मूत्राशय प्रदाह,पेशाब मे जलन के उपचार

   



इस रोग में मूत्र खुलकर नहीं होता है और जलन की वजह से रोगी पूरा पेशाब नहीं कर पाता है और मूत्राषय में पेशाब बाकी रह जाता है। इस शेष रहे मूत्र में जीवाणुओं का संचार होकर रोगी की स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है।
आधुनिक चिकित्सक एन्टीबायोटिक दवाओं से इस रोग को काबू में करते हैं लेकिन कुदरती पदार्थॊं के उपचार भी इस रोग में हितकारी साबित होते है।
१) खीरा ककडी का रस इस रोग में अति लाभदायक है। २०० मिलि ककडी के रस में एक बडा चम्मच खीरा ककडी का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर तीन घंटे के फ़ासले से पीते रहें।
२) पानी और अन्य तरल पदार्थ प्रचुर मात्रा में प्रयोग करें। प्रत्येक १० -१५ मिनिट के अंतर पर एक गिलास पानी या फ़लों का रस पीयें। सिस्टाइटिज नियंत्रण का यह रामबाण उपचार है।
३) मूली के पत्तों का रस लाभदायक है। १०० मिलि रस दिन में ३ बार प्रयोग करें।
४) नींबू का रस इस रोग में उपयोगी है। वैसे तो नींबू स्वाद में खट्टा होता है लेकिन गुण क्षारीय हैं। नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायक होता है। मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ होता है।


५) पालक रस १२५ मिलि में नारियल का पानी मिलाकर पीयें। तुरंत फ़ायदा होगा। पेशाब में जलन मिटेगी।
६) पानी में मीठा सोडा यानी सोडा बाईकार्ब मिलाकर पीने से तुरंत लाभ प्रतीत होता है लेकिन इससे रोग नष्ट नहीं होता। लगातार लेने से स्थिति ज्यादा बिगड सकती है।
७) गरम पानी से स्नान करना चाहिये। पेट और नीचे के हिस्से में गरम पानी की बोतल से सेक करना चाहिये। गरम पानी के टब में बैठना लाभदायक है।
८) मूत्राषय प्रदाह रोग की शुरुआत में तमाम गाढे भोजन बंद कर देना चाहिये।दो दिवस का उपवास करें। उपवास के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल,पानी,दूध लेते रहें।
९) विटामिन सी (एस्कार्बिक एसिड) ५०० एम जी दिन में ३ बार लेते रहें। मूत्राषय प्रदाह निवारण में उपयोगी है।
१०) ताजा भिंडी लें। बारीक काटॆं। दो गुने जल में उबालें। छानकर यह काढा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिल जाती है।
११) आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाएं इसमें नींबू का रस ५ मिलि मिलाएं और पी जाएं। इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट होते है।

नींद नहीं आने (निद्राल्पता) के उपचार


नींद की कमी होना या निद्राहीनता की स्थिति को आधुनिक चिकित्सा में इन्सोम्निआ अथवा स्लीप डिसओर्डर कहते हैं। शरीर की क्रियाओं के संतुलित संचालन हेतु नींद की महता निर्विवाद मानी गई है। नींद से तनाव और चिंताओं का शमन होता है। वयस्क व्यक्ति के लिये ७ से ९ घंटे की नींद जरुरी है। हर इन्सान को जीवन में कभी न कभी निद्राहीनता की तकलीफ़ से रुबरू होना पडता है। निद्राहीनता से मस्तिष्क को वांछित आराम नहीं मिल पाता है जिससे दैनिक गतिविधियों में बाधा पडती है। आधुनिक चिकित्सा में निद्राल्पता की चिकित्सा के लिये कई दवाएं मौजूद हैं लेकिन इन दवाओं के शरीर पर अवांछित प्रभाव भी देखने में आ रहे हैं। अत: निद्राल्पता का 

कुदरती एवं घरेलू पदार्थों से इलाज करना उचित है।   

1) पोस्तदाना (पोपी सीड्स) सुबह पानी में गला दें शाम को थोडा सा पानी डालकर मिक्सर में चलाकर करीब ४० मिलि दूध बनालें। इसमें उचित मात्रा में शकर मिलाकर रात को सोते वक्त पियें। निद्राहीनता का बेहद कारगर उपचार है।
२) रात को सोते वक्त एक गिलास गाय का मामूली गरम मीठा दूध पीना हितकर है। 


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि 

७) केला,दही, हरी सब्जियां नींद की कमी में उपकारी है। ३) घी और मक्खन का उपयोग निद्राहीनता में लाभकारी हैं।
४) जायफ़ल ३-४ नग पीसकर पावडर बनालें। सोने से पहिले पानी के साथ लें गुणकारी उपचार है।
५) नियमित समय पर सोना और नियमित समय पर उठने का नियम बनाकर उस पर सख्ती से अमल करे। ९ बजे रात को सोना और सुबह ५ बजे उठना श्रेष्ठ नियम है।
६) रात को टीवी देखने से परहेज करें। 


गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

८) अपना पलंग मन-मुताबिक ही चुनें और जिस मुद्रा में आपको सोने में आराम महसूस होता हो, उसी मुद्रा में पहले सोने की कोशिश करें। अनचाही मुद्रा में सोने से शरीर की थकावट बनी रहती है, जो नींद में बाधा उत्पन्न करती है।
९) रात्रि भोजन करने के बाद पन्द्रह से बीस मिनट धीमी चाल से सैर कर लेने के बाद ही बिस्तर पर जाने की आदत बना लेनी चाहिए। इससे अच्छी नींद के अलावा पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है।
१०)  अगर तनाव की वजह से नींद नहीं आ रही हो या फिर मन में घबराहट सी हो तब अपना मन पसंद संगीत सुनें या फिर अच्छा साहित्य या स्वास्थ्य से संबंधित पुस्तकें पढ़ें, ऐसा करने से मन में शांति का भाव आएगा, जो गहरी नींद में काफी सहायक होता है।


किडनी फेल रोग का अचूक इलाज 


११) अनिद्रा के रोगी को अपने हाथ-पैर मुँह स्वच्छ जल से धोकर बिस्तर पर जाना जाहिए। इससे नींद आने में कठिनाई नहीं होगी। एक खास बात यह कि बाजार में मिलने वाले सुगंधित तेलों का प्रयोग नींद लाने के लिए नहीं करें, नहीं तो यह आपकी आदत में शामिल हो जाएगा।
१२)  सोते समय दिनभर का घटनाक्रम भूल जाएँ। अगले दिन के कार्यक्रम के बारे में भी कुछ न सोचें। सारी बातें सुबह तक के लिए छोड़ दें। दिनचर्या के बारे में सोचने से मस्तिष्क में तनाव भर जाता है, जिस कारण नींद नहीं आती।


पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

१३) अगर अनिद्रा की समस्या पुरानी और गंभीर है, नींद की गोलियाँ खाने की आदत बनी हुई है तो किसी योग चिकित्सक की सलाह लेकर शवासन का अभ्यास करें और रात को सोते वक्त शवासन करें। इससे पूरे शरीर की माँसपेशियों का तनाव निकल जाता है और मस्तिष्क को आराम मिलता है, जिस कारण आसानी से नींद आ जाती है।
१४) अच्छी नींद के लिए कमरे का हवादार होना भी जरूरी है। अगर मौसम बाहर सोने के अनुकूल है तो छत पर या बाहर सोने को प्राथमिकता दें। कमरे में कूलर-पँखा या फिर एयर कंडीशनर का शोर ज्यादा रहता है, तो इनकी भी मरम्मत करवा लेनी चाहिए, क्योंकि शोर से मस्तिष्क उत्तेजित रहता है, जिस कारण निद्रा में बाधा पड़ जाती है।
१५) )  सोने से पहले चाय-कॉफी या अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करें। इससे मस्तिष्क की शिराएँ उत्तेजित हो जाती हैं, जो कि गहरी नींद आने में बाधक होती हैं।


