अदरक के औषधीय गुण और फायदे

                                                           

                                         
अदरक महज एक मसाला ही नहीं है, बल्कि यह सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं। अदरक में आयरन, कैल्शियम, आयोडीन, क्लो‍रीन व विटामिन सहित कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। साथ ही अदरक एक शक्तिशाली एंटीवायरल भी है। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। अदरक को ताजा और सूखा दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है। आइए अदरक के कुछ गुणों के बारे में जानते हैं।
खांसी में फायदेमंद
अदरक हमेशा से खांसी की बेहतरीन दवा माना जाता है। खांसी आने पर अदरक के छोटे टुकडे को बराबर मात्रा में शहद के साथ गर्म करके दिन में दो बार सेवन कीजिए। इससे खांसी आना बंद हो जाएगा और गले की खराश भी समाप्त होगी।
भूख बढ़ाने के लिए
अदरक का नियमित सेवन करने से भूख न लगने की समस्‍या से छुटकारा पाया जा सकता है। अगर आपको भूख कम लगती हैं तो अदरक को बारीक काटकर, थोड़ा सा नमक लगाकर दिन में एक बार लगातार आठ दिन तक खाइए। इससे पेट साफ होगा और ज्यादा भूख लगेगी।
अदरक कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सक्षम
आधुनिक शोधों में अदरक को विभिन्न प्रकार के कैंसर में एक लाभदायक औषधि के रूप में देखा जा रहा है और इसके कुछ आशाजनक नतीजे सामने आए हैं।
मिशिगन यूनिवर्सिटी कांप्रिहेंसिव कैंसर सेंटर के एक अध्ययन में पाया गया कि अदरक ने न सिर्फ ओवरी कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया, बल्कि उन्हें कीमोथैरेपी से प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने से भी रोका जो कि ओवरी के कैंसर में एक आम समस्या होती है।
इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने ओवरी कैंसर कोशिकाओं पर अदरक पाउडर और पानी का एक लेप लगाया। हर परीक्षण में पाया गया कि अदरक के मिश्रण के संपर्क में आने पर कैंसर की कोशिकाएं नष्ट हो गईं। हर कोशिका ने या तो आत्महत्या कर ली, जिसे एपोप्टोसिस कहा जाता है या उन्होंने एक-दूसरे पर हमला कर दिया, जिसे ऑटोफेगी कहा जाता है।
अदरक को स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और कोलोन कैंसर के इलाज में भी बहुत लाभदायक पाया गया है।
जर्नल ऑफ बायोमेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित शोध में पता चला कि अदरक के पौधे के रसायनों ने स्वस्थ स्तन कोशिकाओं पर असर डाले बिना स्तन कैंसर की कोशिकाओं के प्रसार को रोक दिया। यह गुण बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पारंपरिक विधियों में ऐसा नहीं होता। हालांकि बहुत से ट्यूमर कीमोथैरैपी से ठीक हो जाते हैं, मगर स्तन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना ज्यादा मुश्किल होता है। वे अक्सर बच जाती हैं और उपचार के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेती हैं।
अदरक के इस्तेमाल के दूसरे फायदे ये हैं कि उसे कैप्सूल के रूप में दिया जाना आसान है, इसके बहुत कम दुष्प्रभाव होते हैं और यह पारंपरिक दवाओं का सस्ता विकल्प है।

आधुनिक विज्ञान प्रमाणित करता है कि अदरक कोलोन में सूजन को भी कम कर सकता है जिससे कोलोन कैंसर को रोकने में मदद मिलती है। मिशिगन यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 30 मरीजों के एक समूह को 28 दिनों में दो ग्राम अदरक की जड़ के सप्लीमेंट या प्लेसबो दिए। 28 दिनों के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों ने अदरक की जड़ का सेवन किया था, उनमें कोलोन की सूजन के चिह्नों में काफी कमी पाई गई। इससे यह कोलोन कैंसर के रिस्क वाले लोगों में एक कारगर प्राकृतिक बचाव विधि हो सकती है।
कई और तरह के कैंसर, जैसे गुदा कैंसर, लिवर कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, मेलानोमा और पैंक्रियाज के कैंसर को रोकने में अदरक के तत्वों की क्षमता पर भी अध्ययन किए गए हैं। यह एक दिलचस्प बात है कि एक कैंसर रोधी दवा बीटा-एलिमेन अदरक से बनाई जाती है।
जी मिचलाना
जी मिचलना और उल्टी की समस्या को रोकने के लिए अदरक औषधि की तरह का काम करता है। 1 चम्मच अदरक के जूस में 1 चम्मच नींबू का रस मिलाएं। इसको हर दो घंटे बाद पीएं। जल्द ही राहत मिलेगी।
*अदरक के ज्यूस में सूजन को कम करने की शक्ति अत्यधिक मात्रा में होती है और यह उन लोगों के लिए वरदान की तरह है, जो जोड़ों के दर्द और सूजन से परेशान हैं। एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग अदरक के ज्यूस का उपयोग नियमित तौर पर करते हैं उन्हें जोड़ों में सूजन और दर्द पैदा करने वाली बीमारियां परेशान नहीं करतीं। आपके जोड़ों की समस्या नई हो या कई साल पुरानी- यकीन रखिए कि अदरक का ज्यूस बहुत असरकारी है। अदरक के ज्यूस में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में ताजे रक्त के प्रवाह को बढ़ाते हैं, क्योंकि इनमें खून को साफ करने का खास गुण होता है।

अदरक हृदय के लिए लाभकारी -
अदरक सालों से हृदय रोगों के उपचार में इस्तेमाल होती रही है। चीनी चिकित्सा में कहा जाता है कि अदरक के उपचारात्मक गुण हृदय को मजबूत बनाते हैं। हृदय रोगों से बचाव और उसके उपचार में अक्सर अदरक के तेल का प्रयोग किया जाता था।
आधुनिक अध्ययन दर्शाते हैं कि इस जड़ी-बूटी के तत्व कोलेस्ट्रॉल को कम करने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, रक्त प्रवाह में सुधार लाने और अवरुद्ध आर्टरियों तथा रक्त के थक्कों से बचाव करने का काम करते हैं। ये सारी चीजें हृदयाघात (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक के जोखिम को कम करती हैं।
अदरक मोशन सिकनेस मे-
अलग-अलग तरह की मतली और उल्टी को ठीक करने में अदरक बहुत मददगार होती है। गर्भवती स्त्रियों में मॉर्निंग सिकनेस, सफर पर रहने वाले लोगों में मोशन सिकनेस और कीमोथैरेपी के मरीजों में भी मितली की समस्या में यह राहत देती है। कीमोथैरेपी के दौरान वमन रोकने वाली दवाएं दिए जाने के बावजूद 70 फीसदी मरीजों को मितली की परेशानी होती है। वयस्क कैंसर रोगियों पर किए गए एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि रोजाना कीमो से पहले आधा से एक ग्राम अदरक की डोज दिए जाने पर अध्ययन में हिस्सा लेने वाले 91 फीसदी मरीजों में तेज मितली की गंभीरता काफी हद तक कम हुई।
अदरक चक्कर आने के साथ आने वाली मितली को भी कम करने में मदद करती है। इस संबंध में हुए शोध से पता चलता है कि इस मसाले के उपचारात्मक रसायन, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र में काम करते हुए उबकाई के असर को कम करते हैं।
अदरक मधुमेह में लाभदायक तत्व- 
मधुमेह के मामले में अध्ययनों ने अदरक को इसके बचाव और उपचार दोनों में असरकारी माना है।
ऑस्ट्रेलिया में सिडनी यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में अदरक को टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए असरदार पाया गया। अदरक के तत्व इंसुलिन के प्रयोग के बिना ग्लूकोज को स्नायु कोशिकाओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया बढ़ा सकते हैं। इस तरह इससे उच्च रक्त शर्करा स्तर (हाई सुगर लेवल) को काबू में करने में मदद मिल सकती है।
अध्ययनों में पाया गया है कि अदरक मधुमेह से होने वाली जटिलताओं से बचाव करती है। अदरक मधुमेह पीड़ित के लिवर, किडनी और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सुरक्षित कर सकती है। साथ ही वह इस बीमारी के एक आम दुष्प्रभाव मोतियाबिंद का खतरा भी कम करती है।
अदरक जोड़ों के दर्द और आर्थराइ‍टिस में -

