तन्दुरस्त रहने के सरल उपाय


सेहत मंद रहने के सरल उपचार 


*बेसन, मैदा और व्हाइट ब्रेड की जगह सोयाबीन, सूजी और ब्राउन ब्रेड का उपयोग करें।
बाजार में मिलने वाले कृत्रिम व डिब्बाबंद पदार्थों के सेवन से बचें। इनमें उपयोग किए गए 'प्रिजरवेटिव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं ।
*यदि हरी सब्जियों और अंकुरित चीजों का प्रयोग सामान्य तरीके से करने से घर के सदस्यों उसे खाने में रुचि नहीं लेते तो इन्हीं वस्तुओं का प्रयोग अलग तरीके से किया जा सकता है। मसलन-वेजीटेबल पराठा या स्प्राउट चीला या डोसा।
*बवासीर (पाइल्स) में रक्त आता हो तो नींबू की फांक में सेंधा नमक भरकर चूसने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।
आधे नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर चाटने से तेज खाँसी, श्वास व जुकाम में लाभ होता है।
शहद ज्ञान तंतुओं की उत्तेजना को शांत करता है। इससे हृदय की अधिक धड़कन सामान्य हो जाती है। उच्च रक्तचाप के रोगियों की रक्तवाहिनियों को यह शक्ति देता है।
*एक नींबू के रस में तीन चम्मच शकर, दो चम्मच पानी मिलाकर, घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद अच्छे से सिर धोने से रूसी दूर हो जाती है व बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम दो बार नित्य एक महीना पीने से पथरी पिघलकर निकल जाती है।
*नींबू को तवे पर रखकर सेंक लें (दो भाग करके)। उस पर सेंधा नमक डालकर चूसें। इससे पित्त की दिक्कत खत्म होती है।
*मिशिगन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में कहा गया है कि चॉकलेट का मस्तिष्क पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है, जैसा अफीम का पड़ता है।
*दर्द निवारक दवाइयों के लंबे समय तक इस्तेमाल करने से न सिर्फ लीवर और किडनी के खराब होने का खतरा रहता है बल्कि इनसे दिल के दौरे पडऩे तथा ह्रदय संबंधित समस्याएं होने का खतरा भी हो सकता हैं1
नींद नहीं आने की समस्या मधुमेह और दिल संबंधी बीमारी की आशंका बढ़ा सकती है।
*दिन भर में में कम से कम आठ से दस ग्लास पानी पिएं। जितना पानी आप पिएंगें उतना ही आपके दांत साफ होंगें। इसके अलावा यह चाय, कॉफी, शराब, सोडा आदि के दागों को भी दांतों से मिटाने में कारगर साबित होगा।
अपने खाने में फल और सब्जी शामिल करें। सेब, खीरा, गाजर आपके दांतों को प्राकृतिक रूप से साफ करते हैं। यह आपके दांतों में फंसे खाने को भी निकालते हैं और मसूड़ों की समस्या दूर होती है। 

*खाने के बाद पनीर का टुकड़ा खाने से आपके दांत चमकदार रहते हैं।
*जूस और सोडा पीने के बाद ब्रश नहीं करना चाहिए। हो सके तो कॉफी और वाइन स्ट्रॉ से पिएं। इससे इनका सीधा संपर्क आपके दांतों से नहीं हो पाएगा और आपके दांत हमेशा चमकते रहेंगें।
*अदरक के रस में या अडूसे के काढ़े में शहद मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है।
*प्याज का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर चाटने से कफ निकल जाता है तथा आंतों में जमे विजातीय द्रव्यों को दूर कर कीड़े नष्ट करता है। इसे पानी में घोलकर एनीमा लेने से लाभ होता है।
*हृदय की धमनी के लिए शहद बड़ा शक्तिवर्द्धक है। सोते वक्त शहद व नींबू का रस मिलाकर एक ग्लास पानी पीने से कमजोर हृदय में शक्ति का संचार होता है।
*सूखी खाँसी में शहद व नींबू का रस समान मात्रा में सेवन करने पर लाभ होता है।
अदरक का रस और शहद समान मात्रा में लेकर चाटने से श्वास कष्ट दूर होता है और हिचकियां बंद हो जाती हैं।
कब्जियत में टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद डालकर सेवन करें, लाभ होगा।
*10 मिनट में हो सकते हैं फिट-
कुछ लोगों की यह धारणा है कि चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए हर दिन घंटों पसीना बहाना पड़ता है, लेकिन हाल ही में जर्मनी में हुए शोधों से पता चला है कि यह धारणा सही नहीं है। इस शोध के मुताबिक 10 मिनट का व्यायाम भी आपको तरोताजा बनाये रखने के लिए काफी है। हो सकता है कि 10 मिनट के व्यायाम से आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम न हो, लेकिन 10 मिनट की एक्सरसाइज आपमें जोश भर देगी और आप सारा दिन खुद को तरोताजा महसूस करेंगी। इसका असर आपके काम पर भी पड़ेगा यानी 10 मिनट की एक्सरसाइज आपके काम करने की क्षमता को बढ़ायेगी।
*हर दिन 10 मिनट का व्यायाम बीमारियों से लडऩे की शक्ति को 40 फीसदी तक बढ़ाता है।
दफ्तर की सीढिय़ां चढऩा, उतरना तथा पार्किग स्थल से दफ्तर तक पैदल चलना भी तरोताजा रखने वाला व्यायाम है।
*सुबह-सुबह 10 मिनट की जॉगिंग कई घंटों तक आपमें चुस्ती बरकरार रख सकती है। यह ध्यान रखें कि *व्यायाम को मौज मस्ती में करें यानी उसे बोझ समझकर न करें।
*बुखार, थकान, कमजोरी महसूस करने की स्थिति में व्यायाम से बचें।
*ध्यान रखें, जहां व्यायाम करें वहां शांति हो, जगह साफ-सुथरी हो, प्राकृतिक हवा हो और पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी हो।
*व्यायाम का समय बढ़ाना हो तो धीरे-धीरे बढ़ाएं, एकदम से समय बढ़ाने से थकान, कमजोरी की शिकार हो सकती हैं।
*व्यायाम के समय बातचीत न करें, व्यायाम के समय चुप रहने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि


शहद का उपयोग बेहतर स्वास्थ्य के लिए


 
स्वस्थ शरीर के लिए शहद या मधु बहुत ही लाभकारी होता है। यह विस्मयकारी गुणों से भरपूर है। शहद बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी के लिए अच्छा होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन बी, सी, लौह, मैगनीयिम, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, सोडियम आदि गुणकारी तत्व होते हैं।

शहद के लाभ-

     *  शहद में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, अमीनो एसिड, प्रोटीन और खनिज पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। जोकि सेहत के लिए जरूरी होते हैं।

बवासीर  के  रामबाण  उपचार 

*शहद में ग्लूकोज पाया जाता है। साथ ही शहद में पाए जाने वाले  विटामिन शरीर के भीतर जाते ही कुछ ही समय में घुल जाते  है।
* बच्चों की खांसी दूर करने के लिए अदरक के रस में शहद मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है। सूखी खांसी में भी शहद और नींबू का रस लेने से फायदा होता है।
जी मिचला रहा हो या फिर उल्टी आने की शिकायत हो तो शहद लेना चाहिए।
*शहद के सेवन से कब्ज भी दूर होती है। कब्ज की शिकायत होने पर टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर खाने से लाभ होता है।


आँखों  का चश्मा  हटाने का अचूक  घरेलू उपाय

*यदि आप वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो रात में दूध में शहद डालकर पियें\
*मांसपेशी मजबूत करनी हो, ब्लड प्रेशर सामान्य करना हो या हीमोग्लोबिन बढ़ाना हो तो शहद का सेवन अत्यंत हितकर है\
*यदि आप थकान महसूस करते हैं या फिर आपको एनीमिया है तो आप नियमित रूप से शहद का सेवन कर इस बीमारी को दूर कर सकते हैं

*वजन बढ़ाने और वजन घटाने के लिए भी शहद लाभकारी है। आप यदि गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लेंगे तो कुछ ही समय में आप अपना वजन कम होते हुए देख सकते हैं।
*अर्थराइटिस के दर्द से निजात पानी हो या फिर जोड़ों में अधिक दर्द हो तो शहद में दालचीनी का पाउडर मिलाकर मसाज करनी चाहिए।
*जुकाम दूर करने के लिए शहद, अदरक और तुलसी के पतों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर चाटने से राहत मिलती है।
*यदि आपको ठीक तरह से नींद नहीं आती तो रात को दो चम्मच शहद खाकर सोना लाभकारी होता है।
*शहद का नियमित और उचित मात्रा में उपयोग करने से शरीर स्वस्थ, सुंदर, बलवान, स्फूर्तिवान बनता है और दीर्घ जीवन प्रदान करता है।
*गर्भावस्था के दौरान शहद का सेवन करने से होने वाला बच्चा स्वस्थ एवं मानसिक दृष्टि से अन्य शिशुओं से श्रेष्ठ होती है।
*त्वचा के जल जाने, कट जाने या छिल जाने पर भी शहद लगाने से लाभ मिलता है।
*आखों में रोज 1-2 शहद की बूंद डालने से आखों की रोशनी बढ़ती है।
*शहद का रोजाना सेवन करने से दिल और दिमाग की शक्ति बढ़ती है।
*शहद को अनार के रस में मिलाकर लेने से दिमागी कमजोरी, सुस्ती, निराशा तथा थकावट आदि दूर होते हैं।
*हृदय के लिए भी शहद गुणकारी है, मीठी सौंफ के साथ 1-2 चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से दिल को मजबूत तो करता ही है। हृदय को सुचारू रूप से कार्य करने में भी मदद करता है।

*शहद को एक खाद्य एंव प्राकृतिक औषधि माना गया है जो शरीर को स्वस्थ, निरोग और ऊर्जावान बनाये रखने में लाभदायक है।


कैसे करें शुद्ध शहद की जांच ?

*कांच के गिलास में पानी भरकर शहद की एक बूंद टपकाने के बाद सीधी तली तक जाकर बैठ जाए तो शहद शुद्ध होगा। शहद की एक बूंद लकड़ी या किसी प्लेट पर टपका दें, आग लगा दें, असली शहद तत्काल जलेगा, नकली देर से जलेगा।
*शुद्ध शहद सुगंधित होता है, जाड़े में जम जाता है, गर्मी में पिघल जाता है। शुद्ध शहद क दाग नहीं लगता। किसी प्लेट पर चार बूंद टपकाएं को नीचे सांप की कुंडली जैसी बन जाती है।

पिपली  के गुण प्रयोग लाभ 

*शुद्ध शहद में मक्खी के पंख फंसेंगे नहीं। आंख पर लगाने से जलन करेगा, लेकिन चिरमिराहट नहीं करेगा, बल्कि थोड़ी देर बाद ठंड़क देगा। देखने में पारदर्शी व साफ नजर आता है। कुत्ता कभी शुद्ध शहद नहीं खाएगा।

सावधानी बरतें-

* गर्म करके गर्म पदार्थों के साथ  सेवन नहीं करना चाहिए।
*गर्म किया शहद, गर्म पदार्थ एवं जो छूने में गर्म लगे ऐसे पदार्थों के साथ दिया शहद एकदम हानिप्रद साबित होता है।
*दूध व जल के  साथ सेवन करते  समय दोनों वस्तुएं ठंडी होना चाहिए।
*शहद व घी समान मात्रा में मिलाकर कभी भी सेवन नहीं करना चाहिए।
*जल भी समान मात्रा में नहीं होना चाहिए।
*घी की मात्रा 1/4 चौथाई व पानी की चार गुना होना चाहिए।






आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

पेट-कमर कैसे कम करें






गलत ढंग से आहार-विहार यानी खान-पान, रहन-सहन से जब शरीर पर चर्बी चढ़ती है तो पेट बाहर निकल आता है, कमर मोटी हो जाती है । इसी अनुपात से हाथ-पैर और गर्दन पर भी मोटापा आने लगता है। जबड़ों के नीचे गरदन मोटी होना और तोंद बढऩा मोटापे के मोटे लक्षण हैं।
मोटापे से जहाँ शरीर भद्दा और बेडौल दिखाई देता है, वहीं स्वास्थ्य से सम्बंधित कुछ व्याधियाँ पैदा हो जाती हैं, लिहाजा मोटापा किसी भी सूरत में अच्छा नहीं होता। बहुत कम स्त्रियाँ मोटापे का शिकार होने से बच पाती हैं।




