विभिन्न शारीरिक दर्दों से निजात पाने के उपाय




आयुर्वेद में दर्द का इलाज 

आयुर्वेद में दर्द के इलाज में खान-पान पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। खाने में कोई भी गरिष्ठ चीज जैसे कि बैंगन, आलू, उड़द दाल सहित सभी साबुत दालें, ठंडी चीजें मना होती हैं। दर्द के हिसाब से पंचकर्म, पोटली मसाज आदि दी जाती है।
- अगर मरीज सर्वाइकल से पीड़ित है तो उसे ग्रीवा वस्ती थेरपी से ठीक किया जाता है जिसमें उड़द और गेहूं के आटे को गूंथ कर गर्दन में पीछे गोल कर रखा जाता है औऱ फिर गोल घेरे के अंदर दर्दनिवारक गुनगुने तेल से थेरपी दी जाती है। यह काम पूरा एक घंटे का होता है। हर सात दिन पर यह थेरपी दी जाती है।
- घुटने और कमर के दर्द के लिए जानू वस्ती और कटि वस्ती थेरपी का इस्तेमाल किया जाता है। लीफ डिटॉक्स थेरपी भी इन दर्द में कारगर साबित होती है।
- हर थेरपी के लिए 2000 से 3000 रुपये तक का खर्च आता है।
-आयुर्वेद में दवा, मालिश और लेप को मिलाकर विटामिन डी की कमी से होनेवाले दर्द का इलाज किया जाता है। आमतौर पर इलाज का नतीजा सामने आने में 3 महीने लग जाते हैं।
- पूरे शरीर पर तेल की धारा डालते हैं। इसके लिए क्षीरबला तेल, धनवंतरम तेल आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसे 40 मिनट रोजाना और 5 दिन लगातार करते हैं। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं।
- महिलाएं सुबह और शाम शतावरी की एक-एक टैब्लेट लें। वैसे तो किसी भी उम्र में ले सकते हैं लेकिन मिनोपॉज के बाद जरूर लें।
- रोजाना एक चम्मच मेथी दाना भिगोकर खाएं। मेथी दर्दनिवारक है और हड्डियों के लिए अच्छी है।
- एक कप गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी डालकर पिएं।
- रोजाना एक चम्मच बादाम का तेल (बादाम रोगन) एक कप दूध में डालकर पिएं।

*घरेलू नुस्खे अपनाएं 

- गाय के घी में सेंधा नमक डाल कर दर्द वाली जगह पर मसाज करने से भी काफी फायदा होता है। 
- किसी भी तरह के दर्द से निपटने के लिए एक गिलास गाय के गुनगुने दूध में एक छोटी चम्मच हल्दी और गाय के घी की पांच बूंदे रात में नियमित पीने से फायदा होता है।
- रात में खाना खाने के करीब आधे घंटे बाद करीब आधा गिलास गुनगुना पानी पीने से भी लाभ होता है।
- माइग्रेन में गाय के घी को गुनगुना कर दो-दो बूंदें नाक में डालने से बहुत आराम मिलता है। यह सर्वाइकल के दर्द में भी मदद करता है।
- सोयाबीन, अंडे का पीला हिस्सा, फ्लैक्स सीड्स, सफेद तिल और आवंले का सेवन लाभकारी है। 

*दर्द भगाए योग

- गर्दन, साइटिका और कमर दर्द के लिए भुजंगासन, चक्रासन, शलभासन, धनुरासन कारगर हैं, वहीं ऑफिस में काम के दौरान चलित ताड़ासन यानी हर घंटे बाद 10 कदम आगे और 10 कदम पीछे चलने से बहुत आराम मिलता है। घुटने के दर्द वाले याद रखें कि वज्रासन बिलकुल नहीं करना है।
-अनुलोम-विलोम और कपालभाति काफी फायदेमंद हैं। सोने से पहले शवासन भी कई तरह के दर्द से आराम दिलाता है।

* ऐक्टिव रहें, एक्सरसाइज करें

- हमारा शरीर इस तरह से बना है कि सारे जोड़ चलते रहें। जरूरी है कि हम नियमित एक्सरसाइज करें और जितना मुमकिन हो, चलें। एक्सरसाइज में कार्डियोवस्क्युलर, स्ट्रेंथनिंग और स्ट्रेचिंग को मिलाकर करें। कार्डियो के लिए साइकलिंग, स्वीमिंग या डांस, स्ट्रेंथनिंग के लिए वेट लिफ्टिंग और स्ट्रेचिंग के लिए योग करें। वैसे, वॉक अपनेआप में संपूर्ण एक्सरसाइज है।
- अगर घुटने की समस्या नहीं है तो ब्रिस्क वॉक करें। ब्रिस्क वॉक में मोटेतौर पर 1 मिनट में 40-50 कदम चलते हैं। वैसे नॉर्मल वॉक (1 मिनट में लगभग 80 कदम) करना सबसे सेफ है। इससे घुटनों पर असर नहीं पड़ता। रोजाना कम-से-कम 3 किमी जरूर चलें।
- बीच-बीच में कलाइयों, घुटनों आदि को स्ट्रेच करते रहें। कमर को भी घुमाएं। साथ ही, जितना मुमकिन हो, अपना काम खुद करें और वजन कंट्रोल में रखें।
- जिन्हें पुराने दर्द परेशान करते हैं या सर्दियों में दर्द बढ़ जाता है, उन्हें तो एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए। कसरत से हमारे शरीर में मसल्स ऐक्टिव होती हैं, खून का दौरा बढ़ता है और इससे शरीर कुदरती तौर पर गर्म रहता है। ये लोग खासतौर पर पीटी जैसी एक्सरसाइज करें। ठंड की वजह से सुबह बाहर नहीं निकलना चाहते तो शाम को घूमने जाएं।

* विटामिन डी की कमी 

किसी भी शख्स को महीने में 60,000 यूनिट विटामिन डी की जरूरत होती है। इसके लिए महीने में 4-5 दिन और साल में औसतन 45-50 दिन करीब 80 फीसदी शरीर खुला रखकर 45 मिनट के लिए धूप में बैठें। ऐसा करना मुमकिन न हो तो 25-30 साल की उम्र के बाद हर महीने 60 हजार यूनिट का एक विटामिन डी का सैशे लेना चाहिए। विटामिन डी के अलावा कैल्शियम भी हड्डियों के लिए बहुत जरूरी है। कैल्शियम तभी शरीर में जज्ब हो पाता है, जबकि विटामिन डी का लेवल ठीक हो, यानी अगर विटामिन डी कम है तो कैल्शियम शरीर सोख नहीं पाता और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। शरीर को कैल्शियम अगर पूरा नहीं मिलता तो वह हड्डियों में मौजूद कैल्शियम को इस्तेमाल करना शुरू करता है। फिर हड्डियों में दर्द होने लगता है। शरीर में कैल्शियम का लेवल 8.8 से 10.6 mg/dl होना चाहिए। इसके लिए रोजाना 500 mg यानी 0.5 ग्राम कैल्शियम लेने की जरूरत होती है। कैल्शियम से भरपूर डाइट (दूध और दूध से बनी चीजें, हरी पत्तेदार सब्जियां और ड्राई-फ्रूट्स) लेने से यह जरूरत काफी हद तक पूरी हो जाती है। उम्र बढ़ने के साथ खासकर महिलाओं में कैल्शियम सप्लिमेंट या टैब्लेट लेने की जरूरत पड़ने लगती है। 

*पेनकिलर कितने सेफ ?

