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शहद खाने के स्वास्थ्य लाभ



शहद या मधु हमेशा से रसोई में इस्तेमाल होने वाला एक स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ रहा है, साथ ही सदियों से एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में भी उसका इस्तेमाल होता है। दुनिया भर में हमारे पूर्वज शहद के कई लाभों से अच्छी तरह परिचित थे। एक औषधि के रूप में उसका इस्तेमाल सबसे पहले सुमेरी मिट्टी के टेबलेटों में पाया गया है जो करीब 4000 साल पुराने हैं। लगभग 30 फीसदी सुमेरी चिकित्सा में शहद का इस्तेमाल होता था। भारत में शहद सिद्ध और आयुर्वेद चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण अंग है जो चिकित्सा की पारंपरिक पद्धतियां हैं। प्राचीन मिस्र में इसे त्वचा और आंखों की बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता था और जख्मों तथा जलने के दागों पर प्राकृतिक बैंडेज के रूप में लगाया जाता था।
शहद का मीठा स्वाद तो आप सभी ने चखा ही होगा, लेकिन क्या आप इसके चमत्कारी फायदों के बारे में जानते हैं? शहद को मधु भी कहा जाता है, जो लाजवाब स्वाद के साथ-साथ औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। एक गुणकारी आयुर्वेदिक औषधी के रूप में इस स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है। इसके जीवाणु-रोधी तत्व मानवीय शरीर को शुद्ध करने का का शहद एक ऐसी एंटीबायोटि‍क औषधि है, जो पूर्णत: प्राकृतिक है। स्वास्थ्य से लेकर सुंदरता तक, इसके पास हर समस्या का समाधान उपलब्ध है।
आजकल चिकित्सा समुदाय में शहद पर काफी वैज्ञानिक शोध चल रहा है जो हमारे पूर्वजों द्वारा सोचे गए शहद के तमाम प्रयोगों की जांच कर के उन्हें पुष्ट कर रहा है।
शहद आपके खून के लिए अच्छा है
शहद शरीर पर अलग-अलग तरह से असर डालता है, जो इस पर निर्भर करता है कि आप उसका सेवन कैसे करते हैं। अगर शहद को गुनगुने पानी में मिलाकर पिया जाए तो उसका खून में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की संख्या पर लाभदायक असर पड़ता है। लाल रक्त कोशिकाएं मुख्य रूप से शरीर के विभिन्न अंगों तक खून में ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। शहद और गुनगुने पानी का मिश्रण खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है, जिससे एनीमिया या खून की कमी की स्थिति में लाभ होता है। आयरन की कमी यानी एनीमिया की स्थिति तब आती है जब आहार में लौह तत्व को कम मात्रा में ग्रहण किया जाता है या शरीर उसे पर्याप्त रूप से सोख नहीं पाता। इससे रक्त की ऑक्सीजन ढोने की क्षमता प्रभावित होती है। ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम होने से थकान, सांस फूलना और कई बार उदासी और दूसरी समस्याएं होती हैं। शहद रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को बढ़ाते हुए इन समस्याओं को कम कर सकता है।
खून में ऑक्सीजन का होना बेहद जरूरी होता है। आपका शरीर कितना स्वस्थ है या बीमारी के बाद कितनी जल्दी खुद को ठीक कर पाता है, यह आपके खून में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा पर निर्भर करता है। खासकर महिलाओं को इस मामले में खास ख्याल रखने की जरूरत होती हैं, क्योंकि उन्हें हर महीने मासिकचक्र से गुजरना पड़ता है। चूंकि हर महीने उनके शरीर से एक खास मात्रा में खून बाहर निकल जाता है, इसलिए एनेमिया की संभावना उनमें पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा पाई जाती है। अगर मस्तिष्क को उचित मात्रा में खून नहीं मिलेगा तो शरीर और दिमाग को जैसा काम करना चाहिए, वे वैसे नहीं कर पाएंगे।
शहद : रक्तचाप में फायदेमंद
शहद का नियमित सेवन सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है। अगर आपको निम्न रक्तचाप की शिकायत है और अगर आप नीचे बैठे-बैठे अचानक उठने की कोशिश करते हैं तो आपको चक्कर आ जाते हैं। निम्न रक्तचाप का मतलब दिमाग में ऑक्सीजन का कम मात्रा में पहुंचना है। इसी तरह से अगर आप अपना सिर नीचे करते हैं और आपको चक्कर आते हैं तो इसका मतलब है कि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है। या तो उच्च रक्तचाप की वजह से या फिर ऑक्सीजन की कमी की वजह से आपको चक्कर आते हैं।
शहद का सेवन हमारे शरीर के इन असंतुलनों को दूर करता है। शरीर में रक्त का दबाव शरीर की जरूरतों पर निर्भर करता है। लोगों को लगता है कि उच्च रक्तचाप एक बीमारी है, लेकिन सच्चाई यह नहीं है। दरअसल, शरीर अपनी जरूरतों के हिसाब से खून का दबाव तय करता है। अगर किसी कारण वश शरीर को सामान्य रूप से ज्यादा ऑक्सीजन या पोषक तत्वों की जरूरत होती है या फिर खून की गुणवत्ता वैसी नहीं होती, जैसी होनी चाहिए तो शरीर का खून पंप करने वाला पंपिंग सिस्टम ज्यादा खून पंप करना शुरू कर देता है। इसके लिए अंगों में शीघ्र और तेज प्रवाह के लिए दिल तेजी से खून को पंप करता है, जिससे खून का दबाव बढ़ता है।
निम्न रक्तचाप के पीछे भी वजह होती है, जैसे शरीर को ही निम्न दबाव की जरूरत हो सकती है या फिर जन्मजात वजहों से ही दिल इतना मजबूत नहीं होता कि वह शरीर की जरूरत के मुताबिक ज्यादा खून पंप कर पाए। ये भी हो सकता है कि शरीर के परिसंचरण तंत्र यानी सर्कुलेटरी सिस्टम में कोई दिक्कत हो अथवा खून की रासायनिक संरचना के चलते ऐसा हो रहा हो। अकसर एक साथ कई वजहों के चलते ऐसा होता है। ठीक इसी तरह उच्च रक्तचाप के कई परिणाम सामने आते हैं, लेकिन शुरु में तो उच्च रक्तचाप खुद ही एक परिणाम है- यह एक परिणाम है, कारण नहीं है।
