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पेट के अल्सर (छाले) के घरेलू उपचार





अल्सर की बीमारी कैसे होती हैं.

जब मानव शरीर में स्थित भोजन को पचाने वाला अम्लीय पदार्थ अमाशय की दीवारों को क्षति पहुंचाने लगता हैं तो व्यक्ति को अल्सर का रोग हो जाता हैं.अल्सर व्यक्ति के अमाशय या छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में फोड़े निकलते हैं. अल्सर को अमाशय का अल्सर, पेप्टिक अल्सर तथा गैस्ट्रिक अल्सर के नाम से भी जाना जाता हैं.
कारण (Causes) –
अत्याधिक दर्द निवारक दवाओं का सेवन करना।
अधिक चाय या काफी पीना।
अधिक गरम मसालें खाना।
अधिक तनाव लेना।
गलत तरह के खान-पान करना।
अनियमित दिनचर्या।
अधिक धूम्रपान करना।
*अल्सर अधिक गर्म खट्टे, मिर्च मसलों वाला भोजन करने के कारण हो कसता हैं.
इसके अलावा जो व्यक्ति ज्यादा क्रोध करते हैं,तनावग्रस्त रहते हैं, जल्दी किसी भी कार्य को करने के लिए उत्तेजित रहते हैं, चिंता अधिक करते हैं, दूसरों सेइर्ष्या करते हैं. उन्हें भी यह बीमारी हो सकती हैं
*जो व्यक्ति अधिक चाय, कॉफ़ी तथा शराब का सेवनकरते हैं. उन्हें भी अल्सर हो सकता हैं

लक्षण (Symptoms) –
* अल्सर होने पर मानव शरीर में स्थित अमाशय तथा पक्वाशय में घाव होता हैं.
*धीरे – धीरे इस घाव से मनुष्य के ऊतक भी प्रभावितहोने लगते हैं.
*अमाशय में घाव होने के बाद पाचक रसों की क्रिया ठीक ढंग से कार्य नहीं कर पाती. जिससे ये घाव फोड़ों का रूप धारण कर लेते हैं.
पेट में कब्ज की शिकायत रहती हैं तथा मल के साथ खून भी आता हैं.
* इस रोग से ग्रस्त होने के बाद व्यक्ति शरीरिक रूप से अधिक कमजोर हो जाता हैं और उसके पेट की जलन उसकी छाती को भी प्रभावित करती हैं. जिससे उसके पेट के साथ – साथ छाती में भी जलन होने लगती हैं.
* इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अधिकतर समय बुझा – बुझा सा रहता हैं, उसका स्वभाव चिडचिडा हो जाता हैं, जिसके परिणाम स्वरूप उसे छोटी – छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता हैं.
इलाज व सावधानी- पेप्टिक अल्सर का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। अपनी दिनचर्या व खान-पान में बदलाव करना ज़रूरी है। समय पर सोये व सुबह नियम से जल्दी उठने की आदत डाले। प्रातः व्यायाम करे या भ्रमण के लिए अवश्य जाये। इससे फेफड़ो को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। पेट में कब्ज न होने दे। तेज मसालेदार, या तेज नमक मिर्च वाले खाने तथा तले - भुने खाद्य पदार्थो से परहेज करे।
भोजन में कच्ची सब्जिया जैसे, लौकी, टमाटर, गाजर, मूली, चुकंदर, व फलो में अमरुद, पपीता, अंजीर का सेवन करना फायदेमंद होगा। बेल फल का सेवन अलसर में लाभकारी साबित होगा। ३-५ ग्राम मुलैठी पाउडर गरम दूध के साथ पीने से अलसर से आराम मिलता है। ताजे फलो का रस व मट्ठा आदि का सेवन भी लाभकारी है।-
*पानी अधिक मात्रा में पिए। दिन में कम से कम ३ -४ लीटर पानी पीना उचित है। धूम्रपान व शराब का सेवन न करें। किसी भी तरह का उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर का परामर्श अवश्य ले। तनाव व चिंता से मुक्त रहे। हमेशा खुश रहे।
*अल्सर का रोग होने पर व्यक्ति के पेट में हमेशा जलन होती रहती हैं, उसे अधिक खट्टी ढकारें आती हैं, सिर में दर्द होने लगता हैं और चक्कर आने लगते हैं.

