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जामुन फल खाने के स्वास्थ्य लाभ व हानियाँ



जामुन गर्मी के मौसम में पाया जाने वाला एक फल है। जामुन को अंग्रेजी में ब्लैक प्लम (Black plum) कहते हैं। जामुन का फल आमतौर पर काले या गहरे गुलाबी रंग का होता है और बहुत सारे औषधीय गुणों से युक्त होता है। जामुन के फायदे और स्वास्थ्य की दृष्टि से कई विकारों को दूर करने के लिए आयुर्वेद में भी जामुन के फल, छाल, पत्तियों एवं बीजों का उपयोग जड़ी-बूटी के रूप में किया जाता है। ज्यादातर घरों में अच्छी सेहत के लिए लोग जामुन का उपयोग स्नैक्स के रूप में भी करते हैं। जामुन की गुठली के फायदे भी अनेक है जामुन का उपयोग सिरका (vinegar) बनाने में भी किया जाता है जो कई विकारों को दूर करने में इस्तेमाल किया जाता है।
 जामुन के फल में ग्लूकोज, फ्रक्टोज, विटामिन C, A, राइबोफ्लेविन, निकोटिन एसिड, फोलिक एसिड, सोडियम और पोटैशियम के अलावा कैल्शियम, फॉस्फोरस और जिंक एवं आयरन मौजूद होता है। इसके साथ ही जामुन के छाल (bark)और शाखाओं में टैनिन, गैलिक एसिड, रेसिन, फाइटोस्टीरॉल मौजूद होता है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। जामुन के बीज में ग्लाइकोसाइड, जंबोलिन और गैलिक एसिड पाया जाता है जो बीमारियों के इलाज में सहायता करता है।
* जामुन में विटामिन C और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिसकी वजह से जामुन खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है। शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ने से रक्त शरीर के विभिन्न हिस्सों में अधिक ऑक्सीजन का फ्लो होता है जिसकी वजह से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है। जामुन में पाया जाने वाला आयरन रक्त को शुद्ध करने का काम करता है।
*विटामिन A आंखों के लिए लाभकारी होता है और यह जामुन में बहुतायत पाया जाता है। इसके अलावा जामुन में खनिज और विटामिन सी भी पाया जाता है जो त्वचा के लिए भी अच्छा माना जाता है।
*मसूढ़ों एवं दांतों के लिए भी जामुन बहुत फायदेमंद होता है। जामुन की पत्तियों में एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो मसूढ़ों से खून निकलने से बचाने में मदद करती हैं। जामुन की पत्तियों को सुखाकर और इसका पावडर तैयार करके दांतों को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह संक्रमण और मसूढ़ों से खून निकलने को रोकता है। जामुन के पेड़ की छाल कसैली होती है जो मुंह के अल्सर से सुरक्षा प्रदान करती है
 *जामुन में जीवाणुरोधी, संक्रमणरोधी और मलेरिया रोधी गुण पाया जाता है। जामुन के फल में मैलिक एसिड, गैलिक एसिड, ऑक्जैलिक एसिड और बेटुलिक एसिड पाया जाता है। जामुन का फल सामान्य संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसलिए संक्रमण से बचाव के लिए जामुन का सेवन किया जाता है।
*जामुन डायबिटीज के लक्षणों, अधिक पेशाब और भूख को कम करने में मदद करता है। यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स को कम करता है और ब्लड शुगर को सामान्य बनाए रखता है। जामुन की पत्तियां (leaves), छाल और बीज डायबिटीज के इलाज में उपयोग किए जाते हैं। यह इंसुलिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए जामुन के सीजन में इसके फल का सेवन डायबिटीज रोगियों को खूब करना चाहिए।
*जामुन के बीज में प्लैनॉयड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कि एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह शरीर से सिर्फ मुक्त कणों को ही बाहर नहीं निकालता है बल्कि एंटीऑक्सीडेंट एंजाइमों को अधिक प्रभावी बनाता है। यही कारण है कि जामुन शरीर की अशुद्धियों और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और इम्यून सिस्टम के कार्यों को बेहतर बनाता है।
*जामुन की छाल और बीज का पावडर पेट में गैस की समस्याओं को दूर करने में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा यह डायरिया, अपच और पेचिश के इलाज में भी बहुत प्रभावी रूप से काम करता है। इसलिए लोग पेट की इन समस्याओं के निजात पाने के लिए जामुन का उपयोग करते हैं।
*चेहरे के मुंहासे के इलाज में भी जामुन का प्रयोग किया जाता है। जामुन के बीज को पीसकर इसमें गाय को दूध मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें और रात में सोने से पहले इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने के थोड़ी देर बाद चेहरे को पानी से धोकर पोंछ ले। मुंहासे कुछ ही दिनों में दूर हो जाते हैं।
*गुर्दे की समस्या को दूर करने में भी जामुन का उपयोग किया जाता है। अगर आपके गुर्दे में किसी तरह की दिक्कत है तो जामुन के बीज का पावडर तैयार कर लें और इसे दही में मिलाकर खाने से किडनी के स्टोन सहित किडनी की अन्य दिक्कतें भी दूर हो जाती हैं।
*दाद  के इलाज में भी जामुन बहुत फायदेमंद होता है। जामुन के रस को थोड़े से पानी में मिलाकर त्वचा पर लोशन के रूप में लगाने से दाद की समस्या ठीक हो जाती है।
*शरीर की कमजोरी को दूर करने और खून की कमी  की समस्या में जामुन का रस बहुत फायदेमंद होता है। यह यादाश्त भी बढ़ाता और और सेक्सुअल कमजोरी की परेशानी को दूर करता है। एक चम्मच जामुन के रस  में एक चम्मच शहर और एक चम्मच आंवला का रस मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाने से यौनशक्ति बढ़ती है।
सभी चीजों को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह का प्रभाव पड़ता है। इसलिए अगर स्वास्थ्य की बात हो तो जामुन के नुकसान के बारे में भी जानना जरूरी हो जाता है।
*जामुन के बीज, छाल और पत्तियों से बने उत्पादों का सेवन अधिक मात्रा में करने से यह डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर लेवल को घटा सकता है जिससे उनकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
*सर्जरी से कुछ दिन पहले और कुछ दिन बाद तक जामुन का सेवन नहीं करना चाहिए अन्यथा शरीर ब्लड शुगर का स्तर घट सकता है।
*जामुन का सेवन खाली पेट करने से कब्ज की दिक्कत हो जाती है इसलिए यह जरूर ध्यान रखें।
लगातार शरीर में सूजन बना हो या लगातार उल्टी की समस्या हो जामुन नहीं खाना करना चाहिए। अत्यधिक जामुन खाने से शरीर में दर्द और बुखार भी हो जाता है।
दूध पीने के एक घंटे पहले या पीने के एक घंटे बाद जामुन खाने से यह नुकसान करता है।