अदरक में जिंजरोल नामक एक बहुत असरदार पदार्थ होता है जो जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द को कम करता है। एक अध्ययन के मुताबिक, अदरक गंभीर और स्थायी इंफ्लामेटरी रोगों के लिए एक असरकारी उपचार है।
कई और वैज्ञानिक अध्ययन भी जोड़ों के दर्द में अदरक के असर की पुष्टि करते हैं। गठिया के शुरुआती चरणों में यह खास तौर पर असरकारी होता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित बहुत से मरीजों ने नियमित तौर पर अदरक के सेवन से दर्द कम होने और बेहतर गतिशीलता का अनुभव किया।
हांग कांग में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि अदरक और संतरे के तेल से मालिश करने पर घुटने की समस्याओं वाले मरीजों में थोड़ी देर के लिए होने वाली अकड़न और दर्द में राहत मिलती है।
अदरक कसरत से होने वाले सूजन और मांसपेशियों के दर्द को भी कम कर सकती है। जार्जिया यूनिवर्सिटी द्वारा करवाए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लगातार 11 दिन तक 34 और 40 वाटंलियरों के दो समूहों को कच्ची और पकाई हुई अदरक खिलाई। अध्ययन के नतीजों से यह निष्कर्ष निकाला गया कि अदरक के सप्लीमेंट्स का रोजाना इस्तेमाल, कसरत से होने वाले मांसपेशियों के दर्द में 25 फीसदी तक राहत देती है।
हाजमे के लिए
पेट की समस्‍याओं के लिए अदरक बहुत ही फायदेमंद होता है। यह अपच और पाचन में सुधार करने में मदद करता है। अदरक को अजवाइन, सेंधा नमक व नींबू का रस मिलाकर खाने से पाचन क्रिया ठीक रहती है। इससे पेट में गैस नहीं बनती, खट्टी-मीठी डकार आना बंद हो जाती है। साथ ही कब्‍ज की समस्‍या से भी निजात मिलती हैं।
त्वचा को आकर्षक बनाने के लिए
अदरक के सेवन से त्‍वचा आकर्षित और चम‍कदार बनती है। अगर आप भी अपनी त्‍वचा को आकर्षित बनाना चाहते हैं तो सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी के साथ अदरक का एक टुकड़ा जरूर खाएं। इससे न केवल आपकी त्वचा में निखार आएगा बल्कि आप लंबे समय तक जवां दिखेंगे।
अदरक माइग्रेन और मासिक धर्म की पीड़ा मे-
शोध से पता चलता है कि अदरक माइग्रेन (सिरदर्द) में राहत दे सकती है। ईरान में किए गए और फाइटोथैरेपी रिसर्च जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि माइग्रेन के लक्षणों के उपचार में अदरक पाउडर माइग्रेन की आम दवा सुमाट्रिप्टन जितना ही असरदार है।
क्लीनिकल ट्रायल में तीव्र लक्षणों वाले 100 माइग्रेन पीड़ितों में से कुछ को सुमाट्रिप्टन दिया गया और बाकियों को अदरक पाउडर। शोध में पाया गया कि दोनों की प्रभावक्षमता एक जैसी थी और अदरक पाउडर के दुष्प्रभाव सुमाट्रिप्टन के मुकाबले बहुत कम थे। इससे यह पता चलता है कि यह माइग्रेन का अधिक सुरक्षित उपचार है।
माइग्रेन का हमला शुरू होते ही अदरक की चाय पीने से प्रोस्टेग्लैंडिन दब जाते हैं और असहनीय दर्द में राहत मिलती है। इससे माइग्रेन से जुड़ी उबकाई और चक्कर की समस्याएं भी नहीं होतीं।
अदरक डिस्मेनोरिया (पीड़ादायक मासिक धर्म) से जुड़े दर्द को भी काफी कम करने में मददगार है। ईरान में किए गए एक शोध में 70 महिला विद्यार्थियों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को अदरक के कैप्सूल और दूसरे को एक प्लेसबो दिया गया। दोनों को उनके मासिक चक्र के पहले तीन दिनों तक ये चीजें दी गईं। शोधकर्ताओं ने पाया कि अदरक के कैप्सूल लेने वाली 82.85 फीसदी महिलाओं ने दर्द के लक्षणों में सुधार बताया जबकि प्लेसबो से सिर्फ 47.05 फीसदी महिलाओं को ही राहत मिली।
बहुत सी संस्कृतियों में जलन के उपचार के लिए त्वचा पर ताजे अदरक का रस भी डालने की परंपरा है और अदरक का तेल जोड़ों तथा पीठ के दर्द में काफी असरकारी पाया गया है।
अदरक श्वास की समस्याओं और दमा के उपचार में 
श्वास संबंधी समस्याओं के उपचार में अदरक के तत्वों के सकारात्मक नतीजे दिखे हैं। शोध से पता चलता है कि दमा से पीड़ित मरीजों के उपचार में इसका प्रयोग आशाजनक रहा है। दमा एक स्थायी बीमारी है जिसमें फेफड़ों की ऑक्सीजन वाहिकाओं के स्नायुओं में सूजन आ जाती है और वे विभिन्न पदार्थों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं, जिससे दौरे पड़ते हैं।
हाल में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि अदरक दो तरीके से दमा के उपचार में लाभदायक होता है। पहला हवा के मार्ग की मांसपेशियों को संकुचित करने वाले एंजाइम को अवरुद्ध करते हुए और दूसरे हवा के मार्ग को आराम पहुंचाने वाले दूसरे एंजाइम को सक्रिय करते हुए।
अदरक अपने शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट, सूजन रोधी (एंटी-इंफ्लामेटरी) और दर्दनिवारक तत्वों के कारण असरकारी होती है। इसके गुण नॉन स्टेरायडल एंटी इंफ्लामेटरी दवाओं के समान होते हैं मगर इसके नकारात्मक दुष्प्रभाव नहीं होते। जबकि दमा की बीमारी के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के चिंताजनक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए अदरक जैसे वैकल्पिक, सुरक्षित उपचार का मिलना इस रोग के उपचार में एक आशाजनक खोज है।
ध्यान देने योग्य बातें
दो साल से कम उम्र के बच्चों को अदरक नहीं दी जानी चाहिए।
आम तौर पर, वयस्कों को एक दिन में 4 ग्राम से ज्यादा अदरक नहीं लेनी चाहिए। इसमें खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाने वाला अदरक शामिल है।
गर्भवती स्त्रियों को 1 ग्राम रोजाना से अधिक नहीं लेना चाहिए।
आप अदरक की चाय बनाने के लिए सूखे या ताजे अदरक की जड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं और उसे रोजाना दो से तीन बार पी सकते हैं।
अत्यधिक सूजन को कम करने के लिए आप रोजाना प्रभावित क्षेत्र पर कुछ बार अदरक के तेल से मालिश कर सकते हैं।
अदरक के कैप्सूल दूसरे रूपों से बेहतर लाभ देते हैं।
अदरक खून पतला करने वाली दवाओं सहित बाकी दवाओं के साथ परस्पर प्रभाव कर सकती है।
किसी विशेष समस्या के लिए अदरक की खुराक की जानकारी और संभावित दुष्प्रभावों के लिए हमेशा डॉक्टर से संपर्क करें।
अदरक-नीबू की चाय – कैसे बनाएं
चाय की यह स्वास्थ्यकर रेसिपी आपको ताजगी और स्फूर्ति से भर देगी। साथ ही इसमें कैफीन के दुष्प्रभाव नहीं होते। एक पतीले में साढ़े चार कप पानी उबालें। पानी के उबलने पर 2 इंच अदरक के टुकड़े को 20-25 तुलसी पत्तों के साथ कूट लें। इस पेस्ट को सूखी धनिया के बीजों (वैकल्पिक) के साथ उबलते पानी में डाल दें। 2-3 मिनट तक उबलने दें।
चाय को कप में छान लें और स्वाद के लिए 1 चम्मच नीबू का रस और गुड़ मिलाएं। गरम-गरम पिएं।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार



हल्दी के औषधीय गुण व लाभ



हल्दी के औषधीय गुणों से प्राय: सभी लोग परिचित होते हैं। हल्दी शरीर में रक्त को शुद्ध करने के साथ-साथ तीनों दोषों यानी वात्त-पित्त-कफ का भी शमन करती है। यह शरीर की काया और रंग को सुधारने में एक महत्त्वपूर्ण देशी औषधि के रूप में कारगर भूमिका अदा करती है।
लिवर को करती है डिटॉक्सीफाई
हल्दी के औषधीय गुण के रूप में आप इसका इस्तेमाल शरीर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए कर सकते हैं। मेरीलैंड मेडिकल सेंटर यूनिवर्सिटी के अनुसार, करक्यूमिन गाल ब्लैडर यानी पित्त मूत्राशय में बाइल (पित्त) के उत्पादन को बढ़ाता है। लिवर इस बाइल का प्रयोग विषैले जीवाणुओं को बाहर निकालने में करता है। इसके अलावा, बाइल के कारण लिवर में जरूरी सेल्स का निर्माण भी होता है, जो हानिकारक तत्वों को खत्म करने का काम करते हैं। करक्यूमिन की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया इतनी प्रभावशाली है कि इसका इस्तेमाल मरकरी के संपर्क में आए व्यक्ति का इलाज करने तक में किया जा सकता है
प्रतिरोधक क्षमता में सुधार-
हल्दी के गुण में इसका प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करना भी शामिल है। हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो प्रतिरोधक प्रणाली को बेहतर कर सकते हैं। वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि करक्यूमिन ह्रदय रोग व मोटापे का कारण बनने वाले सेल्स को बनने से रोकता है। साथ ही यह प्रतिरोधक प्रणाली को एक्टिव कर टीबी का कारण बनने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता है। हल्दी में करक्यूमिनोइड्स नामक यौगिक भी होता है, जो टी व बी सेल्स (श्वेत रक्त कोशिकाएं) जैसे विभिन्न इम्यून सेल्स की कार्यप्रणाली को बेहतर करता है। इससे प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है
डायबीटीज़ मे उपयोगी -
वैज्ञानिकों के अनुसार, करक्यूमिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम कर सकता है । इससे डायबिटीज से आराम मिल सकता है। एक अन्य शोध के तहत, डाबिटीज के मरीज को करीब नौ महीने तक करक्यूमिन को दवा के रूप में दिया गया। इससे मरीज में सकारात्मक परिणाम नजर आए । इन अध्ययनों के आधार पर वैज्ञानिकों ने माना कि हल्दी के सेवन से टाइप-1 डायबिटीज से ग्रस्त मरीज का इम्यून सिस्टम बेहतर हो सकता है। डायबिटीज से ग्रस्त चूहों पर हुए अध्ययन में भी पाया गया कि करक्यूमिन सप्लीमेंट्स के प्रयोग से ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम किया जा सकता है। शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस का स्तर बढ़ने से ह्रदय संबंधी रोग भी हो सकते हैं । इस लिहाज से हल्दी खाने के फायदे में डायबिटीज को ठीक करना भी है।
कैंसर
हल्दी में एंटीकैंसर गुण भी पाए जाते हैं। कई वैज्ञानिक शोधों में भी माना गया है कि कैंसर की रोकधाम में हल्दी का प्रयोग किया जा सकता है । शोध के दौरान पाया गया कि कुछ कैंसर ग्रस्त मरीजों को हल्दी देने से उनके ट्यूमर का आकार छोटा हो गया था। इतना ही नहीं कैंसर को खत्म करने में सक्षम इम्यून सिस्टम में मौजूद केमिकल भी एक्टिव हो जाते हैं। एक चाइनीज अध्ययन के अनुसार, करक्यूमिन ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करने में भी कारगर है । इसलिए, कैंसर की रोकथाम के लिए हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।
वजन नियंत्रण व मेटाबॉलिज्म-
यह तो आप सभी जानते हैं कि मोटापा कई बीमारियों की जड़ है। इसके कारण न सिर्फ आपकी हड्डियां कमजोर होती हैं, बल्कि शरीर में कई जगह सूजन भी आ जाती है। इससे डायबिटीज व ह्रदय रोग जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं, हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी व अन्य गुण होते हैं, जो इन समस्याओं से आपको राहत दिला सकते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल व उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कर सकती है। इन दो परिस्थितियों में भी वजन बढ़ने लगता है। हल्दी के गुण में वजन को नियंत्रित करना भी है।
जब आपका वजन बढ़ता है, तो फैट टिशू फैल जाते हैं और नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण होता है। ऐसे में करक्यूमिन इन नई रक्त वाहिकाओं को बनने से रोकता है, जिससे वजन कम हो सकता है। फिलहाल, यह शोध अभी तक सिर्फ चूहों पर किया गया है। यह मनुष्यों के लिए कितना कारगर है, उस पर रिसर्च किया जाना बाकी है।
एक कोरियन स्टडी के अनुसार, हल्दी मेटाबॉलिज्म प्रणाली को बेहतर करती है और नए फैट को बनने से रोकती है। इसके अलावा, हल्दी कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी नियंत्रित करती है, जिससे वजन का बढ़ना रुक सकता है। प्रोटीन से भी शरीर का वजन बढ़ता है, ऐसे में हल्दी अधिक प्रोटीन के निर्माण में बाधा पहुंचाती है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि हल्दी वजन कम करने और मोटापे के कारण होने वाली बीमारियों से बचाने में हमारी मदद करती है । यहां स्पष्ट कर दें कि हल्दी फैट सेल्स को तो कम करती है, लेकिन भूख को किसी तरह से प्रभावित नहीं करती है। इसलिए, हल्दी का प्रयोग पूरी तरह से सुरक्षित है
हल्दी शरीर के तापमान को भी नियंत्रित रखती है, जिससे मेटाबॉलिज्म में सुधार हो सकता है। मोटापे के लिए कुछ हद तक लिपिड मेटाबॉलिज्म भी जिम्मेदार होता है, जिसे हल्दी का सेवन कर संतुलित किया जा सकता है
प्राकृतिक दर्द निवारक-
भारत में सदियों से हल्दी को प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। चोट लगने पर हल्दी को लेप के रूप में लगाया जाता है। वहीं, दूध में हल्दी मिक्स करके पीने से न सिर्फ दर्द कम होता है, बल्कि यह एंटीसेप्टिक का काम भी करता है। हल्दी किसी भी दर्द निवारक दवा से ज्यादा कारगर है। इसके अलावा, हल्दी में पाए जाने वाले यौगिक करक्यूमिन से तैयार किए गए उत्पाद हड्डियों व मांसपेशियों में होने वाले दर्द से राहत दिला सकते हैं। साथ ही हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो किसी भी तरह के दर्द व सूजन से राहत दिला सकते हैं। यही कारण है कि गठिया रोग से पीड़ित मरीजों को हल्दी का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है । इस प्रकार प्राकृतिक दर्द निवारक दवा के रूप में हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।
मासिक धर्म में दर्द से राहत-
कई महिलाओं को मासिक धर्म के समय अधिक दर्द व पेट में ऐंठन का सामना करना पड़ता है। इससे बचने के लिए आप हल्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं। ईरान में हुए एक शोध के अनुसार, करक्यूमिन में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होता है, जो मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकता है। भारत व चीन में प्राचीन काल से इसका उपयोग मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए किया जा रहा है । इस दौरान हल्दी वाला दूध या फिर हल्दी और अदरक की चाय पीने से फायदा हो सकता है। हल्दी खाने के फायदे में मासिक धर्म में होने वाले दर्द से राहत पाना भी है।
एंटीइंफ्लेमेटरी-
जैसा कि आप जान ही चुके हैं कि हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन प्रमुख यौगिक है। यह एंटीइंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है। यह शरीर में आई किसी भी तरह की सूजन को कम कर सकता है। अर्थराइटिस फाउंडेशन के अनुसार, गठिया के इलाज में करक्यूमिन का प्रयोग किया जा सकता है। यह प्रतिरोधक प्रणाली को बेहतर करता है, जिससे जड़ों में आई सूजन कम हो सकती है । यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हल्दी प्राकृतिक रूप से सूजन का मुकाबला करती है।
आर्थरायटीज़ मे लाभकारी -
जैसा कि आप जान ही चुके हैं कि हल्दी किसी भी तरह की सूजन को कम कर सकती है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। इसके प्रयोग से अर्थराइटिस के कारण जोड़ों में आई सूजन व दर्द से राहत मिलती है। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को नष्ट कर देते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं । इसलिए, हल्दी के उपयोग में अर्थराइटिस को ठीक करना भी शामिल है।
खांसी-
हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीबैक्टीरियल व एंटीवायरल गुण होते हैं, जो इसे खास बनाते हैं। आयुर्वेद में भी इसे गुणकारी औषधि माना गया है। यह बैक्टीरिया और वायरल के कारण होने वाली बीमारियों पर प्रभावी तरीके से काम करती है। हल्दी के एंटीइंफ्लेमेटरी गुण न सिर्फ चेस्ट कंजेशन से बचाते हैं, बल्कि पुरानी से पुरानी खांसी को भी ठीक कर सकते हैं। आप खांसी होने पर हल्दी वाले दूध का सेवन कर सकते हैं । इस प्रकार कहा जा सकता है कि हल्दी के उपयोग में खांसी को ठीक करना भी शामिल है।
 प्राकृतिक एंटीसेप्टिक-
हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो ई. कोली, स्टैफीलोकोकक्स ऑरियस और साल्मोनेला टाइफी जैसे कई तरह के बैक्टीरिया से बचाते हैं । एक अन्य अध्ययन में साबित किया गया है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिनोइड्स आठ तरह के बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ सकता है। इतना ही नहीं, यह कई तरह के फंगस और वायरस से भी बचाता है । इसके अलावा, हल्दी दांत दर्द में भी इलाज कर सकती है
मस्तिष्क का स्वास्थ्य-
आप यह जानकर हैरानी होगी कि हल्दी मस्तिष्क के लिए भी फायदेमंद है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन मस्तिष्क में जरूरी सेल्स के निर्माण में मदद करता है। हल्दी में कुछ अन्य बायोएक्टिव यौगिक भी होते हैं, जो मस्तिष्क में मौजूद न्यूरल स्टीम सेल का करीब 80 प्रतिशत तक विकास कर सकते हैं। हल्दी में मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मस्तिष्क को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
हल्दी में करक्यूमिन के अलावा टरमरोन नामक जरूरी घटक भी होता है। यह मस्तिष्क में कोशिकाओं को नुकसान होने से बचाता है और उनकी मरम्मत भी करता है। साथ ही अल्जाइमर में याददाश्त को कमजोर होने से बचाता है। इस लिहाज से यह अल्जाइमर जैसी बीमारी में कारगर घरेलू उपचार है।
इतना ही नहीं हल्दी के सेवन से मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। इसके अलावा, अल्जाइमर के बढ़ने की गति धीमी हो जाती है और बाद में यह रोग धीरे-धीरे कम होने लगता है
डाइजेशन-
पेट में गैस कभी भी और किसी को भी हो सकती है। कई बार यह गैस गंभीर रूप ले लेती है, जिस कारण गेस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) का सामना करना पड़ सकता है। इसका इलाज एंटीइंफ्लेमेरी व एंटीऑक्सीडेंट के जरिए किया जा सकता है और हल्दी में ये दोनों ही गुण पाए जाते हैं। हल्दी भोजन नलिका में एसिड के कारण होने वाली संवदेनशीलता को भी कम कर सकती है।
कई प्रीक्लिनिकल ट्रायल में यह साबित हो चुका है कि हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को नुकसान होने से बचाते हैं। इसके अलावा, हल्दी बदहजमी के लक्षणों को भी ठीक कर सकती है। साथ ही अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित मरीजों की स्थिति में सुधार हो सकता है । हल्दी के लाभ में बेहतर डाइजेशन भी शामिल है।
 एंटीऑक्सीडेंट-
हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाया जाता है, जो शरीर से फ्री रेडिकल्स को साफ करने, पेरोक्सीडेशन को रोकने और आयरन के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करता है । हल्दी पाउडर के साथ-साथ इसके तेल में भी एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं
वहीं, चूहों पर की गई एक स्टडी के अनुसार, हल्दी डायबिटीज के कारण होने वाले ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को रोकने में सक्षम है । एक अन्य अध्ययन में दावा किया गया है कि करक्यूमिन में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट गुण मनुष्यों की स्मरण शक्ति को बढ़ा सकता है
ह्रदय रोग में लाभदायक
हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण ह्रदय को विभिन्न रोगों से बचाए रखते हैं, खासकर जो डायबिटीज से ग्रस्त हैं। हल्दी का मुख्य यौगिक करक्यूमिन खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है। इससे ह्रदय को स्वथ्य बनाए रखने में मदद मिलती है
मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी ने भी अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि करक्यूमिन धमनियों में रक्त के थक्के बनने नहीं देता, जिससे खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। इससे ह्रदय अच्छी तरह काम कर पाता है । यूनिवर्सिटी ऑफ इंडोनेशिया ने भी अपनी स्टडी में करक्यूमिन के फायदे को वर्णित किया है। उन्होंने पाया कि एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम से पीड़ित मरीज को करक्यूमिन देने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगा । इसलिए, कहा जा सकता है कि हल्दी के गुण में ह्रदय को स्वस्थ रखना भी शामिल है।
 सोरायसिस-
त्वचा संबंधी विकारों का उपचार करने में हल्दी कारगर घरेलू उपचार है। इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीसेप्टिक व एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सोरायसिस जैसी समस्या को भी ठीक कर सकते हैं। सोरायसिस में त्वचा पर पपड़ी जमने लगती है। इसके अलावा, हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं, जिस कारण यह सोरायसिस के कारण त्वचा पर हुए जख्मों को जल्द भर सकती है। साथ ही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है
कील-मुंहासों के लिए-
हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या को ठीक कर सकते हैं। यहां तक कि कील-मुंहासों का इलाज भी हल्दी से किया जा सकता है। यही कारण है कि भारत में सदियों से शादी से पहले दूल्हा और दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है। यह दाग-धब्बों को हल्का कर त्वचा को जवां और निखरा हुआ बनाती है। हल्दी कील-मुंहासों के कारण चेहरे पर आई सूजन व लाल निशानों को कम कर सकती है । इस प्रकार कील-मुंहासों के लिए हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।
सामग्री :
एक से दो चम्मच हल्दी पाउडर
आधा नींबू
बनाने की विधि :
नींबू के रस में हल्दी पाउडर को मिक्स करके अच्छी तरह पेस्ट बना लें।
फिर इसे चेहरे पर लगाकर करीब 30 मिनट के लिए सूखने दें।
जब यह सूख जाए, तो पानी से इसे धो लें।
कब-कब लगाएं :
आप इसे हर दूसरे दिन लगा सकते हैं।
प्रक्रिया नंबर-1
सामग्री :
एक चम्मच हल्दी पाउडर
चार कप पानी
शहद/नींबू (स्वादानुसार)
बनाने की विधि :
हल्दी पाउडर को पानी में मिक्स करके करीब 10 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें।
जब पानी सामान्य हो जाए, तो उसमें जरूरत के अनुसार शहद या नींबू डालकर चाय की तरह पिएं।
कब-कब करें :
आप ऐसा रोज कर सकते हैं।
प्रक्रिया नंबर-2
सामग्री :
तीन-चार चम्मच हल्दी पाउडर
हल्दी से दुगना पानी
बनाने की विधि :
हल्दी पाउडर व पानी को एकसाथ फ्राई पैन में डालकर धीमी आंच पर तब तक उबालें, जब तक कि गाढ़ा पेस्ट न बन जाए।
फिर जब पेस्ट ठंडा हो जाए, तो उसे स्टोर करके रख लें और जरूरत पड़ने पर लगाएं।
कब-कब लगाएं :
आप यह पेस्ट रोजाना प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं।
पिगमेंटेशन-
त्वचा में मेलानिन की मात्रा बढ़ने से डार्क स्पॉट व जगह-जगह पैच नजर आने लगते हैं। चिकित्सीय भाषा में इसे पिगमेंटेशन कहा जाता है। हल्दी में पाया जाने वाले करक्यूमिन इन डार्क स्पॉट को हटाकर त्वचा में निखार ला सकता है। वहीं, हल्दी को शहद के साथ मिलाकर प्रयोग करने से त्वचा में मॉइस्चराइजर बना रहता है।
सामग्री :
एक चम्मच हल्दी पाउडर
एक चम्मच शहद
बनाने की विधि :
इन दोनों सामग्रियों को आपस में मिक्स करके पेस्ट तैयार कर लें।
अब इसे प्रभावित जगह पर अच्छी तरह से लगाकर करीब 20 मिनट के लिए छोड़ दें।
जब पेस्ट सूख जाए, तो इसे हल्के गुनगुने पानी से धो लें और बाद में मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं।
कब-कब लगाएं :
इस पेस्ट को प्रतिदिन लगाया जा सकता है।
झुर्रियां-
हल्दी में पाए जाने वाले करक्यूमिन में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो शरीर से फ्री रेडिकल्स को खत्म करने का काम करते हैं। कुछ हद तक ये फ्री रेडिकल्स चेहर पर झुर्रियों का कारण बनते हैं । अगर आप हल्दी को योगर्ट के साथ इस्तेमाल करते हैं, तो झुर्रियों से आपको जल्द फायदा हो सकता है। झुर्रियों के लिए हल्दी का प्रयोग कैसे करना है, हम यहां उसकी विधि बता रहे हैं :
सामग्री :
¼ चम्मच हल्दी पाउडर
एक चम्मच योगर्ट
बनाने की विधि :
हल्दी और योगर्ट को एक बाउल में डालकर मिक्स कर लें।
फिर इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर करीब 20 मिनट के लिए सूखने दें।
इसके बाद पानी से चेहरे को धो लें।
कब-कब लगाएं :
करीब एक महीन तक हफ्ते में दो से तीन बार इस पेस्ट को लगाएं।
स्ट्रेच मार्क्स-
हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीऑक्सीडेंट के साथ-साथ त्वचा को साफ कर उसकी रंगत निखारने के गुण भी होते हैं । इसे नियमित रूप से उपयोग करने से प्रेग्नेंसी व प्रेग्नेंसी के बाद नजर आने वाले स्ट्रेच मार्क्स धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। कुछ हफ्तों तक इसे लगातार लगाने से स्ट्रेच मार्क्स खत्म भी हो सकते हैं।
सामग्री :
एक चम्मच हल्दी पाउडर
एक चम्मच योगर्ट
बनाने की विधि :
हल्दी को योगर्ट में मिक्स करके गाढ़ा पेस्ट बना लें।
फिर इसे स्ट्रेच मार्क्स वाली जगह पर लगाएं और 10-15 मिनट के लिए सूखने दें।
सूखने के बाद पानी से साफ कर लें और मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं।
कब-कब लगाएं :
अगर आप इसे हर दूसरे दिन लगाते हैं, तो जल्द अच्छे परिणाम नजर आएंगे।
फटी एड़ियों के लिए
हल्दी में एंटीबैक्टीरियल व एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जिस कारण ये फंगल इंफेक्शन पर प्रभावी तरीके से काम कर सकती है। इसलिए, आप फटी एड़ियों की समस्या के लिए हल्दी का प्रयोग कर सकते हैं।
सामग्री :
तीन चम्मच हल्दी पाउडर
नारियल तेल की कुछ बूंदें
बनाने की विधि :
हल्दी पाउडर और नारियल तेल को मिक्स करके पेस्ट बना लें।
अब इसे फटी एड़ियों पर लगाकर करीब 30 मिनट के लिए छोड़ दें।
कब-कब लगाएं :
जब तक एड़ियां ठीक न हो जाएं, आप इसे रोज लगा सकते हैं।
 एक्सफोलिएटर
हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी के साथ-साथ एक्सफोलिएट गुण भी होता है। चेहरे को एक्सफोलिएट करने के लिए घर में ही हल्दी का फेस पैक बनाया जा सकता है।
सामग्री :
दो चम्मच हल्दी पाउडर
चार चम्मच चने का आटा
चार-पांच चम्मच दूध/पानी
बनाने की विधि :
सबसे पहले तो चेहरे को पानी से अच्छी धोकर सुखा लें।
एक बाउल में सभी सामग्रियों को डालकर मिक्स कर लें, ताकि एक पेस्ट बन जाएं।
अब इस स्क्रब को चेहरे पर लगाएं और हल्के-हल्के हाथों से चेहरे की मालिश करें।
इसके बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें और बाद में मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं।
कब-कब लगाएं :
आप हफ्ते में एक या दो बार प्रयोग कर सकते हैं।
यहां हम विभिन्न तरीके बता रहे हैं, जिनके जरिए आप प्रतिदिन हल्दी का सेवन कर सकते हैं :
अगर आप शाम को स्नैक्स के तौर पर उबली हुई सब्जियां खाने के शौकिन हैं, तो उस पर चुटीक भर हल्दी डाल सकते हैं।
आप ग्रीन सलाद पर भी थोड़ी सी हल्दी डाल सकते हैं। इससे सलाद में पौष्टिक तत्व बढ़ सकते हैं।
अगर आप सूप पीते हैं, तो उसमें भी थोड़ी हल्दी मिक्स की जा सकती है।
स्मूदी में भी हल्दी को घोलकर सेवन किया जा सकता है।
हल्दी की चाय भी बना सकते हैं। इसमें स्वाद के लिए आप थोड़ा-सा शहद मिक्स कर सकते हैं।
आप खाना बनाते समय सब्जी या दाल में भी थोड़ी हल्दी का प्रयोग कर सकते हैं। इससे न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ता है, बल्कि पोषक तत्वों में भी इजाफा होता है।
आजकल विभिन्न हेयर व स्किन केयर प्रोडक्ट्स में भी हल्दी का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही टूथपेस्ट में हल्दी इस्तेमाल की जा रही है।