*.अल्सर के होने पर मनुष्य की भोजन के प्रति रूचि ख़त्म हो जाती हैं, उसके शरीर में पित्त की मात्रा बढती जाती हैं.

अल्सर के लिए घरेलू उपचार (Treatment Of Ulcer Disease)
*संतरे का रस (Orange Juice) -
यदि जांच कराने के बाद आपको पता चले की आपके पेट में घाव हो गया हैं तो इस घाव को जल्द भरने के लिए रोजाना दिन में दो बार एक छोटा गिलास संतरे का रस पियें. संतरे का रस रोजाना पीने से घाव जल्द ही भर जाएगा.गुडहल : गुडहल की पत्तियों के रस का शरबत बनाकर पीने से अल्सर रोग ठीक होता है।
बेलफल की पत्तियों का सेवन :
बेल की पत्तियों में टेनिन्स नामक गुण होता है जो पेट के अल्सर को ठीक करते हैं। बेल का जूस पीने से पेट का दर्द और दर्द ठीक होता है।
गाजर और पत्ता गोभी का रस :
पत्तागोभी पेट में खून के प्रभाव को बढ़ाती है और अल्सर को ठीक करती है। पत्ता गोभी और गाजर का रस मिलाकर पीना चाहिए। पत्ता गोभी में लेक्टिक एसिड होता है जो शरीर में एमीनो एसिड को बनाता है।
सहजन :
दही के साथ सहजन के पत्तों का बना पेस्ट बना लें और दिन में कम से कम एक बार इसका सेवन करें। इस उपाय से पेट के अल्सर में राहत मिलती है।
मेथी का दाना :
अल्सर को ठीक करने में मेथी बेहद लाभदायक होती है। एक चम्मच मेथी के दानों को एक गिलास पानी में उबालें और इसे ठंडा करके छान लें। अब आप शहद की एक चम्मच को इस पानी में मिला लें और इसका सेवन रोज दिन में एक बार जरूर करें। ये उपाय अल्सर को जड़ से खत्म करता है।
.केला (Banana) -
अल्सर के रोग से पीड़ित होने पर आप केलों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. केलों का इस्तेमाल करने के लिए दो केले लें और उन्हें छिल लें. इसके बाद इन केले के गुदे को मैश कर लें और उसमें थोडा सा तुलसी के पत्तों का रस मिला दें. इसके बाद इसका सेवन करें. आपको अल्सर के रोग में काफी राहत मिलेगी.
अल्सर के रोग से पीड़ित रोगी के लिए कच्चे केले भी बहुत ही लाभकारी सिद्ध होते हैं. इसलिए इसका भी प्रयोग वह इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए कर सकत़ा हैं. इस रोग को दूर करने के लिए अधिक से अधिक कच्चे केले की सब्जी बनाएं और उसमें हिंग पाउडर मिलाकर खाएं.
पेट में दर्द (Abdominal Pain) –
यदि अल्सर कारोग होने के बाद आपके पेट में हेमशा दर्द रहता हैं तो इस दर्द को दूर करने के लिए एक काम्म्च जीरा, एक चुटकी सेंधा नमक, दो रत्ती घी में भुनी हुई हिंग लेकर इन सभी को एक साथ मिला लें. इसके बाद इस चुर्ण का सेवन दिन में दो बार भोजन ग्रहण करने के पश्चात् करें. आपको लाभ होगा.
अजवायन (Parsley) –
अल्सर के रोग से जल्द मुक्त होने के लिए 3 छोटी हरड, कुछ मुनक्का जिनमें बीज न हो, डेढ़ चम्मच अजवायन लें. इसके बाद इन सभी चीजों को मिलाकर चटनी बना लें और इस चटनी का सेवन रोजाना करें.
चुर्ण (Powder) –
अल्सर के रोग को से बचने एक लिए आप चुर्ण का प्रयोग भी कर सकते हैं. चुर्ण बनाने के लिए
* 1 चम्मच अजवायन, 3 चम्मच धनिया पाउडर, 2 चम्मच जीरा पाउडर और एक चुटकी हिंग पाउडर लें और इन सबको मिला लें. अब इस चुर्ण का सेवन भोजन करने के पश्चात् करें. जल्द ही आपको इस रोग से मुक्ति मिल जायेगी.
* आंवले का मुरब्बा (Amla ’s Jam) –
अगर अल्सर के रोग से पीड़ित व्यक्ति दिन में एक बार आंवले के मुरब्बे के रस में आधा गिलास अनार का जूस मिलाकर पियें तो भी उसे इस रोग से जल्द ही आराम मिल जाता हैं.

