केले की चाय का सेवन करेगें तो इससे आपकी पुरानी से पुरानी कब्ज की बीमारी ठीक हो जाएगी।


तनाव या टेंशन में-


केले की चाय सीधे दिमाग पर असर करती हैं जिससे इंसान के नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है और आपका बढ़ा हुआ तनाव व टेंशन दूर होने लगता है।

पेट दर्द में-


केले की चाय में मैग्नीशियम और पोटैशियम होता है जो पेट के दर्द को आसानी से ठीक कर देती है।


अनिंद्रा की समस्या-


केले की चाय आपके लिए फायदेमंद होती है। इसे पीने से नींद न आने की समस्या दूर होती है। और आपको बहुत की आरामदायक नींद आती है।अगर आपको भी अच्छी नींद नहीं आती है और सोने के दौरान आप बीच-बीच में उठ बैठते हैं तो केले वाली चाय पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद है.आमतौर पर लोग अच्छी नींद के लिए नींद की गोली ले लेते हैं लेकिन आप चाहें तो नींद की गोली की जगह केले वाली चाय ले सकते हैं. वैसे भी नींद की गोली लेने से अक्सर भारीपन, कब्ज और पेट दर्द की शिकायत हो जाती है.केले में पोटैशियम की भरपूर मात्रा पायी जाती है. इसके साथ ही ये मैग्नीशियम का भी खजाना है. ये दोनों ही तत्व नर्वस सिस्टम को रीलैक्स करने का काम करते हैं और तनाव को कम करते हैं.\अगर आपको नींद न आने की समस्या है तो केले का चाय पीएं। इससे आपको गहरी और सुहानी नींद आएगी।

केले वाली चाय बनाने में मुश्क‍िल से 10 मिनट का समय लगता है. एक छोटा केला ले लें और एक कप पानी में दालचीनी डालकर उसे उबाल लें. जब पानी उबलने लगे तो इसमें केला डाल दें. इसे 10 मिनट तक उबलने दें. इसे छानकर पी लें.



किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि


जटामांसी के गुण लाभ उपचार // The benefitsand uses of nard


जटामांसी कश्मीर, भूटान, सिक्किम और कुमाऊं जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में अपने आप उगती है। इसे ‘बालछड़’ के नाम से भी जाना जाता है।
जटामांसी ठण्डी जलवायु में उत्पन्न होती है। इसलिए यह हर जगह आसानी से नहीं मिलती। इसे जटामांसी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसकी जड़ में बाल जैसे तन्तु लगे होते हैं।
सावधानी : जटामांसी का ज्यादा उपयोग करने से गुर्दों को हानि पहुंच सकती है और पेट में कभी भी दर्द शुरू हो सकता है।
मात्रा : 2 से 4 ग्राम जड़ का चूर्ण और काढ़ा 10 मिलीलीटर।


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*इसके सेवन से बाल काले और लम्बे होते है। इसके काढ़े को रोजाना पीने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
*मस्तिष्क और नाड़ियों के रोगों के लिए ये राम बाण औषधि है, ये धीमे लेकिन प्रभावशाली ढंग से काम करती है. पागलपन , हिस्टीरिया, मिर्गी, नाडी का धीमी गति से चलना,,मन बेचैन होना, याददाश्त कम होना इन सारे रोगों की यही अचूक दवा है.
*ये त्रिदोष को भी शांत करती है और सन्निपात के लक्षण ख़त्म करती है. चर्म रोग , सोरायसिस में भी इसका लेप फायदा पहुंचाता है.
*जटामांसी की जड़ को गुलाबजल में पीसकर चेहरे पर लेप की तरह लगायें। इससे कुछ दिनों में ही चेहरा खिल उठेगा। 


बिदारीकन्द के औषधीय उपयोग 

*जटामांसी चबाने से मुंह की दुर्गन्ध नष्ट होती है। दांतों में दर्द हो तो जटामांसी के महीन पावडर से मंजन कीजिए.
*मेंनोपॉज के समय ये सच्ची साथी की तरह काम करती है. इसका शरबत दिल को मजबूत बनाता है, और शरीर में कहीं भी जमे हुए कफ को बाहर निकालता है. 


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

*मासिक धर्म के समय होने वाले कष्ट को जटामांसी का काढा ख़त्म करता है. हाथ-पैर कांपने पर या किसी दूसरे अंग के अपने आप हिलने पर जटामांसी का काढ़ा 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम रोज सेवन करें।
*जटामांसी का काढ़ा बनाकर 280 से 560 मिलीग्राम सुबह-शाम लेने से टेटनेस का रोग ठीक हो जाता है। *जटामांसी और हल्दी बराबर की मात्रा में पीसकर मस्सों पर लगायें। इससे बवासीर नष्ट हो जाती है।
*इसे पानी में पीस कर जहां लेप कर देंगे वहाँ का दर्द ख़त्म हो जाएगा ,विशेषतः सर का और हृदय का. 

*इसको खाने या पीने से मूत्रनली के रोग, पाचननली के रोग, श्वासनली के रोग, गले के रोग, आँख के रोग,दिमाग के रोग, हैजा, शरीर में मौजूद विष नष्ट होते हैं. 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

*अगर पेट फूला हो तो जटामांसी को सिरके में पीस कर नमक मिलाकर लेप करो तो पेट की सूजन कम होकर पेट सपाट हो जाता है.
*जटामांसी के बारीक चूर्ण से मालिश करने से ज्यादा पसीना आना कम हो जाता है। जटामांसी और तिल को पानी में पीसकर इसमें नमक मिलाकर सिर पर लेप करने से आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है।  


जहरीले जन्तुओं के काटने के उपचार//Poisonous animal bites, home remedies



सांप काटने पर -

१) हींग को अरंड की कोपलों के साथ पीसकर चने के बराबर गोलियां बनाइए तथा सांप के काटने पर दो – दो गोली आधे – आधे घंटे पर गर्म पानी के साथ देने पर लाभ होता है।
२) सांप के काटने पर सौ से दो सौ ग्राम शुद्ध घी पिलाकर उल्‍टी कराने से सांप के विष का असर कम होता है। घी पिलाने के १५ मिनट बाद कुनकुना पानी अधिक से अधिक पिलाएं इससे तुरंत उल्टियां होने लगेंगीं और सांप का विष भी बाहर निकलता जाएगा।
३) सांप के काटने पर ५० ग्राम घी में १ ग्राम फिटकरी पीसकर लगाने से भी जहर दूर होता है।



