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लीवर के प्रमुख रोग व आयुर्वेदिक हर्बल उपचार



लिवर मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है। अगर आप कहते हैं कि लिवर पर पूरा मानव शरीर टिका है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। जिन लोगों का पाचन तंत्र खराब होता है उसमें करीब 80 फीसद रोल लिवर का होता है। लिवर के मुख्य कार्यों में भोजन चयापचय, ऊर्जा भंडारण, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलना, डिटॉक्सीफिकेशन, प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन और रसायनों का उत्‍पादन आदि शामिल हैं। आजकल की भागदौड़ भरा लाइफस्टाइल और हेल्दी खानपान से दूरी खराब लिवर की सबसे बड़ी वजह हो गई है। वहीं, हद से ज्यादा सिगरेट, बीड़ी और शराब का सेवन भी लिवर का दुश्मन होता है। इस बात की गांठ बांध लें कि अगर इंसान का लिवर एक बार खराब हो जाए तो उसका जीना भी लगभग नामुमकिन हो जाता है। आज हम आपको अंग्रेजी दवाओं के बजाय लिवर को दुरुस्त रखने के लिए कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं।
 शहरी भारतीयों के खानपान के तौर-तरीकों में हाल में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. ढेर सारे कार्बोहाइड्रेट, बिना रिफाइन किया हुआ आटा और कम वसा वाली खुराक से रुझान अब उच्च वसायुक्त और कम अवशिष्ट वाली खुराक की ओर हो गया है.
आधुनिक भारतीय आहार अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट और वसायुक्त होता जा रहा है. इसके साथ ही एल्कोहल का सेवन भी बढ़ा है, जिसके नतीजे हृदय की बीमारियों, उच्च रक्तचाप (बीपी), मुधमेह और लिवर (कलेजा) से जुड़ी बीमारियों के रूप में सामने आ रहे हैं.
हृदय रोगों और मधुमेह जैसे रोगों पर मीडिया में खूब तवज्‍जो दी जा रही है. लेकिन लिवर-शरीर का सबसे बड़ा अंग और इसकी मुख्य केमिकल फैक्टरी-इनकी अपेक्षा थोड़ा उपेक्षित ही रहा है. आंतों से आने वाले खाए गए भोजन का पहला पड़ाव होने के कारण लिवर के हमारे खानपान में किए गए बदलावों से सर्वाधिक प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है.
डेढ़ किग्रा का लिवर हमारे ऊपरी उदर के दाईं ओर स्थित होता है और यह खाए गए भोजन को संसाधित करता है जिसके बाद इसे अंतड़ियां अवशोषित कर लेती हैं. यह कार्बोहाइड्रेट्स को ग्लाइकोजन के रूप में जमा करके रखता है और जब भी जरूरत होती है यह तुरंत ही इसे ग्लूकोज के रूप में स्त्रावित कर देता है.
हमारे द्वारा लिए गए नुक्सानदायक पदार्थों को यह निष्क्रिय कर देता है और प्रोटीन पैदा करता है जो हमें संक्रमण और रक्तस्त्राव से बचाता है. हम क्या खाते हैं और कैसा जीवन जीते हैं उनमें मामूली सुधार कर के यह संभव है कि हम अपने लिवर को स्वस्थ रख सकें.