हर समय कुछ न कुछ खाने की शौकीन, मिठाइयाँ, तले पदार्थों का अधिक सेवन करने वाली और शारीरिक परिश्रम न करने वाली स्त्रियों के शरीर पर मोटापा आ जाता है। प्राय: प्रसूति के बाद की असावधानी और गलत आहार-विहार करने से स्त्रियों का पेट बढ़ जाया करता है।
भोजन के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। इससे पेट और कमर पर मोटापा नहीं चढ़ता, बल्कि मोटापा हो भी तो कम हो जाता है।
आहार भूख से थोडा कम ही लेना चाहिए। इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता। पेट में गैस नहीं बने इसका खयाल रखना चाहिए। गैस के तनाव से तनकर पेट बड़ा होने लगता है। दोनो समय शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए।
भोजन में शाक-सब्जी, कच्चा सलाद और कच्ची हरी शाक-सब्जी की मात्रा अधिक और चपाती, चावल व आलू की मात्रा कम रखना चाहिए।
सप्ताह में एक दिन उपवास या एक बार भोजन करने के नियम का पालन करना चाहिए। उपवास के दिन सिर्फ फल और दूध का ही सेवन करना चाहिए।
पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए। इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रखकर सेंकें। प्रतिदिन 10 मिनट सेंक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा।
सुबह उठकर शौच से निवृत्त होने के बाद निम्नलिखित आसनों का अभ्यास करें या प्रात: 2-3 किलोमीटर तक घूमने के लिए जाया करें। दोनों में से जो उपाय करने की सुविधा हो सो करें।
भुजंगासन,






शलभासन,





उत्तानपादासन,

सर्वागासऩ, हलासन, सूर्य नमस्कार। इनमें शुरू के पाँच आसनों में 2-2 मिनट और सूर्य नमस्कार पाँच बार करें तो पाँच मिनट यानी कुल 15 मिनट लगेंगे।
भोजन में गेहूँ के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। इसका अनुपात है 10 किलो चना व 2 किलो जौ। इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएँ। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।
प्रात: एक गिलास ठण्डे पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर पीने से भी कुछ दिनों में मोटापा कम होने लगता है।
दुबले होने के लिए दूध और शुद्ध घी का सेवन करना बन्द न करें। वरना शरीर में कमजोरी, रूखापन, वातविकार, जोड़ों में दर्द, गैस ट्रबल आदि होने की शिकायतें पैदा होने लगेंगी।ऊपर बताए गए उपाय करते हुए घी-दूध खाते रहिए, मोटापा नहीं बढ़ेगा। इस प्रकार उपाय करके पेट और कमर का मोटापा निश्चित रूप से घटाया जा सकता है। ये सब उपाय सफल सिद्ध हुए हैं।


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रोज करें थोड़े से तुलसी के पत्तों का प्रयोग




तुलसी घर के वातावरण को पवित्र बनाती है साथ ही हवा में मौजूद बीमारी के बैक्टीरिया आदि को नष्ट कर देती है। तुलसी की सुंगध हमें श्वास संबंधी कई रोगों से बचाती है। साथ ही तुलसी की एक पत्नी रोज सेवन करने बार-बार बुखार नहीं आता।
तुलसी की पत्नी खाने से हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है।तुलसी एक औषधी है। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बूटी के समान माना जाता है। तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बड़ी-बड़ी जटिल बीमारियों को दूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक है। कहते हैं जो व्यक्ति प्रतिदिन तुलसी की पांच पत्तियां खा लेते हैं वह अनेक प्रकार के रोगों से सुरक्षित रहते हैं

तुलसी के तीन महीने तक सेवन करने से खांसी, सर्दी,बुखार, मलेरिया, कालाजार, जुकाम या काफ, जन्मजात जुकाम, श्वास रोग, दमा, स्मरण शक्ति का अभाव, पुराना से पुराना सिरदर्द, नेत्र-पीड़ा, उच्च अथवा निम्न रक्तचाप, ह्रदय रोग, शरीर का मोटापा, अम्लता, पेचिश, कब्ज, गैस, मन्दाग्नि,गुर्दे का ठीक से काम न करना, गुर्दे की पथरी खून की कमी,दांतों का रोग, सफेद दाग तथा अन्य बीमारियां, गठिया का दर्द, वृद्धावस्था की कमजोरी, विटामिन ए और सी की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग, सफेद दाग, कुष्ठ तथा चर्म रोग, शरीर की झुर्रियां, पुरानी बिवाइयां, महिलाओं की बहुत सारी बीमारियां, बुखार, खसरा आदि रोग दूर होते है।
सिर, गले, नाक का दर्द, आंख के रोग, सूजन, खुजली, अजीर्ण, उलटी , हृदयरोग, कृमि, फोड़े, मुहांसे, जलन , बालतोड़, लू लगना, स्नायूपीड़ा, स्वप्नदोष, मूर्छा, विष आदि तथा स्त्रियों और बच्चों के सामान्य रोगों के लिए चिकित्सा स्वयं ही की जा सकती है। 
तुलसी स्वाईन फ्लू को दूर रखने के लिए उपयोगी है। तुलसी के उपयोग से मनुष्यों में रोग प्रतिरोधक क्षमता तीव्रता से बढ़ती है और खाली पेट बीस-पच्चीस तुलसी के पत्तों का सेवन करने से स्वाईन फ्लू से बचा जा सकता है। तुलसी दमा टी.बी. में गुणकारी हैं।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