योग का नियमित अभ्यास करने वाले व शरीर को खास तरह की प्रक्रिया में ढालने वाले लोगों के लिए अपने सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। शहद का नियमित सेवन इस संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको अपेक्षा कृत ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है।
 दिल की देखभाल में फायदेमंद
एक अनार का ताजा रस लेकर उसमें एक बड़ा चम्मच शहद मिलाएं। रोजाना सुबह खाली पेट लें।
खजूर में सुई चुभाते हुए उसमें छेद करें। उसे शहद में डुबा दें और दिन में दो बार 2-4 खजूर खाएं।
कीमोथैरेपी में असरदायक
इसके भी कुछ प्रारंभिक प्रमाण हैं कि शहद कीमोथैरेपी के मरीजों में श्वेत रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की संख्या को कम होने से रोक सकता है। एक छोटे प्रयोग में कीमोथैरेपी के दौरान कम डब्ल्यूबीसी संख्या के जोखिम वाले 40 फीसदी मरीजों में उपचार के तौर पर दो चम्मच शहद पीने के बाद वह समस्या फिर से नहीं उभरी।
सर्दी जुकाम के लिए शहद के उपचार
अगर आप सर्दी-जुकाम से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं या आपको हर सुबह बंद नाक से जूझना पड़ता है, तो नीम, काली मिर्च, शहद और हल्दी का सेवन काफी फायदेमंद हो सकता है। यहां कुछ सरल उपचार दिए गए हैं:
विकल्प 1:
काली मिर्च के 10 से 12 दानों को दरदरा कूट लें और उन्हें दो छोटे चम्मच शहद में रात भर भिगो कर रखें। सुबह खूब अच्छी तरह चबाते हुए काली मिर्च के दाने खा लें। आप शहद में थोड़ा हल्दी भी मिला सकते हैं।
विकल्प 2:
नीम के पत्तों का पेस्ट बना लें और उस पेस्ट से एक कंचे के आकार की गोली बनाएं। उस गोली को शहद में डुबाकर हर सुबह खाली पेट निगल लें। अगले 60 मिनट तक कुछ न खाएं ताकि नीम आपके शरीर में फैल जाए। इससे दूसरी तरह की एलर्जी जैसे त्वचा या किसी खाद्य पदार्थ से होने वाली एलर्जी में भी लाभ मिलता है। नीम में बहुत से औषधीय गुण हैं और यह आदत बहुत ही लाभदायक है। अगर आपको नीम के सामान्य पत्ते ज्यादा कड़वे लगते हैं, तो नीम के कोमल पत्तों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
शहद पाचन में मदद करता है
शहद कब्ज, पेट फूलने और गैस में लाभकारी होता है क्योंकि यह एक हल्का लैक्सेटिव है। शहद में प्रोबायोटिक या सहायक बैक्टीरिया भी प्रचुर मात्रा में होते हैं जो पाचन में मदद करते हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाते हैं और एलर्जी को कम करते हैं। टेबल शुगर की जगह शहद का इस्तेमाल आंतों में फंगस से पैदा हुए माइकोटॉक्सिन के विषैले प्रभावों को कम करता है।
मधुमेह के दौरान शहद
क्या मधुमेह के मरीजों के लिए शहद फायदेमंद है? यह सवाल आपको थोडे़ समय के लिए भ्रमित कर सकता है, लेकिन हम आपको बता दें कि डायबिटीज के मरीज इसका सेवन कर सकते हैं। मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए आप कई प्रकार से शहद का सेवन कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल
एक चम्मच शहद के साथ तीन चम्मच तुलसी, नीम और हल्दी पाउडर को अच्छी तरह मिला लें।
रोज सुबह एक चम्मच खाली पेट लें।
इस प्रक्रिया को एक महीने तक दोहराएं।
इसके अलावा आप आधा चम्मच शहद एक चम्मच दही के साथ ले सकते हैं।
कैसे है लाभदायक
हनी में काफी मात्रा में माइक्रो न्यूट्रिएंट पाए जाते है, जो मधुमेह के पीड़ित लोगों के लिए काफी फायदेमंद माने गए हैं। नियमित रूप से इसका सेवन हाइपरग्लेसेमिया (उच्च रक्त शर्करा) को कम कर देता है (4)। हाइपरग्लेसेमिया वो स्थिति होती है, जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। इस स्थित में शरीर में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है।
कोलेस्ट्रॉल को करता है कम
कोलेस्ट्रॉल एक वसा जैसा पदार्थ है, जो शरीर की सभी कोशिकाओं में पाया जाता है। यह शरीर में हार्मोंस को विकसित करने और कोशिकाओं को स्वस्थ्य रखने में मदद करता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा शरीर के लिए घातक साबित हो सकती है। कोलेस्ट्रॉल के बढ़ जाने के कारण खून गाढ़ा हो जाता है और हार्ट अटैक व अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है । यहां हम बता रहे हैं कि कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए किस प्रकार करें शहद का इस्तेमाल।
कैसे करें इस्तेमाल
आप ग्राइंडर की मदद से एक प्याज का रस निकाल लें और उसमें शहद (आवश्यकता अनुसार) घोल लें। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए इस मिश्रण को रोज सुबह-शाम लें।
आप प्याज की जगह दालचीनी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। दालचीनी पाउडर (तीन चम्मच) को गर्म पानी (एक गिलास) के साथ शहद (तीन चम्मच) मिलाकर पीने से बढ़ते कोलेस्ट्रॉल पर काबू पाया जा सकता है।
यह प्रक्रिया आप 15 दिनों तक दोहराएं।
कैसे है लाभकारी
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है। हनी में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नहीं होती और इसका दैनिक सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को काफी कम कर देता है। शहद में पोटेशियम और सोडियम जैसे महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए लाभदायक होते हैं 

