पेट दर्द के घरेलू देसी रामबाण उपचार






खराब और कई बार अनजाने में कच्चा खाना खाने से हमारे पेट में दर्द हो जाता है। जो लोग अक्सर बाहर का खाना खाते हैं उन्हें पेट दर्द की ज्यादा समस्या रहती है। कई बार संक्रमण के चलते भी पेट दर्द होता है। अगर आपको भी हमेशा पेट दर्द की शिकायत रहती है |

पेट दर्द एक आम समस्या है, जो बच्चों के साथ बड़ों और बूढ़ों को भी हो सकती है। लाइफस्टाइल में गलत खान-पान की वजह से पेट दर्द में अक्सर आप बिना सोचे समझें महंगी दवाएं खा लेते हैं, जो कई बार आपके शरीर को ही नुकसान पहुंचा देती हैं। पेट दर्द के लिए दवाओं का सेवन करने से अच्छा है कि, घरेलू उपाय आजमाए जाएं। पेट दर्द से तुरंत आराम पाने के लिए ऐसे कई घरेलू नुस्खे हैं, जो काफी असरदार साबित होते हैं।
हर कोई खाने-पाने के बाद समय-समय पर पेट दर्द या अपच की समस्याओं का अनुभव करता है। यह स्थिति ऐसी होती है, जिसमें न तो व्यक्ति आराम से बैठ पाता है और न ही उसका किसी काम में मन लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पाचन क्रिया सही न होने की वजह से पेट दर्द होता है। कई बार साधारण सी लगने वाली पेट दर्द की समस्यागंभीर हो जाती है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, बल्कि तुरंत इसका इलाज करना चाहिए। आज के हमारे इस लेख में आपको पेट दर्द से छुटकारा पाने के कुछ प्राकृतिक और प्रभावी घरेलू उपाय मिलेंगे, जो आपकी इस समस्या को चंद मिनटों में हल कर देंगे। तो चलिए, जानते हैं पेट दर्द का चुटकियों में इलाज करने वाले घरेलू नुस्खों के बारे में, लेकिन इससे पहले जानेंगे कि पेट में दर्द किन कारणों से होता है।
पेट दर्द के कारण
पेट दर्द के कई कारण होते हैं, जिन्हें अगर जान लिया जाए, तो इलाज बेहतर तरीके से किया जा सकता है। नीचे जानिए पेट दर्द के ऐसे ही कुछ कारणों के बारे में।
सीने में जलन
पेट में सूजन
कब्ज
उल्टी
दस्त
मतली
यूरीन इंफेक्शन
अल्सर।
कई बार हार्निया और गुर्दे में पथरी होने के कारण भी पेट दर्द की शिकायत हो सकती है।
पेट दर्द के प्रकार
पेट दर्द आपको कई तरीकों से प्रभावित कर सकता है। नीचे हम बता रहे हैं, आपको पेट दर्द के अलग-अलग प्रकारों के बारे में।
सामान्य पेट दर्द- 
आमतौर पर कुछ भी उल्टा सीधा खाने से पेट में अपच की समस्या हो जाती है, जिससे पेट दर्द होता है। वैसे तो यह सामान्य दर्द होता है, जिसके लिए किसी उपचार की जरूरत नहीं होती। कुछ समय बाद यह खुद ठीक हो जाता है।
ऐंठन वाला पेट दर्द- 
कई लोगों को बार-बार गैस बनने लगती है। इससे पेट में ऐंठन होती है। यह ऐंठन रूक-रूक कर होती है, जिससे व्यक्ति पूरे समय बैचेन रहता है। इसके लिए घरेलू उपचार अपनाए जा सकते हैं।
स्थानीय पेट दर्द- इस तरह का दर्द सामान्य से ज्यादा खतरनाक होता है। यह पेट में किसी एक हिस्से में होता है। अपेंडिसाइटिस या अल्सर इस तरह के पेट दर्द का कारण हो सकते हैं। इसलिए ऐसे दर्द के लिए ट्रीटमेंट लेना बहुत जरूरी है।
पेट दर्द से छुटकारा पाने के घरेलू तरीके 
पेट में दर्द होने पर आप भले ही कितनी भी दवाएं क्यों न खा लें, लेकिन ये इतनी असरदार नहीं होतीं। और उनके साइड इफेक्ट्स का खतरा ज्यादा रहता है। इसके लिए घरेलू उपचार सबसे बेस्ट है। नीचे हम आपको कुछ ऐसे ही असरदार घरेलू उपचारों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप पांच मिनट में पेट दर्द से निजात पा सकते हैं। नीचे जानिए, पेट दर्द से छुटकारा पाने के घरेलू नुस्खों के बारे में।
दही है रामबाण इलाज
पेट दर्द में दही के सेवन को तो डॉक्टरों ने भी मान्यता दी है। डॉक्टरों का भी कहा है कि पेट दर्द के वक्त दही का सेवन करने से तुरंत आराम मिलता है। इतना ही नहीं जब पेट से संबंधित किसी बीमारी के लिए ऐलोपेथी इलाज हाथ खड़े कर देते हैं तो आयुर्वेदिक दवा के रूप में उस व्यक्ति को कुछ समय तक दही या छाछ का सेवन ही कराया जाता है। दही में मौजूद बैक्टीरिया पेट दर्द को तुरंत सही कर पेट में ठंडक पहुंचाते हैं।
पेट दर्द का घरेलू इलाज हींग – 
पेट दर्द से राहत पाने के लिए हींग सबसे अच्छा घरेलू इलाज है। औषधीय गुणों के कारण यह पेट दर्द को बहुत जल्दी ठीक करती है। हींग में एंटीस्पास्मोडिक और एंटीफलटुलेंट जैसे गुण पाए जाते हैं, जो पेट दर्द के साथ गैस और अपच (Gas and indigestion) की समस्या से भी राहत दिलाने में मददगार हैं।
कैसे करें इस्तेमाल –
पेट दर्द के लिए हींग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए एक कटोरी में पानी गरम कर लें। जब पानी थोड़ा गुनगुना हो जाए, तो इसमें चुटकीभर हींग और सेंधा नमक मिला दें। पेट दर्द की स्थिति में इस हींग वाले पानी को धीरे-धीरे पीएं। इसके अलावा आप चाहें, तो थोड़े से गुनगुने पानी में हींग मिलाकर नाभि के आसपास लगा लें। पेट दर्द से जल्द आराम पाने के लिए इस प्रकिया को दिन में दो से तीन बार दोहराएं।
पेट दर्द का देसी उपचार सौंफ
वैसे सौंफ को अक्सर माउथ फ्रेशनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अक्सर सौंफ का सेवन खाना पचाने के लिए भी लोग करते हैं। सौंफ में एंटीइंफ्लेमेट्री और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो पेट दर्द के साथ गैस और सूजन की समस्या से भी राहत दिलाने में मददगार हैं।
कैसे करें इस्तेमाल –
पेट दर्द में सौंफ काफी फायदेमंद है। इसका इस्तेमाल करने के लिए एक कटोरी पानी में पिसी हुई सौंफ को कम से कम दस मिनट तक उबाल लें। अब इसे ठंडा होने दें। अब इस पानी को छान लें और इसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर पी लें। पेट दर्द बंद न हो, तो इस प्रक्रिया को एक से दो बार दोहरा सकते हैं। जल्द आराम मिलेगा।
पेट दर्द की अचूक दवा तुलसी
गैस और अपच के कारण होने वाले पेट दर्द में तुलसी सबसे असरदार दवा है। तुलसी में मौजूद यूजिनॉल नामक तत्व पेट में एसिड की मात्रा को कम करने का काम करता है। इसके अलावा तुलसी में मौजूद लिनोलेइक एसिड विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। पेट दर्द में तुलसी का इस्तेमाल आप नीचे बताए गए तरीके से कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल –
पेट दर्द में तुलसी का इस्तेमाल करने के लिए एक कप गर्म पानी में तुलसी के पत्ते डालकर पीएं। दिन में दो से तीन बार इस उपाय को कर सकते हैं। यदि ये संभव न हो, तो पेट दर्द में तुरंत आराम के लिए आप तुलसी के पत्तों को चबाना भी अच्छा होता है।
पुदीना
पुदीने के पत्ते को चबाएं या फिर 4 से 5 पत्तियों को एक कप पानी के साथ उबाल लें। पानी को गुनगुना होने दें और फिर सेवन करें।

ऐलोवेरा जूस
गैस, कब्ज, डायरिया जैसे कारणों से होने वाले पेट दर्द में ऐलोवेरा जूस काफी राहत देता है। आधा कप ऐलोवेरा जूस आपके पेट में जलन से लेकर दर्द को दूर कर देता है।
नींबू का रस
नींबू के रस के साथ काला नमक मिलाएं और आधा कप पानी डालें। इसे पीने के कुछ ही देर में पेट दर्द में कमी आएगी।
पेट दर्द को दूर भगाए ग्रीन टी-
ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट पेट में गैस निर्माण और अन्य पाचन समस्याओं को कम करने के लिए अच्छे हैं। नीचे दिए गए तरीके से गैस और अपच के कारण होने वाले दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।
कैसे करें इस्तेमाल –
पेट दर्द में ग्रीन टी का उपयोग करने के लिए एक कप गर्म पानी में एक चम्मच ग्रीन टी की पत्तियों को उबालें। पांच मिनट के लिए इसे ठंडा करें और फिर छान कर इस पेय को पी लें। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें शहद भी मिला सकते हैं। पेट दर्द से जल्द राहत पाने के लिए दिन में दो से तीन बार इस नुस्खे को दोहराएं।
सेब का सिरका
सेब का सिरका पेट दर्द का अच्छा घरेलू इलाज माना जाता है। पेट में होने वाली गैस और सूजन को कम करने के लिए यह बहुत अच्छा नुस्खा भी साबित होता है। सेब के सिरके में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल पाचन तंत्र को मजबूतबनाकर पेट दर्द से राहत दिलाते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल –
अपच से होने वाले पेट दर्द के लिए एक कटोरी में गर्म पानी कर इसमें एक कप सेब का सिरका और एक चम्मच शहद मिलाकर पी जाएं। ध्यान रखें कि, इसे धीरे-धीरे पीएं। तकलीफ ज्यादा हो, तो इस प्रक्रिया को दो बार दोहरा सकते हैं।
चावल का पानी
कई बार खाना न पच पाने की वजह से पेट में दर्द होने लगता है। ऐसे में चावल का पानी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। पेट दर्द में चावल के पानी का इस्तेमाल आप नीचे बताई गई विधि के अनुसार कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल –
पेट दर्द में चावल का पानी बहुत जल्दी राहत देता है। इसके लिए चार कप पानी को एक बर्तन में उबालें। अब उबले हुए पानी में एक कप चावल भिगोकर बर्तन में डाल दें। जब चावल नरम हो जाएं, तो इन्हें निकालकर छान लें और चावल के पानी को ठंडा होने के लिए रख दें। अब इस पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीएं। दिन में रोजाना दो बार इसे पानी से पेट में दर्द खत्म हो जाएगा।