गर्भवती स्त्री को उल्टी ,जी मचलाना के आसान उपचार




 1) किसी  भी तरह की उल्टी हो रही हो या जी मिचलाता हो  तो सूखा धनिया या हरा धनिया कूट-पीस कर   निचोड़ कर  तरल तैयार कर लें|  ५-५ चम्मच  तरल बार - बार देते रहें\ इससे उल्टी रुक सकती है|  गर्भवती  की उल्टी  के लिए भी यह उपाय  सफल रहता है|
2)  चार नींबू का रस निकाल  कर छान लें|  ५० ग्राम सैंधा नमक डालें और  १२५ ग्राम जीरा  रस में भिगो दें|  धीरे -धीरे जब रस पूरी तरह सूख जाए और  सिर्फ जीरा रह जाये  तो इसे कांच या प्लास्टिक की शीशी में भरकर रख लें| जब उल्टी आती हो तब इसे आधी चम्मच मात्रा में मुहं में  चूसें|  उल्टी काबू में आ जाती है|
3)  अदरक व प्याज का रस दो-दो चम्मच  पिलाने से उल्टी होना बंद हो जाती है\
4) बार-बार उल्टी होना रोकने के लिए बर्फ चूसना हितकारी उपचार है|

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


5) तुलसी के पत्ते पीसकर रस निकालें| इसके सेवन से उल्टी बंद होती है और पेट के कृमि  भी मर जाते हैं|
6) तुलसी के पत्ते के रस में शहद मिलाकर चाटने से  लाभ मिलता है|
7) पित्त की उल्टी होती हो तो शहद और दालचीनी  मिलाकर चाटना कर्त्तव्य है|
8)   २ लौंग पानी में  उबालकर  पियें| उल्टी में हितकारी असर होता है| लौंग चबाकर भी खाया  जा  सकता  है|

स्तनों को जल्द बड़े बनाने के उपाय 

9)  गर्भवती  स्त्री  भुने चने का सत्तू  पानी में  पतला  घोल बनाकर  ,नमक शकर  मिलाकर  पीये तो उल्टी  की समस्या दूर होती है|
10) यात्रा के दौरान खान पान की गडबडी से उल्टी आती हो तो लहसुन की कली चबाने से लाभ मिलता है|
11)  जी मिचलाने पर प्याज काटें उसमें नींबू रस  और  काला  नमक मिलाकर  खाना  चाहिए
12)  गर्भवती स्त्री को गाजर का रस बराबर  पिलाते रहें| इससे केल्शियम  की  कमी नहीं होगी तथा  रक्त में हीमोग्लोबिन का उचित स्तर कायम रहेगा|
13)  कच्चे टमाटर  के रस में शहद मिलाकर देना चाहिए, इससे  गर्भिणी एनीमिया  की शिकार नहीं होगी  | इससे भूख भी बढ़ती है|
14)  गर्भिणी को खाना खाने के बाद थौड़ी  अजवाइन जरूर  लेना  चाहिए| इससे मिचली नहीं होती और खाना ठीक से  हजम होता है|

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15)  दैनिक आहार में हरी सब्जिया  लेना  स्वास्थ्यकारी  रहता है ,इससे  आयरन  की  पूर्ति  होती है|
16)  हर्रे को पीसकर  शहद  के साथ चाटें,  उल्टी  बंद करने का अच्छा  उपाय है|
17)  पूरे गर्भ काल में  दस मिली सौंफ का अर्क पीते रहना चाहिए ,इससे गर्भपात की संभावना नहीं रहती है|
18)  गर्भिणी को  आँवला किसी भी रूप लेना हितकर है| आंवला  शरीर  को एक अंडे  से भी ज्यादा शक्ति,स्फूर्ति ,बल देता है|
19)  एक कप कच्चे दूध में एक चुटकी  पीसी  फिटकरी  डालकर  पीने से  गर्भ गिरना रुक जाता है|
20)  गर्भिणी को नारियल गोला और मिश्री  का उपयोग करना चाहिए| इससे  प्रसव आसानी से होता है|

मर्दानगी(सेक्स पावर) बढ़ाने के नुस्खे 

21)  जिस स्त्री को बार-बार गर्भ गिर जाता है वह गर्भावस्था में सिंघाड़े खाए तो  गर्भपात से निजात मिलेगी|
22)  यदि गर्भिणी को उल्टियां अधिक हो रही हों तो राई को पीसकर  पेट पर मल मल का कपड़ा  रखकर लेप करें पन्द्र मिनिट तक रहने दें| उल्टियां बंद हो जायेंगी|
23)  गर्भावस्था में  छाछ पीना लाभदायक है|
२४) जी मिचलाना अखरोट खाने  से भी ठीक हो जाता है|
2५)  गर्भिणी को चुकंदर का रस सेवन करते रहना  हितकर है|  इससे  रक्त बढ़ता है और स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ती है| 

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

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खिंचाव चिन्ह (stretch marks) दूर करने के उपाय.

       
   उम्र बढ़ने के साथ  हमारी त्वचा पर  स्ट्रेच  मार्क्स  आने लगते हैं| ये खिंचाव चिन्ह  युवावस्था और  और स्त्रियों  में गर्भावस्था के दौरान त्वचा पर  उत्पन्न होते हैं|   हमारी त्वचा की तीन परतें होती हैं|एपिडर्मिस ,डर्मिस  और  हायपोडर्मिस ,स्ट्रेच मार्क्स  अमूमन  त्वचा की बीच की परत डर्मिस  पर उत्पन्न होते हैं|  कारण ये है कि इस परत में लचक नहीं  होती है और दवाब पड़ने से इस पर  स्ट्रेच मार्क्स आ जाते हैं|  इन खिंचाव चिन्हों को दूर करने  या कम करनेके लिए आप कुछ  घरेलू या कुदरती उपचारों का सहारा लेकर लाभान्वित हो सकते हैं
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  केस्टर आईल-प्रभावित हिस्से पर केस्टर आईल लगावें और प्लास्टिक बेग लपेटें | फिर इस हिस्से की हॉट वाटर बाटल से करीब आधा घंटे सिकाई करें और  उस भाग को हल्का रगडें| खिंचाव चिन्ह दूर करने का यह अच्छा तरीका है|
आलू का रस -  आलू में ढेर सारे विटामिन्स  और मिनरल्स  होते हैं जो त्वचा की ग्रोथ  में मदद  करते हैं और त्वचा का नवीनीकरण  होता है|  इसके लिए  आलू को कुछ मोटा काट लें| आलू के टुकड़े को स्ट्रेच मार्क्स पर लगाएं|  १५ मिनिट बाद उस जगह को गुनगुने पानी से धो लें|
जेतुनका तेल - जेतुन के तेल में प्राकृतिक रूप से  एंटीआक्सीडेंटस  की मात्रा अधिक होती है जो त्वचा की अधिकाँश  समस्याओं से निपटने में सहायक होती है| गुनगुने शुद्ध जेतुन के  तेल कोस्ट्रेच मार्क्स पर लगाएं| और हल्की मालिश करें| इससे ब्लड सर्कुलेशन  सही होता है और  स्ट्रेच मार्क्स गायब होने लगते हैं|  जेतुंन का तेल त्वचा पर आधा घंटा  तक लगा रहने दें|  इससे त्वचा इस तेल में मौजूद विटामिन ए ,डी  और ई  को अच्छे से सोख लेती है|
शक्कर - नेचुरल डाईट शूगर स्ट्रेच मार्क्स को दूर करने का सबसे बढ़िया उपाय है|  शकर मृत त्वचा को शरीर से अलग करने की भूमिका निर्वाह करती है|  बादाम के तेल के साथ  एक चम्मच शक्कर मिलाएं| और उसमें कुछ बूंदे  नींबू के रस की मिलाएं | रोजाना नहाने से १० मिनिट पहिले इसे  प्रभावित भाग पर लगाकर  हलके से मालिश करें|  एक महीने तक उपचार करने पर आप देखेंगे को स्ट्रेच मार्क्स हलके पड  गए  हैं|
नींबू का रस - नींबू में प्राकृतिक तौर पर एसिड पाया जाता है  जो स्ट्रेच मार्क्स को खत्म करने  में सहायक होता है | नींबू को काट  लें|  स्ट्रेच मार्क्स  पर कटा हुआ  नींबू सर्कुलर मोशन में  घुमाते हुए रगडें|  १० मिनिट बाद पानी से धोलें|  खिंचाव चिन्ह मिटाने का कारगर तरीका है|


मुह के छाले से परेशान है तो ये उपाय करे// If you are upset with the mouth ache, then take these measures



                                           




अजीर्ण व पेट में कब्ज होने की अवस्था में अक्सर हमारे मुँह में छाले हो जाया करते हैं। अमाशय व आँतों में सूजन व घाव होने पर मुँह में छालों की उत्पत्ति हो जाया करती है। पेट की गर्मी की वजह से भी मुँह में छाले हो जाते हैं।
अक्सर जब मुँह में छाले हो जाते है तो कुछ भी खाना-पीना व गटकना तक मुश्किल हो जाया करता है। कई बार जीभ पर भी छाले होजाया करते हैं। ऐसी हालत में कुछ भी न खाते बनता है न उगलते ही बनता है।


गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

मुहं के छाले की घरेलू  चिकित्सा -
1) दिन में कम से कम तीन बार कच्चे दूध से अच्छी तरह गरारे करते रहने से मुख -छाला में आशानुरूप लाभ होता है|
2) गुलाब के फूल,आंवला ,सौंफ तीनों बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनालें | आधा चम्मच चूर्ण नियमित रूप से सुबह -शाम पानी के साथ फक्की लेने से मुहं के छाले ठीक हो जाते हैं|
3) एक गिलास गरम पानी में चुटकी भर काली मिर्च और आधा निम्बू का रस मिलाकर दिन में दो बार पीने से मुंह के चाले कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं|
4) शहद में मुलहठी का चूर्ण मिलाकर इसका लेप मुँह के छालों पर करें और लार को मुँह से बाहर टपकने दें।
5) अड़ूसा के 2-3 पत्ते भली प्रकार मूह मे चबाकर रस चूसने से मुख छाला रोग ठीक होता है|

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6) कत्था, मुलहठी का चूर्ण और शहद मिलाकर मुँह के छालों पर लगाना चाहिए।
7) अमलतास की फली की मज्जा को धनिये के साथ पीसकर थोड़ा कत्था मिलाकर मुँह में रखने से अथवा केवल गूदे को मुँह में रखने से मुँह के छाले दूर हो जाते हैं।


8) अमरूद के कोमल पत्तों में कत्था मिलाकर
पान की तरह चबाने से मुँह के छाले ठीक हो जाते हैं।
9) अनार के 25 ग्राम पत्तों को 400 ग्राम पानी में ओंटाकर चौथाई भाग शेष रहने पर इस क्वाथ से कुल्ला करने से मुँह के छाले दूर होते हैं।


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१०) मुंह के छाले खत्म करने के लिए जामुन के पत्ते लें। इन्हें धोकर पीसें। छानें। इस पानी (रस) से कुल्ले करें।
११) इस रोग से छुटकारा पाने के लिए टमाटर का रस निकालें। इस रस में इतनी ही मात्रा में पानी मिलाएं। इस पानी से कुल्ला करें। आराम होगा।


१२) तुलसी की ताजा पांच पत्तियां लें। इन्हें धोएं। चबाएं। खूब बारीक चबाकर निगलें। इस पर पानी तीन-चार घूंट धीरे-धीरे पी लें। छाले से निजात मिलेगी|

१३) मुंह के छालों को हटाने के लिए बंसलोचन पीसें। छानें। इसे शहद में मिलाएं। मुंह के अंदर अंगुली से लगाएं।

१४) इस रोग के लिए आक के दूध की कुछ बूंदें निकालें। इसे एक चम्मच शहद में मिलाएं। मुंह में लगाने से जरूर लाभ होगा।
१५) मामूली मात्रा में पिसा कपूर तथा एक छोटा चम्मच पिसी मिश्री लें। दोनों को मिलाएं। मुंह में लगाने से फायदा होगा।


१६) थोड़ा-सा हरा पुदीना, इतना ही सूखा धनिया तथा समभाग मिश्री। तीनों को एक साथ मुंह में डालकर चबाएं। पूरा लाभ मिलेगा।

