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करेले की पत्तियां भी हैं गुणो का खजाना


भारत में हर तरह की साग और सब्जी उगाई जाती है, और उनका पूरी तरह से इस्तेमाल किया जाता है। फिर चाहे वह पेड़ से मिला फल हो या फिर उसकी पातियाँ। इसी तरह एक सब्जी है करेला जो खाने कड़वा होता है लेकिन यह हमारे शरीर के लिए उतना ही हैल्‍दी भी होता है। करेला एक औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। करेले की तासीर खुश्क होती है। करेला भूख और पाचनशक्ति को भी बढ़ाता है
तो सोचिये अगर करेले में इतने गुण हैं तो इसकी पत्तियां कितनी फायदेमंद होंगी।इसके पत्तो में विटामिन ए पाया जाता है और हाइपोग्लाइसेमिक के गुण होते हैं जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है। 
ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखना
 डायबिटीज के लिए करेले की पत्तियां रामबाण इलाज है। इसकी पत्तियां खाने से शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है। क्योंकि इसमें विसिन और पॉलीपेप्टाइड पी जैसे गुण पाये जाते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखता है।
मलेरिया से बचाये
 करेले की पत्तियों के सेवन से मलेरिया का उपचार करने में मदद मिलती है। क्योंकि जितने भी कड़वे पत्तों वाले साग होते हैं वे मलेरिया जैसे रोगों से बचते हैं। इसमें एंटी इन्फ्लैमटॉरी और अस्ट्रिन्जन्ट के गुण होते हैं जिससे मलेरिया के बुखार को कम किया जा सकता है।
दाद का इलाज करे
करेले के पत्ते का रस और गुलाब जल मिलाकर लगाने से दाद तुरन्त ठीक हो जाता है। क्योंकि इसमें शक्तिशाली एंटी-इन्फ्लमेशन गुण होते हैं जो दाद का संक्रमण बढ़ने नहीं देता है।
प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करे
करेले की पत्तियों में विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स अच्छी मात्रा में पाया जाता है। जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत होती है। विटामिन ए और विटामिन सी अच्छे एंटी ऑक्सीडेंट्स हैं जबकि विटामिन बी आपके शरीर के चयापचय ठीक रखता है।
एचआईवी का इलाज
करेले की पत्तिओं में प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ और निरोगी रखने के गुण होते हैं। इसीलिए यह एचआईवी के वायरस को खत्म करने में सहायक है। क्योंकि एचआईवी का वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म करदेता है। जिससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
एंटी-माइक्रोबियल गुण
इसमें एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं ऐसी बहुत सारी छोटी छोटी बीमारियां हैं जो मूलतः बैक्टीरिया, फंगल या वायरस से होती हैं। करेले के पत्तिओं में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं जो किसी भी तरह के त्वचा और पेट सम्बन्धी बीमारी नहीं होने देती हैं।
उच्च रक्तचाप को रोके
उच्च रक्तचाप में करेले की पत्तियों को रोज़ खाने से रक्तचाप सामान्य रहता है। इनमे पोटैशियम और कैल्शियम पाया जाता है। पोटैशियम और कैल्शियम की मात्रा बढ़ाकर रक्तचाप कम किया जा सकता है। ये मिनरल्स उच्च रक्तचाप के जिम्मेदार सोडियम का स्तर बढ़ने से किडनी को होने वाले नुक्सान से बचाव करते हैं।
विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर करे
खून में गंदगी होने से सबसे ज्यादा वायरस हमारे शरीर को बीमारी फैलते हैं। जिसमे सर दर्द, कमजोरी, थकान, एलेर्जी की समस्या आम है। करेले की पत्तिओं का रस पीने से खून साफ़ होता है। इसके सेवन से शरीर स्वस्थ होने के साथ-साथ, त्वचा के मुहांसे, दाग-धब्बे की समस्या भी ख़त्म हो जाती है।करेले की पत्तियों के इस्तेमाल से आप अपनी पिम्पल्स की समस्या से भी छुटकारा पा सकती है,इसके लिए करेले के पत्तों को बारीक पीसकर पेस्ट बना ले,अब इसमें थोड़ी सी हल्दी मिला लें। इस पेस्ट को मुंहासों वाली जगह पर लगाएं। थोड़ी देर बाद धो लें हफ्ते में 3-4 बार ऐसा करने से मुंहासों से छुटकारा मिलेगा।
चेहरे में चमक
अगर आप अपने चेहरे में चमक लाना चाहती है तो इसके लिए करेले के पत्ते लेकर 3-4 मिनट तक पानी में डालकर उबाल लें। उबलने के बाद इन पत्तो को पानी से निकाल कर पीस ले और बारीक पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट में थोड़ा बेसन मिलाएं और चेहरे पर लगाएं। इसे अपने चेहरे पर लगाए और 15 मिनट बाद चेहरा धो लें अब इस फेस पैक से चेहरे पर चमक आएगी।
हो सकता है ब्‍लड शुगर डाउन
करेले की पत्‍तियां मधुमेह कंट्रोल करने में लाभकारी होती हैं लेकिन इसे मधुमेह की दवाई के साथ नहीं लिया जाना चाहिये क्‍योंकि इससे ब्‍लड शुगर काफी गिर सकता है।
प्राकृतिक गर्भनिरोधक पीरियड के पांचवें दिन करेले के पत्तों का रस पीने से गर्भ नहीं ठहरता है। क्योंकि इसमें एक तरह का प्रोटीन होता है जिससे पुरुष और महिलाओं में गर्भनिरोधक के रूप में काम करता है।
कैंसर का उपचार करे
 रोजाना करेले की पत्तियां खाने से किसी भी तरह के कैंसर को ठीक किया जा सकता है। कैंसर से कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। करेले की पत्तियाँ में मौजूद एंटी- कैंसर कम्पोनेंट्स कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं में ग्लूकोस का पाचन रोक देते हैं जिससे इन कोशिकाओं की शक्ति ख़त्म हो जाती है और कैंसर की संभावना भी।
एलर्जी भी हो सकती है इससे कई लोंगो को एलर्जी भी हो सकती है, इसलिये इसे थोड़ी सावधानी से लेना चाहिये।
गर्भवती महिलाएं ना लें इसे प्रेगनेंट महिलाओं को लेने से मना किया जाता है क्‍योंकि इससे मिसकैरेज हो सकता है।

