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करंज के गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग//Ayurvedic treatment using karanj

    

    करंज (Millettia Pinnata) विशाल ,अनेक शाखाओं से युक्त छाया दार पेड़ है. इसकी ऊँचाई और चौडाई दोनों ही खूब होती हैं. इसके कारण ये घनी छाया देते हैं. ये अक्सर नदी, तालाबों के किनारे देखने को मिलते है. ये मुख्यरूप से आद्र भूमी पर पाए जाते हैं.
करंज का वृक्ष जंगलोँ मेँ होता है। इसकी छाया घनी और ठंडी होती है। करंज की फली लंबी होती है और इसमेँ लंबे व मोटे बीज होते हैँ।
करंज के विभिन्न नाम:
संस्कृत- करंज
हिन्दी- कंजा या कटजरंजा
लैटिन- पोनगेमियालेवा
अंग्रेजी- स्मघलिव्ड पोनगेमिया


गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग


गुजराती- कणझी
मराठी- करंज
बंगाली- डहरकरंज
इस पर कांटे बहुत होते हैं. इनके बीजों का आवरण कौड़ी के समान सख्त होते हैं. कंटीले होने के कारण लोग इन्हें बाग़ और खेतों की मुंडेरों पर लगाते हैं.
इसके बीजों से तेल निकला जाता है. इसी का मुख्य प्रयोग होता है. इस का फल वात, पित्त, कफ, प्रमेह, दिमांगी रोग, को खतम करता है. इसका तेल योनीदोष, गुल्म, उदावर्त, खुजली, नेत्र रोग, घाव आदि में उपयोग होता है.

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करंज के  औषधीय उपयोग:

*. करंज के बीजोँ का तेल निकालकर चेहरे पर लगाने से मुहाँसे ठीँक होते हैँ।
* दमा के रोगियोँ को करंज के बीजोँ का काढा बनाकर पीना चाहिये।
* करंज का तेल खुजली, जख्म, कोढ व त्वचा के अन्य रोगोँ मेँ लाभकारी होता है।
*यदि चूहा काट लिया हो तो करंज के बीज व छाल एक साथ पीसकर लेप करेँ। इससे चूहा का जहर उतर जाता है।

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* करंज के बीजोँ को गर्म पानी मेँ घिसकर थोडा सा गुड मिलाकर नाक से खीँचे। इससे माइग्रेन ठीँक होता है।
* करंज के बीज को सेँककर टुकडा करके खाने से उल्टी बंद हो जाती है।

करंज (Millettia Pinnata) के आयुर्वेदिक उपयोग

अपस्मार में-

 गुड़ के साथ इस का चूर्ण फायदा देता है.

शूल में-

 जो लोग धूम्रपान करते हैं. वो इस विधि को कर सकते हैं. इस के बीजों के साथ तम्बाकू का सेवन करने से शूल का दर्द कम हो जाता है.

कुष्ठ में-
  इसकी छाल को लगाना और इसका तेल लगाना दोनों ही लाभ देते हैं.

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अंडवृद्धि पर- 

इसके बीजों को पीस कर लगाने से अंडवृद्धि सूजन, गांठ तथा गण्डमाला पर आराम मिलता है.

पित्त पर-

 इस की नर्म छाल को या इसका जूस पिलाने से आराम आता है.

करँज तेल-

तीक्ष्ण, गरम, कृमिनाशक, रक्तपित्तकारक, तथा नेत्र रोग, वात पीडा, कुष्ठ, कण्डू, व्रण तथा खुजली को नष्ट करता है। इसके लेप से त्वचा विकार दूर होते हैं घृत करँज - चरपरा गर्म तथा व्रण, वात, सर्व प्रकार के त्वचा रोग, अर्श रोग, तथा कुष्ठ रोग को नष्ट करता है।

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