अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है विटामिन डी // Vitamin D is essential for good health


इंसान को विटामिन की जरूरत होती है, लेकिन खासतौर से महिलाओं को पुरुषों की तुलना में विटामिन डी की अधिक जरूरत होती है, क्योंकि महिला को अपने जीवनकाल में जिन चरणों से गुजरना पड़ता है, वैसे पुरुषों के साथ नहीं होता। विटामिन-डी शरीर के विकास, हड्डियों के विकास और स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। धूप के संपर्क में आने पर त्वचा इसका निर्माण करने लगती है। हालांकि यह विटामिन खाने की कुछ चीजों से भी प्राप्त होता है, लेकिन इनमें यह बहुत ही कम मात्रा में होता है। केवल इनसे विटामिन-डी की जरूरत पूरी नहीं हो जाती है। नए अध्ययनों से सामने आया है कि विटामिन डी की कमी से दिल संबंधी बीमारियां होने का खतरा है और अन्य कई गंभीर बीमारियां हो सकती है। विटामिन डी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को ठीक तरह से संचालित करने में मदद करता है। हांलाकि हड्डियों के अलावा दूसरी बीमारियों की जानकारी ज्यादा नहीं है, लेकिन इसकी कमी से कई गंभीर विकार जैसे कि इम्यूनिटी, ऑटो इम्यूनिटी का बढऩा, मायोपेथी, डायबिटीज मैलीटिस और कोलन, स्तन व प्रोस्टेट कैंसर हो सकते है।

 
महिलाओं के लिए  खास -

विटामिन डी की कमी महिलाओं में उन दिनों में काफी परेशान करता है। इसलिए इसकी पूर्ति से महिलाओं को उन दिनों के दौरान होने वाले प्रीमेन्सट्रअल सिंड्रोम में भी सहायता मिलती है। जिन औरतों में विटामिन डी की कमी होती है, उनके बच्चों को विटामिन डी और कम मात्रा में मिल पाता है। ऐसे में बच्चे में रिकेट्स होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए महिलाओं को स्तनपान के दौरान शुरुआती तीन माह में विटामिन डी के सप्लीमेंट्स सावधानीपूर्वक लेने चाहिए, क्योंकि इससे यूरेनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। मुंबई स्थित पी डी हिंदुजा हास्पिटल के वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डा।संजय अग्रवाल का कहना है कि सिर्फ यह एक ऐसा विटामिन है, जो हमें मुफ्त में उपलब्ध है। पर विटामिन डी हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। यह शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करता है, जो तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली और हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। शरीर में विटामिन डी की उचित मात्रा उच्च रक्तचाप के खतरे को कम करता है। इसकी कमी से मेनोपॉज के बाद महिलाओं में आस्टियोपोरेसिस का खतरा बढ़ जाता है।
विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत सूर्य की किरणें हैं। जब हमारे शरीर की खुली त्वचा सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आती है तो ये किरणें त्वचा में अवशोषित होकर विटामिन डी का निर्माण करती हैं। अगर सप्ताह में दो बार दस से पंद्रह मिनट तक शरीर की खुली त्वचा पर सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणें पड़ती हैं तो शरीर की विटामिन डी की 80-90 प्रतिशत तक आवश्यकता पूरी हो जाती है। सूर्य की किरणों के बाद काड लीवर ऑयल विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत है।
इसके अलावा दूध, अंडे, चिकन, मछलियां , भी विटामिन डी के अच्छे स्त्रोत हैं। विटामिन डी को सप्लीमेंट के रूप में भी लिया जा सकता है।
 
विटामिन-डी की कमी के लक्षण -
दर्द या तेज दर्द, कमजोरी एवं ओस्टियोमेलेशिया और हड्डियों का दर्द (आमतौर पर कूल्हों, पसलियों और पैरों आदि की हड्डियों में) साथ ही खून में विटामिन-डी की कमी होने पर कार्डियोवेस्क्युलर रोगों से मृत्यु, याददाश्त कमजोर होना आदि की आशंकाएं प्रबल होती हैं।