एंटी-एजिंग
शहद में एंटी-एजिंग गुण होते हैं, जो स्किन में होने वाली झुर्रियों और रिकंल्स की समस्या को रोक देता है। इसके साथ ही शहद खाने या लगाने से मृत कोशिकाओं में जान आ जाती है।
सांवलापन करें दूर
गोरी रंगत पाने के लिए शहद, दूध, पपीता और मिल्क पाउडर मिलाकर चेहरे पर लगाएं और फिर सूखने पर चेहरा धो लें। रोजाना इस पैक को लगाने से त्वचा की रंगत निखर जाएगी।
बालों से जुड़ी समस्याएं
शहद में जैतून का तेल मिक्स करके रात को सोने से पहले बालों के किनारों और स्कैलप पर लगाएं। सुबह बालों को शैम्पू से धोएं। हफ्ते में कम से कम 2 बार ऐसा करने से आपकी दो-मुंहे बाल, डैंड्रफ और रूखे-बेजान बालों की समस्या दूर हो जाएगी।
वजन करे कम
एक स्टडी में बताया गया है कि शहद भूख को नियंत्रित करता है, जिससे वजन कम होता है। स्टडी में यह भी बताया गया है कि रात को सोने से पहले शहद का सेवन करने से ज्यादा कैलोरी बर्न होती हैं। इसके अलावा आप चाय, कॉफी या किसी भी वेट लूज ड्रिंक में चीनी की बजाए शहद का इस्तेमाल करें। इससे वजन कंट्रोल में रहेगा।
हड्डियों को करता है मजबूत
हनी का इस्तेमाल आंतरिक और बाहरी दोनों रूपों में किया जा सकता है। औषधीय गुणों से परिपूर्ण शहद महिलाओं को होने वाली हड्डियों की समस्याओं में खासकर कारगर है।
आप दो चम्मच हनी सुबह और रात में सोने से पहले ले सकते हैं।
या फिर आप हनी (दो चम्मच) एक गिलास गर्म पानी के साथ ले सकते हैं।
शहद (एक चम्मच) को आप दूध (एक गिलास) के साथ भी ले सकते हैं। दूध में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों के लिए जरूरी है। आप रात को सोने से पहले यह मिश्रण ले सकते हैं।
ट्यूलैंग शहद को रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को होनी वाली ऑस्टियोपोरोसिस तकलीफ का उपचार करने में कारगर माना गया है। शहद में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व हड्डियों के लिए काफी लाभदायक होते हैं
। ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी स्थिति होती है, जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
.बढ़ाता है रोग प्रतिरोधक क्षमता
रोग प्रतिरोधक क्षमता सुधारने और उसे बढ़ाने के लिए शहद का सेवन किया जा सकता है। जानिए, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए शहद का सेवन कैसे करें ?
कैसे करें इस्तेमाल
एक कप गर्म पानी में एक चम्मच हनी और आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं।
कैसे है लाभदायक
हनी के एंटीऑक्सीडेंट और जीवाणुरोधी गुण पाचन तंत्र में सुधार करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट का एक बड़ा स्रोत है, जो शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने में मदद करता है
कटने, जलने और घाव के लिए शहद
कटने, जलने या घाव के लिए शहद का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है। नीचे जानिए, धाव व चोट के लिए शहद के इस्तेमाल करने का तरीका।
कैसे करें इस्तेमाल
सबसे पहले चोट या घाव की जगह को साफ पानी से धो लें और कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें।
अब शहद को घाव पर अच्छी तरह लगाएं और पट्टी बांध लें।
शहद का प्रयोग उतना करें, जिससे कि घाव या चोट सही से ढक जाए।
पांच-छह घंटे बाद शहद लगाने की प्रक्रिया फिर से दोहराएं। अगर चोट गंभीर है, तो आप डॉक्टर के पास जरूर जाएं।
कैसे है लाभदायक
यह प्राकृतिक पदार्थ घाव और चोट को भरने के लिए एक प्रभावशाली औषधी के रूप में कार्य करता है। शहद का इस्तेमाल शरीर के किसी भाग के जल (बर्न्स) जाने पर भी किया जाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और हिलिंग तत्व संक्रमण को रोकने का काम करते हैं
शहद त्वचा और सिर की खाल के संक्रमणों से लड़ता है।
त्वचा और सिर की खाल के लिए भी शहद बहुत फायदेमंद होता है। 30 मरीजों पर किए गए एक छोटे स्तर के अध्ययन, जिसमें सेबोरिक डर्माटाइटिस और रूसी के उपचार पर शहद के प्रभावों की जांच की गई थी, इसमें प्रतिभागियों ने हर दूसरे दिन 2-3 मिनट तक अपने समस्याग्रस्त क्षेत्रों पर पतले अपरिष्कृत(अनप्रोसेस्ड) शहद से हल्की मालिश की। शहद को तीन घंटे तक छोड़ दिया गया, फिर गुनगुने पानी से धो दिया गया। सभी मरीजों को इस उपचार से लाभ दिखा। एक सप्ताह के भीतर खारिश में राहत मिली और स्केलिंग गायब हो गई, दो सप्ताह में जख्म गायब हो गए। मरीजों के बाल गिरने की समस्या में भी सुधार आया। इसके अलावा जिन मरीजों ने सप्ताह में एक बार शहद लगाते हुए छह माह तक उपचार जारी रखा, उन्हें यह समस्या दोबारा नहीं हुई।