दालचीनी
दालचीनी में मौजूद पदार्थ गैस और सूजन की समस्या को कम करते हैं। इसके अलावा दालचीनी में ऐसे कई एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो पाचन को आसान बनाने और पाचन तंत्र में जलन और क्षति के जोखिम को कम करने में बहुत मदद कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल –
अक्सर पेट दर्द से परेशान रहने वाले लोग दालचीनी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए वे अपने खाने में एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाएं। चाहें तो, दालचीनी को एक कप उबलते पानी में मिलाएं और इस पेय को धीरे-धीरे पीएं। रोजाना दो से तीन बार ऐसा करने से अपच से राहत मिल सकती है
अजवायन
अजवायन में मौजूद एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुण पेट दर्द की समस्या से छुटकारा दिलाने में बहुत मदद करते हैं। इतना ही नहीं, दस्त की समस्या से आराम पाने के लिए भी अजवायन बेहतर तरीका है।
कैसे करें इस्तेमाल –
पेट दर्द से जल्दी निजात पाने के लिए एक कटोरी में आधा चम्मच जीरा पाउडर, आधा चम्मच अजवाइन का पाउडर, एक चौथाई चम्मच अदरक का पाउडर को अच्छी तरह मिलाकर चूर्ण बना लें और एक कप गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करें। इस मिश्रण का सेवन रात को सोने से पहले करें। इसके अलावा एक चम्मच अजवाइन को चुटकीभर काला नमक मिलाकर खाएं और ऊपर से पानी पी लें। बहुत लाभ मिलेगा।
पेट दर्द में लाभदायक संतरा
संतरे फाइबर और एसिड का प्राकृतिक स्त्रोत है। संतरे की अत्यधिक अमलीय प्रकृति आपके पेट के पीएच को कम करके पाचन में सहायता करती है। यह तरीका अप्रत्यक्ष रूप से पेट की सूजन को कम करने में भी मदद करता है।
कैसे करें इस्तेमाल –
पेट दर्द की शिकायत होने पर संतरा बहुत लाभकारी है। इस समस्या से जल्द से जल्द निजात पाने के लिए दो संतरों को पानी के साथ मिक्सी में चलाकर पीस लें और खाने से पहले इस पेय का सेवन करें। दिन में एक बार इस उपाय को आजमाने से पेट दर्द से बहुत जल्दी राहत मिलेगी।
लौंग
लौंग में ऐसे पदार्थ होते हैं, जो पेट में गैस को कम करने और गैस्ट्रिक स्त्राव को कम करने में मदद कर सकते हैं। यह धीमी गति से पाचन को गति दे सकता है, जिससे दबाव और ऐंठन कम होती है। लौंग उल्टी और मतली को कम करने में भी मदद करती है।
कैसे करें इस्तेमाल –
पेट दर्द में लौंग का उपयोग करना बेहद आसान है। इसके लिए एक चम्मच पिसी लौंग को एक छोटी चम्मच शहद के साथ मिलाकर खा लें। इसके अलावा आप चाहें तो, एक कप उबलते पानी में लौंग मिला लें। रोजाना इस पानी को सोने से पहले पीने से पेट दर्द में बहुत आराम मिलेगा।
अदरक
अदरक से पेट दर्द का प्राकृतिक इलाज किया जा सकता है। अदरक में मौजूद एंटी इंफ्लेमेट्री गुण दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। पेट दर्द के इलाज के लिए अदरक का इस्तेमाल नीचे बताई गई विधि के अनुसार कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल –
पेट दर्द के लिए अदरक का घरेलू इलाज सबसे अच्छा विकल्प है। इसका इस्तेमाल करने के लिए डेढ़ कप पानी में अदरक का टुकड़ा उबाल लें। अब इसमें एक चम्मच चाय की पत्ती उबालें और दो से तीन उबाल आने तक इंतजार करें। आप चाहें तो, स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नींबू का रस भी मिला सकते हैं। इस पेय को धीरे-धीरे पीएं। पेट दर्द में आराम न मिले, तो इस प्रक्रिया को दिन में दो से तीन बार दोहराएं।
बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा एक एंटासिड के रूप में काम करता है और अपच से राहत दिलाता है। इसकी क्षारीय प्रकृति पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड का मुकाबला करने में भी सक्षम है। यह गैस को ठीक कर पेट की सूजन को भी कम करता है।
कैसे करें इस्तेमाल –
अपच से होने वाला पेट दर्द कभी-कभी बहुत खतरनाक होता है। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक छोटा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं। इस पेय को दिन में एक से दो बार पीने से पेट दर्द में आराम मिलता है।
हल्दी
पेट दर्द से आराम पाने के लिए सदियों से हल्दी का उपयोग किया जाता रहा है। दरअसल, हल्दी में एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो दर्द से लडऩे में फायदेमंद होते हैं। नीचे बताई गई विधि के अनुसार हल्दी का उपयोग पेट दर्द के लिए किया जा सकता है।
कैसे करें इस्तेमाल –
अपच के कारण होने वाले पेट दर्द से जल्द राहत पाने के लिए एक चम्मच हल्दी के साथ एक चम्मच काला नमक गुनगुने पानी के साथ लें। दर्द में बहुत आराम मिलेगा।
नारियल पानी
अक्सर ऐंठन की वजह से भी पेट दर्द की शिकायत रहती है। ऐसे में नारियल पानी पीना सबसे अच्छा उपाय है। दरअसल, नारियल के पानी में पोटेशियम और मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होती है। ये पोषक तत्व मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने का काम करते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल –
पेट दर्द में नारियल पानी सबसे अच्छा घरेलू इलाज है। पेट दर्द की समस्या से तुरंत राहत पाने के लिए चार से छह घंटे में नारियल पानी पीएं। यह उपाय पेट दर्द के लक्षणों को कम कर सकता है।
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ज्यादा उम्र मे हार्ट अटेक रोकने के उपचार


हार्ट अटैक एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय शरीर को रक्त की पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पाता है। रक्त की आपूर्ति की कमी के कारण शरीर के विभिन्न अंग ठीक से काम नहीं कर पाते हैं। यह हृदय की मांसपेशियों के कमजोर होने और रक्त को पंप करने की प्रक्रिया को धीमा करने का संकेत देता है, जिससे भविष्य में गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
40 साल की उम्र से पहले अगर आपने अपना कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर कंट्रोल कर लिया, तो बुढ़ापे में आपको हार्ट अटैक का खतरा नहीं होगा। हाल में हुए एक अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है कि 40 साल की उम्र से पहले अगर आप बीमार पड़ते हैं, तो इसका असर आपके बुढ़ापे पर भी पड़ता है। यहां आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि दुनियाभर में होने वाली सबसे ज्यादा मौतों का कारण 'हार्ट अटैक (Heart Attack)' है
कितना होना चाहिए ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल
इस अध्ययन के मुताबिक अगर युवावस्था में आपके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) का लेवल 100 mg/dL या इससे ज्यादा हो जाए, तो बुढ़ापे में दिल की बीमारियों का खतरा 64% तक बढ़ जाता है। ये अध्ययन जर्नल ऑफ अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में छापा गया है। इसी अध्ययन में यह भी बताया गया है कि अगर आपका ब्लड प्रेशर 130 mm Hg या इससे ज्यादा है, तो बुढ़ापे के दिनों में आपको हार्ट अटैक आने की संभावना 37% तक बढ़ जाती है।
स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो इंतजार न करें
अक्सर देखा जाता है कि युवा लड़के-लड़कियां सोचते हैं कि 25-30 की उम्र तक जो भी खाना-पीना है, वो खा लिया जाए, इसके बाद परहेज कर लेंगे। मगर आपको बता दें कि अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो इंतजार न करें। आज से ही आपको बाहर के प्रॉसेस्ड फूड्स और जंक फूड्स खाने के बजाय घर पर बना खाना खाना चाहिए और अपनी डाइट में फल और सब्जियों को शामिल करना चाहिए।
कैसे की गई रिसर्च
इस रिसर्च के लिए 17 साल से बड़ी उम्र के 36,030 लोगों के ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और कार्डियोवस्कुलर हेल्थ का डाटा इकट्ठा किया गया। रिसर्च के बाद शोधकर्ताओं ने बताया कि 40 की उम्र के पहले शरीर में बढ़ा हुआ बैड कोलेस्ट्रॉल दिल की अलग-अलग बीमारियों से जुड़ा हुआ है। इसी तरह 40 की उम्र के पहले बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, हार्ट फेल्योर का कारण बनता है।
बाद में हेल्दी चीजें खाने से नहीं टलेगा खतरा
शोधकर्ताओं के मुताबिक युवा लड़के-लड़कियों को समझना चाहिए कि अच्छी और लंबी जिंदगी जीना महत्वपूर्ण है, मगर अगर आप कुछ समय तक अनहेल्दी चीजें खाएं और फिर हेल्दी चीजें खाने लगें, तो इससे खतरा टल नहीं जाएगा। हेल्दी चीजों से मतलब ऐसी चीजें हैं, जिनसे आपको पर्याप्त पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट्स मिल सकें जैसे- हरी सब्जियां, रंगीन फल, नट्स, मसाले आदि। अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आज से ही आपको अपने खानपान की आदतें बदलनी पड़ेंगी, क्योंकि बाद में किए गए बदलाव का इन रोगों से बचाव में ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है।
रोजाना थोड़ी देर एक्सरसाइज जरूर करें
