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छाती मे दर्द के कारण लक्षण उपचार


जब भी किसी को अचानक सीने में दर्द होता, तो उसे हार्ट अटैक का डर सताने लगता है। यकीनन, कभी-कभी यह चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर बार छाती में दर्द होना हर्ट अटैक ही हो। यह सामान्य दर्द भी हो सकता है, जिसके कई कारण हो सकते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर चेस्ट पेन किन-किन कारणों से होता है और इसका इलाज क्या है।
सीने में दर्द की बात आते ही हम दिल के दौरे की बात सोचने लगते हैं, मगर सीने में दर्द कई कारणों से हो सकता है। फेफड़े, मांसपेशियाँ, पसली, या नसों में भी कोई समस्या उत्पन्न होने पर सीने में दर्द होता है।सीने में हार्ट यानी हृदय के अलावा भी कई अंग हैं जैसे- फेफड़े, आहार नली आदि। इसलिए जरूरी नहीं है कि सीने में उठने वाला दर्द हमेशा हार्ट अटैक ही हो। कई बार ये दूसरी किसी बीमारी का भी संकेत हो सकता है।
किसी-किसी परिस्थिति में यह दर्द भयानक रूप धारण कर लेता है जो मृत्यु तक का कारण बन जाता है। लेकिन एक बात ध्यान में रखें कि खुद ही रोग की पहचान न करें और सीने में दर्द को नजरअंदाज न करें, तुरन्त चिकित्सक के पास जायें।
कारण
पेप्टिक अल्सर
आमतौर पर, पेट की परत में घाव को ही पेप्टिक अल्सर कहा जाता है। हालांकि इससे तीव्र दर्द नहीं होता लेकिन फिर भी यह छाती में दर्द पैदा कर सकते हैं। दरअसल, पेट में अल्सर और गैस्टिक जब ऊपर छाती की तरफ जाती है तो इससे छाती में दर्द होता है। इससे निजात पाने के लिए दवाइयों का सहारा लिया जा सकता है।
एसोफैगल सकुंचन विकार
एसोफैगल संकुचन विकार वास्तव में भोजन नली में ऐंठन या सूजन को कहा जाता है। इन विकारों के चलते भी व्यक्ति को सीने में दर्द होता है। एसोफैगसे वह नली है जो गले से पेट तक जाती है। एसोफैगस जहां पेट से जुड़ती है, वहां पर इसकी परत की एक अलग प्रकार की कोशिकीय बनावट होती है और उसमें विभिन्न केमिकल्स का रिसाव करने वाली अन्य कई तरह की संरचनाएं होती हैं। कभी−कभी जब इनमें समस्या होती है तो व्यक्ति को छाती में दर्द का अनुभव होता है।
निमोनिया
निमोनिया जैसे फेफड़ों के संक्रमण से सीने में तेज दर्द होता है। निमोनिया होने पर व्यक्ति को सीने में दर्द तो होता है ही, साथ ही बुखार, ठंड लगना और बलगम वाली खांसी की शिकायत भी होती है।
अस्थमा
सर्दी का मौसम अस्थमा रोगियों के लिए तकलीफदेह माना जाता है क्योंकि इस मौसम में उनकी समस्या बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, अस्थमा के चलते सीने में दर्द की शिकायत का भी व्यक्ति को सामना करना पड़ सकता है। अगर आपको सीने में दर्द के साथ−साथ सांस लेने में तकलीफ, खांसी, आवाज में घरघराहट हो तो यह अस्थमा के कारण हो सकता है।
फेफड़ों में परेशानी
जब फेफड़ों और पसलियों के बीच की जगह में हवा बनती है तो फेफड़ों में समस्या उत्पन्न होती है और जिससे सांस लेते समय अचानक सीने में दर्द होने लगता है। इतना ही नहीं, इस स्थिति में व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ, थकान व हृदय गति के बढ़ने का भी अनुभव होगा।
मांसपेशियों में खिंचाव
हर बार छाती में दर्द का संबंध हृदय से नहीं जुड़ा होता। कई बार मांसपेशियों में सूजन व पसलियों के आसपास टेंडन्स के कारण भी सीने में दर्द की समस्या हो सकती है। वहीं अगर यह दर्द काफी हद तक बढ़ जाए तो यह मांसपेशियों में खिंचाव का भी लक्षण हो सकता है।
