डिप्रेशन से कैसे बचे? डिप्रेशन के उपचार

 


डिप्रेशन क्या है?

तनाव की तुलना में अवसाद एक गहरी और अधिक गहन ‘स्थिति’ है और इसका शिकार किसी भी उम्र का व्यक्ति हो सकता है अगर किसी को चिंता या तनाव अधिक समय तक रहता है तो चिंता अवसाद का रूप ले लेती है। जिसके कारण वह व्यत्कि लंबे समय तक (कभी-कभी महीनों या वर्षों तक) परेशान रहने लगता है, नाखुश या लोगो से दूर रहता है और अकेले रहना ज्यादा पसंद करता है। इस स्थिति में लोगों का मन ज़िंदगी से भर जाता है, उस व्यक्ति की उन सभी गतिविधियों में रुचि ख़त्म हो जाती है जिसमे वह सामान्य रूप से आनंद लेता हैं, उस इंसान की रोजमर्रा की ज़िंदगी, कामकाज और व्यवहार पर बुरा प्रभाव पड़ता है और बहुत से बदलाव देखने को मिल सकते है। डिप्रेशन के बारे में समझना और उससे कैसे बाहर निकलना है ये तरीका हमे पता होना चाहिए जिससे हम अपनी और अन्य लोगो की मदद कर सकें।

तनाव के लक्षण (अवसाद के लक्षण)

जब नीचे दिए गए लक्षण आपको लम्बे समय तक दिखते है तो आप डिप्रेशन का शिकार हो सकते है इसलिए जल्द से जल्द किसी अच्छे मनोचिकित्सक से मिलें और उसके द्वारा बताये गए टेस्ट जरूर करवाएं।


  • छोटी छोटी बातों पर अधिक गुस्सा आना
  • ध्यान केंद्रित करने और याद रखने में कठिनाई होना
  • नींद न आना
  • अधिक नकारात्मक विचार आना
  • अकेले रहने का मन करना
  • थकान और कमजोरी महसूस करना
  • चिड़चिड़ापन रहना
  • पेट का फूलना – दस्त, कब्ज और उल्टी की शिकायत
  • दर्द (सीने में दर्द सहित) और तेजी से दिल की धड़कन
  • मन में अजीब से विचार आना
  • भूख में कमी
  • खाने का सही से न पचना
  • छोटी-छोटी चीजों को लेकर अधिक सोचना
  • सिरदर्द
  • आत्मविश्वास की कमी

डिप्रेशन से बाहर निकलने के उपाय


यदि आप डिप्रेशन से बचना चाहते है तो सबसे पहले शुरुआत आपको ही करनी पड़ेगी इस बारे में अपने प्रियजनों या डॉक्टर से खुलकर बात करें। साथ ही अपने रोज के कामो में और अपनी दिनचर्या में कुछ सकारात्मक बदलाव लाये, हो सके तो ख़ुद को दूसरे कामो में व्यस्त कर ले जिससे आपको उस वजह के बारे में सोचने का समय न मिले जिसकी वजह से आप डिप्रेशन में हो पर इसी बीच आपको अपनी सेहत का भी ध्यान रखना है और ख़ुद के लिए भी एक अच्छा समय निकालना है लेकिन डिप्रेशन के दौरान ये आप कैसे कर सकते है, आइए जानते हैं।


1. अपने प्रियजनों से बात करें और मदद मांगें

अगर आप डिप्रेशन से गुज़र रहे हैं, तो आपको इससे उबरने के लिए रोज या नियमित अंतराल पर ऐसे व्यक्ति से बात करे जिनसे बात करना अपनी परेशानी साझा करना अच्छा लगता हो पर साथ ही आप उन पर भरोसा भी करते हो यह उपाय सच में एक रामबाण साबित हो सकता है। आप ऐसे भरोसेमंद लोगो से खुलकर अपनी समस्याएं सांझा करें और इस परिस्थिति से लड़ने के लिए उनसे मदद मांगें। और इस बात की चिंता न करें की ये लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे क्योकि अपनों से मदद लेने में हमें जरा भी शर्म या संकोच नहीं करनी चाहिए। ऐसे बुरे समय में ही अच्छे और विश्वास योग्य लोगो की पहचान होती है। अगर हमारे अपने ही हमारी मदद नहीं करेंगे तो और कौन करेगा।

