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धतूरा के औषधीय गुण उपयोग // Medicinal properties of Dhatura


यूं तो ईश्वर को अपनी बनाई सभी वनस्पतियां प्रिय हैं, लेकिन धतूरा इसके औषधीय गुणों के कारण शिवजी को विशेष प्रिय है। धतूरा ऐसा पौधा है, जो जड़ से लेकर तना तक औषधि गुणों से परिपूर्ण होता है। आयुर्वेद पद्धति में धतूरा का बहुत महत्व है। औषधि गुणों की खान माने जाने वाले धतूरा की जड़, फल, फूल, पत्ता औषधि गुणों से युक्त हैं। पैर में सूजन हो जाने पर इसके पत्ते को पीसकरलगाना काफी उपयुक्त माना जाता है। सांस के रोगों और जोड़ों के दर्द में भी यह लाभदायक होता है। बुखार, सायटिका, गठिया, पेट में गैस आदि तमाम रोगों में धतूरा का शोधन कर बनाई दवा से रोगों से मुक्ति मिलती है
धतूरा एक विषैले घटक के रूप में जाना जात है लेकिन फिर भी धतूरा के फायदे होते हैं। भारत में धतूरा का उपयोग विभिन्‍न प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। हालांकि धतूरा का आ‍ध्‍यात्मिक महत्‍व भी होता है। इसे शिवजी की पूजा में उपयोग किया जाता है। औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण धतूरा के सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभों में अस्थमा को दूर करने, बुखार को कम करने, दिल की रक्षा, दर्द को खत्म करने, प्रजनन क्षमता बढ़ाने, बालों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, स्वस्थ नींद को प्रेरित करने और प्रसव पीड़ा को कम करने की क्षमता शामिल है। धतूरा एक मादक या नशीला खाद्य पदार्थ होता है। जिसका औषधीय उपयोग करने पर लाभ होते हैं। लेकिन आवश्‍यकता से अधिक इस्‍तेमाल करने पर यह हानिकार भी हो सकता है।
धतूरा एक खरपतवार है जिसके सुंदर फूल देखकर आप आकर्षित हो सकते हैं। लेकिन सावधान रहें क्‍योंकि धतूरा की लगभग 9 अलग-अलग प्रजातियां होती हैं जिनमें से कुछ जहरीले भी होते हैं। पारंपरिक रूप से धतूरा का उपयोग नशीली दवाओं के निर्माण में किया जाता है। धतूरा की बड़ी मात्रा में विषाक्त हो सकती है, छोटी मात्रा में जब उचित रूप से इसे लिया जाता है तो इसके औषधीय प्रभाव भी हो सकते हैं।
धतूरा आमतौर पर कैनबिस (स्मोक्ड) के साथ सेवन किया जाता है या शक्ति बढ़ाने के लिए शराब में जोड़ा जाता है। धतूरा में विभिन्न अल्कलॉइड, खनिज और कार्बनिक यौगिक हैं, जो इस पौधे के प्रभावों को इतना दिलचस्प बनाते हैं।
धतूरा के अन्य नाम-
धतूरा एक खरपतवार है जो सामान्‍य रूप से उस जगह आसानी से मिल जाता है जहां कचरा या कूड़ा एकत्र किया जाता है। धतूरा को अलग-अलग स्‍थानों पर कई नामों से जाना जाता है। जैसे कि मदन, उन्‍मत्‍त, शिवप्रिय, महामोही, कृष्‍ण धतूरा, खरदूषण, शिवशेखर, सविष, धुतूरा, सादा धुतूरा, धोत्रा ततूर, दतुरम आदि। इसकी कई प्रजातियां होने के कारण केवल कुछ प्र‍जातियों का औषधीय उपयोग किया जाता है। क्‍योंकि कुछ प्रजातियां बेहद जहरीली होती हैं।
धतूरा का पौधा
धतूरा का पौधा मध्‍यम आकार का पौधा होता है जिसके सभी अंगों का औषधीय उपयोग किया जाता है। इसके पत्‍ते बड़े डंठल वाले नोकदार और अंडाकार जैसे होते हैं। धतूरा के फूल की आकृति किसी घंटी के आकार की तरह दिखाई देती है। इसके फूल में 5 पंखुडियां होती हैं। हालांकि प्र‍जाति के अनुसार धतूरा के फूलों के रंग अलग-अलग होते हैं। धतूरा का फल गोल और कांटे युक्‍त होता है। हालांकि इसके फल में लगे कांटे नरम होते हैं। धतूरा के पत्‍ते और फलों के सूखे बीजों का विशेष रूप से औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग‍ किया जाता है। धतूरा के बीज काले भूरे रंग के होते हैं। धतूरा के साबुत बीजों में किसी प्रकार की गंध नहीं होती है लेकिन इनका स्‍वाद कड़वा होता है।
