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इमली के बीज के स्वास्थ्य लाभ



इमली एक स्‍वादिष्‍ट खाद्य पदार्थ है। लेकिन क्‍या आप इमली के बीज के फायदे जानते हैं। बेशक हम बहुत से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त करने के लिए इमली का उपयोग करते हैं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की इमली के बीजों में भी औषधीय गुण होते हैं। प्राचीन समय से ही इमली के बीजों को भूनकर उपयोग किया जा रहा है जो बहुत सी बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। इमली बीज के फायदे मधुमेह को रोकने, पाचन को ठीक करने, कैंसर का उपचार करने, दांतों को मजबूत बनाने, गठिया का इलाज करने और दस्‍त को ठीक करने के लिए होते हैं। इस लेख आप इमली बीज के फायदे जान सकते हैं।
आपके द्वारा उपभोग की जाने वाली इमली न केवल स्‍वादिष्‍ट होती है बल्कि औषधीय गुणों वाली भी होती है। अक्‍सर हम लोग इमली का उपयोग करने के बाद इमली के बीजों को फेंक देते हैं। लेकिन इमली के बीजों के फायदे जानकर आप ऐसा नहीं करेगें। क्‍योंकि इमली के बीज स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद तो होते ही हैं साथ ही यह आपकी त्‍वचा संबंधी बहुत सी समस्‍याओं को भी दूर कर सकते हैं। आप इमली के बीजों को सुखा कर या पाउडर बनाकर उपयोग कर सकते हैं। आइए जाने किन स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के लिए इमली के बीज का उपयोग किया जा सकता है।

कफ या गले के संक्रमण से देते हैं राहत
इमली के बीजों का पाउडर और अदरक का जूस एक साथ मिलाकर लेने से कफ या गले के संक्रमण से राहत मिलती है।
इमली के बीज मुँह में होने वाली किसी भी प्रकार की समस्या का भरपूर इलाज करते हैं।
अगर आपको मुँह से बदबू आने की समस्या है तो ऐसे में आपको इमली के बीजों से बना हुआ माउथवाश का इस्तेमाल करना चाहिए।
आप घर पर भी इमली के बीजों का माउथवाश तैयार कर सकते हैं।
इसके लिए, इमली के बीजों को पानी में उबाल लें।
10-15 मिनट तक उबालने के बाद आप इसे थोड़ी देर ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
इसके बाद आप सुबह शाम इस माउथवाश से कुल्ली कर सकते हैं।
सर्दी खांसी का उपचार
मौसम परिवर्तन और गलत खान-पान के कारण आप सर्दी और जुकाम का शिकार हो सकते हैं। लेकिन सर्दी के लक्षणों को कम करने के लिए आप इमली के बीजों का उपयोग कर सकते हैं। इमली के बीज का रस एक अच्‍छा माउथ वॉश हो सकता है। आप अपने गले की खराश से राहत पाने के लिए इमली बीज के पानी से गरारे करें। इसके अलावा इमली बीज का पानी सर्दी, खांसी और अन्‍य गले के संक्रमण से बचा सकता है। आप इस पानी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें अदरक और दालचीनी को भी मिला सकते हैं।
मधुमेह के लिए
जो लोग मधुमेह रोगी हैं उनके लिए इमली के बीज किसी औषधी से कम नहीं है। इमली के बीज रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में मदद करते हैं। मधुमेह रोगी के द्वारा इमली के बीजों का सेवन शरीर में इंसुलिन उत्‍पादन को बढ़ाता है। शरीर में उच्‍च रक्‍त शर्करा के कारण ही मधुमेह रोग होता है। इमली के बीज अल्‍फा-एमाइलेज गुणों से भरपूर होते हैं जो रक्‍त शर्करा के उचित प्रबंधन में मदद करते हैं। इस तरह से मधुमेह के लक्षणों को कम करने के लिए इमली के बीज फायदेमंद होते हैं।
पाचन के लिए