2. रोज़ाना व्यायाम या योगा करें

क्या आप जानते है की बहुत से वैज्ञानिक शोध में ये साबित हो चुका है कि व्यायाम या योग आपके डिप्रेशन (अवसाद) को दूर करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है। जब हम व्यायाम करते हैं तब टेस्टोस्टेरोन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन्स हमारे शरीर में रिलीज़ होते हैं। जो की हमारे दिमाग़ को स्थिर करने का काम करते हैं। जिससे हमारे डिप्रेशन को बढ़ाने वाले नकारात्मक विचार आने कम हो जाते हैं। व्यायाम या योग करने से हम, न केवल मानसिक और शारीरिक रूप से सेहतमंद और मजबूत बनते है बल्कि शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

3. अच्छा सेहतमंद खाना खाएं

जब एक व्यक्ति डिप्रेशन में होता है तो वह खाना पीना कम कर देता है या बिल्कुल ही खाना पीना छोड़ देता है अच्छा खाना हर किसी के लिए जरुरी है पर जब आप किसी शारीरिक या मानसिक समस्या से पीड़ित हो चुकें होते हो तो, आपके लिए सेहतमंद खानपान और भी ज्यादा जरुरी हो जाता है। क्योकि सेहतमंद और संतुलित खानपान से आपकी सेहत तो अच्छी रहती ही है साथ ही आपका मन भी ख़ुश रहता है। अगर ऐसे में आपकी पसंद का खाना मिल जाये तो उससे अच्छा क्या होगा इसलिए ऐसे समय में अपनी पसंद के सेहतमंद खाने पीने का पूरा ध्यान रखें।

4. अपने अंदर की क्रिएटिविटी और विचारो को बाहर आने दे

आपके अंदर नकारात्मक विचार सबसे अधिक तब आते है जब आपके पास खाली समय होता है इसलिए ऐसे खाली समय को इस्तेमाल करे और अपने अंदर के कलाकार को बहार आने दे, ऐसे काम करे जो करना आपको पसंद है जैसे अगर आपको लिखने का शौक है तो पेन और पेपर लेकर आपके मन में चल रही भावनाओ और नकारात्मक विचारो को लिख डाले साथ ही खुद से बात करे की अगर ये समस्या किसी अन्य व्यक्ति के साथ घटी होती तो आप उसे क्या सलाह देते, हमारे ख्याल से इससे अच्छा शायद ही कुछ होगा क्योकि डिप्रेशन से निकलने के बारे में आपको खुद भी पता होता है क्योकि आपको कौन सी चीज ज्यादा परेशान करती है और और क्या चीज आपको सबसे अधिक खुशी देती है इसके बारे में आपसे बेहतर शायद ही कोई और इंसान जानता हो बस आपको खुद को समझना है और उसे अपनी कलम से एक कागज पर लिख कर रोज फॉलो करना है। देखना आप जल्द ही इस स्थिति से बाहर निकल जायेंगे।
इन दिनों ब्लॉग्स और अन्य कंटेंट को साझा करने के लिए बहुत से विकल्प मौजूद है जैसे आप ट्विटर, फ़ेसबुक और अन्य मीडिया का इस्तेमाल करके भी अपने विचारो को दुसरो के साथ साझा कर सकते हैं ताकि वो लोग जो इस स्थति से जूझ रहे है आपके विचारो को पढ़ कर उत्साहित हो सके।

5 . नकारात्मक लोगों से दूरी बनाएं और दोस्तों से जुड़ें

आपके अच्छे दोस्त आपके भाव और विचारो को अच्छा बनाने में आपकी मदद करते है। साथ ही ऐसे दोस्तों से अपने विचारो को साझा करके आपको आवश्यक सहानुभूति भी मिलती है। वही लोग आपकी बातों को ध्यान से सुनते हैं और उसके प्रति अपने विचार देते है डिप्रेशन के दौर में जब हम बिल्कुल अकेला महसूस करते है तो ऐसे में अगर कोई हमारे मन में चल रही बातो और मनोभावों को समझे या धैर्य से सुन भी ले तो हमें बहुत अच्छा लगता है। अपने ऐसे सकारात्मक दोस्तों से जुड़ने के साथ-साथ आप उन लोगों से दूर रहे, जो खुद परेशान है या नकारात्मकता विचारो से भरे होते हैं। ऐसे लोग खुद के साथ साथ हमेशा दुसरो का भी मनोबल गिराने का काम करते हैं।

6. अपनी नौकरी की करें समीक्षा

इन दिनों कार्यालयों में अपने कर्मचारियों को ख़ुश रखने की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं। पर आज कल ऐसा कम ही देखने को मिलता है की आप अपनी नौकरी या अन्य कर्मचारियो से खुश रहते है। यदि आप भी अपने कार्यस्थल पर चिंता या तनाव महसूस करते हैं तो अपनी नौकरी की समीक्षा करें। क्योकि हो सकता है कि आपकी नौकरी ही आपकी चिंता की असली वजह हो, अगर ये चिंता समय पर नहीं छोड़ी गयी तो आगे चलकर ये अवसाद का कारण बन सकती है। इसलिए हो सके तो ऐसी नौकरी को बदल दें और अपने क्षेत्र से सम्बंधित नौकरी ही करें, जो आपको खुशी और संतुष्टि दे, न की चिंता और तनाव और आप एक सुकूनभरी और तनावमुक्त जिंदगी जी सकें। हमेशा ऐसी ही नौकरी करे जो आपको खुशी और संतुष्टि दे, न की चिंता और तनाव।

