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बूढ़ोँ को जवान बनाने वाली होमियोपैथिक औषधियाँ


                                           



1) एवेना स्टीवा - Q ( Avena sativa - Q ) :

 1. यह दवा मस्तिष्क , नाड़ी संस्थान मेँ जोश और शक्ति उत्पन्न करती है । थोड़ा काम करने पर थक जाना , नीँद न आना , याद न रहना आदि रोगोँ को दूर करती है । मानसिक परिश्रम करने वालोँ के लिए लाभप्रद है ।
2. ह्रदय की कमजोरी , ह्रदय अधिक धड़कना , बिना कारण क्रोध आ जाना तथा अधिक शराब पीने के कारण नीँद न आनेँ मेँ भी लाभप्रद है ।
3. रात को स्वप्न मेँ या बिना स्वप्न के मूत्र - पखाना करते समय वीर्य निकल जाना , वीर्य पतला और वीर्यकीटोँ का कमजोर होना तथा मर्दाना कमजोरी मेँ बहुत लाभप्रद है ।

2) जैल्सीमियम - Q ( Gelsimiun - Q ) : 

रात को इन्द्री मेँ जोश आकर या बिना सपने मेँ वीर्य निकल जाना , गुप्ताँग ठंडा , ढ़ीला - ढ़ाला और लटका हुआ , हस्तमैथुन के रोगियोँ के स्वप्नदोष , वीर्य प्रमेह , रोगी चिड़चिड़ा और साहसहीन हो तो 5 - 10 बूँदेँ थोड़े जल मेँ मिलाकर दिन मेँ 2 - 3 बार देँ ।
3) एग्नस कास्टस - Q ( Agnus castus - Q ) : 

जवानी की कुचेष्टाओँ , हस्तमैथुन और अधिक वीर्यनाश कर लेने के कारण रोगी जवानी मेँ बूढ़ा दिखाई दे , मानसिक शक्ति घट गई हो , वीर्य पतला और आसानी से मूत्र और पखाना के साथ या स्वप्न मेँ निकल जाये , नपुंसकता , लिँग ढ़ीला और संभोग की इच्छा न हो । सुजाक से उत्पन्न नपुंसकता की यह मुख्य औषधि है । वीर्यनाश से दृष्टी कमजोर होना , समय से पूर्व बुढ़ापा आ जाना , रोगी आत्महत्या करने का विचार करेँ और अत्यन्त दुखी हो । 5-10 बूँद जल मेँ मिलाकर दिन मेँ 2-3 बार देँ ।

4) स्टेफिसेग्रिया - Q ( Staphysagria - Q ) : 


हस्तमैथुन का रोगी जो दूसरोँ से आँख न मिलाये , हस्तमैथुन के कारण आँखेँ अंदर धसी हो और उनके नीचे काली लाईने हो , सख्त निराशावादी , दुखी , दिमाग कमजोर , कोई बात याद न रहे , थोड़ा लिखने - पढ़ने पर थकावट हो जाये , बुढ़ोँ की नपुँसकता मेँ कामवासना और संभोग की इच्छा न होना , परंतु संभोग के योग्य न होना । रोगी जिसमेँ संभोग इच्छा बिल्कुल न हो और संभोग के समय इन्द्री मेँ जोश न आये , लिँग ठंडा तथा पुराने सुजाक से उत्पन्न नपुंसकता मेँ 5 - 8 बूँदेँ पानी मेँ मिलाकर दिन मेँ 2 - 3 बार देँ ।

5) एसिड फास - Q ( Acid phos - Q )
:

 जब काफी समय तक वीर्यनाश करते रहने , स्वप्नदोष , वीर्य प्रमेह के कारण शरीर खोखला , दुबला और कमजोर हो चुका हो , टाँगोँ मेँ कमजोरी , रीढ़ की हड्डी मेँ रात को जलन और गर्मी प्रतीत हो , लिँग टेढ़ा , अंडकोष लटके हुए , इन्द्री मेँ संभोग के समय जोश न आये और इन्द्री भली प्रकार उत्तेजित न हो , स्त्री के पास जाते ही उत्तेजना आने से पहले ही वीर्य निकल जाये , अण्डकोषोँ पर च्यूंटियाँ चलती प्रतित होँ , संभोग करने पर इन्द्री शीघ्र ढीली हो जाने से रोगी संभोग न कर सके , चेहरा पीला व पिचका हुआ और आँखेँ अंदर धंसी हुई होँ , नपुंसकता , वीर्यनाश कर लेने के कारण ह्रदय अधिक धड़के , वजन गिरता जाये , भुख कम लगे , पढ़ने - लिखने और मानसिक कार्य करने पर सिरदर्द हो जाये , कमरदर्द , बाल झड़ने और बाल समय से पहले सफेद हो जायेँ , रक्ताल्पता , भोजन न पचने से दस्त आयेँ , वीर्य प्रमेह , रोगी दुखी और अकेला रहेँ । हस्तमैथुन के रोगियोँ के लिए सर्वोत्तम औषधि है । 4 - 6 बूँदेँ पानी मेँ मिलाकर दिन मेँ 2-3 बार देँ