अखरोट खाने के स्वास्थ्य लाभ व नुकसान


अखरोट के फायदे जानने से पहले आपको बता दे की अखरोट खाने में दुसरे कड़वे फलो की तुलने में अमृत के समान होता है अगर बात करे करेले की जो स्वास्थ लाभो से तो भरपूर होता है पर खाने में एकदम कड़वा होता है इसके विपरीत अखरोट अच्छा लगने के साथ साथ अनेक औषधीय गुणों से भरपूर है। अखरोट का सेवन छोटे से लेकर बड़े हर वर्ग के लोगो के लिए फायदेमंद होता है। अखरोट तो सभी खाते है, लेकिन बहुत कम लोग है जिनको अखरोट के चमत्कारी गुणों के बारे में पता है। आज हम आपको अखरोट खाने के फायदे और नुकसान बताएँगे जिन्हें जानने के बाद आप अपनी सेहत को और अच्छा बनाकर अनेक बीमारियों से छुटकारा पा सकते है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि ड्राई फ्रूट्स सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। स्वस्थ आहार के साथ-साथ अगर आप अपनी दिनचर्या में ड्राईफ्रूट्स शामिल करते हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए अच्छा है। बादाम, किशमिश, खजूर व अखरोट के साथ-साथ कई ऐसे ड्राई फूट्स हैं, जो आपकी सेहत बनाए रखने में मदद करते हैं। फिलहाल हम बात करते हैं सिर्फ अखरोट की, जो कई गुणों का खजाना है।
अखरोट को अंग्रेजी में वॉलनट, तेलुगू में अकरूट काया, मलयालम में अक्रोथंदी, कन्नड़ में अक्रोटा, तमिल में अकरोट्टू, मराठी में अकरोड़ और गुजराती में अक्रोट कहा जाता है। विभिन्न भाषाओं में अखरोट के जितने नाम हैं, उसके फायदे भी उतने ही हैं। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम अखरोट खाने के फायदे बताएंगे
अखरोट के फायदे
अखरोट न सिर्फ सेहत, बल्कि त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। नीचे हम आपको पहले सेहत के लिए अखरोट के फायदे बताएंगे, उसके बाद बताएंगे कि यह त्वचा के लिए किस प्रकार लाभकारी है।
जानिए, सेहत को किस तरह से फायदा पहुंचाता है अखरोट।
दिल के स्वास्थ्य के लिए
अखरोट दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसमें प्रचुर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो आपकी हृदय प्रणाली के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा, यह भी पाया गया है कि जिन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, उनके लिए भी अखरोट लाभकारी होता है। आपको बता दें कि ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल के निर्माण में मदद करता है, जो हृदय के लिए फायदेमंद होता है
वजन कम करे
आपको जानकर हैरानी होगी कि अखरोट वजन कम करने में अहम भूमिका निभाता है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन व कैलोरी होती है, जो वजन को नियंत्रित रखने में मदद करती है। शोध में भी यह बात साबित हो चुकी है कि अखरोट का सेवन न सिर्फ वजन कम करता है, बल्कि उसे नियंत्रित भी रखता है
बालों पर अखरोट के फायदे
अखरोट में ओमेगा फैटी एसिड्स की मात्रा होती है जिनकी मदद से बालों के फॉलिकल्स (follicles) काफी मज़बूत होते हैं।
रोज़ाना अखरोट का सेवन करने से, अखरोट तेल से बालों से जुड़ी तमाम समस्याएं जैसे डैंड्रफ (dandruff), गंजापन और बालों का झड़ना आदि पूरी तरह दूर हो जाती हैं।
अखरोट तेल के निरंतर प्रयोग से बालों का रंग स्वास्थ्यकर एवं आकर्षक होता है। अखरोट में कलरिंग एजेंट (coloring agent) होते हैं जिनसे बालों में प्राकृतिक रंग आता है तथा वे स्वस्थ और अच्छे रूप से उगते हैं।गर्भावस्था
गर्भावस्था में अखरोट खाना भी फायदेमंद हो सकता है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड बच्चे के दिमागी विकास में मदद करता है। आप डॉक्टर की सलाह पर सही मात्रा में अखरोट का सेवन कर सकते हैं।
पुरुषों के लिए अखरोट लाभ
अखरोट खाने से स्पर्म काउंट बढ़ता हैं. जो व्यक्ति पिता बनने की चाहत रखते हैं उनके लिए अखरोट काफ़ी लाभकारी होता हैं।मर्दाना शक्ति वर्धक के रूप में इसका उपयोग करने के लिए आप इसे दूध में उबाल ले फिर मिश्री को पीसकर इसमें मिला ले फिर कुछ केसर की पतीयाँ इसमें डाले जब यह अच्छे से उबाल जाये तो इसे हल्का गुनगुना होने पर पी लें।
हड्डियों के लिए
अखरोट हड्डियों को मजबूत करने का भी काम करता है। इसमें अल्फा-लिनोलेनिक एसिड होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है। इसके अलावा, अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड सूजन को भी दूर करता है
खाली पेट अखरोट खाने के फायदे उम्र के प्रभाव का करें कम
शरीर में फ्री रेडिकल्स के कारण उम्र बढ़ने के कारण कई बदलाव नजर आने लगते है। जैसे त्वचा की झुर्रियां , पाचन की कमजोरी , आँखों की रौशनी में कमी , हड्डी की कमजोरी आदि। इसके अलावा भी कई प्रकार की शारीरिक समस्याएं हो सकती है। लीवर पर भी इसका प्रभाव पड़ता है जो शरीर की कई महत्त्वपूर्ण कार्य का केंद्र है। इन उम्र के प्रभावों को कम करने में एंटीऑक्सीडेंट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। Akhrot में पाये जाने वाले विशेष प्रकार के ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट उम्र के साथ होने वाले नुकसान से बचाने में सक्षम होते है। सुखद और लम्‍बे जीवन के लिए अखरोट का सेवन करना अच्‍छा रहता है।
मधुमेह मे उपयोगी 
अखरोट शरीर के ग्लूकोस के स्तर (glucose level) को नियंत्रित करने में आपकी सहायता करता है। अखरोट काफी मात्रा में पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (polyunsaturated fatty acid) से भरपूर होता है। अखरोट के गुण, ये फैटी एसिड्स गुर्दे में इन्सुलिन (insulin) का उत्पादन करने में मदद करते हैं। अखरोट खाने का तरीका, अखरोट मिनरल्स और फाइबर (minerals & fiber) से भी युक्त होता है जिससे कि ग्लूकोस के स्तर को तोड़ने में आपको सहायता मिलती है।
अखरोट के सेवन के लाभ उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करे
अखरोट में मौजूद एमिनो एसिड्स (amino acids) रक्तचाप को नियंत्रित करने में आपकी सहायता करते हैं। इसमें भी काले अखरोट रक्तचाप का स्तर कम करने में काफी अहम भूमिका निभाते हैं।
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए
अखरोट में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और आपको बीमारियों में बचाने में मदद करते हैं। इसलिए, खुद को बीमारियों से बचाने के लिए और तंदुरुस्त रहने के लिए अपनी रोजाना की डायट में अखरोट जरूर शामिल करें
मस्तिष्क के लिए
अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड न सिर्फ दिल, बल्कि मस्तिष्क के लिए भी फायदेमंद होता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें खाने से आपकी तंत्रिका प्रणाली ठीक तरह से काम करती है, जिससे स्मरणशक्ति में सुधार आता है
तनाव खत्म और बेहतर नींद
अखरोट का सेवन आपको तनाव से दूर कर बेहतर नींद भी प्रदान करता है। अखरोट में मेलाटोनिन होता है, जो बेहतर नींद लाने में मदद करता है
अखरोट का लाभ स्तन की समस्या को दूर करने में सहायक
अखरोट (Walnut) स्तन की विभिन्न गंभीर समस्याओं जैसे स्तन के कैंसर (breast cancer) के खतरे को कम करने में आपकी काफी सहायता करता है। ऐसा करने में एसेंशियल फैटी एसिड्स (essential fatty acids) आपकी काफी मदद करते हैं, जिनसे स्तन से जुड़ी समस्याओं की संभावनाओं को कम करने में मदद मिलती है।
अखरोट खाने के नुकसान-
आपको नट्स से एलर्जी है तो आपको अखरोट नही खाना चाहिए| क्योंकि ऐसा करने से आपको side effects जैसे स्किन rash, hives, गले मे जकड़न, साँस लेने मे दिक्कत आदि हो सकती है|
अखरोट मे कुछ तत्व ऐसे होते हैं, जो दवाइयों से प्रतिक्रिया कर सकते हैं या उन मेडिसिन्स का असर कम कर सकते हैं| इसलिए अगर आप दवाइयों का सेवन कर रहे है तो आपको डॉक्टर से पूछ कर ही इन्हें खाना चाहिए ताकि आपको कोई नुकसान ना हो|
काले अखरोट मे phylates पाए जाते हैं जो आयरन के अवशोषण को घटाकर आप मे आइरन डिफीशियेन्सी यानी खून की कमी (anemia) कर सकते हैं|
खाँसी मे अखरोट का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि ये शरीर मे पानी की कमी पैदा करते हैं (और पढ़े – खांसी का घरेलू उपचार, ड्राई कफ हो या वेट कफ)
अगर आप गर्भवती है तो इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से आपका वज़न बढ़ सकता है।