फास्ट फूड हानिकारक है तंदुरुस्ती के लिए


      आज हर बड़े और छोटे शहरों के हर गली और नुक्कड़ में मेढ़क के छाते की तरह फास्ट फूड जॉइन्ट पनपता जा रहा है। बड़े-बूढ़े और जवान सभी वहाँ भीड़ लगाकर अपने भूख को शांत करने के लिए व्यस्त रहते हैं। यह आश्चर्य की बात है कि ऐसा क्या है जो इन जॉइन्ट को इतना लोकप्रिय बना रहा है। क्या वहाँ का खाना स्वादिष्ट और पुष्टिकारक होता है? फास्ट फूड वास्तविक रूप में है क्या? फास्ट फूड शब्द का मतलब वह खाना जो ज़ल्दी बनता भी है और तुरन्त परोसा भी जा सकता है। फास्ट फूड शब्द को 1951 में मरिअम वेबस्टर के शब्दकोश से पहचान मिली।

सही में फास्ट फूड है क्या?

जो खाना कम समय में तैयार हो सके उसको फास्ट फूड कहते हैं। रेस्तरां या स्टोर में जो खाना पकाया रहता है और सिर्फ गर्म करके परोसा जाता है वही इसका सही अर्थ है। ले जाने के लिए फास्ट फूड पैकेज में भी पाया जाता है।
यह खाना साधारणतः दुकान में पाए जाता हैं, जो स्टॉल/बूथ की तरह होते हैं, जहाँ आश्रय का स्थान या बैठने का स्थान नहीं होता है। उन्हें क्विक सर्विस रेस्तरां भी कहते हैं। फूड स्टफ का रेस्तरां चेन भी होता है जो केंद्र स्थल से फूड स्टफ विशेष विक्रय अधिकार दुकान तक भेजते हैं।

फास्ट फूड प्रतिष्ठित कैसे हुआ

पका हुआ खाना का विक्रय शहरी विकास से संबंधित है। समय आजकल के लिए सबसे महंगा ज़रूरत का समान बन गया है। लोगों के पास बैठकर संपूर्ण खाना खाने का समय नहीं है। विशेषकर काम करनेवालों के लिए जो दोपहर के खाने के वक्त कुछ जल्दी से चबाकर पेट भर लेना चाहते हैं, वे फास्ट फूड ज़्वाइंट में जाना पसंद करते हैं।
आजकल लोग अलग रहना ज़्यादा पसंद करते हैं, संगठित परिवार के जगह। एकल परिवार में दोनों पति-पत्नी काम करते हैं, उनके पास चूल्हे के पास जाकर खाना बनाने का समय कम होता है। ऐसे परिवार बाहर से खाना मँगाकर खाना पसंद करते हैं, जहाँ खर्चा थोड़ा होता है या घर में दे जाने के लिए कुछ नहीं लगता है।