धतूरा की तासीर
धतूरा की तासीर गर्म होती है जिसके कारण ही इसका उपयोग विभिन्‍न प्रकार की औषधीयों में किया जाता है। गर्म तासीर होने के कारण इसका उपयोग नशीले प्रभाव के लिए भी किया जाता है।
अपने औषधीय गुणों और पोषक तत्‍वों की मौजूदगी के कारण धतूरा का उपयोग करने से कई प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्त हो सकते हैं। आइए धतूरा के इन आकर्षक स्वास्थ्य लाभों में से कुछ पर ध्यान दें। और जाने धतूरा के औषधीय लाभ क्‍या हैं।
आँख दुखना-
धतूरे के पत्तों का अर्क कान में डालने से आँख का दुखना बंद हो जाता है। हालांकि धतूरे में जहर होता है और इसका ज्यादा इस्तेमाल आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है लेकिन फिर भी धतूरा काफी गुणकारी है। बता दे की इसकी जड़, पत्तियां यहां तक की फल का इस्तेमाल भी औषधी बनाने में किया जाता है। पैरों में सूजन होने पर धतूरे की पत्तियों को पीसकर लगाने से सूजन काफी कम हो जाती है साथ ही इसके अलावा बुखार और गैस संबंधित कुछ दवाओं में धतूरे का इस्तेमाल कर बनाई गई दवा भी लाभकारी साबित होती है।
गंजापन -
अक्सर लोग उम्र से पहले ही गंजेपन का शिकार बन जाते हैं, आपको जानकार हैरानी होगी की इस गुणकारी धतूरे के रस को नियमित रुप से सिर पर लगाने से बाल जल्दी आने शुरु हो जाते हैं। 250 मिली ग्राम सरसों का तेल, 60 मिलीग्राम गंधक और 500 ग्राम धतूरे के पत्तों के रस को धीमी आंच पर पकाएं। पकने के बाद जितना तेल बचे उसमें से दो से तीन बूंदे कान में डालें। ऐसा करने पर कान के दर्द में फायदा होगा। यदि शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन हो तो बस धतूरे के पत्तों को हल्का गुनगुना कर सूजन वाले स्थान पर बाँध दें निश्चित लाभ मिलेगा।
 श्वसन संस्थान के रोगों मे -
श्वसन संबंधी समस्‍याओं के लिए धतूरा के लाभ होते हैं। इस समस्‍या के उपाय में धतूरा का उपयोग गांजा (cannabis) के समान धूम्रपान के रूप में किया जाता है। धतूरा में एंटीस्‍पास्‍मोडिक (antispasmodic) प्रभाव होते हैं। जिसके कारण यह अस्‍थमा (asthma) के उपचार में प्रभावी होता है। धतूरा का उपयोग करने पर यह श्वसन पथ को शांत करने और उन्‍हें बंद होने और खांसी आने से रोकता है। धतूरा के एंटीस्‍पास्‍मोडिक प्रभाव शरीर के अन्‍य हिस्‍सों पर भी अपना प्रभाव डालते हैं। जिनमें मांसपेशियों को आराम दिलाना शामिल है।
मूड को सुधारे
अब तक के ज्ञात धतूरा के लाभों में यह प्रमुख लाभ है जो मूड को सुधारने (improve mood) और तनाव (stress) को कम करने में प्रभावी होता है। धतूरा का सेवन करने से शरीर में ऐसे हार्मोनों को उत्‍तेजित करने में मदद मिलती है जो तनाव को कम करने और मन को शांत करने में सहायक होते हैं।
जो लोग नियमित रूप से तनाव से ग्रस्त हैं, उनके लिए शरीर में हार्मोन का निर्माण खतरनाक हो सकता है। धतूरा की छोटी मात्रा में धूम्रपान पारंपरिक रूप से मूड में सुधार और अवसाद के लक्षणों से राहत के लिए किया जाता है।
इस तरह के लाभ प्राप्‍त करने के लिए धतूरा की बहुत ही कम मात्रा को धूम्रपान के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए। क्‍योंकि अधिक मात्रा में इसका उपयोग करने पर यह नुकसानदायक हो सकता है।