6) डमियाना - Q( Damiana - Q ) : 

अधिक संभोग और वीर्यनाश करने , आतशक , सुजाक , मस्तिष्क पर चोट लग जाने या किसी भी कारण से हुई नपुंसकता मेँ अनुभूत है । रोगी की शारीरिक व मानसिक शक्ति और नाड़ी संस्थान कमजोर हो चुका हो , संभोग करते ही साँस फूल जाये , थोड़े परिश्रम से थकावट हो जाये , इन्द्री से लेसदार तरल निकलता हो । 5-7 बूँदेँ थोड़े पानी मेँ मिलाकर दिन मेँ 2-3 बार देँ ।

7) अश्वगन्धा - Q ( Ashwagandha - Q) :


 नपुंसकता तथा मर्दाना शक्ति बिल्कुल कम हो जाने से रोगी दुबला हो गया हो , मानसिक शक्ति कमजोर हो चुकी हो , पढ़ा - लिखा याद न रहता हो , कमर व टाँगोँ मेँ दर्द हो , रोगी सर्दी सहन न कर सके , बार - बार सर्दी , जुकाम हो जाये , पढ़ाई मेँ कमजोर , स्वप्नदोष हो और जवानी मेँ बुढ़ापा आ जाये तो इसके 1 - 2 मास प्रयोग करने से काया पलट जाती और नई शक्ति , जोश और जवानी आ जाती है । 5 - 10 बूँदेँ थोड़े पानी मेँ मिलाकर दिन 2 - 3 बार देँ ।


8) जिनसेँग - Q ( Ginseng - Q ) : 

बार बार संभोग करने से वीर्य स्खलन करने से आमवात जैसी दर्दे होना , पुरुषोँ के गुप्त अंगोँ की कमजोरी , मूत्रमार्ग के किनारे पर कामोत्तेजक गुदगुदी होने और लैँगिक उत्तेजना होना मेँ उपयोगी । 3-4 बूँद आधे कप पानी मेँ मिलाकर देँ

9) सैबाल सेरुलाटा - Q :


 यह जनन मूत्राँगोँ की उत्तेजना को शांत करती है । यौन दुर्बलता को दूर करती और तन्तुओँ की वृद्धि करती है । प्रोस्टेट ग्रन्थि संबंधि शोथ के साथ पारितारिका शोथ तथा मूत्र संबंधी रोगी मेँ रामबाण है । पुराना प्रमेह तथा मूत्र करने मेँ पीड़ा होने मेँ रामबाण है । यौन शक्ति का कम होना या न होना , वीर्यपात होते समय पीड़ा होना , यौन रोगजनित स्नायुविकार ग्रस्त रोगी की जननेन्द्रिय ठंठी होना मेँ उपयोगी , 10 - 15 बूँदेँ आधा कप पानी मेँ मिलाकर दिन मेँ 2 - 3 बार देँ ।
रोगियोँ को निम्न योग्य से जवानी की लहरेँ आने लगती हैँ । इससे नया रक्त उत्पन्न होता , भुख बढ़ जाती , खाया पिया हज्म होने लगता और चेहरे का रंग गुलाबी के फूल की भाँति निखर आता है ।


योग : 

जिनसेँग 3 बूँद + डमियाना Q 3 बूँद + अश्वगन्धा Q 3 बूँद स्टेफिसेग्रिया Q 3 बूँद एवेना स्टीवा Q 3 बूँद +सैबाल सेरुलाटा 3 बूँद
इन सभी को मिलाकर लेना है 18 बूंद टोटल
सभी दवाइयों को बराबर मात्रा में मिलाकर रख लीजिए उसमें से 18 drop एक बार मैं लेनी है
दिन में तीन बार|
उपरोक्त योग की ऐसी 1-1 मात्रा दिन मेँ 3 बार आधा कप पानी मेँ मिलाकर दिन मेँ 3 बार देँ ।
खट्टी चीजोँ से परहेज करायेँ । माँस , मछली आदि का अधिक सेवन करेँ । रोगी संभोग सीमित मात्रा मेँ करेँ ।
किसी भी प्रकार की दवाई का सेवन कम से कम 2 महीने तो करना ही चाहिए या लाभ न होने तक अगर उससे पहले लाभ हो जाए तो कुछ दिन सेवन करने के बाद दवाई का सेवन बंद कर देना चाहिए ऊपर लिखी गई 


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