*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार*

*सिर्फ आपरेशन नहीं ,प्रोस्टेट वृद्धि की 100% अचूक हर्बल औषधि *

जोड़ों और हड्डियों में दर्द के कारण, लक्षण और उपचार

बहरापन का ईलाज

   

      बहरापन के रोग में रोगी को एक या दोनों कानों से अंशतः या पूर्णतः सुनाई नहीं देता है | यह स्थिति जन्मजात भी हो सकती है और बाद में किन्हीं और कारणों से हो सकती है | जन्मजात बहरापन असाध्य होता है लेकिन दूसरी तरह का बहरापन चिकित्सा से आरोग्य हो जाता है | बहरापन के कारणों में – सर्दी लगना, स्नायविक कमजोरी, पुराना जुकाम शोरगुल वाले वातावरण में रहना, कनपटी पर तेज आघात लगना , कान बहने का रोग पुराना पड़ जाना आदि प्रमुख है |
यदि एकदम से कान बन्द हो गया हो और कुछ भी सुनाई न दे तो ऐसी स्थिति में एसारम यूरोपियम 30 या 200 देनी चहिये ।



मवाद बंनने से बहरापन होना –

 कॉस्टिकम 200, IM – यदि कान बहने के कारण बन्द हो गया हो तो सबसे पहले लक्षणानुसार कान को सुखने की दवा देनी चाहिये । कान सूख जाने के बाद कॉस्टिकम 200 या 1M की एक मात्रा ही देनी चाहिये। इससे सुनाई न देने की स्थिति ठीक हो जाती है। अगर इससे भी लाभ न हो तो लक्षणानुसार अन्य औषधियों का चयन करना चाहिये।

शीघ्र पतन से निजात पाने के उपचार  


मैल जमने से बहरापन होना –

 मुलेन ऑयल – यदि कान में मैल आदि जम जाने के कारण सुनाई देना बंद हो गया हो तो सबसे पहले रुई आदि की सहायता से कान को साफ़ करना चाहिये। फिर कान में मूलन ऑयल को नियमित रूप से एक दो माह तक डालना चाहिये, इससे बहरेपन में अत्यन्त लाभ होगा ।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

घुटनों में दर्द मे घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे


                                              


            
घुटना शरीर का  भार  सहता है,उसे सपोर्ट  करता है और  चलायमान बनाता है| लेकिन घुटनों में विकार आने पर  रोजमर्रा  के काम करने में कठिनाई महसूस होने लगती है|  जीवन में कभी न कभी  घुटनों के दर्द  की समस्या  से सभी स्त्री-पुरुषों को रूबरू होना ही पड़ता है|   कुछ लोग जवानी में ही इस दर्द की चपेट में आ जाते हैं  और बुढापा तो  घुटनों की पीड़ा  के लिए खास तौर पर जाना जाता है|

बालों के झड़ने और गंजेपन के रामबाण उपचार 

 घुटनों के अंदरूनी या मध्य भाग में दर्द  छोटी मोटी चोंटों या  आर्थराईटीज के कारण हो सकता है|  लेकिन घुटनों के पीछे का दर्द  उस जगह द्रव संचय  होने से होता है इसे  बेकर्स  सिस्ट कहते हैं|  सीढ़ियों से नीचे उतरते वक्त  अगर घुटनों में दर्द होता है तो इसे नी केप  समस्या जाननी चाहिए | यह लक्षण  कोंट्रोमलेशिया का भी हो सकता है|  सुबह के वक्त उठने पर अगर आपके घुटनों में दर्द होता है तो इसे आर्थराई टीज की शुरू आत समझनी चाहिए\ चलने फिरने से यह दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है|  बिना किसी चोंट या  जख्म  के  अगर घुटनों  में सूजन दिखे तो  यह ओस्टियो आर्थ रा ईटीज,गाऊट अथवा जोड़ों का संक्रमण  की वजह से होता है| 






घुटनों के दर्द की चिकित्सा -



  घुटनों में दर्द को कम करने के लिए गरम या ठंडे पेड  से सिकाई की जरूरत  हो सकती है|  घुटनों में तीव्र  पीड़ा होने पर आराम की सलाह डी जाती है ताकि दर्द और सूजन कम हो सके\  फिजियो थेरपी  में चिकित्सक  विभिन्न  प्रक्रियाओं के द्वारा  घुटनों के दर्द  और सूजन को कम करने का प्रयास करते हैं\ 
     भोजन द्वारा इलाज के अंतर्गत  रोजाना ३-४ खारक  खाते रहने से घुटनों की शक्ति को बढ़ाया जा सकता  है| अस्थियों को मजबूत बनाए रखने के लिए केल्शियम का सेवन करना उपकारी है|  केल्शियम की ५०० एम् जी की गोली सुबह शाम लेते रहें| | दूध ,दही,ब्रोकली और मछली  में  पर्याप्त  केल्शियम होता है| 
     घुटनों के लचीलेपन को बढाने के लिए  दाल चीनी,जीरा,अदरक और हल्दी का उपयोग उत्तम फलकारी है|   इन पदार्थों में ऐसे तत्त्व पाए जाते हैं जो घुटनों  की सूजन और दर्द का निवारण करते हैं|
   गाजर  में जोड़ों में दर्द  को दूर करने के गुण मौजूद हैं |चीन में सैंकडों वर्षों  से गाजर का इस्तेमाल संधिवात  पीड़ा के लिए किया जाता रहा है| गाजर को पीस लीजिए और इसमें थोड़ा सा नीम्बू का रस मिलाकर  रोजाना खाना उचित है| यह घुटनों के लिगामेंट्स  का पोषण कर  दर्द निवारण का काम करता है|
 मैथी के बीज संधिवात की पीड़ा निवारण करते हैं|  एक चम्मच मैथी बीज रात भर साफ़ पानी में गलने दें | सुबह  पानी निकाल दें और मैथी के बीज  अच्छी तरह चबाकर  खाएं|  शुरू में तो कुछ कड़वा  लगेगा  लेकिन बाद में कुछ मिठास  प्रतीत होगी|  भारतीय चिकित्सा में मैथी बीज  की गर्म तासीर मानी गयी है|  यह गुण जोड़ों के दर्द  दूर करने में मदद करता है|

किडनी फेल्योर(गुर्दे खराब) रोगी घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार

      प्याज अपने सूजन विरोधी  गुणों  के कारण  घुटनों की पीड़ा में लाभकारी हैं| दर असल प्याज में फायटोकेमीकल्स पाए जाते हैं जो हमारे  इम्यून  सिस्टम  को ताकतवर बनाते हैं|  प्याज में पाया जाने वाला गंधक  जोड़ों में दर्द  पैदा करने वाले एन्जाईम्स  की उत्पत्ति रोकता है|  एक ताजा रिसर्च  में पाया गया है कि  प्याज में  मोरफीन  की तरह के पीड़ा नाशक गुण होते हैं|





