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बुद्धि तेज करने के उपाय // How to improve memory power ?




अच्छी और तीव्र स्मरण शक्ति के लिए हमें मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ, सबल और निरोग रहना होगा | जब तक हम पूरी तरह से स्वस्थ और सबल नहीं रहेंगे हमारी स्मरण शक्ति कभी भी तेज नहीं हो सकती हैं |
ध्यान रहे कि स्मरण शक्ति हमेशा ध्यान और मन की एकाग्रता पर ही निर्भर होती हैं | हम जिस तरफ जितना अधिक ध्यान केन्द्रित करेंगे उस तरफ हमारी विचार शक्ति उतनी ही अधिक तीव्र हो जायेगी | आप जिस भी कार्य पर जितना अधिक तीव्रता और ध्यान के साथ, स्थिरिता के साथ मन लगायेंगे वह चीज उतनी ही जल्दी हमारे मानस पटल पर, हमारे स्मृति पटल पर अंकित हो जायेगा |



याद शक्ति को बढ़ाने के कारगर और आसान तरीके-

1). सौंफ को मोटा कूट कर उसे छान लें और इसे एक-एक चम्मच सुबह शाम दो बार पानी या दूध के साथ फंकी लें।
2) जीरा, अदरक, और मिश्री को पीसकर उसका पेस्ट बनाकर खाने से याददाशत की कमजोरी दूर होती है।
3) गुलकन्द को रोज दिन में दो से तीन बार खाने से स्मरण शक्ति को लाभ मिलता है।
4) शहद में 10 ग्राम दालचीनी को मिलाकर चाटने से दिमाग तेज होता है।
5) 6 से 7 काली मिर्च में 25 से 30 ग्राम मक्खन और शक्कर मिलाकर रोज खाने से दिमाक तेज होता है और भूलने की बीमारी दूर होती है।



गुर्दे के रोगों का आयुर्वेदिक घरेलू पदार्थों से इलाज


6) गेहूं के पौधे जवारे का रस कुछ दिनों तक रोज पीने से भूलने की बीमारी दूर होती है
7) गाय के घी से सिर पर कुछ दिनों तक मालिश करने से आपकी स्मर्ण शक्ति बढ़ती है।
8) यदि आप अखरोट खाते हैं तो भी आपकी याददाश बढ़ती है। 10 ग्राम किशमिश के साथ 20 ग्राम अखरोट खायें। इससे मानसिक तनाव भी दूर होता है
9) गाजर का हलुआ खाते रहने से दिमाग की कमजोरी दूर होती है।
10). सुबह खाली पेट आंवले का मुरब्बा खाने से दिमागी विकार दूर होता है।
11) रात को 10 बादामों को पानी में भिगोकर सुबह उनका छिलका उतार लें और इसे 10 ग्राम मक्खन और मिश्री के साथ मिलाकर कुछ दिनों तक खाने से दिमाग की शक्ति बढ़ती है।
12) रात को उड़द की दाल को भिगोकर सुबह पीस लें और इसे दूध और मिश्री के साथ खायें। एैसा करने से दिमाग तेज होता है|

एक गाजर लें और लगभग 50-60 ग्राम पत्ता गोभी अर्थात 10-12 पत्ते पत्ता गोभी के अच्छी तरह से काटकर एक प्लेट में रख लें और इस पर हरा धनिया काटकर डाल दें , फिर उसके ऊपर से सेंधा नमक, काली मिर्च कर चूर्ण और नीम्बू का रस डाल कर अच्छी तरह से मिला लें फिर इसे नास्ते में खाए, खूब चबाकर कर खाए और भोजन के साथ एक गिलास छाछ भी पिया करें |
ऐसा करने से आपकी स्मरणशक्ति बहुत अधिक बढ़ेगी, और इसका असर आपको बहुत ही जल्द देखने को मिलेगा |
आवश्यक सामग्री –
शंखावली (शंखपुष्पी) को अच्छी तरह से कूट-पीसकर एक शीशी में भर कर रख ले I 2 बादाम, खरबूजा, तरबूज, पतली ककड़ी, खीरा इन सभी के बीज 5-5 ग्राम लें साथ में 2 पिस्ता, 1छुहारा, 4 छोटी इलायची, 5 ग्राम सौंफ, 1 चमच्च मक्खन, 1 गिलास दूध ले |
लाभ – यह प्रयोग करने से आपके दिमाग की ताकत, तरावट और स्मरण शक्ति को बढाने के लिए बहुत ही बेजोड़ उपाय हैं | साथ ही साथ यह शरीर में शक्ति और स्फूर्ति भी पैदा करता हैं I इसे लगातार 40 दिनों तक प्रतिदिन सुबह नित्यकर्मों से निवृत होकर खाली पेट प्रयोग में लाने से आपको चमत्कारिक लाभ देखने को मिल सकते हैं |
पढ़ते समय सावधानी बरतें –
पढ़ते समय आप हमेशा ध्यान रखे कि आपकी कमर झुकी हुई नहीं होनी चाहिए या फिर आप कभी लेट कर या फिर झुक कर अगर पढने की सोच रहे हैं या फिर आप अगर ऐसा कर रहे हैं तो यह बहुत ही गलत हैं |
अगर आप रात के 9 बजे के बाद भी पढ़ रहे हैं या फिर आपको देर रात तक पढ़ना पड़ता हैं तो आप हर आधे घंटे पर आधा –आधा गिलास ठंडा पानी पीते रहे हैं इससे रात में जागने के कारण होने वाला वात प्रकोप नहीं होगा .| वैसे तो कहा जाता हैं कि रात में 11 बजे से पहले सो जाना चाहिए और सुबह जल्दी उठकर पढायी करनी चाहिए |
पढ़ते समय आलस्य लगने पर चाय या फिर सिगरेट का सेवन कभी न करें यह थोड़ी देर के आलस्य को भगाने के लिए आपको जीवन भर के लिए दिक्कत दे सकती हैं|
धार्मिक उपायों में ज्ञान, बुद्धि, विद्या, वाणी और कला की देवी मां सरस्वती की उपासना न केवल मानसिक शक्ति को मजबूत बनाने वाली, बल्कि उसके बूते मिली दक्षता, निर्णय क्षमता व कला सफलता की नई-नई ऊंचाईयों पर ले जाने वाली मानी गई है।
देवी पूजा के विशेष दिन शुक्रवार को माता सरस्वती की उपासना बहुत शुभ मानी गई है। बुद्धि और सफलता की कामना से हर सुबह भी एक विशेष व छोटा-सा मंत्र द्वारा माता सरस्वती का ध्यान बड़ा मंगलकारी सिद्ध होता है। प्रस्तुत है वह मंत्र और पूजा उपाय -
- सुबह स्नान के बाद सफेद वस्त्र पहन माता सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर की केसरिया या सफेद चंदन, अक्षत, केसरिया या पीले फूल माता सरस्वती को अर्पित करें।
- माता को दूध की खीर, तिल्ली या सूखे मेवों से बने पकवानों का भोग लगाएं। सुगंधित धूप व दीप जलाकर महासरस्वती के नीचे लिखे बीज मंत्र 'ऐं' युक्त इस असरदार मंत्र को आसन पर बैठकर यथाशक्ति अधिक से अधिक बार तुलसी या चंदन की माला से बुद्धि व विवेक से सफलता की कामना के साथ करें -
ॐ ऐं नम:
 पूजा व मंत्र जप के बाद आरती कर देवी को चढ़ाया प्रसाद स्वयं व परिजनों का खिलाएं।

ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के उपचार //How to contro blood pressure



वर्तमान समय में ब्लड प्रेशर के रोगी  पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं। दौड़ती - भागती जिंदगी, फॉस्ट फूड और अनियमित दिनचर्या के कारण यह बीमारी भारत में भी फैल रही है। ब्लड प्रेशर से दिल की बीमारी, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इस बीमारी के रोगी को रोज दवा खानी पड़ती है। यदि आपके साथ भी ये समस्या है तो पारंपरिक चीजों का उपयोग करें। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी ही सामान्य चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर हमेशा नियंत्रण  में रहता है।


1. लहसुन


लहसुन एक ऐसी औषधि है, जो ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए अमृत के समान है। लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाता है और मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। ब्लड प्रेशर के डायस्टोलिक और सिस्टोलिक सिस्टम में भी राहत देता है। यही कारण है कि ब्लड प्रेशर के मरीजों को रोजाना खाली पेट एक लहसुन की कली निगलने की सलाह दी जाती है।


3. मूली


यह एक साधारण सब्जी है। इसे खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। इसे पकाकर या कच्चा खाने से बॉडी को मिनरल्स व सही मात्रा में पोटैशियम मिलता है। यह हाइ-सोडियम डाइट के कारण बढ़ने वाले ब्लड प्रेशर पर भी असर डालता है।