शहद :
पेट के अल्सर को कम करता है शहद। क्योकिं शहद में ग्लूकोज पैराक्साइड होता है जो पेट में बैक्टीरिया को खत्म कर देता ह। और अल्सर के रोगी को आराम मिलता है।
नारियल :
नारियल अल्सर को बढ़ने से रोकता है साथ ही उन कीड़ों को भी मार देता है जो अल्सर को बढ़ाते हैं। नारियल में मौजूद एंटीबेक्टीरियल गुण और एंटी अल्सर गुण होते हैं। इसलिए अल्सर के रोगी को नारियल तेल और नारियल पानी का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए।
बादाम :
बादाम को पीसकर इसे अल्सर के रोगी को देना चाहिए। इन बादामों को इस तरह से बारीक चबाएं कि यह दूध की तरह बनकर पेट के अंदर जाएं।
लहसुन :
लहुसन की तीन कच्ची कलियों को कुटकर पानी के साथ सेवन करें।
गाय का दूध :
गाय के दूध में हल्दी को मिलाकर पीना चाहिए। हल्दी में मौजूद गुण अल्सर को बढ़ने नहीं देते हैं।
*आंवला (Amla) -
अल्सर से जल्द छुटकारा पाने के लिए के लिए 2 चम्मच आंवले का पिसा हुआ चुर्ण लें और इसे रात को पानी में भिगोकर सो जाएँ. इसके बाद एक चम्मच पीसी हुई सोंठ लें, 2 चम्मच मिश्री का पाउडर लें. अब इन सभी को उस पानी में मिला दें.इसके बाद इस पानी का सेवन करें. अल्सर में काफी लाभ होगा.
अल्सर के लिए जरूरी परहेज :
*अधिक मिर्च मसाले और जंक फूडस से परहेज करें।
*चाय, काफी और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन करना बंद कर दें।
*अपने को तनाव मुक्त रखें। हर रोज सुबह-शाम पैदल घूमें।
*अधिक दवाओं का सेवन न करें।
*अल्सर का अधिक बढ़ने पर इसका ऑपरेशन ही एक मात्र उपाय है। यदि यह कैंसर में बदल जाता है तो अल्सर की कीमोथैरेपी की जाती है।
*यदि आप चाहते हैं कि अल्सर का रोग आपको न लगें तो आपको अपने खान-पान और गलत लतों को छोड़ना होगा।

मूत्राषय प्रदाह(cystitis)के सरल उपचार




                                                          