Bichhoo ka Jahar Utarne Ka Mantra - बिच्छू के जहर के लिए मंत्र
॥ मंत्र ||



ॐ नमो समुन्द्र।
समुन्द्र में कमल।
कमल में विषहर।
बिच्छू कहूं तेरी जात।
गरुड़ कहे मेरी अठारह जात।
छह काला।
छह कांवरा।
छह कूँ कूँ बान।
उतर रे उतर नहीं तो गरुड़ पंख हँकारे आन।
सर्वत्र बिसन मिलाई।
उतर रे बिच्छू उतर।
मेरी भक्ति।
गुरु कि शक्ति।
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
विधि: पहले १०८ बार मंत्र का जप करें। फिर शुद्ध गंगा जल, समुन्द्र या किसी भी नदी का जल ले कर सात बार मंत्र जप करतेहुए झाड़ा लगा दें घाव पर हाथ रख कर।

बिच्छू काटने का उपचार-
   पहले पत्थर को साफ कर, थोड़ा सा पानी डालकर फिटकरी को चंदन की तरह घिसें। फिर जहां पर बिच्छू ने काटा हो वहां पर उस फिटकरी का लेप लगाकर आग से थोड़ा सेक करें। कैसा भी जहरीला बिच्छू का काटा क्यों ना हो, इस फिटकरी के प्रयोग से जहर सिर्फ दो मिनट में उतर जाता है यह प्रयोग सैकड़ों व्यक्तियों पर परीक्षण किया गया है और सफल रहा है।

बिच्छु डंक का होमियोपैथिक इलाज 

बिच्छू काटने पर कितना दर्द होता है इसको वहीं जानता है जिसको बिच्छु ने डंक मारा हो। ऐसे तो बहुत सारे घरेलू उपचार हैं परन्तु मैं यहाँ केवल होमियोपैथिक इलाज के बारे में ही चर्चा करूँगा।
सर्वप्रथम आप Silicea साइलीसिया २०० शक्ति की दवा १-१ बून्द १०-१० मिनट के अंतराल पर केवल तीन बार दें। इससे बिच्छु का डंक बाहर आ जायेगा और आधा कष्ट दूर हो जायेगा। इसके बाद आप निचे लिखे औषधि का सेवन करें।
एपिस, द्रौणा, इचिनेसिया और लीडम पाल की मूल औषधि यानि Q शक्ति का मिश्रण तैयार करें और १०-१० बून्द पांच पांच मिनट पर रोगी को दें। ज्यादा कष्ट में ५ बून्द दवा 2CC डिसटिल वाटर के साथ मिला कर काटे स्थान पर त्वचा में इंजेक्ट कर दें। यह आजमाया और शर्तिया कष्ट को दूर करने में लाभकारी है।



कुत्‍ता काटने पर-

१) जंगली चौलाई की जड़ १२५ ग्राम लेकर पीस लें और पानी के साथ बार बार रोगी को पिलाएं। इससे कुत्‍ते के काटने से पागल हुए रोगी को बचाया जा सकता है।
२) प्‍याज का रस और शहद मिलाकर पागल कुत्‍ते के काटने से हुए घाव पर लगाने से जहर उतरता है।
३) लाल मिर्च पीसकर तुरंत घाव में भर दें। इससे कुत्‍ते का जहर जल जाता है और घाव भी जल्‍दी ठीक हो जाता है।
४) हींग को पानी में पीस कर लगाने से पागल कुत्‍ते के काटने से हुए घाव का जहर उतर जाता है।

ततैया काटने पर- 

* ततैया या बर्रे ने काटा हो तो उस स्‍थान पर खटटा अचार या खटाई मल दें। जलन खत्‍म हो जाएगी।

* काटे हुए स्‍थान पर फौरन मिटटी का तेल लगाएं। जलन शांत हो जाएगी।

 * ततैया के काटने पर उस स्‍थान पर नींबू का रस लगाएं। सूजन और दर्द चला जाएगा।


मधुमक्‍खी के डंक पर सोडा और सेंधा नमक को चटनी बनाकर लेप करने से दर्द दूर हो जाता है।
* मकड़ी के काटने पर अमचुर को पानी में मिलाकर घाव पर लगाएं। आराम मिलेगा।
* कनखजूरे के काटने पर प्‍याज और लहसुन पीसकर लगाने से उसका जहर उतर जाता है।

 * छिपकली के काटने पर सरसों का तेल राख के साथ मिलाकर घाव पर लगाने से जहर दूर होता है।


नींबू के रस से कई रोगों का ईलाज // Lemon juice cures many diseases



नींबू पानी के फायदों को देखते हुए यह अब पश्चिमी देशों के साथ ही हमारे देश में भी काफी लोकप्रिय हो गया है | अब यह ऐसी डाईट थेरपी बन चुकी है जो बेहद सस्ती,सुरक्षित और अपनाने में आसान है| यह डाईट उन लोगों के लिए उपादेय है जो बढे वजन से परेशान हैं और नियमित कसरत नहीं कर सकते हैं|
सुबह और रात सोते वक्त पियें नीबू पानी-
सुबह उठते ही एक गिलास मामूली गरम पानी में नींबू का रस मिलाकर पियें| इस उपचार के गुण और स्वाद बढाने के लिए दो चम्मच शहद भी मिलाया जा सकता है| इस डाईट प्लान को अपनाते हुए दिन भर भरपूर पानी पीना होता है| आप जितना ज्यादा पानी पीते हैं शरीर के विकार उतनी ही शीघ्रता से दूर होते जाते हैं|नींबू का रस शरीर में जमें कचरे को बाहर निकालता है| गलत खान पान और दिनचर्या के कारण यह कचरा शरीर में जमा होता रहता है|