सोयाबीन खाने के फायदे और नुकसान

                          
प्रोटीन और कई पोषक तत्वों से भरपूर सोयाबीन और उसके व्यंजनों को आप मजेदार स्वाद के लिए जरूर खाते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सोयाबीन सेहत और सौंदर्य से जुड़े बेहतरीन फायदे भी दे सकता है।
सोयाबीन गुणों का खजाना हैं यह बात पूरी तरह सच हैं लेकिन हर एक चीज को उपयोग करने का एक तरीका होता हैं और अगर उसे सही तरीके से उपयोग ना किया जाये तो वह फायदे के साथ साथ नुकसान भी कर सकती हैं आईए यहाँ जाने सोयाबीन के फायदे उपयोग और नुकसान (Soybean benefits uses and side effects in Hindi) के बारे में। सोया प्रोटीन और आइसोप्लेवोंस से भरपूर डाइट होती हैं जिसके सेवन से हडडियों को कमजोर होने के खतरे से बचाया जा सकता है| सोयाबीन से बनी चीजो में आइसोप्लेबोंस नामक रसायन होता है जिससे महिलाओ को आस्टियोपोरेसिस के खतरे से बचाया जा सकता हैं|
यहाँ जाने सोयाबीन को उपयोग करने का सही तरीका क्या है।
सोयाबीन एक प्रकार का बीज होता हैं जिसको आप गैहू के साथ में पिसवाकर या भिगोकर खाने के काम में ले सकते है|
सोयाबीन को आप रात भिगोने के बाद उबाल के भी खाने में उपयोग ले सकते है।
गेहूँ के साथ भी पिसवाकर रोटियां बना के खा सकते हो सोयाबीन को पानी में भिगोकर पानी से निकालकर सुखाकर आटा पिसवाकर गेहूँ के आटे में भी मिलाकर तैयार कर खाया जा सकता है।
सोयाबीन खाने के फायदे
उच्च रक्तचाप में
सोयाबीन के फायदे अनेक है और अगर आप उच्च रक्तचाप ग्रसित हैं सोयाबीन उच्च रक्तचाप को कम करने में लाभदायक होता है इसके साथ साथ वो रक्तचाप को बढने भी नहीं देता है। रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए आप कम नमक के साथ भुना हुआ सोयाबीन खा सकते है नमक के साथ साथ आप काली र्मिच भी डाल के भी सेवन कर करते है सोयाबीन 5-6 प्रतिशत उच्च रक्तचाप को कम करता है। तले हुए सोयाबीन का सेवन यदि महिलाएं करे तो उनको उच्च रक्तचाप में निजात प्राप्त होता है।
एनीमिया में
एनीमिया यानी की शरीर में रक्त की कमी , और यह एक भयानक रोग है जिसका इलाज सोयाबीन में छुपा हुआ है | आप रोजाना सोयाबीन के तेल से बनी सब्जी का सेवन कीजिए या फिर इसके दूध का सेवन कीजिए जिससे आपके शरीर में रक्त की भरपूर मात्रा होगी और आपको एनीमिया से मुक्ति मिलेगी |गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भावस्था में भी महिलाओं को सोयाबीन सेवन करना चाहिए| सोयाबीन में आयरन की मात्रा पायी जाती हैं यह खून बढ़ाने में भी सहायक होता हैं! सोयाबीन से बनी चीजों में आईसोप्लेबोंस नामक रसायन होता है जिससे महिलाओं को अस्टियोपोरेसिस के खतरे से बचाया जा सकता हैं|
मासिक धर्म में
महिलाओं के मासिक धर्म बन्द होने से शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा कम होने लगती है जिससे घुटनों में दर्द पेट का भारी होना कमर में दर्द रहने लगता है| इस स्थिति में महिलाओं के लिए सोयाबीन बहुत ही लाभकारी होता है। कुछ समय तक सोयाबीन का उपयोग करने से महिलाओं की समस्याएं कम होती है। इसके साथ सोयाबीन का सेवन मासिक धर्म में होने वाले सूजन, कमर में दर्द पेट में दर्द जैसी समस्याओं में निजात दिलाता है।
हड्डियों की मजबूती
सोयाबीन हड्ड‍ियों के लिए लाभदायक है। यह हड्ड‍ियों को पोषण देता है जिससे वे कमजोर नहीं होती और हड्डी टूटने का खतरा भी कम होता है। इसका सेवन हड्ड‍ियों की सघनता को बढ़ाने में सहायक है।
सोयाबीन में मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम हमारे शरीर में जाकर हमारी हड्डियों की मजबूत बनाता है | अगर आपके शरीर में कैल्शियम को कमी है या फिर आपकी हड्डियाँ कमजोर है तो आप इसका सेवन रोजाना करे जिससे आराम मिलेगा |
सोयाबीन के तेल के फायदे
Soybean सोयाबीन के खाने फायदे से तो अब आप अच्छी तरह वाकिफ हो ही चुके होगें। सोयाबीन से बने तेल के बारे में ज्यादातर घरों में सब्जी पराठें आदि बनाने में सोयाबीन का तेल उपयोग में लिया जाता है यह हदृय रोगियों के साथ साथ यह सभी के लिए भी लाभदायक है। सोयाबीन का तेल सोयाबीन के बीजों से निकाला जाता है। सोयाबीन का तेल अन्य खाद्य तेलों की उपेक्षा हमारे शरीर के लिए ज्यादा लाभकारी होता है। चिकित्सक भी आजकल सोयाबीन से बने तेल का ही उपयोग करने की सलाह देत है। हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने में मानसिक तनाव को कम करने में लाभदायक है तथा नियमित सेवन से याददाश्त बढाने में मदद मिलती है।
मधुमेह के रोगियों को सोयाबीन के तेल से बनी चीजों का ही सेवन अत्यधिक लाभदायक है। सोयाबीन के तेल में विटामिन ई अधिक पाया जाता है। हम गर्मी में धूप में बाहर निकलते है धूप की तेज किरण हमारी त्वचा में जलन पैदा करती है सोयाबीन के तेल उपयोग करने से त्वचा की जलन से छूटकारा मिलता है।
गठिया रोग
Soybean सोयाबीन से बना दूध व रोटियां गठिया रोग में भी लाभदायक होता हैं|
मधुमेह रोग में
मुधमेह रोगियों को सोयाबीन का सेवन करने से मूत्र सम्बन्धित परेशानी से निजात मिलता है मधुमेह रोगी को सोयाबीन से बनी रोटी आदि का सेवन करना लाभदायक है।
अंकुरित सोयाबीन
सोयाबीन को अंकुरित करके खाना भी हमारी सेहत के लिए लाभदायक होता है! खून को बढ़ाने पेट की बीमारियों को ठीक करने हमारे शरीर में आयरन की मात्रा को बढ़ाने व वजन बढाने में भी अंकुरित सोयाबीन फायदेमंद होता है।
शारीरिक विकास में
अगर आपका शारीरिक विकास नहीं हो रहा है या नाखून बाल आदि नहीं बढ रहे है तो सोयाबीन का सेवन इनके विकास में भी सहायक है। सोयाबीन मिर्गी याददाश्त बढ़ाने व दिमागी कमजोरी को दूर करता है।
सोयाबीन खाने के नुकसान
हर चीज की अति बुरी होती है सोयाबीन का ज्यादा उपयोग भी हमारे शरीर के लिए लाभदायक होने के साथ साथ हानिकारक भी होता है। सोयाबीन खाने के लाभ के साथ साथ सोयाबीन खाने के कुछ नुकसान भी होते है आईए अब हम सोयाबीन के नुकसान के बारे में भी जाने|
दिल की बिमारी वाले लोगो को सोयाबीन का उपयोग कम करना चाहिए या सीमित मात्रा में करना चाहिए।
सोयाबीन में टांस फैट होता है जो की हाई कालेस्ट्राल और दिल की बीमारियों को बढ़ाता है।
सोयाबीन के अधिक सेवन से शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है।
यदि आप फैमली प्लानिंग करने के बारे में सोच रहे है या फैमली प्लानिंग करना चाहते है तो सोयाबीन के सेवन से बचे क्योंकि सोयाबीन स्पर्म की संख्या को कम करता है।
सोयाबीन  की ज्यादा मात्रा से सेक्स प्रॉब्लम हो जाती है और उनके हार्मोन, लिबिडो पावर, स्‍पर्म और प्रजनन पॉवर का स्तर प्रभावित हो सकता है।
गुणों का खजाना होने के साथ साथ हानिकारक भी होता है। सोयाबीन के अधिक सेवन वजन भी बढ़ता है व अधिक सेवन से किडनी की समस्या वाले लोगो को इसके सेवन से बचना चाहिए|

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


उड़द की दाल के फायदे और नुकसान

                                                 

क्या आपको पता है उरद की दाल को दालों की महारानी क्यों कहा जाता है क्योंकि उड़द को एक अत्यंत पौष्टिक दाल के रूप में जाना जाता है छिलकों वाली उड़द की दाल में विटामिन, खनिज लवण तो खूब पाए जाते हैं और कोलेस्ट्रॉल नगण्य मात्रा में होता है|
उड़द दाल के फायदे और नुकसान जानना हमारे लिए बहुत ही आवश्‍यक है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि भारत जैसे देश में उड़द दाल का खाद्य आहार के रूप में बहुत अधिक उपयोग होता है। भारतीय व्‍यंजनों में उड़द दाल का अपना एक विशेष स्‍थान है। यह बहुत ही पौष्टिक भी होती है जो विभिन्‍न प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य गुणों से भरपूर है। उड़द दाल का उपयोग मधुमेह, हृदय स्‍वास्‍थ्‍य, दस्‍त, त्‍वचा समस्‍याओं आदि के उपचार में किया जाता है। आइए विस्‍तार जाने उड़द दाल के फायदे, नुकसान और उड़द के उपयोग के बारे में।
ब्‍लैक ग्राम (उड़द दाल) जिसे स्प्लिट ब्‍लैक ग्राम भी कहा जाता है। इसका वनस्‍पतिक नाम विग्ना मुन्गो है जो भारतीय व्‍यंजनों में प्रसिद्ध मसूरों में से एक है। इसमें बहुत से पोषक तत्‍व, विटामिन और खनिज पदार्थ अच्‍छी मात्रा में होते हैं जो हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। उड़द दाल को गर्भवती महिलाओं के लिए एक आदर्श खाद्य पदार्थ के रूप में जाना जाता है। औषधीय गुण होने के कारण उड़द दाल का उपयोग न केवल खाद्य आहार के रूप में बल्कि आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में भी उपयोग किया जाता है। आइए जाने उड़द दाल में मौजूद पोषक तत्‍व क्‍या हैं।
उड़द दाल के पोषक तत्‍व
विशेष रूप स्‍वादिष्टि पकवान बनाने के लिए उड़द दाल का उपयोग किया जाता है। उड़द दाल को इसकी पौष्टिकता के आधार पर साबूत, छिल्‍के वाली दाल और बिना छिल्‍के वाली दाल के रूप में उपयोग किया जाता है। विभिन्‍न प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाने वाले उड़द दाल में आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, मैग्‍नीशियम और पोटेशियम की अच्‍छी मात्रा होती है।
उड़द दाल के फायदे और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ
औषधीय और उपचारात्‍मक गुणों के कारण उड़द दाल को विभिन्‍न आयुर्वेदिक दवाओं के लिए बड़ी मात्रा में उपयोग किया जाता है। उड़द दाल का उपभोग कर आप अपने पाचन स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं क्‍योंकि यह फाइबर से भरी हुई होती है। साथ ही यह कब्‍ज और पेट की अन्‍य समस्‍याओं को भी दूर करने में मदद करती है। इसके अलावा यह हड्डियों, मधुमेह, मुंहासे जैसी समस्‍या का भी उपचार करने में सहायक होती है। आइए जाने उड़द दाल खाने के फायदे और उपयोग क्‍या हैं।
उरद की दाल के गुण त्‍वचा को स्‍वस्‍थ्‍य रखे
आप अपनी त्‍वचा को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए कई प्रकार की रासायनिक दवाओं और उत्‍पादों का उपयोग करते हैं। संभवत: इनके कुछ न कुछ दुष्‍प्रभाव भी आपको हो सकते हैं। लेकिन यदि आप उड़द की दाल का नियमित सेवन करते हैं तो यह आपके संपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद हो सकती है। उड़द दाल में खनिजों और विटामिन की अच्‍छी मात्रा होती है जो आपकी त्‍वचा की जलन और अन्‍य समस्‍याओं को दूर कर सकती है। इसके अलावा उड़द दाल का सेवन कर आप अपने चेहरे में डार्क स्‍पोट को भी दूर कर सकते हैं। उड़द दाल आपके शरीर और त्‍वचा में रक्‍त प्रवाह को बढ़ाता है जिससे पर्याप्‍त पोषण और ऊर्जा आपके चेहरे की त्‍वचा को चमकदार बनाते हैं।
काली उड़द दाल का उपयोग ऊर्जा शक्ति बढ़ाए
आप अपनी शारीरिक क्षमता को बढ़ाने के लिए काली उड़द दाल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। उड़द दाल में लौह सामग्री उच्‍च मात्रा में होती है जो आपके शरीर में समग्र ऊर्जा के स्‍तर को बढ़ाने में सहायक होती है। आयरन आपके शरीर में लाल रक्‍त कोशिकाओं के उत्‍पादन को बढ़ाता है जो कि आपके पूरे शरीर में ऑक्‍सीजन पहुंचाने में मदद करते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म के कारण खून की कमी हो सकती है। इसलिए गर्भवती और सामान्‍य महिलाओं को नियमित रूप से उड़द दाल का सेवन करना चाहिए। उड़द का नियमित सेवन ऊर्जा को बढ़ावा देता है।
सिरदर्द में फायदेमंद उड़द दाल 
अगर आपको काम के तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी के वजह से सिरदर्द की शिकायत रहती है तो उड़द का घरेलू उपाय बहुत लाभकारी सिद्ध होगा। 50 ग्राम उड़द को 100 मिली दूध में पकाकर उसमें घी डालकर खाने से वात के कारण जो सिर दर्द होता है उससे राहत मिलती है। उरद दाल के फायदे यौन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए
जिन लोगों को यौन स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित कामेच्‍छा में कमी होती है उनके लिए उड़द दाल बहुत ही फायदेमंद होती है। उड़द की दाल को प्राकृतिक कामोद्दीपक के रूप में माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि उड़द यौन क्षमता की कमी का इलाज कर सकती है। यौन कमजोरी को दूर करने के लिए पानी में उड़द दाल को 5-6 घंटों तक भिगो दें और फिर इस दाल को घी में फ्राई करें। नियमित रूप से घी में फ्राई उड़द का सेवन यौन जीवन को बढ़ाने में मदद करता है।
रूसी से छुटकारा दिलाये उड़द दाल
उड़द को जलाकर उसकी भस्म बनाकर, उसमें चतुर्थांश अर्कदूध तथा सरसों तेल मिलाकर लेप बना लें। इसको सिर पर लगाने से सिर के रोग, गंजापन, बालों की सफेदी आदि कम होती है।
उड़द दाल खाने के फायदे मूत्रवर्धक के लिए
ब्‍लैक ग्राम का एक अन्‍य लाभ यह है कि यह एक मूत्रवर्धक है। इसका मतलब यह है कि यह पेशाब को उत्‍तेजित कर आपके शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को बाहर करने में मदद करता है। नियमित रूप से उड़द का सेवन करने पर यह आपके गुर्दे में संग्रहित हानिकारक विषाक्‍त पदार्थ, यूरिक एसिड, अतिरिक्‍त पानी, अतिरिक्‍त वसा और आपके शरीर में मौजूद अतिरिक्‍त कैल्शियम जो पथरी का कारण बनती है। इन्‍हें बाहर करने में मदद करता है। इसलिए आपको अपने शरीर के अच्‍छे विकास और स्‍वस्‍थ्‍य बनाए रखने के लिए नियमित रूप से उड़द दाल का सेवन करना चाहिए।
नकसीर में फायदेमंद उड़द दाल
कुछ लोगों को अत्यधिक गर्मी या ठंड के कारण भी नाक से खून बहने की समस्या होती है। उड़द दाल से बना घरेलू उपाय नाक से खून बहना कम करने में काम आता है। उड़द के आटे का तालू पर लेप करने से नाक से खून (नकसीर) आना कम होता है।
उड़द की दाल के लड्डू के फायदे मधुमेह से बचाए
डायबिटीज एक घातक समस्‍या है जो कई बीमारियों का प्रमुख कारण मानी जाती है। मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण यह है कि आप अपने द्वारा लिये जाने वाले आहार पर ध्‍यान दें। मधुमेह की समस्‍या अक्‍सर अनियंत्रित खान-पान के कारण और अधिक बढ़ सकती है। उड़द दाल का सेवन आपको मधुमेह के प्रभाव से बचा सकता है क्‍योंकि इसमें फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है। फाइबर की अच्‍छी मात्रा आपके पाचन को बढ़ावा देती है और पाचन तंत्र द्वारा अवशोषित पोषक तत्‍वों की मात्रा को विनियमित करने में मदद करती है। यह आपके शरीर में शर्करा और ग्‍लूकोज के स्‍तर को भी नियंत्रित रखती है जिससे आपके मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है।
लकवे में फायदेमंद उड़द दाल
उड़द दाल का औषधीय गुण लकवे के परेशानी से राहत दिलाने में फायदेमंद होता है।
उड़द, बला, केवाँच, कत्तृण, रास्ना, अश्वगंधा तथा एरण्ड को समान मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बनाएं फिर 25-30 मिली काढ़े में हींग तथा सेंधानमक मिलाकर पिएं तथा भोजन करने के 12 घण्टे बाद जिस तरफ में दर्द है उस तरफ के नाक के छेद द्वारा 5-10 मिली की मात्रा में ग्रहण करने से लकवा, गर्दन की जकड़ाहट, कान का दर्द (कर्णशूल) एवं अर्दित रोग (Facial paralysis) में 1 सप्ताह में आराम मिलने लगता है।
समान मात्रा में उड़द, अतिविषा, कपिकच्छु, एरण्ड, रास्ना, सौंफ तथा सेंधानमक के पेस्ट में चार गुना तेल, सोलह गुना उड़द तथा बला का काढ़ा मिलाकर विधिवत् तेल पकाकर प्रयोग करने से पक्षाघात या लकवे में लाभ होता है।
उड़द के 20-25 मिली जूस में 500 मिग्रा सोंठ चूर्ण मिलाकर पिलाने से पक्षाघात या लकवे में लाभ होता है।
उड़द दाल के लाभकारी गुण दर्द को कम करे
आयुर्वेद उपचार विधि में लोगों के दर्द और सूजन को दूर करने के लिए उड़द का व्‍यापक उपयोग किया जाता है। उड़द में बड़ी मात्रा में विटामिन और खनिज पदार्थ मौजूद रहते हैं जो चयापचय को बढ़ावा देते हैं। इसका नियमित सेवन करने से यह ऑक्‍सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद करता है। आप उड़द से बने पेस्‍ट का इस्‍तेमाल सूजन से प्रभावित क्षेत्र में कर सकते हैं। यह सूजन और दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है।
जोड़ों के दर्द में फायदेमंद उड़द दाल 
अक्सर उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में दर्द होने की परेशानी शुरू हो जाती है लेकिन उड़द दाल का सेवन करने से इससे आराम मिलता है।
प्रतिदिन उड़द, कपिकच्छु, एरण्ड तथा बलामूल से बने 10-20 मिली काढ़ा में हींग तथा सेंधा नमक मिलाकर पीने से वात की बीमारी कम होती है।
सेंधानमक एवं उड़द के काढ़े को भोजन के बाद पीने से अंगों की जकड़ाहट तथा सिरदर्द कम होता है।
माष तेल, बृहन्माष तेल तथा महामाष तेल का 1-2 बूंद नस्य लेने से (नाक में डालने पर) या मालिश आदि विविध-प्रकार से बाहरी एवं भीतरी प्रयोग करने से वात संबंधी रोग से राहत मिलती है।
माषादि तेल का नस्य लेने से या स्नान करने से ग्रीवास्तम्भ, गर्दन की जकड़ाहट, हाथ का दर्द, दौरे पड़ना, हाथ पैरों का कंपन, सिर का हिलना, तथा अन्य वात की बीमारियों में फायदेमंद होता है।
उड़द के 20-25 मिली जूस में एरण्ड छाल को पकाकर, छानकर पिलाने से गठिया में लाभ होता है।
उरद की दाल के फायदे दिल के लिए
कार्डियोवैस्‍कुलर स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले सारे गुण उड़द दाल में मौजूद होते हैं। उड़द दाल में फाइबर, मैग्‍नीशियम और पोटेशियम की अच्छी मात्रा होती है जो हमारे हृदय स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। उड़द दाल हमारे शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल को नियंत्रित करने और एथेरोस्‍क्‍लेरोसिस को रोकने में मदद करते हैं जो हमारे हृदय और रक्‍तवाहिकाओं संबंधी स्‍वास्‍थ्‍य को बढावा देते हैं। उड़द में मौजूद पोटेशियम आपके शरीर की रक्‍त परिसंचरण को स्‍वस्‍थ्‍य रखता है और आपकी धमनीयों की आंतरिक परत को नुकसान से बचाता है। इस तरह यह दिल की समस्‍याओं को कम करने में सहायक होती है।
अल्सर में फायदेमंद उड़द दाल 
कभी-कभी अल्सर का घाव सूखने में बहुत देर लगता है या फिर सूखने पर पास ही दूसरा घाव निकल आता है, ऐसे में उड़द की दाल का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद होता है। उड़द को पीसकर घाव/ व्रण के ऊपर बांधने से पीब निकल जाता है तथा घाव ठीक हो जाता है।
अंकुरित उड़द के फायदे पाचन के लिए
खराब पाचन आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए गंभीर हो सकता है। पेट की खराबी कई बीमारियो को जन्‍म दे सकती है। उड़द दाल फाइबर में समृद्ध है जिसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही प्रकार के फाइबर मौजूद रहते हैं। इस कारण उड़द का नियमित सेवन हमारे पाचन को ठीक करने में मदद करता है। यदि आप दस्‍त, कब्‍ज, पेट की ऐंठन या सूजन से परेशान हैं तो इन समस्‍याओं से निजात पाने का सबसे अच्‍छा तरीका उड़द है। आप अपने आहार में उड़द को शामिल करें। इसके अलावा उड़द दाल वबासीर, पेट के दर्द को ठीक करने के साथ ही आपके यृकत स्‍वास्‍थ्‍य को भी बढ़ाता है।

स्पर्म काउन्ट बढ़ाने में मददगार उड़द दाल 

आजकल की जीवनशैली और आहार का बुरा असर सेक्स लाइफ पर पड़ रहा है जिसके कारण सेक्स संबंधी समस्याएं होने लगी हैं। स्पर्म काउन्ट बढ़ाने के लिए उड़द दाल का इस तरह से सेवन करने पर जल्दी लाभ मिलता है।
साठी चावल के भात में घी मिलाकर, उड़द जूस के साथ सेवन करने के बाद दूध पीने से वीर्य की वृद्धि तथा वीर्य संबंधी रोगों के उपचार में सहायता मिलती है।
उड़द की दाल को दूध में पकाकर, घी से छौंक कर सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है।
समान मात्रा में उड़द, विदारीकन्द तथा सफेद गुञ्जा के 5 ग्राम चूर्ण में मधु एवं घी मिलाकर सेवन करने के बाद दूध पीने से वीर्य की वृद्धि होती है।
उड़द एवं केवाँच फल की खीर बनाकर उसमें घी, मधु एवं शर्करा मिलाकर सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है।
उड़द की दाल की खीर खाने के फायदे ह‍ड्डीयों के मजबूत करे
जिन लोगों को हड्डीयों की समस्‍या या संभावना होती है उनके लिए उड़द दाल बहुत फायदेमंद आहार माना जाता है। उड़द दाल में मैग्‍नीशियम, आयरन, फॉस्‍फोरस, कैल्शियम और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज अच्‍छी मात्रा में होते हैं। ये खनिज पदार्थ हड्डीयों के घनत्‍व में सुधार कर उन्‍हें मजबूत बनाते हैं। अक्‍सर बुजुर्ग व्‍यक्तियों और 40 वर्ष से अधिक उम्र वाली महिलाएं कमजोर हड्डियों की समस्‍या से ग्रसित रहती हैं। ऐसी स्थिति में उड़द दाल का नियमित सेवन कर हड्डीयों से संबंधित समस्‍याओं से बचा जा सकता है। आप इसके लिए उड़द दाल से बनने बाले विभिन्‍न व्‍यंजनों का सेवन कर सकते हैं।
नुकसान-