आमतौर पर किसी भी दर्द को खत्म करने के लिए हम पेनिकलर ले लेते हैं लेकिन यह सही तरीका नहीं है। ऐसा करने से दर्द सिर्फ दब जाता है, खत्म नहीं होता। बहुत दर्द हो तो पैरासिटामॉल 500 एमजी (क्रोसिन, पैरासिटामोल आदि) ले सकते हैं क्योंकि यह सेफ है। जरूरत लगने पर छह घंटे में दोबारा ले सकते हैं। एक दिन में 2 ग्राम तक लेना सेफ है लेकिन 2-3 दिन तक आराम न आए तो डॉक्टर को दिखाएं। दूसरी कोई पेनकिलर लेने से बचें क्योंकि उनका साइड इफेक्ट होता है। वैसे साल में 12 से ज्यादा पेनकिलर न लें, वरना किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है।

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उबली हुई मूगफली के स्वास्थ्य लाभ

                                              

    यूं तो मूंगफली भारतीय रसोई का अहम ह‍िस्‍सा है लेकिन ठंड के मौसम में इसकी डिमांड ज्‍यादा बढ़ जाती है। सर्द‍ियों इसे खाने का अपना ही मजा है और खासतौर पर गुड़ के साथ मूंगफली खाने का जायका शानदार होता है।
  * मूंगफली खाने के तमाम फायदे हैं और इनको देखते हुए इसे सस्‍ता बादाम भी कहा जाता है। दरअसल, मूंगफली में बादाम जितने ही पौष्‍टिक तत्‍व पाए जाते हैं। मूंगफली खासतौर पर प्रोटीन का बहुत अच्‍छा सोर्स है और बताया जाता है कि दूध और अंडे की तुलना में इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्‍यादा होती है। भुनी या तेल में तली हुई मूंगफलियां तो आपने भी खूब खाई होंगी मगर क्या आप उबली हुई मूंगफली खाने के फायदे जानते हैं? आजकल मूंगफलियों का मौसम है। मूंगफली अपने आप में संपूर्ण आहार है। ये एनर्जी और पौष्टिक तत्वों से भरी होती है। मूंगफली खाने से शरीर को सभी जरूरी तत्व मिलते हैं, भूख जल्दी शांत होती है और शरीर में तुरंत एनर्जी आती है। अमेरिकन केमिकल सोसायटी द्वारा हुए एक शोध में पाया गया है कि भूनकर या तलकर खाने के बजाय अगर मूंगफलियों को उबालकर खाया जाए, तो इसके फायदे लगभग 4 गुना बढ़ जाते हैं। यही नहीं उबालने के बाद मूंगफली में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा भी बढ़ जाती है। आइए आपको बताते हैं कितनी फायदेमंद हैं उबली हुई मूंगफलियां।

* 100 ग्राम उबली हुई मूंगफलियों में 280 कैलोरीज होती हैं इसलिए इसे खाने से शरीर में तुरंत ऊर्जा आती है। मूंगफली में फैट भी बहुत कम होता है इसलिए इसे खाने से शरीर का वजन बढ़े बिना उसे सभी जरूरी तत्व मिल जाते हैं। अन्‍य नट्स की तुलना में उबली मूंगफली में कैलोरी काफी कम होती है। इसलिए अगर आप वजन कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं तो उबली हुई मूंगफलियों को अपने आहार में शामिल करें। अगर कोई पतला-दुबला है तो मूंगफली के सेवन से उसकी सेहत भी अच्छी होती है।

    *उबली मूंगफली में सूखी और तेल में भुनी मूंगफली की तुलना में अधिक फाइबर होता है। ज्यादा फाइबर वाले आहारों के सेवन से आपका खाना अच्छी तरह पचता है और आंतों की सफाई हो जाती है। इसके अलावा मेटाबॉलिज्म अच्छा हो जाता है, जिससे शरीर में जमा हुई एक्सट्रा चर्बी तेजी से बर्न होती है। आहार के माध्‍यम से अधिक फाइबर अपने आहार में शामिल करने से आपको कई तरह के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ मिलते हैं। यानी मूंगफली को अपने आहार में शामिल करने से आप भूख नियंत्रण के साथ-साथ कब्‍ज और दिल और डायबिटीज जैसे रोगों के खतरे से बच सकते हैं।