१७) मुंह के छालों से छुटकारा पाने के लिए भोजन करने के बाद छोटी हरड़ चूसें। छालें गायब होने लगेंगे।



१८) यदि तरबूज का मौसम हो तो इसके छिलके जलाएं। राख तैयार करें। इस राख को लगाने से छालें नहीं रहेंगे।
१९) थोड़ा-सा सुहागा फुला लेंबारीक पीसें। इसे दो चम्मच ग्लिसरीन में मिलाएं। इसको लगाने से छाले दूर हो जायेंगे।




२०) मुंह के छाले नष्ट करने के लिए सत्यानाशी की टहनी लें। इसे दातुन की तरह थोड़ा चबाएं। अवश्य आराम आयेगा। 


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अदरक लाभ कारी है प्रोस्टेट और ओवेरियन केन्सर में





                                                             



              अदरक के  सामान्य गुणों  से अधिकाँश लोग परिचित   हैं |सूखी खांसी,  सर्दी ,जुकाम,भूख न लगना जैसी समस्याओं  से निजात पाने के लिए अदरक का उपयोग प्राचीन समय से होता आ रहा है| लेकिन इस जानकारी  को  आगे  बढाते  हुए  अमेरिका की मिशीगन  यूनिवर्सिटी  के  वेज्ञानिकों  द्वारा  किये गए एक शौध के परिणाम  केन्सर  चिकित्सा में  बेहद उत्साह्कारी हैं| शौध के मुताबिक़ अदरक ओवेरियन केन्सर की कोशिकाओं को नष्ट करने में सफल हुई है| 



   
 पुरुषों में प्रोस्टेट केन्सर की कोशिकाएं  अदरक के प्रयोग से नष्ट हो जाती हैं| वज्ञानिकों का कहना है कि प्रोस्टेट केन्सर और ओवेरियन केन्सर से पीड़ित  लोगों के लिए  अदरक  एक जीरो साईड इफेक्ट  वाली केमो थीरेपी  है|  वैज्ञानिकों ने प्रयोग के दौरान देखा कि जैसे ही केन्सर कोशिकाओं को अदरक के चूर्ण  के संपर्क में लाया गया , केन्सर के सेल्स  नष्ट होते चले गए| वेज्ञानिक भाषा में इसे  एपोप्टीज याने  कोशिकाओं की आत्म ह्त्या कह सकते हैं| यह भी देखा गया कि अदरक की मौजूदगी  में  केन्सर के सेल्स एक दुसरे को खाने लगे|  इसे डाक्टरी भाषा में  ऑटो फिगिज  कहते हैं| 


   ओवेरियन और प्रोस्टेट केन्सर से पीड़ित रोगियों में  अदरक एक प्राकृतिक  कीमो थिराप्यूटिक एजेंट की तरह  काम करता है| ब्रिटिश जनरल आफ  न्युट्रीशन में प्रकाशित  एक शौध  के अनुसार  अदरक का  सत्व    बढे हूए प्रोस्टेट ट्युमर की साईज  ५६% तक कम  कर  देता है|  सबसे अच्छी बात यह कि  अदरक की मात्रा  ज्यादा भी हो जाए तो  इसका दुष्प्रभाव  कीमो थेरपी की तरह नहीं होता है| 

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लहसुन से करें कई रोगों का ईलाज.



                                           

 लहसुन सैकडों वर्षों से रसोईघर में मसाले  के तौर पर व्यवहार  में आ रही है|  लेकिन इसका उपयोग  कई तरह के रोगों के इलाज में  प्राचीन काल  से होता आया है|  यह  ह्रदय रोगों और  रक्त परिसंचरण  तंत्र के विकारों  को ठीक करने  में सफलता  से प्रयोग की जा रही है|  उच्च रक्त चाप, उच्च कोलेस्ट्रोल ,कोरोनरी धमनी संबधित  ह्रदय दोष  और हृदयाघात  जैसी स्थितियों  में इसका उपयोग उत्साहवर्धक परिणाम  प्रस्तुत करता है|  धमनी-काठिन्य रोग में भी  लहसुन लाभदायक है\ लहसुन के प्रयोग विज्ञान सम्मत  होने के दावे किये जा रहे हैं| 

 कुछ चिकित्सक  लहसुन का प्रयोग  फेफड़े  के केंसर ,बड़ी  आंत  के केंसर ,प्रोस्टेट केंसर ,गुदा के केंसर ,आमाशय के केंसर ,छाती के केंसर  में कर रहे हैं|  मूत्राशय के केंसर में भी प्रयोग हो रही है लहसुन|  लहसुन का प्रयोग पुरुषों में प्रोस्टेट  वृद्धि  की शिकायत में भी  सफतापूर्वक किया जा रहा है|  इसका उपयोग  मधुमेह रोग  अस्थि-वात् व्याथि  में भी करना उचित है|   
लहसुन का प्रयोग  बेक्टीरियल  और फंगल उपसर्गों में  हितकारी सिद्ध  हुआ है\  ज्वर,सिरदर्द,सर्दी-जुकाम ,खांसी,,गठिया रोग,बवासीर  और दमा रोग में इसके प्रयोग से अच्छा लाभ मिलता है|
सांस भरने , निम्न  रक्त चाप, उच्च रक्त शर्करा  जैसी स्थितियों में लाभ लेने के लिए लहसुन  के प्रयोग  की सलाह दी जाती है| 

    लहसुन का उपयोग तनाव दूर करने वाला है,थकान दूर करता है | यह यकृत के कार्य को सुचारू बनाती है|  चमड़ी के मस्से ,दाद  भी लहसुन  के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं|  लहसुन में  एलीसिन  तत्त्व  पाया जाता है| रोगों में यही तत्त्व  हितकारी है|   प्रमाणित हुआ है कि  लहसुन ई कोलाई, और साल्मोनेला  रोगाणुओं को नष्ट  कर देती है|  लहसुन की ताजी गाँठ  ज्यादा असरदार होती है| पुरानी  लहसुन कम प्रभाव  दिखाती है| 

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धनिया के चौंकाने वाले फ़ायदे

धनिये के उपयोग 

धनिये की हरी-हरी पत्तियों की सुगंध किसी भी व्यंजन की सुंगध और उसके स्वाद को
कई गुना बढ़ा देती है। सब्जियों में हरे धनिये के साथ ही सुखे धनिये का
उपयोग भी भारतीय भोजन में बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है। लेकिन हरे
धनिए की कोमल पत्तियां सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं डाली जाती
बल्कि इनका औषधीय महत्व भी है। इसका सेवन जाने-अनजाने ही आपको कई
बीमारियों से निजात भी दिलाता है। आइये जानें कि धनिया किन-किन बीमारियों
या परेशानियों में मददगार हो सकता है...