कैसे पहुंचता है लिवर को नुकसान

अच्छे और स्वस्थ लिवर के लिए कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के सही संयोग वाला आहार जरूरी है. जैसा हम जानते हैं कि इनमें से किसी भी चीज की अति खतरनाक हो सकती है. इसमें अत्यधिक खाना भी शामिल है जो लिवर को ज्‍यादा काम करना पड़ेगा और सही कार्य करने की उसकी क्षमता भी कम होगी. वसा और एल्कोहल के रूप में ढेर सारी कैलॉरी लेने के कारण यह लिवर के इर्द-गिर्द जमा हो जाएगी, जिससे कोशिकाओं संबंधी क्षति हो सकती है और इसके महत्वपूर्ण कार्यों में व्यवधान डाल सकती है.
हमारी खुराक में लगभग 40 फीसदी कच्चे फल और सब्जियां शामिल होने चाहिए जो, इसके फाइबर संबंधी सामग्री में इजाफा करते हैं, वसा को अवशोषित करने और पेट की सफाई करने का काम करते हैं. अच्छा वसा (ये जरूरी फैटी एसिड होते हैं जो फिश ऑयल सरीखे खाद्य पदार्थों में मिलते हैं) शरीर की प्रत्येक कोशिका में मौजूद झिल्‍ली और लिवर के सही कार्य करने के लिए जरूरी होते हैं.
साधारण साफ-सफाई, जो उबले पानी और साफ भोजन से हासिल की जा सकती है, वायरल हेपेटाइटिस से बचाती है. हमें अपने अल्कोहल के सेवन को सीमित करना चाहिए जो पुरुषों के लिए रोजाना दो यूनिट (एक यूनिट में 10 ग्राम अल्कोहल होता है और यह एक बीयर, वाइन का एक गिलास या स्पिरिट की एक चुस्की के बराबर होता है) और महिलाओं के लिए एक यूनिट काफी है. इसके साथ ही, हमें ढेर सारा पानी या तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए क्योंकि इनसे किडनी के जरिये ढेर सारे जहरीले रासायनिक पदार्थों को शरीर से बाहर करने में मदद मिलती है.
बढ़ता बोझ

भारत में मृत्यु होने के 10 शीर्ष कारणों में से लिवर का रोग भी एक है, ये रोग हर उम्र के लोगों पर अपना असर दिखा रहे हैं. लिवर के रोगों से पीड़ित लोग सुस्त, पीला रंग और समस्याएं पीलिया (जॉन्डिस), पेट में पानी भर जाना, खून की उल्टी होना, कैंसर, कोमा और मृत्यु का रूप भी अख्तियार कर सकती हैं.
ऐसा अनुमान लगाया गया है कि देश में हर साल लगभग दो लाख लोग लिवर की बीमारियों से दम तोड़ देते हैं और इनमें से अधिकतर को स्वच्छ पेयजल, नकली दवाओं के सेवन से बचकर, सही खान-पान का अनुकरण करके और एल्कोहल की मात्रा कम करने जैसे साधारण उपायों से बचाया जा सकता है.
तीन बीमारियां
भारत में की लिवर की तीन सबसे घातक बीमारियां चर्बीदार लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस हैं, प्रत्येक के लिए विशेष खानपान की जरूरत है. चर्बीदार लिवर वह स्थिति है जिसमें वसा की बड़ी बूंदें लिवर की कोशिकाओं में चली जाती हैं और फिर उसकी कार्यप्रणाली के साथ हस्तक्षेप करती हैं. इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सबसे आम (लेकिन काफी अजीब) अत्यधिक खाने के साथ ही कुपोषण (जरूरी प्रोटीन और विटामिनों की कमी) और एल्कोहल का अत्यधिक सेवन हैं.
अत्यधिक खाने के कारण होने वाले गैर-एल्कोहल चर्बीदार लिवर रोग को आम तौर पर एनएएफएलडी के नाम से जाना जाता है.
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने अनुमान लगाया है कि हमारी आबादी का 32 फीसदी हिस्सा एनएएफएलडी से पीड़ित है. जिसमें कम-से-कम अत्यधिक पोषण शामिल है, और यह आंकड़ा शराब की लत के शिकार लोगों में और भी अधिक है. लिवर में अतिरिक्त और अवांछित वसा 30 फीसदी मामलों में लिवर कोशिका की खराबी आ जाती है जो अक्सर सिरोसिस का रूप धारण कर लेती है जिसमें लिवर सख्त, भूरा, छोटा और गांठ जैसा हो जाता है.
इसलिए यह जरूरी है कि चर्बीदार लिवर का जल्द इलाज करा लिया जाए. किसी भी दवाई से ज्‍यादा श्रेष्ठ सलाह यही होगी कि कम कैलॉरी, कम वसा और अधिक प्रोटीन, नियमित व्यायाम और एल्कोहल की मात्रा को सीमित करके इस पर काबू पाया जा सकता है.

