अम्लता (Acidity) की आयुर्वेदिक घरेलू चिकित्सा





आहार नली के ऊपरी हिस्से में अत्यधिक अम्लीय द्रव संचरित होने से खट्टापन और जलन का अनुभव होना एसिडिटी कहलाता है। मुहं में भी जलन और अम्लीयता आ जाती है।
आमाषयिक रस में अधिक हायड्रोक्लोरिक एसिड होने से यह स्थिति निर्मित होती है। आमाषयिक व्रण इस रोग में सहायक की भूमिका का निर्वाह करते हैं।
आमाषय सामान्यत: भोजन पचाने हेतु जठर रस का निर्माण करता है। लेकिन जब आमाषयिक ग्रंथि से अधिक मात्रा में जठर रस बनने लगता है तब हायडोक्लोरिक एसिड की अधिकता से एसिडिटी की समस्या पैदा हो जाती है। बदहजमी .सीने में जलन और आमाषय में छाले इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।


मोतियाबिंद  और कमजोर नजर के आयुर्वेदिक उपचार

एसिडिटी के प्रमुख कारण निम्न हैं
अधिक शराब का सेवन करना।

अधिक मिर्च-मसालेदार भोजन-वस्तुएं उपयोग करना मांसाहार.
कुछ अंग्रेजी दर्द निवारक गोलियां भी एसिडिटी रोग उत्पन्न करती हैं।
भोजन के बाद अम्लता के लक्षण बढ जाते हैं.
रात को लेटने पर भी एसिडिटी के लक्षण उग्र हो जाते हैं।
निम्न घरेलू पदार्थों से एसिडिटी का ईलाज निरापद और हितकारी होता है।


*पित्ताश्मरी(Gallstone) की अचूक औषधि*

१) शाह जीरा अम्लता निवारक होता है। डेढ लिटर पानी में २ चम्मच शाह जीरा डालें । १०-१५ मिनिट उबालें। यह काढा मामूली गरम हालत में दिन में ३ बार पीयें। एक हफ़्ते के प्रयोग से एसिडीटी नियंत्रित हो जाती है।
२) भोजन पश्चात थोडे से गुड की डली मुहं में रखकर चूसें। हितकारी उपाय है।
३) सुबह उठकर २-३ गिलास पानी पीयें। आप देखेंगे कि इस उपाय से अम्लता निवारण में बडी मदद मिलती है।
४) तुलसी के दो चार पत्ते दिन में कई बार चबाकर खाने से अम्लता में लाभ होता है।


*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

५) एक गिलास जल में २ चम्मच सौंफ़ डालकर उबालें।रात भर रखे। सुबह छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीयें। एसिडीटी नियंत्रण का उत्तम उपचार है।
६) आंवला एक ऐसा फ़ल जिससे शरीर के अनेकों रोग नष्ट होते हैं। एसिडीटी निवारण हेतु आंवला क उपयोग करना उत्तम फ़लदायी है।
७) पुदिने का रस और पुदिने का तेल पेट की गेस और अम्लता निवारक कुदरती पदार्थ है। इसके केप्सूल भी मिलते हैं।
८) फ़लों का उपयोग अम्लता निवारंण में महती गुणकारी है। खासकर केला,तरबूज,ककडी और पपीता बहुत फ़ायदेमंद हैं।


नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

९) ५ ग्राम लौंग और ३ ग्राम ईलायची का पावडर बनालें। भोजन पश्चात चुटकी भर पावडर मुंह में रखकर चूसें। मुंह की बदबू दूर होगी और अम्लता में भी लाभ होगा।
१०) दूध और दूध से बने पदार्थ अम्लता नाशक माने गये हैं।
११) अचार,सिरका,तला हुआ भोजन,मिर्च-मसालेदार चीजों का परहेज करें। इनसे अम्लता बढती है। चाय,काफ़ी और अधिक बीडी,सिगरेट उपयोग करने से एसिडिटी की समस्या पैदा होती है। छोडने का प्रयास करें।
१२) एक गिलास पानी में एक नींबू निचोडें। भोजन के बीच-बीच में नींबू पानी पीते रहें। एसिडिटी का समाधान होगा।