    गरम तेल से हल्की मालिश करना घुटनों के दर्द में बेहद उपयोगी है|  एक बड़ा चम्मच  सरसों के तेल  में लहसुन की २ कुली पीसकर डाल दें | इसे गरम करें कि लहसुन  भली प्रकार पक जाए|  आच से उतारकर मामूली गरम हालत  में इस तेल से घुटनों या जोड़ों की मालिश करने से दर्द में तुरंत राहत मिल जाती है|  इस तेल में संधिवात की सूजन दूर करने के गुण  हैं|   घुटनों की पीड़ा निवारण की यह असरदार चिकित्सा है|
   जोड़ों की पीड़ा  दूर करने  के लिये   तेल निर्माण  करने का एक  बेहद  असरदार  फार्मूला  नीचे लिख रहा हूँ ,जरूर प्रयोग करें-
   काला उड़द १० ग्राम ,बारीक पीसा हुआ अदरक ५ ग्राम ,पीसा हुआ कर्पूर  २ ग्राम लें|  ये तीनों पदार्थ ५0 ग्राम सरसों के तेल में  ५ मिनिट तक गरम करें और  आंच से उतारकर  छानकर  बोतल में भर लें|  मामूली गरम  इस तेल से जोड़ों  की मालिश करने से दर्द में   आराम मिलता है|  दिन में २-३ बार मालिश करना उचित है|  यह तेल आर्थ्रराईटीज जैसे दर्दनाक रोगों में भी गजब का असर दिखाता है|
   प्रतिदिन नारियल की गिरी का सेवन करें|इससे घुटनों  को ताकत  आती है|
लगातार 20 दिनों तक अखरोट की गिरी खाने से घुटनों का दर्द समाप्त होता है।
   बिना कुछ खाए प्रतिदिन प्रात: एक लहसन कली, दही के साथ दो महीने तक लेने से घुटनों के दर्द में चमत्कारिक लाभ होता है।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि


विशिष्ट परामर्श-  


     संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| औषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है|






  

हड्डियों को फौलाद के समान मजबूत बनाने के उपचार



                                                                    
 ५० वर्ष की आयु के बाद शरीर की अस्थियां कमजोर होने लगती हैं,इसे अस्थि भंगुरता,अस्थि मृदुता या अस्थि  क्षरण कहते हैं। हड्डिया  पतली और खोखली होने लगती हैं और इतनी कमजोर व भंगुर हो जाती है कि झुककर किसी वस्तु को उठाने या साधारण भार पडने अथवा मामूली सी चोंट लगने पर भी  अस्थि-भंग(बोन फ़्रेक्चर)हो जाता है। केल्सियम,फ़ास्फ़ोरस व अन्य  तत्व की कमी हो जाने से  अस्थि मृदुता रोग होता है। इन तत्वों की कमी से अस्थि-घनत्व( बोन डेन्सिटी)का स्तर गिर जाता है। यह रोग पुरुषों की बजाय महिलाओं में ज्यादा होता है। कुल्हे की हड्डी, कलाई की हड्डी और रीढ की हड्डी के  फ़्रेक्चर  की घटनाएं  ज्यादा होती हैं।
  अस्थि भंगुरता के लिये निम्न कारण जिम्मेदार माने जाते हैं---
१) अधिक आयु होना
२) शरीर का वजन कम होना
३) कतिपय अंग्रेजी दवाएं अस्थि भंगुरता जनक होती हैं
४) महिलाओं में रितु निवृत्ति होने पर एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरने लगता है। एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों की मजबूती के लिये अति आवश्यक  हार्मोन होता है।
५) थायराईड हारमोन
६)  कोर्टिकोस्टराईड दवाएं लंबे समय तक उपयोग करना।
७)भोजन में केल्सियम तत्व-अल्पता
८)  तम्बाखू,और शराब का अधिक सेवन करना
९)  केमोथिरेपी




अस्थि भंगुरता का इलाज कुदरती पदार्थों से करना आसान ,कम खर्चीला ,आशु प्रभावी और साईड इफ़ेक्ट रहित होने से प्रयोजनीय है ---
१)  मांस खाना छोड दें। मांस में ज्यादा प्रोटीन होता है और यह प्रोटीन शरीर के केल्सियम को मूत्र के जरिये बाहर निकालता है। केल्शियम अल्पता से अस्थि-भंगुरता होती है। मांस की बजाय हरी पत्तेदार सब्जियों का प्रचुरता से उपयोग करें।
२)  प्रतिदिन १००० एम.जी.केल्सियम और ५०० एम.जी. मेग्नेशियम उपयोग करें। यह  ओस्टियो पोरोसिस( अस्थि मृदुता) का उम्दा इलाज है।खोखली और कमजोर अस्थि-रोगी को यह उपचार अति उपादेय है।
३)  एक चम्मच शहद नियमित तौर पर लेते रहें। यह आपको अस्थि भंगुरता  से बचाने का बेहद उपयोगी नुस्खा है।
४)  वसा रहित पावडर का दूध केल्सियम की आपूर्ति के लिये श्रेष्ठ है। इससे हड्डिया ताकतवर बनती हैं। गाय या बकरी का दूध भी लाभकारी है।
५)  विटामिन "डी " अस्थि मृदुता में परम उपकारी माना गया है।  विटामिन डी की प्राप्ति सुबह के समय धूपमें बैठने से हो सकती है। विटामिन ’डी" शरीर में केल्सियम  संश्लेशित करने में सहायक होता है।शरीर का २५ प्रतिशत भाग खुला रखकर २० मिनिट धूपमें बैठने की आदत डालें।
६)   अधिक दूध वाली चाय पीना हितकर है। दिन में एक बार पीयें।
७) सोयाबीन के उत्पाद अस्थि मृदुता निवारण में महत्वपूर्ण हैं। इससे औरतों में एस्ट्रोजिन हार्मोन का संतुलन बना रहता है। एस्ट्रोजिन हार्मोन की कमी  महिलाओं में अस्थि मृदुता पैदा करती है।सोयाबीन का दूध पीना उत्तम फ़लकारक होता है।
८)  केफ़िन तत्व की अधिकता वाले पदार्थ के उपयोग में सावधानी बरतें।  चाय और काफ़ी में अधिक केफ़िन तत्व होता है। दिन में बस एक या दो बार चाय या काफ़ी ले सकते हैं।
९) बादाम अस्थि मृदुता निवारण में उपयोगी है। ११ बादाम रात को पानी में गलादें। छिलके उतारकर गाय के २५० मिलि दूध  के साथ मिक्सर या ब्लेन्डर में चलावें।  नियमित उपयोग से हड्डियों को भरपूर केल्शियम मिलेगा और अस्थि भंगुरता का  निवारण करने में मदद मिलेगी।