हेपेटाइटिस लिवर की सूजन है जो दूषित जल में विषाणुओं, असुरक्षित यौन संबंध और दोबारा प्रयोग की गई सुई से हो सकता है. इसे आम तौर पर पीलिया के नाम से जाना जाता है. इस स्थिति में खानपान में ढेर सारे कार्बोहाइड्रेट (50-60 फीसदी) होने चाहिए. साथ ही वेजिटेबल प्रोटींस (20-30 फीसदी) और कम वसा (10-20 फीसदी) शामिल होने चाहिए.
इसमें हाल में सेवन किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में ताजे फल और जूस (सेब, अंगूर, गन्ना, नींबू का रस, नारियल पानी), सब्जियां (मूली, पालक, बंद-गोभी, खीरा, चुकंदर, टमाटर, करेला) और सब्जियों से प्रोटीन (दाल, मटर, फलियां और मेवे) शामिल हैं. यह बेहतर है कि तले हुए खाद्य पदार्थ, नमकीन, अचार, जंक फूड, कंसंट्रेटेड चीनी, एल्कोहल और लाल मांस खाने से बचना चाहिए.

असरदार हल्दी के गुण

हल्दी के नियमित सेवन से लिवर की सभी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। लिवर एंटीसेप्टिक गुण और एंटीऑक्सीडेंट का सबसे अच्छा स्त्रोत है। हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता हैपेटाइटिस बी व सी का कारण बनने वाले वायरस को बढ़ने से रोकती है। दूध में हल्दी मिलाकर पीने से लिवर दुरुस्त रहता है।
अमृत है आंवला

विटामिन सी का सबसे अच्छा स्त्रोत अगर कुछ है तो वो आंवला ही है। यह आंखों, बालों और त्वचा के लिए फायदेमंद होने के साथ ही लिवर के लिए भी बहुत अच्छा होता है। कई शोध में भी यह साबित हो चुका है कि आंवले में लिवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद होते हैं।
वरदान है करेला

करेला भले ही टेस्ट में कड़वा होता है लेकिन करेले का स्वाद भले ही कड़वा हो लेकिन यह लिवर के लिहाज से बहुत गुणकारी होता है। रोजाना 1 ग्लास करेले का जूस पीने से लिवर स्वस्थ रहता है। साथ ही यह फैटी लिवर की परेशानी को भी खत्म करती है।
साबुत अनाज के फायदे

साबुत अनाज फाइबर और दूसरे पौष्टिक तत्‍वों से भरपूर है, यह आसानी से पच भी जाता है। फैटी एसिड की यह औषधि लीवर के नुकसानदायक टॉक्सिन को तोड़ती है। अच्छे परिणाम के लिए आपको प्रोसेस्ड ग्रेन के बजाय होल ग्रेन और इसके उत्पाद का सेवन करना चाहिए।
रसीला टमाटर

अगर आप फैटी लीवर की समस्‍या से ग्रस्त हैं तो कच्चा टमाटर खाना आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा। यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है और अच्छे परिणाम के लिए आपको इसका नियमित सेवन करना चाहिए।
ग्रीन टी करेगी जादू

दूध और अदरक वाली चाय के शौकीन ये बात जान लें कि अगर आप अपने लिवर को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो दूध वाली चाय की जगह ग्रीन का सेवन करना शुरू कर दें। ग्रीन टी में भरपूर मात्रा में एंटी-आक्सीडेंट होते हैं जो सभी विषैले तत्वों को खत्म करते हैं। रोजाना सुबह उठकर 1 कप ग्रीन टी पीनी चाहिए।
जैतून का तेल