सही खानपान के साथ स्वस्थ रहने के लिए एक्सरसाइज भी बहुत जरूरी है। पहले हुई तमाम रिसर्च बताती हैं कि कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, हार्ट अटैक जैसे रोगों से बचने के लिए सप्ताह में 150 मिनट व्यायाम करना बहुत जरूरी है। सप्ताह में 150 मिनट यानी सप्ताह के 5 दिन 30 मिनट व्यायाम करना आपके लिए पर्याप्त होगा। जिंदगी भर स्वस्थ रहने के लिए आप इतना समय तो निकाल ही सकते हैं।
दिल की स्थिति का तुरंत इलाज करें
यदि आपको हृदय से संबंधित कोई असमान्‍य स्थितियां हैं, तो आपको जल्द से जल्द उनका इलाज करना चाहिए क्योंकि ऐसी स्थितियां दिल की विफलता को बढ़ा सकती सकती हैं। आपको अपने रक्तचाप को नियंत्रित करना चाहिए और हृदयघात की संभावना को कम करने के लिए अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करना चाहिए। आपको दवाओं पर बहुत अधिक निर्भरता से भी बचना चाहिए।
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विटामिन E के स्रोत व स्वास्थ्य लाभ



हमारे शरीर के लिए सभी विटामिन्स का अपना-अपना महत्व है। विटामिन्स हमारे अंगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ये हमारे शरीर को कई तरह के रोगों से बचाते हैं। ऐसा ही एक विटामिन है विटामिन ई। ये विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और शरीर को एलर्जी से बचाता है। इसके अलावा विटामिन ई शरीर के कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शरीर को किसी न किसी रूप में विटामिन की जरूरत होती है क्योंकि विटामिन की कमी से शरीर में कई और दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं। विटामिन ई अद्वितीय गुणों से भरपूर है। आज बाजार में विटामिन ई के रूप में कई सप्लीमेंट्स भी मौजूद हैं। झुर्रियों को रोकने में विटामिन ई लाभकारी है, यह तो लगभग हम सभी जानते है। आइए जानें विटामिन ई के और उसके कार्यों के बारे में।
विटामिन ई एक घुलनशील विटामिन है और इसमें पर्याप्‍त मात्रा में नमी होती है। यह नमी त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद होती है। ये विटामिन एक तरह का एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाता है। विटामिन ई बालों के साथ-साथ त्वचा के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि ये त्वचा को झुर्रियों से दूर रखता है यानि विटामिन ई वाले पदार्थों के सेवन से आप पर बढ़ती उम्र का असर धीरे-धीरे या कम होता है। विटामिन ई से बाल तेजी से बढ़ते हैं। ये बालों को सुंदर, घना, चमकदार बनाने में मदद करता है।
विटामिन ई के फायदे मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने, हृदय रोग को दूर करने, प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाने, आंखों को स्‍वस्‍थ्‍य रखने, अल्‍जाइमर का इलाज करने और त्‍वचा को स्‍वस्‍थ्‍य बनाने के लिए जाने जाते हैं।
सूखे मेवे
सूखे मेवों में ढेर सारे विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं। इन्हें खाने से कैंसर ओर हृदय रोगों से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित रूप से मेवों का सेवन करने वाले लोगों को मोटापे की समस्‍या भी परेशान नहीं करती। इनमें विटामिन ई भी भरपूर मात्रा में होता है। विटामिन ई के लिए सबसे अच्छा बादाम का सेवन है। स्वस्थ‍ रहने के लिए प्रतिदिन बादाम का सेवन करें। बादाम में प्रोटीन, वसा, विटामिन और मिनरल पर्याप्त मात्रा में होते हैं। 100 ग्राम बादाम में 26.2 मिलीग्राम विटामिन ई होता है।
सूरजमुखी के बीज
सूरजमुखी के बीजों में विटामिन ई की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इनमें मौजूद ऐथिरोस्क्लेरोसिस हमारे शरीर को ऑस्टीरोअर्थराइटिस और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाता है। इसके अलावा सूरज मुखी के बीज फैट को कम करने में मदद करते हैं और बॉडी में एंटीऑक्सिडेंट की तरह काम करते हैं। सूरजमुखी के 100 ग्राम बीजों में 36.3 मिलीग्राम तक विटामिन होता है।
हरी सब्जियां
हरी और रंगीन सब्जियों का सेवन करना बहुत फायदेमंद है। हरी सब्जियां विटामिन, प्रोटीन और मिनरल्‍स से भरपूर होती हैं और इनमें विटामिन ई भी भरपूर होता है। ये शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत करता है। शरीर के उचित विकास के लिए पत्‍तेदार हरी शाक-सब्जियां और शाकाहार भोजन लाभदायक होता है। आयरन की कमी से एनी‍मिया हो सकता है। हरी सब्जियों में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह व्यक्ति को एनीमिया से बचाता है। 100 ग्राम पालक में लगभग 2.1 मिलीग्राम विटामिन ई होता है।
मछली
मछली विटामिन ई का सबसे अच्छा स्रोत है। रेनबो ट्राउट मछली के 100 ग्राम मांस में 2.8 मिलीग्राम विटामिन ई मौजूद होता है। अन्य मछलियों में भी विटामिन ई की मात्रा भरपूर होती है। मछली में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड का सेवन अगर उम्र बढ़ने के साथ-साथ कर रहे हैं तो दिल के रोगों से मरने का खतरा 35 प्रतिशत कम होता है।
जैतून का तेल
आप जानते हैं कि जैतून का तेल हमारे‍ लिए कितना फायदेमंद होता है। लेकिन इस तेल के लाभों में विटामिन ई का भी विशेष योगदान होता है। जैतून को फल या तेल के रूप में प्रयोग कर विटामिन ई की दैनिक आवश्‍यकता को पूरा किया जा सकता है। जानकार बताते हैं कि यदि लगभग 8 ग्राम जैतून का सेवन किया जाता है तो इससे 0.1 मिलीग्राम विटामिन ई प्राप्‍त किया जा सकता है। जैतून में ओलेइक एसिड की भी अच्‍छी मात्रा होती है जो कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को नियंत्रित कर दिल को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में सहायक होता है। आप भी जैतून के लाभ विटामिन ई की कमी को दूर करने और दिल को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए प्राप्‍त कर सकते हैं
विटामिन e के स्वास्थ्य लाभ 
विटामिन ई खून में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है।
शरीर में अनेक अंगों को सामान्य रूप में बनाये रखने में विटामिन ई ही मदद करता है। जैसे- मांसपेशियां और अन्य टिश्यू।
रक्त सेल्स के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए सेल के बाहरी कवच यानी सेल मेमब्रेन को बनाए रखने का काम विटामिन ई करता है।
अगर शरीर में विटामिन ई पर्याप्त मात्रा में है, तो ऐसे में शरीर में विटामिन ए आवश्यकता उतनी नहीं पड़ती है।
हार्मोंस संतुलन के लिए विटामिन ई का महत्वपूर्ण योगदान है।
शरीर के फैटी एसिड को संतुलन करने का काम विटामिन ई का है।
प्रीमेच्योर या नवजात शिशु को विटामिन ई की कमी से एनीमिया जैसी ही कई बीमारियां हो सकती हैं। विटामिन ई इन सबसे बच्चे की रक्षा करता है।
शरीर में विटामिन ई की कमी हो जाने से किसी भी रोग का संक्रमण जल्दी लग जाता है।
विटामिन ई की कमी से मानसिक समस्याएं भी हो सकती है।
विटामिन ई की कमी से शरीर में कई रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है जैसे- नपुंसकता, बांझपन, आंतों में घाव, गंजापन, गठिया, पीलिया, मधुमेह, हृदय रोग।
विटामिन ई में किसी भी प्रकार की पीड़ा, दर्द को दूर करने का विशेष गुण होता है।
विटामिन ई की कमी से थायराइड ग्लैण्ड तथा पिट्यूटरी ग्लैण्ड की कार्यशैली में बाधा उत्पन्न हो जाती है।
त्वचा को सुडौल और खूबसूरत बनाने और झुर्रियां दूर करने में विटामिन ई बहुत लाभकारी है।
विटामिन ई वनस्पति तेल में पाया जाता है। इसके अलावा गेहूं, हरे साग, चना, जौ, खजूर, मांढ के चावल, मक्खन, मलाई, शकरकन्द, अंकुरित अनाज और फलों में पाया जाता है।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार




मूली के गुण व स्वास्थ्य लाभ

                                 

मूली भले ही आपको मामूली सब्‍जी लगे, लेकिन यह औषध‍िय गुणों से भरपूर है. अगर आप रोजाना इसे अपनी डाइट में शामिल करेंगे तो कैंसर, डायबिटीज, ब्‍लड प्रेशर समेत कई बीमारियों से कोसों दूर रहेंगेसर्दियों में मूली के पराठे, मूली की सब्‍जी, मूली का अचार और सलाद हर घर के भोजन का अहम हिस्‍सा हैं. हालांकि ज्‍यादातर लोग ऐसे हैं जो मूली की शक्‍ल देखकर ही मुंह बनाने लगते हैं. अगर आप भी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं तो आपके लिए मूली के फायदों को जानना बेहद जरूरी है. जी हां, मूली भले ही आपको मामूली सब्‍जी, लेकिन यह औषध‍िय गुणों से भरपूर है. अगर आप रोजाना इसे अपनी डाइट में शामिल करेंगे तो कैंसर, डायबिटीज, ब्‍लड प्रेशर समेत कई बीमारियों से कोसों दूर रहेंगे और आपकी लाइफस्‍टाइल हो जाएगी बेहद हेल्‍दी:
आपके सलाद में शामिल मूली प्रोटीन, विटामिन-ए, विटामिन-बी, सी, आयरन, आयोडीन, कैल्श‍ियम, गंधक, सोडियम, मैग्नीशि‍यम, फास्फोरस, क्लोरीन से भरपूर है और यह सभी पोषक तत्व मिलकर आपकी सेहत को बेहतर बनाते हैं साथ ही बीमा‍रियों से बचाते हैं।
मिटेगी थकान, दूर होगा मोटापा
थकान मिटाने और नींद लाने में मूली बेहद फायदेमंद है. वहीं, अगर आपको मोटापे से छुटकारा पाना है तो मूली के रस में नींबू और नमक मिलाकर खाने से बहुत लाभ मिलता है. दरअसल, मूली खाने से आपकी भूख शांत होती है.
