डिप्रेशन से कैसे बचे? डिप्रेशन के उपचार

 


डिप्रेशन क्या है?

तनाव की तुलना में अवसाद एक गहरी और अधिक गहन ‘स्थिति’ है और इसका शिकार किसी भी उम्र का व्यक्ति हो सकता है अगर किसी को चिंता या तनाव अधिक समय तक रहता है तो चिंता अवसाद का रूप ले लेती है। जिसके कारण वह व्यत्कि लंबे समय तक (कभी-कभी महीनों या वर्षों तक) परेशान रहने लगता है, नाखुश या लोगो से दूर रहता है और अकेले रहना ज्यादा पसंद करता है। इस स्थिति में लोगों का मन ज़िंदगी से भर जाता है, उस व्यक्ति की उन सभी गतिविधियों में रुचि ख़त्म हो जाती है जिसमे वह सामान्य रूप से आनंद लेता हैं, उस इंसान की रोजमर्रा की ज़िंदगी, कामकाज और व्यवहार पर बुरा प्रभाव पड़ता है और बहुत से बदलाव देखने को मिल सकते है। डिप्रेशन के बारे में समझना और उससे कैसे बाहर निकलना है ये तरीका हमे पता होना चाहिए जिससे हम अपनी और अन्य लोगो की मदद कर सकें।

तनाव के लक्षण (अवसाद के लक्षण)

जब नीचे दिए गए लक्षण आपको लम्बे समय तक दिखते है तो आप डिप्रेशन का शिकार हो सकते है इसलिए जल्द से जल्द किसी अच्छे मनोचिकित्सक से मिलें और उसके द्वारा बताये गए टेस्ट जरूर करवाएं।


  • छोटी छोटी बातों पर अधिक गुस्सा आना
  • ध्यान केंद्रित करने और याद रखने में कठिनाई होना
  • नींद न आना
  • अधिक नकारात्मक विचार आना
  • अकेले रहने का मन करना
  • थकान और कमजोरी महसूस करना
  • चिड़चिड़ापन रहना
  • पेट का फूलना – दस्त, कब्ज और उल्टी की शिकायत
  • दर्द (सीने में दर्द सहित) और तेजी से दिल की धड़कन
  • मन में अजीब से विचार आना
  • भूख में कमी
  • खाने का सही से न पचना
  • छोटी-छोटी चीजों को लेकर अधिक सोचना
  • सिरदर्द
  • आत्मविश्वास की कमी

डिप्रेशन से बाहर निकलने के उपाय


यदि आप डिप्रेशन से बचना चाहते है तो सबसे पहले शुरुआत आपको ही करनी पड़ेगी इस बारे में अपने प्रियजनों या डॉक्टर से खुलकर बात करें। साथ ही अपने रोज के कामो में और अपनी दिनचर्या में कुछ सकारात्मक बदलाव लाये, हो सके तो ख़ुद को दूसरे कामो में व्यस्त कर ले जिससे आपको उस वजह के बारे में सोचने का समय न मिले जिसकी वजह से आप डिप्रेशन में हो पर इसी बीच आपको अपनी सेहत का भी ध्यान रखना है और ख़ुद के लिए भी एक अच्छा समय निकालना है लेकिन डिप्रेशन के दौरान ये आप कैसे कर सकते है, आइए जानते हैं।


1. अपने प्रियजनों से बात करें और मदद मांगें

अगर आप डिप्रेशन से गुज़र रहे हैं, तो आपको इससे उबरने के लिए रोज या नियमित अंतराल पर ऐसे व्यक्ति से बात करे जिनसे बात करना अपनी परेशानी साझा करना अच्छा लगता हो पर साथ ही आप उन पर भरोसा भी करते हो यह उपाय सच में एक रामबाण साबित हो सकता है। आप ऐसे भरोसेमंद लोगो से खुलकर अपनी समस्याएं सांझा करें और इस परिस्थिति से लड़ने के लिए उनसे मदद मांगें। और इस बात की चिंता न करें की ये लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे क्योकि अपनों से मदद लेने में हमें जरा भी शर्म या संकोच नहीं करनी चाहिए। ऐसे बुरे समय में ही अच्छे और विश्वास योग्य लोगो की पहचान होती है। अगर हमारे अपने ही हमारी मदद नहीं करेंगे तो और कौन करेगा।