4. तिल


तिल का तेल और चावल की भूसी को एक साथ खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। यह हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी लाभदायक होता है। माना जाता है कि यह ब्लड प्रेशर कम करने वाली अन्य औषधियों से ज्यादा बेहतर होता है।


5. अलसी


अलसी में एल्फा लिनोनेलिक एसिड काफी मात्रा में पाया जाता है। यह एक प्रकार का महत्वपूर्ण ओमेगा - 3 फैटी एसिड है। कई अध्ययनों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है, उन्हें अपने भोजन में अलसी का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए। इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और इसके सेवन से ब्लड प्रेशर भी कम हो जाता है।


6. इलायची


एक रिसर्च के अनुसार इलायची के नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर प्रभावी ढंग से कम होता है। इसे खाने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। साथ ही, ब्लड सर्कुलेशन भी सही रहता है।

7. प्याज


प्याज के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है। इसमें क्योरसेटिन होता है। यह एक ऐसा ऑक्सीडेंट फ्लेवेनॉल है, जो दिल को बीमारियों से बचाता है।



8. दालचीनी


दालचीनी के सेवन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। ओहाई के अप्लाइड हेल्थ सेंटर में 22 लोगों पर अध्ययन किया गया। इनमें से आधे लोगों को 250 ग्राम पानी में दालचीनी दी गई, जबकि आधे लोगों को कुछ और दिया गया। बाद में यह पता चला कि जिन लोगों ने दालचीनी का घोल पिया था, उनके शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा थी और ब्लड सर्कुलेशन भी सही था।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


शहद और दालचीनी से करें रोगों का निवारण.




                                                                                                 
                                                                                     


   शहद इस धरती पर एक ऐसा पदार्थ है जो कभी सडता या खराब नहीं होता है। शहद को कभी उबालना नहीं चाहिये , वर्ना इसमें मौजूद एन्जाईम्स नष्ट हो जाएंगे। लेकिन कुछ उपचार ऐसे हैं जिनमें शहद को गर्म करना पड सकता है। बहुत दिनों तक ठंडे और अंध्रेरे की जगह में रखा रहने पर शहद जम जाता है और क्रिस्टल्स बन जाते हैं । इसके लिये किसी बर्तन में पानी गर्म करके उसमे शहद का पात्र कुछ समय रख दें । शहद पिघल जाएगा।

    अनुसंधान में यह प्रदशित हुआ है कि शहद और दाल चीनी के मिश्रण में मानव शरीर के अनेकों रोगों का निवारण करने की अद्भुत शक्ति है। दुनियां के करीब सभी देशों में शहद पैदा होता है। आज के वैज्ञानिक इस तथ्य को स्वीकार कर चुके हैं कि शहद कई बीमारियों की अचूक औषधि है। पश्चिम के वैज्ञानिक कहते हैं कि शहद मीठा जरूर है लेकिन अगर इसे सही मात्रा में सेवन किया जावे तो मधुमेह रोगी भी इससे लाभान्वित सकते हैं।

 हृदय रोगों में उपयोगी है

शहद और दालचीनी के पावडर का पेस्ट बनाएं और इसे रोटी पर चुपडकर खाएं। घी या जेली के स्थान पर यह पेस्ट इस्तेमाल करें। इससे आपकी धमनियों में कोलेस्टरोल जमा नहीं होगा और हार्ट अटेक से बचाव होगा। जिन लोगों को एक बार हार्ट अटेक का दौरा पड चुका है वे अगर इस उपचार को करेंगे तो अगले हार्ट अटेक से बचे रहेंगे। इसका नियमित उपयोग करने से द्रुत श्वास की कठिनाई दूर होगी । हृदय की धडकन में शक्ति का समावेश होगा। अमेरिका और कनाडा के कई नर्सिंग होम में प्रयोग किये गये हैं और यह निष्कर्ष आया है कि जैसे-जैसे मनुष्य बूढा होता है, उसकी धमनियां और शिराएं कठोर हो जाती हैं। शहद और दालचीने के मिश्रण से धमनी काठिन्य रोग में हितकारी प्रभाव देखा गया है।