मूली के पत्ते खाने के लाभ पीलिया के इलाज में
Radish मूली (radish) मुख्य रूप से पीलिया के इलाज के लिए उपयोगी होती है, क्योंकि यह बिलीरुबिन (bilirubin) के स्तर को समाप्त कर, इसके उत्पादन को स्थिर करने में मदद करती है। मूली (radish) को मुख्य रूप से प्राकृतिक उपचार के रूप में जाना जाता है और मूली के पत्ते प्राकृतिक उपचार के लिए सबसे उपयोगी होते हैं। मूली के पत्तों में शक्तिशाली detoxifying प्रभाव होता है जो विषाक्त पदार्थों शरीर से बाहर करने और रक्त को शुद्ध करने में मदद करता हैं। मूली (radish) ऑक्सीजन की आपूर्ति में वृद्धि करके पीलिया (jaundice) से पीड़ित लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से रोकने में भी मदद करती है।
बुखार में
बुखार के प्रभाव से शरीर के तापमान में वृद्धि होती है। चूँकि मूली ठंडी सब्जी है। जिसके कारण इसका उपयोग शरीर के उच्च तापमान को कम करने के लिए किया जा सकता है। इसका सेवन सिरदर्द में राहत प्रदान करता है। व्यक्ति को बुखार के दौरान पानी का अधिक मात्रा में सेवन करने का सुझाव दिया जाता है, जिससे सभी हानिकारक रोगाणुओं को पेशाब के माध्यम से बाहर किया जा सके। अतः पानी की उच्च मात्रा होने के कारण मूली को बुखार की अवस्था में सेवन करने की सलाह दी जाती है। सोने से पहले मूली (radish) का सेवन अनेक प्रकार के लाभदायक परिणाम प्रदान कर सकता है।
कैंसर की छुट्टी
मूली में भरपूर मात्रा में फॉलिक एसिड, विटामिन C और एंथोकाइनिन पाए जाते हैं. ये तत्‍व शरीर को कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं. मुंह, पेट, आंत और किडनी के कैंसर से लड़ने में यह बहुत सहायक होती है.विटामिन सी, फोलिक एसिड और एंथोसायनिन (anthocyanin) से युक्त मूली का रस, कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने तथा उन्हें नष्ट करने में मदद करता है। वास्तव में, मूली का रस आंतों में कोलन कैंसर (colon cancer), गुर्दे का कैंसर (kidney cancer), पेट कैंसर आदि के इलाज में मदद के लिए जाना जाता है।
सर्दी-जुकाम में राहत
मूली खाने से जुकाम भी नही होता है. कुछ नहीं तो मूली को कम से कम सलाद में तो जरूर खाना चाहिए.
बालों के लिए
बाल प्रत्येक व्यक्ति में सौंदर्य विशेषता का प्रमुख हिस्सा होते हैं। मूली का रस (radish juice) बालों में लगाने से बाल मजबूत हो जाते हैं। अतः मूली बालों के झड़ने को कम करने के लिए एक प्रभावी माध्यम है। बालों से सम्बंधित समस्याओं को कम करने के लिए मूली का रस सिर में लगाकर 10-15 मिनट तक मालिश करना चाहिए। फिर कुछ समय बाद शैम्पू का उपयोग करके अच्छी तरह से सिर को धोना चाहिए। यह बाल गिरने को कम करने के साथ-साथ, बालों की वृद्धि करने और डैंड्रफ़ को हटाने में सहायक होता है। इसके लिए सफेद मूली का उपयोग किया जा सकता है। मूली (radish) बालों को मजबूती प्रदान करने, मुलायम और चमकीला बनाने तथा बालों की वृद्धि करने के लिए उपयोग में लाई जा सकती है।
पायरिया से राहत
पायरिया से परेशान लोग मूली के रस से दिन में 2-3 बार कुल्ले करें और इसका रस पिएं तो बहुत फायदा होगा. मूली के रस से कुल्ला करना, मसूड़ों-दांतों पर मलना और पीना दांतों के लिये बहुत लाभकारी है. मूली को चबा-चबा कर खाने से दांतों और मसूड़ों की बीमारियां दूर होती हैं.
रक्त चाप और मधुमेह के इलाज में –
Radish मूली में पोटेशियम पाया जाता है, जो रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को रिलेक्स करने और रक्त प्रवाह में वृद्धि करने में मदद करता है। मूली (radish) में उपस्थित पोटेशियम, नियमित रक्त प्रवाह को बनाये रखता है, जिससे रक्तचाप (blood pressure) कम हो जाता है। मूली की खपत या मूली का सेवन, रक्त शर्करा (blood sugar) के स्तर को प्रभावित नहीं करती है, क्योंकि इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index) बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। परन्तु इसका सेवन, रक्त में शर्करा के अवशोषण को भी नियंत्रित करता है, इसलिए मधुमेह में इसका सेवन सुरक्षित होता है।
हृदय स्वास्थ्य में
Radish मूली का सेवन व्यक्ति में कार्डियोवैस्कुलर रोगों (cardiovascular disease) को कम करने या रोकने के लिए कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को कम करने में मदद करता है। मूली में कुछ फ्लेवोनोइड्स (flavonoids) शामिल होते हैं, जो दिल के लिए बहुत लाभदायक होते हैं। हृदय कार्यों का सीधा संबंध रक्तचाप से होता हैं। उच्च रक्तचाप अक्सर स्ट्रोक (strokes) और हार्ट अटैक जैसी दिल की गंभीर समस्याओं का कारण बनता है। चूंकि मूली रक्तचाप को नियंत्रित करती है, इसलिए यह दिल के दौरे (heart attack) की संभावनाओं को बहुत कम कर देती है। अतः हृदय रोग से सम्बंधित व्यक्तियों को मूली का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।
डायबिटीज से छुटकारा मूली कम ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स के लिए जानी जाती है. यानी कि इसे खाने से ब्‍लड शुगर पर असर नहीं होता है. रोजाना सुबह खाने में मूली का सेवन करने से डायबिटीज से जल्द छुटकारा मिल सकता है
मूली का रस पीने के फायदे वजन कम करने में
Radish मूली (radish) वजन कम के लिए एक प्रभावी आहार है। जो व्यक्ति अपने वजन को कम करना चाहते हैं, वे इसे अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। मूली में फाइबर की अधिक मात्रा पाई जाती है, तथा कम कैलोरी प्रदान करती है। इसलिए मूली जैसी सब्जियां फाइबर और पानी से भरपूर होने के कारण वजन कम करने के लिए बेहद फायदेमंद हैं। सलाद के रूप में मूली (radish) का उपभोग किया जा सकता है, यह कैलोरी के सेवन को कम करने और चयापचय में सुधार करने में भी मदद करती है। यह पेट में वसा को जमा होने नहीं देती है। पेट में वसा का जमाव ही वजन और मोटापा बढ़ाने का कारण बनता है। अतः वजन घटाने के लिए मूली के रस (radish juice) का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
मुंहासों से मुक्ति
मूली में विटामिन C, जिंक, B कांप्‍लेक्‍स और फॉस्‍फोरस होता है. मुंहासों के लिए मूली का टुकड़ा गोल काट कर मुंहासों पर लगाएं और तब तक लगाए रखें जब तक यह खुश्क न हो जाए. थोड़ी देर बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. कुछ ही दिनों में चेहरा साफ हो जाएगा.
