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अजवाईन के गुण व स्वास्थ्य लाभ


अजवाइन ऐसी चीज है, जो न सिर्फ आपके खाने का जायका बढ़ाती है, बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी ठीक रखती है। यही कारण है कि भारतीय भोजन में अजवाइन का अधिक इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, पेट में दर्द होने या गैस बनने पर बड़े-बुजुर्ग भी एक चुटकी अजवाइन खाने की सलाह देते हैं। यकीनन, यह सलाह काम आती है और असमय उठे पेट दर्द से राहत मिलती है।
अजवाइन (Ajwain) को हमने हमेशा ही घरों में मसाले के रूप में उपयोग करते हुए देखा है। लेकिन अजवाइन एक औषधीय जड़ी बूटी है इसलिए आपको अजवाइन के फायदे, गुण, लाभ और नुकसान की पूरी जानकारी आपको होना चाहिए। क्‍योंकि भारत जैसे देशों में अजवाइन को विशेष मसाले के रूप में व्‍यापक रूप से उपयोग किया जाता है। अजवाइन के फायदे विशेष रूप से पाचन या पेट संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए जाने जाते हैं। अजवाइन का इस्‍तेमाल कई प्रकार की समान्‍य और गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए किया जाता है।
अजवाइन के स्‍वास्‍थ्‍य लाभों में पेट के दर्द, ऐंठन, आंत्र की गैस, अपच, उल्टी, दस्त, साँस लेने में परेशानी और पेट का भारीपन, स्पर्म की कमी को दूर करने वाली, वीर्य को बढ़ाने वाली, दिल के लिए फायदेमंद, कफ को दूर करने वाली, गर्भाशय को उत्तेजना देने वाली, बुखार को दूर करने वाली, उल्टी, पेट के रोग, जोड़ो मे दर्द इन सब समस्याओं को दूर करने वाली एक बहुत ही अच्छी औषधि है। जो विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के लिए यह एक सामान्य घरेलू उपाय है। यह दस्‍त, कब्‍ज, किड़नी की समस्‍या, सर्दी, खुजली, यौन कमजोरी, मासिक धर्म की परेशानियों आदि को भी ठीक कर सकती है। 
हम सभी अजवाइन का उपयोग मसाले के रूप में करते हैं जबकि आयुर्वेद इसे औषधी मानता है। अजवाइन का वैज्ञानिक नाम ट्रेकिस्पर्मम अम्मी (Trachyspermum ammi) है। अजवाइन का पौधा छोटा झाड़ी की तरह दिखाई देता है जो आमतौर पर हरे रंग का होता है। अलग अलग जगहों पर अजवाइन को कई नामों से जाना जाता है जैसे कि विशप के खरपतवार, थाइमोल के बीज या अजवाइन, तेलुगु में इसे वामु, तमिल में ओमम, मलयालम में अयोधमकम और कन्नड़ में ओम कलुगलु आदि नामों से जाना जाता है। अजवाइन के बीज आकार में छोटे और हल्‍के हरे रंग के होते हैं जो भोजन का स्‍वाद बढ़ाने और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छे होते हैं।
अजवाइन की तासीर
अपने विशेष स्‍वाद और गुणों के कारण अजवाइन का उपयोग विभिन्‍न प्रकार की औषधी और पूरक औषधी के रूप में किया जाता है। अजवाइन की तासीर गर्म होती है जिसके कारण अजवाइन का स्‍वाद तीखा होता है। इन्‍हीं गुणों के कारण ही अजवाइन का उपयोग विशेष रूप से सर्दी से बचने और गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं के लिए किया जाता है।
अजवाईन के स्वास्थ्य लाभ-
स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त करने के लिए अजवाइन का उपयोग कई प्रकार से किया जाता है। अजवाइन के फायदे संक्रामण से फैलने वाली बीमारियों को रोकने में मदद करते हैं। इसके अलावा अजवाइन के फायदे महिला स्‍वास्‍थ्‍य और पुरुषों के लिए भी होते हैं। पुरुषों और महिलाओं में कामेच्‍छा को बढ़ाने के लिए अजवाइन का उपयोग प्राचीन समय से किया जा रहा है। इसके अलावा यह महिलाओं में होने वाले हार्मोन असंतुलन को भी नियंत्रित करने में सहायक होता है। आइए विस्‍तार से जानते हैं मानव स्‍वास्‍थ्‍य के औषधीय अजवाइन के फायदे क्‍या हैं।
यौन कमजोरी दूर करे
आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन के बीज का सेवन यौन कमजोरी को दूर करने में मदद कर सकता है। जो लोग यौन कमजोरी का समना करते हैं उनके लिए यह एक प्रभावी औषधी है। इसके लिए आपको अजवाइन के बीज और कुछ इमली के बीजों को शुद्ध मक्खन में भूनना है। इसके बाद इस मिश्रण को पीस कर एक पाउडर बना लें। इस मिश्रण की 1 चम्‍मच मात्रा 1 गिलास दूध और शहद के साथ नियमित रूप से सेवन करें। यह आपकी यौन इच्‍छा में कमी को दूर कर यौन स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने में मदद करता है। अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त करने के लिए आप इसे प्रतिदिन रात में सोने से पहले सेवन करें।
कब्‍ज को ठीक करे
पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए अजवाइन का उपयोग किया जा सकता है। विशेष रूप से अजवाइन कब्‍ज की समस्‍या का प्रभावी इलाज कर सकती है। अजवाइन के औषधीय गुण पेट में होने वाले असंतुलन का ठीक कर मल त्‍याग को आसान बनाने मे सहायक होता है। यदि आप कब्‍ज रोगी हैं तो अजवाइन के गुणों से लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।
अपच, दस्त और गैस में
100 ग्राम पीसी हुई अजवाइन में 15 ग्राम पिसा हुआ सेंधा नमक मिलाकर चूर्ण बनाएं। इसकी आधा-आधा चम्मच दो बार खाने के बाद पानी में मिलकर पी लें। इस तरह अपच, दस्त और गैस अजवाइन का सेवन से सभी में लाभ होंगे।
डायबिटीज में
रोज सुबह उठने पर अजवाइन का पानी पीने से डायबिटीज की समस्या दूर होती है। सुबह उठकर आप अजवाइन का पानी का सेवन करेंगे तो ऐसा करने से डायबिटीज की समस्या कुछ ही समय बाद दूर हो जाएगी।\
खट्टी डकारों के लिए
अजवाइन का सेवन करने के लिए अजवाइन, सेंधा नमक, हींग और सूखे आवलें को लेकर सबको एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 1 ग्राम की मात्रा को सुबह और शाम के समय शहद के साथ लेने पर जो खट्टी डकार आ रही थी उनका आना बंद हो जाता है।
हृदय के लिए
पारंपरिक रूप से मसाले के रूप में उपयोग की जानेवाल अजवाइन हृदय के लिए लाभकारी होती है। नियमित रूप से उपभोग करने पर यह दिल संबंधी बीमारियों से हमे बचा सकती है। आप अपने हृदय को स्‍वस्‍थ रखने के लिए अजवाइन के बीज को गर्म पानी के साथ सेवन कर सकते हैं। इसके लिए आप आप 1 चम्‍मच अजवाइन लें और इसे 1 गिलास पानी कुछ देर के लिए गर्म करें। फिर इसे ठंडा करके सीधे ही पी लें। अजवाइन का पानी सीने के दर्द को ठीक करने में भी फायदा मिलता है। सीने के दर्द से जल्‍दी राहत पाने के लिए आप 1 चम्‍मच अजवाइन के साथ गुड़ का भी सेवन कर सकते हैं।
महिलाओं के लिए
कैरम बीजों का उपयोग महिला स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में भी मदद करता है। महिलाओं के लिए मासिक धर्म चक्र की समस्‍याएं बहुत ही कष्‍टदायक होती है। लेकिन अजवाइन के औषधीय गुण महिलाओं को मासिक धर्म के समय होने वाली परेशानियों से बचा सकते हैं। अजवाइन के बीज एक तंत्रिका टॉनिक के रूप में कार्य करते हैं। इस तरह से यह महिलाओं को होने वाली मासिक ऐंठन से छुटकारा दिला सकता है। इस तरह से अजवाइन के बीज के फायदे महिलाओं के लिए लाभकारी होते हैं।
स्‍तनपान के लिए
जो महिलाएं स्‍तनपान करा रही हैं उनके लिए अजवाइन का उपयोग फायदेमंद होता है। अजवाइन का उपयोग स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध उत्‍पादन की क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। इसके लिए उन्‍हें अजवाइन और सौंफ के बीज को पानी में मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसके लिए वे 1 चम्‍मच सौंफ और 1 चम्‍मच अजवाइन को रात में 1 गिलास पानी में भिगों दें और फिर अगली सुबह इसका सेवन करें। यह मिश्रण गर्भाशय को साफ करने और दूध उत्‍पादन को बढ़ाने में सहायक होता है। इस तरह से स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अजवाइन के औषधीय गुण लाभकारी होते हैं।