*नींबू के रस और शहद के मिश्रण से मानव शरीर के अनेकों रोगों का समाधान हो जाता है। नींबू में प्रचुर साईट्रिक एसीड पाया जाता है। यह साईट्रिक एसीड शरीर की चयापचय क्रिया (मेटाबोलिज्म) को बढाकर भोजन को पचाने में मदद करता है। मेटाबोलिज्म को सुधारकर यह शरीर की अनावश्यक चर्बी घटाता है और इस प्रकार मोटापा कम करता है। नींबू रस में शहद मिलाकर लेना बेहद उपकारी उपचार है। शहद में एन्टीआक्सीडेंट तत्व होते हैं जो हमारे इम्युन पावर को ताकतवर बनाते है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
*पश्चिम के चिकित्सा वैज्ञानिकों का मत है कि थौडी मात्रा में नींबू का रस नियमित लेते रहने से मूत्र पथ में पथरी का निर्माण नहीं होता है। यह पथरी से बचाव का सरल तरीका है। दर असल नींबू का रस हमारे खून में केल्सियम की मात्रा बढने से रोकता है। खून में अनावश्यक केल्सियम बढने से ही केल्सियम आक्सीलेट प्रकार की पथरी बनती है। गुर्दे के खून में मिले हुए केल्सियम को बाहर निकालने में दिक्कत मेहसूस करते हैं।फ़िर यही केल्सियम गुर्दे में जमते रहने से पथरी बन जाती है। शहद में इन्फ़ेक्शन (संक्रमण) रोकने के गुण होते हैं। शहद में केंसर से लडने की प्रवृत्ति होती है। शहद सेवन से बडी आंत का केंसर नहीं होता है।
*चाय बनाने में नींबू रस और शहद का उपयोग करने से गले की खराश दूर होती है और सर्दी-जुकाम से रक्षा होती है।

     

आमाषय के विकार:- एक गिलास गरम पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से आमाषय के कई विकार जैसे- जी मिचलाना,छाती में जलन होना,पेट में उपस्थित रोगाणु नष्ट होते हैं। पाचन प्रणाली पर अनुकूल प्रभाव पडता है। जिन लोगों में अधिक गैस बनने की प्रवृत्ति हो उनके लिये गरम पानी में नींबू का रस मिलाकर पीना रामबाण उपचार है। नींबू पानी के नियमित उपयोग से शरीर में एकत्र विजातीय याने जहरीले पदार्थ बाहर निकलेंगे। खून की सफ़ाई करता है।
 मेरे खयाल से नींबू कब्ज मिटाने का काम भी करता है। हिचकी की बीमारी में भी नींबू रस अच्छा प्रभाव दिखाता है। नींबू का रस लिवर के लिये भी हितकारी है। यह लिवर के टानिक के रूप में काम करता है। इसके प्रयोग से अधिक पित्त निर्माण होकर पाचन क्रिया सुधरती है। नींबू शरीर की श्लेष्मा को नियंत्रित करता है। प्रयोगों में सिद्ध हुआ है कि नींबू का रस पित्ताषय की पथरी को नष्ट करता है।
*नींबू मे कुदरती एंटीसेप्टिक तत्व होते हैं । अनेक प्रकार की चर्म विकृतियों से निजात पाने के लिये नींबू का प्रयोग हितकारी है। इसमें प्रचुर विटामिन सी होता है जिससे त्वचा कांतिमान बनती हैं। खूबसूरती बढती है। *नींबू शरीर के बूढा होने की प्रक्रिया को सुस्त करता है ,चमडी की झुर्रियां मिटाता है। त्वचा के काले धब्बे समाप्त ह्ते हैं। जले हुए स्थान पर नींबू पानी लगाने से जलन का निवारण होता है।
*नींबू का ताजा रस दर्द वाले दांत-दाढ पर भली प्रकार लगाने से पीडा शांत होती है। अगर मसूढों से खून बहता हो तो मसूढों पर नींबू रस की मालिश करने से खून बहना बंद होता है। मुंह की बद्बू का निवारण होता है। पायरिया में हितकारी है।

*कई चिकित्सा शौधों में यह सिद्ध हुआ है कि गरम पानी में नींबू रस मिलाकर पीने से मोटापा घटता है। इसमें थौडा शहद भी मिला सकते हैं।
*नींबू में प्रचुर पोटाशियम होता है। इसीलिये नींबू उच्च रक्तचाप में अति उपयोगी है। जी निचलाने और चक्कर आने में भी उपयोगी है। शरीर और दिमाग के लिये शांतिकारक है।
*नींबू का श्वसन तंत्र पर हितकारी प्रभाव होता है। दमा के मरीज लाभान्वित होते हैं.

*नींबू गठिया और संधिवात में लाभदायक है। दर असल नींबू मूत्रल प्रभाव रखता है। अधिक पेशाब के साथ शरीर का यूरिक एसीड बाहर निकलेगा । यूरिक एसीड गठिया और संधिवात का प्रमुख कारक माना गया है।
गरम पानी में नींबू पीने से सर्दी -जुकाम का निवारण होता है। पसीना होकर बुखार भी उतर जाता है।
*ब्लड शूगर पर नियंत्रण-नींबू पानी से हमारे शरीर का ब्लड शूगर ३० प्रतिशत तक कम किया जा सकता है| अपने आहार में शकर का उपयोग कम ही करें|

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हर्बल चिकित्सा के अनुपम आलेख-

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

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पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

पेट के रोगों के उपचार // Treatment of diseases of the stomach

                                                                                                    

   आधुनिक युग में बदहजमी का रोग पेट की कई बीमारियों के रूप में प्रकट हो रहा है। पेट दर्द होना, मुहं में खट्टा चरका पानी उभरना, अपान वायु निकलना, उलटी होना, जी मिचलाना और पेट मे गैस इकट्ठी होकर निष्काशित नहीं होना इत्यादि लक्षण् प्रकट होते हैं।

भोजन को भली प्रकार चबाकर नहीं खाना पेट रोगों का मुख्य कारण माना गया है। अधिक आहार,अतिशय मद्यपान, तनाव और आधुनिक चिकित्सा की अधिक दवाईयां प्रयोग करना अन्य कारण हैं जिनसे पेट की व्याधियां जन्म लेती है।ज्यादा और बार बार चाय और काफ़ी पीने की आदत से पेट में गेस बनने और कब्ज का रोग पैदा होता है। भूख न लगना ,जी घबराना, चक्कर आना, शिरोवेदना आदि समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। मुहं का स्वाद बिगड जाता है,जीभ पर मेल की तह जम जाती है, श्वास मे बदबू आती है, बेचेनी मेहसूस होना, अधिक लार पैदा होना, पेट मे जलन होना, इन शिकायतो से यह रोग पहिचाना जाता है। भोजन के बाद पेट मे भारीपन मेहसूस होता है।
इस रोग के इलाज मे खान पीन में बदलाव करना मुख्य बात है।