7. अधिक चिंता या तनाव महसूस होने पर छुट्टियां लें

एक ही ऑफ़िस, शहर और दिनचर्या, रोज रोज ऐसा करके आप काफी बार बोरियत महसूस करने लगते हैं, जो आगे चलकर आपके मन में नकारात्मक विचार और फिर डिप्रेशन पैदा करते हैं। इसलिए अपनी जॉब के काम के साथ साथ एन्जॉय भी करे क्योकि माहौल बदलते रहने से आपके मन में चल रहे नकारात्मक विचारों को दूर रखने में मदद मिलती है। यदि आपको लंबी छुट्टी नही मिल रही हो तो वीकेंड में ही कहीं बाहर घूमने निकल लें या परिवार को अधिक समय दे। रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है की जो लोग नियमित रूप से महीने में मिलने वाली छुट्टी लेते है ऐसे लोगो की कार्यकुशलता, लगातार कई सप्ताह तक काम में लगे रहने वाले लोगों की तुलना में अधिक होती हैं।

8. अच्छी नींद लें

जब आप परेशान होते है तो एक अच्छी नींद आपके मन की नकारात्मक विचारो को कम करके फिर से आपके मन को तरोताजा बना देती है।
एक अच्छी और पूरी रात की नींद हमें सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। अध्ययनों में ये बात सामने आई है की रोज़ाना 7 से 8 घंटे की नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन के लक्षण कम देखे गए हैं। इसलिए अगर आप चिंतित है या अधिक व्यस्त रहने के कारण भरपूर नींद नहीं ले पाते है तो आज ही इस बुरी आदत को छोड़ दे क्योकि आपकी डिप्रेशन की समस्या का समाधान एक अच्छी नींद हो सकती है।

9. अपनी पसंद का संगीत सुनें

जब लोग डिप्रेशन में होते हैं तो अच्छा संगीत सुनकर काफी बेहतर महसूस करते है। यह एक साबित तथ्य है और कई वैज्ञानिक शोधों द्वारा प्रमाणित भी हो चुका है। तो आप अब जब भी मानसिक रूप से परेशान हों तो अपनी पसंद का गाना सुनें क्योकि संगीत में मन को अवसाद से निकालने की अद्‍भुत ताक़त होती है, अच्छा और आपकी पसंद का संगीत आपके नकारात्मक भावो को शांत करके आपके मूड को बदल देता है। पर जरुरी नहीं है की संगीत हमेशा ही आपके मन को शांत करता है क्योकि ये बात ध्यान रखने योग्य है, की ज़रूरत से ज़्यादा ग़म में डूबे हुए गाने और इमोशनल गाने आपको और भी ज्यादा डिप्रेस कर सकते है।

10. अकेले न रहे और पुरानी बातों के बारे में ज्यादा न सोचें

जब आप परेशान या डिप्रेशन में होते है तो आप अपने अंदर कमियाँ खोजने लगते है या पुरानी बातो को बारे में सोचने लगते है जो की बिल्कुल भी सही नहीं है क्योकि बीती हुई बातो को याद करके हम कुछ बदल तो नहीं सकते पर अपनी नकारात्मक सोच को बढ़ा कर, अपने डिप्रेशन को और भी ज्यादा गंभीर कर लेते है। अपनी पुरानी भूलों और ग़लतियों को सोचना आपको पूरी तरह से अवसाद के चंगुल में फंसा सकता है। ये सब पुरानी बाते सोचने से कुछ बदलने वाला नहीं है क्योकि आप भूतकाल को नहीं बदल सकते पर इतना ज्यादा सोच कर अपनी सेहत जरूर ख़राब कर लेंगे। इसलिए पुरानी बातों के बारे में सोचने के बजाय अपने आज पर फ़ोकस करें।




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उच्च रक्तचाप के उपचार

 