सोयाबीन खाने के फायदे और नुकसान

                          
प्रोटीन और कई पोषक तत्वों से भरपूर सोयाबीन और उसके व्यंजनों को आप मजेदार स्वाद के लिए जरूर खाते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सोयाबीन सेहत और सौंदर्य से जुड़े बेहतरीन फायदे भी दे सकता है।
सोयाबीन गुणों का खजाना हैं यह बात पूरी तरह सच हैं लेकिन हर एक चीज को उपयोग करने का एक तरीका होता हैं और अगर उसे सही तरीके से उपयोग ना किया जाये तो वह फायदे के साथ साथ नुकसान भी कर सकती हैं आईए यहाँ जाने सोयाबीन के फायदे उपयोग और नुकसान (Soybean benefits uses and side effects in Hindi) के बारे में। सोया प्रोटीन और आइसोप्लेवोंस से भरपूर डाइट होती हैं जिसके सेवन से हडडियों को कमजोर होने के खतरे से बचाया जा सकता है| सोयाबीन से बनी चीजो में आइसोप्लेबोंस नामक रसायन होता है जिससे महिलाओ को आस्टियोपोरेसिस के खतरे से बचाया जा सकता हैं|
यहाँ जाने सोयाबीन को उपयोग करने का सही तरीका क्या है।
सोयाबीन एक प्रकार का बीज होता हैं जिसको आप गैहू के साथ में पिसवाकर या भिगोकर खाने के काम में ले सकते है|
सोयाबीन को आप रात भिगोने के बाद उबाल के भी खाने में उपयोग ले सकते है।
गेहूँ के साथ भी पिसवाकर रोटियां बना के खा सकते हो सोयाबीन को पानी में भिगोकर पानी से निकालकर सुखाकर आटा पिसवाकर गेहूँ के आटे में भी मिलाकर तैयार कर खाया जा सकता है।

सोयाबीन खाने के फायदे
उच्च रक्तचाप में
सोयाबीन के फायदे अनेक है और अगर आप उच्च रक्तचाप ग्रसित हैं सोयाबीन उच्च रक्तचाप को कम करने में लाभदायक होता है इसके साथ साथ वो रक्तचाप को बढने भी नहीं देता है। रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए आप कम नमक के साथ भुना हुआ सोयाबीन खा सकते है नमक के साथ साथ आप काली र्मिच भी डाल के भी सेवन कर करते है सोयाबीन 5-6 प्रतिशत उच्च रक्तचाप को कम करता है। तले हुए सोयाबीन का सेवन यदि महिलाएं करे तो उनको उच्च रक्तचाप में निजात प्राप्त होता है।
एनीमिया में
एनीमिया यानी की शरीर में रक्त की कमी , और यह एक भयानक रोग है जिसका इलाज सोयाबीन में छुपा हुआ है | आप रोजाना सोयाबीन के तेल से बनी सब्जी का सेवन कीजिए या फिर इसके दूध का सेवन कीजिए जिससे आपके शरीर में रक्त की भरपूर मात्रा होगी और आपको एनीमिया से मुक्ति मिलेगी |गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भावस्था में भी महिलाओं को सोयाबीन सेवन करना चाहिए| सोयाबीन में आयरन की मात्रा पायी जाती हैं यह खून बढ़ाने में भी सहायक होता हैं! सोयाबीन से बनी चीजों में आईसोप्लेबोंस नामक रसायन होता है जिससे महिलाओं को अस्टियोपोरेसिस के खतरे से बचाया जा सकता हैं|

मासिक धर्म में
महिलाओं के मासिक धर्म बन्द होने से शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा कम होने लगती है जिससे घुटनों में दर्द पेट का भारी होना कमर में दर्द रहने लगता है| इस स्थिति में महिलाओं के लिए सोयाबीन बहुत ही लाभकारी होता है। कुछ समय तक सोयाबीन का उपयोग करने से महिलाओं की समस्याएं कम होती है। इसके साथ सोयाबीन का सेवन मासिक धर्म में होने वाले सूजन, कमर में दर्द पेट में दर्द जैसी समस्याओं में निजात दिलाता है।
हड्डियों की मजबूती
सोयाबीन हड्ड‍ियों के लिए लाभदायक है। यह हड्ड‍ियों को पोषण देता है जिससे वे कमजोर नहीं होती और हड्डी टूटने का खतरा भी कम होता है। इसका सेवन हड्ड‍ियों की सघनता को बढ़ाने में सहायक है।
सोयाबीन में मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम हमारे शरीर में जाकर हमारी हड्डियों की मजबूत बनाता है | अगर आपके शरीर में कैल्शियम को कमी है या फिर आपकी हड्डियाँ कमजोर है तो आप इसका सेवन रोजाना करे जिससे आराम मिलेगा |
सोयाबीन के तेल के फायदे
Soybean सोयाबीन के खाने फायदे से तो अब आप अच्छी तरह वाकिफ हो ही चुके होगें। सोयाबीन से बने तेल के बारे में ज्यादातर घरों में सब्जी पराठें आदि बनाने में सोयाबीन का तेल उपयोग में लिया जाता है यह हदृय रोगियों के साथ साथ यह सभी के लिए भी लाभदायक है। सोयाबीन का तेल सोयाबीन के बीजों से निकाला जाता है। सोयाबीन का तेल अन्य खाद्य तेलों की उपेक्षा हमारे शरीर के लिए ज्यादा लाभकारी होता है। चिकित्सक भी आजकल सोयाबीन से बने तेल का ही उपयोग करने की सलाह देत है। हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने में मानसिक तनाव को कम करने में लाभदायक है तथा नियमित सेवन से याददाश्त बढाने में मदद मिलती है।
मधुमेह के रोगियों को सोयाबीन के तेल से बनी चीजों का ही सेवन अत्यधिक लाभदायक है। सोयाबीन के तेल में विटामिन ई अधिक पाया जाता है। हम गर्मी में धूप में बाहर निकलते है धूप की तेज किरण हमारी त्वचा में जलन पैदा करती है सोयाबीन के तेल उपयोग करने से त्वचा की जलन से छूटकारा मिलता है।
गठिया रोग
Soybean सोयाबीन से बना दूध व रोटियां गठिया रोग में भी लाभदायक होता हैं|