पौष्टिक गुणों से भरपूर उड़द हमें कई प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाती है। लेकिन यदि अधिक मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो यह हमें नुकसान भी पहुंचा सकती है। अधिक मात्रा में इसका सेवन शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को बढ़ाता है। परिणामस्‍वरूप यह गुर्दे में कैल्फिकेशन पत्‍थरों को उत्‍तेजित कर सकता है। इसलिए उड़द दाल का अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन निम्‍न परेशानियों को बढ़ा सकता है।
गुर्दे के पत्‍थर से ग्रसित लोगों द्वारा उड़द की दाल का बहुत ही कम मात्रा में सेवन करना चाहिए।
गल्‍स्‍टोन या गठिया पीड़ित लोगों के लिए उड़द की अधिक मात्रा खतरा बढ़ा सकती है।
यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो उड़द की उचित खुराक के लिए अपने डॉक्‍टर से सलाह लेना फायदेमंद होगा।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


कुर्सी के व्यायाम (चेयर एक्सरसाइज)



क्या आपको पता है कि कुर्सी न सिर्फ बैठने के लिए बल्कि आपको फिट रखने के काम में भी आ सकती है। चौंकिये मत जनाब! अभी तक आपने कुर्सी पर लगातार बैठने के नुकसानों के बारे में सुना होगा, लेकिन हम आपको कुर्सी की मदद से किये जाने वाले कुछ ऐसे व्यायाम बता रहे हैं, जिन्हे कर आप फिट एंड फाइन रह सकते हैं।
बैठकर करें चेस्ट प्रेस

कुर्सी पर चेस्ट प्रेस करने के लिए पहले उस पर सीधा बैठें। अब एक्सरसाइज बैंड को अपनी पीठ पर लपेटें और बैंड के दोनों कोनों को हाथों में पकड़ते हुए अपने हाथों को बगलों के ठीक नीचे रख लें। अब अपने हाथों को तब तक बाहर की ओर खींचे जब तक कि आपकी कोहनी बिल्कुल सीधी न हो जाए। अब धीरे से अपने हाथों को अंदर की ओर लाएं जब तक कि आपके हाथ कांखों के ठीक नीचे वापस पहले वाली मुद्रा में न आ जाएं।


चेयर लेग प्रेस

चेयर लेग प्रेस करने के लिए एक कुर्सी पर सीधा बैठ जाएं। अब अपने एक पैर पर व्यायाम बैंड को लपेटें और बैंड के दोनों कोनों को हाथों में पकड़ लें। अब अपने पैर को आराम से बाहर की ओर खींचे जब तक आपका घुटना पूरी तरह सीधा न हो जाए (ध्यान रहे कि अपने घुटनों के बीच की दूरी को बनाए रखें वरना चोट भी लग सकती है)। इसके बाद धीरे-धीरे अपने पैर को वापस पहली स्थिति में लाएं (इस दौरान बैंड़ पर अपनी पकड़ बनाए रखें)। ठीक यही अपने दूसरे पैर के साथ भी दोहराएं।

बाइसेप्स कर्ल

चेयर बाइसेप्स कर्ल करने के लिए एक कुर्सी पर सीधा बैठें और अपने पैरों को साधा कर सामने जमीन पर रखें (आपकी जांघों जमीन से समानांतर-रेखा पर हों)। अब एक्सरसाइज बैंड को अपने दोनों पैरों के नीचे रखें और बैंड के दोनों कोनों को अपने हाथों में पकड़ें। इसके बाद अपने हाथों को सीधा रखें और अपनी कोहनी को मोड़ते हुए अपने हाथों को कंधों तक लाएं। फिर अपनी कोहनी को सीधा रखते हुए धीरे से अपने हाथों को नीचे लाएं, जब तक आपके हाथ आपकी जांघों से न छू जाएं। इसके लिए आप बैंड की जगह हल्के डम्बल भी ले सकते हैं।

एक्टिव आर्म्स

कुर्सी पर एक्टिव आर्म्स एक्सरसाइज करने के लिए उस पर सीधे बैठ जाएं। अब बाजुओं को कोहनी से मोड़ते हुए छाती के पास लाएं और दोनों हथेलियों को मिला लें। इसके बाद अपनी एक हथेली से दूसरी पर दबाव डालते हुए कलाई को पीछे की तरफ मोड़ें। अब दूसरी तरफ से भी इस प्रक्रिया को दोहराएं।
क्रन्चस विध चेयर

कुर्सी पर क्रन्चस करने के लिए एक कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं। अब अपनी बाजुओं में बाजू डालकर आराम से बैठें और अपने कंधों को कुर्सी से सटाते हुए थोड़ा पीछे की ओर झुकें। कुछ सेकंड तक इस पोजीशन में रहें (ध्यान रहे कि इस दौरान आप लगातार गहरी सांस लेते रहें) और इसके बाद आराम से वापस पहले वाली मुद्रा में आ जाएं।
सीटड रो

कुर्सी पर सीटड़ रो करने के लिए उस पर सीधा बैठ जाएं। अब अपने घुटनों को मोड़े और अपने पैरों को जमीन से समानांतर सीधा कर लें। इसके बाद अपने पैरों मे एक्सरसाइज बैंड फंसाकर उन्हें सामने की ओर थोड़ा खींचे। अब अपने हाथों को पीछे की ओर बैन्ड़-आर्म रोइंग की स्थिति में खींचे (ऐसे में ध्यान रखें कि पीछे से कंधे एक दूसरे को छूने की कोशिश करते रहें)। अब धीरे से अपने हाथों को वापस पुरानी मुद्रा में ले आएं।
वेस्ट स्ट्रेच ऑन चेयर

इसे करने के लिए कुर्सी पर साधे बैठें और बाजुओं को सिर से ऊपर की ओर उठाते हुए अपने कूल्हे पर रखें। अब शरीर के ऊपरी भाग को आराम से एक तरफ घुमाएं और फिर इसकी विपरीत दिशा में घुमाएं। इसे दिन में कई बार करें। ध्यान रखें कि इसे करते समय कुर्सी पूरी तरह स्थिर हो, पहिए वाली कुर्सी पर ये एक्सरसाइज कतई न करें।
टेंशन रिलीज एक्सरसाइज


तनाव और थकान का असर अक्सर कंधों में दर्द के रूप में देखने को मिलता है। इससे बचने के लिए एक कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं, कंधों को कान की सीध में ऊपर की ओर उठाएं और हाथओं को बिल्कुल सीधा कर लें। थोड़ी देर तक ऐसे ही रहें और फिर सामान्य स्थिति में आ जाएं और फिर दोबारा यही प्रक्रिया दोहराएं।
बैक ट्विस्ट

बैक ट्विस्ट करने के लिए कुर्सी पर सीधे होकर बैठ जाएं। और फिर अपने बाएं बाजुओं को बाएं कूल्हे की तरफ रख लें, ध्यान रहे कि हथेली सीट पर नीचे की तरफ रहें। अब थोड़ा पीछे की ओर मुड़ें और थोड़ी देर तक इसी स्थिति में रहें। अब इसे क्रिया को दूसरी तरफ से भी दोहराएं।

एक सप्ताह में 4 किलो वजन कम करने का तरीका



यदि आप एक सप्ताह में 4 किलो वजन कम करना चाहते हैं तो आपको एक प्रभावी योजना का पालन करने की आवश्यकता है। आज के समय में सभी लोग जो मोटापे और अधिक वजन से परेशान हैं वो अपने वजन को कम करने के लिए कई प्रकार के व्यायाम और खाना में भी बदलाव करते हैं, फिर भी कुछ लोग अपने वजन को कम नहीं कर पाते हैं। दिन भर ऑफिस में कार्य करते करते और शारीरिक परिश्रम ना करने के कारण लोगों का वजन बढ़ने लगता है। आइये वजन कम करने लिए कुछ सरल उपाय को विस्तार से जानते हैं।
जी हाँ एक सप्ताह में 4 किलो वजन कम करना निश्चित रूप से संभव है। वसा के प्रत्येक पाउंड को जलाने के लिए आवश्यक कैलोरी की कमी होना आवश्यक हैं। केवल एक सप्ताह में शुद्ध शरीर यानि अतिरिक्त वसा मुक्त शरीर में 4 किलो वसा को आसानी से जलाना संभव नहीं है। यह आंशिक रूप से सही है क्योंकि यह योजना आपके इंसुलिन के स्तर को कम करती है और आपके शरीर को संग्रहीत कार्ब्स से छुटकारा दिलाती है, जो पानी को बांधती है।
हालाँकि आपका शरीर लगभग 300-500 ग्राम कार्ब्स को केवल ग्लाइकोजन के रूप में ही संग्रहीत कर सकता है, आपके शरीर में संग्रहित ग्लाइकोजन पानी में लगभग तीन गुना होता है।
इंसुलिन का स्तर कम होने से आपके गुर्दे अतिरिक्त सोडियम बाहर निकाल देंगे, जिससे पानी की कमी हो सकती है। शरीर के वसा और पानी के वजन में कमी के साथ, आप पाचन तंत्र में आंतों में पड़ा अतिरिक्त भोजन, बिना पचे भोजन और फाइबर के बाहर निकल जानें के कारण भी अपना वजन कम कर सकते हैं।
यदि आप जल्दी से अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे होते हैं तो यह संपूर्ण खाद्य (Whole Foods) पदार्थों पर आधारित एक साधारण आहार खाना आपके के लिए सहायक हो सकता है। ये खाद्य पदार्थ बहुत अधिक पेट भरने वाले होते हैं, और बहुत अधिक भूख लगने के बिना कम कैलोरी खाने के लिए आसान बनाते हैं। पूरे सप्ताह में आपको ज्यादातर पूरे (Whole) एकल-घटक खाद्य पदार्थों को खाना सुनिश्चित करना चाहिए। हमेशा उन खाद्य पदार्थों से बचें जो अत्यधिक साफ़ किये गए होते हैं। ज्यादातर लीन प्रोटीन  और लो-कार्ब सब्जियों कोखाने से आप बहुत सारी कैलोरी प्राप्त नहीं करते हैं इसलिए एक सप्ताह में 4 किलो वजन कम करने के लिए आप इसका सेवन कर सकते है।
वजन कम करने के लिए अपने आहार में कैलोरी का सेवन कम करना सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। क्योंकि यदि आप खर्च से कम कैलोरी नहीं खा रहे हैं तो आप आपके शरीर में वसा को कम नहीं कर पायेगें। यहाँ कैलोरी की मात्रा कम करने के कुछ सरल उपाय दिए गए हैं
आपके द्वारा खाई गई कैलोरी का गणना करें, अपने द्वारा खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों को तौलें (Weigh)। कैलोरी और पोषक तत्वों की मात्रा पर नज़र रखने के लिए एक कैलोरी गिनती उपकरण का उपयोग करें।
सभी स्नैक्स को खाना कम करें और रात के खाने के बाद कुछ भी न खाएं।
वजन कम करने के लिए ​​मसालों और सॉस (sauces) को अपने भोजन से हटा दें।
यदि आप कुछ ही दिन में अपना कम करना चाहते हैं तो सब्जियों का सेवन अधिक करें और सप्ताह में स्टार्च युक्त कार्ब्स और अतिरिक्त वसा को सीमित करें।
वजन कम करने के लिए लो-फैट प्रोटीन चुनें, जैसे चिकन और मछली।
अधिक कैलोरी की जगह शून्य-कैलोरी पेय, चाय या कॉफी का विकल्प चुनें। यदि आप उन्हें भोजन के रूप में लेते हैं तो प्रोटीन शेक ठीक है।