यदि आप अपच जैसी समस्‍याओं से परेशान हैं तो इमली के बीज फायदेमंद हो सकते हैं। इमली के बीज से बनाए गए काढ़े का उपयोग अपच को ठीक करने और पित्‍त उत्‍पादन को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा इमली के बीजों में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है जो पाचन संबंधी क्रिया में मदद करते हैं। नियमित रूप से इमली के बीजों का उपभोग स्‍टामाटाइटिस (stomatitis) और कब्‍ज जैसी समस्‍याओं से छुटकारा दिला सकता है। यदि आप पेट संबंधी समस्‍याओं को दूर करना चाहते हैं तो इमली के बीजों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
त्‍वचा के लिए
आप अपनी त्‍वचा की समस्‍याओं को दूर करने के लिए प्राकृतिक उपायो को अपनाना चाहिए। इमली के बीज के फायदे त्‍वचा को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में मदद करते हैं। इमली के बीज से बनाया हुआ अर्क त्‍वचा की लोच को बढ़ाने, त्‍वचा को हाइड्रेट रखने और त्‍वचा को कोमल बनाने में मदद करता है। इमली बीज के अर्क में हयालूरोनिक एसिड होता है जो कि त्‍वचा की झुर्रियों और ठीक रेखाओं को दूर करने में मदद करता है। इमली के बीज पानी में घुलनशील होते हैं इसलिए इनका उपयोग सीरम, जैल, फैशियल टोनर और मॉइश्‍चराइजर के रूप में किया जाता है। इमली के बीजों का उपयाग एंटी-एजिंग फॉमूर्ला के रूप में भी काम करता है। यदि आपको भी त्‍वचा संबंधी इसी प्रकार की कोई समस्‍या हों तो आप इमली बीज के पाउ
डर का उपयोग कर लाभ ले सकते हैं।
गठिया का इलाज
एंटी-इंफ्लामेटरी गुणों के कारण इमली के बीज हमारे लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं। इन्‍हीं गुणों के कारण ही प्राचीन समय से इमली बीज का उपयोग गठिया के दर्द और इससे जुड़ी समस्‍याओं को दूर करने के लिए किया जा रहा है। नियमित रूप से इमली के बीज का सेवन जोड़ों में स्‍नेहन को बढ़ावा देता है। इसके लिए आप भुने हुए इमली के बीज के पाउडर को पानी के साथ दिन में दो बार सेवन कर सकते हैं। यह गठिया के दर्द से राहत दिला सकता है। यदि आप भी गठिया से प्रभावित हैं तो इमली बीज के पाउडर का उपयोग कर सकते हैं।
आंखों के लिए
आप अपनी आंखों की सुरक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए इमली के बीज का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इमली के बीजों में औषधीय गुण होते हैं। आप इमली बीज का रस निकालें और अपनी आंखों को मॉइस्‍चराज रखने के लिए आई ड्राप की तरह उपयोग करें। यह आंखों के संक्रमण जैसे आंख आना (conjunctivitis) और इसी तरह की समस्‍याओं को दूर करने में मदद करता है। इमली के बीजों में पॉलीसेकेराइड (polysaccharides) होते हैं जो आंख की रक्षा करने में मदद करते हैं।
हृदय के लिए लाभकारी हैं इमली के बीज
इमली के बीजों में पोटैशियम की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। पोटेशियम रक्तचाप को संतुलित रखता है जिससे कि शरीर में हाईपरटेंशन का स्तर नियमित रहता है।
हाइपरटेंशन का स्तर नियमित रहने से नसों में रक्त का प्रवाह सही से बना रहता है। इस तरह हृदय को अतिरिक्त मात्रा में कार्य करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है और न ही उस पर किसी प्रकार का कोई भी प्रेशर पड़ता है।
यही कारण है कि इमली के बीजों में हृदय रोगों को पछाड़ने की क्षमता होती है।
गर्भावस्‍था के लिए
फाइबर की अधिक मात्रा के कारण गर्भवती महिलाओं को इमली के बीजों का सेवन लाभकारी होता है। यह महिला स्‍वास्‍थ्‍य के साथ ही भ्रूण के लिए उपयोगी माना जाता है। इसलिए गर्भावस्‍था के दौरान पाचन समस्‍याओं जैसे कब्‍ज आदि के लिए इमली बीज सेवन करने की सलाह दी जाती है
दांतों के लिए