विटामिन डी की कमी का प्रभाव-


विटामिन डी की कमी से कैल्शियम तथा फास्फोरस आंतों में शोषित नहीं हो पाते हैं, परिणाम स्वरूप अस्थियों तथा दांतों पर कैल्शियम नहीं जम पाता है। जिसके फलस्वरूप वे कमजोर हो जाते हैं। दुर्बल हड्डियां शरीर का भार नहीं सह पातीं और उनमें अनेक प्रकार सकी विकृतियां उत्पन्न हो जाती हैं। इसकी कमी से चार प्रकार के रोग होते हैं। रिकेट्स, पेशीय मरोड, अस्थि विकृति या आस्टोमलेशिया हैं। महिलाओं में विटामिन डी की कमी अनेक प्रभाव उत्पन्न करती है शोधकर्ताओं ने अपने शोध में कहा है कि इसकी कमी से फेफडों की बनावट और कामकाज में अंतर आ जाता है। तथा इनकी कार्य करने की क्षमता मे कमी आती है, साथ ही फेफडें सिकुड भी जाते हैं और इस वजह से वायु को बहुत ज्यादा प्रतिरोध का सामना करना पडता है।


बचाव-
कम से कम 75 प्रतिशत शरीर को रोजाना विटामिन डी पूरा करने के लिए सूर्य की सीधी रोशनी की जरूरत होती है। कुछ साल पहले विभिन्न अध्ययनों ंने विटामिन डी की सुरक्षात्मक भूमिका के बारे में कई जानकारियां दी। सूरज की रोशनी में कम जाने, सनस्क्रीन लगाने और अस्वस्थ खान पान की वजह से विटामिन डी की कमी होती जा रही है। विटामिन डी के स्तर को जानने के लिए रूटीन सीरम काफी महंगा है, इसलिए सभी को कराने का परामर्श नहीं दिया जाता लेकिन विटामिन डी की कमी के बढ़ते मामलों को देखते हुए समय रहते टेस्ट करवा लेना चाहिए। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में विटामिन डी के सप्लीमेटं लेना बहुत जरूरी है ताकि इसकी कमी से बचा जा सके। विटामिन-डी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ग्लुकोल इनटॉलरेंस और मल्टिपल स्क्लेरोसिस आदि बीमारियों से बचाव और इलाज में महत्वपूर्ण हो सकता है।

आहार से पूर्ति भी जरूरी-


विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर भारतीयों की डाइट में विटामिन डी की कमी ही पाई गई है क्योंकि खाने के स्त्रोत कम है, लोग शाकाहारी है और मार्किट में उपलब्ध ज्यादातर उत्पाद विटामिन डी फोर्टीफाइड नहीं होते है। बहुत कम लोगों को विटामिन डी से होने वाले फायदों की जानकारी है। विटामिन डी केवल प्राणिज्य पदार्थों में ही पाया जाता है। वनस्पति जगत में यह बिल्कुल नहीं प्राप्त होता है। इसके मुख्य स्राोत मछली का तेल, वेसीय मछली, अण्डा, मक्खन पनीर, वसायुक्त दूध तथा घी हैं। सूर्य की किरणों के द्वारा भी हमें विटामिन डी मिलता है। इसका सबसे अच्छा और सस्ता स्रोत धूप है। शरीर को जरूरी विटामिन डी की मात्रा रोजाना पांच मिनट धूप में रहने से मिल सकती है। हमारी स्किन में एर्गेंस्टरॉल नामक एक पदार्थ होता है, जो सूर्य की पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से विटामिन डी में बदल जाता है।

सावधानी बरतें-


उम्र, नस्ल, मोटापा, किडनी सबंधी बीमारी लीवर की बीमारी और दूसरी अन्य मेडिकल स्थितियां जैसे कि क्रोहिन बीमारी, कायस्टिक फिबरोसिस और सिलियक बीमारी भी विटामिन डी की कमी के कारण होते है। जो रोगी बहुत तरह की दवाइयों जिसमें एंटीेकोव्ंयूसेटं और एड्स/एचआईवी से जुड़ी दवाइयां लेते है उन्हें भी विटामिन की कमी होने का रिस्क रहता है। तो आजकल विटामिन डी की कमी के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को इसके प्रति जागरूक होने की जरूरत है और सरकार को भी विटामिन डी की स्क्रीनिंग, फोर्टीफिकेशन और सप्लीमेटं को लेकर राष्ट्रीय नीति बनाने की जरूरत है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की इसकी जरूरत के बारे में पता चले।