१०) बन्द गोभी में बोरोन तत्व पाया जाता है। हड्डियों की मजबूती में इसका अहम योगदान होता है। इससे खून में एस्ट्रोजीन का स्तर बढता है जो महिलाओं मे अस्थियों की मजबूती बढाता है। पत्ता गोभी की सलाद और सब्जी प्रचुरता से इस्तेमाल करें।
११) नये अनुसंधान में जानकारी मिली है कि मेंगनीज तत्व अस्थि मृदुता में अति उपयोगी है। यह तत्व साबुत गेहूं,पालक,अनानास,और सूखे मेवों में पाया जाता है। इन्हें भोजन में शामिल करें।
१२)  विटामिन  "के" रोजाना ५० मायक्रोग्राम  की मात्रा में लेना  हितकर है। यह अस्थि भंगुरता में लाभकारी है।
१३) सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हड्डियों की मजबूती के लिये नियमित व्यायाम करें और स्वयं को घर के कामों में लगाये रखें।
१४) भोजन में नमक की मात्रा कम कर दें। भोजन में नमक ज्यादा होने से सोडियम अधिक मात्रा मे उत्सर्जित होगा और इसके साथ ही केल्शियम भी बाहर निकलेगा।
१५) २० ग्राम तिल थोडे से गुड के साथ मिक्सर में चलाकर तिलकुट्टा बनालें। रोजाना सुबह उपयोग करने से अस्थि मृदुता निवारण में मदद मिलती है।
१६) टमाटर का जूस आधा लिटर प्रतिदिन पीने से दो तीन माह में हड्डियां बलवान बनती है और अस्थि भंगुरता में आशातीत लाभ होता है।१७) केवल एक मुट्ठी  मूंगफली से आप हड्डियों से सम्बन्धित सभी परेशानियों से मुक्ति पा सकते हैं|  मूंगफली आयरन, नियासीन,फोलेट,केल्सियम और जिंक का अच्छा स्रोत है| इसमें विटामिन ई , के और बी ६ प्रचुर मात्रा में होते हैं| केल्सियम और विटामिन  डी अधिक मात्रा में होने से यह हड्डियों की कमजोरी दूर करती है|  इससे दांत भी मजबूत होते हैं|  इसमें पाया जाने वाला विटामिन बी-३ हमारे दिमाग को तेज करने में मदद करता है|  मूंगफली में मौजूद फोलेट तत्त्व  गर्भा में पल रहे बच्चे के लिए लाभकारी होता है|

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

शरीर की चर्बी घटाने वाली जड़ी बूटियां



आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां हमारी प्रकृति द्वारा दिया गया एक ऐसा वरदान है जो हमारे शरीर के लिए अनेक प्रकार से लाभदायक है। ये जड़ी बूटियां हमारे शरीर से अतिरिक्त वजन को घटाने में भी प्रभावी होती हैं। जड़ी बूटियों का उपयोग आंतरिक और बाहृ दोनों रूपों में किया जाता है। पेट पर जमी चर्बी को कम करने के लिए यह जड़ी-बूटियां बेहद काम की साबित हो सकती हैं। इन प्राकृतिक हर्बस का इस्‍तेमाल करके आप कई प्रकार की बीमारियों का घरेलू उपचार भी कर सकते हैं। इन जड़ी बूटियों का नियमित प्रयोग न केवल आपके वजन को कम करने में मदद कर सकता है बल्कि यह पेट संबंधी अन्‍य समस्‍याओं को भी रोक सकता है। इस आर्टिकल में कुछ ऐसी ही स्‍वदेशी जड़ी बूटियों की जानकारी दी गई है जिनके औषधीय गुण आपको वजन कम करने और मोटापा घटाने के साथ-साथ फिट बॉडी रखने में मदद कर सकतीं हैं।
अक्‍सर हम वजन कम करना तो चाहते हैं लेकिन हम सफल नहीं हो पाते हैं। क्‍योंकि हमारे भोजन करने का तरीका गलत है। अक्‍सर हम ऐसे खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करते हैं जो हमारे वजन को बढ़ा सकते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों में फास्‍ट फूड्स सबसे ऊपर हैं। जैसे कि केक, पिज्‍जा, बर्गर्स, चिप्‍स और अन्‍य प्रसंस्‍कृत खाद्य पदार्थ। लेकिन जो लोग इस प्रकार का भोजन नहीं करते हैं उन्‍हें भी अपना वजन घटाने में परेशानी आती है। लेकिन कुछ विशेष जड़ी बूटियों और मसालों का उपयोग कर आप अपने वजन को कम कर सकते हैं। क्‍योंकि ये जड़ी बूटी आपकी चयापचय प्रणाली को बेहतर बनाने में सहायक होती हैं। तो चलिए जानते हैं वज़न घटाने के लिए कुछ ज़रूरी जड़ी बूटियां के बारे में।
गुग्‍गुल का अर्क
गुग्‍गुल एक औषधीय जड़ी बूटी है जो कि कोमीफोरा मुकुला (Comifora mukula) वृक्ष की गोंद या राल होती है। गुग्गुल का इस्‍तेमाल प्राचीन समय से ही आयुर्वेदिक चिकित्‍सा में किया जा रहा है। गुग्‍गुल के अर्क में गुग्गुलस्‍टेरोन नामक एक फाइटोस्‍टेरॉइड होता है। इसमें कोल्‍स्‍ट्रॉल बहुत ही कम होता है इसके अलावा इसमें कैंसर-रोधी और एंटी-एंजियो‍जेनिक (anti-angiogenic) गुण भी होते हैं। जिसके कारण यह चयापचय प्रणाली को तेज करने और वजन घटाने में मदद कर सकता है। गुग्गुल शरीर में खराब कोलेस्‍ट्रॉल के स्तर को भी कम करता है जिससे मोटापे और हृदय संबंधी समस्‍याओं से बचा जा सकता है।
गुग्‍गुल एक औषधीय जड़ी बूटी है जो कि कोमीफोरा मुकुला (Comifora mukula) वृक्ष की गोंद या राल होती है। गुग्गुल का इस्‍तेमाल प्राचीन समय से ही आयुर्वेदिक चिकित्‍सा में किया जा रहा है। गुग्‍गुल के अर्क में गुग्गुलस्‍टेरोन नामक एक फाइटोस्‍टेरॉइड होता है। इसमें कोल्‍स्‍ट्रॉल बहुत ही कम होता है इसके अलावा इसमें कैंसर-रोधी और एंटी-एंजियो‍जेनिक (anti-angiogenic) गुण भी होते हैं। जिसके कारण यह चयापचय प्रणाली को तेज करने और वजन घटाने में मदद कर सकता है। गुग्गुल शरीर में खराब कोलेस्‍ट्रॉल के स्तर को भी कम करता है जिससे मोटापे और हृदय संबंधी समस्‍याओं से बचा जा सकता है।
वजन कम करने के लिए गुग्‍गुल का उपयोग कैसे करें
यदि आप वजन कम करने का प्रयास कर रहे हैं तो गुग्‍गुल और त्रिफला चूर्ण का उपयोग कर सकते हैं। गुग्‍गुल थायराइड हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करता है साथ ही चयापचय को भी बढ़ाता है। त्रिफला पाचन समस्‍याओं को दूर करता है और पेट को साफ रखता है।
आमतौर पर वजन घटाने के लिए गुग्‍गुल की 25 मि‍ली ग्राम मात्रा को दिन में 3 बार लेने की सलाह दी जाती है। आप लगभग 1 ग्राम गुग्‍गुल को लें और अपनी जीभ के नीचे रखें और इसे धीरे-धीरे घुलने दें। इसके अलावा आप गुग्‍गुल के अर्क और त्रिफला चूर्ण का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको ¼ चम्मच गुग्‍गुल अर्क, ½ कप पानी और ½ चम्‍मच त्रिफला चूर्ण चाहिए। आप पानी में गुग्‍गुल और त्रिफला को मिलाकर रात भर के लिए छोड़ दें। इसके बाद अगली सुबह इस मिश्रण को छानकर पीएं। यह उपाय तेजी से आपके वजन को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। लेकिन आपको सलाह दी जाती है इस उपाय को अपनाने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह लें। अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से उल्‍टी, मतली और दस्‍त होने की संभावना अधिक होती है।
वजन घटाने वाली जड़ी बूटी जिनसेंग
जिनसेंग एक धीमी गति से बढ़ने वाला बारहमासी औषधीय पौधा है जिसकी जड़ें मांसल होती हैं। अध्‍ययनों से पता चलता है कि जिनसेंग में अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य के साथ ही वजन घटाने वाले गुण भी होते है। जिनसेंग का उपयोग डायबिटीज और कोलेस्‍ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए भी किया जा सकता है। ये समस्‍याएं भी वजन बढ़ने में अहम योगदान देती हैं। लेकिन इन समस्‍याओं से बचने और मोटापे को कम करने के लिए आप जिनसेंग का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह आपके चयापचय को बेहतर बनाने और आपको आवश्‍यक ऊर्जा दिलाने का प्रभावी घरेलू नुस्‍खा हो सकता है।
सामान्‍य रूप से प्रतिदिन दो बार 5-5 ग्राम जिनसेंग अर्क का सेवन किया जाना फायदेमंद होता है। लेकिन औषधीय गुणों से भरपूर अदरक का उपयोग आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभकारी होता है। लेकिन यदि आप अपने वजन को कम करना चाहते हैं तो अदरक चाय एक बेहतर विकल्‍प हो सकता है। क्‍योंकि अदरक की चाय वजन को कम करने और सकारात्‍मक जीवन जीने की प्रक्रिया में अपना अहम योगदान देती है। अदरक में मौजूद घटक शरीर में अतिरिक्‍त वसा को हटाने में सहायक होते हैं। जिससे आपको सामान्‍य वजन प्राप्‍त करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा अदरक में फाइबर की उच्‍च मात्रा आपकी भूख को भी नियंत्रित करने में मदद करती है। इस तरह से यदि आप अपने वजन को कम करने का प्रयास कर रहे हैं तो अदरक की चाय का नियमित सेवन प्रारंभ कर सकते हैं।आप दो सप्‍ताह के बाद इस