शहद चीनी से कम नुकसानदायक है
शरीर पर सफेद चीनी के हानिकारक प्रभावों के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। शहद उसका एक बढ़िया विकल्प है जो उतना ही मीठा है मगर उसका सेवन अहानिकर है। हालांकि शहद के रासायनिक तत्वों में भी सिंपल शुगर होती है मगर वह सफेद चीनी से काफी भिन्न होती है। उसमें करीब 30 फीसदी ग्लूकोज और 40 फीसदी फ्रक्टोज होता है यानि दो मोनोसेकाराइड या सिंपल शुगर और 20 फीसदी दूसरे कांप्लेक्स शुगर होते हैं। शहद में एक स्टार्ची फाइबर डे‍क्सट्रिन भी होता है। यह मिश्रण शरीर में रक्त शर्करा का स्तर संतुलित रखता है।
खांसी में फायदेमंद
साल 2012 में हुई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रोजाना 2 चम्मच शहद खाने से खांसी में आराम मिलता है।साथ ही इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होने के कारण इसका सेवन इंफेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया को भी खत्म करता है।
शहद बच्चों को गहरी नींद सोने में मदद करता है
कई अध्ययनों के शुरुआती नतीजे दर्शाते हैं कि शहद से बच्चों की नींद गहरी हो सकती है। माता-पिता की राय पर आधारित इस अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि शहद से रात के समय बच्चों में खांसी कम हुई और उन्हें अधिक गहरी नींद सोने में मदद मिली।
ध्यान में रखने लायक बातें
जो शहद गहरे रंग का होता है, उसमें ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट होते हैं।
शहद खराब नहीं होता और उसे ठीक से बंद करके रखने पर लंबे समय तक रखा जा सकता है।
पुरातत्वविज्ञानियों को मिस्र के प्राचीन शहर थेब्स में फेरों की कब्रों में और तूतनखामन की कब्र में शहद के सीलबंद जार मिले हैं। यह पता नहीं चला है कि पुरातत्वविज्ञानियों ने उस शहद का क्या किया!
एक साल से कम उम्र के शिशुओं को शहद नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि उसमें बोटुलिज्म बैक्टीरिया के जीवाणु हो सकते हैं जिसकी वजह से शिशु बीमार हो सकता है। ये जीवाणु धूल और मिट्टी में पाए जाते हैं, जो शहद में जा सकते हैं। शिशु का शरीर इस तरह के संक्रमण से अपना बचाव करने के लिए तैयार नहीं होता है।
एक और ध्यान रखने लायक बात यह है कि मधुमेह के मामले में शहद सफेद चीनी से बहुत अलग नहीं है। दोनों ही रक्त शर्करा का स्तर बढ़ाते हैं और मधुमेह के रोगियों को दोनों में उतना ही ध्यान रखना चाहिए।
आयुर्वेद और सिद्ध में शहद का इस्तेमाल
शायद किसी ने शहद के लाभों को इतनी गहराई में नहीं खोजा है, जितना कि भारतीयों ने। शहद मानवजाति के लिए प्रकृति का उपहार माना गया और उसे हर रसोईघर का एक अनिवार्य अंग समझा गया। 12 महीने से ज्यादा उम्र के किसी भी व्यक्ति के लिए उसे आहार का एक अहम हिस्सा माना गया। शहद को एक सुपाच्य खाद्य पदार्थ माना जाता था जिसे इंसान आसानी से पचा सकते हैं। आयुर्वेद और सिद्ध दोनों पद्धतियों में शहद का एक इस्तेमाल औषधियों के एक वाहक के रूप में किया गया। शहद के साथ मिलाने पर औषधि आसानी से और तेजी से शरीर में समा जाती है और रक्त प्रवाह के द्वारा पूरे शरीर में फैल जाती है। कहा जाता है कि शहद किसी औषधि की क्षमता को भी बरकरार रखती है और उसके असर को लंबा करती है।
सिद्ध ग्रंथों में ऊष्णता संबंधी समस्याओं, अत्यधिक कफ, उल्टी, गैस समस्याओं और रक्त में अशुद्धियों के उपचार के अंग के रूप में शहद को लेने का सुझाव दिया गया है। सिद्ध ग्रंथों में सात अलग-अलग तरह के शहद की पहचान की गई है, जिसमें घने पहाड़ी वनों, जिन्हें मलयतन या पहाड़ी शहद कहा जाता है, से एकत्रित शहद को सबसे ज्यादा औषधीय महत्व का माना जाता है। इस शहद में कई औषधीय पौधों के गुण होते हैं, जिनसे मधुमक्खियां रस या पराग लेती हैं।
शहद के प्रयोग और पारंपरिक उपचार
शहद जल
एक गिलास सामान्य तापमान वाले जल में 1 से 3 छोटे चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार लेने पर ऊतकों को पोषण मिलता है और नर्वस सिस्टम की कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है।
एक गिलास गुनगुने पानी में दो-तीन छोटे चम्मच शहद मिलाकर लेने से तत्काल शक्ति मिलती है और वजन कम करने में मदद मिलती है।