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हृदय के लिए लाभकारी चुकन्दर//Beet beneficial for heart


     



चुकंदर एक ऐसी सब्जी है जिसे बहुत से लोग नापसंद करते हैं। इसके रस को पीने से न केवल शरीर में रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। यदि आप इस सब्जी से नफरत करते हैं तो जरा एक बार इसके फायदों के बारे में जरूर पढ़ लें।
शायद कम लोग ही जानते हैं कि चुकंदर में लौह तत्व की मात्रा अधिक नहीं होती है, किंतु इससे प्राप्त होने वाला लौह तत्व उच्च गुणवत्ता का होता है, जो रक्त निर्माण के लिए विशेष महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि चुकंदर का सेवन शरीर से अनेक हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में बेहद लाभदायी है। ऐसा समझा जाता है कि चुकंदर का गहरा लाल रंग इसमें लौह तत्व की प्रचुरता के कारण है, बल्कि सच यह है कि चुकंदर का गहरा लाल रंग इसमें पाए जाने वाले एक रंगकण (बीटा सायनिन) के कारण होता है। एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के कारण ये रंगकण स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं।

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

एनर्जी बढ़ाये : यदि आपको आलस महसूस हो रही हो या फिर थकान लगे तो चुकंदर का जूस पी लीजिये। इसमें कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है। खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है।

पौष्टिकता से भरपूर : 


यह प्राकृतिक शर्करा का स्रोत होता है। इसमें कैल्शियम, मिनरल, मैग्नीशियम, आयरन, सोडियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाये जाते हैं। इसलिए घर पर इसकी सब्जी बना कर अपने बच्चों को जरूर से खिलाएं।

स्वास्थ्यवर्धक पेय

जो लोग जिम में जी तोड़ कर वर्कआउट करते हैं उनके लिये चुकंदर का जूस बहुत फायदेमंद है। इसको पीने से शरीर में एनर्जी बढ़ती है और थकान दूर होती है। साथ ही अगर हाई बीपी हो गया हो तो इसे पीने से केवल 1 घंटे में शरीर नार्मल हो जाता है।
हृदयरोग में उपयोगी - चुकंदर रक्तचाप कम करता है। हार्टअटेक और स्ट्रोक के जाखिम का कम करता है। चुकंदर में नाइट्रेट्स होते हैं, जो शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं और रक्तवाहिकाओं को डायलेट करते हैं और रक्तचाप कम करते है। चुकंदर में मौजूद पोटेशियम स्ट्रोक से बचाने में मदद करता है। चुकंदर के बीटासायनिन एल.डी.एल. कॉलेस्टेरोल को ऑक्सीडाइज होने के रोकते है, जिससे धमनियों की भित्तियों में फैट्स जमा नहीं हो पाते हैं और हार्ट अटेक और स्ट्रोक का जोखिम कम होता है। होमोसिस्ट्रीन रक्तवाहिकाओं को क्षतिग्रस्त करता है और बीटेन शरीर में होमोसिस्ट्रीन के स्तर को कम करता है।