पसली का चोटिल होना
पसलियों में चोट जैसे खरोंच आना, टूटना या फिर फ्रैक्चर होने पर भी व्यक्ति छाती में दर्द का अनुभव करता है। दरअसल, जब व्यक्ति की पसली चोटिल होती है तो उसके कारण व्यक्ति को असहनीय दर्द व पीड़ा का अनुभव होता है और कभी−कभी इससे छाती में भी दर्द होता है।जब धमनियों में रक्त का थक्का जमने लगता है तब साँस लेने में मुश्किल होने लगती है और सीने में दर्द शुरू हो जाता है। अगर परिस्थिति को संभाला नहीं गया तो मृत्यु तक हो सकती है। एनजाइना का दर्द साधारणतः आनुवंशिकता के कारण, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल, पहले से हृदय संबंधित रोग से ग्रस्त होने के कारण होता है।
उच्च रक्तचाप: 
जो धमनियाँ रक्त को फेफड़ों तक ले जाती है उसमें जब रक्त का चाप बढ़ जाता है तब सीने में दर्द होता है।
दिल संबंधी कारण
हार्ट अटैक।
ह्रदय की रक्त वाहिकाओं के अवरुद्ध होने पर एनजाइना।
पेरिकार्डिटिस, जो आपके ह्रदय के पास एक थैली में सूजन आने के कारण होता है।
मायोकार्डिटिस, जो हृदय की मांसपेशियों में सूजन के कारण होता है।
कार्डियोमायोपैथी, हृदय की मांसपेशी का एक रोग।
एऑर्टिक डाइसेक्शन, जो महाधमनी में छेद होने के कारण होता है।
फेफड़े संबंधी कारण
ब्रोंकाइटिस
निमोनिया
प्लूरिसी
न्यूमोथोरैक्स, जो फेफड़ों से हवा का रिसाव के कारण छाती में होता है।
पल्मोनरी एम्बोलिज्म या फिर रक्त का थक्का
ब्रोन्कोस्पाज्म या आपके वायु मार्ग में अवरोध (यह अस्थमा से पीड़ित लोगों में आम है)
मांसपेशी या हड्डी संबंधी कारण
घायल या टूटी हुई पसली
थकावट के कारण मांसपेशियों में दर्द या फिर दर्द सिंड्रोम
फ्रैक्चर के कारण आपकी नसों पर दबाव
अन्य कारण
दाद जैसी चिकित्सीय स्थिति
पेन अटैक, जिससे तेज डर लगता है।
हृदय संबंधी लक्षण
सीने में जकड़न और दबाव
जबड़े, पीठ या हाथ में दर्द
थकान और कमजोरी
सिर चकराना
पेट में दर्द
थकावट के दौरान दर्द
सांस लेने में तकलीफ
जी मिचलाना
अन्य लक्षण
मुंह में अम्लीय/खट्टा स्वाद
निगलने या खाने पर दर्द
निगलने में कठिनाई
शरीर की मुद्रा बदलने पर ज्यादा दर्द होना या ठीक महसूस करना
गहरी सांस लेने या खांसने पर दर्द
बुखार और ठंड लगना
घबराहट या चिंता
छाती में दर्द होने पर सिर्फ आपको तकलीफ होती है, बल्कि आपको रोजाना के काम करने में भी कठिनाई हो सकती है। इसलिए, जरूरी है कि इसका सही समय पर इलाज करा लिया जाए। नीचे हम चेस्ट पेन से राहत दिलाने के लिए  घरेलू उपाय बता रहे हैं।
लहसुन
एक चम्मच लहसुन का रस
एक कप गुनगुना पानी
एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच लहसुन का रस डालें।
इसे अच्छी तरह मिलाएं और रोजाना पिएं।
आप रोज सुबह लहसुन के दो टुकड़े चबा भी सकते हैं।
इस प्रक्रिया को दिन में एक या दो बार दोहराएं।
हृदय में रक्त प्रवाह बिगड़ने के कारण हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती है। इस कारण सीने में दर्द का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, रोजाना लहसुन का इस्तेमाल सीने में दर्द से बचाता है। लहसुन हृदय में रक्त प्रवाह को दुरुस्त कर हृदय रोग से बचाता है । छाती में दर्द के उपाय में यह बेहतरीन नुस्खा है।
लाल मिर्च -
सामग्री :
एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर
किसी भी फल का एक गिलास जूस
क्या करें?