मधुमेह रोग में
मुधमेह रोगियों को सोयाबीन का सेवन करने से मूत्र सम्बन्धित परेशानी से निजात मिलता है मधुमेह रोगी को सोयाबीन से बनी रोटी आदि का सेवन करना लाभदायक है।
अंकुरित सोयाबीन
सोयाबीन को अंकुरित करके खाना भी हमारी सेहत के लिए लाभदायक होता है! खून को बढ़ाने पेट की बीमारियों को ठीक करने हमारे शरीर में आयरन की मात्रा को बढ़ाने व वजन बढाने में भी अंकुरित सोयाबीन फायदेमंद होता है।
शारीरिक विकास में
अगर आपका शारीरिक विकास नहीं हो रहा है या नाखून बाल आदि नहीं बढ रहे है तो सोयाबीन का सेवन इनके विकास में भी सहायक है। सोयाबीन मिर्गी याददाश्त बढ़ाने व दिमागी कमजोरी को दूर करता है।
सोयाबीन खाने के नुकसान
हर चीज की अति बुरी होती है सोयाबीन का ज्यादा उपयोग भी हमारे शरीर के लिए लाभदायक होने के साथ साथ हानिकारक भी होता है। सोयाबीन खाने के लाभ के साथ साथ सोयाबीन खाने के कुछ नुकसान भी होते है आईए अब हम सोयाबीन के नुकसान के बारे में भी जाने|
दिल की बिमारी वाले लोगो को सोयाबीन का उपयोग कम करना चाहिए या सीमित मात्रा में करना चाहिए।
सोयाबीन में टांस फैट होता है जो की हाई कालेस्ट्राल और दिल की बीमारियों को बढ़ाता है।
सोयाबीन के अधिक सेवन से शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है।
यदि आप फैमली प्लानिंग करने के बारे में सोच रहे है या फैमली प्लानिंग करना चाहते है तो सोयाबीन के सेवन से बचे क्योंकि सोयाबीन स्पर्म की संख्या को कम करता है।
सोयाबीन  की ज्यादा मात्रा से सेक्स प्रॉब्लम हो जाती है और उनके हार्मोन, लिबिडो पावर, स्‍पर्म और प्रजनन पॉवर का स्तर प्रभावित हो सकता है।
गुणों का खजाना होने के साथ साथ हानिकारक भी होता है। सोयाबीन के अधिक सेवन वजन भी बढ़ता है व अधिक सेवन से किडनी की समस्या वाले लोगो को इसके सेवन से बचना चाहिए|

तन्दुरस्त रहने के सरल उपाय


सेहत मंद रहने के सरल उपचार 


*बेसन, मैदा और व्हाइट ब्रेड की जगह सोयाबीन, सूजी और ब्राउन ब्रेड का उपयोग करें।
बाजार में मिलने वाले कृत्रिम व डिब्बाबंद पदार्थों के सेवन से बचें। इनमें उपयोग किए गए 'प्रिजरवेटिव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं ।
*यदि हरी सब्जियों और अंकुरित चीजों का प्रयोग सामान्य तरीके से करने से घर के सदस्यों उसे खाने में रुचि नहीं लेते तो इन्हीं वस्तुओं का प्रयोग अलग तरीके से किया जा सकता है। मसलन-वेजीटेबल पराठा या स्प्राउट चीला या डोसा।
*बवासीर (पाइल्स) में रक्त आता हो तो नींबू की फांक में सेंधा नमक भरकर चूसने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।
आधे नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर चाटने से तेज खाँसी, श्वास व जुकाम में लाभ होता है।
शहद ज्ञान तंतुओं की उत्तेजना को शांत करता है। इससे हृदय की अधिक धड़कन सामान्य हो जाती है। उच्च रक्तचाप के रोगियों की रक्तवाहिनियों को यह शक्ति देता है।
*एक नींबू के रस में तीन चम्मच शकर, दो चम्मच पानी मिलाकर, घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद अच्छे से सिर धोने से रूसी दूर हो जाती है व बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम दो बार नित्य एक महीना पीने से पथरी पिघलकर निकल जाती है।
*नींबू को तवे पर रखकर सेंक लें (दो भाग करके)। उस पर सेंधा नमक डालकर चूसें। इससे पित्त की दिक्कत खत्म होती है।
*मिशिगन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में कहा गया है कि चॉकलेट का मस्तिष्क पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है, जैसा अफीम का पड़ता है।
*दर्द निवारक दवाइयों के लंबे समय तक इस्तेमाल करने से न सिर्फ लीवर और किडनी के खराब होने का खतरा रहता है बल्कि इनसे दिल के दौरे पडऩे तथा ह्रदय संबंधित समस्याएं होने का खतरा भी हो सकता हैं1
नींद नहीं आने की समस्या मधुमेह और दिल संबंधी बीमारी की आशंका बढ़ा सकती है।
*दिन भर में में कम से कम आठ से दस ग्लास पानी पिएं। जितना पानी आप पिएंगें उतना ही आपके दांत साफ होंगें। इसके अलावा यह चाय, कॉफी, शराब, सोडा आदि के दागों को भी दांतों से मिटाने में कारगर साबित होगा।
अपने खाने में फल और सब्जी शामिल करें। सेब, खीरा, गाजर आपके दांतों को प्राकृतिक रूप से साफ करते हैं। यह आपके दांतों में फंसे खाने को भी निकालते हैं और मसूड़ों की समस्या दूर होती है। 