मासिक धर्म में
अगर मासिक धर्म में अधिक दर्द होता हो तो 4 चम्मच कच्ची अजवाइन और 2 चम्मच सेंधा नमक पीसकर, मिलाकर मासिक धर्म के दिनों में आधा-आधा चम्मच तीन बार रोजाना लें। दर्द बंद होने पर इसे लेना छोड़ दें।
अजवाइन और नींबू
पेट संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए प्राचीन समय से ही अजवाइन का उपयोग किया जा रहा है। आप पेट से संबंधित समस्‍याओं को दूर करने के लिए 3 चम्‍मच अजवाइन के बीजों को नींबू के रस में मिलाकर छाया में सुखा लें। जब ये बीज अच्‍छी तरह से सूख जाएं तो आप इन्‍हें पीस कर पाउडर बना लें। इसमें आप अपने स्‍वादानुसार थोड़ा सा काला नमक मिला दें। इसे दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। इस औषधी का सेवन कर आप भूख की कमी, पेट फूलना और अन्‍य पेट की समस्‍याओं को दूर करने में सहायक होता है। इस तरह से आप अपने पेट को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए अजवाइन और नींबू का उपयोग कर सकते हैं।
सर्दी में नाक बंद
अजवाइन में तेल होता हैं जो नाक में जमे बैक्टीरिया को ख़त्म कर देता है। बैक्टीरिया के ख़त्म हो जाने पर नाक खुल जाती हैं। सर्दी में नाक बंद होने पर अजवाइन का इस्तेमाल करने के लिए किसी बर्तन में पानी और तीन चम्मच अजवाइन डालकर उबालें। जब भाप निकलने लगे तब तौलिए से सिर ढककर मुंह को बर्तन के पास जितनी गर्मी सहन हो, उतनी दुरी पर रखें। भाप को नाक से सांस लेते हुए खींचें और मुंह खोलकर सांस बाहर निकालें इस तरह भाप में सांस लेने से नाक खुल जायेगी। और सर्दी के कारण होने वाला सिरदर्द या साइनस का दर्द भी ठीक हो जायेगा।
अजवाइन और गुड़
सर्दी होना शरीर की अशुद्धियों को साफ करने के लिए अच्‍छा है। लेकिन यह आपके स्‍वास्‍थ्‍य और व्‍यक्तिगत जीवन में परेशानियों का भी कारण बन सकती है। लेकिन आप अजवाइन का उपयोग कर सामान्‍य सर्दी के लक्षणों को दूर कर सकते हैं। अजवाइन का उपयोग सर्दी के दौरान आने वाली बलगम को आसानी से साफ कर नाक की रूकावट से बचा सकता है। इसके लिए आपको अजवाइन के बीज और गुड़ को गर्म करें। इस मिश्रण को प्रतिदिन दो बार 2-2 चम्‍मच सेवन करें। यह आपकी सर्दी और स्‍वांश संबंधी समस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर कर सकती है।
दांत और कान दर्द
कान और दांत में होने वाला दर्द बहुत ही कष्‍टदायक होता है। आप इस प्रकार के दर्द को दूर करने के लिए अजवाइन का फायदेमंद उपयोग कर सकते हैं। इस समस्‍या से बचने के लिए अजवाइन तेल की 2 बूंदें ही काफी हैं। दांत के दर्द का उपचार करने के लिए 1 चम्‍मच अजवाइन और नमक के पानी से कुल्‍ला करने से लाभ मिल सकता है। इसके अलावा आप दर्द से छुटकारा पाने के लिए अजवाइन को जलाएं और इसका धुआं मुंह में लें। यह दांत दर्द का प्रभावी इलाज है इसके अलावा आप अजवाइन के पानी का उपयोग माउथ वॉश के रूप में भी कर सकते हैं।
अजवाइन और जीरा
पेट में गैस बनना आमतौर पर सामान्‍य जीवन को प्रभावित करता है। इसका उपचार करने के लिए अजवाइन का प्रयोग फायदेमंद होता है। इसके लिए आप 1 चम्‍मच अजवाइन बीज और 1 चम्‍मच जीरा को मिलाएं। नियमित रूप से अदरक पाउडर के साथ इस मिश्रण का सेवन करने से आपको पेट की गैस से राहत मिल सकती है। यह प्राकृतिक उपचार अपच से संबंधित सभी प्रकार की समस्‍याओं को दूर करने का सबसे अच्‍छा तरीका है। आप भी अजवाइन और जीरा के लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।
अजवाइन की चाय