सोयाबीन खाने के फायदे और नुकसान

                          
प्रोटीन और कई पोषक तत्वों से भरपूर सोयाबीन और उसके व्यंजनों को आप मजेदार स्वाद के लिए जरूर खाते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सोयाबीन सेहत और सौंदर्य से जुड़े बेहतरीन फायदे भी दे सकता है।
सोयाबीन गुणों का खजाना हैं यह बात पूरी तरह सच हैं लेकिन हर एक चीज को उपयोग करने का एक तरीका होता हैं और अगर उसे सही तरीके से उपयोग ना किया जाये तो वह फायदे के साथ साथ नुकसान भी कर सकती हैं आईए यहाँ जाने सोयाबीन के फायदे उपयोग और नुकसान (Soybean benefits uses and side effects in Hindi) के बारे में। सोया प्रोटीन और आइसोप्लेवोंस से भरपूर डाइट होती हैं जिसके सेवन से हडडियों को कमजोर होने के खतरे से बचाया जा सकता है| सोयाबीन से बनी चीजो में आइसोप्लेबोंस नामक रसायन होता है जिससे महिलाओ को आस्टियोपोरेसिस के खतरे से बचाया जा सकता हैं|
यहाँ जाने सोयाबीन को उपयोग करने का सही तरीका क्या है।
सोयाबीन एक प्रकार का बीज होता हैं जिसको आप गैहू के साथ में पिसवाकर या भिगोकर खाने के काम में ले सकते है|
सोयाबीन को आप रात भिगोने के बाद उबाल के भी खाने में उपयोग ले सकते है।
गेहूँ के साथ भी पिसवाकर रोटियां बना के खा सकते हो सोयाबीन को पानी में भिगोकर पानी से निकालकर सुखाकर आटा पिसवाकर गेहूँ के आटे में भी मिलाकर तैयार कर खाया जा सकता है।
सोयाबीन खाने के फायदे
उच्च रक्तचाप में
सोयाबीन के फायदे अनेक है और अगर आप उच्च रक्तचाप ग्रसित हैं सोयाबीन उच्च रक्तचाप को कम करने में लाभदायक होता है इसके साथ साथ वो रक्तचाप को बढने भी नहीं देता है। रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए आप कम नमक के साथ भुना हुआ सोयाबीन खा सकते है नमक के साथ साथ आप काली र्मिच भी डाल के भी सेवन कर करते है सोयाबीन 5-6 प्रतिशत उच्च रक्तचाप को कम करता है। तले हुए सोयाबीन का सेवन यदि महिलाएं करे तो उनको उच्च रक्तचाप में निजात प्राप्त होता है।
एनीमिया में
एनीमिया यानी की शरीर में रक्त की कमी , और यह एक भयानक रोग है जिसका इलाज सोयाबीन में छुपा हुआ है | आप रोजाना सोयाबीन के तेल से बनी सब्जी का सेवन कीजिए या फिर इसके दूध का सेवन कीजिए जिससे आपके शरीर में रक्त की भरपूर मात्रा होगी और आपको एनीमिया से मुक्ति मिलेगी |गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भावस्था में भी महिलाओं को सोयाबीन सेवन करना चाहिए| सोयाबीन में आयरन की मात्रा पायी जाती हैं यह खून बढ़ाने में भी सहायक होता हैं! सोयाबीन से बनी चीजों में आईसोप्लेबोंस नामक रसायन होता है जिससे महिलाओं को अस्टियोपोरेसिस के खतरे से बचाया जा सकता हैं|
मासिक धर्म में
महिलाओं के मासिक धर्म बन्द होने से शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा कम होने लगती है जिससे घुटनों में दर्द पेट का भारी होना कमर में दर्द रहने लगता है| इस स्थिति में महिलाओं के लिए सोयाबीन बहुत ही लाभकारी होता है। कुछ समय तक सोयाबीन का उपयोग करने से महिलाओं की समस्याएं कम होती है। इसके साथ सोयाबीन का सेवन मासिक धर्म में होने वाले सूजन, कमर में दर्द पेट में दर्द जैसी समस्याओं में निजात दिलाता है।
हड्डियों की मजबूती
सोयाबीन हड्ड‍ियों के लिए लाभदायक है। यह हड्ड‍ियों को पोषण देता है जिससे वे कमजोर नहीं होती और हड्डी टूटने का खतरा भी कम होता है। इसका सेवन हड्ड‍ियों की सघनता को बढ़ाने में सहायक है।
