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शतावरी के फायदे






शतावरी (asparagus) एक ऐसा आयुर्वेदिक हर्ब है जो पुरूष और महिला दोनों के सेक्स जीवन को उन्नत करने में मदद करती है। आजकल के व्यस्त जीवन और खराब जीवनशैली के कारण लोगों में सेक्स करने की इच्छा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। जिसका सीधा प्रभाव वैवाहिक जीवन पर पड़ने लगा है।
*इस समस्या से राहत दिलाने में शतावरी बहुत मदद करती है। यह पुरूष और महिला दोनों में सेक्स करने की इच्छा को जागृत तो करती ही है साथ ही उसको उन्नत भी करती है। यदि आपको उच्च रक्तचाप की बीमारी है या गर्भवती हैं तो शतावरी का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह ले लें

*आज हम आपको एक झाड़ीनुमा लता के बारे में बताते है , जिसमें फूल मंजरियों में एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं और फल मटर के समान पकने पर लाल रंग के होते हैं ..नाम है "शतावरी" ..I
आपने विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों में इसके प्रयोग को अवश्य ही जाना होगा ..अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं, इसके प्रयोग को ..! आयुर्वेद के आचार्यों के अनुसार , शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीरको रोगों से लड़ने क़ी क्षमता प्रदान करता है I इसे शुक्रजनन,शीतल ,मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है I महर्षि चरक ने भी शतावर को बल्य और वयः स्थापक ( चिर यौवन को बरकार रखने वाला) माना है.I आधुनिक शोध भी शतावरी क़ी जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं I

अब हम आपको शतावरी के कुछ आयुर्वेदिक योग क़ी जानकारी देंगे ..जिनका औषधीय प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में करना अत्यंत लाभकारी होगा 
*शतावरी के कुछ जड़ों को पीसकर पावडर बना लें। एक कप में उबलता हुआ पानी लें और उसमें इस पावडर को डालकर कुछ देर तक उबालकर काढ़ा जैसा बना लें। फिर थोड़ा-सा ठंडा होने पर काढ़ा को पी लें। इस काढ़ा के सेवन से आपके सेक्स जीवन में कुछ हद तक सुधार ज़रूर आएगा।
*यदि आप नींद न आने क़ी समस्या से परेशान हैं तो बस शतावरी क़ी जड़ को खीर के रूप में पका लें और थोड़ा गाय का घी डालें ,इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पायेंगे ..!
*शतावरी एक चमत्कारी औषधि है जिसे कई रोगों के इलाज में उपयोग किया जाता है। खासतौर पर सेक्स शक्ति को बढ़ाने में इसका विशेष योगदान होता है। यह एक झाड़ीनुमा पौधा होता है, जिसमें फूल व मंजरियां एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं और मटर जितने फल पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं। 
*आयुर्वेद के मुताबिक, शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। इसके अलावा इसका उपयोग विभिन्न नुस्खों में व्याधियों को नष्ट कर शरीर को पुष्ट और सुडौल बनाने में किया जाता है।
*शतावरी क़ी ताज़ी जड़ को यवकूट करें ,इसका स्वरस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें,हो गया मालिश का तेल तैयार |.इसे माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगायें और लाभ देखें I
*यदि रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण - 1.5 ग्राम ,वासा के पत्ते का स्वरस 2.5 मिली ,मिश्री के साथ लें और लाभ देखें I
*प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने क़ी समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण -पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है ..!
*यदि पुरुष यौन शिथिलता से परेशान हो तो शतावरी पाक या केवल इसके चूर्ण को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है I

*शतावरी को शुक्रजनन, शीतल, मधुर एवं दिव्य रसायन माना जाता है। महर्षि चरक ने भी शतावरी को चिर यौवन को कायम रखने वाला माना था। आधुनिक शोध भी शतावरी की जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मानते हैं। शतावरी के लगभग 5 ग्राम चूर्ण को सुबह और रात के समय गर्म दूध के साथ लेना लाभदायक होता है। इसे दूध में चाय की तरह पकाकर भी लिया जा सकता है।
 * यह औषधि स्त्रियों के स्तनों को बढ़ाने में मददगार होती है। इसके अलावा शतावरी के ताजे रस को 10 ग्राम की मात्रा में लेने से वीर्य बढ़ता है।
*शतावरी मूल का चूर्ण 2.5 ग्राम को मिश्री 2.5 ग्राम के साथ मिलाकर पांच ग्राम मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह, प्री-मैच्योर इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष) में लाभ मिलता है। यही नहीं शतावरी की जड़ के चूर्ण को दूध में मिलाकर सेवन करने से धातु वृद्धि भी होती है।
*यदि रोगी को मूत्र या मूत्रवह संस्थान से सम्बंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है I
*शतावरी के पत्तियों का कल्क बनाकर घाव पर लगाने से भी घाव भर जाता है ...!
यदि रोगी स्वप्न दोष से पीड़ित हो तो शतावरी मूल का चूर्ण -2.5 ग्राम ,मिश्री -2.5 ग्राम को एक साथ मिलाकर .*पांच ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह ,प्री -मेच्युर -इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष ) में लाभ मिलता है I
*गाँव के लोग इसकी जड़ का प्रयोग गाय या भैंसों को खिलाते हैं, तो उनकी दूध न आने क़ी समस्या में लाभ मिलता पाया गया है ...अतः इसके ऐसे ही प्रभाव प्रसूता स्त्रियों में भी देखे गए हैं
*शतावरी के जड के चूर्ण को पांच से दस ग्राम क़ी मात्रा में दूध से नियमित से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है !
वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का प्रयोग या इनके क्वाथ का सेवन ज्वर (बुखार ) से मुक्ति प्रदान करता है ..I
*शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीर को रोगों से लडऩे की क्षमता प्रदान करता है। इसे शुक्रजनन,शीतल ,मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है। महर्षि चरक ने भी शतावरी को चिर यौवन को बरकार रखने वाला माना है। आधुनिक शोध भी शतावरी की जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं। अब हम आपको शतावरी के कुछ आयुर्वेदिक योग की जानकारी देंगे, जिनका औषधीय प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में करना अत्यंत लाभकारी होगा।
* यदि आप नींद न आने की समस्या से परेशान हैं तो बस शतावरी की जड़ को खीर के रूप में पका लें उसमें थोड़ा गाय का घी डालें और ग्रहण करें। इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पाएंगे।
 *शतावरी की ताजी जड़ को मोटा-मोटा कुट लें, इसका स्वरस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें।इस तेल को माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगाएं और लाभ देखें।
*यदि रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण - 1.5 ग्राम, वसा के पत्ते का स्वरस 2.5 मिली, मिश्री के साथ लें और लाभ देखें।
*प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने की समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण -पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है।
-पुरुष यौन शिथिलता से परेशान हो तो शतावरी पाक या केवल इसके चूर्ण को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है।
*यदि रोगी को मूत्र से सम्बंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है।
* शतावरी मूल का चूर्ण -2.5 ग्राम, मिश्री -2.5 ग्राम को एक साथ मिलाकर पांच ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह, प्री -मैच्योरइजेकुलेशन (स्वप्न-दोष ) में लाभ मिलता है।
*शतावरी के जड़ के चूर्ण को पांच से दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ नियमित रूप से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है।
*वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का सेवन करने से ज्वर (बुखार) से मुक्ति मिलती है।
-शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन, दर्द एवं अन्य पित्त से सम्बंधित बीमारियों में लाभ मिलता है।
शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन ,दर्द एवं अन्य पित्त से सम्बंधित बीमारियों में लाभ मिलता है ..
..शतावरी हिमतिक्ता स्वादीगुर्वीरसायनीसुस्निग्ध शुक्रलाबल्यास्तन्य मेदोस ग्निपुष्टिदा |चक्षु स्यागत पित्रास्य,गुल्मातिसारशोथजित...उदधृत किया है ..तो शतावरी एक बुद्धिवर्धक,अग्निवर्धक,शुक्र दौर्बल्य को दूर करनेवाली स्तन्यजनक औषधि है|