कचोरी,समोसे,तेज मसालेदार व्यंजन का परित्याग पहली जरूरत है। गलत खान पान जारी रखते हुए किसी भी औषधि से यह रोग स्थायी रूप से ठीक नहीं होगा।
अब मै कुछ ऐसे आसान उपचार आपको बता रहा हूं जिनके प्रयोग से पेट की व्याधियां से मुक्ति मिल जाती है--
१) भोजन से आधा घन्टे पहिले एक या दो गिलास पानी पियें। भोजन के एक घन्टे बाद दो गिलास पानी पीने की आदत बनावें। कुछ ही दिनों में फ़र्क नजर आयेगा।
२) आधा गिलास मामूली गरम जल में मीठा सोडा डालकर पीने से पेट की गेस में तुरंत राहत मिलती है।
3) Gastritis- पेट रोग मे रोगी को पहले २४ घन्टी मे सिर्फ़ नारियल का पानी पीने को देना चाहिये। नारियल के पानी में विटामिन्स और पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो आमाषय को आराम देते हैं और रोग मुक्ति में सहायक
हैं।
४) चावल उबालें। इसका पानी रोगी को एक गिलास दिन मे दो बार पिलाएं। बहुत फ़ायदेमंद उपाय है।
५) आलू का रस भी गेस्ट्राइटिज रोग में लाभदायक साबित हुआ है। आधा गिलास आलू का रस भोजन से आधा घन्टे पहिले दिन में दो या तीन बार देना उपकारी है।
६) दो चम्मच मैथी दाना एक गिलास पानी में रात भर भिगोएं। सुबह छानकर इसका पानी पियें। लाभ होगा।
७) रोग की उग्रता में दो या तीन दिन निराहार रहना चाहिये। इस अवधि में सिर्फ़ गरम पानी पियें। ऐसा करने से आमाषय को विश्राम मिलेगा और विजातीय पदार्थ शरीर से निकलेंगे।जिससे आमाशय और आंतों की सूजन मिटेगी।>८) दो या तीन दिन के उपवास के बाद रोगी को अगले तीन दिन तक सिर्फ़ फ़ल खाना चाहिये। सेवफ़ल, तरबूज, नाशपती,अंगूर,पपीता अमरूद आदि फ़ल उपयोग करना उपादेय हैं।
९)  पेट की बीमारियों में मट्ठा,दही प्रचुरता से लेना लाभप्रद है।
१०) रोगी को ३ से ४ लीटर पानी पीना जरूरी है। लेकिन भोजन के साथ पानी नहीं पीना चाहिये। क्योंकि इससे जठर रस की उत्पत्ति में बाधा पडती है।
११) एक बढिया उपाय यह भी है कि भोजन सोने से २-३ घन्टे पहिले कर लें।

१२) मामूली गरम जल मे एक नींबू निचोडकर पीने से बदहजमी दूर होती है।
१३) पेट में वायु बनने की शिकायत होने पर भोजन के बाद १५० ग्राम दही में दो ग्राम अजवायन और आधा ग्राम काला नमक मिलाकर खाने से वायु-गैस मिटती है। एक से दो सप्ताह तक आवश्यकतानुसार दिन के भोजन के पश्चात लें।
१४) दही के मट्ठे में काला नमक और भुना जीरा मिलाएँ और हींग का तड़का लगा दें। ऐसा मट्ठा पीने से हर प्रकार के पेट के रोग में लाभ मिलता है।दही ताजा होना चाहिये।
१५)  प्राकृतिक चिकित्सा:-
पेडू की गीली पट्टीलाभ :- पेट के समस्त रोगों,पुरानी पेचिस, बडी आंत में सूजन,,पेट की नयी-पुरानी सूजन,अनिद्रा,बुखार एवं स्त्रियों के गुप्त रोगों की रामबाण चिकित्सा है |इसे रात्रि भोजन के दो घंटे बाद पूरी रात तक लपेटा जा सकता है |
साधन -
१) खद्दर या सूती कपडे की पट्टी इतनी चौड़ी जो पेडू सहित नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक आ जाये एवं इतनी लम्बी कि पेडू के तीन-चार लपेट लग सकें |
२) सूती कपडे से दो इंच चौड़ी एवं इतनी ही लम्बी ऊनी पट्टी |

विधि :-उपर्युक्त पट्टियों की विधि से सूती/खद्दर की पट्टी को भिगोकर,निचोड़कर पेडू से नाभि के तीन अंगुल ऊपर तक लपेट दें ,इसके ऊपर से ऊनी पट्टी इस तरह से लपेट दें कि नीचे वाली गीली पट्टी पूरी तरह से ढक जाये | एक से दो घंटा या सारी रात इसे लपेट कर रखें|

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक औषधि*

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि

गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज


विशिष्ट परामर्श-
 
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वजन बढ़ाने के उपचार //Weight gain Tips



 दुबले पतले  लोगों के लिये वजन बढाने के उपचार  

                                                                                                                                  
                                                                                                                                             



      भोजन में पौषक तत्वों की कमी  बनी रहने से लोग आहिस्ता-आहिस्ता  कृष काय हो जाते हैं। अधिक दुबले पतले शरीर  मे शक्ति भी कम हो जाती है। नि:शक्त जन अपनी दिनचर्या सही ढंग से संपन्न करने में थकावट मेहसूस करते है।
   इस लेख में कतिपय ऐसे उपचारों की चर्चा की जाएगी जिनसे आप अपने शरीर का वजन बढा सकते हैं|


प्लान करें वेट गेन शेड्यूल

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपके बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई के हिसाब से यह जानने कि कोशिश करें कि आपकी लंबाई और उम्र के हिसाब से आपका वजन क‌ितना होना चाहिए।
बीएमआई आप इंटरनेट पर भी जोड़ सकते हैं या फिर खुद ही इसका हिसाब लगाएं। इसका फार्मूला है-
बीएमआई = वजन (किलोग्राम) / (ऊंचाई X ऊंचाई (मीटर में))
आमतौर पर 18.5 से 24.9 तक बीएमआई आदर्श स्थिति है इसलिए वजन बढ़ाने के क्रम में ध्यान रखें कि आप इसके बीच में ही रहें।

