माईग्रेन रोग की जानकारी व उपचार



माइग्रेन की बीमारी काफी दर्दनाक, आवर्ती और गंभीर सिरदर्द की स्थिति है। यह किसी भी उम्र में व्यक्तियों को परेशान कर सकती है। महिलाओं को माइग्रेन होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। यदि कोई व्यक्ति गंभीर सिरदर्द का अनुभव करता है, जिसमें दर्द की आवृति नस के फड़कने के सामान होती है, तो यह माइग्रेन की स्थिति होती है, जिसका तुरंत इलाज किया जाना आवश्यक होता है। माइग्रेन के अनेक कारण हो सकते हैं। यह स्थिति अनेक प्रकार की न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के उत्पन्न होने का कारण भी बन सकती है। अतः व्यक्तियों को माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले कारकों के बारे में जानने और उनसे परहेज करने की आवश्यकता होती है।
माइग्रेन, गंभीर सिर दर्द की स्थिति है, जिसमें आमतौर पर सिर के एक तरफ गंभीर दर्द, स्पंदन के रूप में उत्पन्न होता है। माइग्रेन में कभी सिर के दाएं तो कभी बाएं हिस्से में अचानक दर्द होने लगता है। जिसे हम सर की गर्मी भी कहते हैं, मानसिक तनाव और कम नींद के कारण होने वाली यह समस्या पुरुषों की बजाए महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। इस रोग की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें दिन में अचनाक कभी भी तेज दर्द उभर आता है।
व्यक्तियों में माइग्रेन की स्थिति में उत्पन्न होने वाला दर्द, कई घंटों या दिनों तक बना रह सकता है। दर्द इतना गंभीर हो सकता है कि यह सम्बंधित व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप उत्पन्न कर सकता है। माइग्रेन की बीमारी 15 से 55 वर्ष की आयु के लोगों को अधिक प्रभावित करती है। यह समस्या अक्सर मतली, उल्टी तथा प्रकाश और ध्वनि के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ उत्पन्न हो सकती है।
कुछ व्यक्तियों में माइग्रेन का सांकेतिक लक्षण औरा (aura) के रूप में जाना जाता है, जो सिरदर्द से पहले या उसके साथ उत्पन्न होता है। आभा (aura) में दृश्य गड़बड़ी शामिल हो सकती है, जैसे प्रकाश की चमक (flashes of light) और blind spots या अन्य गड़बड़ी, जैसे चेहरे के एक तरफ या हाथ या पैर में झुनझुनी और बोलने में कठिनाई इत्यादि।
माइग्रेन की स्थिति लोगों में एक गंभीर, स्थिर सिरदर्द का कारण बन सकती है। सिर का दर्द हल्के रूप में शुरू हो सकता है, और उपचार के बिना अधिक गंभीर हो जाता है।
व्यक्तियों में माइग्रेन का दर्द सबसे अधिक माथे (forehead) को प्रभावित करता है। यह दर्द आमतौर पर सिर के एक तरफ होता है, लेकिन यह दोनों तरफ शिफ्ट हो सकता है।
अधिकांशतः माइग्रेन लगभग 4 घंटे तक रहता है। यदि इलाज न किया जाये या उपचार प्रभावी न हो तो इस स्थिति में 72 घंटे से एक सप्ताह तक बना रह सकता है।
माइग्रेन कई प्रकार का हो सकता है। सबसे सामान्य माइग्रेन के प्रकारों में औरा के साथ माइग्रेन (migraine with aura) और औरा के बिना माइग्रेन (Migraine without aura) प्रमुख हैं।
औरा के साथ माइग्रेन – Migraine with aura in Hindi
इस प्रकार के माइग्रेन को क्लासिक माइग्रेन (classic migraine), जटिल माइग्रेन (complicated migraine) और नकसीर माइग्रेन (hemiplegic migraine) कहा जाता था। माइग्रेन की स्थिति में अनेक व्यक्ति औरा का अनुभव कर सकते हैं। औरा, सिरदर्द शुरू होने की चेतावनी के रूप में कार्य करता है। औरा (aura) का प्रत्येक लक्षण आमतौर पर पाँच मिनट से एक घंटे के बीच रहता है।