यदि आप अस्‍थमा रोगी हैं तो अस्‍थमा के लक्षणों को कम करने के लिए अजवाइन की चाय का सेवन करें। प्रभावी तरीके से अजवाइन की चाय अस्‍थमा का इलाज कर सकती है। इसके लिए आप 1 कप पानी में अजवाइन के कुछ बीज लें और इसे उबालें। इसके बाद इसे छानकर इसका सेवन करें। अतिरिक्‍त स्‍वाद और लाभ बढ़ाने के लिए आप इसमें शहद भी शामिल कर सकते हैं। यह तुरंत ही सर्दी से राहत दिलाने में भी सहायक होती है। यह ब्रोंकाइटिस और अस्‍थमा के इलाज में बहुत ही फायदेमंद होती है। इस तरह से आप अस्‍थमा का घरेलू उपचार करने के लिए अजवाइन की चाय का उपयोग कर सकते हैं।
गठिया का उपचार
औषधीय गुणों से भरपूर अजवाइन गठिया का इलाज करने में सहायक होता है। अजवाइन में 2 प्रकार के विशेष गुण होते हैं जो उन्‍हें गठिया के प्रभाव करने में सक्षम बनाते हैं। अजवाइन में एंटीबायोटिक गुण होते हैं जो लालिमा को कम करते हैं और सूजन से राहत दिलाते हैं। दूसरा गुण संवेदनहारी गुण है जो दर्द और सूजन दोनों से राहत दिलाते हैं। आप गठिया के घरेलू इलाज के लिए अजवाइन का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप अजवाइन के बीजों को पीस कर पाउडर बना लें। इस पाउडर को पानी में मिलाकर पेस्‍ट बनायें और अपने जोड़ों में लगाएं। विकल्‍प के रूप में आप टब में अजवाइन बीज डालें और अच्‍छी तरह से बीजों के फूलने के बाद अपने जोड़ों को टब में ड़बोएं। यह गठिया के दर्द और सूजन दोनो से राहत दिलाने में मदद करता है।
कान दर्द
कान दर्द की समस्या से राहत दिलाने में अजवाइन खास भूमिका निभाती है। अजवाइन में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो इस समस्या से राहत दिलाने में मदद करते हैं। अगर आपको कान दर्द की समस्या ज्यादा है, तो दो चम्मच तिल के तेल में दो चम्मच अजवाइन और एक चम्मच लहसुन डालकर तेल के लाल होने तक गर्म करें। फिर इसे ठंडा करके कुछ बूंदें कान में डालें। यह तेल कान में फुंसी होने पर भी लाभ पहुंचा सकता है
अजवाइन की खुराक
अजवाइन एक औषधी है जिसका सेवन हमें औषधी के अनुसार ही करना चाहिए।
क्‍योंकि अधिक या कम मात्रा में सेवन करने से हमें पर्याप्‍त लाभ प्राप्‍त नहीं हो पाते हैं।
इसके लिए हमें निश्चित मात्रा में अजवाइन का सेवन करना चाहिए।
सामान्‍य रूप से स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति को प्रतिदिन 1 से 3 ग्राम अजवाइन का सेवन करना चाहिए।
यदि चिकित्‍सीय खुराक ली जा रही है तो अजवाइन की मात्रा 2 से 4 ग्राम प्रतिदिन होनी चाहिए।
यदि आप अजवाइन के पानी का सेवन करते हैं तो इसकी मात्रा 10 से 100 मिली ग्रा. प्रतिदिन होना चाहिए।
सामान्‍य रूप से अजवाइन का सेवन करने पर यह सुरक्षित है
सावधानी-
लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में अजवाइन के दुष्‍प्रभाव भी हो सकते हैं।
गर्भवती महिलाओं को अजवाइन का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। क्‍योंकि ऐसा माना जाता है कि गर्म तासीर होने के कारण यह गर्भपात का कारण बन सकती है।
बच्‍चों के लिए अजवाइन की सही खुराक निश्चित नहीं की जा सकती है। लेकिन फिर भी आपको सलाह दी जाती है कि बच्‍चों को भी बहुत ही कम या नियंत्रित मात्रा में अजवाइन का सेवन करना च‍ाहिए।
यदि आप खून को पतला करने संबंधी दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो इस दौरान अजवाइन का सेवन न करें। यह आपके रक्‍त को और अधिक पतला बना सकता है।
थाइमोल की अच्‍छी मात्रा होने के कारण कुछ लोगों को अजवाइन का सेवन करने या उपयोग करने से त्‍वचा में जलन, खुजली या चकते आदि की समस्‍या हो सकती है।
अधिक मात्रा में अजवाइन का सेवन करने से चक्‍कर आना, उल्‍टी और मतली आदि की परेशानी भी हो सकती है।
कुछ लोगों को अजवाइन का अधिक मात्रा में सेवन पेट दर्द, मुंह के छाले और जलन आदि का अनुभव करा सकता है।
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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार



शिशु रोगों की घरेलू चिकित्सा नुस्खे



छोटा शिशु जब किसी व्याधि से ग्रस्त होता है, तब बड़ी परेशानी होती है, क्योंकि बच्चा बोल नहीं सकता तो यह बता नहीं पाता कि उसे तकलीफ क्या है। वह सिर्फ रोने की भाषा जानता है और रोए जाता है।
माँ बेचारी परेशान हो जाती है कि बच्चा रो क्यों रहा है, इसे चुप कैसे किया जाए, क्योंकि वह बच्चे को बहलाने और चुप करने की जितनी कोशिश करती है, बच्चा उतना ही रोता जाता है। यहाँ कुछ ऐसी व्याधियों की घरेलू चिकित्सा प्रस्तुत की जा रही है, जो बच्चे के रोने का कारण होती है।


नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 


कान दर्द :

छोटा शिशु कान की तरफ हाथ ले जाकर रोता हो तो माँ अपने दूध की 2-2 बूँद कानों में टपका दे। यदि कान दुखने से बच्चा रोता होगा तो चुप हो जाएगा, क्योंकि कान का दर्द मिट चुका होगा। 

बिस्तर में पेशाब

यह आदत कई बच्चों में होती है और बड़े होने तक बनी रहती है | ऐसे बच्चों को 1 कप ठंडे फीके दूध में 1 चम्मच शहद घोल कर सुबहशाम 40 दिन तक पिलाना चाहिए । और तिलगुड़ का एक लड्डू रोज खाने को देना चाहिए | बच्चे को समझा दें कि खूब चबाचबा कर खाए | शहद वाला 1 कप दूध पीने को दें |

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

सिर्फ 1 लड्डू रोज सवेरे खाना पर्याप्त है | लाभ न होने तक सेवन कराएं और चाहें तो बाद में भी सेवन करा सकते हैं | बच्चे को पेशाब करा कर सुलाना चाहिए और चाय पीना बंद कर देना चाहिए | शाम होने के बाद गरम पेय या शीतल पेय पीने से भी प्रायः बच्चे सोते हुए पेशाब कर देते हैं |


पेट दर्द :

पेट में दर्द होने से शिशु रो रहा हो तो पेट का सेक कर दें और पानी में जरा सी हींग पीसकर पतला-पतला लेप बच्चे की नाभि के चारों तरफ गोलाई में लगा दें, आराम हो जाएगा।

