गुनगुना पानी (warm वॉटर) से रोगों का इलाज


                           
  इस थेरेपी में मरीज को दिन भर में 8-10 बार केवल गुनगुना पानी पीने के लिए दिया जाता है। पानी हमेशा स्टील, पीतल या सेरेमिक के गिलास में ही पीने के लिए कहा जाता है। गुनगुना पानी पीने से शरीर में मौजूद टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं। इस थेरेपी से बलगम, गैस, एसिडिटी और शरीर में इकट्ठा हुई अतिरिक्त वसा की समस्या दूर होती है।

कैसे देते हैं यह थेरेपी

आथ्र्राइटिस के मरीज थोड़े-से गुनगुने पानी में कच्ची हल्दी का पेस्ट मिला लें। इस पानी को सुबह खाली पेट पिएं औैर शाम को डिनर से एक घंटा पहले पिएं। इससे जोड़ों के अंदर की अकड़न दूर होगी। थाइरॉइड पीड़ित व्यक्ति रात को एक चम्मच साबुत धनिया एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट पानी को आधा रह जाने तक उबालें। इसे गुनगुना होने पर पी लें। हाइपर एसिडिटी के मरीज को दिन भर में कम से कम 6 गिलास गर्म पानी पीने के लिए कहा जाता है। गुनगुना पानी पेट में जाकर इकट्ठी एसिडिटी को घोल देता है और 30 से 45 मिनट के भीतर एसिडिटी से आराम देता है। मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति को दिन में कम से कम 10-12 गिलास गर्म पानी पीना चाहिए। उसमें नीबू, कच्ची हल्दी का पेस्ट, आंवले का रस, शुद्ध शहद भी मिला सकते हैं। मरीज डायबिटिक है तो उसे शहद नहीं देते। किडनी के मरीजों को पानी थोड़ा-थोड़ा करके देते हैं। त्वचा की समस्या से पीड़ित मरीज को गुनगुने पानी में नीबू मिलाकर पीने के लिए दिया जाता है और नीम के पत्तों का पेस्ट नहाने के पानी में मिलाकर नहाने के लिए कहा जाता है। उल्टी, खट्टी डकार आ रही हो, भूख नहीं लग रही हो, आंतों में सूजन हो तो पीड़ित व्यक्ति को गर्म पानी पिलाया जाता है।
वार्म वॉटर वॉश थेरेपी:  इसमें मरीज को वार्म वॉटर में नहाने को कहा जाता है या वार्म वॉटर से प्रभावित जगह की क्लीनिंग की जाती है।
क्लीनिंग बाथ थेरेपी:  इसके तहत नीम के गुनगुने पानी से एनीमा किया जाता है। इसमें नीम के पत्ते और थोड़ा कपूर मिलाकर बनाए गर्म एंटीफंगल पानी से योनि मार्ग की बाहर से सफाई की जाती है।
स्पंज बाथ थेरेपी:  जोड़ों के दर्द या आथ्र्राइटिस में गुनगुने पानी से नहाना फायदेमंद होता है। चाहें तो गुनगुने पानी में नहाएं या पानी में तौलिया को भिगोकर शरीर को स्पंज करें। इससे मसाज भी हो जाएगी और जोड़ों की अकड़न धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी।
हाट फुट बाथ थेरेपी:  जिन्हें पैरों में ठंड लगती है या जलन रहती है या सूजन रहती है, उन्हें हाट फुट बाथ देते हैं। मरीज को स्टूल पर बिठा कर टब में गुनगुना पानी दिया जाता है, जिसमें वो पैर डुबो कर बैठता है। सिर पर गीला तौलिया रखते हैं, ताकि कोई बुरा प्रभाव न हो। वार्म वॉटर चुंबक की तरह रक्त को खींचता है, रक्त संचार ठीक करता है और पैरों की परेशानी कम करता है।
स्पाइनल बाथ थेरेपी:  अगर किसी मरीज को सिरदर्द, चक्कर या घबराहट की शिकायत हो तो उसे वार्म स्पाइनल बाथ दिया जाता है। गुनगुने पानी में तौलिये को भिगोकर थोड़ा निचोड़ कर जमीन पर बिछा देते हैं। मरीज को उस तौलिये पर पीठ के बल लेटने के लिए कहा जाता है। पानी की गर्मी या हीट से स्पाइन पर असर होता है, जिससे नर्वस सिस्टम संबंधी या न्यूरोलॉजिकल संबंधी बीमारियों में आराम मिलता है। इससे ठीक होने वाली समस्याओं में सिरदर्द, डिप्रेशन, मिर्गी, माइग्रेन आदि शामिल हैं।
इंटरनल स्टीम थेरेपी:  अस्थमा, साइनस, गले का संक्रमण, थाइरॉइड के मरीज को यह थेरेपी दी जाती है। मुंह और नाक से स्टीमर, बॉयलर या पतीले से वार्म वॉटर स्टीम दी जाती है। मरीज सिर पर तौलिया या चादर लपेटकर स्टीम लेते हैं। पानी में युकेलिप्टस या अजवायन के पत्ते या युकेलिप्टस ऑयल की 4-5 बूंदे डाल कर स्टीम दी जाती है। स्टीम लेने से पहले मरीज को एक गिलास पानी पिलाया जाता है, ताकि उसे घबराहट न हो

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