ग्रीन टी
औषधीय गुणों के कारण ग्रीन टी को भी औषधीय जड़ी बूटी माना जाता है। ग्रीन टी वजन घटाने के लिए सबसे अच्‍छी हर्बल चाय मानी जाती है। इसमें कैटेचिन (catechins) नामक एंटीऑक्‍सीडेंट होता है। यह चयापचय बूस्‍टर के रूप में काम करता है। ग्रीन टी में कैफीन की बहुत ही मात्रा होती है। लेकिन यह कैफीन वसा को जलाने में प्रभावी योगदान देता है। आप भी यदि अपने वजन को प्रबंधित करना चाहते हैं तो ग्रीन टी के लाभ ले सकते हैं। ग्रीन टी भूख को कम करने में भी प्रभावी होती है।पानी के साथ भी कर सकते हैं।

ग्रीन टी बनाने की विधि

ग्रीन टी बनाने के लिए आपको 2 चम्मच ग्रीन टी की पत्तियां, 1 कप पानी और ¼ चम्मच दालचीनी पाउडर की आवश्‍यकता होती है।
ग्रीन टी बनाने के लिए आप 1 कप पानी को गर्म करें और फिर दालचीनी पाउडर मिलाकर 2 मिनिट तक उबालें। इसके बाद आंच को धीमा करें और ग्रीन टी की पत्तियों को मिलाएं। आपकी चाय बनकर तैयार है। आप इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शहद या नींबू के रस का भी उपयोग कर सकते हैं। ग्रीन टी और दालचीनी में वजन घटाने वाले गुण होते हें। इसलिए मोटापे से परेशान लोगों के लिए ग्रीन टी की चाय एक औषधीय चाय मानी जाती है।
वजन कम करने के लिए गुड़हल की चाय
हिबिस्‍कस चाय पेट की जलन को रोकने में मदद करती है। गुड़हल के फूल का उपयोग आयुर्वेद में जड़ी बूटी के रूप में किया जाता है। हिबिस्‍कस में मूत्र वर्धक गुण होते हैं इसके अलावा यह कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने और मल त्‍याग को आसान बनाने में सहायक होता है। यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो अपनी चाय में गुड़हल का उपयोग कर सकते हैं। गुड़हल की चाय वजन कंट्रोल करने का एक प्रभावी घरेलू नुस्खा है।
गुड़हल की चाय बनाने के लिए सामग्री
आपको 2 चम्‍मच सूखे गुड़हल के फूल, 2 कप पानी और 1 चम्मच शहद की आवश्‍यकता है। आप 2 कप पानी को अच्‍छी तरह से गर्म करें और इसमें गुड़हल के सूखे फूल 5 से 7 मिनिट के लिए छोड़ दें। फिर इस गुड़हल की चाय को कप में छान लें। इस चाय को थोड़ा ठंडा होने दें और फिर 1 चम्मच शहद मिलाएं। इस चाय का नियमित सेवन करने से आपको बॉडी फैट कम करने में मदद मिल सकती है।
वजन कम करने के लिए जिनसेंग की चाय
जिनसेंग की चाय बनाने के लिए आपको 3 चम्मच जिनसेंग का अर्क, 500 मिली लीटर पानी, 1 बड़ा चम्मच नींबू का रस और ½ चम्मच दालचीनी पाउडर की आवश्‍यकता होती है। चाय बनाने के लिए एक बर्तन में पानी, दालचीनी और जिनसेंग अर्क को गर्म करें। इसके बाद मिश्रण को छान लें और फिर इसमें नींबू का रस मिलाएं। वेट लॉस के लिए आयुर्वेदिक जड़ी बूटी वाली चाय तैयार है। आप अपने वजन को कम करने के लिए इसे नियमित रूप से सेवन कर सकते हैं। यदि जिनसेंग की चाय का सेवन करने के बाद एलर्जी का अनुभव करते हैं तो इसका उपयोग बंद कर दें और डॉक्‍टर से संपर्क करें।
गुड़मार
2012 मे किये गए अध्‍ययनों से पता चलता है कि गुड़मार (Gymnema Sylvestre) का उपयोग कर बढ़े हुए वजन को कम किया जा सकता है। 8 सप्‍ताह के दौरान शोधकर्ताओं ने मोटापे के लिए चूहों पर अध्‍ययन किया। जिसमें पाया गया कि गुड़मार के पूरक पदार्थों (Supplemental) का सेवन करने से चूहों के वजन में कमी हुई। अध्‍ययन के परिणाम उल्‍लेखनी थे क्‍योंकि जिमनेमा ने शरीर के वजन, खाद्य खपत, ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides), कुल कोलेस्‍ट्रोल, एलडीए कोलेस्‍ट्रोल, वीएलडीएल कोलेस्‍ट्रोल और रक्‍त शर्करा में काफी कमी की। गुडमार का सेवन करने से एचडीएल कोलेस्‍ट्रोल (HDL cholesterol) के स्‍तर को भी बढ़ाया जा सकता है। यदि आपको लगता है कि आपका वजन (weight) बढ़ रहा है तो आप इसे नियंत्रित करने के गुड़मार का उपयोग कर सकते हैं।
गुड़मार का उपयोग
यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो जड़ी बूटी के रूप में गुड़मार की पत्तियों का उपोग कर सकते हैं। गुड़मार की पत्तियों को प्रतिदिन 400 मिलीग्राम तक लिया जा सकता है। यदि आप गुड़मार की सूखी पत्तियों का इस्‍तेमाल करते हैं तो प्रतिदिन 1-2 ग्राम मात्रा का सेवन किया जाना चाहिए।
एलोवेरा
एलोवेरा एक औषधीय जड़ी बूटी है जिसकी मांसल पत्तियों का उपयोग किया जाता है। इन पत्तियों में मौजूद एक तरह का जेल होता है जिसका उपयोग त्‍वचा और बालों की समस्‍याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। लेकिन एलोवेरा का इस्‍तेमाल वजन घटाने और पाचन संबंधी समस्‍याओं के लिए प्रभावी होता है। एलोवेरा में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट बॉडी को डेटॉक्सिफाई (Detoxify) करने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह चयापचय को बढ़ाने में भी सहायक होता है। आप वेट लॉस जड़ी बूटी के रूप में भी एलोवेरा और इसके जूस का उपयोग कर सकते हैं।
एलोवेरा का उपयोग