जैतून का तेल लिवर के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। नाश्‍ते में या फिर किसी भी तरह से जैतून का सेवन करना चाहिए। अगर आप जैतून के तेल का सेवन नहीं कर पाते हैं तो आपको सिगरेट, शराब और तंबाकू के अलावा बेकार खानपान से दूर रहना होगा। ये आपकी सेहत बिगाड़ने के साथ ही लिवर के भी दुश्मन हैं।
स्वस्थ लिवर की खुराक
स्वस्थ लिवर के लिए खुराक में सबसे पहले ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए जो डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया को बढ़ाते हैं; खाने में ऐसे पदार्थ पर्याप्त मात्रा में हों जो
लिवर की रक्षा करते हैं
स्वस्थ लिवर के लिए रोजाना के नियम
*पर्याप्त मात्रा में ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन.
*ढेर सारा पानी (उबला हुआ या बोतलबंद), फलों का जूस.
*अत्यधिक तले हुए भोजन से बचने की कोशिश करें.
*सही मात्रा में एल्कोहल का सेवन करें.
*बेकार की दवाएं न खाएं.
सही आहार ही कुंजी
अपने रात्रि भोजन की आधी प्लेट में बगैर स्टार्च वाली सब्जियां रखें, एक-चौथाई प्रोटीन हो और बाकी प्लेट में स्टार्च चलेगा.
भूख बढ़ाने वाले पदार्थों का प्रयोग करें-7 इंच के आकार की प्लेट का प्रयोग करें. यह मात्रा को नियंत्रित करता है.
वातित ड्रिंक्स एंप्टी कैलॉरी उपलब्ध कराती हैं. इसके बजाए ताजे फलों का जूस, सब्जियों के सूप या छांछ का सेवन करें.
भोजन तब ही करें जब आपको भूख लगे और अपनी क्षमता से आधा भोजन ही करें.
पोलीमील आजमाएं जिसमें वाइन (150 मिली प्रतिदिन), मछली (114 ग्राम हफ्ते में चार बार), डार्क चॉकलेट (रोजाना 100 ग्राम), फल और सब्जियां (दिन में 400 ग्राम), लहसुन (2.7 ग्राम प्रतिदिन), और बादाम (68 ग्राम प्रतिदिन).
शहरी खान-पान के दिशा-निर्देश
अप्रैल, 2011 में पहली बार शहरी खानपान के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश बनाए गए. कुछ सिफारिशें निम्न हैं:
कुल ऊर्जा का 50-60 फीसदी कार्बोइड्रेट का सेवन होना चाहिए. पूरा ध्यान चोकर सहित अनाज और पत्तेदार सब्जियों और ताजे फलों से मिलने वाले 20-40 ग्राम प्रतिदिन फाइबर पर होना चाहिए.
प्रोटीन की मात्रा 10-15 फीसदी होनी चाहिए. इसमें सोयाबीन, चना, दालें (शाकाहारियों के लिए) तथा मांसाहारियों के लिए पोल्ट्री और सी फूड हो सकता है. लाल मांस जैसे अत्यधिक सैचुरेटेड फैट वाले भोजन से बचें.
सब्जियों के दो स्त्रोतों में वसा और तेल की मात्रा 10 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिएः मूंगफली, जैतून, सरसों, चावल की भूसी और जिंजली ऑयल्स उपयोग करें|

मक्खन, घी या ट्रांस फैट बिल्कुल नहीं लेने चाहिए
गुड़, शहद से चीनी 10 फीसदी (टेबल शुगर से बचना चाहिए); नमक (आयोडाइज्‍ड) 5 ग्राम प्रतिदिन.
महिलाओं के लिए रोजाना 200-1,500 कैलॉरी की सिफारिश है जबकि पुरुषों के लिए यह मात्रा 1,500 से 1,800 के बीच है.

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