स्‍वस्‍थ्‍य और मजबूत दांत सभी की इच्‍छा होती है। लेकिन क्‍या आपको पता है कि इमली के बीज दांतों के लिए फायदेमंद होते हैं। इमली बीज के पाउडर का उपयोग दांतों और मसूढ़ों को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में मदद करते हैं। यदि आपके दांत कमजोर हैं, या आप अधिक मात्रा में धूम्रपान करते हैं तो यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इमली के बीज निकोटीन या टार्टर की परत को दूर करने में मदद करते हैं जो दांतों की विशेष समस्‍या होती है। नियमित रूप से उपयोग किया जाने पर इमली बीज का पाउडर चाय, कॉफी, सोडा और धूम्रपान के कारण दांतों के पीलेपन को भी हटाने में मदद करते हैं। इस तरह से आप भी अपने दांतों को मजबूत करने के लिए इमली बीज के पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
हड्डियों के लिए इमली के बीजों के फायदे
हड्डियों के लिए इमली के बीज किसी वरदान से कम नहीं हैं। जब हड्डियों में मोच आ जाए या हड्डी फ्रैक्चर हो जाए तो ऐसे में इमली के बीजों से बनाया गया लेप इस समस्या का समाधान करता है।
जिस जगह पर फ्रैक्चर हो रहा हो वहाँ पर इमली के बीजों से बनाया गया पेस्ट लेप के रूप में लगा दें। यह न सिर्फ़ फ्रैक्चर हुई हड्डी को ठीक करने का कार्य करता है बल्कि दर्द से भी काफ़ी हद तक राहत देता है।
कैंसर की संभावनाओं को कम करते हैं इमली के बीज
इमली के बीजों से बनाया गया जूस कैंसर की संभावनाओं से छुटकारा देता है। इमली के बीजों में एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज़ पाई जाती हैं।
इन प्रॉपर्टीज़ के कारण शरीर में ट्यूमर कोशिकाएं या एक्स्ट्रा कोशिकाएँ नहीं बनने पाती हैं। इस तरह शरीर को कैंसर की संभावनाओं से राहत मिलती है।
*एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का हर तीसरा आदमी अवसाद का शिकार है।नपुंसकता और शीघ्र पतन जैसी बीमारियाँ हो जाने से व्यक्ति मन ही मन में बहुत ही परेशान रहता है और किसी को बता भी नहीं पाता है
वीर्य जल्दी गिरने मे 
आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी बोतल में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।
पाउडर कैसे बनाएं-
200 ग्राम इमली के बीज को घर पर भून लें। फिर इनको कूटकर छिलका निकाल लें। इसमें 200 ग्राम मिश्री मिला लें और कांच के बर्तन में रख दें।
या फिर
200 ग्राम बीजों को चार दिन पानी में भिगोकर रखें और फिर छिलके उतार कर छाया में सुखाएं। सूखने पर पीसकर 200 ग्राम मिश्री मिलाकर रख लें।
यूज कैसे करें-
इस पाउडर में से एक चम्मच डेली गर्म दूध से लें।
फायदे
◆ यह कैल्शियम और मिनरल से भरपूर होता है इसलिए हड्डियों को मजबूत करता है और जोड़ों की समस्या को भी ठीक करता है।
◆ यह कमजोरी और पुरुषों से संबधित सभी प्रकार की समस्याओं को दूर करता है।
◆ यह महिलाओं के सफेद पानी या व्हाइट डिस्चार्ज की प्रॉब्लम में भी बहुत लाभदायक है।
लेकिन कुछ लोगों के लिए इनका उपयोग हानिकारक हो सकता है।
सावधानी-
फाइबर की उच्‍च मात्रा होने के कारण अधिक मात्रा में इमली बीज का सेवन पेट संबंधी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है।
जो लोग रक्‍त पतला करने के लिए दवाओं का सेवन कर रहे हैं उन्‍हें इमली के बीज का सेवन नहीं करना चाहिए।
क्‍योंकि यह दवाओं के प्रभाव को कम कर सकता है।
यदि आप तनाव को कम करने वाली दवाओं का सेवन कर रहे हैं तब भी इमली के बीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। क्‍योंकि इमली के बीज सेरोटोनिन विषाक्‍तता (serotonin toxicity) हो सकती है।