गुर्दे संबंधी
गुर्दे संबंधी परेशानियों के लिए मूली का रस और मूली दोनों ही रामबाण उपाय है। मूली के रस में सेंधा नमक मिलाकर नियमित रूप से पीने पर गुर्दे साफ होते हैं और गुर्दे की पथरी भी समाप्त हो जाती है।
दूर भगाए बीमारियांबवासीर में कच्ची मूली या मूली के पत्तों की सब्जी बनाकर खाना फायदेमंद होता है. हर रोज सुबह उठते ही एक कच्ची मूली खाने से पीलीया रोग में आराम मिलता है. अगर पेशाब का बनना बंद हो जाए तो मूली का रस पीने से पेशाब दोबारा बनने लगती है. आधा गिलास मूली का रस पीने से पेशाब के साथ होने वाली जलन और दर्द मिट जाता है. खट्टी डकारें आती है तो मूली के एक कप रस में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ मिलता है|प्रतिदिन खाने के साथ मूली का प्रयोग करने से लिवर और किडनी स्वस्थ रहते हैं और मजबूत होते हैं। कब्ज या बवासीर की परेशानी में भी मूली बेहद कारगर उपाय है। पेट संबंधी हर समस्या का हल मूली के पास है।
मूत्ररोग
मूत्ररोग या इससे संबंधि‍त किसी भी प्रकार की समस्या में मूली का रस फायदेमंद होता है। यह मूत्र मार्ग के हानिकारक तत्वों को खत्म कर संक्रमण फैलने से बचाता है और जलन, सूजन व अन्य समस्याएं समाप्त करता है।
हिचकी
लगातार हिचकी आने से परेशान हैं तो मूली के पत्ते आपकी मदद कर सकते हैं। मूली के मुलायम पत्तों का चबाकर चूसने से हिचकी आना तुरंत बंद हो जाएगा। इतना ही नहीं मुं‍ह की दुर्गंध से भी छुटकारा मिलेगा।
लिवर को स्वास्थ्य रखने में
Radish मूली लिवर और पेट के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसमें शक्तिशाली detoxifying एजेंट पाए जाते हैं, जो रक्त को शुद्ध करने तथा अपशिष्ट पदार्थ और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर करने में मदद करते हैं। विषाक्त पदार्थों और अशुद्ध रक्त के कारण ही लिवर (Liver) की समस्या पैदा होती हैं। इसलिए लिवर को स्वास्थ्य रखने के लिए अधिक से अधिक मूली (radish) का सेवन करना चाहिए।
कब्ज दूर करने में
कब्ज (Constipation) वह समस्या है जो मल त्याग के दौरान दर्द का कारण बनती है। चूँकि मूली (radish) में फाइबर बहुत अधिक होता है और जब फाइबर की अधिक मात्रा का सेवन किया जाता है तो कब्ज से राहत मिलती है। मूली का नियमित सेवन आंत्र आंदोलनों (bowel movements) को नियंत्रित करने में मदद करता है। यदि सही मात्रा में मूली का सेवन किया जाये, तो यह गैस की समस्या को उत्पन्न नहीं करती है।
हड्ड‍ियों को मजबूत बनाती है
कैल्श‍ियम की भरपूर मात्रा होने से मूली आपकी हड्ड‍ियों को मजबूत करने में सहायक है। इसे खाने से जोड़ों में दर्द से भी राहत मिलती है और सूजन से भी।
बवासीर में मूली के फायदे
बवासीर एक गंभीर समस्या है जो व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बनती है। अतः इसके इलाज में मूली लाभकारी प्रभाव डालती है। मूली के रस (radish juice) को बवासीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। मूली के रस में पाया जाने detoxifying गुण इसे ठीक करने में मदद करते हैं।
एनीमिया के इलाज में
Radish मूली आयरन का एक अच्छा स्त्रोत है। जिसके कारण इसका नियमित रूप से सेवन एनीमिया के जोखिम को कम करने और एनीमिया के इलाज में बहुत प्रभावी है। एनीमिया खून में आयरन की कमी के कारण होता है। आयरन लाल रक्त कोशिकाओं के विकास में सहायता करता है तथा व्यक्ति को स्वस्थ रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति को नियमित रूप से मूली (radish) का सेवन करना चाहिए।
सावधानियाँ-
Radish मूली की तासीर गर्म होती है इसलिए ज्यादा मात्रा में मूली खाने के नुकसान भी हो सकते है इसलिए इसकी कम मात्रा से शुरुवात करें और बाद में बढ़ाते जाए दूध के साथ मूली ना खाएं और मूली खाने का सही समय दिन में होता है | याद रखे कोई भी कच्ची सब्जी, जूस, कच्चे फल हमेशा दिन में खासतौर से दोपहर के समय ही खाने चाहिए इससे एक तो इनको पचने में काफी समय मिल जाता है दूसरा इनसे कफ नहीं बनता है | रात के समय पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है इसलिए इस समय पूरी तरह पके हुए भोजन ही करने चाहिए और वो भी कम मात्रा में।
नियमित और उचित मात्रा में मूली (radish) का सेवन करने से रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। रक्त चाप में नियंत्रण, मुख्य रूप से मूली में उपस्थित महत्वपूर्ण खनिज “पोटेशियम” की उपस्थिति के कारण होता है। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि अत्यधिक मात्रा में मूली का सेवन रक्तचाप पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।
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मूंग दाल के औषधीय गुण



मूंग की दाल स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतरीन आहार है, जो न केवल आपकी स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करता है, बल्कि पोषण और सेहत से जुड़े अनगिनत फायदे भी देता है। दाल में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। ये प्रोटीन न सिर्फ हमारे सेहत के लिए रामबाण है बल्कि ये कई अन्य बीमारियों से बचाता भी है। मूंग दाल की बात करें तो इसमें प्रोटीन के अलावा कार्बोहाइड्रेट, मिनिरल्स, विटामिन आदि भी पाए जाते है
 बढ़ती उम्र थम सी जाए
मूंग दाल का एक फायदा एंटी एजिंग है। मूंग बीन्स कारगर एंटी-एजिंग एजेंट की तरह काम करती है। इसमें कॉपर होता है, जो त्वचा के लिए लाभकारी है। यह चेहरे से झुर्रियां, फाइन लाइन्स और बढ़ती उम्र को प्रदर्शित करने वाले धब्बों को हटाने का काम करता है। ऐसी कोई महिला नहीं है, जिसे बढ़ती उम्र की चिंता न हो। ऐसे में मूंग दाल का नियमित इस्तेमाल करने से आप अपनी असल उम्र से 10 साल कम नजर आ सकते हैं। इसके लिए मूंग दाल को अपने नाश्ते का हिस्सा बनाएं।
मूंग बीन्स एंट्री एजिंग एजेंट का काम करता है। मूंग बीन्स में पाया जाने वाला कॉपर एंट्री एजिंग एजेंट की तरह काम करता है जो आपकी उम्र का पता नहीं चलने देता है। चेहरे की झुरिया, दाग-धब्बे, बढ़ती उम्र के साथ चहरे पर पड़ने वाले निशानों को छुपाने का काम करता है। मूंग के उपयोग से आप अपने उम्र से कम से कम 10 साल छोटी दिख सकती है।
वजन घटाने में कारगर
100 ग्राम मूंग दाल में 330 कैलोरी मौजूद होती है, जिस वजह से इसे वजन घटाने वाले पौष्टिक आहार में गिना जाता है। जो लोग अपने अतिरिक्त वजन से परेशान हैं, वो मूंग दाल को अपने आहार का हिस्सा बना सकते हैं।
फेस पैक की तरह करें उपयोग
मूंग बीन्स का इस्तेमाल हम खाने के अलावा भी कई दूसरे तरीकों से कर सकते हैं। इसमें पाया जाना वाला कॉपर आपके चेहरे पर ग्लो लाने का काम करता है। ये आपके चेहरे से ब्लैकहैड्स, अत्याधिक तेल को हटाता है। आप घर में मूंग बीन्स का उपयोग करके एक प्राकृतिक फेस पैक बना सकते है। इसे पैक को लगाने से चेहरे की गंदगी को आसानी से साफ किया जा सकता है
बालों में लाती है चमक
मूंग बीन्स में काफी कम मात्रा में कॉपर पाया जाता है। और ये कॉपर आपके हेयर स्केल्प के लिए काफी फायदेमंद है। कॉ़पर के मौजूदगी से शरीर में आयरन , कैल्शियम और मैग्नीशियम का उचित उपयोग सुनिश्चित होता है।
मसूड़ों को रखता है स्वस्थ
मसूड़ों और दांतों के स्वास्थ्य के लिए सोडियम एक आवश्यक तत्व है। मूंग में कैल्शियम के अलावा सोडियम भी पाया जाता है। मसूड़ों से खून निकलना, दर्द, कमजोरी व मसूड़ों से दुर्गंध जैसी परेशानियों से सोडियम लड़ने का काम करता है। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए आप मूंग दाल का सेवन कर सकते हैं।
फायदे शुगर में
मूँग सेम अच्छी शर्करा के गठन में वृद्धि करता है और मानव शरीर के लिए बुरे शर्करा के गठन को हतोत्साहित करती हैं। अच्छी चीनी या फलों की चीनी आसानी से पचने योग्य है और रक्त में बढ़ती नहीं है यह एटीपी के लिए आसानी से टूट जाती है जिससे शरीर इसे उपयोग कर लेता है मूंग दाल का सेवन शरीर में शर्करा के चयापचय को विनियमित करने का एक बहुत ही प्रभावी तरीका है और इससे मधुमेह को भी रोका जा सकता है।
इम्यूनिटी को बनाए स्ट्रॉग
इसमें मौजूद आयरन मानव शरीर में प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। जिसके कारण शरीर में मौजूद डब्लूबीसी एक्टिव हो जाता है। यह हमारे शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए प्राकृतिक ताकत देता है।
बढ़ाती है दिमागी क्षमता
जो लोग एकाग्रता और कमजोर स्मृति की समस्याओं से ग्रसित होते हैं, उन्हें निश्चित रूप से मूंग दाल का सेवन करना चाहिए। मूंग दाल में आयरन पाया जाता है, जो सभी अंगों और टिशू में ऑक्सीजन की आपूर्ति करने का काम करता है। मूंग दाल मस्तिष्क सहित शरीर के सभी हिस्सों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करता है। परिणामस्वरूप, इससे एकाग्रता में बढ़ोतरी होती है और याददाश्त तेज होती है। आप अंकुरित मूंग दाल को अपने दैनिक आहार का हिस्सा बना सकते हैं।
हड्ड़ियों को बनाती है मजबूत
मूंग बीन्स के इस्तेमाल से हड्डियां को मजबूती प्रदान की जा सकती है। इसमें कैल्शियम का प्रचुर मात्रा पाया जाता है। । यह हड्डी का स्वास्थ्य रखता है और आपको फ्रैक्चर से भी सुरक्षित रख सकता है।
बीपी को करती है नियंत्रित
मूंग के उपयोग से आप अपने वजन पर कंट्रोल रख सकती है। इसके अलावा मूंग में मौजूद मैग्नीशियम बीपी को बढ़ने से रोकता है। मूंग खून में मैग्नीशियम के लेवल को मैंटेन करने में मदद करता है।
दांतों की सुरक्षा के लिए
मूंग बींस में कैल्शियम के अलावा सोडियम भी पाया जाता है.। दांतों को मजबूत करने के लिए कैल्शियम की जरूरत होती है । हमारे मसूड़ों और दांतों के स्वास्थ्य के लिए सोडियम की आवश्यकता है । इस दोनों की मदद से दांतों का दर्द, दांतों की दुर्गध, मसूड़ों से खून आना आदि को रोका जा सकता है।
पचने में आसान
बुखार, पेट दर्द और दस्त में कुछ भी खाने का मन नहीं करता है। साथ ही खाना पचाने में भी मुश्किल आती है। ऐसे में मूंग बीन्स का इस्तेमाल करके बनाया गया खाना बहुत आसानी से पचाया जा सकता है.। मूंग बींस में फाइबर का मात्रा होने के कारण इसे पचाने में आसानी होती है.
मेटाबॉलिक नियामक
मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी के कारण लोग अपचन और अम्लता से ग्रस्त हो जाते हैं। मूंग दाल का सेवन मेटाबॉलिज्म में सुधार लाता है। मूंग में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने का काम करता है। फाइबर मल को नरम बनाकर पाचन स्तर को बढ़ाने का काम करता है। अपचन और अम्लता से बचने के लिए आप मूंग दाल का सेवन कर सकते हैं।
कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण
इन दिनों हृदय रोग बहुत आम है। अनियंत्रित जीवनशैली इसके प्रमुख कारणों में से एक है। ऐसे में मूंग खाने के एक फायदा कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण भी है। मूंग दाल मानव शरीर में पाचन और चयापचय स्तर में वृद्धि करता है, जिसके कारण धमनी दीवारों और कोशिकाओं में कोलेस्ट्रॉल का गठन और संचय कम हो जाता है।
एंटी कैंसर लाभ
मूंग की दाल ‘फ्री रेडिकल्स’ को नियंत्रित करने का काम करती है। ये ‘फ्री रेडिकल्स’ प्रदूषण, तनाव और शरीर में विषाक्तता के कारण उत्पन्न हो सकते हैं। ‘फ्री रेडिकल्स’ कोशिकाओं के सामान्य रूप से बढ़ने की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं। असामान्य रूप से कोशिकाओं का बढ़ना कैंसर का कारण बन सकता है। कैंसर से बचने के लिए आप मूंग दाल का सेवन कर सकते हैं।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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नाश्ते मे शामिल करें वजन कम करने वाले आहार


नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन है और यह आपको पुरे दिन Energized बनाए रखने में मदद करता है। दुबले-पतले और फिटर बनने की कोशिश कर रहे लोगों को पता होना चाहिए कि आपकी भूख आप पर अलग-अलग प्रभाव डालती हैं और आपके शरीर की कैलोरी की संख्या बढा सकती है। अगर आप तेजी से मोटापा कम करना चाहते हो, तो आपको रोजाना नाश्ते के लिए high quality प्रोटीन वाला भोजन खाना चाहिए। प्रोटीन - रोजाना अपने नाश्ते में पेट की चर्बी को जलाने के लिए सबसे प्रभावी है।अपने diet में कार्ब्स और वसा को कम करें और प्रोटीन का सेवन बढ़ाएँ, जिससे आप भूख नियंत्रण रखने हार्मोन को कम और कई Satiety हार्मोन को बढ़ावा दे सकते हैं।
वजन कम करने के लिए लोग अक्सर टेस्टी और हेल्दी फूड्स को छोड़कर डाइटिंग करने लगते हैं। वो ऐसा मानते हैं कि डाइटिंग करने से उनका वजन जल्दी कम हो जाएगा। यदि अपना वेट कम करना चाहते हैं तो ये जरूरी नहीं कि हमेशा कम टेस्टी खाना ही खाएं, बल्कि आप लिए नाश्ते में ऑयली, ग्रीसी और फैटी चीजों को छोड़कर हल्के, स्वादिष्ट और पौष्टिक चीजों का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा और इससे आपके शरीर को काम करने के लिए अधिक ऊर्जा भी मिलेगा। हमारे देश में विभिन्न प्रकार के स्वस्थ और पौष्टिक भोजन नाश्ते में खाया जाता है जो वजन घटाने में भी काफी मददगार होते हैं।
फल और सब्जियां
हरी पत्तेदार सब्जियां और ताजे फल को फाइबर का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। इनके सेवन करने से आपको वजन घटाने में मदद मिल सकता है। साथ ही ये आपके पाचन में भी मददगार होता है। फल आपके चयापचय को बढ़ावा देता है। इसके अलावा सब्जियों में प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो आपको वजन कम करने में मदद करता है। आप नाश्ते में मटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी, पत्तागोभी, और स्प्राउट्स का सेवन कर सकते हैं। कुछ फल जैसे कि अंगूर, कीवी और केले का सेवन भी कर सकते हैं। इन फलों में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
मूंग दाल चीला: वजन घटाने के लिए Healthful प्रोटीन नाश्ता
हम भारतीय रसोई में यह दाल एक प्रधान के रुप में जानी जाती है। ब्रेकफास्ट, लंच हो या डिनर, यह दाल हर समय परोसी जाती है। हम बात कर रहे हैं भारत की सबसे प्रिय दाल- मूंग दाल की। इसमे स्वास्थ्य लाभ का भंडार है। भारत की पसंदीदा मूंग दाल आपको फैट बर्न करने में कैसे मदद कर सकती है।
मूंग दाल के सबसे महत्वपूर्ण लाभों में से एक है मोटापा घटाने के लिए इसकी महत्वपूर्ण भूमिका। मूंग दाल के पौधे प्रोटीन युक्त है। मूंग की फलियों में प्रति 100 ग्राम में 24 ग्राम प्रोटीन होता है। यह एक सर्वविदित तथ्य है कि मांसाहारियो को मुर्गी पालन प्रोटीन को टक्कर देते हुए शाकाहारियों के पास प्रोटीन के स्रोतों की खोज में मूंग दाल सर्वश्रेष्ठ प्रोटीन स्रोत है। सबसे अच्छे वज़न घटाने के विकल्प में से एक है मूंग दाल चीला।
मूंग दाल का चीला एक pure प्रोटीन है, आप इसे पनीर और साग के साथ बना सकते हैं। इसके अलावा मूंग दाल चीला में कैलोरी की मात्रा कम होती है जो आपको प्रभावी रूप से वजन कम करने में मदद करेगी। यह कहा जाता है कि यह मिर्च बेसन के चिल्ले की तुलना में हल्का और अधिक पौष्टिक होता है। यह देसी नाश्ते के रुप में बनाने में आसान है और बेहद स्वादिष्ट भी है।
दलिया
दलिया खाने में काफी स्वादिष्ट लगता है इसलिए लोग इसे ब्रेकफास्ट में खाना ज्यादा पसंद करते हैं। इसमें फाइबर और प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता हैं और कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है। इसके सेवन से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलता है साथ ही ये आपके ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रण में रखता है। इसलिए नाश्ते में इसका सेवन करना काफी फायदेमंद होता है।
पोहा: वजन घटाने के लिए Healthful प्रोटीन नाश्ता
क्या आप मोटापा कम करना और फिट रहने की कोशिश कर रहे हैं? अगर आप एक स्वस्थ वजन घटाने के लिए diets की तलाश कर रहे हैं, तो आप नाश्ते के रुप में पोहा के बारे सोचे। पोहा एक लोकप्रिय और स्वास्थ्यप्रद भारतीय नाश्ता है जो पीटा चावल के साथ बनाया जाता है। पोहा में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है। इसमें लगभग 76.9% कार्बोहाइड्रेट और 23% वसा होती है, इसे वजन घटाने के लिए सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक माना जाता है।
पोहा एक पौष्टिक भोजन है। यह कार्बोहाइड्रेट, आयरन, फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट और आवश्यक विटामिन का एक अच्छा स्रोत है और ग्लिसन मुक्त है। यह उन लोगों के लिए भी बेहद अच्छा है जिन्हें मधुमेह, त्वचा और हृदय की समस्याएं हैं। इसे प्रोटीन से भरपूर बनाने के लिए, मूंगफली और अंकुरित फलियां भी मिलाई जा सकती हैं।
पोहा कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से भरा हुआ है और कैलोरी की मात्रा बेहद कम है। पके हुए पोहा के एक कटोरे में लगभग 250 कैलोरी होती है, साथ ही कई विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं। पोहा में करी पत्ता का सेवन इसे और भी स्वास्थ्यवर्धक बनाता है। इसलिए आप अपना weight loss कर रहे हैं, अपने शरीर को सही प्रकार का पोषण देते हुए, स्वादिष्ट पोहा का आनंद उठाये।दही
दही में कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर और विटामिन्स पाये जाते हैं। दूध के मुकाबले दही सेहत के लिए भी ज्यादा फायदेमंद होता है। दही खाने से शरीर की फालतू चर्बी कम होती है। इसमें मौजूद कैल्शियम शरीर को फूलने से रोकता है, जिससे मोटापा कम होता है। इसके साथ ही दही वजन कम करने में मददगार होता है। इसके रोजाना सेवन से आपकी पाचन क्रिया भी सही रहती है।
बेरी
बेरी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ये बहुत सारे पोषक तत्वों, विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंटस से भरपूर होते हैं और इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है। प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक होने के वजह से ये आपको वेट कम करने में मदद करता है। इसलिए अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो आज ही अपने डाइट में अलग अलग प्रकार के बेरी जैसे कि ब्लैकबेरी, ब्लूबेरी, क्रैनबेरी, स्ट्रॉबेरी आदि को शामिल कर सकते हैं।
अंडा: वजन घटाने के लिए Healthful प्रोटीन नाश्ता
तेजी से वजन घटाने के लिए अंडे के रुप में अपने सुबह के भोजन में प्रोटीन को शामिल करने का सबसे आसान और सरल तरीका है। अंडे high quality वाले प्रोटीन, स्वस्थ वसा और कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरे होते हैं जो आपके वजन और स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं।
अंडे का आमलेट Research में पाया गया कि नाश्ते के लिए सबसे अच्छा विकल्प है, बनाने में आसान और लगभग हर जगह मिलता है, अंडे स्वादिष्ट, बहुमुखी हैं और कई अलग-अलग तरीकों से तैयार किए जा सकते हैं। जैसे पोच्ड, स्क्रैम्बल या हार्ड-उबला हुआ, यह आपके नाश्ते सहित आपके वजन घटाने के लिए बेहतर हैं।
अंडे सबसे आसान नाश्ते का विकल्प हैं जिन्हें आप अपने नाश्ते में Add कर सकते हैं। एक उबले हुए अंडे के साथ वजन कम करना बोहत अच्छा विकल्प है। अंडे का सफेद भाग और अंडे की जर्दी दोनों ही बहुत सारे प्रोटीन से भरी होती हैं।
इडली
भारतीय ब्रेकफास्ट की बात करें तो इडली स्वस्थ्य के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। इसे उबाल कर बनाया जाता है और इसमें किसी भी प्रकार के ऑयली, ग्रीसी और फैटी पदार्थ नही मिला होता है। इडली में कैलोरी की मात्रा कम होती है, यदि आप पूरी तरह से कार्बोहाइड्रेट से बचना चाहते हैं, तो इडली को ओट्स के साथ मिलाकर सेवन कर सकते हैं। इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसलिए इसे पचाने में भी आसानी होती हैं।
रोटी रोल
अनाज से बनी रोटी फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होती है साथ ही इसमें फैट बहुत कम होता है। गेहूं के आटे के साथ सोयाबीन, रागी या जई का आटा मिलाकर हरी सब्जियां सब्जियां भरकर रोटियां बनाएं। इससे आपको सेहत के साथ स्वाद भी मिलता है। खूब सारा फाइबर होने के कारण यह पचने में भी आसान है।
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कौंच के बीज मर्दाना ताकत के लिए


कौंच एवं कौंच बीज चूर्ण को आयुर्वेद में रसायन के रूप में प्रयोग किया जाता है | पुराने समय से ही कौंच एवं कौंच पाक आदि का इस्तेमाल देशी रसायन के रूप में किया जाता रहा है | आयुर्वेद में सर्दियों के मौसम में गोंद के लड्डू, ग्वारपाठे के लड्डू, मेथी के लड्डू आदि का प्रयोग सेहत एवं स्वास्थ्य के लिए किया जाता है |
कौंच / कपिकच्छु के फायदे
भारत के समस्त मैदानी प्रदेशों में पायी जाने वाली एक जंगली बेल है | यह वर्षा ऋतू में मैदानी क्षेत्रों में अपने आप उग आती है , ज्यादातर हिमालय के निचले हिस्सों में होती है जंहा मैदानी प्रदेश होता है | इसके पत्ते 6 से 9 इंच लम्बे लट्टूवाकार और स्पष्ट पर्शिविक सिराओं से युक्त होते है |
पतों का आकार अर्धहृदयत होता है | कौंच के फुल 1 इंच लम्बे नील और बैंगनी रंग के होते है , इसकी फली 5 से 10 सेमी लम्बी होती है जिसके प्रष्ठ भाग पर सघन रोम और पर्शुक होते है, अगर ये त्वचा को छू जावे तो इनसे खुजली , दाह और सुजन की समस्या हो सकती है , इसी फली में अन्दर 5 से 6 काले रंग के बीज होते है जिन्हें कौंच बीज कहा जाता है |
कौंच का रासायनिक संगठन
इसके बीजो में 9.1 % आद्रता रहती है , प्रोटीन 25.03 , सूत्र 6.75 और खनिज पदार्थ 3.95 % होते है | औषध उपयोग में कौंच के बीज , पत्ते, रोम, जड़ और फली सभी प्रयोग में आते है | कौंच में एल्केलाईड पाया जाता है जिसके कारण इसका सिमित मात्रा में उपयोग करना चाहिए , अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह विष साबित होता है |
कपिकच्छु के बीजो में डोपा (1.5%) , ग्लुताथायोंन , लेसिथिन, गैलिक एसिड, ग्लूकोसाइड , निकोटिन, प्रुरियेनिन आदि पाए जाते है | इसके बीज से एक गाढ़ा तेल निकलता है | कौंच बीजों का विशेष उपयोग कामोतेज्जना, मूत्र विकारो एवं शारीरिक दौर्बल्यता में किया जाता है |
कौंच के गुण धर्म
कौंच का रस मधुर, तिक्त | यह स्वाभाव में गुरु और स्निघ्ध | इसका वीर्य उष्ण होता है अर्थात कौंच के बीज की तासीर गरम होती है | पाचन के पश्चात कौंच के बीज का विपाक मधुर होता है | यह वातशामक और कफपित्त वर्द्धक है | आयुर्वेद चिकित्सा में इससे वानरी गुटिका , माषबलादी आदि औषध योग बनाये जाते है |
मर्दाना ताकत को बढ़ाने के लिए करे ये प्रयोग / कौंच बीजों के फायदे
कौच के बीजों को सबसे पहले दूध में पक्का ले और इनका छिलका उतार दे | फिर इसे धुप में सुखा दे , अच्छी तरह सूखने के बाद इनका महीन चूर्ण बना ले | अश्वगंधा और सफ़ेद मुसली को भी सामान मात्रा में लेकर इनका भी चूर्ण बना ले | अब कौंच बीज चूर्ण , अस्वगंधा चूर्ण और सफ़ेद मुसली के चूर्ण को आपस में अच्छी तरह मिला ले | रोज सुबह और शाम 5 ग्राम की मात्रा में दूध में मिश्री मिलाकर इसका सेवन करे | इससे शीघ्रपतन, नंपुसकता आदि रोगों से छुटकारा मिलेगा एवं शरीर में मर्दाना शक्ति का विकास होगा
कौंच के बीज , शतावरी, गोखरू, तालमखाना, नागबला और अतिबला – इन सभी को बराबर की मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना ले | इसका इस्तेमाल रोज रात को सोने से पहले 5 ग्राम की मात्रा में गुनगुने दूध के साथ करे | इसके इस्तेमाल से आपके सहवास का समय बढेगा और नामर्दी, शीघ्रपतन , धातु दुर्बलता में बेहतरीन परिणाम मिलेगा |
अगर आप वियाग्रा का इस्तेमाल अपनी मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए करते है, तो इसे छोड दे और अभी से कौंच का इस्तेमाल करना शूरू कर दे | आप बाजार में मिलने वाले कौंच पाक का इस्तेमाल करे यह पूर्णतया सुरक्षित है एवं इसके बेहतर परिणाम भी है | कौंच पाक में कौंच बीज, सफ़ेद मुसली, वंस्लोचन, त्रिकटु, अश्वगंधा, चातुर्जात, दूध , शहद और घी जैसे पौष्टिक द्रव्य है जो आपकी नामर्दी को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखते है | कौंच पाक के इस्तेमाल से शीघ्रपतन, अंग का ढीलापन, धातु दुर्बलता, शारीरिक दुर्बलता, शुक्राणुओं की कमी आदि से छुटकारा मिलेगा और यह आपके पाचन, स्मृति और शारीरिक बल को बढ़ाएगा |
कौंच पाक बनाने की विधि
कौंच पाक को अधिकतर सर्दियों में उपयोग करना चाहिए | इसे बनाने के लिए कौंच बीजो का इस्तेमाल होता है | मर्दाना ताकत , नपुंसकता, धातु दुर्बलता, वीर्य में शुक्राणुओं की कमी, शीघ्रपतन एवं शारीरिक दुर्बलता आदि में इसका सेवन करने से चमत्कारिक लाभ प्राप्त होंगे |
बाज़ार से इसे खरीदने से अच्छा है की आप इसे घर पर ही तैयार करले | इसे बनाने की विधि भी आसान है और यह पूर्णतया लाभकारी होगी एवं बाज़ार में मिलने वाले कौंच पाक से बेहतर भी रहेगी | इसके निर्माण के लिए निम्न सामग्री चाहिए –
कौंच बीज – 250 ग्राम
गाय का दूध – 4 किलो
गाय का घी – 500 ग्राम
अकरकरा चूर्ण – 5 ग्राम
रस सिन्दूर – 5 ग्राम
केसर – 3 ग्राम
प्रक्षेप के लिए – दालचीनी, लौंग, इलायची, चव्य, चित्रक, पीपलामूल, आदि सामान मात्रा में 40 ग्राम |
विधि – सबसे पहले कौंच के बीजों को ऊपर बताई गई मात्रा में 8 से 10 घंटो के लिए भिगों दें , अच्छी तरह भीगने के बाद बीज के ऊपर के छिलके को हटा दें एवं बीजों को धूप में सुखा दें | जब बीज अच्छी तरह सुख जाए तब इन्हें बारीक़ पीसकर चूर्ण बना ले | अब इस चूर्ण को दूध में डालकर उबालें एवं इसका मावा तैयार कर ले |
एक कडाही में घी डालकर इसमें इस मावे को भून ले | अच्छी तरह भुनने के बाद इसमें एक किलो चीनी से तैयार चासनी डालकर मिलादें | ऊपर से प्रक्षेप द्रव्य और अकरकरा चूर्ण – 5 ग्राम, रस सिन्दूर – 5 ग्राम और केसर – 3 ग्राम डालकर इसकी बर्फी काटले |
सेवन विधि –
 20 से 40 ग्राम तक पाचन शक्ति के अनुसार सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करे |
इस प्रकार से कौंच पाक का निर्माण होता है | वैसे शास्त्रोक्त कौंच पाक इससे भिन्न है , लेकिन इस प्रकार से तैयार करने से भी यह योग पुरुषों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है | यह परम पौष्टिक, शक्ति को बढाने वाला, शारीरिक कमजोरी को दूर करने वाला, नपुंसकता और धातु दुर्बलता आदि में काफी चमत्कारिक सिद्ध होता है |
कौंच के बीज का चुर्ण
सामग्री (Ingredients)
· 40 ग्राम मिश्री
· 40 ग्राम सफेद मूसली
· 60 ग्राम शाल्मली की जड़
· 80 ग्राम पोस्तदाना
· 50 ग्राम गोखरू
· 60 ग्राम कौंच के बीज
· 60 गरम तालमखाना
विधि (Method) –
इस चुर्ण को बनाने के लिए इन सभी वस्तुओं को इकठ्ठा करने के बाद पीस लें और पिसने के बाद एक बारीक़ कपडे से या छलनी से छान लें. अब एक चम्मच चुर्ण का सेवन रोजाना सुबह और शाम के समय करें और उसके बाद दूध पी लें. इस चुर्ण का प्रयोग करने पर आपके शरीर की शक्ति का विकास होगा, शरीर में पौष्टिकता की वृद्धि होगी तथा दाम्पत्य जीवन भी सुखपूर्वक व्यतीत होगा.

