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मूली के गुण व स्वास्थ्य लाभ

                                 

मूली भले ही आपको मामूली सब्‍जी लगे, लेकिन यह औषध‍िय गुणों से भरपूर है. अगर आप रोजाना इसे अपनी डाइट में शामिल करेंगे तो कैंसर, डायबिटीज, ब्‍लड प्रेशर समेत कई बीमारियों से कोसों दूर रहेंगेसर्दियों में मूली के पराठे, मूली की सब्‍जी, मूली का अचार और सलाद हर घर के भोजन का अहम हिस्‍सा हैं. हालांकि ज्‍यादातर लोग ऐसे हैं जो मूली की शक्‍ल देखकर ही मुंह बनाने लगते हैं. अगर आप भी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं तो आपके लिए मूली के फायदों को जानना बेहद जरूरी है. जी हां, मूली भले ही आपको मामूली सब्‍जी, लेकिन यह औषध‍िय गुणों से भरपूर है. अगर आप रोजाना इसे अपनी डाइट में शामिल करेंगे तो कैंसर, डायबिटीज, ब्‍लड प्रेशर समेत कई बीमारियों से कोसों दूर रहेंगे और आपकी लाइफस्‍टाइल हो जाएगी बेहद हेल्‍दी:
आपके सलाद में शामिल मूली प्रोटीन, विटामिन-ए, विटामिन-बी, सी, आयरन, आयोडीन, कैल्श‍ियम, गंधक, सोडियम, मैग्नीशि‍यम, फास्फोरस, क्लोरीन से भरपूर है और यह सभी पोषक तत्व मिलकर आपकी सेहत को बेहतर बनाते हैं साथ ही बीमा‍रियों से बचाते हैं।
मिटेगी थकान, दूर होगा मोटापा
थकान मिटाने और नींद लाने में मूली बेहद फायदेमंद है. वहीं, अगर आपको मोटापे से छुटकारा पाना है तो मूली के रस में नींबू और नमक मिलाकर खाने से बहुत लाभ मिलता है. दरअसल, मूली खाने से आपकी भूख शांत होती है.
मूली के पत्ते खाने के लाभ पीलिया के इलाज में
Radish मूली (radish) मुख्य रूप से पीलिया के इलाज के लिए उपयोगी होती है, क्योंकि यह बिलीरुबिन (bilirubin) के स्तर को समाप्त कर, इसके उत्पादन को स्थिर करने में मदद करती है। मूली (radish) को मुख्य रूप से प्राकृतिक उपचार के रूप में जाना जाता है और मूली के पत्ते प्राकृतिक उपचार के लिए सबसे उपयोगी होते हैं। मूली के पत्तों में शक्तिशाली detoxifying प्रभाव होता है जो विषाक्त पदार्थों शरीर से बाहर करने और रक्त को शुद्ध करने में मदद करता हैं। मूली (radish) ऑक्सीजन की आपूर्ति में वृद्धि करके पीलिया (jaundice) से पीड़ित लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से रोकने में भी मदद करती है।
बुखार में
बुखार के प्रभाव से शरीर के तापमान में वृद्धि होती है। चूँकि मूली ठंडी सब्जी है। जिसके कारण इसका उपयोग शरीर के उच्च तापमान को कम करने के लिए किया जा सकता है। इसका सेवन सिरदर्द में राहत प्रदान करता है। व्यक्ति को बुखार के दौरान पानी का अधिक मात्रा में सेवन करने का सुझाव दिया जाता है, जिससे सभी हानिकारक रोगाणुओं को पेशाब के माध्यम से बाहर किया जा सके। अतः पानी की उच्च मात्रा होने के कारण मूली को बुखार की अवस्था में सेवन करने की सलाह दी जाती है। सोने से पहले मूली (radish) का सेवन अनेक प्रकार के लाभदायक परिणाम प्रदान कर सकता है।
कैंसर की छुट्टी
मूली में भरपूर मात्रा में फॉलिक एसिड, विटामिन C और एंथोकाइनिन पाए जाते हैं. ये तत्‍व शरीर को कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं. मुंह, पेट, आंत और किडनी के कैंसर से लड़ने में यह बहुत सहायक होती है.विटामिन सी, फोलिक एसिड और एंथोसायनिन (anthocyanin) से युक्त मूली का रस, कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने तथा उन्हें नष्ट करने में मदद करता है। वास्तव में, मूली का रस आंतों में कोलन कैंसर (colon cancer), गुर्दे का कैंसर (kidney cancer), पेट कैंसर आदि के इलाज में मदद के लिए जाना जाता है।
सर्दी-जुकाम में राहत
मूली खाने से जुकाम भी नही होता है. कुछ नहीं तो मूली को कम से कम सलाद में तो जरूर खाना चाहिए.
