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ज्यादा पसीना होने के के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

                                       
गर्मी के मौसम में पसीना आना शरीर के लिए अच्छा होता है. पसीना आने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहताहै. लेकिन ज्यादा पसीना आना भी सेहत के लिए ठीक नहीं होता.
पसीना लगातार आए तो शारीरिक और मानसिक, दोनों तरह की असहजता पैदा हो सकती है। अत्यधिक पसीने से जब हाथ, पैर और बगलें (कांख) तर हो जाती हैं तो इस स्थिति को प्राइमरी या फोकल हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस से 2-3 प्रतिशत आबादी प्रभावित है, लेकिन इससे पीड़ित 40 प्रतिशत से भी कम व्यक्ति ही डॉक्टरी सलाह लेते हैं। इसके ज्यादातर मामलों में किसी कारण का पता नहीं चल पाता। हो सकता है कि यह समस्या परिवार में पहले से चली आ रही हो। यदि अत्यधिक पसीने की शिकायत किसी डॉक्टरी स्थिति के कारण होती है तो इसे सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। पसीना पूरे शरीर से भी निकल सकता है या फिर यह किसी खास स्थान से भी आ सकता है। दरअसल, हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित व्यक्तियों को मौसम ठंडा रहने या उनके आराम करने के दौरान भी पसीना आ सकता है।
गर्मियों में ज्यादा पसीना आने की वजह से लोग बेहाल हो जाते हैं. कुछ लोगों के पसीने में ज्यादा बदबू होती है जिसकी वजह से पब्लिक प्लेस और दोस्तों के बीच शर्मिंदा होना पड़ता है.




कुछ आसान तरीकों को अपनाकर इस परेशानी से निजात पाया जा सकता है.
* कुछ लोग ज्यादा पसीना आने के डर से कम पानी पीते हैं जिसकी वजह से पसीने में ज्यादा बदबू आती है. पसीनेकी बदबू से निजात पाने के लिए अधिक पानी पीना चाहिए.

* पसीने वाली जगहों के लगातार गीला रहने से बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिसकी वजह से बदबू आने लगती है. इसलिए साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए.
* रोज दिन में एक बार टमाटर का जूस पीने से ज्यादा पसीने से राहत मिलती है.
* पैरों के तलवों में पसीना आने पर पानी में फिटकरी पाउडर डालकर थोड़ी देर उसमें पैर डालकर बैठने से पसीना कम आता है.

* साबुत मूंग को हल्का भूनकर उसमें एक चम्मच बिना उबला दूध मिलाकर पेस्ट बनाकर फेस पर लगाने से पसीना नहीं आता. मूंग फेस की नमी को सोखती है, जिससे पसीना निकलना बंद हो जाता है.
* गर्मी में बाहर जाने से पहले पसीना आने वाली जगहों पर बर्फ रगड़ने से पसीना कम आता है.
* शरीर के जिस हिस्से पर ज्यादा पसीना आता है उस पर आलू के पीस काटकर मलने से पसीना आना कम हो जाता है.
* चेहरे पर ज्यादा पसीना आने पर खीरे के रस को चेहरे पर लगाने से पसीने से राहत मिलती है.
* जिन लोगों को ज्यादा पसीना आता है उन्हें खाने में नमक की मात्रा कम कर देनी चाहिए.




जटामांसी के गुण लाभ उपचार // The benefitsand uses of nard


जटामांसी कश्मीर, भूटान, सिक्किम और कुमाऊं जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में अपने आप उगती है। इसे ‘बालछड़’ के नाम से भी जाना जाता है।
जटामांसी ठण्डी जलवायु में उत्पन्न होती है। इसलिए यह हर जगह आसानी से नहीं मिलती। इसे जटामांसी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसकी जड़ में बाल जैसे तन्तु लगे होते हैं।
सावधानी : जटामांसी का ज्यादा उपयोग करने से गुर्दों को हानि पहुंच सकती है और पेट में कभी भी दर्द शुरू हो सकता है।
मात्रा : 2 से 4 ग्राम जड़ का चूर्ण और काढ़ा 10 मिलीलीटर।

*इसके सेवन से बाल काले और लम्बे होते है। इसके काढ़े को रोजाना पीने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
*मस्तिष्क और नाड़ियों के रोगों के लिए ये राम बाण औषधि है, ये धीमे लेकिन प्रभावशाली ढंग से काम करती है. पागलपन , हिस्टीरिया, मिर्गी, नाडी का धीमी गति से चलना,,मन बेचैन होना, याददाश्त कम होना इन सारे रोगों की यही अचूक दवा है.
*ये त्रिदोष को भी शांत करती है और सन्निपात के लक्षण ख़त्म करती है. चर्म रोग , सोरायसिस में भी इसका लेप फायदा पहुंचाता है.
*जटामांसी की जड़ को गुलाबजल में पीसकर चेहरे पर लेप की तरह लगायें। इससे कुछ दिनों में ही चेहरा खिल उठेगा। 

*जटामांसी चबाने से मुंह की दुर्गन्ध नष्ट होती है। दांतों में दर्द हो तो जटामांसी के महीन पावडर से मंजन कीजिए.
*मेंनोपॉज के समय ये सच्ची साथी की तरह काम करती है. इसका शरबत दिल को मजबूत बनाता है, और शरीर में कहीं भी जमे हुए कफ को बाहर निकालता है. 

*मासिक धर्म के समय होने वाले कष्ट को जटामांसी का काढा ख़त्म करता है. हाथ-पैर कांपने पर या किसी दूसरे अंग के अपने आप हिलने पर जटामांसी का काढ़ा 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम रोज सेवन करें।
*जटामांसी का काढ़ा बनाकर 280 से 560 मिलीग्राम सुबह-शाम लेने से टेटनेस का रोग ठीक हो जाता है। *जटामांसी और हल्दी बराबर की मात्रा में पीसकर मस्सों पर लगायें। इससे बवासीर नष्ट हो जाती है।
*इसे पानी में पीस कर जहां लेप कर देंगे वहाँ का दर्द ख़त्म हो जाएगा ,विशेषतः सर का और हृदय का. 

*इसको खाने या पीने से मूत्रनली के रोग, पाचननली के रोग, श्वासनली के रोग, गले के रोग, आँख के रोग,दिमाग के रोग, हैजा, शरीर में मौजूद विष नष्ट होते हैं. 
*अगर पेट फूला हो तो जटामांसी को सिरके में पीस कर नमक मिलाकर लेप करो तो पेट की सूजन कम होकर पेट सपाट हो जाता है.
*जटामांसी के बारीक चूर्ण से मालिश करने से ज्यादा पसीना आना कम हो जाता है। जटामांसी और तिल को पानी में पीसकर इसमें नमक मिलाकर सिर पर लेप करने से आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है।