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संगृहणी के घरेलू उपचार


                                                    
संगृहणी रोग जिसे स्प्रू या सीलिएक डीसीज के नाम से भी जाना जाता है,जठर-आंत्र पथ का विकार है। इस रोग मे छोटी आंत के भीतर की संरचना खराब हो जाती है। यह विकार खासकर ग्लुटेन तत्व वाले खाद्य पदार्थों के उपयोग से उत्पन्न होता है। गेहूं में ग्लुटेन बहुत ज्यादा मात्रा में होता है अत: इससे बने भोजन खाने से यह रोग उग्र हो जाता है। संगृहणी रोग में आंतें भोजन से वसा, पोषक तत्व,केल्सियम,लोह, फ़ोलिक एसीड आत्मसात करने में अक्षम हो जाती हैं। शरीर में विटामिन की कमी होने लगती है फ़लत: मस्तिष्क एवं अन्य महत्वपूर्ण अंगों का सही ढंग से पोषण नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में अन्य रोग भी शरीर में मुकाम लगाने में सफ़ल हो जाते हैं।बच्चों की ग्रोथ रूक जाती है। इस रोग का अभी तक तो कोई सफ़ल एलोपैथिक ईलाज मौजूद नहीं है।वैकल्पिक चिकित्सा में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक औषधियां इस रोग में फ़लदायी सिद्ध हुई हैं। लेकिन खान-पान में बदलाव बहुत जरूरी है। गेहूं से बनी वस्तुओं का सर्वथा त्याग आवश्यक है। चावल, मक्का,जुवार,आलू,और केला में ग्लुटेन तत्व नहीं होता है । अत: भोजन में इन चीजो को प्रथमिकता दें।
लक्षण:-
अतिसार संगृहणी का प्रमुख लक्षण है। पीले रंग की दुर्गंधित दस्त ज्यादा मात्रा वाली होती है। खाना खाते ही दस्त का वेग होता है। बार-बार शोचालय का रूख करना पडता है।
अब मैं घरेलू और पदार्थों से इस रोग की चिकित्सा बताता हूं--
१) भोजन करने से पहिले एक नींबू का रस पानी के गिलास में निचोडकर पीना इस रोग में परम उपकारी सिद्ध हुआ है। दोनों समय के भोजन के पूर्व प्रयोग करें।

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२) दही-चावल या मट्ठा इस रोग में सर्वोत्तम भोजन माना गया है। कुछ ही दिनों में रोग काबू में आ जाता है।
३) तले गले मसालेदार भोजन पदार्थों का त्याग करें।
४) शराब और धूम्र पान इस रोग को बढाते हैं। जीवन शैली में बदलाव करें।
५) चाय,काफ़ी और अन्य केफ़िन तत्व वाली वस्तुओं का परित्याग करें।
६) बेल फ़ल का गूदा ५० ग्राम दिन में ३-४ बार लेने से संगृहणी रोग नष्ट होता है। बेहद फ़ायदेमंद नुस्खा है।
७) अनानास का रस भोजन के बाद पीना अत्यंत गुणकारी है।

८) अदरक का टुकडा नमक लगाकर भोजन से पूर्व खाने से पाचन सुधरता है और संगृहणी में लाभ होता है।
९) इसी तरह लोंग भी पाचन शक्ति बढाता है।
१०) भोजन के बाद बर्फ़ की थेली आधा घंटा पेट पर रखने से भी संगृहणी रोग नियंत्रण में आ जाता है।
११) अंगूर और संतरा का नियमित उपयोग बेहद फ़ायदेमंद है।
संग्रहणी और अतिसार के लक्षण इतने ज्यादा मिलते जुलते हैं कि चिकित्सक भी भ्रम में पड जाता है। याद रखने योग्य है कि संगृहणी में दस्त भोजन के तत्काल बाद और मरोड कुंथन के साथ बडी मात्रा में होता है।
एक बार फ़िर बतादें कि गेहूं का उपयोग किसी भी रूप में न करें

आलू और केला खाते रहें।
चावल,दही.,मट्ठा (खट्टी छाछ) का भरपूर उपयोग करें। दूध भी ले सकते हैं।
शरीर में खून की कमी हो गई हो तो आयरन और फ़ोलिक एसीड की गोलियां लेना उपकारी है।


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