फल के एक गिलास जूस में एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर मिलाएं।
इस जूस को पी लें।
आप इस जूस को दिन में एक बार पिएं।
इस मिर्च में कैप्सैसिन होता है, जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है। यह आपके सीने में दर्द की तीव्रता को कम करने में मदद करता है । यह हृदय में रक्त के प्रवाह को दुरुस्त करने में भी मदद करता है, जिससे हृदय रोगों को रोका जा सकता है।
एलोवेरा
सामग्री :
¼ कप एलोवेरा जूस
क्या करें?
एलोवेरा जूस को पी लें।
ऐसा कब-कब करें?
आप दिन में एक से दो बार एलोवेरा जूस पिएं।
एलोवेरा एक चमत्कारी पौधा है, जो कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। यह आपके कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को मजबूत करने, अच्छे कोलेस्ट्रॉल को नियमित करने, आपके ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने और रक्तचाप को कम करने में भी मदद कर सकता है। ये सभी छाती के दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
तुलसी के पत्ते
सामग्री :
आठ से दस तुलसी के पत्ते
क्या करें?
तुलसी के पत्तों को चबा लें।
इसके अलावा, आप तुलसी की चाय भी पी सकते हैं।
आप तुलसी के पत्तों का रस निकालकर इसमें शहद मिलाकर खा सकते हैं।
बेहतर परिणाम के लिए आप रोजाना इसका सेवन करें
तुलसी में प्रचुर मात्रा में विटामिन-के और मैग्नीशियम होता है। सफेद मैग्नीशियम हृदय तक रक्त प्रवाह को दुरुस्त करता है और रक्त वाहिकाओं को आराम देता है। वहीं, विटामिन-के रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर कोलेस्ट्रॉल के निर्माण को रोकता है। यह हृदय संबंधी विकारों के साथ-साथ सीने में दर्द के उपचार में मदद करता है।
सेब का सिरका
सामग्री :
एक चम्मच सेब का सिरका
एक गिलास पानी
क्या करें?
एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका डालकर अच्छी तरह मिला लें।
फिर इस पानी को पी लें।
ऐसा कब-कब करें?
आप खाना खाने से पहले या जब भी चेस्ट पेन हो, तो इस मिश्रण को पिएं।
सेब के सिरके में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है, जो हार्टबर्न और एसिड रिफ्लक्स से राहत दिलाने में मदद करता है। इन्हीं के कारण सीने में दर्द की शिकायत होने लगती है । छाती में दर्द के उपाय में यह जाना-माना उपचार माना जाता है।
मेथी के दाने
एक चम्मच मेथी के दाने
क्या करें?
एक रात पहले मेथी दानों को पानी में भिगोकर रख दें और अगली सुबह इन्हें खाएं।
इसके अलावा, आप एक चम्मच मेथी दानों को पांच मिनट के लिए पानी में उबाल लें। फिर इस पानी को छानकर पिएं।
ऐसा कब-कब करें?
आप इस पानी को दिन में एक से दो बार पिएं।
यह कैसे काम करता है?
मेथी के बीज में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो हृदय के स्वास्थ्य को बढ़ाते हैं और सीने में दर्द को रोकते हैं (। हृदय में रक्त के प्रवाह को बढ़ावा देते हैं और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करते हैं।
बादाम
सामग्री :
मुट्ठी भर बादाम
क्या करें?
कुछ घंटों के लिए बादाम को पानी में भिगो दें।
फिर इसके छिल्के हटाकर बादाम खा लें।
आप तुरंत राहत के लिए बादाम के तेल और गुलाब के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर अपने सीने पर लगा सकते हैं।
ऐसा कब-कब करें?
आप ऐसा रोजाना करें।
यह कैसे काम करता है?
बादाम पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड का समृद्ध स्रोत है। यह न केवल हृदय के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, बल्कि कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी मदद करता है । यह हृदय रोग और सीने में दर्द के उपचार में मदद कर सकता है।
ये थे सीने में दर्द के घरेलू उपाय। आइए, अब इससे जुड़े कुछ टिप्स जान लेते हैं।
टिप्स
अधिक परिश्रम से बचें।
संतुलित आहार का सेवन करें।
शराब का सेवन सीमित करें।
तंबाकू के सेवन से बचें।
खुद को तनाव मुक्त रखें।
मत्स्यासन (फिश पोज), भुजंगासन (कोबरा पोज) और धनुरासन (बो पोज) जैसे योगासनों का अभ्यास करें।
आप एक्यूप्रेशर भी करवा सकते हैं।