आप कुछ ही दिनों के लिए कम कार्ब का सेवन करके कई किलो वजन को कम कर सकते हैं। वास्तव में बहुत सारे शोधों ने दिखाया है कि कम कार्ब आहार वजन कम करने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक बहुत प्रभावी तरीका है। कार्ब सेवन में कुछ समय के लिए कमी भी पानी के वजन और सूजन को कम कर सकती है। यही कारण है कि कम कार्ब का सेवन करने वाले लोग अक्सर आहार शुरू करने के बाद अगले दिन सुबह-सुबह अपने वजन में अंतर देखते हैं। इसके अतिरिक्त आप प्रोटीन का भरपूर आहार सेवन करें, यह आपके चयापचय
को बढ़ावा देते हुए आपकी भूख को और भी कम करने में मदद कर सकता है। जिससे आप एक सप्ताह में 4 किलो वजन कम कर पायेगें।
आंतरायिक यानि रुक रुक कर भोजन करना वसा कम करने के लिए एक प्रभावी और सिद्ध उपाय है। यह आपको अपने कैलोरी सेवन को कम करने के लिए मजबूर करता है, क्योंकि आप अपने खाने को कुछ समय तक सीमित कर रहे हैं। इसके कई अलग-अलग प्रोटोकॉल (protocols) हैं, जैसे कि 8 घंटे की फीडिंग विंडो (feeding window) के साथ 16 घंटे का उपवास या 4 घंटे की फीडिंग विंडो के साथ 20 घंटे का उपवास करें। यदि आप व्यायाम के साथ उपवास का संयोजन कर रहे हैं, तो अपनी कसरत की तुलना में अलग समय पर उपवास करना बुद्धिमानी हो सकती है। आंतरायिक उपवास कैलोरी का सेवन कम करने और वजन कम करने के लिए एक उत्कृष्ट विधि है।
व्यायाम वसा को जलाने और अपनी उपस्थिति में सुधार करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। प्रतिरोध प्रशिक्षण, जैसे वजन उठाना, नियमित एरोबिक प्रशिक्षण के रूप में वजन घटाने का कारण बन सकता है। यह आपको मांसपेशियों और ताकत को बनाए रखने में भी मदद करता है। वेट लिफ्टिंग भी आपके चयापचय और हार्मोन के स्तर की रक्षा करता है। उच्च-तीव्रता अंतराल प्रशिक्षण (HIIT) एक बहुत प्रभावी प्रशिक्षण विधि है। शोध बताते हैं कि HIIT के 5-10 मिनट नियमित व्यायाम पांच गुना स्वास्थ्य और वजन घटाने के समान लाभ दे सकते हैं। वेट लिफ्टिंग मांसपेशियों के कार्ब स्टोर्स को जल्दी से कम कर सकता है और वजन घटाने के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी बढ़ावा दे सकता है, जैसे कि आपके चयापचय और वसा जलने वाले हार्मोन आदि।
निम्न तरीके आपके पानी के वजन को कम करने में मदद कर सकते हैं जिससे आप दुबला और हल्का महसूस कर सकते हैं।
सिंहपर्णी अर्क (dandelion extract) नामक एक पूरक पानी की अवधारण को कम करने में मदद कर सकता है।
वजन कम करने लिए कॉफी कैफीन का एक स्वस्थ स्रोत है। अध्ययन बताते हैं कि कैफीन आपको अधिक वसा जलाने और अतिरिक्त पानी खोने में मदद कर सकता है।
वजन कम करने लिए ऐसी चीजें खाएं जो आप के लिए असहिष्णु  हैं, जैसे कि ग्लूटेन या लैक्टोज, जो अत्यधिक पानी प्रतिधारण का कारण बन सकता है। उन खाद्य पदार्थों से बचें जिसमे आपको लगता है कि आप उसके लिए असहिष्णु हो सकते हैं।
अतिरिक्त कैलोरी जलाने और अधिक वजन कम करने के लिए आप अपनी दैनिक गतिविधि भी बढ़ा सकते हैं। आपके पूरे दिन की गतिविधियां और सक्रियता भीं वजन घटाने और मोटापे में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जब आप व्यायाम नहीं कर रहे होते हैं। उदाहरण के लिए, डेस्क जॉब और मैनुअल जॉब के बीच का अंतर प्रति दिन 1,000 कैलोरी तक हो सकता है। यह 90 से 120 मिनट के उच्च-तीव्रता वाले व्यायाम के समान है। साधारण जीवनशैली में बदलाव जैसे चलना या बाइक चलाना, काम करना, सीढ़ियाँ उतारना, बाहर टहलना, अधिक खड़े रहना या यहाँ तक कि घर की सफाई से आप अपने शरीर की बहुत अधिक कैलोरी बर्न कर सकते हैं।
अपने आहार और प्रशिक्षण को अपने अनुसार अनुकूलित करके आप केवल एक सप्ताह में काफी बड़ी मात्रा में वजन कम कर सकते हैं। यद्यपि यह शुद्ध वसा में हानि नहीं होगी, यह आपको अधिक स्थायी आहार का पालन करने के वजन कम करने के लिए लिए किक-स्टार्ट और प्रेरणा दे सकती है। आपको इन सभी चरणों का पालन करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन जितना अधिक आप इनका पालन करेंगे, उतना ही अधिक वजन कम होगा।
जब आपको वजन कम करने वाला सप्ताह समाप्त हो जाता है, तो आपको एक अधिक टिकाऊ वजन कम करने की योजना पर स्विच करना चाहिए ताकि आप अपना वजन कम करना जारी रख सकें।
भारत में ज्यादातर लोग मोटापा कम करने और वजन घटाने के लिए ब्लैक टी को प्राथमिकता देते हैं। इसमें फ्लेवॉन्स की मात्रा ज्यादा होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये अन्य वजन को घटाने वाली चायों की अपेक्षा ज्यादा ऑक्सीडेशन प्रोसेस से गुजरती है। कई स्टडीज में ये प्रूफ हो चुका है कि जब बात वजन कम करने की हो तो ब्लैक टी ज्यादा असर दिखाती है। इसमें बताया गया है कि यदि तीन महीने तक हर दिन दो कप ब्लैक टी पी जाए तो वेट लॉस तेजी से होगा साथ ही बैली के आसपास का फैट भी कम हो जाएगा।

जामुन फल खाने के स्वास्थ्य लाभ व हानियाँ



जामुन गर्मी के मौसम में पाया जाने वाला एक फल है। जामुन को अंग्रेजी में ब्लैक प्लम (Black plum) कहते हैं। जामुन का फल आमतौर पर काले या गहरे गुलाबी रंग का होता है और बहुत सारे औषधीय गुणों से युक्त होता है। जामुन के फायदे और स्वास्थ्य की दृष्टि से कई विकारों को दूर करने के लिए आयुर्वेद में भी जामुन के फल, छाल, पत्तियों एवं बीजों का उपयोग जड़ी-बूटी के रूप में किया जाता है। ज्यादातर घरों में अच्छी सेहत के लिए लोग जामुन का उपयोग स्नैक्स के रूप में भी करते हैं। जामुन की गुठली के फायदे भी अनेक है जामुन का उपयोग सिरका (vinegar) बनाने में भी किया जाता है जो कई विकारों को दूर करने में इस्तेमाल किया जाता है।
 जामुन के फल में ग्लूकोज, फ्रक्टोज, विटामिन C, A, राइबोफ्लेविन, निकोटिन एसिड, फोलिक एसिड, सोडियम और पोटैशियम के अलावा कैल्शियम, फॉस्फोरस और जिंक एवं आयरन मौजूद होता है। इसके साथ ही जामुन के छाल (bark)और शाखाओं में टैनिन, गैलिक एसिड, रेसिन, फाइटोस्टीरॉल मौजूद होता है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। जामुन के बीज में ग्लाइकोसाइड, जंबोलिन और गैलिक एसिड पाया जाता है जो बीमारियों के इलाज में सहायता करता है।
* जामुन में विटामिन C और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिसकी वजह से जामुन खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है। शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ने से रक्त शरीर के विभिन्न हिस्सों में अधिक ऑक्सीजन का फ्लो होता है जिसकी वजह से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है। जामुन में पाया जाने वाला आयरन रक्त को शुद्ध करने का काम करता है।
*विटामिन A आंखों के लिए लाभकारी होता है और यह जामुन में बहुतायत पाया जाता है। इसके अलावा जामुन में खनिज और विटामिन सी भी पाया जाता है जो त्वचा के लिए भी अच्छा माना जाता है।
*मसूढ़ों एवं दांतों के लिए भी जामुन बहुत फायदेमंद होता है। जामुन की पत्तियों में एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो मसूढ़ों से खून निकलने से बचाने में मदद करती हैं। जामुन की पत्तियों को सुखाकर और इसका पावडर तैयार करके दांतों को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह संक्रमण और मसूढ़ों से खून निकलने को रोकता है। जामुन के पेड़ की छाल कसैली होती है जो मुंह के अल्सर से सुरक्षा प्रदान करती है
 *जामुन में जीवाणुरोधी, संक्रमणरोधी और मलेरिया रोधी गुण पाया जाता है। जामुन के फल में मैलिक एसिड, गैलिक एसिड, ऑक्जैलिक एसिड और बेटुलिक एसिड पाया जाता है। जामुन का फल सामान्य संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसलिए संक्रमण से बचाव के लिए जामुन का सेवन किया जाता है।
*जामुन डायबिटीज के लक्षणों, अधिक पेशाब और भूख को कम करने में मदद करता है। यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स को कम करता है और ब्लड शुगर को सामान्य बनाए रखता है। जामुन की पत्तियां (leaves), छाल और बीज डायबिटीज के इलाज में उपयोग किए जाते हैं। यह इंसुलिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए जामुन के सीजन में इसके फल का सेवन डायबिटीज रोगियों को खूब करना चाहिए।
*जामुन के बीज में प्लैनॉयड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कि एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह शरीर से सिर्फ मुक्त कणों को ही बाहर नहीं निकालता है बल्कि एंटीऑक्सीडेंट एंजाइमों को अधिक प्रभावी बनाता है। यही कारण है कि जामुन शरीर की अशुद्धियों और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और इम्यून सिस्टम के कार्यों को बेहतर बनाता है।
*जामुन की छाल और बीज का पावडर पेट में गैस की समस्याओं को दूर करने में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा यह डायरिया, अपच और पेचिश के इलाज में भी बहुत प्रभावी रूप से काम करता है। इसलिए लोग पेट की इन समस्याओं के निजात पाने के लिए जामुन का उपयोग करते हैं।
*चेहरे के मुंहासे के इलाज में भी जामुन का प्रयोग किया जाता है। जामुन के बीज को पीसकर इसमें गाय को दूध मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें और रात में सोने से पहले इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने के थोड़ी देर बाद चेहरे को पानी से धोकर पोंछ ले। मुंहासे कुछ ही दिनों में दूर हो जाते हैं।
*गुर्दे की समस्या को दूर करने में भी जामुन का उपयोग किया जाता है। अगर आपके गुर्दे में किसी तरह की दिक्कत है तो जामुन के बीज का पावडर तैयार कर लें और इसे दही में मिलाकर खाने से किडनी के स्टोन सहित किडनी की अन्य दिक्कतें भी दूर हो जाती हैं।
*दाद  के इलाज में भी जामुन बहुत फायदेमंद होता है। जामुन के रस को थोड़े से पानी में मिलाकर त्वचा पर लोशन के रूप में लगाने से दाद की समस्या ठीक हो जाती है।
*शरीर की कमजोरी को दूर करने और खून की कमी  की समस्या में जामुन का रस बहुत फायदेमंद होता है। यह यादाश्त भी बढ़ाता और और सेक्सुअल कमजोरी की परेशानी को दूर करता है। एक चम्मच जामुन के रस  में एक चम्मच शहर और एक चम्मच आंवला का रस मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाने से यौनशक्ति बढ़ती है।
सभी चीजों को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह का प्रभाव पड़ता है। इसलिए अगर स्वास्थ्य की बात हो तो जामुन के नुकसान के बारे में भी जानना जरूरी हो जाता है।
*जामुन के बीज, छाल और पत्तियों से बने उत्पादों का सेवन अधिक मात्रा में करने से यह डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर लेवल को घटा सकता है जिससे उनकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
*सर्जरी से कुछ दिन पहले और कुछ दिन बाद तक जामुन का सेवन नहीं करना चाहिए अन्यथा शरीर ब्लड शुगर का स्तर घट सकता है।
*जामुन का सेवन खाली पेट करने से कब्ज की दिक्कत हो जाती है इसलिए यह जरूर ध्यान रखें।
लगातार शरीर में सूजन बना हो या लगातार उल्टी की समस्या हो जामुन नहीं खाना करना चाहिए। अत्यधिक जामुन खाने से शरीर में दर्द और बुखार भी हो जाता है।
दूध पीने के एक घंटे पहले या पीने के एक घंटे बाद जामुन खाने से यह नुकसान करता है।