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ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के उपचार //How to contro blood pressure



वर्तमान समय में ब्लड प्रेशर के रोगी  पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं। दौड़ती - भागती जिंदगी, फॉस्ट फूड और अनियमित दिनचर्या के कारण यह बीमारी भारत में भी फैल रही है। ब्लड प्रेशर से दिल की बीमारी, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इस बीमारी के रोगी को रोज दवा खानी पड़ती है। यदि आपके साथ भी ये समस्या है तो पारंपरिक चीजों का उपयोग करें। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी ही सामान्य चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर हमेशा नियंत्रण  में रहता है।


1. लहसुन


लहसुन एक ऐसी औषधि है, जो ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए अमृत के समान है। लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाता है और मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। ब्लड प्रेशर के डायस्टोलिक और सिस्टोलिक सिस्टम में भी राहत देता है। यही कारण है कि ब्लड प्रेशर के मरीजों को रोजाना खाली पेट एक लहसुन की कली निगलने की सलाह दी जाती है।


3. मूली


यह एक साधारण सब्जी है। इसे खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। इसे पकाकर या कच्चा खाने से बॉडी को मिनरल्स व सही मात्रा में पोटैशियम मिलता है। यह हाइ-सोडियम डाइट के कारण बढ़ने वाले ब्लड प्रेशर पर भी असर डालता है।


4. तिल


तिल का तेल और चावल की भूसी को एक साथ खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। यह हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी लाभदायक होता है। माना जाता है कि यह ब्लड प्रेशर कम करने वाली अन्य औषधियों से ज्यादा बेहतर होता है।


5. अलसी


अलसी में एल्फा लिनोनेलिक एसिड काफी मात्रा में पाया जाता है। यह एक प्रकार का महत्वपूर्ण ओमेगा - 3 फैटी एसिड है। कई अध्ययनों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है, उन्हें अपने भोजन में अलसी का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए। इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और इसके सेवन से ब्लड प्रेशर भी कम हो जाता है।


6. इलायची


एक रिसर्च के अनुसार इलायची के नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर प्रभावी ढंग से कम होता है। इसे खाने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। साथ ही, ब्लड सर्कुलेशन भी सही रहता है।

7. प्याज


प्याज के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है। इसमें क्योरसेटिन होता है। यह एक ऐसा ऑक्सीडेंट फ्लेवेनॉल है, जो दिल को बीमारियों से बचाता है।



8. दालचीनी


दालचीनी के सेवन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। ओहाई के अप्लाइड हेल्थ सेंटर में 22 लोगों पर अध्ययन किया गया। इनमें से आधे लोगों को 250 ग्राम पानी में दालचीनी दी गई, जबकि आधे लोगों को कुछ और दिया गया। बाद में यह पता चला कि जिन लोगों ने दालचीनी का घोल पिया था, उनके शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा थी और ब्लड सर्कुलेशन भी सही था।

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       हृदय हमारे शरीर का अति महत्वपूर्ण अंग है। हृदय का कार्य  शरीर के सभी अवयवों को आक्सीजनयुक्त रुधिर पहुंचाना है और आक्सीजनरहित दूषित रक्त को वापस फ़ेफ़डों को पहुंचाना है। फ़ेफ़डे दूषित  रक्त को  आक्सीजन मिलाकर शुद्ध करते हैं। हृदय के कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होने पर हृदय के कई प्रकार के रोग जन्म लेते हैं।हृदय संबंधी अधिकांश रोग कोरोनरी धमनी से जुडे होते हैं। कोरोनरी धमनी में विकार आ जाने पर हृदय की मांसपेशियो और हृदय को आवेष्टित करने वाले  ऊतकों को आवश्यक मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता है।यह स्थिति भयावह है और तत्काल सही उपचार नहीं मिलने पर रोगी की शीघ्र ही मृत्यु हो जाती है। इसे हृदयाघात याने हार्ट अटैक कहते हैं।   दर असल हृदय को खून ले जाने वाली नलियों में खून के थक्के जम जाने की वजह से  रक्त का प्रवाह बाधित हो जाने से यह रोग पैदा होता है।
धमनी काठिन्य हृदय रोग में धमनियों का लचीलापन कम हो जाता है और धमनियां की भीतरी दीवारे संकुचित होने से रक्त परिसंचरण में व्यवधान आता है। इस स्थिति में शरीर के अंगों को पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता है। हृदय की मासपेशिया धीरे-धीरे कमजोर हो जाने की स्थिति को कार्डियोमायोपेथी कहा जाता है।हृदय शूल को एन्जाईना पेक्टोरिस कहा जाता है। धमनी कठोरता से पैदा होने वाले इस रोग में ्वक्ष में हृदय के आस-पास जोर का दर्द उठता है।रोगी तडप उठता है।
महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हृदय संबंधी रोग ज्यादा देखने में आते है।   अब हम हृदय रोग के प्रमुख कारणों पर विचार प्रस्तुत करते हैं--
 मोटापा-
धमनी की कठोरता-
उच्च रक्त चाप-
हृदय को रक्त ले जाने वाली खून की नलियों में ब्लड क्लाट याने खून का थक्का जमना-
विटामिन  सी और बी काम्प्लेक्स की कमी होना


 खून की नलियों में कोलेस्टरोल जमने से रक्त प्रवाह में बाधा पडने लगती है। कोलेस्टरोल मोम जैसा पदार्थ होता है जो हमारे शरीर के प्रत्येक हिस्से में पाया जाता है। वांछित मात्रा में कोलेस्टरोल का होना अच्छे स्वास्थ्य के लिये बेहद जरुरी है। लेकिन अधिक वसायुक्त्र भोजन पदार्थों का उपयोग करने से खराब कोलेस्टरोल जिसे लो डॆन्सिटी लाईपोप्रोटीन कहते हैं ,खून में बढने लगता है और अच्छी क्वालिटी का कोलेस्टरोल जिसे हाई डेन्सिटी लाईपोप्रोटीन कहते हैं ,की मात्रा कम होने लगती है। कोलेस्टरोल की बढी हुई मात्रा हृदय के रोगों  का अहम कारण माना गया है। वर्तमान समय में गलत खान-पान और टेन्शन भरी जिन्दगी की वजह से हृदय रोग से मरने वाले लोगों का आंकडा बढता ही जा रहा है।

   माडर्न मेडीसिन में हृदय रोगों के लिये अनेकों दवाएं आविष्कृत हो चुकी हैं। लेकिन कुदरती घरेलू पदार्थों का उपयोग कर हम दिल संबधी रोगों का सरलता से समाधान कर सकते हैं।सबदे अच्छी बात  है कि  ये उपचार आधुनिक चिकित्सा के साथ लेने में भी कोई हानि नहीं है।
१) लहसुन में एन्टिआक्सीडेन्ट तत्व होते है और हृदय रोगों में आशातीत लाभकारी घरेलू पदार्थ है।लहसुन में खून को पतला रखने का गुण होता है । इसके नियमित उपयोग से  खून की नलियों में कोलेस्टरोल नहीं जमता है। हृदय रोगों से निजात पाने में लहसुन की उपयोगिता कई वैज्ञानिक शोधों में प्रमाणित हो चुकी है। लहसुन की ४ कली चाकू से बारीक काटें,इसे ७५ ग्राम दूध में उबालें। मामूली गरम हालत में पी जाएं। भोजन पदार्थों में भी लहसून प्रचुरता से इस्तेमाल करें।
२) अंगूर हृदय रोगों में उपकारी है। जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक का दौरा पड चुका हो उसे कुछ दिनों तक केवल अंगूर के रस  के आहार पर रखने के अच्छे परिणाम आते हैं।इसका उपयोग हृदय की बढी हुई धडकन को नियंत्रित करने में सफ़लतापूर्वक किया जा सकता है। हृद्शूल में भी लाभकारी है।
३)  शकर कंद  भूनकर खाना हृदय को सुरक्षित रखने में उपयोगी है। इसमें हृदय को पोषण देने वाले तत्व पाये जाते हैं। जब तक बाजार में शकरकंद उपलब्ध रहें उचित मात्रा में उपयोग करते रहना चाहिये।
५) आंवला विटामिन सी का कुदरती स्रोत है। अत: यह सभी प्रकार के दिल के रोगों में प्रयोजनीय है।
६)  सेवफ़ल कमजोर हृदय वालों के लिये बेहद लाभकारी फ़ल है। सीजन में सेवफ़ल  प्रचुरता से उपयोग करें।
७)  प्याज हृदय रोगों में हितकारी है। रोज सुबह ५ मि लि  प्याज का रस खाली पेट सेवन करना चाहिये। इससे खून में बढे हुए कोलेस्टरोल को नियंत्रित करने भी मदद मिलती है।
८) हृदय रोगियों के लिये धूम्रपान बेहद नुकसानदेह साबित हुआ है। धूम्र पान करने वालों को हृदय रोग होने की दूगनी संभावना रहती है।
९)  जेतून का तैल हृदय रोगियों में परम हितकारी सिद्ध हुआ है। भोजन बनाने में अन्य तैलों की बजाय ओलिव आईल का ही इस्तेमाल करना चाहिये। ओलिव आईल के प्रयोग से खून में अच्छी क्वालिटी का कोलेस्टरोल(हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन) बढता है।
१०) निंबू हृदय रोगों में उपकारी फ़ल है। यह रक्तवहा नलिकाओं में कोलेस्टरोल नहीं जमने देता है। एक गिलास मामूली गरम जल में एक निंबू निचोडें,इसमें दो चम्मच शहद भी मिलाएं और पी जाएं। यह प्रयोग  सुबह के वक्त  करना चाहिये।
११) प्राकृतिक चिकित्सा में रात को सोने से पहिले मामूली गरम जल के टब में गले तक डूबना  हृदय रोगियों के लिये हितकारी बताया गया है। १०-१५ मिनिट टब में बैठना चाहिये। यह प्रयोग हफ़्ते मॆ दो बार करना कर्तव्य है।
१२) कई अनुसंधानों में यह सामने आया है कि विटामिन ई हृदय रोगों में उपकारी है। यह हार्ट अटैक से बचाने वाला विटामिन है। इससे हमारे शरीर की रक्त कोषिकाओं में पर्याप्त आक्सीजन का संचार होता है।
१३) हृदय रोग से मुक्ति के लिये  ज्यादा शराब और नमक का व्यवहार निषिद्ध माना गया है।
१४) आयुर्वेदिक वैध्य अर्जुन पेड की छाल से बने अर्जुनारिष्ट का प्रयोग करने की सलाह देते हैं।






आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार