कमर दर्द से राहत पाने के असरदार उपचार


कमर के निचले हिस्से का दर्द (Lumbago) दोनों छोटे और बड़े वयस्कों को प्रभावित कर सकता है| तीव्रता के आधार पर, यह जीवन की गुणवत्ता को गंभीरता से बाधित कर सकता है, जो रोज़ाना सामान्य कार्यों को मुश्किल और दर्दनाक बना देता है| क्योंकि किसी भी कार्य को आगे या पीछे की ओर झुकने से पीड़ादायक लक्षणों का कारण बन सकता है, या तो स्थानीय रूप से निचले हिस्से में ही महसूस होता है| या यह शरीर के अन्य भागों में विकीर्ण हो सकता है|
कमर के निचले हिस्से में दर्द कभी भी किसी को भी हो सकता है। यह अक्सर ज्यादा देर तक बैठकर काम करने, घंटों खड़े रहकर घर का काम करने, या फिर जिम में ज्यादा वर्कआउटकरने से होता है। एक समय तक यह समस्या उम्र के बढ़ने पर होती थी, लेकिन भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में कम उम्र के लोगों को भी कमर में दर्द की शिकायत रहती है। समय रहते, अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो आगे चलकर यह चिंता का कारण बन सकती है। इसके लिए डॉक्टर के पास जाना तो सही विकल्प है ही, लेकिन कमर दर्द के लिए घरेलू उपचार लेना ज्यादा बेहतर है।
आज के समय में कमर का दर्द हर घर में किसी एक को जरूर रहता है। कुछ को कमर के मध्यय हिस्से में तो कुछ को कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है। दर्द अगर ज्यादा बढ़ जाए, तो यह कूल्हों तक भी फैल सकता है, जिससे काम करने में परेशानी आती है। इससे आराम पाने के लिए लोग दवाएं लेते हैं, उस वक्त तो भले ही दर्द ठीक हो जाए, लेकिन बाद में ये समस्या कभी न कभी उभर ही आती है। ऐसे में आप अपनी आदतों में छोटे-छोटे बदलाव कर इससे बच सकते हैं। आज के इस आर्टिकल में हम आपको कमर दर्द से राहत पाने के कई घरेलू नुस्खे बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप कमर के दर्द को हमेशा के लिए बाय-बाय कह सकते हैं।
जब कभी आपकी मांसपेशियों, लिगामेंट या पीठ की डिस्क को कोई नुकसान हुआ हो या चोट लगी हो, तो आपको कमर दर्द की शिकायत हो सकती है। तनावग्रस्त लिगामेंट्स और मांसपेशियों में ऐंठन कमर के दर्द का प्रमुख कारण है। सिर्फ यही नहीं, कमर के दर्द के ऐसे बहुत से कारणों के बारे में आप नीचे जान सकते हैं।
कठोर शारीरिक कसरत या व्यायाम करना
धुम्रपान करना
कमजोर हड्ड़ियों के कारण
गर्भावस्था के कारण
शरीर की कमजोरी
टू या फोर व्हीलर से घंटों यात्रा करना
मोटापे के कारण
किसी वस्तु को गलत तरीके से उठाना
नींद न आना
आपकी उम्र
गठिया रोग की समस्या
बढ़ती हुई उम्र
सही गद्दे पर न सोना
घंटों तक एक ही जगह बैठे रहना
दिनभर कुर्सी पर गलत पॉश्चर में बैठना
रामबाण उपाय मेथीदाना
मेथी अपने एंटीइंफ्लेमेट्री गुणों के कारण काफी लोकप्रिय है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है, कि मेथी कमर के दर्द से राहत दिलाने में बहुत मददगार है। नीचे बताए गए तरीके से आप कमर दर्द के लिए मेथी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल-
कमर दर्द के लिए मेथीदाना बहुत अच्छा प्राकृतिक उपाय माना जाता है। इसका उपयोग करने के लिए एक चम्मच मेथीदाना पाउडर को एक गिलास गर्म पानी में मिलाएं और पी लें। स्वाद के लिए आप चाहें, तो इसमें शहद मिला सकते हैं। अगर कमर का दर्द सही नहीं हो रहा, तो हर रोज रात में सोने से पहले इस नुस्खे को अपनाएं। दर्द में बहुत आराम मिलेगा।
सेंधा नमक
सेंधा नमक, जिसे मैग्रीशियम सल्फेट के रूप में भी जाना जाता है, कमर दर्द का सबसे अच्छा घरेलू उपाय है। दरअसल, मैग्रीशियम भी कमर दर्द से राहत दिलाने में मददगार है।
कैसे करें इस्तेमाल-
बैक पेन के लिए सेंधा नमक का उपयोग आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए एक बाल्टी गुनगुने पानी में एक या दो चम्मच सेंधा नमक मिला लें। यदि बाथटब है, तो 10 से 15 मिनट तक अपने शरीर को इसमें डुबोकर रखें और अगर बाल्टी में पानी में सेंधा नमक मिलाया है, तो आप 15 मिनट तक इससे स्नान ले सकते हैं। हफ्ते में तीन बार ऐसा करने से कमर दर्द की समस्या खत्म हो जाएगी।
हल्दी
हल्दी शरीर में किसी भी अंग में दर्द का इलाज बेहतर तरीके से करती है। दरअसल, हल्दी में कुरकुमिन नाम का यौगिक होता है, जिसमें एंटी इंफ्लेमेट्री और पेन रिलीविंग प्रॉपर्टी होती हैं। हल्दी के इन गुणों का प्रयोग कमर दर्द और इसके लक्षणों से राहत दिलाने के लिए बहुत अच्छा है।
कैसे करें इस्तेमाल-
दर्द से राहत पाने के लिए हल्दी से अच्छा कोई नुस्खा नहीं है। आयुर्वेद में हल्दी को औषधि की मान्यता दी गई है। कमर दर्द से राहत पाने के लिए हर रोज एक गिलास गर्म दूध में चुटकी भर हल्दी मिलाएं और पी लें। दिन में दो बार हल्दी वाला दूध पीने से कमर का दर्द चुटकियों में गायब हो जाएगा।
अदरक
वैसे तो अदरक कई बीमारियों का अच्छा इलाज है, लेकिन कमर दर्द दूर करने में ये आपकी बहुत मदद करता है। अंदरक में एंटीइंफ्लेमेट्री गुण होते हैं, जो दर्द से राहत दिलाते हैं। नीचे बताए गए तरीके से कमर के दर्द में अदरक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल-
बैक पेन में अदरक बहुत फायदेमंद है। इसका प्रयोग करने के लिए एक कप गर्म पानी में अदरक को 5 से 10 मिनट तक डालकर रखें। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं और ठंडा होने से पहले ही पी जाएं। अगर आप ये नुस्खा नहीं कर पाते, तो वैकल्पिक रूप से कमर की मालिश करने के लिए अदरक के तेल का उपयोग कर सकते हैं। दिन में दो बार इस उपचार को करने से कमर दर्द से राहत मिलेगी।
लहसुन
लहसुन में सेलेनियम और कैप्सैसिन जैसे घटक होते हैं, जो अपने एंटी इंफ्लेमेट्री और एनाल्जेसिक प्रभावों के लिए जाने जाते हैं। ये घटक कमर दर्द से आराम दिलाने में बहुत मददगार साबित होते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल –
सबसे पहले लहसुन की 8 से 10 कलियों को पीसकर एक पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगाकर एक साफ टॉवेल से ढंक लें। अब इसे 20-25 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। फिर इसे गीले कपड़े से पोंछ लें। वैकल्पिक रूप से आप हर रोज सुबह लहसुन की कलियां भी चबा सकते हैं। कमर दर्द से बहुत जल्दी निजात मिलेगी
एलोवेरा
एलोवेरा एक औषधीय जड़ी-बूटी है। इसमें एंटीइंफ्लेमेट्री और एनालजेसिक गुण पाए जाते हैं, जो कमर दर्द का बेहतर इलाज करने में मदद करते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल-
कमर दर्द को जड़ से खत्म करने के लिए हर रोज दिन में एक बार आधा या एक चौथाई कप एलोवेरा जूस पीएं। अगर जूस न पी सकें, तो प्रभावित हिस्से पर एलोवेरा जेल लगा लें, बहुत फायदा पहुंचेगा।
अनानास
अनानास ब्रोमेलेन नामक एंजाइम का एक समृद्ध स्त्रोत है। आपको बता दें, कि ब्रोमेलैन में एंटी इंफ्लेमेट्री और एनालजेसिक गुण पाए जाते हैं, जो कमर दर्द (पीठ दर्द) के उपचार में सहायक हैं। कमर दर्द को सही करने के लिए अनानास का इस्तेमाल नीचे दिए तरीके से कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल-
कमर दर्द से निजात पाने के लिए अनानास को पानी के साथ मिलाकर पीस लें। अगर आप इसका जूस बनाकर नहीं पी सकते, तो आधा कप अनानास काटकर खाएं। बहुत आराम मिलेगा।
हीटिंग पैड
हीटिंग पैड आपको कमर दर्द से राहत दिलाने में बहुत फायदेमंद है। हीट थैरेपी में प्रभावित मांसपेशियों पर एनाल्जेसिक इफेक्ट पाया जाता है, इसलिए मांसपेशियों की ऐंठन और दर्द से जल्द राहत मिलती है।
कैसे करें इस्तेमाल-
कमर दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए हीटिंग पैड अपने घर में जरूर रखें। जब भी आपको कमर में दर्द हो, तो इसे अपनी कमर पर कम से कम 25-30 मिनट के लिए रखें। दर्द से जल्द आराम पाने के लिए दिन में एक बार इस प्रक्रिया को करें। इसी तरह से आप आइस पैक का भी इस्तेमाल भी कमर दर्द से बचने के लिए कर सकते हैं।
तुलसी
तुलसी कमर दर्द का अच्छा घरेलू इलाज है। दरअसल, तुलसी में यूजेनॉल, सिट्रोनेलॉल और लीनूल नाम के तेल होते हैं। इन तेलों में मौजूद एंटीइंफ्लेमेट्री और पेन रिलीविंग गुण होते हैं, जिसका उपयोग कमर दर्द में किया जा सकता है।
कैसे करें इस्तेमाल-
जब भी आपको कमर में दर्द हो, तो तुलसी के पत्तों को 10 मिनट तक पानी में डुबोकर रखें। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ा सा शहद मिला लें और ठंडा होने से पहले इसका सेवन कर लें। वैकल्पिक रूप से आप चाहें, तो तुलसी का तेल भी कमर पर लगा सकते हैं। बहुत राहत मिलेगी। दिन में दो से तीन बार तुलसी का पानी पीने से कमर दर्द गायब हो जाएगा।
सावधानी
अगर आपको अक्सर ही कमर दर्द की समस्या रहती है, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
अपना वजन नियंत्रित रखें।
धुम्रपान करने से बचें।
बैठते समय कंधा, कमर और गर्दन को हमेशा सीधा रखें और बैठने के लिए सही पॉश्चर अपनाएं।
सोने के लिए गद्दे बहुत सॉफ्ट नहीं बल्कि हार्ड होने चाहिए और तकिया एकदम पतला होना चाहिए।
पलंग से उठते वक्त बांयी या दांयी ओर करवट लेकर ही उठें।
अपनी मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाएं।
नियमित रूप से व्यायाम करें। एरोबिक करना अच्छा विकल्प है।
चीनी, अनाज और डेयरी उत्पाद सूजन के कारण माने जाते हैं, इसलिए इन खाद्य पदार्थों को खाने से बचें। इसके बजाए ताजे फल, सब्जियों का सेवन बढ़ाएं।
अपने खाने में कैल्शियम और विटामिन की मात्रा बढ़ाएं।
बैठते या लेटते समय अपनी पीठ या को सपोर्ट प्रदान करें।

ककोड़ा(जंगली करेला) है गुणों का खजाना





ककोड़ा  एक ऐसा औषधीय फल है जिसका उपयोग हम सब्‍जी के रूप में करते हैं। हां यह अलग बात है कि अन्‍य सब्जियों के मुकाबले ककोरा आसानी से नहीं मिलते हैं। इसमें मौजूद पोषक तत्‍वों की अच्‍छी मात्रा हमें कई प्रकार की बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। ककोरा का नियमित सेवन करने से रक्‍तचाप, आंखों की समस्‍या, महिला स्‍वास्‍थ्‍य और कैंसर जैसी समस्‍याओं के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है।
हरी और गोलमटोल कांटे वाली इस सब्जी को ज्यादातर लोगों ने देखा और खाया होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सब्जी को खाने से कितने सारे फायदे शरीर को मिलते हैं।
ककोड़ा है गुणों का खजाना
इस सब्जी का नाम है ककोड़ा या ककोड़ या ककरोला। इस फल का वैज्ञानिक नाम मोमोरेख डाईगोवा है। यह एक प्रकार की सब्जी है और यह आकार में बहुत छोटी होती है। इसके ऊपर कांटेदार रेशे होते हैं। इस सब्जी को न तो उपजाया जाता है और न ही इसका बीज मिलता है। क्योंकि यह जंगलों और खेतों की बाउंडरी में पाया जाने वाला सब्जी है। बारिश का मौसम शुरू होते ही यह बाजार में दिखने लगता है। जैसे ही बारिश होती है, इसकी बेल अपने आप जंगलों और खेतों में किनारे दिखने लगती है। इसी कारण एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट भी इसके बीज नहीं रखता। केवल जंगल से ही इसकी सप्लाई होती है। सीजन खत्म होते ही पके ककोड़े के बीज गिर जाते हैं और जैसे ही पहली बारिश होती है, ककोड़े की बेल जंगल में उग आती है।
ककोड़ा बेल की जड़ एक गांठ होती है। और इसमें बहुत सारे औषधिय गुण पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से आपको कभी उल्टी नहीं होती है। और यदि आप नर और मादा दोनों पौधों को मिलाकर सेवन करते हैं तो इससे जहरीले सांप का विष भी आपके शरीर में से उतर जाता है। सबसे खास बात ये भी है कि इस फल के बीज से तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग रंग व वार्निश उद्योग में किया जाता है।
ककोड़ा बेल की जड़ एक गांठ होती ह| और इसमें बहुत सारे औषधिय गुण पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से आपको कभी उल्टी नहीं होती है। और यदि आप नर और मादा दोनों पौधों को मिलाकर सेवन करते हैं तो इससे जहरीले सांप का विष भी आपके शरीर में से उतर जाता है। सबसे खास बात ये भी है कि इस फल के बीज से तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग रंग व वार्निश उद्योग में किया जाता है।





जीरा (क्यूमिन सीड्स ) है गुणों का खजाना



दुनिया भर में भारत की जो मशहूर चीज है वह है यहां के मसाले, हिंदुस्तान के मसाले और इनकी खुशबू का कोई जवाब नहीं | भारत के मसालों का स्वाद यदि कोई एक बार चख लेता है तो फिर उसे भुला पाना आसान नहीं होता है | मसाले खाने में स्वाद व खुशबू तो बढ़ाते ही हैं साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होते हैं | उन्हीं मसालों में से सबसे ज्यादा प्रयोग जीरा (Jeera) होता है | बिना जीरे के भारतीय रसोई की कल्पना भी नहीं की जा सकती |
हमारे रोज़ाना के खाने में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों के गुण यदि हम सही रूप से जान लें, तो शायद हम कभी बीमार ना पड़ें। हर एक खाद्य पदार्थ अपने आप भी अनमोल है। शरीर से जुड़ी किसी विशेष परेशानी को खत्म करने की सक्षमता रखते हैं यह खाद्य पदार्थ।
जीरा दाल सब्जी में छौंक लगाने वाला मसाला है। अगर हम चाट की बात करें, तो वो भी जीरे के बिना अधुरा सा लगता है। जीरा पाचन और सुंगधित मसाला है। जीरा हमारे भोजन में अरुचि, पेट फूलना, अपच आदि समस्याओं को दूर करने वाली एक औषधि है|
जीरे के फायदे
पेट दर्द में तुरंत राहत
यदि किसी को पेट दर्द की समस्या है तो जीरा और चीनी को समान मात्रा में मिलाकर उसे दें | इसे खूब चबा चबा कर खाना होता है, जीरे से निकला रस पेट दर्द में तुरंत राहत देता है |
वजन कम करने में सहायक
आज की सबसे बड़ी और सबसे आम समस्या है – तेजी से वजन बढ़ना | यह हर तीसरे व्यक्ति की समस्या बनी हुई है | आज कल का खान-पान ऐसा हो गया है जिससे खाने पर कंट्रोल नहीं रहता और लोग मोटापे का शिकार हो जाते हैं | बढ़ता वजन ना केवल शरीर पर बल्कि कहीं ना कहीं दिमाग पर भी असर डाल रहा है | ऐसे में लोग तरह तरह की एक्सरसाइज़ करते हैं | कई लोग तो इसके लिए दवाइयाँ भी खाते हैं | पर कोई खास असर उन्हें दिखाई नहीं देता | ऐसे में यदि आप ये सब करके थक गए हैं तो जरा इस नुस्खे को भी अपना कर जरूर देखिये आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे |
जीरा पाउडर को पानी में मिलाकर उसमें दो चार बूंदें शहद की डालकर रोज़ सुबह खाली पेट पीएं | शहद के साथ नींबू को मिलाकर पीने से भी वजन कम किया जा सकता है |
रोज एक चम्मच जीरा पाउडर दही में मिलाकर खाएं |
रोजाना एक या दो चम्मच जीरा रात को पानी में भिगोकर रखें | सुबह उस पानी को जीरे समेत उबाल लें | अब उसे ठंडा करके सिप सिप करके पिये |
जीरे को यदि अदरक और नींबू के साथ मिलाकर इसका सेवन किया जाये तो यह वजन को जल्दी कम करने में काफी मदद करता है |
बुखार में सहायक
जीरे के साथ गुड को मिलाकर इसकी गोलियाँ बना कर दिन में दो तीन बार खाने से शरीर का तापमान संतुलन में आ जाता है |
शरीर को ठंडक देता है – 
जीरा तासीर में ठंडा होता है इसके सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है | साथ ही यह शरीर से विषाक्त तत्वों को निकाल देता है | गर्मी में ठंडे पानी में नमक,चीनी,नींबू के साथ जीरा पाउडर मिलाकर पीने से शरीर की गर्मी कम हो जाती है | यह डिहाइड्रेशन से भी बचाता है |
पाचन क्रिया सुधारने में सहायक –
 जीरे में मौजूद पोषक तत्व और एंटी-ओक्सीडेंट पाचन तंत्र को मजबूत करता है | यह इम्यूनिसिस्टम को बढ़ाता है साथ ही पेट से सम्बन्धित रोग भी दूर करता है | इससे खाना अच्छे से पच जाता है | पेट में एंठन नहीं बनती गैस की समस्या नहीं होती | पाचन क्रिया को ठीक रखने के लिए लौंग के भी काफी नुस्खे हैं |
भूख को बढ़ाता है
 जिन लोगों को भूख कम लगती है उनके लिए जीरा बहुत लाभदायक है | खाने से पहले जीरा चबा – चबा कर खाने से भूख ज्यादा लगती है |
डिलिवरी के बाद माँ को दूध कम आता हो –
प्रसव के बाद अक्सर यह समस्या महिलाओं मे पायी जाती है कि उन्हे दूध कम उतरता है तो उस समय माँ को शाही जीरे का प्रयोग करना चाहिए इससे भरपूर दूध उतरेगा |
आयरन का स्त्रोत – 
जिन लोगों को खून की कमी रहती है उनके लिए जीरा काफी लाभकारी है | यह आयरन का अच्छा स्त्रोत है | गर्भवती महिलाओं के लिए यह अमृत के समान होता है |
कोलेस्ट्रॉल कम करने में लाभकारी –
आज कल कोलेस्ट्रॉल की समस्या काफी आम हो गई है | हर कोई इस बीमारी से पीड़ित है ऐसे में जीरा आपके कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखता है |
जी मिचलाने पर तुरंत जीरा दें – 
यदि किसी का जी मिचला रहा हो तो जीरे को चबा चबा कर उसका रस चूसने से तुरंत आराम मिलता है | पानी में इलाइची को उबालकर पीने से भी जी मचलाना बंद हो जाता है |
बालों की समस्या को करता है दूर
जीरा ना केवल हमारी त्वचा के लिए फायदा करता है बल्कि हमारे बालों के लिए भी काफी लाभकारी है | बस फर्क सिर्फ इतना है की यहां जीरा काला इस्तेमाल होता है मतलब रसोई घर में जो जीरा यूज होता है वह नहीं बल्कि इसके लिए अलग से काला जीरा आता है |
बालों के झड़ने की समस्या –
 यदि बालों के झड़ने की समस्या से परेशान हैं तो काले जीरे का तेल सिर में लगाएँ इसके परिणाम काफी कारागार हुए हैं |
लंबे मजबूत घने बालों के लिए – 
रोजाना काले जीरे का सेवन दवाई की तरह करें | इससे बालों का विकास होगा, बाल काले और मजबूत हो जाएँगे 
रूसी से निजात –
 जिन लोगों को रूसी की समस्या है वह तेल को गर्म करके जीरा भी गर्म कर लें | अब गुनगुने तेल से सिर की मसाज करें | 2 से 3 बार ऐसा करने से सिर की रूसी खत्म हो जाती है |
*मेथी, अजवाइन, जीरा और सौंफ को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें. इस मिश्रण को एक चम्मच हर रोज खाने से शुगर, जोड़ों के दर्द और पेट के विकारों में आराम होगा. गैस की समस्या में भी इससे फायदा होगा.
त्वचा सम्बन्धी रोगों को दूर करता है
विटामिन सी का स्त्रोत –
 जीरा ना सिर्फ हमारे रोगों को दूर भगाता है बल्कि यह हमारी त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद साबित हुआ है | जीरा पाउडर में विटामिन सी पाया जाता है जो त्वचा के लिए काफी अच्छा होता है |
त्वचा की कसावट के लिए – 
आप जब भी फेसपैक लगाएँ तो उसमें थोड़ा सा जीरा पाउडर जरूर मिला लें | यह ना केवल आपकी त्वचा में कसाव लाता है बल्कि आपकी रंगत भी निखारता है |
त्वचा सम्बन्धी रोग – 
यदि आप पिम्पल्स से परेशान हैं या चेहरे के दाग धब्बों से परेशान हैं तो जीरा पाउडर का पेस्ट बना कर उस जगह पर लगाएँ इससे आपको काफी अच्छे परिणाम नजर आएंगे |
चेहरे की चमक – 
पानी में जीरा उबाल लें और इस पानी को ठंडा करके इससे मुँह धो लें | इससे चेहरे पे चमक आ जाती है
लीवर को नुकसान पहुंचाए जीरा
जीरे का अधिक मात्रा में सेवन करने से किडनी और लीवर को नुकसान
पहुंच सकता है, जीरे का तेल मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने या रोकने के लिए जानवरों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
हार्ट बर्न
जीरा गैस से राहत देने वाले गुणों के लिए जाना जाता है, लेकिन विंडबना यह है कि यह सबसे आम पाचन संबंधी समस्या है और हार्ट बर्न का मुख्य कारण बनता है।
गर्भवती के लिए हानिकारक -
जो महिलाएं गर्भवती होती है, उनके लिए जीरे का अधिक सेवन हानिकारक होता है। क्योंकि इससे महिलाओं का गर्भपात होता है। इसका अर्थ है कि जीरे का अधिक सेवन करने से गर्भपात या समय से पहले डिलीवरी होने की आंशका बढ़ जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को जीरे से दुरी बनाकर रखनी चाहिए।
मादक प्रभाव
जीरे के नुकसान में एक नुकसान इसमें मौजूद मादक गुण है, इसलिए जीरे का सेवन सावधानीपूर्वक करना चाहिए। जब आप जीरे का सेवन अधिक मात्रा में करने लगते हो तो यह आपके लिए नशा बन जाता है। जिसके कारण आपको मानसिक समस्याएं उनींदापन और मतली जैसी समस्याएँ हो सकती है।
ब्रेस्टफीडिंग मे जीरा के दुष्प्रभाव
जो महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग करवाती हैं, उनके लिए जीरे का सेवन अच्छा नहीं होता। इसलिए स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को जीरे का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे उनके दूध का उत्पाद कम हो जाता है।
जीरे के सेवन से ब्लड शुगर का निम्न स्तर
अगर आप जीरे का सेवन अधिक मात्रा में करते हो तब आपके शरीर में ब्लड शुगर का स्तर कम होने लगता है। इसलिए निकट भविष्य में एक सर्जरी में जाने से पहले इस बात को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि सर्जरी के दौरान ब्लड शुगर का स्तर बना रहना अति आवश्यक है। शुगर के स्तर को नियंत्रण में करने के लिए कम से कम दो सप्ताह पहले जीरे का सेवन बंद कर देना चाहिए।
भारी माहवारी न खाएं जीरा
मासिक धर्म के दौरान जीरा हेवी ब्लीडिंग का कारण बन सकता है। अगर आपने जीरे का सेवन अधिक मात्रा मे कर लिया है और इससे आपको हेवी ब्लोडिंग हो रही है, तब ऐसे में आपको इससे बचने के लिए जीरे का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
डायबीटीज के रोगियों के लिए नुकसानदेह जीरा
जीरे का नुकसान डायबिटीज रोगियों के लिए भी होता है। क्योंकि डायबिटीज रोगियों को अपने ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रण में रखने की आवश्यकता होती है। उन्हें स्वस्थ रहने के लिए ब्लड शुगर को सामान्य रखना होता है। ब्लड शुगर के स्तर में उतार चढाव डायबीटीज के रोगियों के लिए अच्छा नहीं होता। डायबिटीज के रोगियों को अपना ब्लड शुगर का स्तर सही रखने के लिए जीरे से दुरी बना कर रखनी चाहिए।

फैटी लिवर की जानकारी और प्रभावी हर्बल उपचार



लिवर, हमारे शरीर के प्रमुख आतंरिक अंगों में से एक है. असल में देखा जाए तो यह एक ग्रंथि है जिसे आप शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि कह सकते हैं. हलांकि इसकी गिनती सबसे बड़े अंगों में भी की जाती है. लिवर पित्त का निर्माण करता है, जो फैट को टूटने में मदद करता है. यह ब्लड को फ़िल्टर करने में भी सहायता करता है. लिवर में सामान्य रूप से कुछ फैट ज़रूर होता है, लेकिन कभी-कभी लिवर की कोशिकाओं में फैट की संख्या बढ़ने लगती है. यह एक गंभीर बिमारी होता है जिसे सामान्य तौर पर फैटी लिवर के नाम से जाना जाता है. फैटी लिवर डिसऑर्डर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं - एल्कोहल फैटी लिवर और नॉन-एल्कोहल फैटी लिवर. फैटी लिवर के मुख्य कारणों में खराब आहार के साथ साथ रोजाना और सिमित मात्रा में ज्यादा शराब पीना, मोटापा आदि शामिल हैं. यह बीमारी जेनेटिक (पारिवारिक) भी हो सकती है. विशेष रूप से फैटी लिवर की शुरूआत के दौरान इसके लक्षणों को अनुभव नहीं किया जाता है. लेकिन जब यह गंभीर होने लगता है, तब इसके लक्षण धीरे-धीरे अनुभव होने लगते हैं. इसमें कुछ लोगों के लक्षण एकदम साफ दिखाई देने लगता हैं तो वहीँ कुछ लोगों में यह लक्षण केवल सांकेतिक होता है
फैटी लीवर की तीन अवस्थाएं-
पहली अवस्था: - फैटी लीवर की पहली अवस्था में अनावश्यक थकान, वजन घटना और पाचन संबंधी गडबडियां आमतौर पर देखने को मिलती हैं.
दूसरी अवस्था: - इस बीमारी की दूसरी अवस्था में चक्कर और उल्टियां आना, भोजन में अरुचि और बुखार जैसे लक्षण आमतौर पर देखने को देखने को मिलते हैं.
तीसरी अवस्था: - तीसरी और अंतिम अवस्था में उल्टियों के साथ खून आना, बेहोशी और मामूली सी चोट लगने पर ब्लीडिंग का न रुकना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं. इसमें दवाओं का कोई असर नहीं होता है और ट्रांस्प्लांट ही इसका एकमात्र उपचार है.
फैटी लिवर की समस्या खासकर उन लोगों को जल्दी घेरती है जो चर्बी युक्त भोजन और शराब का सेवन ज्यादा करते हैं. लिवर की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक फैट जमा होने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. भविष्य में इससे कई तरह के नुकसान भी हो सकते हैं. ऐसी स्थिति होने पर जरूरी है कि अपने खानपान में सुधार किया जाए और नियमित जीवनशैली अपनाई जाए. हालांकि लिवर में जमा चर्बी को कुछ घरेलू नुस्खों से आसानी से दूर किया जा सकता है.
शरीर में लिवर की भूमिका प्यूरीफायर की होती है जो शरीर की गंदगी को साफ कर शरीर को स्वस्थ बनाने में मदद करता है. सिरोसिस, य‍कृत के कैंसर के बाद की दूसरी सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। यदि आप नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर (NAFLD) या नॉन एल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस फैटी लिवर (NASH) से पीडि़त है, तो आपको इससे बचाव के लिए अपनी डाइट में कुछ छोटे से बदलाव की आवश्‍यकता है।
नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस क्या है?
नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH) लिवर की सूजन और लिवर में वसा का जमा होने के कारण क्षति होती है। नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस लिवर रोग का हिस्सा है। यदि आपका "फैटी लीवर" है और आपके लिवर में वसा के निर्माण होता है, तो जरूरी नहीं कि आपमें उससे कोई समस्या या उसके कोई लक्षण दिखें। जबकि कुछ लोगों में लिवर में फैट बढ़ने के कारण लिवर में सूजन लिवर सेल्स को क्षति पहुंचती है। लिवर में क्षति के कारण आपका लिवर सही से काम नहीं करता।
नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH) के लक्षण
हर समय थकान महसूस होना।
बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना।
सामान्य रूप से कमजोरी।
आपके पेट के ऊपरी दाहिने भाग में दर्द।
हाई-ग्लाइसेमिक-इंडेक्स फूड्स से बचें
लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड खाएं
कई कम-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ हैं, जिनका आप सेवन कर सकते हैं, जैसे कई फल, सब्जियां और साबुत अनाज। कुछ कम-ग्लाइसेमिक-इंडेक्स सब्जियां शतावरी, सेम स्प्राउट्स, ब्रोकोली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, फूलगोभी, अजवाइन, ककड़ी, बैंगन, कोलार्ड साग, स्विस चार्ड, केल, सरसों, शलजम, मशरूम, भिंडी, प्याज, मटर हैं। इसके अलावा, मिर्च, मूली, स्क्वैश, टमाटर, तोरी और गोभी भी इसमें शामिल हैं।
शराब के सेवन से बचें
यदि आप शराब का सेवन करते हैं या शराब के आदि हैं, तो इसके सेवन को तुरंत बंद या फिर कम कर दें। शराब का सेवन आपके लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स बताते हैं, कि पुरुषों के लिए, शराब का अधिक सेवन प्रति दिन 4 ड्रिंक और प्रति सप्ताह 14 से अधिक होता है, जबकि महिलाओं में शराब के ज्‍यादा उपयोग को प्रति दिन 3 और प्रति सप्ताह 7 से अधिक के रूप में परिभाषित किया है।
खाद्य पदार्थ जिसमें चीनी और फ्रुक्टोज शामिल हो
यदि आप नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर (NAFLD) या नॉन एल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस फैटी लिवर (NASH)से पीडि़त है, तो आपको ऐसे खाद्य व पेय से बचें, जिनमें कि ज्‍यादा मात्रा शुगर और फ्रुक्टोज होते हैं। इसलिए स्‍वीट कोल्‍ड ड्रिंक्‍स, स्पोर्ट्स ड्रिंक, मीठी चाय व जूस के सेवन से बचें क्‍योंकि इसमें फ्रुक्टोज पाया जाता है।
*हल्दी
वैसे तो हल्दी में कई गुण होते हैं जो कई तरह के रोगों में फायदा देती है. चीनी और आयुर्वेदिक दवाओं में भी हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है. हल्दी लिवर, त्वचा और पाचन तंत्र को ठीक करने में सहायक होती है. हृदय रोग और गठिया में भी हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है. हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट के गुण होते हैं जो लिवर सेल्स को डेमेज होने से बचाती है. आप हल्दी का इस्तेमाल खाने में मसाले के तौर पर या किसी अन्य तरीके से भी कर सकते हैं
*वसानियामक (lipotropics)
Lipotropics लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं और डिटोक्सिफिकेशन की प्रतिक्रियाओं को बढ़ावा देते हैं. कुछ लिपोट्रॉपिक तत्वों में मेथियोनीन, कोलीन और बीटेन शामिल होते हैं जो वसा के प्रवाह को लिवर से बाहर लाने और बड़ी आंत के माध्यम से शरीर से बाहर लाने में सहायक होते हैं. यह लिवर में फैट के जोखिम को कम करता है. लिपोट्रॉपिक्स पित्ताशय, पूर्व मासिक रोग, फाइब्रोसिस्टिक, स्तन रोग और फैटी लिवर के इलाज में उपयोगी हो सकता है.
*व्यायाम
इन सबके अलावा आप व्यायाम के माध्यम से भी लिवर के फैट को कम कर सकते हैं. इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या के साथ-साथ जीवनशैली में भी कुछ परिवर्तन करने होंगे. साथ ही ख्याल रखें की अचानक से अधिक व्यायाम न करें, पहले कम प्रभाव वाले व्यायाम से शुरुआत करें और धीरे-धीरे व्यायाम की गति बढ़ाएं. इन घरेलू उपायों के साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें की समय-समय पर आप डॉक्टरी सलाह लेते रहें और अपने कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, शुगर और लिवर की स्थिति की जांच कराते रहें.
फैटी लिवर के घरेलू उपचार:
*. नींबू सौंठ और मिश्री की सहायता से-
एक कागजी निम्बू जो कि अच्छा पका हुआ हो उसके दो टुकड़े कर लें. इसके बाद उसमें से बीज को निकालकर आधे निम्बू को बिना काटे चार भागों में बाँट लें लेकिन ध्यान रहे कि टुकड़े अलग- अलग न होने पाएं. अब इसके एक भाग में काली मिर्च का बारीक पीसा हुआ चूर्ण, दूसरे में काला नमक अथवा सेंधा नमक जो भी उपलब्ध हो, तीसरे में सोंठ का चूर्ण और चौथे में मिश्री का चूर्ण या शक्कर भर कर रात को प्लेट में ढककर रख दें. सुबह में भोजन करने से एक घंटे पहले इस निम्बू की फांक को मंदी आंच या तवे पर गर्म करके चूस लें.
*. प्याज दूर करे लीवर फैटी लीवर-
प्याज आमतौर पर कई रोगों में आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसका इस्तेमाल हम लीवर फैटी लीवर के उपचार में भी कर सकते हैं. इसके लिए आपको बस इतना करना है कि दिन में दो बार प्याज खाते रहें. ऐसा करने से लाभ होगा.
*. छाछ आयुर्वेदिक उपचार है लीवर फैटी लीवर का-
छाछ को हम लोग वैसे भी पेट के छोटे मोटे बीमारियों में इस्तेमाल कराते रहे हैं. लीवर के लिए ये बेहद फायदेमंद है.  फैटी लीवर में छाछ जिसमें हींग का बगार देकर, जीरा काली मिर्च और नमक मिला हुआ हो दोपहर के भोजन के बाद सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है.
*आंवलों का रस-
आंवलों का रस 25 ग्राम या सूखे आंवलों का चूर्ण चार ग्राम पानी के साथ, दिन में तीन बार सेवन करने से पंद्रह से बीस दिन में यकृत के सारे दोष दूर हो जाते है. यही नहीं आंवले का सेवन आपको कई अन्य अतिरिक्त लाभ भी प्रदान करता है.
*. नींबू पानी के उपयोग से-
नींबू का खट्टा स्वाद पेट की कई समस्याओं का प्रभावी निदान प्रस्तुत करता है. इसके लिए आपको एक सौ ग्राम पानी में आधा निम्बू निचोड़कर नमक डालें (चीनी मत डाले) और इसे दिन में तीन बार पीने से जिगर की खराबी ठीक होती हैं.
*. जामुन की सहयाता से-
जामुन का कसैला स्वाद भी कई औषधीय कामों में इसेमल हो जाता है. जामुन के मौसम में 200-300 ग्राम बढ़िया और पके हुए जामुन प्रतिदिन खाली पेट खाने से जिगर की खराबी दूर हो जाती है. लीवर फैटी लीवर में भी इसका इस्तेमाल फलदायक सिद्ध होता है.

करेले की पत्तियां भी हैं गुणो का खजाना


भारत में हर तरह की साग और सब्जी उगाई जाती है, और उनका पूरी तरह से इस्तेमाल किया जाता है। फिर चाहे वह पेड़ से मिला फल हो या फिर उसकी पातियाँ। इसी तरह एक सब्जी है करेला जो खाने कड़वा होता है लेकिन यह हमारे शरीर के लिए उतना ही हैल्‍दी भी होता है। करेला एक औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। करेले की तासीर खुश्क होती है। करेला भूख और पाचनशक्ति को भी बढ़ाता है
तो सोचिये अगर करेले में इतने गुण हैं तो इसकी पत्तियां कितनी फायदेमंद होंगी।इसके पत्तो में विटामिन ए पाया जाता है और हाइपोग्लाइसेमिक के गुण होते हैं जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है। 
ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखना
 डायबिटीज के लिए करेले की पत्तियां रामबाण इलाज है। इसकी पत्तियां खाने से शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है। क्योंकि इसमें विसिन और पॉलीपेप्टाइड पी जैसे गुण पाये जाते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखता है।
मलेरिया से बचाये
 करेले की पत्तियों के सेवन से मलेरिया का उपचार करने में मदद मिलती है। क्योंकि जितने भी कड़वे पत्तों वाले साग होते हैं वे मलेरिया जैसे रोगों से बचते हैं। इसमें एंटी इन्फ्लैमटॉरी और अस्ट्रिन्जन्ट के गुण होते हैं जिससे मलेरिया के बुखार को कम किया जा सकता है।
दाद का इलाज करे
करेले के पत्ते का रस और गुलाब जल मिलाकर लगाने से दाद तुरन्त ठीक हो जाता है। क्योंकि इसमें शक्तिशाली एंटी-इन्फ्लमेशन गुण होते हैं जो दाद का संक्रमण बढ़ने नहीं देता है।
प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करे
करेले की पत्तियों में विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स अच्छी मात्रा में पाया जाता है। जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत होती है। विटामिन ए और विटामिन सी अच्छे एंटी ऑक्सीडेंट्स हैं जबकि विटामिन बी आपके शरीर के चयापचय ठीक रखता है।
एचआईवी का इलाज
करेले की पत्तिओं में प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ और निरोगी रखने के गुण होते हैं। इसीलिए यह एचआईवी के वायरस को खत्म करने में सहायक है। क्योंकि एचआईवी का वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म करदेता है। जिससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
एंटी-माइक्रोबियल गुण
इसमें एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं ऐसी बहुत सारी छोटी छोटी बीमारियां हैं जो मूलतः बैक्टीरिया, फंगल या वायरस से होती हैं। करेले के पत्तिओं में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं जो किसी भी तरह के त्वचा और पेट सम्बन्धी बीमारी नहीं होने देती हैं।
उच्च रक्तचाप को रोके
उच्च रक्तचाप में करेले की पत्तियों को रोज़ खाने से रक्तचाप सामान्य रहता है। इनमे पोटैशियम और कैल्शियम पाया जाता है। पोटैशियम और कैल्शियम की मात्रा बढ़ाकर रक्तचाप कम किया जा सकता है। ये मिनरल्स उच्च रक्तचाप के जिम्मेदार सोडियम का स्तर बढ़ने से किडनी को होने वाले नुक्सान से बचाव करते हैं।
विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर करे
खून में गंदगी होने से सबसे ज्यादा वायरस हमारे शरीर को बीमारी फैलते हैं। जिसमे सर दर्द, कमजोरी, थकान, एलेर्जी की समस्या आम है। करेले की पत्तिओं का रस पीने से खून साफ़ होता है। इसके सेवन से शरीर स्वस्थ होने के साथ-साथ, त्वचा के मुहांसे, दाग-धब्बे की समस्या भी ख़त्म हो जाती है।करेले की पत्तियों के इस्तेमाल से आप अपनी पिम्पल्स की समस्या से भी छुटकारा पा सकती है,इसके लिए करेले के पत्तों को बारीक पीसकर पेस्ट बना ले,अब इसमें थोड़ी सी हल्दी मिला लें। इस पेस्ट को मुंहासों वाली जगह पर लगाएं। थोड़ी देर बाद धो लें हफ्ते में 3-4 बार ऐसा करने से मुंहासों से छुटकारा मिलेगा।
चेहरे में चमक
अगर आप अपने चेहरे में चमक लाना चाहती है तो इसके लिए करेले के पत्ते लेकर 3-4 मिनट तक पानी में डालकर उबाल लें। उबलने के बाद इन पत्तो को पानी से निकाल कर पीस ले और बारीक पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट में थोड़ा बेसन मिलाएं और चेहरे पर लगाएं। इसे अपने चेहरे पर लगाए और 15 मिनट बाद चेहरा धो लें अब इस फेस पैक से चेहरे पर चमक आएगी।
हो सकता है ब्‍लड शुगर डाउन
करेले की पत्‍तियां मधुमेह कंट्रोल करने में लाभकारी होती हैं लेकिन इसे मधुमेह की दवाई के साथ नहीं लिया जाना चाहिये क्‍योंकि इससे ब्‍लड शुगर काफी गिर सकता है।
प्राकृतिक गर्भनिरोधक पीरियड के पांचवें दिन करेले के पत्तों का रस पीने से गर्भ नहीं ठहरता है। क्योंकि इसमें एक तरह का प्रोटीन होता है जिससे पुरुष और महिलाओं में गर्भनिरोधक के रूप में काम करता है।
कैंसर का उपचार करे
 रोजाना करेले की पत्तियां खाने से किसी भी तरह के कैंसर को ठीक किया जा सकता है। कैंसर से कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। करेले की पत्तियाँ में मौजूद एंटी- कैंसर कम्पोनेंट्स कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं में ग्लूकोस का पाचन रोक देते हैं जिससे इन कोशिकाओं की शक्ति ख़त्म हो जाती है और कैंसर की संभावना भी।
एलर्जी भी हो सकती है इससे कई लोंगो को एलर्जी भी हो सकती है, इसलिये इसे थोड़ी सावधानी से लेना चाहिये।
गर्भवती महिलाएं ना लें इसे प्रेगनेंट महिलाओं को लेने से मना किया जाता है क्‍योंकि इससे मिसकैरेज हो सकता है।

कम पानी पीने से हो सकती हैं ये स्वास्थ्य समस्याएं



पानी पीकर ही शरीर को कई बीमारियों से बचाया जा सकता है. अगर शरीर को प्रर्याप्त मात्रा में पानी (drink enough water) मिलता है, तो यह रोगों से दूर रह सकता है. लेकिन शरीर को कम पानी मिलने से कई बीमारियों व समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है."जल ही जीवन है" ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी। इससे यह बात बिल्‍कुल साफ है कि पानी पीना हमारे लिए कितना जरूरी है। हमारा शरीर जिन तत्वों से बना है, उसमें जल मुख्य घटक है। अगर शरीर में जल की मात्रा कम हो जाए, तो जीवन खतरे में पड़ जाता है। गर्मियों में प्यास अधिक लगती है तो लोग पानी भी खूब पीते हैं मगर सर्दियों में यह मात्रा कम हो जाती है। इसकी एक वजह यह है कि हमें इन दिनों प्यास नहीं लगती, जिसके कारण लोग पर्याप्‍त पानी नही पीते हैं। 
एक सेहतमंद व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए दिन भर में 8 ग्लास पानी पीना चाहिए. पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से कई तरह की बीमारियां दूर रहती हैं. इसके अलावा खून को साफ रखने में भी पानी का अहम योगदान है. पर्याप्त मात्रा से कम पानी पीने से शरीर में कई तरह की परेशानियां पैदा होने लगती हैं.
ड्राई स्किन-
पानी की कमी के कारण स्किन का मॉइश्चर कम हो जाता है। इससे स्किन ड्राई होने लगती है।कमजोर कॉन्सन्ट्रेशन-
दिमाग का 70% से ज्यादा हिस्सा पानी से बना है। इसकी कमी होने पर दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता है और किसी एक चीज़ पर ध्यान नहीं लगता।
यूरिन का रंग-
यूरिन का रंग हल्का पीला, गहरा पीला या भूरा हो, तो यह पानी की कमी की निशानी है। ऐसे में तुरंत पानी पिएं।
हार्ट बीट बढ़ना-
बॉडी में पानी की कमी होने पर हार्ट को दिमाग तक ऑक्सीजन और बाकी न्यूट्रिएंट्स पहुचाने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। ऐसे में कई बार दिल की धड़कनें अचानक बढ़ जाती हैं।
चक्कर आना- 
पानी की कमी होने पर बॉडी का एनर्जी लेवल बहुत कम हो जाता है। ऐसे में चक्कर आने की शिकायत हो सकती है।
सांसों की बदबू-
शरीर में पानी की कमी होने पर सही मात्रा में सलाइवा नहीं बन पाता। इससे मुंह में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और साँसों में बदबू आने लगती है।
माइग्रेन की समस्या
एक सर्वेक्षण के मुताबिक विश्व की जनसंख्या का 10 प्रतिशत हिस्सा माइग्रेन से पीड़ित है और इसमें से करीब 80 प्रतिशत महिलाएं हैं। क्या आपको पता है कि पर्याप्त पानी न पीने से भी माइग्रेन की समस्या हो सकती है। पानी हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है तत्व है मगर कई बार जब आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, तो इससे कई तरह के रोगों का खतरा रहता है। आमतौर पर लोगों को ये तो पता होता है कि कम पानी पीने से किडनी की पथरी का खतरा होता है मगर ये बात कम ही लोग जानते हैं कि इससे आपको माइग्रेन की समस्या भी हो सकती है।
डिहाइड्रेशन की समस्या
शरीर में पानी की मात्रा कम होने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है. शरीर में पानी कम होने से पेट खराब, अपाचन या पेट दर्द की समस्या भी हो सकती है. पानी की कमी के कारण टॉक्सिंस शरीर से बाहर नहीं निकल पाते और हमारे शरीर के अंदर कई बीमारियां पनपने लगती हैं.
थकान
पानी की कमी से शरीर में थकान महसूस होती है. जिसके कारण आप एनर्जी की कमी महसूस कर सकते हैं. पानी की कमी से सिरदर्द, उलझन, तनाव वगैरह समस्याएं हो सकती हैं. कम पानी पीने से सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती हैं.
 चेहरे में चमक
सुंदरता हर किसी को प्रिय है फिर चाहे वह स्त्री हो या पुरुष. और इस सुंदरता को बरकरार रखने में मदद करता है पानी. जी हां, सही मात्रा में पानी पीने से चेहरे में चमक आती है. लेकिन कम मात्रा में पानी पीने से चेहरे में झुर्रियां, दाग, मुंहासे, बेचान और रूखी त्वचा जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कम पानी पीने की समस्या चेहरे की चमक भी खत्म कर सकती है.
वजन बढ़ सकता है
पानी कम पीने से आपका वजन बढ़ सकता है. कई लोग मोटापे के शिकार भी हो सकते हैं. मोटापे की समस्या से परेशान लोगों के मुंह से अक्सर यह सुनने को मिलता है कि वो इतना खाते भी नहीं फिर भी उनका वजन बढ़ रहा है. तो उनके वजन बढ़ने का कारण पानी की कमी हो सकती है. शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी न होने से वजन जल्दी बढ़ने लगता है.
जोड़ों में दर्द
पानी का अधिक सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है. लेकिन कम पानी का सेवन करने से जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है. क्योंकि पानी की कमी से जोड़ों की चिकनाहट खत्म हो जाती है जिसके कारण दर्द बढ़ सकता है.
वैसे तो दही ठंडी ही होती है। इसका सेवन दिन में करें। दही में तकरीबन 80 प्रतिशत पानी के अवयव होते हैं। दही या लस्सी के सेवन से शरीर में पानी की कमी को पूरा किया जा सकता है। यह हड्डियों को भी मजबूत रखने में सहायक होता है।
ठंड में चावल खाने से भी शरीर में पानी की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। इसमें आयरन, कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्व होते हैं। फ्राइड राइस के मुकाबले उबले हुए चावल ज्यादा फायदा करेंगे।
सेब खाने से लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है। इसके अलावा इसमें फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व होते हैं। रोज सेब खाने से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी।
नींबू ठंडा होता है, लेकिन दिन में इसका सेवन फायदेमंद होगा। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने में सहायता करेगा। इससे चेहरे पर पिंपल नहीं होगा और यह शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करेगा।

भुट्टे खाने के स्वास्थ्य लाभ

                                   


बारिश के मौसम में भुट्टा खाने का अपना अलग ही मजा होता है। आयुर्वेद के अनुसार भुट्टा तृप्तिदायक, वातकारक, कफ, पित्तनाशक, मधुर और रुचि उत्पादक अनाज है। भुट्टे में पौष्टिक तत्व जैसे फोलिक एसिड, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। भुट्टे से आप ना केवल कई सारी टेस्‍टी डिश बना सकते हैं बल्कि यह स्‍वास्‍थ्‍य के हिसाब से भी बहुत लाभदायक होता है।
आयुर्वेद में भुट्टा खाने के कई फायदे गिनाए गए हैं. ये प्यास को शांत करने वाला होता है. अच्छी बात ये है कि एक ओर जहां बहुत सी चीजें पकने के बाद अपना पोषक गुण खो देती हैं वहीं भुट्टे का पोषण और बढ़ जाता है.
1. भुट्टे के पीले दानों में बहुत सारा मैगनीशियम, आयरन, कॉपर और फॉस्‍फोरस पाया जाता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। इन पोषक तत्‍वों से बुढापे में हड्डियों के टूटने के चांस कम रहते हैं और गुर्दे सामान्य कार्य करते हैं।
2. कार्न में एंटीऑक्‍सीडेंट पाया जाता है, जिससे स्‍किन लंबे समय तक जवान दिखती है। इसको लगातार खाने के अलावा आप इसका तेल लगाइये जिसमें लिनोलिक एसिड पाया जाता है। इसके अलावा स्‍किन रैश और खुजली के लिये भी भुट्टे का स्‍टार्च प्रयोग किया जाता है जिससे स्‍किन बहुत कोमल बन जाती है।
3. इसका सेवन प्रेगनेंसी में भी बहुत लाभदायक होता है इसलिये गर्भवती महिलाओं को इसे अपने आहार में जरुर शामिल करना चाहिये। इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है जिसकी कमी से होने वाला बच्‍चा अंडरवेट हो सकता है और कई अन्‍य बीमारियों से पीडि़त भी।
4. ताजे दूधिया भुट्टे के दाने पीसकर शीशी में भरकर खुली हुई शीशी धूप में रखें। दूध सूख कर उड़ जाएगा और तेल शीशी में रह जाएगा। छान कर तेल को शीशी में भर लें और मालिश किया करें। दुर्बल बच्चों के पैरों पर मालिश करने से बच्चा जल्दी चलेगा।
5. ताजे भुट्टे पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन, गुर्दों की कमजोरी दूर हो जाती है।
6.आयरन की कमी की वजह से एनीमिया की बीमारी हो जाती है, इसलिये इसको दूर करने के लिये भुट्टा खाना चाहिये क्‍योंकि इसमें विटामिन बी और फोलिक एसिड होता है जिससे एनीमिया दूर होता है।
7. भुट्टा दिल की बीमारी को भी दूर करने में सहायक है क्‍योंकि इसमें विटामिन सी, कैरोटिनॉइड और बायोफ्लेविनॉइड पाया जाता है। यह कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को बढने से बचाता है और शरीर में खून के फ्लो को भी बढाता है।
8. यह प्रचूर मात्रा में रेशे से भरा हुआ है इ‍सलिये इसे खाने से पेट का डायजेशन अच्‍छा रहता है। इससे कब्ज, बवासीर और पेट के कैंसर के होने की संभावना दूर होती है।
9.बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी ये बहुत फायदेमंद है. इसमें कोलेस्ट्रॉल न के बराबर होता है और इसलिए ये दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा है.
लाभ और भी हैं-
* भुट्टा खाने से हमारे दांत और जबड़े काफी मजबूत होते हैं.
* मक्का खाने से पेट खराब नहीं होता, इससे पाचन शक्ति मजबूत होती हैं.
* मक्का खाने के बाद जो खाली डंडा दिखता हैं, वह आग जलने के काम आती हैं.
* भुट्टा के सेवन से गुर्दे सामान्य कार्य करते हैं.
* भुट्टे का सेवन प्रेगनेंसी में भी बहुत लाभकारी होता हैं. प्रेगनेंसी में गर्भवती महिलाओं को खिलाने से बहुत फायदा मिलता हैं. इसमें फोलिक एसिड पाया जाता हैं जो बच्चे को बीमारियों से बचाते है.
*आयरन की कमी से एनीमिया रोग होता है लेकिन भुट्टा खाने से यह बीमारी दूर हो सकती हैं.
* भुट्टा दिल की बीमारी को भी दूर करता हैं, क्योंकि इसमें विटामिन सी और कैरोतिनाइड तथा बयोफ्लेविनाइड पाया जाता हैं.
* मक्का खाना कोलेस्ट्रोल लेवल को बढ़ने से बचाता हैं और शरीर में खून के फ्लो को भी बढाता हैं.
* मक्के के पीले दानों में बहुत सारे मैग्नीशियम, आयरन और फास्फोरस पाया जाता हैं, इससे हड्डियों को मजबूती मिलती हैं.
*. भुट्टे में प्रचुर मात्रा में रेशा होता हैं, इससे खाने में पेट का डायजेशन ठीक रहता हैं.