लहसुन से मचाये रात भर बिस्तर पर धमा चौकडी



आपने सेक्स पावर बढाने के लिए लोगों को विभिन्न प्रकार दवाई, टेबलेट और इजेक्शन लेते देखा होगा लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ प्रकृति चीजें है ज्यादा इन दवाईयों से ज्यादा गुणकारी है। प्रकृति की कई ऎसी चीजें है जो दवाईयों के मुकाबले कहीं अधिक सेक्स पावर बढाती हैं हम आपको उनके बारे में रूबरू कराते है। ये प्रकृति चीजें जो आसानी से उपलब्ध होती और आपकी सेक्स पॉवर को बढाती है। इनकी उपयोगिता को यदि गंभीरता से सीखा और जाना जाए तो ये बेहद कारगर साबित हो सकती हैं। दुनियाभर में इन वस्तुओं पर इतने प्रयोग हो चुके हैं कि ये भी सामने आया है कि यह आपकी सेक्स क्षमता को भी कई गुना बढा सकती हैं।

मर्दाना ताक़त, जोड़ो का दर्द , (सन्धिवात ), सायटिका, हिचकी, श्वास, सिर दर्द, अपस्मार, गुल्म, उदर रोग, प्लीहा, कृमि, शौथ, अग्निमान्ध, पक्षाघात, खांसी, शूल आदि के लिए उत्तम औषिधि – लहसुन पाक।
लहसुन पाक पोष्टिक आहार के रूप में वाजीकारक योग हैं। विवाहित पुरुषों के लिए यौन शक्तिदायक वृद्धक तो होता ही है साथ ही शरीर की सप्त धातुओं को पुष्ट और सबल करके शरीर को सुडौल और बलवान बनाने वाला भी है। 


लहसुन पाक बनाने की विधि-

लहसुन की 100 ग्राम कलियोँ  छिलका अलग करके , काट कर छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। एक लीटर दूध में एक गिलास पानी डाल कर, ये सभी टुकड़े डाल दें और गरम होने के लिए रख दें। उबल जाने पर जब दूध गाढ़ा हो जाये और मावा जैसा बन जाये तब उतार कर ठंडा कर लें और मिक्सी में पीसकर लुगदी बना लें।
एक कढाई में थोडा सा शुद्ध देशी घी गरम करके इस लुगदी को डाल दें और धीमी ( मंदी ) आंच पर पकाएं। जब लाल हो जाये तब इसे उतार लें यदि घी बच जाए तो अलग कर लें। अब इसमें आवश्यक मात्रा में शक्कर की चाशनी तैयार करें।

गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज

भुनी हुई लुगदी और केशर 1 ग्राम, लौंग 2 ग्राम, जायफल 2 ग्राम, दालचीनी 2 ग्राम, और सौंठ 5 ग्राम — इन सबको बारीक़ पीसकर चाशनी में डाल दें और भली-भांति मिला लें और थाली में फैला कर जमा लें यही लहसुन पाक है।
यह पाक सुबह शाम ( रात को सोने से पहले ) एक-एक चम्मच की मात्रा में, मिश्री मिले हुए हलके गरम दूध के साथ कम से कम 60 दिन तक सेवन करना चाहिए।

वर्षा ऋतु के रोग और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार 

इसके सेवन से जोड़ो का दर्द, (सन्धिवात ), सायटिका, हिचकी, श्वास, सिर दर्द, अपस्मार, गुल्म, उदर रोग, प्लीहा, कृमि ,शौथ, अग्निमान्ध, पक्षाघात, खांसी, शूल, आदि अनेक रोगों को निरोगी बनाने में सहायक होता है तथा स्नायविक संस्थान की कमजोरी, व यौन शिथिलता दूर करके बल प्रदान करता है।
एसे रोगों से ग्रस्त रोगी के अलावा यह पाक प्रौढ़ एवम वृद्ध स्त्री पुरुषों के लिए शीतकाल में सेवन योग्य उत्तम योग है।