संधिवात रोग


     संधिवात रोगी दो बडे चम्मच शहद और एक छोटा चम्मच दालचीनी का पावडर एक गिलास मामूली गर्म जल से लें। सुबह और शाम को लेना चाहिये। कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने शौध में कहा है कि चिकित्सकों ने नाश्ते से पूर्व एक बडा चम्मच शहद और आधा छोटा चम्मच दालचीनी के पावडर का मिश्रण गरम पानी के साथ दिया। इस प्रयोग से केवल एक हफ़्ते में ३० प्रतिशत रोगी संधिवात के दर्द से मुक्त हो गये। एक महीने के प्रयोग से जो रोगी संधिवात की वजह से चलने फ़िरने में असमर्थ हो गये थे वे भी चलने फ़िरने लायक हो गये।


  मूत्राषय का संक्रमण

        ब्लाडर इन्फ़ेक्शन होने पर दो बडे चम्मच दालचीनी का पावडर और एक बडा चम्मच शहद मिलाकर गरम पानी के साथ देने से मूत्रपथ के रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।


 




  कोलेस्टरोल घटाने के लिये

        बढे हुए कोलेस्टरोल में दो बडे चम्मच शहद और तीन चाय चम्मच दालचीनी पावडर मिलाकर आधा लिटर मामूली गरम जल के साथ लें। इससे सिर्फ़ २ घंटे में खून का कोलेस्टरोल लेविल १० प्रतिशत नीचे आ जाता है। और दिन मे तीन बार लेते रहने से कोलेस्टरोल बढे हुए पुराने रोगी भी ठीक हो जाते हैं।

  आमाषय के रोग

        शहद और दालचीनी के पावडर का मिश्रण लेने से पेट दर्द और पेट के अल्सर जड से ठीक हो जाते हैं। जापान और भारत में किये गये रिसर्च में साबित हुआ है कि दालचीनी और शहद के प्रयोग से उदर की गैस का भी समाधान हो जाता है।

मुहासे


तीन बडे चम्मच शहद और एक चाय चम्मच दालचीनी पावडर का पेस्ट बनाएं। रात को सोते वक्त चेहरे पर लगाएं। सुबह गरम जल से धोलें । दो हफ़्ते के प्रयोग से मुहासे समाप्त होकर चेहरा कांतिमान दिखेगा।





त्वचा विकार


दालचीनी और शहद समाना भाग लेकर मिश्रित कर एक्ज़ीमा,दाद जैसे चर्म उद्भेद पर लगाने से अनुकूल परिणाम आते हैं।


  मोटापा निवारण


    एक चाय चम्मच दाल चीनी पावडर एक गिलास जल में उबालें फ़िर आंच से उतारकर इसमें दो बडे चम्मच शहद मिलाकर सुबह नाश्ते से ३० मिनिट पूर्व सुहाता गरम पीयें। ऐसा ही रात को सोने के पहिले करना है। यह उपचार नियमित लेने से शरीर की अनावश्यक चर्बी समाप्त होती है और अधिक केलोरी वाला भोजन लेने पर भी शरीर में चर्बी नहीं बढती है।






केन्सर

    जापान और आस्ट्रेलिया के वैग्यानिकों ने आमाषय और अस्थि केंसर की बढी हुई स्थिति को दालचीनी और शहद का उपयोग से पूरी तरह काबू में किया है। ऐसे रोगियों को एक बडा चम्मच शहद और एक चाय चम्मच दालचीनी के पावडर गरम जल के साथ एक माह तक लेना चाहिये।

  बेहरापन

कम सुनने के रोग में दालचीनी और शहद बराबर मात्रा मे लेने से फ़यदा होता है। दिन में दो बार लेना हितकर है।

  दीर्घ जीवन 

   लंबी उम्र के लिये दालचीनी और शहद की चाय नियमित उपयोग करें। तीन गिलास पानी उबालें । इसमें चार चाय चम्मच शहद और एक चाय चम्मच दालचीनी का पावडर मिलाएं। एक चौथाई गिलास चाय हर तीसरे घंटे पीयें। इससे त्वचा स्वच्छ और झुर्री रहित बनाने में मदद मिलती है। बुढापे को दूर रखने का सर्वोत्तम उपाय है। दीर्घ जीवन की कामना रखने वाले लोग १०० की उम्र में भी थिरकते दिखेंगे।

   प्रतिरक्षा तंत्र  शक्तिशाली बनाता है

शहद और दालचीनी के उपयोग से इम्युन सिस्टम ताकतवर बनता है। खून मे सफ़ेद कणों की वृद्धि होती है जो रोगाणु और वायरस के हमले से शरीर की सुरक्षा करते है। जीवाणु और वायरल बीमारियों से लडने की ताकत बढती है।

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

  सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि


गठिया (संधिवात) रोग की अनुपम औषधि