आंख -

आंखों के लिए धनिया बड़ा गुणकारी होता है। थोड़ा सा धनिया कूट कर पानी
में उबाल कर ठंडा कर के, मोटेकपड़े से छान कर शीशी में भर लें। इसकी दो बूंद आंखों
में टपकाने से आंखों में जलन, दर्द तथा पानी गिरना जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
ताजा धनिया पत्ते में विटामिन सी,विटामिन ए,एंटी ऑक्सीडेंट्स और फास्फोरस जैसे
मिनरल्स पाए जाते हैं जो मस्कुलर डिजनरेशन,नेत्र शोथ और आँखों की उम्र वृद्धि को
कम करते है|

नकसीर -

हरा धनिया 20 ग्राम व चुटकी भर कपूर मिला कर पीस लें। सारा रस निचोड़ लें।
इस रस की दो बूंद नाक में दोनों तरफ टपकाने से तथा रस को माथे पर लगा कर
मलने से खून तुरंत बंद हो जाता है।

गर्भावस्था में जी घबराना उल्टी  होना  :










गर्भ धारण करने के दो-तीन महीने तक गर्भवती महिला को उल्टियां आती है। ऐसे में धनिया
का काढ़ा बना कर एक कप काढ़े में एक चम्मच पिसी मिश्री मिला कर पीने से जी घबराना बंद
होता है।

पित्त -

पित्त बढ़ जाने से जी मिचलाना रहता हो तो हरा धनिया पीसकर
उसका ताजा रस दो चम्मच की मात्रा में पिलाने से लाभ होता है। भोजन में हरे
धनिये की ताजी पिसी चटनी का प्रयोग करते रहने से भी जी मिचलाना कम होता है।
धनिये की हरी पत्तियों को लहसुन, प्याज, गुड़, इमली, अमचूर, आंवला,
नींबू, पुदीना आदि के साथ बारीक पीसकर चटनी के रूप में खाते रहने से पाचन
क्रिया दुरुस्त बनी रहती है तथा भूख भी खूब लगती है।

पित्ती-

शरीर में पित्ती की तकलीफ हो तो हरे धनिये के पत्तों का रस, शहद और रोगन गुल तीनों
को मिला कर लेप करने से पित्ती की खुजली में तुरंत आराम होता है।

पित्त-

बढ़ जाने पर हरी-पीली उल्टियां आनी शुरू हो जाती हैं। इस अवस्था में हरे
धनिया का रस निकालकर उसमें गुलाब जल मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

लू लगने पर 

गर्मी में बाहर जाने से, लू लग जाने पर परेशानी हो रही हो तो
धनिया पीसकर, रस निकालकर, इसे पानी में घोलकर मिठास के लिए चीनी डालकर पी
लें।
एक बड़ा गिलास पानी लें। इसमें दो बड़े चम्मच धनिया डालें। उबालें।
जब पानी एक चौथाई रह जाए तो उतार लें। इसमें मिश्री मिलाकर, छानकर, पी लें,
कुछ दिन जारी रखें।

अधिक गैस बनना-

एक गिलास पानी लें, दो चम्मच धनिया मिलाकर उबालें। छानें, तीन भाग कर, दिन में तीन बार पी लें।

भोजन में अरुचि 

खाना खाने को मन नहीं करता। भरपेट नहीं खा सकते। पचता भी
नहीं, धनिया, छोटी इलायची, कालीमिर्च तीनों एक जैसी मात्रा में लें। इन्हें
पीसकर छानकर शीशी में रखें। चौथाई चम्मच घी तथा आधा चम्मच चीनी में आधा
चम्मच इस चूर्ण को डालकर खायें। चन्द दिनों में अरुचि खत्म।



श्वास के रोग-




खांसी हो, दमा हो, सांस फूलता हो, धनिया तथा मिश्री पीसकर रख लें। एक
चम्मच चावल के पानी के साथ रोगी को पिलाएं। आराम आने लगेगा। कुछ दिन नियमित लें।













पेट दर्द 

आधा गिलास पानी लें। इसमें दो चम्मच धनिया डालें। उबालें। गुनगुना पिला दें। पेट दर्द ठीक होगा।

पेशाबमें जलन रहना-

एक छोटा चम्मच धनिया लें। इसे एक कप बकरी के दूध में
मिलाएं, एक चम्मच मिश्री भी। पीने से पेशाब की जलन खत्म होगी। धनिया तथा
आंवला एक-एक चम्मच (पिसा) रात पानी में भिगो दें। प्रात: मसलकर छानकर पीने
से पेशाब की जलन खत्म होगी। कुछ दिन रोजाना लिया करें।

गंजापन होने पर-

हरा धनिया पीसकर, गंजे पर लेप करें। कुछ दिनों के इस उपचार से बाल
आने लगते हैं। अजमाया जा चुका है।

 कमजोरी-

अधिक काम वासना की पूर्ति या स्वप्नदोष हो जाने से आने वाली कमजोरी में
रात को पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा धनिया भिगों दें। प्रात: छानकर पी लें।
कुछ दिन नियमित करें। कमजोरी दूर होगी। अत: धनिया को केवल मसालों में नहीं,
दवा के रूप में भी प्रयोग करें।