सोयाबीन में मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम हमारे शरीर में जाकर हमारी हड्डियों की मजबूत बनाता है | अगर आपके शरीर में कैल्शियम को कमी है या फिर आपकी हड्डियाँ कमजोर है तो आप इसका सेवन रोजाना करे जिससे आराम मिलेगा |
सोयाबीन के तेल के फायदे
Soybean सोयाबीन के खाने फायदे से तो अब आप अच्छी तरह वाकिफ हो ही चुके होगें। सोयाबीन से बने तेल के बारे में ज्यादातर घरों में सब्जी पराठें आदि बनाने में सोयाबीन का तेल उपयोग में लिया जाता है यह हदृय रोगियों के साथ साथ यह सभी के लिए भी लाभदायक है। सोयाबीन का तेल सोयाबीन के बीजों से निकाला जाता है। सोयाबीन का तेल अन्य खाद्य तेलों की उपेक्षा हमारे शरीर के लिए ज्यादा लाभकारी होता है। चिकित्सक भी आजकल सोयाबीन से बने तेल का ही उपयोग करने की सलाह देत है। हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने में मानसिक तनाव को कम करने में लाभदायक है तथा नियमित सेवन से याददाश्त बढाने में मदद मिलती है।
मधुमेह के रोगियों को सोयाबीन के तेल से बनी चीजों का ही सेवन अत्यधिक लाभदायक है। सोयाबीन के तेल में विटामिन ई अधिक पाया जाता है। हम गर्मी में धूप में बाहर निकलते है धूप की तेज किरण हमारी त्वचा में जलन पैदा करती है सोयाबीन के तेल उपयोग करने से त्वचा की जलन से छूटकारा मिलता है।
गठिया रोग
Soybean सोयाबीन से बना दूध व रोटियां गठिया रोग में भी लाभदायक होता हैं|
मधुमेह रोग में
मुधमेह रोगियों को सोयाबीन का सेवन करने से मूत्र सम्बन्धित परेशानी से निजात मिलता है मधुमेह रोगी को सोयाबीन से बनी रोटी आदि का सेवन करना लाभदायक है।
अंकुरित सोयाबीन
सोयाबीन को अंकुरित करके खाना भी हमारी सेहत के लिए लाभदायक होता है! खून को बढ़ाने पेट की बीमारियों को ठीक करने हमारे शरीर में आयरन की मात्रा को बढ़ाने व वजन बढाने में भी अंकुरित सोयाबीन फायदेमंद होता है।
शारीरिक विकास में
अगर आपका शारीरिक विकास नहीं हो रहा है या नाखून बाल आदि नहीं बढ रहे है तो सोयाबीन का सेवन इनके विकास में भी सहायक है। सोयाबीन मिर्गी याददाश्त बढ़ाने व दिमागी कमजोरी को दूर करता है।
सोयाबीन खाने के नुकसान
हर चीज की अति बुरी होती है सोयाबीन का ज्यादा उपयोग भी हमारे शरीर के लिए लाभदायक होने के साथ साथ हानिकारक भी होता है। सोयाबीन खाने के लाभ के साथ साथ सोयाबीन खाने के कुछ नुकसान भी होते है आईए अब हम सोयाबीन के नुकसान के बारे में भी जाने|
दिल की बिमारी वाले लोगो को सोयाबीन का उपयोग कम करना चाहिए या सीमित मात्रा में करना चाहिए।
सोयाबीन में टांस फैट होता है जो की हाई कालेस्ट्राल और दिल की बीमारियों को बढ़ाता है।
सोयाबीन के अधिक सेवन से शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है।
यदि आप फैमली प्लानिंग करने के बारे में सोच रहे है या फैमली प्लानिंग करना चाहते है तो सोयाबीन के सेवन से बचे क्योंकि सोयाबीन स्पर्म की संख्या को कम करता है।
सोयाबीन  की ज्यादा मात्रा से सेक्स प्रॉब्लम हो जाती है और उनके हार्मोन, लिबिडो पावर, स्‍पर्म और प्रजनन पॉवर का स्तर प्रभावित हो सकता है।
गुणों का खजाना होने के साथ साथ हानिकारक भी होता है। सोयाबीन के अधिक सेवन वजन भी बढ़ता है व अधिक सेवन से किडनी की समस्या वाले लोगो को इसके सेवन से बचना चाहिए|

दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी // Shankpushpi Makes sharp mind


शंखपुष्पी के गुण:-

यह दस्तावर , मेघा के लिए हितकारी , वीर्य वर्धक , मानसिक दौर्बल्य को नष्ट करने वाली , रसायन (chemical) ,कसैली , गर्म , तथा स्मरण शक्ति (memory power), कान्ति बल और अग्नि को बढाने वाली एवम दोष , अपस्मार , भूत , दरिद्रता , कुष्ट , कृमि तथा विष को नष्ट करने वाली होती है l यह स्वर को उत्तम करने वाली (increase the sweetness in voice), मंगलकारी , अवस्था स्थापक तथा मानसिक रोगों को नष्ट (destroying the mental problems) करने वाली होती है l
परिचय : —-मनुष्य के मस्तिष्क पर प्रमुख क्रिया करने वाली यह वनस्पति दिमागी ताकत और याददाश्त को बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है l
फूलों के भेद से यह तीन प्रकार की होती है (1) सफ़ेद फूल वाली (2) लाल फूल (red flowers) वाली और (3) नीले फूल वाली l तीनों के गुण एक सामान है l यह बेलों के रूप में जमीं पर फैली हुई होती है और एक हाथ से ऊँची नहीं होती l यह सारे भारत में पैदा होती है |

दिमाग को धारदार बनाती है शंखपुष्पी:–

प्राय: छात्र -छात्राओं के पत्रों में दिमागी ताकत और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गुणकारी ओषधि बताने का अनुरोध पढने को मिलता रहता है l छात्र- छात्रओं के अलावा ज्यदा दिमागी एक्ससी काम करने वाले सभी लोगों के लिए शंखपुष्पी का सेवन अत्यन्त गुणकारी सिद्ध हुआ है l
इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण , एक-एक चम्मच सुबह- शाम , मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करना चाहिए l

 शुक्रमेह :

-शंखपुष्पी का महीन चूर्ण एक चम्मच और पीसी हुई काली मिर्च (black pepper powder) आधी चम्मच दोनों को मिला कर पानीके साथ फाकने से शुक्रमेह रोग ठीक होता है l
(3) ज्वर में प्रलाप :—तेज बुखार के कारण कुछ रोगी मानसिक नियंत्रण खो देते है और अनाप सनाप बकने लगते है l एसी स्थितिमें शंखपुष्पी और मिश्री को बराबर वजन में मिलाकर एक-एक चम्मच दिन में तीन या चार बार पानी के साथ देने से लाभहोता है और नींद भी अच्छी आती है l

 उच्च रक्तचाप :–
उच्च रक्तचाप के रोगी ] को शंखपुष्पी का काढ़ा बना कर सुबह और शाम पीना चाहिए l दो कप पानी में दो चम्मच चूर्ण डालकर उबालें जब आधा कप रह जाए उतारकर ठंडा करके छान लें l यही काढ़ा है l दो या तीन दिन तक पियें उसके बाद एक-एक चम्मच पानी के साथ लेना शुरू कर दें रक्तचाप सामान्य होने तक लेतें रहें l

 बिस्तर में पेशाब :

-कुछ बच्चे बड़े हो जाने पर भी सोते हुए बिस्तर में पेशाब करने की आदत (habit) नहीं छोड़ते l एसे बच्चों को आधा चम्मच चूर्ण शहदमें मिलाकर सुबह शाम चटा कर ऊपर से ठंडा दूध या पानी पिलाना चाहिए l यह प्रयोग लगातार एक महीनें तक करें |