  * मूंगफली में विटामिन बी6 और विटामिन ए होता है इसलिए सर्दियों में रोज सुबह उबली मूंगफली में किशमिश मिलाकर खाने से आंखों की रौशनी बढ़ती है और इसकी कमजोरी दूर होती है। बच्चों को मूंगफली खिलाने से उनकी ग्रोथ ठीक तरह से होती है क्योंकि इसमें एमिनो एसिड और ढेर सारा प्रोटीन होता है।
 * उबली हुई मूंगफली एंटीऑक्‍सीडेंट विटामिन ई का समृद्ध स्रोत है। साथ ही इसमें विटामिन बी-कॉम्‍प्‍लेक्‍स का खजाना है जो मांसपेशियों और अंगों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। विटामिन बी शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं, फोलेट और फोलिक एसिड बनाने में मदद करता है जो कई तरह के जन्म दोष को रोकने में मदद करता हैं।
  * मूंगफली में पॉली फेनोलिक एंटी ऑक्सिडेंट और रेस्वेराट्रॉल होता है इसलिए मूंगफली खाने से दिल की बीमारियों, कैंसर, नर्व्स की बीमारियों और इंफेक्शन से बचाव रहता है। इसके अलावा इन तत्वों से शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड ज्यादा बनने लगता है इसलिए इसे खाने से दिल का दौरा पड़ने की संभावना कम हो जाती है।
*    बढ़ती उम्र के लक्षणों को रोकने के लिए भी मूंगफली का सेवन किया जाता है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट बढ़ती उम्र के लक्षणों जैसे बारीक रेखाएं और झुर्रियों को बनने से रोकते हैं।
 * ओमेगा 6 से भरपूर मूंगफली त्वचा को भी कोमल और नम बनाए रखता है। कई लोग मूंगफली के पेस्ट का इस्तेमाल फेसपैक के तौर पर भी करते हैं ताक‍ि त्‍वचा को इसके पूरे फायदे मिल सकें।


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पेट की फेट कैसे कम करें

                                                 

प्रॉपर न्यूट्रिशन और सही एक्सरसाइज के मेल से फैट बर्निंग प्रोसेस हेल्दी तरीके से तेज की जा सकती है। और पेट की चर्बी कम की जा सकती है। एक महीने में पेट की चर्बी कम घटाकर कमर का घेरा 4 इंच तक कम किया जा सकता है। 
क्या आप भी अपनी पेट की चर्बी को छुपाने के लिये ढीले-ढाले कपड़े पहनकर निकलते हैं? लोग अकसर एक्सरसाइज न कर पाने के चलते बढ़े पेट को छुपाने के लिए कई पैंतरे आजमाते हैं, लेकिन आखिर आप किन-किन उपायों से और कब तक अपनी पेट की चर्बी को छुपाते फिरेंगे। अब समय आ गया है कि इस चीज़ से ना भागा जाए और इसका डट कर मुकाबला किया जाए। आप बिना एक्सरसाइज किये भी अपने पेट की चर्बी से छुटकारा पा सकते हैं। आइये जानें कैसे-
*शुगर कम कर दें
शुगर में फ्रक्टोज होता है जो पेट के चारों और फैट बढ़ाता है। कोल्ड ड्रिंक, आर्टीफीशियली फ्लेवर्ड जूस और स्वीट बेवरेज से मोटापे का खतरा 60% तक बढ़ जाता है।

*हमेशा भोजन के थोड़ी देर पहले और बाद में एक या दो कप पानी पीयें। इसके अलावा दिन में भी खूब सारा पानी पीजिये, दिन में लगभग 2 ली‍टर पानी जरुर पीजिये नहीं तो आपका शरीर बॉडी फैट बर्न नहीं कर पाता है। पर्याप्त पानी पीने से चयापचय गति बढ़ती है और भोजन ठीक से हज़म हो पाता है।
*हर रात कम से कम 6 से 8 घंटों की नींद लें। यदि इससे कम समय की नींद लेंगे तो आपका हार्मोन हमेशा ही फैट इकठ्ठा करने की स्‍थिती में रहेगा, जिससे आपका फैट घटाने का सपना भी मुश्किल होता जाएगा। साथ ही तनाव से भी दूर रहें।
*सोने से पहले कम से कम दो घंटे तक भोजन न करें। क्योंकि शरीर इस दौरान खाए भोजन को अच्छी तरह से हज़म नहीं कर पाता है। वहीं भरे पेट सोने से कुछ स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे बेचैनी या फिर नींद आने में परेशानी आदि हो सकती हैं।

*डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं

सोयाबीन, टोफू, नट्स जैसे फूड्स में प्रोटीन होता है। इन्हें खाने से जल्दी-जल्दी भूख नहीं लगती और कैलोरी इनटेक कम होता है। पेट के चारों ओर फैट जमा नहीं होता।खूब सारा प्रोटीन, फाइबर और अच्‍छी वसा का सेवन करें। इसका अर्थ है कि अपने आहार में खूब सारी सब्‍जियों, मेवे और लीन मीट को शामिल करें। इस प्रकार के आहार से न सिर्फ चर्बी नहीं एकत्रित होती, बल्कि सेहत भी दुरुस्त बनी रहती है। 

*डाइट में कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा कम करें

व्हाइट शुगर, व्हाइट ब्रेड, पास्ता, मैदा जैसे आइटम फैट बढ़ाते हैं। इन्हें कम खाने से पेट का फैट घटाने में काफी मदद मिलती है। हरी सब्जियां ज्यादा खाएं।
*जंक फूड, शुगर उत्‍पाद और तला-भुना आहार कम से कम खाएं। इनका सेवन कर आप कभी पतले नहीं हो सकते उल्‍टा आप मोटापे के अलावा मधुमेह और हाई बीपी जैसी बीमारियों का शिकार बन सकते हैं। साथ ही डिब्ब बंद आहार व सोड़ा आदि का सेवन न करें। 
*चर्बी कम करने के लिए आप के हेल्थ ड्रिंक भी बनाकर रोजाना पी सकते हैं। इसके लिए आप 3-4 गिलास पानी लें और उसमें 3-4 नींबू निचोड़ें, 6-7 तुलसी के पत्ते डालें। अब उसमे खीरे के कुछ टुकड़े डालें, चाहें तो एक खीरे का जूस भी उसमें मिला सकते हैं। अब इस मिश्रण को रातभर के लिए एक बर्तन में ढंक कर रखे दें। सुबह उठकर इसे पीएं। रोजाना इसी टिप को फॉलों करें। इससे ना सिर्फ पेट की चर्बी कम होगी बल्कि चेहरे पर भी जबरदस्त निखार आ जाएगा
*अपने भोजन के भाग के आकार को कम करें, फिर भले ही आपके सामने आपका पसंदीदा भोजन ही क्यों न हो। वैसे भी पेट संबंधी समस्याओं से बचने व मोटापा कम करने के लिए भूख से थोड़ा कम आहार ही लेने चाहिए। छोटे आहार लें, दिन में इस प्रकार के पांच छोटे आहार लिये जा सकते हैं। भोजन करते समय, बड़े निवाले लेने से बचें और छोटे निवाले में अपने भोजन को विभाजित करें। 
*खाने में जीरा जरूर शामिल करें क्योंकि यह पेट की चर्बी घटाने में मददगार है। इसके अलावा सेब, अनानास, खीरा और टमाटर भी पेट की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में सहायक होते हैं। जहां अनानास में ब्रोमीलेन नामक एंजाइम होता है जो चर्बी को कम करने में मदद करता है, तो वहीं सेब के अंदर फायबर और बीटा कैरोटीन होता है जो चर्बी घटाता है।

हेल्दी ब्रेकफास्ट जरूर करें

ब्रेकफास्ट अवॉइड करने से भूख ज्यादा लगती है और वजन बढ़ता है। ओटमील, दलिया और हाई प्रोटीन वाला ब्रेकफास्ट पेट का फैट घटाने में हैल्पफुल है।
*ज्यादातर लोगों को बंदगोभी पसंद नहीं होती, लेकिन शायद लोग नहीं जानते कि बंदगोभी चर्बी को कम करने में काफी मदद करती है। अगर बंदगोभी की सब्जी पसंद नहीं है तो इसे सलाद के रूप में खाएं..रोजाना कम से कम एक बार।

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