आप हर दिन 1 से 2 चम्मच एलोवेरा जेल का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा आप इसे सुबह के समय लिये जाने वाली आपकी स्‍मूदी में भी मिलाया जा सकता है।
एलोवेरा जूस बनाने की विधि
शरीर की चर्बी कम करने के लिए एलोवेरा जूस बहुत ही प्रभावी होता है। इसे बनाने के लिए आपको 1 चम्मच एलोवेरा जेल और 1 कप पानी की आवश्‍यकता होती है। आप पानी में एलोवेरा जेल को अच्‍छी तरह से मिलाएं और सेवन करें। नियमित रूप से एलोवेरा जूस का सेवन करने से त्‍वचा और बालों के साथ ही आपका पाचन तंत्र भी स्‍वस्‍थ रहेगा।
गुड़मार उपयोग करने की विधि
इसके लिए आपको 1 चम्मच गुड़मार पाउडर, 1 कप गर्म पानी और 1 चम्मच शहद की आवश्‍यकता होती है। आप 1 कप पानी को गर्म करें और इसमें गुड़मार पाउडर मिलाएं। इस मिश्रण को 5 से 7 मिनिट तक गर्म करें और फिर इसे कप में छान लें। अब आप इसमें शहद को मिलाएं और सेवन करें। इस जड़ी बूटी वाली चाय में शहद का मिश्रण वजन घटाने की प्रक्रिया को गति देता है। इसके अलावा गुड़मार का स्‍वाद कुछ कड़वा होता है इसलिए चाय को प्राकृतिक रूप से मीठा बनाने के लिए शहद एक अच्‍छा विकल्‍प है।
दालचीनी
दालचीनी भी एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसे मसाले के रूप में उपयोग किया जाता है। आप अपने वजन को कम करने के लिए दालचीनी चाय का उपभोग कर फायदे प्राप्‍त कर सकते हैं। अध्‍ययनों से प्रमाणित कर दिया है कि दालचीनी शरीर में अतिरिक्‍त वसा को कम करने में मदद करती है। हमारे शरीर के वजन बढ़ने का प्रमुख कारण वसा की अधिक मात्रा होती है। यह वसा हमारे शरीर में जमा होकर मोटापे का रूप ले लेता है, जो आपके शरीर में इंसुलिन की मात्रा को कम कर सकता है। दालचीनी से धीरे-धीरे आपका शरीर संग्रहीत वसा का उपभोग कर आपके वजन को कम कर सकता है। यदि आप अपने वजन में नियंत्रण रखना चा‍हते हैं तो नियमित रूप से दालचीनी चाय का उपभोग कर सकते हैं। यह वजन प्रबंधन का सबसे अच्‍छा उपाय हो सकता है।
दालचीनी का उपयोग कैसे करें
सामान्‍य रूप से वजन कम करने के लिए आप 1 से 2 चम्मच दालचीनी पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यदि आपके पास दालचीनी पाउडर नहीं है तो आप दालचीनी की छाल के 1 या 2 टुकड़े को 1 कप पानी में रात भर भीगने दें। अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त करने के लिए आप लगभग 4 सप्‍ताह तक दालचीनी का पानी या चाय का सेवन करें।
इलायची
बेहतरीन स्‍वाद के लिए लोकप्रिय मसाले के रूप में इलायची का उपयोग किया जाता है। इलायची में थर्मोजेनिक (thermogenic) गुण होते हैं। इसका मतलब यह है कि यह जड़ी बूटी शरीर को गर्म रखने के लिए वसा को जलाने में मदद करती है। इलायची चयापचय को बढ़ती है जिससे अतिरिक्‍त वसा को कम करने में मदद मिल सकती है। नियमित रूप से इलायची का सेवन पेट में गैस के निर्माण को रोकता है। आयुर्वेदिक चिकित्‍सा में इलायची का व्‍यापक उपयोग किया जाता है। वेट लॉस हर्ब के रूप में इलायची का सेवन करना आपके लिए भी फायदेमंद हो सकता है।
इलायची का सेवन कैसें करें
यदि आप शरीर की चर्बी दूर करना चाहते हैं तो नियमित रूप से प्रतिदिन 1 छोटा चम्मच इलायची पाउडर का सेवन कर सकते हैं।
इलाचयी से वजन घटाने की विधि
जो लोग मोटापे को कम करना चाहते हैं वे इलायची का उपयोग विभिन्‍न प्रकार से कर सकते हैं। लेकिन बॉडी फैट करने के लिए इलायची की चाय अधिक प्रभावी होती है। इसके लिए आपको चाहिए 1 चम्मच इलायची पाउडर, 1 कप पानी, 1 चम्मच ग्रीन टी की पत्तियां।
1 कप पानी को उबालें और इसमें इलायची पाउडर मिलाएं। 2 मिनिट के बाद आंच को धीमा करें और फिर ग्रीन टी की पत्तियां मिलाएं। लगभग 5 मिनिट के बाद आप चाय को कप में छान लें और इसका सेवन करें। ग्रीन टी के साथ इलायची के औषधीय गुण मिलकर चयापचय बूस्‍टर का काम करते हैं। साथ ही यह शरीर में मौजूद विषाक्‍तता को भी आसानी से बाहर कर सकते हैं। इलायची शरीर के तापमान को भी बढ़ाती है जिससे चर्बी को कम करने में मदद मिल सकती है।
लहसुन
लहसुन एक जादूई जड़ी बूटी है जिसमें वजन कम करने के सा‍थ ही अन्‍य उपचार गुण होते हैं। लहसुन का नियमित सेवन प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में भी प्रभावी होता है। अध्‍ययनों से पता चलता है कि लहसुन उन जड़ी बूटियों की तरह ही काम करता है जो कमर की चर्बी कम करने में मदद करती हैं। लहसुन में एलिसिन नामक एक यौगिक होता है जो भूख को कम करने और चयापचय को बढ़ाने में मदद करता है। यदि आप भी कमर और पेट की चर्बी घटाना चाहते हैं तो लहसुन को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
वजन कम करने के लिए लहसुन कैसें लें
अच्‍छे परिणाम प्राप्त करने के लिए आप प्रतिदिन नियमित रूप से लहसुन की 1 कली का सेवन करें। इसे अलावा आप अपने आहार में भी लहसुन की पर्याप्‍त मात्रा का उपभोग कर सकते हैं।
लहसुन से चर्बी कम करने की विधि