डाइट पर दें ध्यान

वजन बढ़ाने का मतलब यह नहीं कि आप जमकर फास्ट फूड या पैटी डाइट पर टूट पड़ें। यहां समझदारी से काम लेना जरूरी है।
थोड़ी-थोड़ी देर पर डाइट लें और अपने भोजन की मात्रा थोड़ी बढ़ाएं। डाइट में कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स की मात्रा बढ़ाएं। अध‌िक कैलोरी वाली डाइट जैसे रोटियां, रेड मीट, राजमा, सब्जियां, मछली, चिकन, ऑलिव्स और केले जैसे फल आदि की मात्रा बढ़ाएं।
दिन में कम से कम पांच बार थोड़ी-थोड़ी डाइट लें।

कसरत न छोड़ें

वजन बढ़ाने का मतलब यह नहीं कि आप आलस की चादर ओढ़ लें। शरीर को फिट रखने के लिए हर हाल में कसरत जरूरी है।
प्रतिदिन आधा घंटा भी अगर आप कसरत को देंगे तो आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म अच्छा होगा, भूख अच्छी तरह लगेगी और आप फिट रहेंगे।
कसरत और हेल्दी डाइट का कांबिनेशन वजन घटाने और बढ़ाने, दोनों के लिए जरूरी है। वेट लिफ्टिंग कसरतें इस मामले में मददगार हैं|

तनाव न लें

वजन सेहतमंद तरीके से बढ़ाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसका स्ट्रेस लेने से कोई फायदा नहीं है। कसरत और अच्छी डाइट के साथ-साथ रुटीन में आराम का थोड़ा समय निकालें।
सोने और उठने का समय निर्धारित करें जिससे शरीर तेजी से रिकवर होगा। योग और प्राणायाम के जरिए आप तनाव मुक्त होकर अपने शेड्यूल पर कायम रह सकते हैं।
      नाश्ते में बादाम,दूध,मक्खन घी  का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने से आप तंदुरस्त रहेंगे और वजन भी बढेगा।
   भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढाएं। दालों में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। अडा,मछली,मीट भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।बादाम,काजू का नियमित सेवन करें।
     बीमारी की अवस्था में,बीमारी के बाद,यात्रा से  या मेहनत  से थके होने पर,,सुबह और शाम के वक्त और उपवास  की अवस्था में अपने पार्टनर से शारीरिक संबंध बनाना हानिकारक है।
   अधिक केलोरी वाला भोजन लेते रहें।
   च्यवनप्राश वजन बढाने की और स्वस्थ रहने की मशहूर आयुर्वेदिक औषधि है। सुबह -शाम दूध के साथ सेवन करते रहें।
    आयुर्वेद में अश्वगंधा और सतावरी  के उपयोग से वजन बढाने का उल्लेख मिलता है।३-३  ग्राम  दोनों रोज सुबह लं का चूर्ण दूध के साथ प्रयोग करें। वसंतकुसुमाकर रस भी काफ़ी असरदार  दवा है।
   रोज सुबह ३-४ किलोमीटर  घूमने का नियम बनाएं। ताजा हवा भी मिलेगी और आपका मेटाबोलिस्म  भी ठीक रह्र्गा।
भोजन खूब अच्छी तरह से चबा चबा कर खाना चाहिये। दांत का काम आंत पर डालना उचित नहीं है।
दोनों वक्त शोच निवृत्ति की आदत डालें।
किशमिश-
५० ग्राम किश मिश रात को पानी में भिगोदे सुबह भली प्रकार चबा चबा कर खाएं। २-३ माह के प्रयोग से वजन बढेगा।
नारियल का दूध - 
यह आहार तेलों का समृद्ध स्रोत है और भोजन के लिए अच्छा तथा स्वादिस्ट जायके के लिए जाना जाता है। नारियल के दूध में भोजन पकाने से खाने में कैलोरी बढ़ेगी। जिससे आपके वजन में वृधि होगी।
मलाई-
 मिल्क क्रीम में आवश्यकता से ज्यादा फैटी एसिड होता है। और ज्यादातर खाद्य उत्पादों की तुलना में अधिक कैलोरी की मात्रा होती है। मिल्क क्रीम को पास्ता और सलाद के साथ खाने से वजन तेजी से बढ़ेगा।

सांस फूलने(दमा) के लिए प्रभावी घरेलू उपचार

अखरोट -
 अखरोट में आवश्यक मोनोअनसेचुरेटेड फैट होता है जो स्वस्थ कैलोरी को उच्च मात्रा में प्रदान करता है। रोज़ 20 ग्राम अखरोट खाने से वजन तेजी से प्राप्त होगा।
केला- 
तुरंत वजन बढाना हो तो केला खाइये। रोज़ दो या दो से अधिक केले खाने से आपका पाचन तंत्र भी अच्छा रहेगा।
ब्राउन राइस -
 ब्राउन राइस कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की एक स्वस्थ खुराक का स्रोत है। भूरे रंग के चावल कार्बोहाइड्रेट का भंडार है इसलिए नियमित रूप से इसे खाने से वजन तेजी से हासिल होगा।
आलू- 
आलू कार्बोहाइड्रेट और काम्प्लेक्स शुगर का अच्छा स्त्रोत है। ये ज्यादा खाने से शरीर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है।

संगृहणी(बार बार दस्त आना) के आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक उपचार 

बीन्स : 
जो लोग शाकाहारी है और नॉनवेज नहीं खाते उनके लिए बीन्स से अच्छा कोई विकल्प नहीं है। बीन्स के एक कटोरी में 300 कैलोरी होती है। यह सिर्फ वजन बढ़ने में ही मदत नहीं करता बल्कि पौष्टिक भी होता है।
मक्खन : 
मक्खन में सबसे ज्यादा कैलोरी पाई जाती है। मक्खन खाने के स्वाद को सिर्फ बढ़ाता ही नहीं बल्कि वजन बढ़ाने में भी मदद करता है।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