डायबिटीज में सहयोगी -


चुकंदर में फैट्स बिलकुल नहीं होते और कैलोरी भी कम होती है। इसका ग्लायसीमिक इंडेक्स 64 (जो माडियम माना जाता है) और ग्लायसीमिक लोड बहुत कम 2.9 होता है, जिसका मतलब है कि इसके कोर्बोहाइड्रेट बहुत धीरे ग्लूकोज में परिवर्तित होते हैं और इस तरह यह सिकंदर रक्तशर्करा के स्तर को स्थिर रखता है।
यकृत का रक्षक - चुकंदर में विद्यमान बीटासायनिन निर्विषीकरण या शरीर के टॉक्सिन्स का उत्सर्जन (detox) करने में यकृत की बहुत सहायता करते हैं। बीटासायनिन रंग तत्व (Pigments) शरीर की फेज-2 डिटॉक्सीफिकेशन प्रक्रिया को प्रोत्साहित करते हैं। फेज-2 एक चयापचय क्रिया है जिसमें ग्लूटाथायोन-एस-ट्रांसफरेज एंजाइम तंत्र टॉक्सिन्स को निष्क्रिय और घुलनशील बना कर शरीर से विसर्जित करने में सहायता करता है। इसलिए चुकंदर सर्वोत्तम डिटॉक्स भोजन है।
कैंसर में हितकारी - चुकंदर ल्यूकीमिया और कैंसर के उपचार में बहुत प्रभावशाली पाया गया है। यह यकृत, गुर्दा, पित्ताशय, रक्त और लिम्फ का शोधन करता है। चुकंदर में बीटालेन प्रजाति के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेट्री तत्व होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं का भक्षण करते हैं। बीटासायनिन डी.एन.ए. म्यूटेशन को बाधित करते हैं। इसमें एक बीटेन नाम का कैंसररोधी एमाइनो एसिड होता है।चुकंदर में विद्यमान लाल रंग का तत्व शरीर में विशेष तरह के प्रोटीन्स का स्तर बढ़ाता है, जिन्हें फेज II एंजाइम कहते हैं। ये एंजाइम्स कैंसर पैदा करने वाले टॉक्सिन्स को निष्क्रिय करके विसर्जन करते हैं।
चुकंदर में बेटेन और ट्रिप्टोफेन नामक फील गुड तत्व होते हैं जो शरीर में सिरोटोनिन तत्व का स्राव भी बढ़ाते हैं और मन को शांत और प्रसन्न करते हैं, डिप्रेशन दूर करते हैं और मूड एलीवेटर का काम करते हैं।
चुकंदर में बोरोन नामक तत्व पर्याप्त मात्रा में होता है, जो सीधा लैंगिक हार्मोन्स का निर्माण बढ़ाता है। इसलिए इसे प्राकृतिक कामोद्दीपक कहा जाता है। कई लोग इसे प्राकृतिक वियाग्रा मानते हैं। रोमन साम्राज्य में इसका ज्यूस कामोद्दीपक द्रव्य माना जाता था। पोम्पेई में स्थित प्राचीन काल के विख्यात वैश्यालय ल्यूपनारे की दीवारों पर लगे चित्रों में चुकंदर को कामोद्दीपक के रूप में दिखाया गया है।


अन्य प्रयोग - 
इसमें विद्यमान विटामिन-सी अस्थमा से बचाव करता है। बीटाकेरोटीन मोतियाबिंद और मेक्यूलर डीजनरेशन से बचा कर रखता है।  चुकंदर में मौजूद फाइबर कब्जी में लाभ पहुंचाते हैं। स्वास्थ्य के साथ ही यह त्वचा के लिए भी बहुत उपयोगी है। चुकंदर के रस को थोड़े से सिरके में मिलाकर सिर में लगाने से यह रूसी को दूर करता है।  चुकंदर का प्रयोग टमाटर के पेस्टसॉसडेज‌र्ट्सजैम, जेलीआइसक्रीम और मिठाई में रंग द्रव्य के रूप में प्रयोग किया जाता है।

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कब्ज की होमियोपैथिक चिकित्सा //Homeopathic treatment of constipation


कब्ज, पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति (या जानवर) का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। सामान्य आवृति और अमाशय की गति व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है। एक सप्ताह में 3 से 12 बार मल निष्कासन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है।            
 
कब्ज का होमियोपैथिक इलाज:-
होमियोपैथी  चिकित्सा की सबसे लोकप्रिय समग्र प्रणालियों  में से एक है|
होमियोपैथी में इलाज के लिए दवाओं का चयन व्यक्तिगत लक्षणों पर आधारित होता है।
यही एक तरीका है जिसके माधयम से रोगी के सब विकारों को दूर कर सम्पूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
होमियोपैथी का उद्देश्य कब्ज  करने वाले कारणों का सर्वमूल नाश करना है न की केवल कब्ज का ।
जहां तक चिकित्सा सम्बन्धी उपाय की बात है तो होमियोपैथी में कब्ज  के लिए अनेक होमियोपैथिक दवाइयां उपलब्ध हैं।
*ऐथूसा (Aethusa)
*अलुमन (Alumen)
*एलुमिना (Alumina) 
*ब्रयोनिआ अलबा (Bryonia alba) 
*एलो सोकोट्रिना (Aloe socotrina)
*ऐन्टिम क्रूड (Antim crude) 
*बेप्टेसिआ (Baptesia) 
*कल्केरिया  कार्ब (Calcaria carb) 
*चाइना (China) *कोलिन्सोनिआ (Collinsonia)  
*ग्रैफाइटिस (Graphites)
  कब्ज की सिंगल  रेमेडी  से चिकित्सा के लिए मटेरिया मेडिका  का  अध्ययन  करना चाहिए|  ज्यादा माथा पच्ची न कर सकें तो  उपरोक्त में से कोइ भी पांच औषधिया  मिलाकर ले सकते हैं| 

हर्बल इलाज के दोहे //Dohe of herbal remedy

* शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम, 
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..

*दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय, 
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

*ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल, 
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..

*बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल, 
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..



*अजवाइन को पीसिये , गाढ़ा लेप लगाय, 
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

* अजवाइन को पीस लें, नीबू संग मिलाय, 
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..



*अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम, 
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..

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*अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग, 
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..



*रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर
बेहतर लीवर आपका, टी० बी० भी हो दूर..












*गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम, 
रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..













*
*चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय, 
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..




*लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..






*प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह , 
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..

*सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय, 
दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..

*सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार, 
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..




*तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल, 
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..







* थोड़ा सा गुड़ लीजिए,दूर रहें सब रोग, 
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.

*अजवाइन और हींग लें,लहसुन तेल पकाय, 
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..



*ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि, 
उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि..












*दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ, 
दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ..





* मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल, 
बने सुगन्धित मुख, महक, दूर होय तत्काल..

*कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट, 
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..

*बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग, 
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..

*बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम, 
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..










*नीबू बेसन जल शहद , मिश्रित लेप लगाय, 
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..



*मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय, 
कंठ सुरीला साथ में , वाणी मधुरिम होय.











*पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज, 
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..




* ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम, 
नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..

*कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय, 
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..

*अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम, 
कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम..

*छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग, 

पालक में हैं भरपूर औषधीय गुण//Spinach are rich in medicinal properties


पालक में विटामिन ए,बी,,सी और इ  एवं प्रोटीन,सोडियम,,केल्शियम ,फास्फोरस  और लोह तत्व पाया जाता है| यह रक्त  की शुद्धि  करता है और रक्ताणुओं  में वृद्धि करता है| पालक में  प्रोटीन  उत्पादक  एमिनो एसीड  पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है|
इसके हरे पत्तों में ऐसा तत्त्व होता है जो प्राणी मात्र   का  विकास और वृद्धि करता है| पालक बुद्धि बढ़ाने में सहायक है|
   पालक कफ  एवं श्वास  रोगों में हितकर है| पालक आँतों को क्रिया शील रखता है और आँतों में मौजूद  मल  को बाहर निकालने में सहायता  करता है| मधुमेह रोग में भी पालक की उपयोगिता  साबित हो चुकी है| इसके बीज पीलिया और पित्त प्रकोप  से निजात दिलाने में सहायक हैं| कच्चा पलक खाने में खारा और  थौड़ा कड़वा होता है  लेकिन बहुत लाभ कारी है| दही के साथ कच्चे  पालक का रायता  स्वादिष्ट और गुणकारी होता है| सम्पूर्ण पाचन संस्थान के लिए पालक  अति उपयोगी है|
    पालक निम्न रोगों में हितकर है-  रक्त वृद्धि के लिए पालक का रस आधा गिलास में दो चम्मच शहद  मिलाकर  रोजाना  दो  माह तक पीने से शरीर  में खून की वृद्धि होती है | 
गले की जलन में पालक के रस  से कुल्ले करने से लाभ होता है|
 पालक के पत्तों का रस या क्वाथ  पीने से  पथरी पिघल जाती है| और मूत्र वृद्धि होकर  इसके कण बाहर निकल जाते हैं|नेत्र ज्योति  बढाने के लिए पालक में पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए होता है|
पालक विभिन्न उदर रोगों में लाभ प्रद है| आमाशय के घाव छाले और आँतों के अल्सर में भी पालक का रस  लाभ प्रद है| कच्चे पालक का रस आधा गिलास नित्य पीते रहने से कब्ज- नाश होता है| पायरिया रोग में कच्ची पालक खूब चबाकर  खाना  और पत्ते का रस पीना हितकर है|
  रक्त की कमी संबंधी विकारों मे पालक का रस १०० मिली  दिन में तीन बार पीने से  चेहरे पर लालिमा ,शक्ति स्फूर्ति का संचार   होता है| रक्त संचार  प्रक्रिया में तेजी आती है और  चेहरे के रंग में निखार आता है |