इसके लिए आपको लहसुन की 1 कली, 1 कप पानी और ½ चम्मच नींबू के रस की आवश्‍यकता है। आप लहसुन को अच्‍छी तरह से कुचल कर पेस्‍ट बना लें। लहसुन के पेस्‍ट और नींबू के रस को पानी में मिलाएं और इसका सेवन करें। लहसुन का तीखा स्‍वाद बॉड़ी फैट को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें विटामिन सी भी होता है जो कि एक एंटीऑक्‍सीडेंट है। यह चयापचय को बढ़ाने में भी सहायक है।
वजन कम करने के लिए दालचीनी चाय बनाने की विधि
दालचीनी की चाय बनाने के लिए आपको 1 चम्मच दालचीनी पाउडर और 1 कप पानी की जरूरत है। आप 1 कप पानी को उबालें और फिर दालचीनी पाउडर को मिलाने के बाद 2 से 3 मिनिट तक अच्‍छी तरह से पकाएं। फिर इस चाय को छान लें और ठंडा होने के बाद सेवन करें। यह जड़ी बूटी वाली चाय भूख को नियंत्रित करने, खराब कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने और चयापचय को बढ़ाने में सहायक होती है। यदि आप वजन कम करना चाहते हैं तो यह आपके लिए सबसे अच्‍छे विकल्‍पों में से एक है।
लाल मिर्च
मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। नियमित रूप से भोजन में लाल मिर्च या लाल मिर्च पावडर का प्रयोग करने से अधिक भोजन करने की इच्छा घटती है और मेटाबोलिज्म बढ़ता है। लाल मिर्च का सेवन करने के बाद शरीर में गर्मी आती है जिससे एनर्जी बढ़ती है और अतिरिक्त कैलोरी घटती है। इसलिए शरीर का वजन घटाने के लिए लाल मिर्च बहुत फायदेमंद है।
काली मिर्च
क्‍या आप अपने अधिक वजन से परेशान है और इसे कम करने का प्रयास कर रहें है तो जरा रुके, आपको ज्‍यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है। आपकी रसोई में काली मिर्च एक ऐसा मसाला है जो आपके वजन को कम कर सकती है। काली मिर्च में पाइपरिन जैसे कुछ यौगिक वसा जलाते (burns out fat) हैं और इसे शरीर से दूर करने में मदद करते हैं। यह शरीर को गर्म करता है और पसीना को बढ़ावा देता है जो शरीर से विषाक्‍त पदार्थों से छुटकारा पाने में मदद करते है। अपने शरीर से अतिरिक्‍त वजन को कम करने के लिए काली मिर्च को अपने दैनिक आहार में शामिल करें। सुबह काली मिर्च का सेवन करने से वजन को कम करने में मदद मिल सकती है।
लाल मिर्च से वजन कम करने की विधि
वजन कम करने के लिए कालीमिर्च का उपयोग
यदि आप आसानी से अपने वजन को कंट्रोल करना चाहते हैं तो काली मिर्च का सेवन कर सकते हैं। आप प्रतिदिन 4-5 काली मिर्च का सेवन कर सकते हैं।
काली मिर्च से वजन घटाने की विधि
इस जड़ी बूटी से बढ़ते वजन को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए आपको चाहिए ¼ चम्मच काली मिर्च पाउडर, ½ चम्मच शहद और 1 कप पानी।
आप पानी में कालीमिर्च पाउउर और शहद को अच्‍छी तरह से मिलाएं और इसका दिन में 2 बार सेवन करें। कालीमिर्च वसा कोशिकाओं के विकास को रोकने में मदद कर सकती है। जिससे आपके वजन को बढ़ने से रोका जा सकता है।
वजन बढ़ने से रोकने की जड़ी बूटी अदरक
आप लाल मिर्च को अपने आहार में शामिल कर लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा भी और तरीके हैं जिनमें आप अन्‍य जड़ी बूटीयों के रूप में भी लाल मिर्च का इस्तेमाल कर सकते हैं।
आपको चाहिए ¼ चम्मच लालमिर्च पाउडर, 1 नींबू और 1 कप पानी। आप इन तीनों उत्‍पादों को अच्‍छी तरह से मिलाएं और सेवन करें। यह मिश्रण आपके चयापचय प्रणाली को बेहतर बनाने और वजन को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।
अदरक से वजन घटाने की विधि
इसके लिए आपको 1 अदरक का टुकड़ा, 1 चम्मच शहद और 1 कप पानी की आवश्‍यकता है। आप 1 कप पानी को उबालें और इसमें कुचले हुए अदरक को मिलाएं। 2 मिनिट तक उबालें और फिर इस जड़ी बूटी वाली चाय को छान लें। आप इस चाय में 1 चम्मच शहद मिलाएं और फिर इसका सेवन करें। अदरक आपके पेट के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार कर सकता है। साथ ही यह पेट में मौजूद विषाक्‍तता को प्रभावी रूप से बाहर कर सकता है।
जीरा
जीरा एक औषधीय मसाला है जिसका उपयोग आयुर्वेद में जड़ी बूटी के रूप में भी किया जाता है। इस मसाले का उपयोग लगभग सभी प्रकार के व्‍यंजनों में किया जाता है। जीरा में पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने वाले गुण होते हैं। जिसके कारण वजन घटाने वाली जड़ी बूटियों में जीरे को भी शामिल किया जाता है।
जीरे का उपयोग कैसे करें
आप अपने आहार के साथ या अन्‍य जड़ी बूटियों के मिश्रण के साथ जीरा पाउडर का सेवन कर सकते हैं। यह निश्चित रूप से आपके वजन को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
जीरा से वजन कंट्रोल करने की विधि
आप वेट लॉस के लिए जीरा पानी का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आपको 2 चम्मच जीरा, ½ चम्मच शहद और 1 गिलास पानी की आवश्‍यकता है। आप 1 गिलास पानी में 2 चम्मच जीरा को मिलाएं और रात भर भीगने दें। अगली सुबह आप इस मिश्रण को छान लें और इसमें शहद मिलाएं। इस मिश्रण का सेवन करने से आपको वजन घटाने संबंधी लाभ प्राप्‍त हो सकते हैं।