केन्सर रोग मे उपयोगी नुस्खे // Domestic drugs useful in cancer

                                                                                                                
केन्सर एक बीमारी नही है,अपितु लगभग १०० रोगों के सम्मिलित समूह का नाम है। इस रोग मे शरीर की कोषिकाओं (Cells) की अनियन्त्रित वृद्धि होने लगती है  और ये अनियमित आकार की कोषिकाएं अपने मूल पैदाईशी स्थान से शरीर के अन्य दूरस्थ भागों को अभिगमन करने लगती हैं। अगर इन  केन्सर सेल्स को समय रहते रोका नहीं गया तो रोगी की मृत्यु  हो जाती है।


गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज

    यह रोग वैसे तो हर उम्र में हो सकता है लेकिन आंकडों पर नजर डाली जावे तो ६० प्रतिशत केन्सर रोगी ६५  साल से ज्यादा आयु के लोग होते हैं।
  जब जांच कराने के बाद मालूम हो जाये कि केन्सर अस्तित्व में आ चुका है तो रोगी को केन्सर पैदा करने वाली चीजों से परहेज करना चाहिये-  १..तम्बाखू. २..ज्यादा शराब पीना.  ३..अधिक कैफ़िन तत्व युक्त पदार्थ जैसे चाय और काफ़ी. ४..एक्स-रे.  ५..सिर के उपर से गुजरने वाली अतिशक्ति, हाई पावर विद्युत लाईन   ६..भोजन के पदार्थों में रंग मिश्रित करना।

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*


     केन्सर रोगी के शरीर में विजातीय याने अनावश्यक जहरीले द्रव्यों का संग्रह मौजूद रहता है और इस रोग के इलाज में पहली जरूरत इन विजातीय पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना है।विजातीय पदार्थों के शरीर से निष्कासन होने से हमारा प्रतिरक्षा तन्त्र मजबूत होता है और शरीर में केन्सर से लडने की ताकत पैदा होती है।

 जहरीले विजातीय पदार्थों के निष्कासन के लिये क्या करें?


१) अदरक का रस दो चम्मच दिन में दो मर्तबा पीयें।
२) अंग्रेजी औषधी Inositol  ८०० एम जी प्रतिदिन लेते रहें।
३) अंग्रेजी दवा ग्लुटाथिओन १५० एम.जी रोज लें।

हाथ पैर और शरीर का कांपना कारण और उपचार

४) लिपोईक एसिड ६०० एम जी प्रतिदिन लें।
उक्त  दवाएं किसी जानकार चिकित्सक के मार्ग दर्शन में लेना फ़ायदेमंद रहेगा।
केन्सर के ट्युमर का पोषण  बंद करने के लिये निम्न उपचार करें--
१) हल्दी

२)  लहसुन
३)फ़ोलिक एसिड
 ४)अलसी का तेल १५ ग्राम प्रतिदिन
 ५  सेलेनिअम ४०० एम जी  प्रतिदिन
 ६)विटामिन   ई  ८०० एम जी रोज।


गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग



        केन्सर से लडने के लिये हम क्या खाएं?

                   अंकुरित गेहूं याने जुवारे २० ग्राम  पीसकर रस बनाकर प्रतिदिन पीयें। इससे नया खून बनेगा और केन्सर से लडने की ताकत बढेगी।





लहसुन और प्याज प्रचुर मात्रा में सेवन करना केन्सर रोग में हितकारी उपाय है।




पत्तेदार हरी सब्जीयां,लाल मिर्च, अंगूर बैर,गाजर इन भोजन पदार्थों में एन्टि ओक्सीडेन्ट तत्व होते हैं जो केन्सर के विरुद्ध लडाई में मददगार होते हैं।

स्तनों का दूध बढ़ाने के उपाय 


      इनके अलावा केन्सर रोगी को निम्न पदार्थों का प्रचुर मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है--फ़ूल गोभी. पत्तागोभी, ब्रोकली,  आलू, मक्का, भूरे चावल ,मछली,अखरोट और सेव फ़ल।
 सबसे जरूरी बात ये है कि केंसर  के सेल्स याने कोषिकाओं का  पोषण बंद करना चाहिये जिससे केन्सर की कोषिकाएं भूखे मरकर समाप्त होने लगे।  इसके  लिये निम्न बातों पर ध्यान दें---
१)  शकर एसा पदार्थ है जिससे केन्सर को पोषण मिलता है। अत: शकर का उपयोग करना छोड दें, इसकी जगह थौडी मात्रा में शहद या  गुड ले सकते हैं।
  २)  दूध मे श्लेष्मा होती है।  आंतों में मौजूद श्लेष्मा केन्सर कोषिकाओं का पोषण करती है अत: दूध और दूध से बने पदार्थ उपयोग में न लाएं।  हां,सोयाबीन का दूध ले सकते हैं। इस  उपचार से केन्सर के सेल्स भूखों मरेंगे और समाप्त होने लगेंगे।
 ३) केन्सर सेल्स अम्लीय वातावरण में तेजी से पनपते हैं। मंसाहार अम्लीय गुण वाला होता है। इसलिये केन्सर रोगी मांसाहार छोड दें।

बढ़ी हुई तिल्ली प्लीहा के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

४)  काफ़ी,चाय,चाकलेट में ज्यादा मात्रा में केफ़िन तत्व होता है जो केन्सर को बढावा देता है,अत: इनका त्याग आवश्यक है।
५)  केन्सर सेल्स का आवरण मजबूत प्रोटीन से बना होता है  जब मांसाहार से परहेज करेंगे तो शरीर मे अधिक मात्रा में एन्जाईम उत्पादन होंगे और ये एन्जाईम केन्सर सेल्स की दीवारो पर चोट कर उन्हें नष्ट करेंगे।और ये एन्जाईम हमारे शरीर के स्वस्थ्य सेल्स को ताकत देंगे  जिससे वे केन्सर के सेल्स को नष्ट कर सकेंगे।
६)  केन्सर के सेल्स भरपूर आक्सीजन युक्त वातावरण में जीवित नहीं रह सकते। अत: शरीर में      आक्सीजन का प्रवाह बढाने के लिये योग और  प्राणायाम करने लाभदायक रहेंगे।


मूत्राषय प्रदाह(cystitis)के सरल उपचार


   कच्चा भोजन फ़ायदेमंद है-

      केन्सर रोगी के भोजन में ८० प्रतिशत सब्जियों का रस जरूरी है। अनाज के बीज,सूखे मेवे और कुछ फ़ल भी ले सकते हैं।  बाकी २० प्रतिशत भोजन पकाया हुआ या उबाला हुआ लेना चाहिये। यह केन्सर रोगी का आदर्श भोजन विधान है।