2. रोज़ाना व्यायाम या योगा करें

क्या आप जानते है की बहुत से वैज्ञानिक शोध में ये साबित हो चुका है कि व्यायाम या योग आपके डिप्रेशन (अवसाद) को दूर करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है। जब हम व्यायाम करते हैं तब टेस्टोस्टेरोन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन्स हमारे शरीर में रिलीज़ होते हैं। जो की हमारे दिमाग़ को स्थिर करने का काम करते हैं। जिससे हमारे डिप्रेशन को बढ़ाने वाले नकारात्मक विचार आने कम हो जाते हैं। व्यायाम या योग करने से हम, न केवल मानसिक और शारीरिक रूप से सेहतमंद और मजबूत बनते है बल्कि शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

3. अच्छा सेहतमंद खाना खाएं

जब एक व्यक्ति डिप्रेशन में होता है तो वह खाना पीना कम कर देता है या बिल्कुल ही खाना पीना छोड़ देता है अच्छा खाना हर किसी के लिए जरुरी है पर जब आप किसी शारीरिक या मानसिक समस्या से पीड़ित हो चुकें होते हो तो, आपके लिए सेहतमंद खानपान और भी ज्यादा जरुरी हो जाता है। क्योकि सेहतमंद और संतुलित खानपान से आपकी सेहत तो अच्छी रहती ही है साथ ही आपका मन भी ख़ुश रहता है। अगर ऐसे में आपकी पसंद का खाना मिल जाये तो उससे अच्छा क्या होगा इसलिए ऐसे समय में अपनी पसंद के सेहतमंद खाने पीने का पूरा ध्यान रखें।

4. अपने अंदर की क्रिएटिविटी और विचारो को बाहर आने दे

आपके अंदर नकारात्मक विचार सबसे अधिक तब आते है जब आपके पास खाली समय होता है इसलिए ऐसे खाली समय को इस्तेमाल करे और अपने अंदर के कलाकार को बहार आने दे, ऐसे काम करे जो करना आपको पसंद है जैसे अगर आपको लिखने का शौक है तो पेन और पेपर लेकर आपके मन में चल रही भावनाओ और नकारात्मक विचारो को लिख डाले साथ ही खुद से बात करे की अगर ये समस्या किसी अन्य व्यक्ति के साथ घटी होती तो आप उसे क्या सलाह देते, हमारे ख्याल से इससे अच्छा शायद ही कुछ होगा क्योकि डिप्रेशन से निकलने के बारे में आपको खुद भी पता होता है क्योकि आपको कौन सी चीज ज्यादा परेशान करती है और और क्या चीज आपको सबसे अधिक खुशी देती है इसके बारे में आपसे बेहतर शायद ही कोई और इंसान जानता हो बस आपको खुद को समझना है और उसे अपनी कलम से एक कागज पर लिख कर रोज फॉलो करना है। देखना आप जल्द ही इस स्थिति से बाहर निकल जायेंगे।
इन दिनों ब्लॉग्स और अन्य कंटेंट को साझा करने के लिए बहुत से विकल्प मौजूद है जैसे आप ट्विटर, फ़ेसबुक और अन्य मीडिया का इस्तेमाल करके भी अपने विचारो को दुसरो के साथ साझा कर सकते हैं ताकि वो लोग जो इस स्थति से जूझ रहे है आपके विचारो को पढ़ कर उत्साहित हो सके।

5 . नकारात्मक लोगों से दूरी बनाएं और दोस्तों से जुड़ें

आपके अच्छे दोस्त आपके भाव और विचारो को अच्छा बनाने में आपकी मदद करते है। साथ ही ऐसे दोस्तों से अपने विचारो को साझा करके आपको आवश्यक सहानुभूति भी मिलती है। वही लोग आपकी बातों को ध्यान से सुनते हैं और उसके प्रति अपने विचार देते है डिप्रेशन के दौर में जब हम बिल्कुल अकेला महसूस करते है तो ऐसे में अगर कोई हमारे मन में चल रही बातो और मनोभावों को समझे या धैर्य से सुन भी ले तो हमें बहुत अच्छा लगता है। अपने ऐसे सकारात्मक दोस्तों से जुड़ने के साथ-साथ आप उन लोगों से दूर रहे, जो खुद परेशान है या नकारात्मकता विचारो से भरे होते हैं। ऐसे लोग खुद के साथ साथ हमेशा दुसरो का भी मनोबल गिराने का काम करते हैं।