फास्ट फूड आधुनिक युग का विकास नहीं है

मध्य युग से ही फास्ट फूड का पता चलता है, जहाँ वेन्डर द्वारा पका हुआ माँस, फ्लान, पाईस, पेस्ट्रीस, वेफर, वेफल्स, पैनकेक लंदन और पैरिस जैसे शहर में बेचे जाते थे। अविवाहित लोग जो अकेले रहते थे, वे ही ज़्यादातर ग्राहक होते थे, जिन्हें खुद खाना बनाना पड़ता था। वे क्वाटर में रहते थे और वे किचन की सुविधा उपभोग करने में असमर्थ थे उन्हें फास्ट फूड खाकर ही पेट भरना पड़ता था। यात्री और तीर्थयात्री को धार्मिक जगहों पर फास्ट फूड खाकर भूख को संतुष्ट करना पड़ता है। प्रथम विश्व युद्ध के बाद मोटरगाड़ी की सुविधा आम लोगों को मिली, इस तरह कुछ चलयमान रेस्तरां का भी आर्विभाव हुआ।

इस तरह के दुकान में कैसा खाना मिलता है 

ज़्यादातर आधुनिक वाणिज्यिक फास्ट-फूड से संसाधित होते हैं जो मानक उत्पादक के तरीके और पाकशैली में मानक सामग्री डालकर बड़ी मात्रा में पकाये जाते हैं। उनको कार्टन या प्लास्टिक में रैप करके दिया जाता है जिससे उत्पादक का खर्चा कम पड़ता है। मुख्यतः फास्ट फूड का मेनू संसाधित सामग्री से बनता है और केंद्र स्थल से अलग-अलग दुकान में जाता है, जहाँ गरम करके परोसा जाता है, या तो डीप फ्राई करके, माइक्रोवेव में या जल्दी एकत्र करके दिया जाता है। इस तरह उत्पादक को मार्केट में क्वालिटी और नाम बनाए रखने में सहायता होती है ।

फास्ट फूड खाने से हानि और लाभ

वे खाने की बजाय फास्ट फूट का सेवन ज्यादा पसंद करते हैं। आर्युवेद में फास्ट फूड को स्वास्थ्य के लिए जहर कहा गया है। आज इस लेख के जरिये हम आपको फास्ट फूड के सेवन से होने वाले नुकसान और इसके फायदे के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

दिल संबंधी रोग

शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ने के लिए फास्टफूड काफी हद तक जिम्मेदार होता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से दिल संबंधी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। वहीं दूसरी तरफ वजन बढ़ने से भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
 
मोटापे की समस्या

फास्ट फूड में कैलोरी और शुगर की मात्रा ज्यादा होती है। इसके ज्यादा सेवन से आपका वजन बढ़ने लगता है। पोषक तत्वों की कमी के कारण फास्ट शरीर को नुकसान पहुंचाता है। फास्ट फूड का संयमित सेवन आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता।

थकान

फास्ट फूड खाने वाले व्यक्तियों या बच्चों को थकान बहुत जल्दी होने लगती है। फास्ट फूड के सेवन से आपका पेट को एकदम भर जाता है लेकिन इसमें पोषक तत्वों की कमी के कारण पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन आदि नहीं होने के कारण आपका शरीर में विटामिन की कमी हो जाती है। ऐसे में थोड़ा चलने पर ही आपको थकान होने लगती है।

तनाव

यदि आप भूख लगने पर फास्ट फूड के सेवन को तरजीह देते हैं तो यह आपके तनाव का कारण भी बन सकता है। जो लोग अपने जीवन में ज्यादा फास्ट फूड का सेवन करते हैं, उनके तनाव का स्तर उतना ही ज्यादा होता है।

डायबिटीज

फास्ट फूड के सेवन से टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा काफी ज्यादा रहता है। टाइप 2 डायबिटीज फास्ट फूड और जंक फूड के सेवन, बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल, असमय खाने और शारीरिक रूप से कम एक्टिव रहने के कारण होती है।

कैंसर

हाल हीं में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक शुगर और फैट से भरे फास्ट फूड का सेवन करने से पेट से संबंधित कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। एक अन्य शोध के मुताबिक फास्ट फूड प्रोस्टेट कैंसर का भी कारण है।

फास्ट फूड की अच्छाई

मिलने में सुविधाजनक

फास्ट फूड हर गली-मोहल्ले में आसानी से मिलने वाला खाद्य पदार्थ है। अधिकतर रेस्टोरेंट तो फास्ट फूड की फ्री होम डिलीवरी भी करते हैं। हाइवे और रास्ते पर फास्ट फूड रेस्टोरेंट के ड्राइव-थ्रू काउंटर बने हुए हैं, इनसे आप बिना किसी देरी के फास्ट फूड लेकर खा सकते हैं। यदि आप एकदम पेट भरने के लिए कुछ खाना चाहते हैं तो ऐसे में फास्ट फूड एक बेहतर विकल्प है।

रुपये और समय की बचत

फास्ट फूड गली और चौराहों पर आराम से मिलने के कारण पौष्टिक खाने के मुकाबले काफी सस्ता भी होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक घर में बने खाने के मुकाबले फास्ट फूड काफी सस्ता होता है। वहीं समय की बात करें तो फास्ट फूड अन्य भोजन के मुकाबले आसानी से मिल और बन जाता है तो इस कारण इसे खाने से समय की भी बचत हो जाती है।


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