मूत्र रोगों के आयुर्वेदिक उपचार

मूत्र रोग के उपचार के लिए सबसे पहले लक्षण की ओर ध्यान देना चाहिए . उसी के आधार पर सही कारण का पता चल पायेगा . इसके बाद ही उपचार करना चाहिए . बच्चों में यह बहुत कम और बड़ों में अधिकाँश होता है . वृद्धावस्था में इसकी संभावना बढ़ जाती है . अगर सुरुआत में इसके लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए तो सामान्य संक्रमण से लेकर पुरुष ग्रंथि तक में कैंसर की सम्भावना बन सकती है . महिलाओं में मूत्र रोग संक्रमण गर्भाशय तक पहुँच सकता है . इसके बहुत घातक परिणाम हो सकते हैं जीवन दूभर हो सकता है . इस लेख में हम लक्षणों से सुरुआत कर कारण और मूत्र रोग के घरेलु एवं आयुर्वेदिक उपचार पर बात करेंगे .
मूत्र रोग संक्रमण के सामान्य लक्षण
पेशाब का बूँद बूँद कर होना और खुलकर न होना .
कमर और उसके आस पास और आगे पीछे दर्द होना .
पेशाब के साथ,पहले या बाद में खून का आना , इससे पेशाब हलके लाल या काले रंग की हो जाती है .
अत्यधिक दुर्गन्ध युक्त पेशाब होना
थकान के साथ बुखार आना .
भूंख न लगना और कब्ज महसूस होना .
मूत्र त्यागते समय मूत्र मार्ग में पीड़ा और जलन होना .
बार बार प्यास लगना .
थोड़ी थोड़ी देर पर पेशाब लगना .
गर्भवती स्त्रियों में मूत्राशय दब जाने से प्रदाह हो जाना .
एक टिप्पणी भेजें