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सेहत मंद रहने के सरल उपचार 


*बेसन, मैदा और व्हाइट ब्रेड की जगह सोयाबीन, सूजी और ब्राउन ब्रेड का उपयोग करें।
बाजार में मिलने वाले कृत्रिम व डिब्बाबंद पदार्थों के सेवन से बचें। इनमें उपयोग किए गए 'प्रिजरवेटिव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं ।
*यदि हरी सब्जियों और अंकुरित चीजों का प्रयोग सामान्य तरीके से करने से घर के सदस्यों उसे खाने में रुचि नहीं लेते तो इन्हीं वस्तुओं का प्रयोग अलग तरीके से किया जा सकता है। मसलन-वेजीटेबल पराठा या स्प्राउट चीला या डोसा।
*बवासीर (पाइल्स) में रक्त आता हो तो नींबू की फांक में सेंधा नमक भरकर चूसने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।
आधे नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर चाटने से तेज खाँसी, श्वास व जुकाम में लाभ होता है।
शहद ज्ञान तंतुओं की उत्तेजना को शांत करता है। इससे हृदय की अधिक धड़कन सामान्य हो जाती है। उच्च रक्तचाप के रोगियों की रक्तवाहिनियों को यह शक्ति देता है।
*एक नींबू के रस में तीन चम्मच शकर, दो चम्मच पानी मिलाकर, घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद अच्छे से सिर धोने से रूसी दूर हो जाती है व बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम दो बार नित्य एक महीना पीने से पथरी पिघलकर निकल जाती है।
*नींबू को तवे पर रखकर सेंक लें (दो भाग करके)। उस पर सेंधा नमक डालकर चूसें। इससे पित्त की दिक्कत खत्म होती है।
*मिशिगन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में कहा गया है कि चॉकलेट का मस्तिष्क पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है, जैसा अफीम का पड़ता है।
*दर्द निवारक दवाइयों के लंबे समय तक इस्तेमाल करने से न सिर्फ लीवर और किडनी के खराब होने का खतरा रहता है बल्कि इनसे दिल के दौरे पडऩे तथा ह्रदय संबंधित समस्याएं होने का खतरा भी हो सकता हैं1
नींद नहीं आने की समस्या मधुमेह और दिल संबंधी बीमारी की आशंका बढ़ा सकती है।
*दिन भर में में कम से कम आठ से दस ग्लास पानी पिएं। जितना पानी आप पिएंगें उतना ही आपके दांत साफ होंगें। इसके अलावा यह चाय, कॉफी, शराब, सोडा आदि के दागों को भी दांतों से मिटाने में कारगर साबित होगा।
अपने खाने में फल और सब्जी शामिल करें। सेब, खीरा, गाजर आपके दांतों को प्राकृतिक रूप से साफ करते हैं। यह आपके दांतों में फंसे खाने को भी निकालते हैं और मसूड़ों की समस्या दूर होती है। 

*खाने के बाद पनीर का टुकड़ा खाने से आपके दांत चमकदार रहते हैं।
*जूस और सोडा पीने के बाद ब्रश नहीं करना चाहिए। हो सके तो कॉफी और वाइन स्ट्रॉ से पिएं। इससे इनका सीधा संपर्क आपके दांतों से नहीं हो पाएगा और आपके दांत हमेशा चमकते रहेंगें।
*अदरक के रस में या अडूसे के काढ़े में शहद मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है।
*प्याज का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर चाटने से कफ निकल जाता है तथा आंतों में जमे विजातीय द्रव्यों को दूर कर कीड़े नष्ट करता है। इसे पानी में घोलकर एनीमा लेने से लाभ होता है।
*हृदय की धमनी के लिए शहद बड़ा शक्तिवर्द्धक है। सोते वक्त शहद व नींबू का रस मिलाकर एक ग्लास पानी पीने से कमजोर हृदय में शक्ति का संचार होता है।
*सूखी खाँसी में शहद व नींबू का रस समान मात्रा में सेवन करने पर लाभ होता है।
अदरक का रस और शहद समान मात्रा में लेकर चाटने से श्वास कष्ट दूर होता है और हिचकियां बंद हो जाती हैं।
कब्जियत में टमाटर या संतरे के रस में एक चम्मच शहद डालकर सेवन करें, लाभ होगा।
*10 मिनट में हो सकते हैं फिट-
कुछ लोगों की यह धारणा है कि चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए हर दिन घंटों पसीना बहाना पड़ता है, लेकिन हाल ही में जर्मनी में हुए शोधों से पता चला है कि यह धारणा सही नहीं है। इस शोध के मुताबिक 10 मिनट का व्यायाम भी आपको तरोताजा बनाये रखने के लिए काफी है। हो सकता है कि 10 मिनट के व्यायाम से आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम न हो, लेकिन 10 मिनट की एक्सरसाइज आपमें जोश भर देगी और आप सारा दिन खुद को तरोताजा महसूस करेंगी। इसका असर आपके काम पर भी पड़ेगा यानी 10 मिनट की एक्सरसाइज आपके काम करने की क्षमता को बढ़ायेगी।
*हर दिन 10 मिनट का व्यायाम बीमारियों से लडऩे की शक्ति को 40 फीसदी तक बढ़ाता है।
दफ्तर की सीढिय़ां चढऩा, उतरना तथा पार्किग स्थल से दफ्तर तक पैदल चलना भी तरोताजा रखने वाला व्यायाम है।
*सुबह-सुबह 10 मिनट की जॉगिंग कई घंटों तक आपमें चुस्ती बरकरार रख सकती है। यह ध्यान रखें कि *व्यायाम को मौज मस्ती में करें यानी उसे बोझ समझकर न करें।
*बुखार, थकान, कमजोरी महसूस करने की स्थिति में व्यायाम से बचें।
*ध्यान रखें, जहां व्यायाम करें वहां शांति हो, जगह साफ-सुथरी हो, प्राकृतिक हवा हो और पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी हो।
*व्यायाम का समय बढ़ाना हो तो धीरे-धीरे बढ़ाएं, एकदम से समय बढ़ाने से थकान, कमजोरी की शिकार हो सकती हैं।
*व्यायाम के समय बातचीत न करें, व्यायाम के समय चुप रहने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।


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