जब औरा के साथ माइग्रेन की स्थिति दृष्टि को प्रभावित करती है, तो रोगी ऐसी चीजों को देख सकता है जो कि वास्तव में नहीं हैं। वे अपने सामने की वस्तु के कुछ हिस्सों को भी नहीं देख सकते हैं या हिस्सा गायब हो जाता है, और फिर वापस आता है।
इस प्रकार के माइग्रेन की स्थिति में सिरदर्द शुरू होने से पहले व्यक्ति निम्न प्रकार के लक्षणों को महसूस कर सकता है, जैसे:
डबल विज़न
सुनने की समस्याएं
चक्कर आना
भाषण समस्याएं, इत्यादि।
औरा के बिना माइग्रेन – Migraine without aura in Hindi
इस प्रकार के माइग्रेन की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति संवेदना में बिना कोई गड़बड़ी के माइग्रेन का अनुभव करता है। वर्तमान में 70 से 90 प्रतिशत माइग्रेन, औरा के बगैर उत्पन्न होते हैं। यदि इस स्थिति का इलाज नहीं किया जाए या उपचार सफल न हो, तब सिरदर्द का अटैक आमतौर पर 4 से 72 घंटे तक बना रहता है। दर्द स्पंदन के रूप में होता है, तथा सिर हिलाने-डुलाने या झुकाने के दौरान दर्द ओर भी बदतर हो जाता है।
माइग्रेन के अन्य प्रकार
माइग्रेन के अन्य प्रकार हैं:
क्रोनिक माइग्रेन (Chronic migraine) – इस प्रकार के माइग्रेन की स्थिति में माइग्रेन अटैक महीने के 15 दिनों में ट्रिगर होता है। इसे कभी-कभी गंभीर माइग्रेन भी कहा जाता है और दवाओं के अधिक उपयोग करने के कारण हो सकता है।
एक्यूट माइग्रेन (Acute migraine) – एक्यूट माइग्रेन को एपिसोडिक माइग्रेन (episodic migraine) के नाम से भी जाना जाता है, इस प्रकार के माइग्रेन की स्थिति में महीने में 14 दिन तक सिरदर्द होता है।
वेस्टिबुलर माइग्रेन (Vestibular migraine) – वर्टिगो से जुड़े माइग्रेन को वेस्टिबुलर माइग्रेन के रूप में जाना जाता है। माइग्रेन से पीड़ित लगभग 40 प्रतिशत लोगों में कुछ वेस्टिबुलर लक्षण प्रगट होते हैं। वेस्टिबुलर माइग्रेन की स्थिति में संतुलन खोने और चक्कर आने से सम्बंधित लक्षण प्रगट होते हैं।
मासिक धर्म माइग्रेन (Menstrual migraine) – यह तब होता है जब हमले मासिक धर्म चक्र से जुड़े पैटर्न में होते हैं।
हेमार्टेजिक माइग्रेन (Hemiplegic migraine) – यह अस्थायी अवधि के लिए शरीर के एक तरफ की कमजोरी का कारण बनता है।
माइग्रेन के साथ माइग्रेन आभा (Migraine with brainstem aura) – यह एक दुर्लभ प्रकार का माइग्रेन है, जो गंभीर रूप से न्यूरोलॉजिकल क्रियाओं को प्रभावित करता है।
मासिक धर्म माइग्रेन (Menstrual migraine) – मासिक धर्म से संबंधित माइग्रेन की स्थिति, माइग्रेन से पीड़ित महिलाओं में से 60 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है। इस प्रकार का माइग्रेन मासिक धर्म के पहले, दौरान या मासिक धर्म के बाद में और ओव्यूलेशन के दौरान भी उत्पन्न हो सकता है
माइग्रेन के लक्षण
माइग्रेन एक गंभीर सिरदर्द है, जो अक्सर सिर के एक तरफ होता है। माइग्रेन के प्रारंभिक लक्षणों या संकेतों की पहचान कर, व्यक्ति इसको पूर्ण विकसित होने से पहले ही रोकने में सफलता प्राप्त कर सकता है।