आपका हृदय धमनियों के माध्यम से खून को शरीर में भेजता है। शरीर की धमनियों में बहने वाले रक्त के लिए एक निश्चित दबाव जरूरी होता है। जब किसी वजह से यह दबाव अधिक बढ़ जाता है, तब धमनियों पर ज्यादा असर पड़ता है। दबाव बढ़ने के कारण धमनियों में रक्त का प्रवाह बनाए रखने के लिये दिल को सामान्य से अधिक काम करना पड़ता है। इस स्थिति को उच्च रक्तचाप कहते हैं। उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) एक गंभीर बीमारी है। क्या आपको पता है कि हाई बीपी के लक्षण क्या-क्या होते हैं। हाई ब्लड प्रेशर होने पर आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। हाई बीपी के इलाज के लिए आपको क्या उपाय करना चाहिए।

हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) के कारण 

उच्च रक्तचाप असंतुलित जीवनशैली और आहार के कारण तो होता ही है लेकिन ये भी कारण होते हैं-

-ब्लड प्रेशर हाई होने का प्रमुख कारण मोटापा होता है। मोटे व्यक्ति में बी.पी. बढ़ने का खतरा आम व्यक्ति से ज्यादा होता है।

-शारीरिक श्रम न करना। जो लोग व्यायाम, खेल-कूद और कोई भी शारीरिक क्रिया नहीं करते और आरामतलब जीवन जीते हैं, उन्हें रक्तचाप की समस्या हो सकती है।

-जो व्यक्ति शुगर, दिल के रोग, किडनी के रोगों से ग्रसित होते हैं एवं जिनकी रक्त धमनियां कमजोर होती हैं उनमें रक्तचाप उच्च हो जाता है।

-ज्यादा नमकीन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से।

-पिज्जा, बर्गर, चाऊमिन, मोमोज आदि  खाने से बी.पी. बढ़ जाता है।

-जो व्यक्ति धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन करते हैं।

-प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को भी बी.पी. बढ़ने की समस्या होती है।

हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) के लक्षण

हाई बी.पी. के कारण हृदय से जुड़े रोग, गुर्दे के रोग, आँख आदि खराब हो सकते हैं। उच्च रक्तचाप एक धीमा जहर है जो धीरे-धीरे शरीर के अंगों को खराब कर देता है। उच्च रक्तचाप से नियंत्रण में लाने के लिए या हाई बीपी से बचने के लिए सबसे पहले हाई बीपी के लक्षणों को जानना जरूरी होता है। चलिये इसके बारे में जानते हैं-

– उच्च रक्तचाप के लक्षण के रूप में व्यक्ति को तेज सिर दर्द होता है।

-उच्च रक्तचाप के लक्षण के रूप में व्यक्ति को थकावट और ज्यादा तनाव होता है।

-रोगी को सीने में दर्द होता है और भारीपन की अनुभूति होती है।

-रोगी को सांस लेने में परेशानी महसूस होना।

-उच्च रक्तचाप के रोगी को घबराहट महसूस होती है।

-कुछ भी समझने और बोलने में कठिनाई होना।

-उच्च रक्तचाप के रोगी के पैर अचानक सुन्न हो जाते हैं।

-उच्च रक्तचाप के रोगी को प्रायः बहुत कमजोरी महसूस होती है।

-उच्च रक्तचाप के रोगी को धुंधला दिखाई पड़ता है।

उच्च रक्तचाप से कैसे बचें?

असंतुलित भोजन और जीवनशैली के कारण भी उच्च रक्तचाप होता है, और अधिकांश लोगों को यह पता नहीं होता है कि हाई ब्लड प्रेशर होने पर क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। इसलिए आप हाई बीपी के लक्षणों का पता चलते ही आहार और जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाएं ताकि बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण पा सकें।

वजन बढ़ने के साथ अक्सर ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है। अधिक वजन सोते समय सांस लेने में बाधा उत्पन्न करती है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है, इसलिए ब्लड प्रेशर कम करने का एक प्रभावी तरीका वजन कम करना है।

-प्रतिदिन 20-25 मिनट तक व्यायाम करें।

-स्वस्थ आहार जैसे साबुत अनाज, फल, सब्जियां, डेरी प्रोडक्ट्स एवं कम फैट वाले भोजन से बी.पी. कम हो जाता है।

-उच्च रक्तचाप के रोगी को अपनी डायट में मैग्निशियम, कैल्शियम और पोटेशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ अधिक खाने चाहिए।

-दूध, हरी सब्जियां, दाल, सोयाबीन, प्याज, लहसुन और संतरें में ये पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं।