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पत्ता गोभी खाने के स्वास्थ्य लाभ व नुकसान

                                       


सब्ज‍ियों में आसानी से उपलब्ध होने वाली पत्तागोभी, आमतौर पर हर घर में खाई जाती है। चाइनीज डिशेज में भी इसका काफी प्रयोग किया जाता है। लेकिन इन सभी के अलावा और भी कई फायदे हैं, पत्तगोभी के
पत्‍ता गोभी जिसे हम बंद गोभी के नाम से भी जानते हैं, ब्रेसिका परिवार का एक सदस्‍य है जिसमें अन्‍य सब्जियां जैसे - ब्रोकली, फूलगोभी और ब्रूसल स्‍प्राउट आते है। यह सभी सब्जियां बड़ी और फूल के आकर की बड़े पत्‍तों वाली होती है। जिनकी पैदावार की शुरूआत, पूर्वी भूमध्‍य सागर और एशिया माइनर में मानी जाती है। यह साल के सभी दौर में मिलती है और इन्‍हे स्‍वस्‍थ आहार का हिस्‍सा माना जाता है।
पत्ता गोभी एक अकेली ऐसी सब्जी है जिसके अंदर आपको सिर्फ पत्ते ही पत्ते मिलेंगे। पत्ता गोभी का इस्तमाल आप अलग अलग तरीकों से कर सकते हैं, जैसे कि इसे आप सब्जी बना कर भी खा सकते हैं। इसे आप सलाद में भी ले सकते हैं और आप इसे कच्चा भी खा सकते हैं। यह कई किस्म के होते हैं और इसकी हर एक किस्म बाजार में आसानी से आपको मिल जाती हैं। इसे अंग्रेजी में कैबेज बोला जाता है।
कैंसर को रोकने में मदद करता है : 
बंदगोभी में ऐसे तत्‍व होते है जो कैंसर की रोकथाम करने और उसे होने से बचाने में मदद करता है। इसमें डिनडॉलीमेथेन ( डीआईएम ), सिनीग्रिन, ल्‍यूपेल, सल्‍फोरेन और इंडोल - 3 - कार्बीनॉल ( 13 सी) जैसे लाभदायक तत्‍व होते है। ये सभी कैंसर से बचाव करने में सहायक होते है।मेडिकल विशेषज्ञ मानते हैं कि कच्चे पत्तागोभी के ज्यूस में आइसोसाइनेट्स होते हैं जो कि एक प्रकार के केमिकल कंपाउड्स होते हैं जो आपके शरीर में एस्ट्रोजिन मेटाबोलिज्म की प्रकिया को तेज करते हैं और आपको स्तन कैंसर, फेफडों के कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, पेट के कैंसर और कोलोन कैंसर से बचाए रखते हैं। इसके उपयोग से कैंसर के ठीक होने की प्रकिया को भी गति मिलती है।
इम्‍यूनिटी को बढ़ाता है : 
पत्‍ता गोभी, शरीर में इम्‍यूनिटी सिस्‍टम को स्‍ट्रांग बनाती है। इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है जिससे बॉडी का इम्‍यूनिटी सिस्‍टम काफी मजबूत हो जाता है।
एंटी - फ्लैममेट्रोरी प्रॉपर्टी : 
यह अमीनो एसिड में सबसे समृद्ध होता है जो सूजन आदि को कम करता है।
वजन घटाने में : 
पत्‍ता गोभी एक खास सब्‍जी है लेकिन इसके सेवन से वजन को भी कम किया जा सकता है। एक कप पकाई वंदगोभी में सिर्फ 33 कैलोरी होती है जो वजन नहीं बढ़ने देती। वंदगोभी का सूप शरीर को ऊर्जा देता है लेकिन वसा की मात्रा का घटा देता है। पत्तागोभी को वजन कम करने के लिए बहुत ही कारगर उपाय समझा जाता है। यह आपके पाचन को दुरुस्त करता है और इसमें कैलोरी की मात्रा भी बहुत कम होती है। यह पेट से जुडी हर प्रकार की समस्या से आपको निजात दिलाता है|
मोतियाबिंद के खतरे को कम करता है : 
पत्‍ता गोभी के सेवन से मोतियाबिंद का खतरा कम होता है। इसके लगातार सेवन से बॉडी में बीटा केराटिन बढ़ जाता है जिससे आंखे सही रहती है।
पेप्टिक अल्‍सर के इलाज में सहायक : 
पत्‍ता गोभी, पेप्टिक अल्‍सर के इलाज में सहायक होती है। इस रोग से पीडित व्‍यक्ति अगर वंदगोभी का नियमित सेवन करें तो उसे आराम मिल सकता है क्‍योंकि इसमें ग्‍लूटामाइन होता है जो अल्‍सर विरोधी होता है।
कब्‍ज से राहत दिलाए 
इसमे बहुत ज्‍यादा रेशा होता है जिसकी वजह से पाचन क्रिया अच्‍छे से होती है और पेट दरुस्‍त रहता है। इस वजह से कब्‍ज की समस्‍या कभी नहीं हो पाती।
मांसपेशियों के दर्द में राहत देती है : 
पत्‍ता गोभी में लैक्टिक एसिड काफी मात्रा में होती है जो मांसपेशियों के चोटिल होने और उसे रिकवर करने में काफी सहायक होती है।
अल्‍माइजर को कम कर देता है : 
हाल ही में हुए शोध से पता चला है कि पत्‍ता गोभी के सेवन से अल्‍माइजर जैसी समस्‍याएं दूर हो जाती है। इसमें विटामिन के भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिससे अल्‍माइजर की समस्‍या दूर हो जाती है।
पेट साफ-
पत्तागोभी पेट को साफ रखने में बहुत कारगर है। इसमें क्लोरीन और सल्फर नाम के दो बहुत जरुरी मिनरल्स होते हैं। आप पत्तागोभी का ज्यूस पीने के बाद एक तरह की गैस महसूस करेंगे और यह गैस इस बात का इशारा होता है कि ज्यूस ने अपना काम करना शुरु कर दिया है।
*क्या आप कुछ किलो वजन कम करने की बहुत कोशिश कर रहे हैं? आप एक बार पत्तागोभी के ज्यूस को भी आजमाइए। पत्तागोभी को वजन कम करने के लिए बहुत ही कारगर उपाय समझा जाता है। यह आपके पाचन को दुरुस्त करता है और इसमें कैलोरी की मात्रा भी बहुत कम होती है। यह पेट से जुडी हर प्रकार की समस्या से आपको निजात दिलाता है और अल्सर के इलाज में तो इसे अचूक उपाय समझा जाता है।
खून की कमी
पत्तागोभी में फोलिक एसिड होता है जिसमें एनीमिया यानी खून की कमी को दूर करने का खास गुण होता है। फोलिक एसिड में नए ब्लड सेल्स का निर्माण करता है।
मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में
मांसपेशियों को मजबूत बनाने और उनको चोटों से सुरक्षित रखने में भी पत्ता गोभी का महत्वपूर्ण रोल होता है। इसके अंदर लैक्टिक एसिड पाया जाता है। जिसकी वजह से आपकी मांसपेशियों को चोट लगने से बचाया जाता है। इसके अलावा यह मांसपेशियों को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने में भी काफी कारगर सिद्ध होता है। इसलिए आपको रोजाना जिंदगी में इसका सेवन जरूर करना चाहिए।
त्वचा के लिए
पत्ता गोभी के अंदर काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। जिसकी वजह से हमारे शरीर की त्वचा हमेशा स्वस्थ और सुंदर रहती है। एंटीऑक्सीडेंट की वजह से शरीर की त्वचा की सही देखभाल हो पाती है। जो लोग पत्तागोभी का सेवन करते हैं, आप देखेंगे कि उनके चेहरे हमेशा ही ग्लो करते हैं और उन्हें पिंपल जैसी समस्या भी नहीं होती है।
जो लोग अपने चेहरे का काफी ख्याल रखते हैं और उसके बावजूद भी उनके चेहरे पर पिंपल जैसे समस्या बनी रहती है, या फिर उनकी त्वचा ग्लो नहीं करती है। उन लोगों को अपने शरीर की तंदुरुस्ती और सुंदरता के लिए पत्ता गोभी का सेवन अपने भोजन में जरूर करना चाहिए। क्योंकि पत्ता गोभी के अंदर एंटीऑक्सीडेंट होता है जिसकी वजह से उनकी स्किन हमेशा ही खिली खिली रहती है।
सावधानी-
ऊपर के लेख में आपने पत्ता गोभी के फायदे तो जान लिए लेकिन इसको इस्तेमाल करने से पहले पत्ता गोभी के नुकसान जानना भी जरूरी हो जाता है आइये जानते है पत्ता गोभी के नुकसान क्या है
अगर आप पत्ता गोभी का इस्तेमाल रोजाना दिन में कई बार करते हैं। तो इससे आपको पेट की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
जिन लोगों को इर्रिटेबल बाउल, सिंड्रोम जैसी समस्या है। उन्हें पत्तागोभी का सेवन नहीं करना चाहिए।
यह एक पाचन समस्या है इसलिए पाचन रोगों से पीड़ित लोगों को तो बिल्कुल भी पता गोभी का सेवन नहीं करना चाहिए।
अगर आपको बार बार गैस हो रही है या आपका पेट फूल रहा है, तो उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आप पत्ता गोभी को अपने भोजन में शामिल कर रहे हैं।
आपको उसी वक्त पत्ता गोभी छोड़ देना चाहिए। क्योंकि यह पत्तागोभी का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट है।
अगर आप थायराइड जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं तो आपको पता गोभी का सेवन अपने रोजमर्रा जिंदगी में नहीं करना चाहिए।
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