धतूरे के बीज दिल के लिए फायदेमंद
शरीर और मन को शांत करने के लिए धतूरा के फायदे जाने जाते हैं। शरीर और मन को शांत करके, यह हृदय प्रणाली को भी आराम दे सकता है। धतूरे के बीज के फायदे दिल के लिए भी होते हैं। यह हृदय प्रणाली को भी आराम दिलाने में सहायक होते हैं। धतूरा उन लोगों के लिए अधिक फायदेमंद होता है जो दिल की अनियंत्रित धड़कन से ग्रसित हैं। जिन लोगों की हृदय गति अचानक तेज या धीमी हो जाती है उनके लिए यह एक प्रभावी औषधी माना जाता है। इसका सेवन करने से रक्तचाप को कम करने (reducing blood pressure) में और एथेरोस्‍क्‍लेरोसिस (atherosclerosis), दिल के दौरे और स्‍ट्रोक (heart attacks, and strokes) की संभावना को भी कम करने में मदद मिलती है। इस तरह से हृदय रोगियों के लिए धतूरा फायदेमंद होता है। लेकिन फिर भी इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए।
 गठिया दूर-
धतूरा के पंचांग का रस निकालकर उसको तिल के तेल में पकायें, जब तेल शेष रह जाये तो इस तेल को मालिश करके ऊपर धतूरा के के पत्‍ते बांध देने से गठिया दूर होता है।
बालों के लिए
यदि आप बाल झड़ने से परेशान हैं तो धतूरा के बीज का तेल उपयोग कर सकते हैं। यदि आपके पास धतूरे का तेल उपलब्‍ध नहीं है तो सबसे अच्‍छा है कि आप धतूरे के बीजों को पीस कर पाउडर बना लें। फिर इस पाउडर को पानी के साथ मिलाकर एक पेस्‍ट तैयार करें और अपने सिर पर लगाएं। इस मिश्रण को बालों में लगाने से यह बालों के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देता है और नए बालों को उगने में मदद करता है। लेकिन आपको सलाह दी जाती है कि यदि आप बालों के लिए धतूरा उपयोग करना चाहते हैं तो इसका सेवन न करें बल्कि इसके बीजों को पीसकर अपने बालों में लगाएं।
बुखार कम करे
आयुर्वेद में बुखार के लक्षणों को कम करने के लिए धतूरा के फल का उपयोग किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि धतूरा के औषधीय गुण बुखार के लक्षणों को कम कर सकते हैं। परंपरागत रूप से यह मलेरिया के प्रभाव को कम करने में उपयोग किया जाता है। मलेरिया का उपचार करने के लिए आप धतूरे के फल को आग में जलाएं और इसके बाद इसकी बहुत ही कम मात्रा का सेवन करें। चूंकि धतूरा एक विषैला फल है इसलिए इसका सेवन करने से पहले किसी अनुभवी व्‍यक्ति या आयुर्वेद जानकार से सलाह लेकर ही इसका सेवन करें।
कान का दर्द 
कान के दर्द को दूर करने के लिए सरसो के तेल और गंधक के साथ थोड़े से धतूरे के पत्ते का रस मिलाये फिर इसे धीमी आंच पर पकाले और कान में दो बुँदे डाले।
प्रजनन क्षमता बढ़ाएं धतूरा के बीज-
प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए पारंपरिक रूप से धतूरा के बीजों का उपयोग प्राचीन समय से किया जा रहा है। पारंपरिक चिकित्‍सा में धतूरा के सबसे लोकप्रिय उपयोगों में से एक यौन ऊर्जा, कामेच्‍छा और प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देना है। हालांकि इसके वैज्ञानिक सबूत नहीं हैं। लेकिन ऐसा माना जाता है कि धतूरा का उपयोग धूम्रपान के रूप में करने से यह प्रजनन क्षमता को बढ़ा सकता है। इसके अलावा धतूरा के बीजों को दूध या पानी के साथ सेवन करने प्रजनन आंगों में रक्‍त संचार को भी बढ़ाया जा सकता है। जिससे यौन शक्ति में वृद्धि होती है। यदि आप भी अपनी यौन क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं तो धतूरा का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन आपको सलाह दी जाती है किसी अनुभवी व्‍यक्ति या आयुर्वेदिक सलाहकार से परामर्श लेकर ही इसका उपयोग करें।