-प्रतिदिन मेवे में 4 अखरोट एवं 5 से 7 बादाम खाएं।

-उच्च रक्तचाप में फलों में सेब, अमरूद, अनार, केला, अंगूर, अनानास, मौसंबी, पपीता।

-हर रोज सुबह खाली पेट लहसुन की 2 कलियां खाएं।

-खट्टे फल, नींबू पानी, सूप, नारियल पानी, सोया, अलसी और काले चने खाएं।

-रोजाना पानी अधिक मात्रा में पीये।

-भोजन के लिए सोयाबीन तेल इस्तेमाल करना चाहिए।

-सलाद में प्याज, टमाटर, मूली, गाजर, खीरा, गोभी का सेवन करने से रक्तचाप सामान्य हो जाता है।

-बिना मलाई वाले दूध का सेवन करें।

-रक्तचाप उच्च होने में ओमेगा-3 भी शामिल करें।

-हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति को डार्क चॉक्लेट का सेवन करना चाहिए। डार्क चॉक्लेट बी.पी. कम करती है।

 

हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) के लिए आहार 

हाई बीपी में आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। ये बातें यहां लिखी गई है। हाई बीपी के लक्षण महसूस होने पर इनसे परहेज करना चाहिएः-

-जिस व्यक्ति का बी.पी. हाई हो उसे नमक कम खाना चाहिए।

-कॉफी और चाय का सेवन अधिक करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है।

-डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों का सेवन न करें क्योंकि उनमें नमक ज्यादा होता है।

-स्मोकिंग और शराब का सेवन न करें।

-उच्च रक्त के व्यक्ति को चाय और कॉफी का सेवन (home remedies for high bp) नहीं करना चाहिए।

-बाहर की चीजें जैसे पिज्जा, बर्गर आदि का सेवन न करें।

-बेकिंग सोड़ा का सेवन उच्च रक्तचाप के रोगी को नहीं करना चाहिए।

-खाना खाते समय अपने भोजन में नमक ऊपर से न डालें।

-पापड़ भी बिना नमक के ही खाएं।

-चटनी, आचार, अजीनोमोटो, बेंकिंग पाउडर और सॉस खाने से परहेज करें।

-बी-पी. के रोगियों को ऐसा खाना नहीं खाना चाहिए जिसमें फैट अधिक हो।

-जब आप सोते हैं तो बी.पी. कम होता है। यदि आप भरपूर नींद नहीं लेंगे तो ब्लड प्रेशर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जो लोग कम सोते हैं उनका ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।

-हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए गुस्सा जानलेवा होता है। जितना संभव प्रयास हो सके, तनाव और गुस्से से दूर रहना चाहिए। रोजाना मेडिटेशन और योगा करना चाहिए।

-बहुत अधिक मात्रा में मादक पदार्थों के सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिससे आगे जाकर वजन बढ़ता है और दिल का दौरा पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।

उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के घरेलू उपाय

उच्च रक्तचाप से राहत पाने के लिए लोग पहले घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। चलिये जानते हैं कि ऐसे कौन-कौन-से घरेलू उपाय हैं जो उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में  सहायता करते हैं-

उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए लहसुन का इस्तेमाल 

लहसुन हर घर में इस्तेमाल में लाया जाता है। लहसुन ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार होता है। लहसुन से हाई बीपी को नियंत्रित कर सकते हैं।

उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए आँवले के रस का सेवन 

एक बड़ा चम्मच आँवले का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। इससे उच्च रक्तचाप का उपचार होता है।

उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए काली मिर्च का प्रयोग 

जब ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ हो तो आधे गिलास गुनगुने पानी में काली मिर्च पाउडर का एक चम्मच घोल लें। इसे दो-दो घंटे के बाद पीते रहें। इससे हाई ब्लड प्रेशर के लक्षणों का उपचार होता है।

उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए तरबूज का सेवन 

उच्च रक्तचाप के नियंत्रण में तरबूज लाभ पहुंचाता है। तरबूज के बीज की गिरी तथा खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में रख लें। इसका रोजाना एक-एक चम्मच सेवन (bp high treatment at home) करें।

उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए नींबू का उपयोग 

बढ़े हुए ब्लड प्रेशर में एक गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर तीन-तीन घण्टे के अन्तर में पीना चाहिए। इससे उच्च रक्तचाप का इलाज होता है।

तुलसी और नीम से करें हाई बीपी कम करने के उपाय 

उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए पाँच तुलसी के पत्ते तथा दो नीम की पत्तियों को पीस लें। इसे एक गिलास पानी में घोलकर खाली पेट सुबह पिएं। इससे हाई ब्लड प्रेशर के लक्षणों का इलाज (home remedies for high bp) होता है।

खाली पैर हरी घास पर चलने से उच्च रक्तचाप होता है कम 

हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को नंगे पैर हरी घास पर 10-15 मिनट तक चलना चाहिए। रोजाना चलने से ब्लड प्रेशर नॉर्मल हो जाता है।