  ताजा सब्जीयों में ऐसे एन्जाईम होते हैं जो शीघ्र ही  हमारी कोशिकाओं की  गराई तक पहुंच जाते हैं  जिससे स्वस्थ सेल्स का निर्माण होता है  । सभी तरह की सब्जीयों का  रस पियें और कच्ची सब्जियां भी भरपूर तादाद में इस्तेमाल करें।








      एक ताजा शोध में यह प्रमाणित हुआ है कि तुलसी और पुदिने में ऐसे रासायनिक तत्व काफ़ी मात्रा में पाये जाते हैं जिनमें केन्सर उत्पादक फ़्री रेडिकल्स से लडने की शक्ति मौजूद रहती है।

   करेला का जूस केंसर में लाभदायक है--

वैसे तो करेला मधुमेह रोग में बहुत बढ़िया असर दिखाता है और शुगर का लेविल शीघ्र ही सामान्य हो जाता है, लेकिन नए अनुसंधान में यह साबित हुआ है कि इससे केंसर रोग की रोक-थाम की जा सकती है| करेले में एक रसायन पाया गया है जो केंसर युक्त कोशिकाओं को ग्लूकोस इस्तेमाल करने से रोकता है| केंसर की कोशिकाएं ग्लूकोज नहीं मिलने से बेदम होने लगती है और धीरे धीरे नष्ट हो जाती हैं| वैज्ञानिकों ने पाया है कि करेले का जूस सिर,गले और आंतों के केंसर में उपकारी है| वैसे तो केन्सर का कारगर ईलाज जैसी कोई बात अभी तक इस दुनियां में नहीं है लेकिन मेरे बताये कुदरती उपचारों से केन्सर रोगी की जीवन रेखा में ईजाफ़ा होगा और क्वालिटी आफ़ लाईफ़ में भी सुधार होगा।मन मजबूत बनाकर निर्देशों के मुताबिक अपनी जीवनशैली निर्धारित करें।



जामुन के फायदे



जामुन कम समय के लिए आने वाला लेकिन बेहद लाभदायक फल है। यह स्वाद और सेहत से भी भरपूर होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। जामुन के सेवन से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
*यह पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी है। खास बात यह है कि डायबिटीज वाले लोग भी इसका सेवन कर सकते हैं। बस एक बात का ध्यान रखें कि कभी भी खाली पेट जामुन का सेवन न करें।

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

न ही कभी जामुन खाने के बाद दूध का सेवन करें। साथ ही अधिक मात्रा में भी जामुन खाने से बचें।
*यदि आप अपने चेहरे पर रौनक लाना चाहती हैं तो जामुन के गूदे का पेस्ट बनाकर इसे गाय के दूध में मिलाकर लगाने से निखार आता है।
 *विटामिन सी की कमी को दूर करने के लिए जामुन खाना अच्छा रहता है। बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा कि जामुन में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

 *जामुन शुगर पेशेंट के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमे कैरोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सोडियम भी पाया जाता है। इस वजह से यह शुगर का लेवल मेंटेन रखता है।
 जामुन का सिरका बनाकर बराबर मात्रा में पानी मिलाकर सेवन करने से यह न केवल भूख बढ़ाता है, बल्कि कब्ज की शिकायत को भी दूर करता है।

*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*

* जामुन में फ्लेवोनॉइड्स, फेनॉल्स, प्रोटीन और कैल्शियम भी पाया जाता है, जो सेहत के लिए लाभकारी होता है।
*ग्लूकोज और फ्रक्टोज के रूप में मिलने वाली शुगर शरीर को हाईड्रेट करने के साथ ही कूल और रिफ्रेश करती है।
*जामुन में फाइटोकेमिकल्स भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
* अगर आपको कमजोरी महसूस होती है या आप एनीमिया से पीडित हैं तो जामुन का सेवन आपके लिए 
फायदेमंद रहेगा।

कालमेघ के उपयोग ,फायदे

 *यदि आपको एसिडिटी की समस्या रहती है तो काले नमक में भुना जीरा मिलाकर पीस लें। फिर इसके साथ जामुन का सेवन करें। एसिडिटी की समस्या दूर हो जाएगी।
 *यदि आपका बच्चा बिस्तर गीला करता है तो जामुन के बीजों को पीसकर आधा-आधा चम्मच दिन में दो बार पानी के साथ पिलाएं।
जामुन के और भी फायदे हैं-

*जामुन को मधुमेह के बेहतर उपचार के तौर पर जाना जाता है।
*पाचनशक्ति मजबूत करने में जामुन काफी लाभकारी होता है।



रतनजोत के औषधीय प्रयोग,उपयोग,लाभ


*यकृत (लिवर) से जुड़ी बीमारियों के बचाव में जामुन रामबाण साबित होता है।
*अध्ययन दर्शाते हैं कि जामुन में एंटीकैंसर गुण होता है।
*कीमोथेरेपी और रेडिएशन में जामुन लाभकारी होता है।
*हृदय रोगों, डायबिटीज, उम्र बढ़ना और अर्थराइटिस में जामुन का उपयोग फायदेमंद होता है।
*जामुन का फल में खून को साफ करने वाले कई गुण होते हैं।
*जामुन का जूस पाचनशक्ति को बेहतर करने में सहायक होता है।



दमा( श्वास रोग) के असरदार उपचार


*जामुन के पेड़ की छाल और पत्तियां रक्तचाप को नियंत्रित करने में कारगर होती हैं।
*कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें। जामुन का सिरका गुणकारी और स्वादिष्ट होता है, इसे घर पर ही आसानी से बनाया जा सकता है और कई दिनों तक उपयोग में लाया जा सकता है।
*सिरका बनाने की विधि- काले पके हुए जामुन साफ धोकर पोंछ लें। इन्हें मिट्टी के बर्तन में नमक मिलाकर मुँह साफ कपड़े से बाँधकर धूप में रख दें। एक सप्ताह धूप में रखने के पश्चात इसको साफ कपड़े से छानकर रस को काँच की बोतलों में भरकर रख लें। यह सिरका तैयार है।