अनिद्रा का इलाज
जो लोग अनिद्रा की समस्‍या से परेशान हैं वे धतूरा के लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं। धतूरा में मौजूद शामक गुण (sedative qualities of datura) अच्‍छी नींद लेने में सहायक होते हैं। इसके अलावा यह हमारी आंतरिक नसों को आराम दिलाने, हार्मोनल रिलीज को प्रेरित करने, सूजन और दर्द को कम करने में भी सहायक होते हैं। धतूरा प्रभावी रूप से अनिद्रा या अन्य नींद की गड़बड़ी से पीड़ित लोगों के लिए आरामदायक नींद दे सकता है। यदि आपको भी पर्याप्‍त नींद लेने में परेशानी हो रही है तो आप भी धतूरा का सेवन कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।
गर्भावस्‍था के लिए
गर्भावस्‍था या गर्भवती महिला के लिए भी धतूरा के फायदे होते हैं। यदि आप एक विशेष रूप से दर्दनाक गर्भावस्था या प्रसव से पीड़ित हैं, तो एक सामयिक तरीके से धतूरा का उपयोग बहुत उपयोगी हो सकता है। विशेष रूप से यह प्रसव पीड़ा को कम करने में मदद कर सकता है। इस दौरान सामयिक तरीके से धतूरा का उपयोग बहुत ही उपयोगी होता है। प्रसव के बाद जब बच्‍चा मां के शरीर पर सीधे तौर पर निर्भर नहीं होता है तब इस फल का बहुत ही कम मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए। इसके अलावा इस दौरान दर्द और मानसिक तनाव से राहत पाने के लिए धतूरा के फल का धुंआ भी लिया जा सकता है।
प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाने मे-
आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ानें के लिए धतूरे का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। धतूरा में एस्‍कॉर्बिक एसिड (ascorbic acid) की अच्‍छी मात्रा होती है। इसके अलावा इनमें एंटीऑक्‍सीडेंट (antioxidants) भी उच्‍च मात्रा में होते हैं जिसके कारण यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। इसमें मौजूद औषधीय गुण और घटक रक्‍त की श्‍वेत रक्‍त कोशिकाओं के उत्‍पादन को उत्‍तेजित करता है और शरीर के विभिन्‍न प्रणालियों में मौजूद मुक्‍त कणों को बेअसर करते है। जिससे संक्रमण से लड़ने की शक्ति को बढ़या जा सकता है। इस प्रकार धतूरा का सेवन करने से आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं।
गर्भधारण करने में मदद-
जिन औरतो को गर्भधारण करने में दिक्कत आती है वो धतूरे के फल का 2.5 ग्राम चूर्ण लेकर उसमें आधा चम्‍मच गाय का दूध मिला कर रोज शहद के साथ चाटना चाहिए इससे जल्द गर्भधारण करने में मदद मिलेगी।
अन्य लाभ
धतूरा फल और इसके बीज के अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ इस प्रकार हैं –
आयुर्वेद में धतूरा के बीजों का उपयोग अस्‍थमा और हड्डियों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए किया जाता है।
गठिया की ऐंठन और दर्द के लिए भी धतूरा के बीजों का उपयोग लाभकारी होता है।
धतूरे के बीजों और पत्तियों का उपयोग एंटीमेटिक, एंटीस्‍पास्‍मोडिक, हिप्नोटिक और मादक के रूप में भी किया जाता है।
त्‍वचा के ऊपरी हिस्‍सों में मौजूद फोड़े और फुंसीयों के उपचार के लिए धतूरा के बीजों का इस्‍तेमाल उपयोगी होता है।

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