बालों के लिए
बाल प्रत्येक व्यक्ति में सौंदर्य विशेषता का प्रमुख हिस्सा होते हैं। मूली का रस (radish juice) बालों में लगाने से बाल मजबूत हो जाते हैं। अतः मूली बालों के झड़ने को कम करने के लिए एक प्रभावी माध्यम है। बालों से सम्बंधित समस्याओं को कम करने के लिए मूली का रस सिर में लगाकर 10-15 मिनट तक मालिश करना चाहिए। फिर कुछ समय बाद शैम्पू का उपयोग करके अच्छी तरह से सिर को धोना चाहिए। यह बाल गिरने को कम करने के साथ-साथ, बालों की वृद्धि करने और डैंड्रफ़ को हटाने में सहायक होता है। इसके लिए सफेद मूली का उपयोग किया जा सकता है। मूली (radish) बालों को मजबूती प्रदान करने, मुलायम और चमकीला बनाने तथा बालों की वृद्धि करने के लिए उपयोग में लाई जा सकती है।
पायरिया से राहत
पायरिया से परेशान लोग मूली के रस से दिन में 2-3 बार कुल्ले करें और इसका रस पिएं तो बहुत फायदा होगा. मूली के रस से कुल्ला करना, मसूड़ों-दांतों पर मलना और पीना दांतों के लिये बहुत लाभकारी है. मूली को चबा-चबा कर खाने से दांतों और मसूड़ों की बीमारियां दूर होती हैं.
रक्त चाप और मधुमेह के इलाज में –
Radish मूली में पोटेशियम पाया जाता है, जो रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को रिलेक्स करने और रक्त प्रवाह में वृद्धि करने में मदद करता है। मूली (radish) में उपस्थित पोटेशियम, नियमित रक्त प्रवाह को बनाये रखता है, जिससे रक्तचाप (blood pressure) कम हो जाता है। मूली की खपत या मूली का सेवन, रक्त शर्करा (blood sugar) के स्तर को प्रभावित नहीं करती है, क्योंकि इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index) बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। परन्तु इसका सेवन, रक्त में शर्करा के अवशोषण को भी नियंत्रित करता है, इसलिए मधुमेह में इसका सेवन सुरक्षित होता है।
हृदय स्वास्थ्य में
Radish मूली का सेवन व्यक्ति में कार्डियोवैस्कुलर रोगों (cardiovascular disease) को कम करने या रोकने के लिए कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को कम करने में मदद करता है। मूली में कुछ फ्लेवोनोइड्स (flavonoids) शामिल होते हैं, जो दिल के लिए बहुत लाभदायक होते हैं। हृदय कार्यों का सीधा संबंध रक्तचाप से होता हैं। उच्च रक्तचाप अक्सर स्ट्रोक (strokes) और हार्ट अटैक जैसी दिल की गंभीर समस्याओं का कारण बनता है। चूंकि मूली रक्तचाप को नियंत्रित करती है, इसलिए यह दिल के दौरे (heart attack) की संभावनाओं को बहुत कम कर देती है। अतः हृदय रोग से सम्बंधित व्यक्तियों को मूली का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।
डायबिटीज से छुटकारा मूली कम ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स के लिए जानी जाती है. यानी कि इसे खाने से ब्‍लड शुगर पर असर नहीं होता है. रोजाना सुबह खाने में मूली का सेवन करने से डायबिटीज से जल्द छुटकारा मिल सकता है
मूली का रस पीने के फायदे वजन कम करने में
Radish मूली (radish) वजन कम के लिए एक प्रभावी आहार है। जो व्यक्ति अपने वजन को कम करना चाहते हैं, वे इसे अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। मूली में फाइबर की अधिक मात्रा पाई जाती है, तथा कम कैलोरी प्रदान करती है। इसलिए मूली जैसी सब्जियां फाइबर और पानी से भरपूर होने के कारण वजन कम करने के लिए बेहद फायदेमंद हैं। सलाद के रूप में मूली (radish) का उपभोग किया जा सकता है, यह कैलोरी के सेवन को कम करने और चयापचय में सुधार करने में भी मदद करती है। यह पेट में वसा को जमा होने नहीं देती है। पेट में वसा का जमाव ही वजन और मोटापा बढ़ाने का कारण बनता है। अतः वजन घटाने के लिए मूली के रस (radish juice) का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
मुंहासों से मुक्ति
मूली में विटामिन C, जिंक, B कांप्‍लेक्‍स और फॉस्‍फोरस होता है. मुंहासों के लिए मूली का टुकड़ा गोल काट कर मुंहासों पर लगाएं और तब तक लगाए रखें जब तक यह खुश्क न हो जाए. थोड़ी देर बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. कुछ ही दिनों में चेहरा साफ हो जाएगा.