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सर्दी जुकाम का इलाज घरेलू नुस्खों से // Household tips for colds



सर्दी का मौसम जैसे ही शुरू होता है उससे जुड़ी न जाने कितनी ही बीमारी भी दस्तक देने लगती है, जिनका हमें पता तक नहीं चलता। रोज-मर्रा की जिंदगी में हम लोग अपनी सेहत का सही से ख्याल भी नहीं रख पाते जिस कारण हम धीरे-धीरे बड़ी बीमारी को बुलावा देते है। जब हमारा शरीर मौसम के अनुसार एडजस्ट नहीं पाता है तो हम मौसमी रोगों के शिकार हो जाते है। मौसम के बदलाने के कारण व्यक्ति का शरीर वातावरण में हो रहे लगातार और तेज बदवाल को नहीं झेल पाता है जिससे सर्दि और गर्मी का असर सर्दी-जुकाम जैसी बीमारी से ग्रसित हो जाता है| जुकाम की शुरुआत ही नाक से होती है लेकिन इसका असर पूरे शरीर पर होता है। जुकाम की कोई दवाई नहीं है। इससे निपटने के लिए ज्यादातर घरुलु नुस्खे ही काम आते है, इससे बचने के लिए हम
आपको कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं जो आपके बहुत काम आएंगे।

अगर आपके गले में खराश हो और आपकी नाक सर्दी के कारण बंद हो जाए, तो आप घबराएं नहीं बल्कि एक गिलास गर्म पानी में थोड़ा सा नमक डालकर गरारे करें। ऐसा करने से आपका गला साफ हो जाएगा और यह इस बीमारी को भी आपसे दूर रखने में मदद करेंगा।
सर्दी होने पर आप एक चम्मच शहद के साथ अदरक खा सकते हैं। यह प्रक्रिया आपको सुबह शाम करनी होगी जिससे सर्दी जुकाम में जल्दी आराम मिलेगा।




आप जुकाम से निपटने के लिए भाप  भी ले सकते हैं। बंद नाक और बलगम से आपको छुटकारा मिल जाएगा।

पत्ता गोभी के स्वास्थ्य वर्धक गुण // Health benefits of Cabbage


पत्तागोभी में न घुलने वाला फायबर, बिटा केरोटिन, विटामिंस B1, B6, K, E, C के अलावा और भी कई विटामिंस भरपूर मात्रा में होते हैं। पत्तागोभी में मिनरल्स आयरन और सल्फर भी काफी ज्यादा होते हैं।
पत्तागोभी आपके स्वास्थ्य, त्वचा और बालों के लिए बहुत उपयोगी है। इसमें पाए जाने वाले खास गुणों के कारण इसे सुपर फुड भी माना जाता है। अगर आप अपने स्वास्थ्य को बिल्कुल दुरुस्त रखना चाहते हैं तो पत्तागोभी को अपने डाइट का हिस्सा बनाना सबसे बेहतर कदम है।


शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 


1. मेडिकल विशेषज्ञ मानते हैं कि कच्चे पत्तागोभी के ज्यूस में आइसोसाइनेट्स होते हैं जो कि एक प्रकार के केमिकल कंपाउड्स होते हैं जो आपके शरीर में एस्ट्रोजिन मेटाबोलिज्म की प्रकिया को तेज करते हैं और आपको स्तन कैंसर, फेफडों के कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, पेट के कैंसर और कोलोन कैंसर से बचाए रखते हैं। इसके उपयोग से कैंसर के ठीक होने की प्रकिया को भी गति मिलती है।
2. पत्तागोभी पेट को साफ रखने में बहुत कारगर है। इसमें क्लोरीन और सल्फर नाम के दो बहुत जरुरी मिनरल्स होते हैं। आप पत्तागोभी का ज्यूस पीने के बाद एक तरह की गैस महसूस करेंगे और यह गैस इस बात का इशारा होता है कि ज्यूस ने अपना काम करना शुरु कर दिया है।