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अदरक के औषधीय गुण और फायदे

                                                           

                                         
अदरक महज एक मसाला ही नहीं है, बल्कि यह सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं। अदरक में आयरन, कैल्शियम, आयोडीन, क्लो‍रीन व विटामिन सहित कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। साथ ही अदरक एक शक्तिशाली एंटीवायरल भी है। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। अदरक को ताजा और सूखा दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है। आइए अदरक के कुछ गुणों के बारे में जानते हैं।
खांसी में फायदेमंद
अदरक हमेशा से खांसी की बेहतरीन दवा माना जाता है। खांसी आने पर अदरक के छोटे टुकडे को बराबर मात्रा में शहद के साथ गर्म करके दिन में दो बार सेवन कीजिए। इससे खांसी आना बंद हो जाएगा और गले की खराश भी समाप्त होगी।
भूख बढ़ाने के लिए
अदरक का नियमित सेवन करने से भूख न लगने की समस्‍या से छुटकारा पाया जा सकता है। अगर आपको भूख कम लगती हैं तो अदरक को बारीक काटकर, थोड़ा सा नमक लगाकर दिन में एक बार लगातार आठ दिन तक खाइए। इससे पेट साफ होगा और ज्यादा भूख लगेगी।
अदरक कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सक्षम
आधुनिक शोधों में अदरक को विभिन्न प्रकार के कैंसर में एक लाभदायक औषधि के रूप में देखा जा रहा है और इसके कुछ आशाजनक नतीजे सामने आए हैं।
मिशिगन यूनिवर्सिटी कांप्रिहेंसिव कैंसर सेंटर के एक अध्ययन में पाया गया कि अदरक ने न सिर्फ ओवरी कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया, बल्कि उन्हें कीमोथैरेपी से प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने से भी रोका जो कि ओवरी के कैंसर में एक आम समस्या होती है।
इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने ओवरी कैंसर कोशिकाओं पर अदरक पाउडर और पानी का एक लेप लगाया। हर परीक्षण में पाया गया कि अदरक के मिश्रण के संपर्क में आने पर कैंसर की कोशिकाएं नष्ट हो गईं। हर कोशिका ने या तो आत्महत्या कर ली, जिसे एपोप्टोसिस कहा जाता है या उन्होंने एक-दूसरे पर हमला कर दिया, जिसे ऑटोफेगी कहा जाता है।
अदरक को स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और कोलोन कैंसर के इलाज में भी बहुत लाभदायक पाया गया है।
जर्नल ऑफ बायोमेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित शोध में पता चला कि अदरक के पौधे के रसायनों ने स्वस्थ स्तन कोशिकाओं पर असर डाले बिना स्तन कैंसर की कोशिकाओं के प्रसार को रोक दिया। यह गुण बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पारंपरिक विधियों में ऐसा नहीं होता। हालांकि बहुत से ट्यूमर कीमोथैरैपी से ठीक हो जाते हैं, मगर स्तन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना ज्यादा मुश्किल होता है। वे अक्सर बच जाती हैं और उपचार के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेती हैं।
अदरक के इस्तेमाल के दूसरे फायदे ये हैं कि उसे कैप्सूल के रूप में दिया जाना आसान है, इसके बहुत कम दुष्प्रभाव होते हैं और यह पारंपरिक दवाओं का सस्ता विकल्प है।

आधुनिक विज्ञान प्रमाणित करता है कि अदरक कोलोन में सूजन को भी कम कर सकता है जिससे कोलोन कैंसर को रोकने में मदद मिलती है। मिशिगन यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 30 मरीजों के एक समूह को 28 दिनों में दो ग्राम अदरक की जड़ के सप्लीमेंट या प्लेसबो दिए। 28 दिनों के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों ने अदरक की जड़ का सेवन किया था, उनमें कोलोन की सूजन के चिह्नों में काफी कमी पाई गई। इससे यह कोलोन कैंसर के रिस्क वाले लोगों में एक कारगर प्राकृतिक बचाव विधि हो सकती है।
कई और तरह के कैंसर, जैसे गुदा कैंसर, लिवर कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, मेलानोमा और पैंक्रियाज के कैंसर को रोकने में अदरक के तत्वों की क्षमता पर भी अध्ययन किए गए हैं। यह एक दिलचस्प बात है कि एक कैंसर रोधी दवा बीटा-एलिमेन अदरक से बनाई जाती है।
जी मिचलाना
जी मिचलना और उल्टी की समस्या को रोकने के लिए अदरक औषधि की तरह का काम करता है। 1 चम्मच अदरक के जूस में 1 चम्मच नींबू का रस मिलाएं। इसको हर दो घंटे बाद पीएं। जल्द ही राहत मिलेगी।
*अदरक के ज्यूस में सूजन को कम करने की शक्ति अत्यधिक मात्रा में होती है और यह उन लोगों के लिए वरदान की तरह है, जो जोड़ों के दर्द और सूजन से परेशान हैं। एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग अदरक के ज्यूस का उपयोग नियमित तौर पर करते हैं उन्हें जोड़ों में सूजन और दर्द पैदा करने वाली बीमारियां परेशान नहीं करतीं। आपके जोड़ों की समस्या नई हो या कई साल पुरानी- यकीन रखिए कि अदरक का ज्यूस बहुत असरकारी है। अदरक के ज्यूस में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में ताजे रक्त के प्रवाह को बढ़ाते हैं, क्योंकि इनमें खून को साफ करने का खास गुण होता है।

अदरक हृदय के लिए लाभकारी -
अदरक सालों से हृदय रोगों के उपचार में इस्तेमाल होती रही है। चीनी चिकित्सा में कहा जाता है कि अदरक के उपचारात्मक गुण हृदय को मजबूत बनाते हैं। हृदय रोगों से बचाव और उसके उपचार में अक्सर अदरक के तेल का प्रयोग किया जाता था।
आधुनिक अध्ययन दर्शाते हैं कि इस जड़ी-बूटी के तत्व कोलेस्ट्रॉल को कम करने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, रक्त प्रवाह में सुधार लाने और अवरुद्ध आर्टरियों तथा रक्त के थक्कों से बचाव करने का काम करते हैं। ये सारी चीजें हृदयाघात (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक के जोखिम को कम करती हैं।
अदरक मोशन सिकनेस मे-
अलग-अलग तरह की मतली और उल्टी को ठीक करने में अदरक बहुत मददगार होती है। गर्भवती स्त्रियों में मॉर्निंग सिकनेस, सफर पर रहने वाले लोगों में मोशन सिकनेस और कीमोथैरेपी के मरीजों में भी मितली की समस्या में यह राहत देती है। कीमोथैरेपी के दौरान वमन रोकने वाली दवाएं दिए जाने के बावजूद 70 फीसदी मरीजों को मितली की परेशानी होती है। वयस्क कैंसर रोगियों पर किए गए एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि रोजाना कीमो से पहले आधा से एक ग्राम अदरक की डोज दिए जाने पर अध्ययन में हिस्सा लेने वाले 91 फीसदी मरीजों में तेज मितली की गंभीरता काफी हद तक कम हुई।
अदरक चक्कर आने के साथ आने वाली मितली को भी कम करने में मदद करती है। इस संबंध में हुए शोध से पता चलता है कि इस मसाले के उपचारात्मक रसायन, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र में काम करते हुए उबकाई के असर को कम करते हैं।
अदरक मधुमेह में लाभदायक तत्व- 
मधुमेह के मामले में अध्ययनों ने अदरक को इसके बचाव और उपचार दोनों में असरकारी माना है।
ऑस्ट्रेलिया में सिडनी यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में अदरक को टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए असरदार पाया गया। अदरक के तत्व इंसुलिन के प्रयोग के बिना ग्लूकोज को स्नायु कोशिकाओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया बढ़ा सकते हैं। इस तरह इससे उच्च रक्त शर्करा स्तर (हाई सुगर लेवल) को काबू में करने में मदद मिल सकती है।
अध्ययनों में पाया गया है कि अदरक मधुमेह से होने वाली जटिलताओं से बचाव करती है। अदरक मधुमेह पीड़ित के लिवर, किडनी और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सुरक्षित कर सकती है। साथ ही वह इस बीमारी के एक आम दुष्प्रभाव मोतियाबिंद का खतरा भी कम करती है।
अदरक जोड़ों के दर्द और आर्थराइ‍टिस में -

अदरक में जिंजरोल नामक एक बहुत असरदार पदार्थ होता है जो जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द को कम करता है। एक अध्ययन के मुताबिक, अदरक गंभीर और स्थायी इंफ्लामेटरी रोगों के लिए एक असरकारी उपचार है।
कई और वैज्ञानिक अध्ययन भी जोड़ों के दर्द में अदरक के असर की पुष्टि करते हैं। गठिया के शुरुआती चरणों में यह खास तौर पर असरकारी होता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित बहुत से मरीजों ने नियमित तौर पर अदरक के सेवन से दर्द कम होने और बेहतर गतिशीलता का अनुभव किया।
हांग कांग में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि अदरक और संतरे के तेल से मालिश करने पर घुटने की समस्याओं वाले मरीजों में थोड़ी देर के लिए होने वाली अकड़न और दर्द में राहत मिलती है।
अदरक कसरत से होने वाले सूजन और मांसपेशियों के दर्द को भी कम कर सकती है। जार्जिया यूनिवर्सिटी द्वारा करवाए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लगातार 11 दिन तक 34 और 40 वाटंलियरों के दो समूहों को कच्ची और पकाई हुई अदरक खिलाई। अध्ययन के नतीजों से यह निष्कर्ष निकाला गया कि अदरक के सप्लीमेंट्स का रोजाना इस्तेमाल, कसरत से होने वाले मांसपेशियों के दर्द में 25 फीसदी तक राहत देती है।
हाजमे के लिए
पेट की समस्‍याओं के लिए अदरक बहुत ही फायदेमंद होता है। यह अपच और पाचन में सुधार करने में मदद करता है। अदरक को अजवाइन, सेंधा नमक व नींबू का रस मिलाकर खाने से पाचन क्रिया ठीक रहती है। इससे पेट में गैस नहीं बनती, खट्टी-मीठी डकार आना बंद हो जाती है। साथ ही कब्‍ज की समस्‍या से भी निजात मिलती हैं।
त्वचा को आकर्षक बनाने के लिए
अदरक के सेवन से त्‍वचा आकर्षित और चम‍कदार बनती है। अगर आप भी अपनी त्‍वचा को आकर्षित बनाना चाहते हैं तो सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी के साथ अदरक का एक टुकड़ा जरूर खाएं। इससे न केवल आपकी त्वचा में निखार आएगा बल्कि आप लंबे समय तक जवां दिखेंगे।
अदरक माइग्रेन और मासिक धर्म की पीड़ा मे-
शोध से पता चलता है कि अदरक माइग्रेन (सिरदर्द) में राहत दे सकती है। ईरान में किए गए और फाइटोथैरेपी रिसर्च जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि माइग्रेन के लक्षणों के उपचार में अदरक पाउडर माइग्रेन की आम दवा सुमाट्रिप्टन जितना ही असरदार है।
क्लीनिकल ट्रायल में तीव्र लक्षणों वाले 100 माइग्रेन पीड़ितों में से कुछ को सुमाट्रिप्टन दिया गया और बाकियों को अदरक पाउडर। शोध में पाया गया कि दोनों की प्रभावक्षमता एक जैसी थी और अदरक पाउडर के दुष्प्रभाव सुमाट्रिप्टन के मुकाबले बहुत कम थे। इससे यह पता चलता है कि यह माइग्रेन का अधिक सुरक्षित उपचार है।
माइग्रेन का हमला शुरू होते ही अदरक की चाय पीने से प्रोस्टेग्लैंडिन दब जाते हैं और असहनीय दर्द में राहत मिलती है। इससे माइग्रेन से जुड़ी उबकाई और चक्कर की समस्याएं भी नहीं होतीं।
अदरक डिस्मेनोरिया (पीड़ादायक मासिक धर्म) से जुड़े दर्द को भी काफी कम करने में मददगार है। ईरान में किए गए एक शोध में 70 महिला विद्यार्थियों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को अदरक के कैप्सूल और दूसरे को एक प्लेसबो दिया गया। दोनों को उनके मासिक चक्र के पहले तीन दिनों तक ये चीजें दी गईं। शोधकर्ताओं ने पाया कि अदरक के कैप्सूल लेने वाली 82.85 फीसदी महिलाओं ने दर्द के लक्षणों में सुधार बताया जबकि प्लेसबो से सिर्फ 47.05 फीसदी महिलाओं को ही राहत मिली।
बहुत सी संस्कृतियों में जलन के उपचार के लिए त्वचा पर ताजे अदरक का रस भी डालने की परंपरा है और अदरक का तेल जोड़ों तथा पीठ के दर्द में काफी असरकारी पाया गया है।
अदरक श्वास की समस्याओं और दमा के उपचार में 
श्वास संबंधी समस्याओं के उपचार में अदरक के तत्वों के सकारात्मक नतीजे दिखे हैं। शोध से पता चलता है कि दमा से पीड़ित मरीजों के उपचार में इसका प्रयोग आशाजनक रहा है। दमा एक स्थायी बीमारी है जिसमें फेफड़ों की ऑक्सीजन वाहिकाओं के स्नायुओं में सूजन आ जाती है और वे विभिन्न पदार्थों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं, जिससे दौरे पड़ते हैं।
हाल में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि अदरक दो तरीके से दमा के उपचार में लाभदायक होता है। पहला हवा के मार्ग की मांसपेशियों को संकुचित करने वाले एंजाइम को अवरुद्ध करते हुए और दूसरे हवा के मार्ग को आराम पहुंचाने वाले दूसरे एंजाइम को सक्रिय करते हुए।
अदरक अपने शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट, सूजन रोधी (एंटी-इंफ्लामेटरी) और दर्दनिवारक तत्वों के कारण असरकारी होती है। इसके गुण नॉन स्टेरायडल एंटी इंफ्लामेटरी दवाओं के समान होते हैं मगर इसके नकारात्मक दुष्प्रभाव नहीं होते। जबकि दमा की बीमारी के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के चिंताजनक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए अदरक जैसे वैकल्पिक, सुरक्षित उपचार का मिलना इस रोग के उपचार में एक आशाजनक खोज है।
ध्यान देने योग्य बातें
दो साल से कम उम्र के बच्चों को अदरक नहीं दी जानी चाहिए।
आम तौर पर, वयस्कों को एक दिन में 4 ग्राम से ज्यादा अदरक नहीं लेनी चाहिए। इसमें खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाने वाला अदरक शामिल है।
गर्भवती स्त्रियों को 1 ग्राम रोजाना से अधिक नहीं लेना चाहिए।
आप अदरक की चाय बनाने के लिए सूखे या ताजे अदरक की जड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं और उसे रोजाना दो से तीन बार पी सकते हैं।
अत्यधिक सूजन को कम करने के लिए आप रोजाना प्रभावित क्षेत्र पर कुछ बार अदरक के तेल से मालिश कर सकते हैं।
अदरक के कैप्सूल दूसरे रूपों से बेहतर लाभ देते हैं।
अदरक खून पतला करने वाली दवाओं सहित बाकी दवाओं के साथ परस्पर प्रभाव कर सकती है।
किसी विशेष समस्या के लिए अदरक की खुराक की जानकारी और संभावित दुष्प्रभावों के लिए हमेशा डॉक्टर से संपर्क करें।
अदरक-नीबू की चाय – कैसे बनाएं
चाय की यह स्वास्थ्यकर रेसिपी आपको ताजगी और स्फूर्ति से भर देगी। साथ ही इसमें कैफीन के दुष्प्रभाव नहीं होते। एक पतीले में साढ़े चार कप पानी उबालें। पानी के उबलने पर 2 इंच अदरक के टुकड़े को 20-25 तुलसी पत्तों के साथ कूट लें। इस पेस्ट को सूखी धनिया के बीजों (वैकल्पिक) के साथ उबलते पानी में डाल दें। 2-3 मिनट तक उबलने दें।
चाय को कप में छान लें और स्वाद के लिए 1 चम्मच नीबू का रस और गुड़ मिलाएं। गरम-गरम पिएं।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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