गुर्दे संबंधी
गुर्दे संबंधी परेशानियों के लिए मूली का रस और मूली दोनों ही रामबाण उपाय है। मूली के रस में सेंधा नमक मिलाकर नियमित रूप से पीने पर गुर्दे साफ होते हैं और गुर्दे की पथरी भी समाप्त हो जाती है।
दूर भगाए बीमारियांबवासीर में कच्ची मूली या मूली के पत्तों की सब्जी बनाकर खाना फायदेमंद होता है. हर रोज सुबह उठते ही एक कच्ची मूली खाने से पीलीया रोग में आराम मिलता है. अगर पेशाब का बनना बंद हो जाए तो मूली का रस पीने से पेशाब दोबारा बनने लगती है. आधा गिलास मूली का रस पीने से पेशाब के साथ होने वाली जलन और दर्द मिट जाता है. खट्टी डकारें आती है तो मूली के एक कप रस में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ मिलता है|प्रतिदिन खाने के साथ मूली का प्रयोग करने से लिवर और किडनी स्वस्थ रहते हैं और मजबूत होते हैं। कब्ज या बवासीर की परेशानी में भी मूली बेहद कारगर उपाय है। पेट संबंधी हर समस्या का हल मूली के पास है।
मूत्ररोग
मूत्ररोग या इससे संबंधि‍त किसी भी प्रकार की समस्या में मूली का रस फायदेमंद होता है। यह मूत्र मार्ग के हानिकारक तत्वों को खत्म कर संक्रमण फैलने से बचाता है और जलन, सूजन व अन्य समस्याएं समाप्त करता है।
हिचकी
लगातार हिचकी आने से परेशान हैं तो मूली के पत्ते आपकी मदद कर सकते हैं। मूली के मुलायम पत्तों का चबाकर चूसने से हिचकी आना तुरंत बंद हो जाएगा। इतना ही नहीं मुं‍ह की दुर्गंध से भी छुटकारा मिलेगा।
लिवर को स्वास्थ्य रखने में
Radish मूली लिवर और पेट के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसमें शक्तिशाली detoxifying एजेंट पाए जाते हैं, जो रक्त को शुद्ध करने तथा अपशिष्ट पदार्थ और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर करने में मदद करते हैं। विषाक्त पदार्थों और अशुद्ध रक्त के कारण ही लिवर (Liver) की समस्या पैदा होती हैं। इसलिए लिवर को स्वास्थ्य रखने के लिए अधिक से अधिक मूली (radish) का सेवन करना चाहिए।
कब्ज दूर करने में
कब्ज (Constipation) वह समस्या है जो मल त्याग के दौरान दर्द का कारण बनती है। चूँकि मूली (radish) में फाइबर बहुत अधिक होता है और जब फाइबर की अधिक मात्रा का सेवन किया जाता है तो कब्ज से राहत मिलती है। मूली का नियमित सेवन आंत्र आंदोलनों (bowel movements) को नियंत्रित करने में मदद करता है। यदि सही मात्रा में मूली का सेवन किया जाये, तो यह गैस की समस्या को उत्पन्न नहीं करती है।
हड्ड‍ियों को मजबूत बनाती है
कैल्श‍ियम की भरपूर मात्रा होने से मूली आपकी हड्ड‍ियों को मजबूत करने में सहायक है। इसे खाने से जोड़ों में दर्द से भी राहत मिलती है और सूजन से भी।
बवासीर में मूली के फायदे
बवासीर एक गंभीर समस्या है जो व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बनती है। अतः इसके इलाज में मूली लाभकारी प्रभाव डालती है। मूली के रस (radish juice) को बवासीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। मूली के रस में पाया जाने detoxifying गुण इसे ठीक करने में मदद करते हैं।
एनीमिया के इलाज में
Radish मूली आयरन का एक अच्छा स्त्रोत है। जिसके कारण इसका नियमित रूप से सेवन एनीमिया के जोखिम को कम करने और एनीमिया के इलाज में बहुत प्रभावी है। एनीमिया खून में आयरन की कमी के कारण होता है। आयरन लाल रक्त कोशिकाओं के विकास में सहायता करता है तथा व्यक्ति को स्वस्थ रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति को नियमित रूप से मूली (radish) का सेवन करना चाहिए।
सावधानियाँ-
Radish मूली की तासीर गर्म होती है इसलिए ज्यादा मात्रा में मूली खाने के नुकसान भी हो सकते है इसलिए इसकी कम मात्रा से शुरुवात करें और बाद में बढ़ाते जाए दूध के साथ मूली ना खाएं और मूली खाने का सही समय दिन में होता है | याद रखे कोई भी कच्ची सब्जी, जूस, कच्चे फल हमेशा दिन में खासतौर से दोपहर के समय ही खाने चाहिए इससे एक तो इनको पचने में काफी समय मिल जाता है दूसरा इनसे कफ नहीं बनता है | रात के समय पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है इसलिए इस समय पूरी तरह पके हुए भोजन ही करने चाहिए और वो भी कम मात्रा में।
नियमित और उचित मात्रा में मूली (radish) का सेवन करने से रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। रक्त चाप में नियंत्रण, मुख्य रूप से मूली में उपस्थित महत्वपूर्ण खनिज “पोटेशियम” की उपस्थिति के कारण होता है। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि अत्यधिक मात्रा में मूली का सेवन रक्तचाप पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।
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