मूत्राषय में रोग-जीवाणुओं का संक्रमण होने से मूत्राषय प्रदाह रोग उत्पन्न होता है। निम्न मूत्र पथ के अन्य अंगों किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी संक्रमण का असर देखने में आता है। इस रोग के कई कष्टदायी लक्षण होते हैं जैसे-तीव्र गंध वाला पेशाब होना,पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द अनुभव होना, कमजोरी मेहसूस होना,पेट में पीडा और शरीर में बुखार की हरारत रहना। हर समय मूत्र त्यागने की ईच्छा बनी रहती है। मूत्र पथ में जलन बनी रहती है। मूत्राषय में सूजन आ जाती है। 
यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज्यादा देखने में आता है। इसका कारण यह है कि स्त्रियों की पेशाब नली (दो इंच) के बजाय पुरुषों की मूत्र नलिका ७ इंच लंबाई की होती है। छोटी नलिका से होकर संक्रमण सरलता से मूत्राषय को आक्रांत कर लेता है। गर्भवती स्त्रियां और सेक्स-सक्रिय औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग अधिक पाया जाता है। रितु निवृत्त महिलाओं में भी यह रोग अधिक होता है।

इस रोग में मूत्र खुलकर नहीं होता है और जलन की वजह से रोगी पूरा पेशाब नहीं कर पाता है और मूत्राषय में पेशाब बाकी रह जाता है। इस शेष रहे मूत्र में जीवाणुओं का संचार होकर रोगी की स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है।
आधुनिक चिकित्सक एन्टीबायोटिक दवाओं से इस रोग को काबू में करते हैं लेकिन कुदरती और घरेलू पदार्थॊं के उपचार से भी इस रोग पर शीघ्र ही काबू पाया जा सकता है।१) खीरा ककडी का रस इस रोग में अति लाभदायक है। २०० मिलि ककडी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर तीन घंटे के फ़ासले से पीते रहें।
२) पानी और अन्य तरल पदार्थ प्रचुर मात्रा में प्रयोग करें। प्रत्येक १० -१५ मिनिट के अंतर पर एक गिलास पानी या फ़लों का रस पीयें। सिस्टाइटिज नियंत्रण का यह रामबाण उपचार है।
३) मूली के पत्तों का रस लाभदायक है। १०० मिलि रस दिन में ३ बार प्रयोग करें।
४) नींबू का रस इस रोग में उपयोगी है। वैसे तो नींबू स्वाद में खट्टा होता है लेकिन गुण क्षारीय हैं। नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायक होता है। मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ होता है।५) पालक रस १२५ मिलि में नारियल का पानी मिलाकर पीयें। तुरंत फ़ायदा होगा। पेशाब में जलन मिटेगी।
६) पानी में मीठा सोडा यानी सोडा बाईकार्ब मिलाकर पीने से तुरंत लाभ प्रतीत होता है लेकिन इससे रोग नष्ट नहीं होता। लगातार लेने से स्थिति ज्यादा बिगड सकती है।
७) गरम पानी से स्नान करना चाहिये। पेट और नीचे के हिस्से में गरम पानी की बोतल से सेक करना चाहिये। गरम पानी के टब में बैठना लाभदायक है।




८) मूत्राषय प्रदाह रोग की शुरुआत में तमाम गाढे भोजन बंद कर देना चाहिये।दो दिवस का उपवास करें। उपवास के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल,पानी,दूध लेते रहें।
९) विटामिन सी (एस्कार्बिक एसिड) ५०० एम जी दिन में ३ बार लेते रहें। मूत्राषय प्रदाह निवारण में उपयोगी है।
१०) ताजा भिंडी लें। बारीक काटॆं। दो गुने जल में उबालें। छानकर यह काढा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिल जाती है।
११) आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाएं इसमें नींबू का रस ५ मिलि मिलाएं और पी जाएं। इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट होते है।
१२) आधा गिलास गाजर का रस में इतना ही पानी मिलाकर पीने से मूत्र की जलन दूर होती है। दिन में दो बार प्रयोग कर सकते हैं।



 

आर्थराइटिस(संधिवात) की अचूक औषधि