*खाने के बाद पनीर का टुकड़ा खाने से आपके दांत चमकदार रहते हैं।
*जूस और सोडा पीने के बाद ब्रश नहीं करना चाहिए। हो सके तो कॉफी और वाइन स्ट्रॉ से पिएं। इससे इनका सीधा संपर्क आपके दांतों से नहीं हो पाएगा और आपके दांत हमेशा चमकते रहेंगें।
*अदरक के रस में या अडूसे के काढ़े में शहद मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है।
*प्याज का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर चाटने से कफ निकल जाता है तथा आंतों में जमे विजातीय द्रव्यों को दूर कर कीड़े नष्ट करता है। इसे पानी में घोलकर एनीमा लेने से लाभ होता है।
*हृदय की धमनी के लिए शहद बड़ा शक्तिवर्द्धक है। सोते वक्त शहद व नींबू का रस मिलाकर एक ग्लास पानी पीने से कमजोर हृदय में शक्ति का संचार होता है।
*सूखी खाँसी में शहद व नींबू का रस समान मात्रा में सेवन करने पर लाभ होता है।
अदरक का रस और शहद समान मात्रा में लेकर चाटने से श्वास कष्ट दूर होता है और हिचकियां बंद हो जाती हैं।
कब्जियत में टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद डालकर सेवन करें, लाभ होगा।
*10 मिनट में हो सकते हैं फिट-
कुछ लोगों की यह धारणा है कि चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए हर दिन घंटों पसीना बहाना पड़ता है, लेकिन हाल ही में जर्मनी में हुए शोधों से पता चला है कि यह धारणा सही नहीं है। इस शोध के मुताबिक 10 मिनट का व्यायाम भी आपको तरोताजा बनाये रखने के लिए काफी है। हो सकता है कि 10 मिनट के व्यायाम से आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम न हो, लेकिन 10 मिनट की एक्सरसाइज आपमें जोश भर देगी और आप सारा दिन खुद को तरोताजा महसूस करेंगी। इसका असर आपके काम पर भी पड़ेगा यानी 10 मिनट की एक्सरसाइज आपके काम करने की क्षमता को बढ़ायेगी।
*हर दिन 10 मिनट का व्यायाम बीमारियों से लडऩे की शक्ति को 40 फीसदी तक बढ़ाता है।
दफ्तर की सीढिय़ां चढऩा, उतरना तथा पार्किग स्थल से दफ्तर तक पैदल चलना भी तरोताजा रखने वाला व्यायाम है।
*सुबह-सुबह 10 मिनट की जॉगिंग कई घंटों तक आपमें चुस्ती बरकरार रख सकती है। यह ध्यान रखें कि *व्यायाम को मौज मस्ती में करें यानी उसे बोझ समझकर न करें।
*बुखार, थकान, कमजोरी महसूस करने की स्थिति में व्यायाम से बचें।
*ध्यान रखें, जहां व्यायाम करें वहां शांति हो, जगह साफ-सुथरी हो, प्राकृतिक हवा हो और पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी हो।
*व्यायाम का समय बढ़ाना हो तो धीरे-धीरे बढ़ाएं, एकदम से समय बढ़ाने से थकान, कमजोरी की शिकार हो सकती हैं।
*व्यायाम के समय बातचीत न करें, व्यायाम के समय चुप रहने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।