स्त्रियों के योन रोग : कारण लक्षण और उपचार

पेट के कीड़े :

छोटे बच्चों को अकसर पेट में कीड़े हो जाने की शिकायत हो जाया करती है। नारंगी के छिलके सुखाकर कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें, वायविडंग को भी कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें। दोनों को बराबर मात्रा. में लेकर मिला लें।
इस मिश्रण को आधा चम्मच (लगभग 3 ग्राम) गर्म पानी के साथ बच्चे को दिन में एक बार, तीन दिन तक, सेवन करा कर चौथे दिन एक चम्मच केस्टर ऑइल दूध में डालकर पिला दें। दस्त द्वारा मरे हुए कीड़े बाहर निकल जाएँगे।
   छोटे बच्चों की गुदा में चुरने कीड़े हो जाते हैं, जो गुदा में काटते हैं, जिस से बच्चा रोता है, सोता नहीं | मिट्टी के तेल में जरा सी रुई डुबो कर इस फाहे को बच्चे की गुदा में फंसा देने से चुरने कीड़े मर जाते हैं और बच्चे को आराम मिल जाता है |

काग ( कउआ) का गिरना

पहचान – इस रोग में गले के पास अंदर की तरफ जो काग होता है, उसमे सूजन आ जाती है तथा भयानक दर्द होता है |
* यदि प्यास भी बहुत लगती हो तो पीपल की छाल को जलाकर थोड़े पानी में बुझाकर पानी पिलाये | इससे प्यास भी जाती रहेगी और काग को भी लाभ होगा |
*काली मिर्च और चूल्हे की मिट्टी पीसकर अंगूठे पर लगाकर काग को उठा देने से वह फिर से नही गिरता |


दस्त ठीक न होना – 

सौफ को अच्छी प्रकार पीस कर छानकर उसमे शक्कर मिलाकर खिलायें | इससे दस्त साफ़ जायेगा|

खांसी – 

 दानेदार मक्के का भुट्टा जलाकर उसमे शहद या नमक मिलाकर खिलाने से खांसी ठीक हो जाती है |

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बच्चों का सूखा रोग–

आज कल यह रोग बच्चो में प्राय: देखा जाता है | इसके लिए अद्भुत औषधि यह है कि रविवार या मंगलवार के दिन बंन भोगी की पत्तिया उखाड़ लावे और उस पत्ती को दोनों हाथों से मल-मल के उसके अर्क को बच्चो के कानो में चार बूंद टपकावे तथा सिर के तालू पर, हाथ पैर के उंगलियों के नहो में तथा पैर के तालू में अच्छी तरह लगा दे और थोड़ा पूरे शरीर में लगा दे | इससे सुखा रोग अवश्य दूर हो जाएगा |

बच्चों की मिर्गी –

 बारह दिन तक काली मिर्च गाय के दूध में भिगोवे रखे फिर निकाल कर सुखा दे | जब मिर्गी का दौरा हो तो पानी में घिसकर उसका हुलास दे | इससे दौरा बंद हो जायेगा |

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बच्चों की आँखों में सुर्खी–

 फिटकरी भूनकर तीन मासा फिटकरी में एक तोला गाय का मक्खन मिला दे | मक्खन को पानी से सात बार धो लें | सोते समय आँखों पर दो-तीन बार लेप करे | इससे सुर्खी जाती रहेगी और आंख साफ़ हो जायेगी|
बच्चों का डब्बा रोग

1. मूंगे को गरम करके दोनों भौहों के बीच में दाग देने से तुरंत फायदा होता है |
2. पेट के ऊपर बकायन के पत्ते गरम करके बाँधने से शीघ्र लाभ होगा |
3. पेट के ऊपर अंडी का तेल मलने से बच्चे की पसली चलनी बंद हो जाएगी |

काली खांसी – 


तवे की स्याही खुरच कर पानी में मिलाने से काली खांसी जाती रहती है|
बुखार – दिन में तीन बार एक एक रत्ती सत्त-गिलोय दें | इससे हर प्रकार का बुखार जाता रहेगा |

बच्चों के दांत – 

शहद के साथ भुना हुआ सुहागा मिलाकर मसूढ़ों पर मलने और चटाने से दांत आसानी से निकलते है |
*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*