हाथ पैर और शरीर का कांपना कारण और उपचार

3. क्या आप कुछ किलो वजन कम करने की बहुत कोशिश कर रहे हैं? आप एक बार पत्तागोभी के ज्यूस को भी आजमाइए। पत्तागोभी को वजन कम करने के लिए बहुत ही कारगर उपाय समझा जाता है। यह आपके पाचन को दुरुस्त करता है और इसमें कैलोरी की मात्रा भी बहुत कम होती है। यह पेट से जुडी हर प्रकार की समस्या से आपको निजात दिलाता है और अल्सर के इलाज में तो इसे अचूक उपाय समझा जाता है।
4. पत्तागोभी में फोलिक एसिड होता है जिसमें एनीमिया यानी खून की कमी को दूर करने का खास गुण होता है। फोलिक एसिड में नए ब्लड सेल्स का निर्माण करता है।
5. पत्तागोभी आपको त्वचा संबंधी सभी समस्याओं को भुला देगा। इस बात से कोई प्रभाव नही पड़ता कि आपकी त्वचा कितनी खराब हो चुकी है क्योंकि पतागोभी में त्वचा की प्राकृतिक चमक को वापस लाने का गुण होता है। 

6. पत्तागोभी एंटीआक्सीडेंट्स और फेटोकेमिकल्स से भरपूर होता है और इस तरह यह त्वचा संबंधी परेशानियों जैसे एक्ने, पिंपल्स और ब्लैक हेड्स से आपको सुरक्षित रखता है।
7. पत्तागोभी में पाए जाने वाले एंटीआक्सीडेंट्स त्वचा में नमी लाते हैं और उम्र का असर खत्म कर देते हैं। आप पत्तागोभी का ज्यूस अपने रोज के नाश्ते में लीजिए और रिंकल्स को गायब होते देखिए।
8. पत्तागोभी को रंग साफ करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसमें पोटेशियम (जिसमें आपके शरीर को साफ करने का गुण होता है) के अलावा विटामिन A और विटामिन E होते हैं। यह दोनों विटामिन स्किन टीशुज को ताजगी देकर आपकी त्वचा को गोरा, नर्म और आकर्षक बनाते हैं।
9. पत्तागोभी के फायदों में अगला क्रम बालों के स्वास्थ्य का आता है। इसके बालों पर होने वाले फायदे आश्चर्यजनक हैं। पत्तागोभी का ज्यूस आपके शरीर में सल्फर की पूर्ति करता है और आपके बालों को मजबूती प्रदान कर उनका झड़ना रोकता है। 
10. पत्तागोभी के ज्यूस में पाया जाने वाले विटामिन E और सिलीकॉन से नए बाल उग आते हैं। इसके नियमित इस्तेमाल से आप काले और घने बाल पा सकते हैं।






आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


करेले के स्वास्थ्य वर्धक गुण //Bitter gaurd for health



कड़वे करेले में बीमारियोंं से लड़ने की उम्दा शक्ति है| प्रति 100 ग्राम करेले में लगभग
92 ग्राम नमी होती है। साथ ही इसमें लगभग 4 ग्राम कार्बोहाइडेट, 15 ग्राम प्रोटीन, 20 मिलीग्राम
कैल्शियम, 70 मिलीग्राम फस्फोरस, 18 मिलीग्राम, आयरन तथा बहुत थोड़ी मात्रा में वसा भी
होती है। इसमें विटामिन ए तथा सी भी होती है जिनकी मात्रा प्रति 100 ग्राम में क्रमश:
126 मिलीग्राम तथा 88 मिलीग्राम होती है।
२) करेला मधुमेह में रामबाण औषधि का कार्य करता है, छाया में सुखाए हुए करेला का एक
चम्मच पावडर प्रतिदिन सेवनकरने से डायबिटीज में चमत्कारिक लाभ मिलता है क्योंकि करेला
पेंक्रियाज को उत्तेजित कर इंसुलिन के स्रवण को बढ़ाता है|