पालक और गाजर के जूस से करें हाई बीपी कम करने के उपाय

उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए ताजा पालक और गाजर का रस निकालें। इसे रोज पिएं। इसका रस लाभकारी सिद्ध होता है।

करेला से करें हाई बीपी कम करने के उपाय 

उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए करेला और सहजन के फल का सेवन करें। यह उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है। इससे हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण ठीक होते हैं।

ब्राउन राइस उच्च रक्तचाप को करे कंट्रोल 

उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए ब्राउन चावल खाना चाहिए। उच्च रक्तचाप के रोगियों को ब्राउन चावल बहुत लाभ देता है और हाई ब्लड प्रेशऱ के लक्षण दूर होते हैं।

मेथीदाना से करें हाई ब्लडप्रेशर को कंट्रोल 

3 ग्राम मेथीदाना पाउडर सुबह-शाम पानी के साथ लें। इसे प्रतिदिन खाने से लाभ मिलता है। इससे उच्च रक्तचाप का इलाज होता है।

उच्च रक्तचाप की आयुर्वेदिक दवा है टमाटर 

उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए टमाटर का सेवन करें। टमाटर से हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है। रोजाना एक टमाटर या एक कप टमाटर का जूस पिएं।

उच्च रक्तचाप की आयुर्वेदिक दवा है अनार 

आप अनार से बीपी कम करने के उपाय कर सकते हैं। रोजाना एक अनार या अनार का जूस पीने से हाई ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। 

हाई ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए चुकंदर का सेवन 

आप चुकंदर से भी बीपी कम करने के उपाय कर सकते हैं। एक चुकंदर और आधी मूली लें। इनको छील कर इनके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। मिक्सर में डालकर जूस निकाल लें। यह जूस दिन में एक बार पीने से हाई बी.पी. कण्ट्रोल (home remedies for high bp) में आ जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए तिल के तेल का उपयोग 

बीपी कम करने के लिए आप घरेलू उपाय कर सकते हैं। इसके लिए आप रोजाना अपने खाने में तिल के तेल का प्रयोग करें। इससे बीपी कम हो जाता है।


हाई बीपी को कम करने के लिए नारियल का प्रयोग 

आप नारियल से भी बीपी कम करने के उपाय कर सकते हैं। आप पूरे दिन में 2-3 बार नारियल पानी का प्रयोग करें। इससे हाई बीपी कम हो जाता है।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? 

ब्लड प्रेशर का सामान्य से कम या अधिक होना, दोनों ही घातक होता है। जब मरीज का रक्तचाप 140-90 से अधिक होता है तो उस स्थिति को उच्च रक्तचाप कहा जाता है। बीपी कम करने के घरेलू उपाय के बाद भी जब मरीज को हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण के रूप में सीने में दर्द और भारीपन महसूस हो, और सांस लेने में परेशानी हो। सिर दर्द हो, कमजोरी या धुंधला दिखाई दे तो मरीज को डॉक्टर से जल्द से जल्द मिलना चाहिए, नहीं तो यह गंभीर रोग में परिवर्तित होकर घातक स्थिति तक पहुँच सकता है।



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बनफशा के फायदे


 बनफशा भारत में अनुष्णाशीत पश्चिमी हिमालय में लगभग 5000 फुट की उंचाई पर पाया जाता है। बनफशा के पौधे छः अंगुल तक के होते हैं और पत्ते रोम युक्त और ब्राह्मी की पत्तियों के समान दांतेदार होती हैं। इसके फूलों का रंग बैंगनी होता है और यह खुशबूदार होते हैं।

यूनानी चिकित्सा में पूरे पौधे को दवाई के रूप में प्रयोग करते हैं और बनफसा कहते हैं। इसके सूखे फूल को गुलेबनफ्शा कहा जाता है। यूनानी में इसे पहले दर्जे का ठण्डा और तर माना गया है। यह श्लेष्मनिस्सारकस्वप्नजनन, और शीतल है। इसे पेट दर्दगले में दर्द, पित्त की अधिकता, अधिक प्यास में प्रयोग किया जाता है। यह फेफड़ों के रोगोंजुखाम, खांसी, सूखी खांसी, और पेट और लीवर में अधिक गर्मी के रोगों में दवा के तौर पर दिया जाता है।

पुराने दिनों में बनफ्शा को ईरान से आयात किया जाता था, लेकिन अब यह कश्मीर में कांगड़ा और चंबा से एकत्र किया जाता है। यूनानी चिकित्सा में जड़ी बूटी, परिपक्व फूल का दवा के रूप में उपयोग स्वेदजनन/डाइफोरेक्टिकज्वरनाशक/एंटीपीरेक्टिक और मूत्रवर्धक की तरह अकेले या अन्य दवाओं के नुस्खे में प्रयोग किया जाता है। इसका फुफ्फुसीय प्रभाव है और आम तौर पर इसे फांट, काढ़े की तरह प्रयोग किया जाता है।

बनफशा से बना गुलकंदरोग़न बनफशा , खामीरा-ए-बनफ्शा और शरबत-ए-बनफ्शा दवाई की तरह श्वसन पथब्रोंकाइटिस, बुखार, अनिद्रा, जोड़ों के दर्द आदि में दिया जाता है। यूनानी चिकित्सकों ने सूजन दूर करने के गुण से बनफ्शा से बने काढ़े को फुफ्फुस, यकृत की बीमारियों में दिया जाता है।

सामान्य जानकारी

  1. वानस्पतिक नाम: वाओला ओडोराटा
  2. कुल (Family): वायोलेसीए
  3. औषधीय उद्देश्य के लिए इस्तेमाल भाग: पूरा पौधा
  4. पौधे का प्रकार: हर्ब
  5. वितरण: अनुष्णाशीत पश्चिमी हिमालय में
  6. पर्यावास: लगभग 5000 फुट की उंचाई पर, कश्मीर, काँगड़ा, और चम्बा में।

बनफशा के आयुर्वेदिक गुण और कर्म

बनफ्शा का पंचांग (पाँचों अंग) स्वाद में कटु, तिक्त गुण में हल्का, तर है। स्वभाव से यह ठण्डा और कटु विपाक है। यह वातपित्त शामक और शोथहर है। यह जन्तुनाशक, पीड़ा शामक और शोथ दूर करने वाला है।

  • रस (taste on tongue): कटु, तिक्त
  • गुण (Pharmacological Action): लघु, स्निग्ध,
  • वीर्य (Potency): आयुर्वेद में उष्ण / यूनानी में पहले दर्जे का ठण्डा
  • विपाक (transformed state after digestion): कटु

प्रधान कर्म

  1. कफनिःसारक / छेदन: द्रव्य जो श्वासनलिका, फेफड़ों, गले से लगे कफ को बलपूर्वक बाहर निकाल दे।
  2. मूत्रल: द्रव्य जो मूत्र ज्यादा लाये। diuretics
  3. शोथहर: द्रव्य जो शोथ / शरीर में सूजन, को दूर करे। antihydropic
  4. श्लेष्महर: द्रव्य जो चिपचिपे पदार्थ, कफ को दूर करे।
  5. शीतल: स्तंभक, ठंडा, सुखप्रद है, और प्यास, मूर्छा, पसीना आदि को दूर करता है।
  6. बल्य: द्रव्य जो बल दे।

बनफशा इन रोगों में लाभप्रद है

  1. दमा Asthma
  2. ब्रोंकाइटिस Bronchitis
  3. सर्दी Colds
  4. खांसी Cough
  5. डिप्रेशन Depression
  6. फ्लू के लक्षण Flu symptoms
  7. नींद (अनिद्रा) insomnia
  8. फेफड़े की समस्याएं Lung problems
  9. रजोनिवृत्ति के लक्षण Menopausal symptoms
  10. घबराहट Nervousness
  11. पाचन समस्याओं Digestion problems
  12. मूत्र समस्याएं Urinary problems आदि।

बनफशा के औषधीय उपयोग 

बनफशा पौधे के पत्ते, फूल समेत पूरे पौधे को दवा की तरह प्रयोग किया जाता है। इसके केवल सूखे फूल को गुले बनफशा कहते हैं। यूनानी चिकित्सा में इसका बहुत प्रयोग किया जाता है। बनफशा की अनेक प्रजातियाँ है जैसे की वायोला सिनेरेआ और वायोला सर्पेंस। इनमें से नीले और जामुनी  रंग के फूलों वनस्पति उत्तम मानी जाती है।

गुलेबनफशा में वमनकारी अल्कालॉयडतेल, रंजक द्रव्य, वायोलेक्वरसेटिन आदि पाए जाते हैं।

आमतौर पर बनफशा को जुखामनज़ला, कफ, खाँसी, जकड़न, श्वसन तंत्र की सूजन, भरी हुई नाक, ब्रोंकाइटिस, ऐंठन, मस्तिष्क, हिस्टीरिया, कलाई के गठिया, तंत्रिका तनाव, हिस्टीरिया, शारीरिक और मानसिक थकावट, रजोनिवृत्ति के लक्षण, अवसाद और चिड़चिड़ापन coryza, cough, congestion, and inflammation of the respiratory tract, spasmodic cough, neuralgia, hysteria, rheumatism of wrist आदि में दिया जाता है। यह श्लेष्म को पतला करता है जिससे वह आसानी से निकल सकता है। यह बच्चों और गर्भवती माताओं के लिए सुरक्षित है।

इसके फूलों का मदर टिंक्चर डिस्पिनियाखांसी, सूखी खांसी, गले में खराश, ग्रीवा ग्रंथियों की सूजन के उपचार के लिए होम्योपैथी में दिया जाता है।

बनफशा शरीर में जलनआँखों की जलन, पेशाब की जलन आदि में शीतल गुणों के कारण लाभप्रद हैं। इसे पेट दर्द, पेट और आंतों की सूजन, अनुचित आहार के कारण पाचन समस्याएं, गैस, जलन,पित्ताशय की बीमारियों, और भूख न लगना आदि में भी इसका उपयोग किया जाता है।

इसके पत्तों का पेस्ट दर्द और सूजन पर बाह्य रूप से लगाया जाता है। इसे त्वचा विकारों के में और त्वचा साफ़ करने के लिए भी पेस्ट की तरह लगाते हैं।

बनफ्शा से बनने वाली औषधियाँ

फाण्ट : दो ग्राम बनफ्शा को एक कप उबलते पानी में भिगोकर ढंक दें, आधा घण्टे बाद इसे छान लें। इसे आधा सुबह और आधा शाम को पिएँ। यह पसीना लाने वाला और कफ निकालने वाला उत्तम प्रयोग है।

अर्क : सौ ग्राम बनफ्शा दो लीटर गर्म पानी में डालकर रात को रख दें। दूसरे दिन अर्क विधि से इसका अर्क निकाल लें। मात्रा 2-2 चम्मच जीर्ण ज्वर और मुद्दती ज्वर में उपयोगी। बनफ्शा अर्क इसी नाम से बना बनाया बाजार में मिलता है।
शर्बत : चार सौ ग्राम बनफ्शा चार लीटर पानी में डालकर रात को रख दें। दूसरे दिन आग पर रखकर उबालें। जब दो लीटर बचे तब उतारकर ठण्डा कर लें और एक मोटे कपड़े में डालकर लटका दें। इसे दबाकर निचोड़ें। इस पानी में दो किलो शकर डालकर शर्बत बना लें। यह शर्बत पित्तज ज्वर के लिए बहुत उपयोगी दवा है। यह बनफ्शा शर्बत इसी नाम से बना बनाया बाजार में मिलता है।
बनफ्शादि क्वाथ : बनफ्शा का काढ़ा बहुत उपयोगी और गुणकारी होता है। बनफ्शा व सौंफ 10-10 ग्राम, सोंठ व सनाय 6-6 ग्राम, इन्हें जौकुट करके एक गिलास पानी में डालकर उबालें। जब पानी एक कप रह जाए तब उतारकर छान लें और आवश्यक मात्रा में शकर मिलाकर पिएँ। काढ़ा पीकर गर्म कंबल ओढ़कर सो जाएँ। घंटेभर में पसीना आएगा और ज्वर उतर जाएगा।
नया विषम ज्वर : उदर शुद्धि के लिए एवं आम को पचाने के लिए बनफ्शादि क्वाथ का सेवन सुबह-शाम करें। मात्रा एवं विधि ऊपर अंकित क्वाथ के अनुसार।

रक्त स्राव : बनफ्शा पंचांग का क्वाथ द्राक्षासव के साथ लेने से अति ऋतु स्राव, खूनी बवासीर और अन्य प्रकार के रक्त स्राव बंद होते हैं।
अन्य : देर रात में भोजन न करें या शाम को भोजन ही न करें और सोते समय दूध में बनफ्शा और काली मिर्च 1-1 ग्राम डालकर गर्म करें, फिर ठण्डा करके कुनकुना गर्म पी लें। इससे जुकाम ठीक हो जाता है। चाय बनाते समय चायपत्ती के साथ बनफ्शा, तुलसी के पत्ते और काली मिर्च डालकर चाय बनाकर पीने से भी सर्दी-जुकाम ठीक हो जाता है।

बनफशा की औषधीय मात्रा

गुले बनफशा को लेने की आंतरिक मात्रा 5-6 ग्राम है।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें 

  1. बनफशा का कोई ज्ञात साइड इफ़ेक्ट नहीं है।
  2. वैसे तो इसे बच्चों और गर्भवती माताओं के लिए इसे सुरक्षित कहा गया है, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना इसे गर्भावस्था में प्रयोग न करें।
  3. बनफशा का किसी दवा के साथ इंटरेक्शन ज्ञात नहीं है।