शुक्राणुओ में वृद्धि करने के रामबाण उपाय

मूली, प्याज, गाजर, शलजम, मिर्च आदि के टुकड़े भी इस सिरके में डालकर इसका उपयोग सलाद पर आसानी से किया जा सकता है। जामुन साफ धोकर उपयोग में लें।
*यथासंभव भोजन के बाद ही जामुन का उपयोग करें। जामुन खाने के एक घंटे बाद तक दूध न पिएँ। जामुन पत्तों की भस्म को मंजन के रूप में उपयोग करने से दाँत और मसूड़े मजबूत होते है|


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

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लंबे बालों को सेहतमंद रखने के उपाय


                                                                      

गर्मी में लंबे बालों को संभालना ज्यादा मुश्किल हो जाता है। आपके दिल में भी कई बार अपने बालों को इसी वजह से कटवाने का ख्याल आया होगा। पर समस्या है तो समाधान भी तो है। बताते हैं गर्मी में अपने लंबे बालों की देखभाल कैसे करें,
*गर्मी के मौसम में बालों की समस्या बढ़ जाती है। अगर लंबे बाल हों तो उनको संभालना और मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हम लंबे बालों को एक मुसीबत के रूप में देखते हैं और अक्‍सर बालों को कटवाने का खयाल मन में आने लगता है। गर्मी के इन तीन महीनों में बाल ज्यादा घुंघराले और भारी भी हो जाते हैं, जिसके कारण वे और मुश्किल पैदा करते हैं।

डेंगू ज्वर :कारण और निवारण के उपाय 


*आप जूड़ा भी बना सकती हैं। बाल सुरक्षित रहेंगे और उलझेंगे भी नहीं। इसके अलावा आप बालों में गांठ भी लगा सकती हैं। बालों में तरह-तरह से गांठ लगाएं, बालों को एक नया लुक मिलेगा।
*इस मौसम में बालों को अतिरिक्त गर्मी बिल्कुल न दें। बालों में हेयर ड्रायर या हेयर कर्लर का प्रयोग बिल्कुल न करें। इनके प्रयोग से आपके बालों को नुकसान पहुंचेगा और बाल झड़ने भी लगेंगे। लंबे बालों को हमेशा प्राकृतिक तरीके से ही सुखाने की कोशिश करें।
*गर्मी के मौसम में पानी बहुत महत्वपूर्ण होता है, इससे आपमें नमी की कमी नहीं होगी। यह न सिर्फ आपके लिए, बल्कि आपके बालों के लिए भी बहुत जरूरी है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। एक दिन में 8 से 10 गिलास पानी कम-से-कम पिएं। घर से बाहर निकल रही हैं, तो पानी जरूर रखें।
*इसके अलावा इस मौसम में पोषणयुक्त आहार का सेवन अवश्य करें। मौसमी फल और तरबूज खाने से बालों को पोषण मिलता है और इससे बाल मजबूत और घने होते हैं। 
बालों में बार-बार हाथ फेरना भी बुरी आदत है। हम पहले कीटाणुयुक्त चीजें छूते हैं, फिर उसी गंदे हाथ से अपने बाल छूते हैं। यही कीटाणु डैंड्रफ व बालों के टूटने की वजह बनते हैं।
*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*
पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज

किस दवा के साथ क्या क्या न खाएं




चिकित्सक अक्सर परामर्श देते हैं कि दवाएं कभी भी खाली पेट नहीं खानी चाहिए, इसके बहुत आनुषंगिक दुष्प्रभाव होते हैं। लेकिन अगर कुछ दवाएं खा भी रहे हैं तो भी ध्यान रखना होगा कि क्या खा रहे हैं। कुछ बीमारियों से जुड़ी दवाइयां हर किसी चीज के साथ नहीं खा सकते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे कुछ खास कॉम्बिनेशन लेने से बचना चाहिए।


*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

*मुलेठी शरीर में पोटेशियम को कम करती है जो दिल की बीमारी वालों के लिए खतरनाक हो सकता है। उच्च रक्तचाप, धड़कनों का बढ़ना या दिल के दौरे का इलाज कर रहे हो तो मुलेठी खाने से बचें। दोनों चीजें एक साथ लेने से शरीर में पोटेशियम का स्तर एक साथ घट जाएगा, जो कि खतरनाक हो सकता है।
*ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए दवाएं ले रहे हैं तो केले मत खाएं। कारण ये है कि केले में खूब सारा पोटेशियम होता है जो दवा के अतिरिक्त लेने से शरीर में पोटेशियम के स्तर को दोगुना कर देगा। बहुत सारा पोटेशियम दिल की धड़कनों को अनियंत्रित कर सकता है और घबराहट पैदा करेगा।


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

*कफ या जुकाम की दवा ले रहें हो तो उस समय नींबू या संतरे जैसे खट्टे फल ना खाएं।
*पेरासिटामोल, पेनकिलर या फिर अगर डॉयबटीज की दवा ले रहे हैं तो उस दौरान शराब ना पिएं। कारण ये है कि इन दवाओं को लेने के बाद लीवर को अतिरिक्त काम करना पड़ता है लेकिन उसी समय शराब पी जाएं तो यकृत को दोगुना काम करना पड़ेगा। इस तरह से दोगुना काम करने की वजह से लीवर को नुकसान हो सकता है। यकृत के क्षतिग्रस्त होने की आंशका बढ़ सकती है।


*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

*वॉरफेरिन, ये दवा खून के थक्के नहीं बनने देती। इसे या ऐसी कोई भी दवा खा रहे हैं तो हरे पत्तेदार सब्जियां कम खाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन सब्जियों में विटामिन k बहुत ज्यादा होता है जो खून में थक्के बनाता है। *जब आप इन दवाओं के साथ वॉरफेरिन खाएंगे तो दवा का असर कम हो जाएगा और फायदा नहीं पहुंचेगा।

*गठिया रोग के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार*

*सिप्रोफ्लोक्सेसिन और टेट्रासाइक्लिन को एक ग्लास पानी के साथ ही लेना चाहिए। इसे खाना खाने से एक घंटे पहले या फिर खाने के दो घंटे बाद लें। इन दवाओं को सोखने में समय लगता है जिससे अगर खाना खा लिया जाए तो ये काम बाधित हो जाता है। ऐसा दूध के साथ ज्यादा होता है। तो इन दवाओं को दूध के साथ ना लें।