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सेहत के लिए श्रेष्ठ व्यायाम है प्रात;काल टहलना



रोग मुक्तिकारक है सुबह का घूमना -
टहलने को कसरतों की रानी कहा गया है |
इससे हृदय शक्तिशाली होता है|
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है|
रक्तचाप सामान्य होने में सहायक है|
दिल का दौरा पड़ने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है|
शरीर के जोड़ों और मांस पेशियो में शक्ति आती है|
टहलने से शरीर की अनावश्यक केलोरी जल जाती है और इस तरह मोटापा कम करने में मदद मिलती है|
टहलने से शरीर सुडौल और तेजस्वी बनता है|
४५ की आयु के बाद जैसे ही प्रोढावस्था आती है तब हड्डिया कमजोर होने लगती हैं| | ३०-४० मिनिट नियमित टहलने और केल्शियम से भरपूर भोजन लेने से हड्डिया मजबूत बनी रहती है|और अस्थि क्षरण की आशंका कम हो जाती है|
श्रेष्ठ स्वास्थ के लिए टहलने का तरीका और वातावरण पर ध्यान देना जरूरी है| घूमने का सही समय प्रात;काल सूर्योदय से पहिले है|सुबह के वातावरण में आक्सीजन पर्यात मात्रा में मोजूद होती है|,दुसरे यह समय प्रदूषण मुक्त भी होता है| इसे ऊषाकाल कहते है|

  टहलने से रक्त संचार  में इजाफा होता है|इससे शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त आक्सीजन मिलती  है| रक्त संचार बढ़ने से आहिस्ता- आहिस्ता  ब्लड प्रेशर  भी नियंत्रण में आ जाता है| वर्तमान जीवन शैली में कोलेस्ट्रोल  बढ़ने की समस्या  उभार पर है|  कोलेस्ट्रोल  का  हार्ट अटेक से गहरा सम्बन्ध होता है|  नियमित घूमने से कोलेस्टरोल की  समस्या  का भी निवारण हो जाता है| 

टहलने का सही तरीका-

वार्म अप जरूर कर लेना चाहिए| टहलना धीमी गति से शुरू करना चाहिए| ४-५ मिनिट बाद चाल बढानी चाहिए| थकावट महसूस होने पर पुन; चाल धीमी कर देनी चाहिये| यानी जरूरत के मुताबिक़ धीमी गति और तेज गति से चलना अच्छा रहता है| कम से कम तीन किलो मीटर घूमना उचित माना जा सकता है| देखने में आताहै कि जो लोग ५-६ किलोमीटर प्रतिदिन घूमने के अभ्यस्त हैं वे ज्यादा चुस्त और फुर्तीले और निरोग होते हैं| टहलने से थकने की चिंता नहीं करना चाहिए| हाँ ज्यादा थकावट महसूस हो तो कहीं थोड़ी देर के लिए विश्राम भी कर लेना चाहए|

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