त्वचा की समस्याएं-

  अपने एंटी फंगल,एंटी सेप्टिक ,डीटाक्सीफाईंग और डिसइन्फेक्टेट गुणों के चलते धनिया पत्ता त्वचा की कुछ समस्याओं से भी निजात दिलाता है| खुजली से राहत पाने के लिए इसके रस का सेवन करना उपादेय है या इसका पेस्ट भी त्वचा पर लगा सकते हैं| शरीर की फुंसियों को ठीक करने के लिए धनिया पत्ती के रस में शहद मिलाकर प्रभावित भाग पर लगाएं| १५ मिनिट बाद ठन्डे पानी से धो लें|
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नपुंसकता और शीघ्रपतन मे प्याज के चमत्कारी प्रभाव





वीर्य वृद्धि के लिए-

सफ़ेद प्याज के रस को शहद के साथ लेने से वीर्य बनाने की प्रक्रिया में तेजी आ जाती है|
देसी उपचारों के जानकार बताते हैं कि



सफ़ेद प्याज का रस ५ मिली ,शहद १० ग्राम ,अदरक का रस ५ मिली और गाय का घी ५ ग्राम मिश्रण कर सुबह शाम २१ दिन तक लेते रहने से नपुंसकता का निवारण होता है और पुरुषत्व में वृद्धि होती है|



जोड़ों के दर्द में उपकारी :-
प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर कुछ गर्म करके जोड़ों पर मालिश करने से बहुत लाभ होता है| यह उपचार लगातार दो माह करने से आशातीत सफल परिणाम प्राप्त होते हैं|

खांसी में उपयोग-

बच्चों और बूढों की खांसी में प्याज का रस मिश्री मिलाकर सेवन करना चाहिए| खांसी धीरे धीरे ठीक होने लगती है|
सफ़ेद प्याज दिल के रोगों में उपकारी होता है| लाल प्याज बल बढाने वाला होता है|
बालकों की शारीरिक विकास हेतु प्याज का उपयोग गुड के साथ करने की सलाह दी जाती है|
प्याज के रस में नमक मिलाकर दांत-मसूढों पर मलने से दर्द और सूजन दूर होते हैं|

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कष्टसाध्य रोग जलोदर के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार //Home remedies for ascites


                                                                                                                                                
पेट (peritoneal cavity)में पानी इकट्ठा होने लगने को जलोदर कहा जाता है। रोगी का पेट फूल जाता है।

जलोदर के कारण--

जलोदर मुख्यतः लिवर के पुराने रोग से उत्पन्न होता है।
खून में एल्ब्युमिन के स्तर में गिरावट होने का भी जलोदर से संबंध रहता है।

जलोदर के लक्षण--

पेट का फूलना
सांस में तकलीफ
टांगों की सूजन
बेचैनी और भारीपन मेहसूस होना

घरेलु चिकित्सा--

मूली के पत्तों के 50 ग्राम रस में थोड़ा-सा जल मिलाकर सेवन करें।
* अनार का रस पीने से जलोदर रोग नष्ट होता है।
* प्रतिदिन दो-तीन बार खाने से, अधिक मूत्र आने पर जलोदर रोग की विकृति नष्ट होती है।
* आम खाने व आम का रस पीने से जलोदर रोग नष्ट होता है।
* लहसुन का 5 ग्राम रस 100 ग्राम जल में मिलाकर सेवन करने से जलोदर रोग नष्ट होता हैं।
* 25-30 ग्राम करेले का रस जल में मिलाकर पीने से जलोदर रोग में बहुत लाभ होता है।
* बेल के पत्तों के 25-30 ग्राम रस में थोड़ा-सा छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से जलोदर रोग नष्ट हो जाता है।
* करौंदे के पत्तों का रस 10 ग्राम मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से जलोदर राग में बहुत लाभ होता है।
* गोमूत्र में अजवायन को डालकर रखें। शुष्क हो जाने पर प्रतिदिन इस अजवायन का सेवन करने पर जलोदर रोग नष्ट हो जाता है।
*जलोदर रोग में लहसुन का प्रयोग हितकारी है। लहसुन का रस आधा चम्मच आधा गिलास जल में मिलाकर लेना कर्तव्य है। कुछ रोज लेते रहने से फर्क नजर आएगा।
*देसी चना करीब ३० ग्राम ३०० मिली पानी में उबालें कि आधा रह जाए। ठंडा होने पर छानकर पियें। २५ दिन जारी रखें।
*करेला का जूस ३०-४० मिली आधा गिलास जल में दिन में ३ बार पियें। इससे जलोदर रोग निवारण में अच्छी मदद मिलती है।
*जलोदर रोगी को पानी की मात्रा कम कर देना चाहिये। शरीर के लिये तरल की आपूर्ति दूध से करना उचित है। लेकिन याद रहे अधिक तरल से टांगों की सूजन बढेगी।
*जलोदर की चिकित्सा में मूली के पत्ते का रस अति गुणकारी माना गया है। १०० मिली रस दिन में ३ बार पी सकते हैं।
*मैथी के बीज इस रोग में उपयोग करना लाभकारी रहता है। रात को २० ग्राम बीज पानी में गला दें। सुबह छानकर पियें।
*अपने भोजन में प्याज का उपयोग करें इससे पेट में जमा तरल मूत्र के माध्यम से निकलेगा और आराम लगेगा।
*जलोदर रोगी रोजाना तरबूज खाएं। इससे शरीर में तरल का बेलेंस ठीक रखने में सहायता मिलती है।
*छाछ और गाजर का रस उपकारी है। ये शक्ति देते हैं और जलोदर में तरल का स्तर अधिक नहीं बढाते हैं।
*अपने भोजन में चने का सूप ,पुराने चावल, ऊंटडी का दूध , सलाद ,लहसुन, हींग को समुचित स्थान देना चाहिये।
*रोग की गंभीरता पर नजर रखते हुए अपने चिकित्सक के परामर्शानुसार कार्य करें।
क्या न खाएं?
* जलोदर रोग में पीड़ित व्यक्ति को उष्ण मिर्च-मसालें व अम्लीस रसों से बने चटपटे खाद्य पदार्थो का सेवन नही करना चाहिए।
* घी, तेल, मक्खन आदि वसा युक्त खाद्य पदार्थाो का सेवन न करेें
* गरिष्ठ खाद्य पदार्थों, उड़द की दाल, अरबी, कचालू, फूलगोभी आदि का सेवन न करें।
* चाय, कॉफी व शराब का सेवन न करें।


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