३) विटामिन ए की उपस्थिति के कारण इसकी सब्जी खाने से रतौंधी रोग नहीं होता है। 
जोड़ों के दर्द में करेले की सब्जी का सेवन व जोड़ों पर करेले के पत्तों का रस लगाने से
आराम मिलता है।
४) करेले के तीन बीज और तीन कालीमिर्च को पत्थर पर पानी के साथ घिसकर बच्चों को पिलाने
से उल्टी-दस्त बंद होते हैं।करेले के पत्तों को सेंककर सेंधा नमक मिलाकर खाने से अम्लपित्त के
रोगियों को भोजन से पहले होने वाली उल्टी बंद होती है।



गुर्दे के रोगों का आयुर्वेदिक घरेलू पदार्थों से इलाज


५) करेला खाने वाले को कफ की शिकायत नहीं होने पाती। इसमें प्रोटीन तो भरपूर पाया जाता है।
इसके अलावा करेले मेंकैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन पाए जाते हैं। करेले की छोटी और बड़ी
दो प्रकार की प्रजाति होती है, जिससे इनके कसैलेपन में भी अंतर आता है।






6. करेले का रस और 1 नींबू का रस मिलाकर सुबह सेवन करने से शरीर की चर्बी कम होती है
और मोटापा कम होता है।पथरी रोगी को 2 करेले का रस प्रतिदिन पीना चाहिए और इसकी सब्जी
खाना चाहिए। इससे पथरी गलकर पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है।











7. लकवे के रोगियों को करेला जबरदस्त फायदा पहुंचाता है। दस्त और उल्टी की शिकायत की
सूरत में करेले का रसनिकालकर उसमें काला नमक और थोड़ा पानी मिलाकर पीने से फायदा देखा गया है।

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि 





सहजन के पेड़ से करें कई बीमारियों के उपचार // Benifits of drumstick tree.

 सहजन या मुनगा जड़ से लेकर फूल-पत्तियों तक सेहत का खजाना है। इसके ताजे फूल से हर्बल टॉनिक बनाया जाता है और इसकी पट्टी में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। भारत में खासकर दक्षिण भारत में इसका उपयोग विभिन्न व्यंजनो में खूब किया जाता है। इसका तेल भी निकाला जाता है और इसकी छाल पत्ती गोंद, जड़ आदि से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं। आयुर्वेद में 300 रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है।








  










१)  सहजन के फूल उदर रोगों व कफ रोगों में इसकी फली वात व उदरशूल में पत्ती ,नेत्ररोग, मोच सायटिका,गठिया आदि में उपयोगी है।
२) सहजन की जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग साईटिका ,गठिया,यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है।
३) . सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है 

४) . सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वातए व कफ रोग शांत हो जाते है, इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है\ साईंटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है .
५) सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है।
६) सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है।
७) सहजन की सब्जी खाने से पुराने गठिया और जोड़ों के दर्द व् वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।
८) सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है। 

९) .सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।
१०) . सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।
११) . सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है।
१२) सहजन फली का रस सुबह शाम पीने से






उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।
१३) सहजन की पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है।
१४) . सहजन. की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है।
१५) . सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है। 


*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*

१६) सहजन. की जड़ का काढे को सेंधा नमक और हिंग के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।
१७) . सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है।
१८) सहजन के पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे तो सर दर्द दूर हो जाता है .

१९) सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है।

२०) . सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है। विटामिन सी शरीर के कई रोगों से लड़ता है खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तोए आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। ईससे जकड़न कम होगी।
२१) . सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन , मैग्नीशियम और सीलियम होता है। 


*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज

२२) .सहजन का जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है।
२३) सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है। इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है। इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है।
२४) सहजन का सूप पीने से शरीर का रक्त साफ होता है। पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा।
२५) . सहजन के बीजों का तेल शिशुओं की मालिश के लिए प्रयोग किया जाता है। त्वचा साफ करने के लिए सहजन के बीजों का सत्व कॉस्मेटिक उद्योगों में बेहद लोकप्रिय है। सत्व के जरिए त्वचा की गहराई में छिपे विषैले तत्व बाहर निकाले जा सकते हैं।

२६) . सहजन के बीजों का पेस्ट त्वचा के रंग और टोन को साफ रखने में मदद करता है।मृत त्वचा के पुनर्जीवन के लिए इससे बेहतर कोई रसायन नहीं है। धूम्रपान के धुएँ और भारी धातुओं के विषैले प्रभावों को दूर करने में सहजन के बीजों के सत्व का प्रयोग सफल साबित हुआ है।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार