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फैटी लिवर की जानकारी और प्रभावी हर्बल उपचार



लिवर, हमारे शरीर के प्रमुख आतंरिक अंगों में से एक है. असल में देखा जाए तो यह एक ग्रंथि है जिसे आप शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि कह सकते हैं. हलांकि इसकी गिनती सबसे बड़े अंगों में भी की जाती है. लिवर पित्त का निर्माण करता है, जो फैट को टूटने में मदद करता है. यह ब्लड को फ़िल्टर करने में भी सहायता करता है. लिवर में सामान्य रूप से कुछ फैट ज़रूर होता है, लेकिन कभी-कभी लिवर की कोशिकाओं में फैट की संख्या बढ़ने लगती है. यह एक गंभीर बिमारी होता है जिसे सामान्य तौर पर फैटी लिवर के नाम से जाना जाता है. फैटी लिवर डिसऑर्डर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं - एल्कोहल फैटी लिवर और नॉन-एल्कोहल फैटी लिवर. फैटी लिवर के मुख्य कारणों में खराब आहार के साथ साथ रोजाना और सिमित मात्रा में ज्यादा शराब पीना, मोटापा आदि शामिल हैं. यह बीमारी जेनेटिक (पारिवारिक) भी हो सकती है. विशेष रूप से फैटी लिवर की शुरूआत के दौरान इसके लक्षणों को अनुभव नहीं किया जाता है. लेकिन जब यह गंभीर होने लगता है, तब इसके लक्षण धीरे-धीरे अनुभव होने लगते हैं. इसमें कुछ लोगों के लक्षण एकदम साफ दिखाई देने लगता हैं तो वहीँ कुछ लोगों में यह लक्षण केवल सांकेतिक होता है
फैटी लीवर की तीन अवस्थाएं-
पहली अवस्था: - फैटी लीवर की पहली अवस्था में अनावश्यक थकान, वजन घटना और पाचन संबंधी गडबडियां आमतौर पर देखने को मिलती हैं.
दूसरी अवस्था: - इस बीमारी की दूसरी अवस्था में चक्कर और उल्टियां आना, भोजन में अरुचि और बुखार जैसे लक्षण आमतौर पर देखने को देखने को मिलते हैं.
तीसरी अवस्था: - तीसरी और अंतिम अवस्था में उल्टियों के साथ खून आना, बेहोशी और मामूली सी चोट लगने पर ब्लीडिंग का न रुकना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं. इसमें दवाओं का कोई असर नहीं होता है और ट्रांस्प्लांट ही इसका एकमात्र उपचार है.
फैटी लिवर की समस्या खासकर उन लोगों को जल्दी घेरती है जो चर्बी युक्त भोजन और शराब का सेवन ज्यादा करते हैं. लिवर की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक फैट जमा होने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. भविष्य में इससे कई तरह के नुकसान भी हो सकते हैं. ऐसी स्थिति होने पर जरूरी है कि अपने खानपान में सुधार किया जाए और नियमित जीवनशैली अपनाई जाए. हालांकि लिवर में जमा चर्बी को कुछ घरेलू नुस्खों से आसानी से दूर किया जा सकता है.
शरीर में लिवर की भूमिका प्यूरीफायर की होती है जो शरीर की गंदगी को साफ कर शरीर को स्वस्थ बनाने में मदद करता है. सिरोसिस, य‍कृत के कैंसर के बाद की दूसरी सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। यदि आप नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर (NAFLD) या नॉन एल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस फैटी लिवर (NASH) से पीडि़त है, तो आपको इससे बचाव के लिए अपनी डाइट में कुछ छोटे से बदलाव की आवश्‍यकता है।
नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस क्या है?
नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH) लिवर की सूजन और लिवर में वसा का जमा होने के कारण क्षति होती है। नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस लिवर रोग का हिस्सा है। यदि आपका "फैटी लीवर" है और आपके लिवर में वसा के निर्माण होता है, तो जरूरी नहीं कि आपमें उससे कोई समस्या या उसके कोई लक्षण दिखें। जबकि कुछ लोगों में लिवर में फैट बढ़ने के कारण लिवर में सूजन लिवर सेल्स को क्षति पहुंचती है। लिवर में क्षति के कारण आपका लिवर सही से काम नहीं करता।
नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH) के लक्षण
हर समय थकान महसूस होना।
बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना।
सामान्य रूप से कमजोरी।
आपके पेट के ऊपरी दाहिने भाग में दर्द।
हाई-ग्लाइसेमिक-इंडेक्स फूड्स से बचें
लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड खाएं
कई कम-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ हैं, जिनका आप सेवन कर सकते हैं, जैसे कई फल, सब्जियां और साबुत अनाज। कुछ कम-ग्लाइसेमिक-इंडेक्स सब्जियां शतावरी, सेम स्प्राउट्स, ब्रोकोली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, फूलगोभी, अजवाइन, ककड़ी, बैंगन, कोलार्ड साग, स्विस चार्ड, केल, सरसों, शलजम, मशरूम, भिंडी, प्याज, मटर हैं। इसके अलावा, मिर्च, मूली, स्क्वैश, टमाटर, तोरी और गोभी भी इसमें शामिल हैं।
शराब के सेवन से बचें
यदि आप शराब का सेवन करते हैं या शराब के आदि हैं, तो इसके सेवन को तुरंत बंद या फिर कम कर दें। शराब का सेवन आपके लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स बताते हैं, कि पुरुषों के लिए, शराब का अधिक सेवन प्रति दिन 4 ड्रिंक और प्रति सप्ताह 14 से अधिक होता है, जबकि महिलाओं में शराब के ज्‍यादा उपयोग को प्रति दिन 3 और प्रति सप्ताह 7 से अधिक के रूप में परिभाषित किया है।
खाद्य पदार्थ जिसमें चीनी और फ्रुक्टोज शामिल हो
यदि आप नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर (NAFLD) या नॉन एल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस फैटी लिवर (NASH)से पीडि़त है, तो आपको ऐसे खाद्य व पेय से बचें, जिनमें कि ज्‍यादा मात्रा शुगर और फ्रुक्टोज होते हैं। इसलिए स्‍वीट कोल्‍ड ड्रिंक्‍स, स्पोर्ट्स ड्रिंक, मीठी चाय व जूस के सेवन से बचें क्‍योंकि इसमें फ्रुक्टोज पाया जाता है।
*हल्दी
वैसे तो हल्दी में कई गुण होते हैं जो कई तरह के रोगों में फायदा देती है. चीनी और आयुर्वेदिक दवाओं में भी हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है. हल्दी लिवर, त्वचा और पाचन तंत्र को ठीक करने में सहायक होती है. हृदय रोग और गठिया में भी हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है. हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट के गुण होते हैं जो लिवर सेल्स को डेमेज होने से बचाती है. आप हल्दी का इस्तेमाल खाने में मसाले के तौर पर या किसी अन्य तरीके से भी कर सकते हैं
*वसानियामक (lipotropics)
Lipotropics लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं और डिटोक्सिफिकेशन की प्रतिक्रियाओं को बढ़ावा देते हैं. कुछ लिपोट्रॉपिक तत्वों में मेथियोनीन, कोलीन और बीटेन शामिल होते हैं जो वसा के प्रवाह को लिवर से बाहर लाने और बड़ी आंत के माध्यम से शरीर से बाहर लाने में सहायक होते हैं. यह लिवर में फैट के जोखिम को कम करता है. लिपोट्रॉपिक्स पित्ताशय, पूर्व मासिक रोग, फाइब्रोसिस्टिक, स्तन रोग और फैटी लिवर के इलाज में उपयोगी हो सकता है.
*व्यायाम
इन सबके अलावा आप व्यायाम के माध्यम से भी लिवर के फैट को कम कर सकते हैं. इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या के साथ-साथ जीवनशैली में भी कुछ परिवर्तन करने होंगे. साथ ही ख्याल रखें की अचानक से अधिक व्यायाम न करें, पहले कम प्रभाव वाले व्यायाम से शुरुआत करें और धीरे-धीरे व्यायाम की गति बढ़ाएं. इन घरेलू उपायों के साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें की समय-समय पर आप डॉक्टरी सलाह लेते रहें और अपने कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, शुगर और लिवर की स्थिति की जांच कराते रहें.
फैटी लिवर के घरेलू उपचार:
*. नींबू सौंठ और मिश्री की सहायता से-
एक कागजी निम्बू जो कि अच्छा पका हुआ हो उसके दो टुकड़े कर लें. इसके बाद उसमें से बीज को निकालकर आधे निम्बू को बिना काटे चार भागों में बाँट लें लेकिन ध्यान रहे कि टुकड़े अलग- अलग न होने पाएं. अब इसके एक भाग में काली मिर्च का बारीक पीसा हुआ चूर्ण, दूसरे में काला नमक अथवा सेंधा नमक जो भी उपलब्ध हो, तीसरे में सोंठ का चूर्ण और चौथे में मिश्री का चूर्ण या शक्कर भर कर रात को प्लेट में ढककर रख दें. सुबह में भोजन करने से एक घंटे पहले इस निम्बू की फांक को मंदी आंच या तवे पर गर्म करके चूस लें.
*. प्याज दूर करे लीवर फैटी लीवर-
प्याज आमतौर पर कई रोगों में आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसका इस्तेमाल हम लीवर फैटी लीवर के उपचार में भी कर सकते हैं. इसके लिए आपको बस इतना करना है कि दिन में दो बार प्याज खाते रहें. ऐसा करने से लाभ होगा.
*. छाछ आयुर्वेदिक उपचार है लीवर फैटी लीवर का-
छाछ को हम लोग वैसे भी पेट के छोटे मोटे बीमारियों में इस्तेमाल कराते रहे हैं. लीवर के लिए ये बेहद फायदेमंद है.  फैटी लीवर में छाछ जिसमें हींग का बगार देकर, जीरा काली मिर्च और नमक मिला हुआ हो दोपहर के भोजन के बाद सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है.
*आंवलों का रस-
आंवलों का रस 25 ग्राम या सूखे आंवलों का चूर्ण चार ग्राम पानी के साथ, दिन में तीन बार सेवन करने से पंद्रह से बीस दिन में यकृत के सारे दोष दूर हो जाते है. यही नहीं आंवले का सेवन आपको कई अन्य अतिरिक्त लाभ भी प्रदान करता है.
*. नींबू पानी के उपयोग से-
नींबू का खट्टा स्वाद पेट की कई समस्याओं का प्रभावी निदान प्रस्तुत करता है. इसके लिए आपको एक सौ ग्राम पानी में आधा निम्बू निचोड़कर नमक डालें (चीनी मत डाले) और इसे दिन में तीन बार पीने से जिगर की खराबी ठीक होती हैं.
*. जामुन की सहयाता से-
जामुन का कसैला स्वाद भी कई औषधीय कामों में इसेमल हो जाता है. जामुन के मौसम में 200-300 ग्राम बढ़िया और पके हुए जामुन प्रतिदिन खाली पेट खाने से जिगर की खराबी दूर हो जाती है. लीवर फैटी लीवर में भी इसका इस्तेमाल फलदायक सिद्ध होता है.

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