6. अपनी नौकरी की करें समीक्षा

इन दिनों कार्यालयों में अपने कर्मचारियों को ख़ुश रखने की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं। पर आज कल ऐसा कम ही देखने को मिलता है की आप अपनी नौकरी या अन्य कर्मचारियो से खुश रहते है। यदि आप भी अपने कार्यस्थल पर चिंता या तनाव महसूस करते हैं तो अपनी नौकरी की समीक्षा करें। क्योकि हो सकता है कि आपकी नौकरी ही आपकी चिंता की असली वजह हो, अगर ये चिंता समय पर नहीं छोड़ी गयी तो आगे चलकर ये अवसाद का कारण बन सकती है। इसलिए हो सके तो ऐसी नौकरी को बदल दें और अपने क्षेत्र से सम्बंधित नौकरी ही करें, जो आपको खुशी और संतुष्टि दे, न की चिंता और तनाव और आप एक सुकूनभरी और तनावमुक्त जिंदगी जी सकें। हमेशा ऐसी ही नौकरी करे जो आपको खुशी और संतुष्टि दे, न की चिंता और तनाव।

7. अधिक चिंता या तनाव महसूस होने पर छुट्टियां लें

एक ही ऑफ़िस, शहर और दिनचर्या, रोज रोज ऐसा करके आप काफी बार बोरियत महसूस करने लगते हैं, जो आगे चलकर आपके मन में नकारात्मक विचार और फिर डिप्रेशन पैदा करते हैं। इसलिए अपनी जॉब के काम के साथ साथ एन्जॉय भी करे क्योकि माहौल बदलते रहने से आपके मन में चल रहे नकारात्मक विचारों को दूर रखने में मदद मिलती है। यदि आपको लंबी छुट्टी नही मिल रही हो तो वीकेंड में ही कहीं बाहर घूमने निकल लें या परिवार को अधिक समय दे। रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है की जो लोग नियमित रूप से महीने में मिलने वाली छुट्टी लेते है ऐसे लोगो की कार्यकुशलता, लगातार कई सप्ताह तक काम में लगे रहने वाले लोगों की तुलना में अधिक होती हैं।

8. अच्छी नींद लें

जब आप परेशान होते है तो एक अच्छी नींद आपके मन की नकारात्मक विचारो को कम करके फिर से आपके मन को तरोताजा बना देती है।
एक अच्छी और पूरी रात की नींद हमें सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। अध्ययनों में ये बात सामने आई है की रोज़ाना 7 से 8 घंटे की नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन के लक्षण कम देखे गए हैं। इसलिए अगर आप चिंतित है या अधिक व्यस्त रहने के कारण भरपूर नींद नहीं ले पाते है तो आज ही इस बुरी आदत को छोड़ दे क्योकि आपकी डिप्रेशन की समस्या का समाधान एक अच्छी नींद हो सकती है।

9. अपनी पसंद का संगीत सुनें

जब लोग डिप्रेशन में होते हैं तो अच्छा संगीत सुनकर काफी बेहतर महसूस करते है। यह एक साबित तथ्य है और कई वैज्ञानिक शोधों द्वारा प्रमाणित भी हो चुका है। तो आप अब जब भी मानसिक रूप से परेशान हों तो अपनी पसंद का गाना सुनें क्योकि संगीत में मन को अवसाद से निकालने की अद्‍भुत ताक़त होती है, अच्छा और आपकी पसंद का संगीत आपके नकारात्मक भावो को शांत करके आपके मूड को बदल देता है। पर जरुरी नहीं है की संगीत हमेशा ही आपके मन को शांत करता है क्योकि ये बात ध्यान रखने योग्य है, की ज़रूरत से ज़्यादा ग़म में डूबे हुए गाने और इमोशनल गाने आपको और भी ज्यादा डिप्रेस कर सकते है।

10. अकेले न रहे और पुरानी बातों के बारे में ज्यादा न सोचें

जब आप परेशान या डिप्रेशन में होते है तो आप अपने अंदर कमियाँ खोजने लगते है या पुरानी बातो को बारे में सोचने लगते है जो की बिल्कुल भी सही नहीं है क्योकि बीती हुई बातो को याद करके हम कुछ बदल तो नहीं सकते पर अपनी नकारात्मक सोच को बढ़ा कर, अपने डिप्रेशन को और भी ज्यादा गंभीर कर लेते है। अपनी पुरानी भूलों और ग़लतियों को सोचना आपको पूरी तरह से अवसाद के चंगुल में फंसा सकता है। ये सब पुरानी बाते सोचने से कुछ बदलने वाला नहीं है क्योकि आप भूतकाल को नहीं बदल सकते पर इतना ज्यादा सोच कर अपनी सेहत जरूर ख़राब कर लेंगे। इसलिए पुरानी बातों के बारे में सोचने के बजाय अपने आज पर फ़ोकस करें।




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