बच्चों की छाती मे जमा कफ निकालने के उपचार



मौसम के बदलने पर अक्सर छोटे बच्चे ठंड की चपेट में आ जाते हैं। इससे उनके छाती में कफ जमा हो जाता है। हालांकि, यह एक आम समस्या है, इसलिए इससे ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन वक्त रहते इसका इलाज करना जरूरी है। बच्चों की छाती में जमे कफ को बाहर निकालने के लिए घरेलू उपाय बहुत असरदार साबित होते हैं।
विशेषज्ञ के अनुसार, शिशुओं में चेस्ट कंजेशन एक वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है। इसमें कोल्ड वायरस सबसे आम है। दरअसल, श्वसन प्रणाली की आंतरिक परत में झिल्ली होती है, जो एक गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ पैदा करती है, जिसे बलगम कहा जाता है। धूल के कण और धुएं के शरीर में प्रवेश करने के कारण अस्तर बलगम का स्त्राव करने लगता है। बच्चों को जुकाम होने पर भी ऐसा ही महसूस होता है। अगर आप नए माता-पिता बने हैं और आपका शिशु छाती में कफ जमा होने की समस्या से परेशान है, तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको बच्चों की छाती में जमा कफ को बाहर निकालने के लिए घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं। इनकी मदद से बच्चे के सीने में जमा कफ आसानी से साफ हो जाएगा।
यदि आपके बच्चे के सीने में कफ जमा हुआ है, तो शिशु के सांस लेने का तरीका बदल जाएगा। वह सांस लेने में विचलित हो सकता है।
यदि आपके बच्चे को खांसी है, तो संभावना है कि उसके सीने में बहुत अधिक बलगम जमा है।
छाती में कफ जमा हो, तो बच्चे को असुविधा हो सकती है, जिससे उनका मूड चिड़चिड़ा हो सकता है।
अगर बच्चे की नाक भरी हुई है और उसे सोने में तकलीफ हो, तो यह छाती में जमा कफ का लक्षण है।
अगर बच्चा ठीक से भोजन न करे, तो वह छाती में जमाव से पीड़ित हो सकता है।
वाष्प
भाप नवजात शिशु में जमा कफ को बाहर निकालने का प्रभावी तरीका है। भाप लेना छाती के अंदर बलगम को ढीला करने में मदद करता है। इसके अलावा यह नाक गुहा को नमी प्रदान करता है और बलगम को सूखने से रोकता है, जो वायुमार्ग को अवरूद्ध करता है। अपने बच्चे के कमरे में एक वेपोराइजर या ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें। यह उपकरण हवा में नमी को जोड़कर राहत प्रदान करता है। वैक्लिपक रूप से आप अपने बच्चे को भाप से भरे बाथरूम में ले जा सकते हैं।
लहसुन व अजवाइन
लहसुन व अजवाइन छाती में जमा कफ में राहत प्रदान करता है। इसके लिए एक तवे पर लहसुन और अजवाइन को गर्म करें। जब तक ये थोड़ा गर्म न हो जाएं और इसे कपड़े के टुकड़े में लपेट लें। छाती में जमा कफ से राहत पाने के लिए अपने शिशु के सीने पर इससे सिकाई करें। मिश्रण को बहुत गर्म करने से बचें, क्योंकि यह आपके बच्चे की त्वचा को जला सकता है।
स्तनपान
यदि आपका शिशु छह महीने से कम उम्र का है, तो स्तनपान कराने से छाती में जमा कफ बाहर निकल जाता है। यह आपके शिशु को हाइड्रेट करता है और उसकी पोषण संबंधी जरूरतों का ख्याल रखता है। इतना ही नहीं, इसमें संक्रमण से लडऩे के लिए एंटी बॉडीज होते हैं, जो छाती में जमा कफ को बाहर निकालने का काम करते हैं।
सिर हमेशा ऊंचा रखें
बच्चे को स्तनपान कराते समय उसका सिर हमेशा ऊंचा रखें। यह नाक के माध्यम से बलगम को बाहर निकालने और छाती को साफ करने में मदद करता है।
तेल से मालिश
शिशु की छाती में अगर कफ जम जाए, तो सरसों के तेल से मालिश करना बहुत अच्छा उपाय है। इसके लिए अजवाइन और लहसुन के साथ सरसों के तेल का उपयोग कर सकते हैं। गर्म तेल लगाते समय थोड़ी सावधानी बरतें, क्योंकि इससे आपकी बच्चे की त्वचा जल सकती है।
विक्स वेपोरब
विक्स छाती में जमा कफ को बाहर निकालने में मदद करती है। इसके लिए विक्स वेपोरब को शिशु के तलवों पर लगाएं और मोजे पहना दें। ऐसा करने का सबसे अच्छा समय रात में है। ध्यान रखें, कि विक्स लगाने के बाद बच्चे को चलने न दें।
गाय का घी
छोटे बच्चे की छाती में जमा कफ निकालने के लिए गाय के घी बच्चे की छाती पर मले इसे जमा हुआ बलगम बाहर निकल जाता है।
हल्दी
शिशु की छाती में जमे हुए कफ को दूर करने के लिए हल्दी प्राकृतिक उपचार है। हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो शरीर के अंदर जमे बलगम को निकालने में मदद करता है। कफ जमने पर थोड़े से गर्म पानी में हल्दी और चुटकीभर काली मिर्च मिलाकर बच्चे को पिलाएं। शिशु को बहुत अधिक हल्दी देने से बचें।
नीलगिरी का तेल
इस तेल की खुशबू बहुत अच्छी होती है और अगर शिशु को सर्दी और खांसी हो, तो यह बहुत अच्छा काम करता है। इसके लिए एक रूमाल पर निलगिरी के तेल की कुछ बूंद डालें और इसे उस जगह पर रखें, जहां पर आपका शिशु सोता है, ताकि सोते वक्त बच्चा इसकी खुशबू को भीतर ले सके। इससे कफ आसानी से निकल जाएगा।
गरम पानी से स्नान
कफ जमने पर शिशु को गर्म पानी से नहलाना चाहिए। इससे बच्चे का ध्यान कफ से हट जाएगा और इससे नाक और छाती में जमा कफ भी आसानी से निकल जाएगा।
सौंफ
सौंफ के बीज छाती में दबे हुए कफ से राहत दिलाने में बेहद मददगार हैं। इसे आप चाहें, तो बच्चे को कच्चा भी दे सकते हैं, या पानी में भिगोकर भी दे सकते हैं। इसके अलावा सौंफ को तवे पर भूनकर भी बच्चे को खिला सकते हैं। छाती में जमे कफ में बहुत आराम मिलेगा।
नींबू और शहद
नींबू और शहद शरीर के अंदर मौजूद कफ को ढीला करने में मदद करते हैं। नींबू विटामिन से समृद्ध होता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करता है। इसके लिए बच्चे को नींबू के साथ शहद मिलाकर दें। अगर आपका बच्चा एक वर्ष से कम उम्र का है, तो उसे ये न दें। ये उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
मुलेठी
सदियों से मुलैठी की मदद से सीने में जमाव का घरेलू उपचार किया जाता रहा है। यह गले को कोट करता है और इसमें मौजूद विटामिन सी छाती के जमाव और गले की खराश को ठीक करता है।
अदरक और शहद
अदरक में एंटी इंफ्लेमेट्री गुण और पॉलीफेनोल होते हैं, जो आपके शिशु को छाती में जमा होने वाले कफ से राहत दिलाते हैं। इसके लिए आप अपने बच्चे को चूसने के लिए अदरक का एक टुकड़ा दे सकते हैं। यदि बच्चा एक वर्ष से ज्यादा उम्र का है, तो अदरक को शहद के साथ मिलाकर खिलाएं।
प्याज का रस
प्याज में सल्फर और क्वेरसेटिन होते हैं, जो बलगम निर्माण को कम करने में मदद करते हैं। इसमें एंटी माइक्रोबियल गुण भी होते हैं, जो संक्रमण से लड़ते हुए कफ से राहत दिलाते हैं। इसके लिए एक प्याज को पीसकर इसका रस निकालें और गुनगुने पानी में मिलाकर बच्चे को पिला दें। कफ से बहुत राहत मिलेगी।
खट्टे फल का जूस
छाती में जमाव होने की स्थिति में बच्चे को खट्टे फलों और जूस का सेवन कराएं। ये छाती में जमाव के कारण पैदा होने वाली खांसी और सर्दी को कम करने में मदद करते हैं। खट्टे फल का उपाय कफ निकालने में बहुत उपयोगी साबित होता है।
कच्चे सेव का रस
छाती में कफ जमने की स्थिति में छह या उससे अधिक उम्र के बच्चों को थोड़ा गर्म बिना पका हुआ सेब का रस पिलाएं। ध्यान रखें, कि ये ज्यादा गर्म न हो। ये बलगम को नरम करते हुए गले को साफ करता है।
तुलसी
तुलसी एक बेहतरीन औषधि है, जो शिशु की छाती में जमे हुए कफ को बाहर निकालती है। इसके लिए धीमी आंच पर एक लोहे की कड़ाही में तुलसी की कुछ पत्तियां, मोटी छिली हुई लैवेंडर को गर्म करें। रस निकालने के लिए पत्तियों को कुचलें और जो रस निकले, उसका एक चौथाई चम्मच दिन में तीन बार बच्चे को पिलाएं। इससे कुछ ही दिनों में कफ बाहर निकल जाएगा।
केसर-
केसर भी बच्चों की छाती में जमे हुए कफ को आसानी से बाहर निकालता है। इसके लिए एक चुटकी केसर को गुनगुने पानी में डालकर बेबी छाती, पीठ और सिर पर लगाएं , इससे बेबी को बलगम में बहुत आराम मिलता है।