यह माइग्रेन अक्सर बचपन, किशोरावस्था या वयस्कता के दौरान शुरू होता है, यह बीमारी चार चरणों के माध्यम से प्रगति कर सकती है, जो इस प्रकार हैं: प्रॉड्रोम (prodrome), औरा (aura), अटैक (attack) और पोस्टड्रोम (post-drome)। प्रत्येक व्यक्ति जो माइग्रेन से पीड़ित होता है, उसे इन सभी चरणों से गुजरना पड़ता है।
प्रॉड्रोम – prodrome
इस स्टेज में सिरदर्द शुरू होने के एक या दो दिन पहले, माइग्रेन के लक्षण प्रगट होने लगते हैं। प्रॉड्रोम माइग्रेन की स्थिति के दौरान निम्न लक्षणों को देखा जा सकता है: जैसे:
कब्ज (Constipation)
मूड में बदलाव या डिप्रेशन
भूख में कमी
गर्दन में अकड़न
चिड़चिड़ापन
थकान या ऊर्जा में कमी का अहसास होना
प्यास और पेशाब में वृद्धि होना
बार-बार जम्हाई आना, इत्यादि।
औरा – Aura
कुछ व्यक्ति, माइग्रेन से ठीक पहले या माइग्रेन के दौरान औरा स्टेज से सम्बंधित लक्षणों को महसूस कर सकते हैं। माइग्रेन की औरा स्टेज में तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी से संबंधित लक्षण उत्पन्न होते हैं। इस स्टेज से सम्बंधित लक्षणों को आमतौर पर देखा जा सकता है। प्रत्येक लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होते हैं और 20 से 60 मिनट तक रहते हैं। माइग्रेन औरा के लक्षणों में शामिल हैं:
दृश्य से सम्बंधित समस्याएं, जैसे चमकीले धब्बे (bright spots) या प्रकाश की चमक (light flashes), इत्यादि
अस्थायी रूप से दृष्टि खोना
चेहरे, हाथों या पैरों में चुभन, झुनझुनी या सुन्नता महसूस होना
चेहरे या शरीर के एक तरफ कमजोरी महसूस होना
स्पष्ट रूप से बोलने में कठिनाई होना, इत्यादि।
अटैक – Attack
औरा स्टेज के बाद माइग्रेन अटैक की स्थिति उत्पन्न होती है। यह वास्तविक माइग्रेन का सबसे तीव्र या गंभीर चरण (स्टेज) है। माइग्रेन अटैक की स्थिति में उत्पन्न होने वाले लक्षण, आमतौर पर चार से 72 घंटे तक रह सकते हैं। माइग्रेन के लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं, अटैक की स्थिति में माइग्रेन के कुछ प्रमुख लक्षण निम्न हैं, जैसे:
दर्द आमतौर पर सिर के एक तरफ होता है, लेकिन अक्सर दोनों तरफ महसूस किया जा सकता है
स्पंदन के रूप में दर्द का अनुभव
प्रकाश, ध्वनि और कभी-कभी गंध के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाना
जी मिचलाना और उल्टी की समस्या
चक्कर या बेहोशी आना, इत्यादि।
पोस्टड्रोम – postdrome
माइग्रेन की अटैक स्टेज के बाद, एक व्यक्ति अक्सर पोस्टड्रोम स्टेज का अनुभव करता है। इस स्टेज (चरण) के दौरान, आमतौर पर निम्न लक्षणों को महसूस किया जा सकता है, जैसे
भ्रमित होना
मूड और भावनाओं में परिवर्तन
ख़ामोशी महसूस करना
थकावट और उदासीन महसूस होना
हल्का, सुस्त सिरदर्द बना रहना, इत्यादि।
माइग्रेन का कारण
माइग्रेन का अभी तक कोई भी ज्ञात कारण नहीं है। हालांकि शोधकर्ताओं ने माइग्रेन की बीमारी को ट्रिगर करने वाले कुछ कारकों का पता लगाया है, जिसमें मस्तिष्क रसायनों में परिवर्तन (सेरोटोनिन के स्तर में कमी) और मस्तिष्क की असामान्य गतिविधियों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही माइग्रेन के विकास में आनुवांशिकी और पर्यावरणीय कारक की एक अहम् भूमिका रहती है। माइग्रेन का कारण बनने वाले या इस स्थिति को ट्रिगर करने वाले कारकों में निम्न को शामिल किया जा सकता है, जैसे:
हार्मोनल परिवर्तन – हार्मोन के बदलते स्तर के कारण महिलाओं को मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के दौरान माइग्रेन के लक्षणों का अनुभव हो सकता है।
भावनात्मक कारक – तनाव, अवसाद, चिंता, उत्तेजना (उत्सुकता) और सदमा इत्यादि भावनात्मक विकार माइग्रेन का कारण बन सकते हैं।
शारीरिक कारण – थकान और अपर्याप्त नींद, कंधे या गर्दन में तनाव, खराब मुद्रा (आसन) और तीव्र शारीरिक परिश्रम, ये सभी माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं। लो ब्लड शुगर और जेट लेग सिंड्रोम (विमान यात्रा से हुई थकान) भी माइग्रेन का कारण बन सकती हैं।
आहार संबंधी कारक – शराब और कैफीन माइग्रेन को ट्रिगर करने में योगदान दे सकते हैं। कुछ विशिष्ट खाद्य पदार्थों भी माइग्रेन के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, जिसमें चॉकलेट, पनीर, खट्टे फल और टायरामाइन युक्त खाद्य पदार्थ इत्यादि शामिल हैं।
दवाएं – कुछ नींद की गोलियां, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) दवाएं और मिश्रित गर्भनिरोधक गोली (contraceptive pill) आदि को माइग्रेन के संभावित कारकों में शामिल किया गया है।
पर्यावरणीय कारक – कुछ पर्यावरणीय कारक भी माइग्रेन के जोखिम को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
तीव्र गंध जैसे- इत्र, पेंट थिनर, सेकंड हैंड स्मोक, इत्यादि
तेज आवाज या शोर,
तापमान में परिवर्तन और तेज रोशनी या सूरज की चकाचौंध, इत्यादि
माइग्रेन अक्सर अज्ञात और अनुपचारित होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को नियमित रूप से माइग्रेन के संकेत और लक्षण महसूस होते हैं, तो इसके इलाज के लिए तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, इन लक्षणों में शामिल हैं:
अचानक तीव्र सिर दर्द या दर्द के पैटर्न में बदलाव महसूस होना
बुखार के साथ सिरदर्द
गर्दन में अकड़न
मानसिक भ्रम
दौरे
दोहरी दृष्टि
सुन्नता या बोलने में परेशानी, इत्यादि।
माइग्रेन का इलाज – Migraine treatment in Hindi
वर्तमान में माइग्रेन का कोई भी उपयुक्त इलाज नहीं है। इलाज के माध्यम से माइग्रेन के अटैक को रोकने, और उत्पन्न होने वाले लक्षणों को कम करने का लक्ष्य रखा जाता है, इसके लिए डॉक्टर दर्द निवारक और प्रिवेंटिव मेडिसिन (Preventive medications) की सहायता ले सकता है।
डॉक्टर द्वारा सिफारिश की जाने वाली ओवर-द-काउंटर दवाएं, माइग्रेन से पीड़ित व्यक्तियों में दर्द को कम करने में मदद कर सकती हैं। ओवर-द-काउंटर दवाओं के अंतर्गत एस्पिरिन या इबुप्रोफेन (एडविल, मोट्रिन आईबी) को शामिल किया जा सकता है। अधिक समय तक उपयोग किये जाने पर ये दवाएं सिरदर्द, अल्सर और जठरांत्र संबंधी मार्ग में रक्तस्राव का कारण बन सकती है।
डॉ. द्वारा मरीज के लिए माइग्रेन से राहत प्रदान करने के लिए कैफीन, एस्पिरिन और एसिटामिनोफेन (acetaminophen) दवाओं की सिफारिश की जा सकती है।
डॉक्टर द्वारा माइग्रेन के इलाज में Triptans, Dihydroergotamine दवाओं का भी उपयोग किया जा सकता है।
माइग्रेन की रोकथाम के लिए दवाएं
माइग्रेन को ट्रिगर करने वाली स्थितियों को कम करने वाली दवाओं का उपयोग कर माइग्रेन की रोकथाम और उपचार में सफलता प्राप्त की जा सकती है, इन दवाओं में शामिल हैं:
रक्तचाप कम करने वाली दवाएं – रक्तचाप कम करने वाली दवाओं में प्रोप्रानोलोल (propranolol) और मेटोप्रोलोल टारट्रेट (metoprolol tartrate) जैसे बीटा ब्लॉकर्स शामिल हैं। कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स जैसे- वेरापामिल (verapamil) दवाएं औरा (aura) के साथ उत्पन्न होने वाले माइग्रेन की स्थिति को रोकने में मददगार कर सकती हैं।
एंटीडिप्रेसेंट – एक ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट (एमिट्रिप्टीलिन) ड्रग (tricyclic antidepressant), माइग्रेन को रोकने में सहायक हो सकता है।
एंटी सीज़र दवाएं (Anti-seizure drugs) – वैल्प्रोएट (Valproate (Depacon)) और टोपिरामेट (Topiramate (Topamax)) आदि दवाएं माइग्रेन की आवृति को कम करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन ये दवाएं अनेक दुष्प्रभाव जैसे- चक्कर आना, वजन में बदलाव, जी मिचलाना, इत्यादि का कारण बन सकती हैं।
बोटॉक्स इंजेक्शन – बोटोक्स इंजेक्शन कुछ वयस्कों में हर 12 सप्ताह के लिए माइग्रेन को रोकने में मदद कर सकता है।
कैल्सीटोनिन जीन-संबंधी पेप्टाइड (CGRP) मोनोक्लोनल एंटीबॉडी – माइग्रेन का इलाज करने के लिए इन दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। इन्हें मासिक इंजेक्शन के रूप में दिया जा सकता है।
माइग्रेन से बचने के घरेलू उपाय
कोई भी व्यक्ति जीवनशैली में बदलाव कर, माइग्रेन की आवृत्ति को रोकने में सफलता प्राप्त कर सकता है, जिसमें शामिल हैं:
पर्याप्त नींद लें
धूम्रपान न करें
सोने और खाने की एक स्वास्थ्य दिनचर्या बनायें
तनाव कम करें
हाइड्रेटेड रहने के लिए अधिक मात्रा में पानी पिए या तरल पदार्थ का सेवन करें
कुछ खाद्य पदार्थों जैसे- शराब और कैफीन से परहेज
नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करें।
जब माइग्रेन के लक्षण शुरू होते हैं, तो शांत, अंधेरे कमरे में जाने की कोशिश करें, आँखें बंद करें और आराम करें।
एक ठंडे कपड़े या बर्फ के पैक को तौलिया में लपेटकर अपने माथे पर या गर्दन के पीछे रखें।
सिरदर्द से सम्बंधित लक्षणों को डायरी में नोट करें, इससे दर्द को बढ़ाने वाले कारकों के बारे में जाननें में सहायता मिलेगी।
माइग्रेन में क्या खाएं
एक स्वस्थ आहार का सेवन कर पीड़ित व्यक्ति माइग्रेन को कम करने में सफलता प्राप्त कर सकता है। एक स्वस्थ माइग्रेन आहार के रूप में ताजे खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है, जो कि निम्न हैं:
फल जैसे- चेरी और क्रैनबेरी
सब्जियां जैसे- समर स्क्वैश (summer squash), शकरकंद, गाजर, और पालक
साबुत अनाज
लीन प्रोटीन (lean proteins), इत्यादि।
माइग्रेन में परहेज
माइग्रेन बीमारी की स्थिति में कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सिफारिश की जाती है, जो माइग्रेन की स्थित को ट्रिगर कर सकती है। इनमें शामिल हो सकते हैं:
शराब या कैफीन युक्त पेय
खाद्य योजक (food additives), जैसे- नाइट्रेट (nitrates), एस्पार्टेम (aspartame), या मोनोसोडियम ग्लूटामेट (monosodium glutamate)
टायरामाइन (tyramine) युक्त खाद्य पदार्थ
खट्टे फल
दुग्ध उत्पाद, चॉकलेट
नट्स
लाइमा बीन्स (lima beans)
नेवी बीन (navy beans)
प्याज
सौकरकूट (sauerkraut)
एज्ड चीज़ (aged cheeses), सॉरेक्राट (sauerkraut) और सोया सॉस (soy sauce), इत्यादि।

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