*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*



१४) आधा गिलास मट्ठा( छाछ) में १५ मिलि हरा धनिये का रस मिलाकर पीने से बदहजमी ,अम्लता, सीने मे जलन का निवारन होता है।
१५) सुबह-शाम २-३ किलोमिटर घूमने से तन्दुरस्ती ठीक रहती है और इससे अम्लता की समस्या से निपटने में भी मदद मिलती है।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार



वीर्य बढ़ाने और गाढ़ा करने के आयुर्वेदिक उपाय


                                               
रिसर्च में ये साबित हुआ है की वीर्य दो प्रकार का होता है एक तो गाढ़ा और सफ़ेद और दूसरा पतला पानी जैसा| रिसर्च में यह भी पाया गया है की ज्यादातर पुरुष अपने वीर्य को गाढ़ा करना चाहते हैं क्योंकि उनके अनुसार गाढ़ा वीर्य मर्दाना ताकत और मर्दानगी का प्रतीक होता है| कुछ लोगों के अनुसार वीर्य का गाढ़ापन उनके पार्टनर को संतुष्ट करने के लिए जरुरी होता है| वहीँ कुछ पुरुष ऐसा भी सोचते हैं की पतला वीर्य होने पर उन्हें संतान प्राप्ति में दिक्कत होगी और गाढ़ा वीर्य उन्हें जल्दी संतान सुख प्रदान करेगा| इन्ही सब कारणों के कारण हर मर्द अपने वीर्य को गाढ़ा करना चाहता है|

गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग

वीर्य की 1 ml मात्रा में करीब 2 करोड़ शुक्राणु पाए जाते हैं| आप अपनी शुक्राणु की संख्या spermcheck kit के द्वारा घर में ही जांच सकते हैं| इस kit को आप ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं| जैसे की हमने ऊपर बताया की गाढ़ा वीर्य मर्दानगी का प्रतीक माना जाता है खास कर तब जब आप बच्चे के लिए प्लान कर रहे हों| मोटापा, मानसिक तनाव, पोषण की कमी, tight अंडरवियर आदि कुछ कारन हैं जो की वीर्य के पतलेपन के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं| आप अपने वीर्य में शुक्राणु की संख्या बढ़ा सकते हैं और उसे गाढ़ा भी कर सकते हैं| आपकी सहायता के लिए हमने वीर्य को गाढ़ा करने के टिप्स, उपाय और घरेलु नुस्खे इस लेख में बताये हैं जिन्हें अपनाकर आप वीर्य का गाढ़ापन और उसमें शुक्राणुओं की संख्या को जल्दी से बढ़ा सकते हैं| एमिनो एसिड सप्लीमेंट के तौर पर या खाने के रूप में लें: एमिनो एसिड कुछ मात्रा में मांसों, फलों और सब्जियों में पाया जाता है। एमिनो एसिड वीर्य की मात्रा को बढ़ता है, और उसे गाढ़ा होने से भी बचाता है। एमिनो एसिड जो आपको खाने में सम्मिलित करना चाहिए। एल- कार्निटीन (L-Carnitine) यह रेड मीट और दूध में पाया जाता है। एल- आरगिनेइन (L-Arginine) यह ड्राईफ्रूट्स, तिल और अंडे में पाया जाता है। एल- लीसीन- (L-Lysine) यह दूध और पनीर में पाया जाता है। अपने आहार को बदलें: आपके खानपान में सुधार, अधिक और स्वस्थ वीर्य उत्पन्न करता है। इस प्रक्रिया को कम नहीं आंके। प्रोसेस्ड फ़ूड का कम सेवन करें या फिर विल्कुल नहीं करें, और इसके बदले आहार जिसमें कम वसा और ज्यादा प्रोटीन हो उनका सेवन करें। ज्यादा सब्जी और अनाज खाएँ, संभव होने पर जैविक आहार (organic foods) खरीदें। बहुत ज्यादा पानी पीएँ। जो भी आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, वो वीर्य के लिए भी लाभदायक होता है। हाइड्रोसील(अंडकोष वृद्धि) के  घरेलू  और होम्योपैथिक उपचार
ज्यादा सख्लन से बचें जरुरत से ज्यादा हस्तमैथुन करना या फिर सामान्य से अधिक संभोग में रूचि लेने से अकसर वीर्य पतले हो जाता है| इसलिए जरुरी है की आप इस ज्यादा सख्लन होने से बचें और हो सके तो हफ्ते में एक या दो बार ही संभोग करें| यह सच है की सख्लन आपको मानसिक तनाव से मुक्त रखता है लेकिन वीर्य को गाढ़ा करने के लिए जरुरी है की आप अपने ऊपर थोडा सयम रखें|
अपना लाइफस्टाइल बदलो ख़राब लाइफस्टाइल और नशा जैसे तंबाकू, धुम्रपान, शराब का सेवन ला प्रभाव निश्चित रूप से आपकी वीर्य की सेहत पर पड़ता है और वीर्य पानी जैसा पतला हो जाता है| इसलिए यह जरुरी हो जाता है की आप बुरी आदतों से दूर रहे और अच्छी लाइफस्टाइल आदतें जैसे अच्छा पोषण युक्त खान पान, नियमित exercise और अच्छी नींद लें| अच्छी आदतों से आपकी जनन क्षमता भी अच्छी होगी और वीर्य की सेहत में भी सुधार होगा|
  supplements से लीजिये मदद मिनरल जिंक (mineral zinc) का ज्यादा सेवन करें:
 इससे वीर्य की मात्रा, संख्या और टेस्टस्टेरन बढ़ती है। करीब 11 mg प्रति दिन लें, यह अखरोट, बीन्स, शुत्कि (oysters) या चिकन खाने से पूर्ति हो जाएगा।
कुछ supplements जिनमें विटामिन E और जिंक पाया जाता है आपके वीर्य को गाढ़ा कर सकते हैं और आपकी मर्दानगी और यौनशक्ति को काफी बढ़ा सकते हैं| लेकिन यह जरुरी है की supplements का इस्तेमाल डॉक्टर की देख रेख में करें| आप अपने डॉक्टर को अपनी प्रॉब्लम बता कर उचित supplement ले सकते हैं| आप जरुरी विटामिन्स और minerals को कददू के बीज, अखरोट, बादाम आदि नियमित रूप से खा कर भी प्राप्त कर सकते हैं|
अश्विनी मुद्रा का अभ्यास कीजिये अश्विनी मुद्रा को इंग्लिश में kegel exercise के नाम से भी जाना जाता है| यह मर्दों के लिए काफी अच्छी मुद्रा मानी जाती है| यह लिंग की नसों में कमजोरी, शीघ्रपतन, वीर्य सम्बन्धी समस्याएँ और स्तम्भन दोष आदि को सही करने में काफी लाभप्रद मानी जाती है| इस exercise में आपको अपनी गुदा की muscles को अन्दर की और कुछ सेकंड्स खीच कर रखना होता है और फिर यह क्रिया एक बार में 10 बार करनी होती है| *अपने आहार में फोलिक एसिड सप्लीमेंट लें: फोलिक एसिड (विटामिन B9) वीर्य की मात्रा बढ़ाने में मददगार साबित होता है। 400 ग्राम फोलिक एसिड हरी सब्जियां, फलियां, अनाज और नारंगी के रस में पाया जाता है। *विटामिन C और एंटीअॅक्सीडेंट से भरपूर भोजन खाएँ: ये पोषक तत्व आपकी वीर्य से संबंधित बीमारी को कम करेगा और वीर्य के जीवनकाल को भी बढ़ाएगा। भोजनोपरान्त एक नारंगी खाएँ! एक 8 आउन्स (230 ml) ग्लास नारंगी के जूस में 124 ml विटामिन C होता है जो एक दिन के लिए काफी है।

  सायनस ,नाक की हड्डी  बढ़ने के उपचार

जेहरीले वातावरण से करें बचाव जेहरीले वातावरण और pollution का प्रभाव आपकी जनन क्षमता को कम करता है| यदि आप किसी high रिस्क इंडस्ट्री में काम करते हैं to दस्तानों और मुँह पर मास्क पहनकर अपने ऊपर होने वाले जेहरीले तत्वों के प्रभाव से बचाव करें| इसी प्रकार डिटर्जेंट और chemicals से काम करते समय अपने हाथों पर रबर के दस्ताने पहने|
विटामिन D और कैल्शियम के प्रतिदिन सेवन को बढ़ाएँ: 
आप दोनों को सप्लीमेंट के तौर पर भी ले सकते हैं या फिर कुछ समय धूप में व्यतीत करके विटामिन D की संश्लेषण कर सकते हैं। दही, स्लिम दूध, सैल्मन अधिक मात्रा में सेवन करके से आप कैल्शियम और विटामिन D की जरूरत को पूरा कर सकते हैं। अगर आप ज्यादा समय धूप में व्यतीत करते हैं तो अपने शरीर पर सनस्क्रीन लगाना नहीं भूलें ताकि सूर्य की हानिकारक किरणों से प्रभाव कम हो।
 लंबाई बढ़ाने के जबर्दस्त उपाय
वीर्य को गाढ़ा करने वाली herbs यानि जड़ी बूटियाँ हो सकता है जिन herbs के बारे में हम यहाँ बताने वाले हैं वो भारत में ना मिलती हों लेकिन इन्हें आप आसानी से ऑनलाइन आर्डर करके मंगवा सकते हैं| यहाँ कुछ ऐसी जड़ी बूटियाँ हम बताने जा रहे हैं जो की पुरुष की समस्त समस्याएं दूर कर सकती हैं और आपके वीर्य को गाढ़ा बना सकती हैं|
गोखरू
यह भारत में भी आसानी से मिल जाती है| इसमें पाए जाने वाले गुण आपके वीर्य को गाढ़ा करने में मदद करते हैं| इतना ही नहीं यह हर्ब वीर्य में शुक्राणु बढाती है, शुक्राणुओं की गतिशीलता बढाती है और शुक्राणु के जीवन को भी बढाती है| यह सभी बातें तब जरुरी होती हैं जब आपको संतान प्राप्ति में दिक्कत आ रही हो|
एलिसीन (Allicin) का सेवन करें: 
यह लहसुन में पाया जाता है, एलिसीन एक ओरगानोसल्फर यौगिक है जो वीर्य की मात्रा को यौन अंग में खून के संचार के अनुकूल बनाता है, जिससे स्वस्थ वीर्य की मात्रा बढती है। कुछ नए और दिलचस्प लहसुन युक्त खाना खाएँ या फिर लौंग और लहसुन की चाय बनाकर सुबह पी लें। वीर्य को स्वस्थ बनाने वाले इन भोजनों का सेवन करें: अगर वीर्य को आँखों से चमकते हुए देखना चाहते हैं, तो अपने खानपान में इन चीजों का प्रयोग करें। Goji berries (एंटीॅआक्सीडेंट) जिनसेंग (Ginseng), अश्वगंधा पम्पकिन सीड्स (omega-3 fatty acids) अखरोट (omega-3 fatty acids) एस्परगस (विटामिन C) केला (विटामिन C)
ढीले कपडे पहनें: 
ऐसे कपडे पहने जिनसे आपके अंडकोश (testicles) पर दबाब न पड़े। गर्मी अंडकोश के लिए हानिकारक होती है, इसलिए ढीले वस्त्र जिसमें हवा का प्रवेश हो पहनें। अंडकोश का शरीर से बाहर होने का एकमात्र कारण यही है, ताकि उनमें ठंडक बनी रहे अपने वज़न की जांच करें: 
ज्यादा या कम वजन हार्मोन प्रक्रिया के संचालन में प्रभाव डालता है। एस्ट्रोजन (estrogen) की ज्यादा मात्रा या टेस्टोश्टेरोन (testosterone) की कमी वीर्य की मात्रा में गलत प्रभाव डाल सकता है। जिम ज्वाइन करें, और खुद को प्रोत्साहित करने के लिए नए और दिलचस्प तरीके ढ़ूढें ताकि, अपने वज़न कम करने की लक्ष्य को आप पूरा कर पाएँ।
तनाव दूर करें: 
तनाव जानलेवा होता है। हालांकि, आप इसे कुछ समय के लिए संभाल लेंगे, मगर आपका वीर्य इतना मजबूत नहीं होता। तनाव वीर्य उत्पन्न करने वाले हार्मोन को कम कर देता है
गर्म टब से बाहर निकलें: 
यह सुखद तो होता है, लेकिन जब आप मनमोहक क्रिया में खोए होते हैं, आपके अंडकोश गर्मी से तप जाते हैं। टब में विश्राम को किसी और समय के लिए छोड़ दें।
साइकिल से उतर जाएं: 
साइकिल की सीटें वीर्य को कम करने के लिए प्रख्यात है, अगर कुछ पल के लिए आप सोचेंगे तो आपको महसूस होगा कि क्यों! दबाव, धक्का और उछाल- वीर्य को इनमें से कुछ भी पसंद नहीं है । जब ज्यादा वीर्य उत्पन्न करने की इच्छा हो तो कार या बस का प्रयोग करें।
वीर्य गाढ़ा करने का घरेलु नुस्खा. वीर्य ही शारीर का सार है, एक योगी को सबसे ज्यादा दुःख अपने वीर्यपात होने पर ही होता है, मगर आज कल के युवा और आधुनिक डॉक्टर इसकी उतना नहीं आंकते, अत्यधिक मैथुन से या अश्लील सिनेमा और साहित्य से वीर्यपात कर चुके युवा जिनका वीर्य पानी कि भाँती हो चूका है, उनका जीवन नरक के समान है. वीर्य ही जीवन है, यही व्यक्ति कि आभा है, ये नहीं तो कुछ नहीं. वीर्य को गाढ़ा और शक्तिशाली करने के लिए सफ़ेद प्याज और अजवायन का ये प्रयोग बहुत लाभदायक है. आइये जाने.
वीर्य गाढ़ा करने के लिए सफ़ेद प्याज और अजवायन का प्रयोग.     एक किलो सफ़ेद प्याज का रस निकाल कर रख लीजिये, अभी इसमें 100 ग्राम अजवायन को 12 घंटे तक सफेद प्याज के रस में भिगोकर रख लीजिये, रस इतना ही डाले के अजवायन इसको सोख ले, सुबह जब सारा रस अजवायन सोख ले तो इसको छाया में सुखा लें। सूखने के बाद उसे फिर से इसी प्रक्कर प्याज के रस में गीला करके सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें। उसके बाद इसे कूटकर किसी बोतल में भरकर रख लें। आधा चम्मच इस चूर्ण को एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें। इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है।
सफ़ेद मूसली पुरुष रोगों में रामबाण औषिधि वियाग्रा और जिन्सेंग से कहीं बढ़कर है भारतीय सफ़ेद मूसली. आयुर्वेद में सदियों से ही इसका उपयोग कमजोरी से ग्रस्त रोगियों के लिए किया जाता रहा है. मुसली के पौधे की जड़ मूसल के समान होती और इसका रंग सफ़ेद होता है इसलिए इसे मुस्ली या मूसली कहा जाता है। वीर्य गाढ़ा करने के लिए सफ़ेद प्याज और अजवायन. वीर्य गाढ़ा करने का घरेलु नुस्खा. वीर्य ही शारीर का सार है, 
स्टेरॉयड (steroids) का सेवन समाप्त करें: 
यह भले ही आपकी मसल्स को बनाने में मददगार होंगे, लेकिन इससे आपके अंडकोश पर बुरा असर पड़ता है। वीर्य की मात्रा के अनुरूप ऐसा कौन चाहेगा? ऐनेबोलिक स्टेरइड (anabolic steroids) आपके समस्त स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

दमा( श्वास रोग) के असरदार उपचार 

गुटखा खाने के नुकसान 

होम्योपैथिक औषधि बेलाडोना ( Belladonna ) का गुण लक्षण उपयोग 

कालमेघ के उपयोग ,फायदे

लो ब्लड प्रेशर के कारण ,लक्षण ,घरेलू उपचार


निया में बड़ी तादाद में लोग लो बीपी की समस्या से पीड़ित होते हैं। लेकिन ज्यादातर को इनके लक्षणों के बारे में नहीं पता होता जिससे वह इस समस्या को किसी और शारीरिक चीज से जोड़ लेते हैं, जो उनकी हेल्थ को खतरे में डाल सकता है।
ब्लड प्रेशर की समस्या की बात की जाती है तो ज्यादातर लोग हाई ब्लड प्रेशर के बारे में तो जानते हैं और इसके लक्षणों से भी वाकिफ होते हैं लेकिन लो ब्लड प्रेशर के बारे में कम ही लोगों को पता है। जबकि हकीकत यह है कि दुनिया में बड़ी तादाद में लोग लो बीपी की समस्या से पीड़ित होते हैं। लेकिन चूंकि उन्हें इसके लक्षणों के बारे में पता नहीं होता लिहाजा वे इसे सामान्य चक्कर आना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर लो बीपी की समस्या गंभीर हो जाए तो ब्रेन तक पहुंचने वाले ऑक्सिजन और जरूरी पोषक तत्व में रूकावट आ जाती है, लिहाजा लो बीपी की समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
इन वजहों से बीपी होता है लो
डिहाइड्रेशन
शरीर बेहतर तरीके से काम करे इसके लिए बेहद जरूरी है कि पानी पीने में कटौती न की जाए। अगर आप उन लोगों में से हैं जिनका शरीर बहुत जल्दी डिहाइड्रेटेड हो जाता है तो आपको इसके लिए कुछ करना चाहिए। अगर आपका ज्यादातर काम आउटडोर में है तो आपको अपने पास पानी की बोतल रखनी चाहिए और नींबू पानी जैसे पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए ताकि आपको कमजोरी महसूस न हो।
लो बीपी जल्द ठीक करने के लिए ये करें
अगर सुबह उठने के बाद आपको चक्कर आते हैं या थकान सी लगती है तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ये लो ब्लड प्रेशर या हाइपोटेंशन के लक्षण हो सकते हैं। अधिकतर बार हम इन लक्षणों को यह सोचकर नजरंदाज कर देते हैं कि शायद यह कम सोने के कारण होगा। लेकिन इसे नजरंदाज नहीं करना चाहिए। स्लाइड कर पढ़ें इसके लक्षण और उपाय...
प्रेग्नेंसी
अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो इस बात की संभावना अधिक है कि आपका ब्लड प्रेशर लो हो जाए। वैसे तो प्रेग्नेंसी के दौरान बीपी का थोड़ा सा लो होना सामान्य बात है लेकिन अगर अक्सर ऐसा होता है तो आपको तुरंत अपना चेकअप करवाना चाहिए।
दिल से जुड़ी बीमारी
दिल से जुड़ी कुछ बीमारियों में कई बार ऐसा होता है कि शरीर में खून सही तरीके से सर्क्युलेट नहीं हो पाता है और ब्लड प्रेशर लो हो जाता है।
पोषक तत्वों की कमी
शरीर में कुछ जरूरी पोषक तत्व जैसे विटमिन B-12 या आयरन की कमी हो जाए तो व्यक्ति अनीमिया का शिकार हो जाता है जिससे लो ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है।
घरेलू नुस्खे
- वैसे तो ब्लड प्रेशर वालों को कम नमक खाने की सलाह दी जाती है लेकिन लो ब्लड प्रेशर में नमक आपकी मदद कर सकता है। लेकिन नमक का सेवन बढ़ाने या नमकीन चीजें खाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह मशविरा जरूर करें।
- अगर आपको लगातार चक्कर आ रहे हों या सिर घूमने जैसा महसूस हो रहा हो तो पानी की मात्रा बढ़ा दें। पानी, वैसे भी शरीर के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जरूरी है और ज्यादा पानी पीने से डिहाइड्रेशन से बचा जा सकता है।
- हर दिन कम से कम 2 बार कच्चे चुकंदर का 1 कप जूस पिएं। यह लो ब्लड प्रेशर के इलाज का सबसे अच्छा घरेलू नुस्खा है।
- बीपी अगर लो हो जाए तो 1 कप स्ट्रॉन्ग ब्लैक कॉफी पी सकते हैं। इससे भी आपको बेहतर महसूस होगा।
- इसके अलावा बादाम का पेस्ट बना लें और उसे हल्के गर्म दूध के साथ पिएं। इससे भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या हल हो जाएगी।

पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि



ओट्स(जई) के आयुर्वेदिक गुण और उपचार



प्राचीन काल से जौ का उपयोग होता चला आ रहा है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों का आहार मुख्यतः जौ थे। वेदों ने भी यज्ञ की आहुति के रूप में जौ को स्वीकार किया है। गुणवत्ता की दृष्टि से गेहूँ की अपेक्षा जौ हलका धान्य है।
ओट्स या जई आसानी से पच जाने वाले फाइबर का जबरदस्त स्रोत है। साथ ही यह कॉम्पलेक्स कार्बोहाइडेट्स का भी अच्छा स्रोत है। ओट्स हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करता है। बशर्ते इसे लो सैच्यूरेटिड फैट के साथ लिया जाए। ओट्स एलडीएल की क्लियरेंस बढ़ाता है। ओट्स में फोलिक एसिड होता है जो बढ़ती उम्र वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होता है। यह एंटीकैंसर भी होता है
ओट में कैल्शियम, जिंक, मैग्नीज, आयरन और विटामिन-बी और ई भरपूर मात्रा में होते हैं। जो लोग डिसलिपिडेमिया और डायबिटीज से पीड़ित हैं उन्हें ओट्स फायदेमंद होता है। गर्भवती महिलाओं और बढ़ते बच्चों को भी ओट खाना चाहिए। आईये जाने कुछ और ऐसे ही फायदे

हृदय

ओट्स का सेवन दिल के लिये काफी फायदेमंद होता है। ओट्स में खूब फाइबर मौजूद होता है, और इसमें फॉलीबल फाइबर होता है जो दिल के लिये बहुत अच्छा होता है यही नहीं यह दूसरी बीमारियों से भी बचाता है। इससे शुगर लेवल कम रहता है।

कोलेस्ट्रॉल

ओट्स में मौजूद बीटा ग्लूकॉन नामक गाढा चिपचिपा तत्व हमारी आंतों की सफाई करते हुए कब्ज की समस्या दूर करता है। इसकी वजह से शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल जमा नहीं हो पाता। अगर तीन महीने तक नियमित रूप से ओट्स का सेवन किया जाए तो इससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर में 5 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है

 स्तन कैंसर से बचाता है

ओट्स में लिग्नंस और एन्टेरोलैक्टोने जैसे फीटोकमिशल पाये जो कैंसर से लड़ने में सहायक हैं। एन्टेरोलैक्टोने विशेष रूप से, स्तन और अन्य हार्मोन से संबंधित कैंसर की रोकथाम में सहायक है
वजन घटाए

इसमें इनसॉलिबुल और सॉलिबुल फाइबर होता है, जो फैट बर्निंग के लिए काफी अच्छा है, साथ ही प्रोटीन भी मौजूद होने से पेट भर जाता है। जो लोग जिम जाने का या व्यायाम करने का समय नहीं निकल पाते हैं, वे ओट्स खा के अपना वजन जल्दी और आसान तरीके से कर सकते हैं।

उच्च रक्तचाप कम करता है

उच्च रक्तचाप हमारे हृदय के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक है , इसे समय रहते अगर रोका ना गया तो यह इंसान की जान भी ले सकता है। इससे बचने का सबसे अच्छा उपाए है ओट्स। ओट्स खाने से उच्च रक्तचाप की परेशानी कम होती है क्योंकि इसमें फाइबर होता है जो कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित रखता है।

आंत को स्वस्थ रखता है

ओट्स में फाइबर होने की वजह से यह आंत और मलाशय के लिए काफी फायदेमंद होता है। ओट्स उनके लिए बहुत लाभदायक है जो लोग अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित हैं। ओट्स रोज़ खाने से कब्ज़ जैसी परेशानियों से निजात मिल जाता है।
त्वचा को चमकदार बनाये
ओट्स ना सिर्फ हमारे शरीर को स्वास्थ रखता है बल्कि यह हमारी त्वचा के लिए भी बहुत लाभदायक है। यह त्वचा को नमी देता है साथ ही जिनकी त्वचा बहुत ज्यादा रूखी या उसमें बहुत खुजली और जलन होती है तो ओट्स बहुत उपयोगी है।

तनाव से बचाता है

ओट्स में फाइबर और मैग्नीशियम पाया जाता है जो दिमाग में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ता है, जिससे मस्तिष्क शांत रहता है। जिसकी वजह से आपका मूड अच्छा रहता है और नींद भी अच्छी आती है। आप चाहें तो इसमें ब्लूबेरी भी दाल के खा सकते हैं, जिस में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी पाया जाता है जो तनाव से लड़ने में मदद करता है।

ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखता है

ओट्स में कार्बोहाइड्रेट काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो आपको ऊर्जा देती है। फाइबर की मात्रा ज्यादा होने की वजह से यह धीरे धीरे पचता है, जिसकी वजह से रक्त में मौजूद ग्लूकोस का स्तर बढ़ता नहीं है। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि इसको नियमित खाने से टाइप 2 मधुमेह का खतरा काम हो जाता है।

पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि


श्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया) के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार



वर्तमान समय में महिलाओं में ल्‍यूकोरिया की समस्‍या आम हो गई है। इससे ज्‍यादातर महिलाएं प्रभावित होती है। इसे आयुर्वेद में श्‍वेत प्रदर और आम भाषा में सफेद पानी जाना कहा जाता है। इस रोग से किसी भी उम्र की महिलायें प्रभावित हो सकती है, यहां तक कि अविवाहित लड़कियां भी इस रोग का शिकार हो जाती है। यह स्‍वयं में कोई रोग नहीं है, लेकिन अन्‍य कई रोगों का कारण होता है।
चेहरे की रौनक ख़त्म सी हो जाती है। सफ़ेद पानी जिसको श्वेत प्रदर भी कहा जाता है, महिलाओं का कष्ट दायक रोग है, जिसमे महिलाओं की योनी से सफ़ेद तरल पदार्थ निकलता है, और बहुत गन्दी बदबू आती है, इस रोग से ग्रसित रोगिणी उदास और चिडचिडी रहती है।
 महिलाओं को योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा स्राव होने की समस्या होती है। जिसे सामान्य भाषा में सफेद पानी जाना, श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिया कहा जाता है। वैसे तो अपने शरीर के सभी अंग को साफ, स्वच्छ रखने से इस समस्या से बचा सकता है।
 इस रोग के कारण योनि में खुजली और जलन होती है और  महिलाओं में यह बहुत बदबूदार भी होता हे। यह समस्‍या गुप्‍तांगों की अस्‍वच्‍छता, बहुत ज्‍यादा आलसी जीवन, मांस, मछली, शराब, चाय काफी जैसे उत्‍तेजक पदार्थों के अधिक सेवन, अत्‍यधिक सहवास, गर्भनिरोधक गोलियों के अत्‍यधिक सेवन से होती है। बार-बार गर्भपात कराना भी इसका एक प्रमुख कारण है। अगर आप इस रोग से ग्रस्‍त है और दवाईयां खा-खाकर थक चुकी हैं, लेकिन आपको आराम नहीं मिल पा रहा तो आयुर्वेद में इसका स्‍थायी इलाज है। आइए श्‍वेत प्रदर के आयुर्वेदिक उपायों के बारे में जानते है।
आंवला और केला
विटामिन सी से भरपूर आंवला श्‍वेत प्रदर रोग में रामबाण की तरह होता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटी-इंफेक्‍शन गुण योनि के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद होता है। आप इसे सब्‍जी, मुरब्‍बा या चटनी के रूप में खा सकते हैं। या आंवले को सुखाकर अच्छी तरह से पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इस चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा को पानी में मिलाकर लगभग 1 महीने तक रोज सुबह-शाम पीने से महिलाओं में होने वाला श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) नष्ट हो जाता है। इसके अलावा केला भी श्‍वेत प्रदर के लिए अच्‍छा होता है। 2 पके हुए केले को चीनी के साथ कुछ दिनों तक रोज खाने से महिलाओं को होने वाला प्रदर (ल्यूकोरिया) में आराम मिलता है।
अंजीर और गुलाब के फूल
आयुर्वेद के अनुसार, अंजीर ल्यूकोरिया के लिए एक अच्छा उपाय माना जाता है। अंजीर के शक्तिशाली रेचक प्रभाव शरीर से हानिकारक विषाक्‍त पदार्थों को दूर करने में मदद करता है, जिससे ल्‍यूकोरिया को कम करने में मदद मिलती है। रात भर पानी के एक कप में दो से तीन सूखे अंजीर को भिगोकर रख दें। अगली सुबह, पानी में भीगे अंजीर खा लें और पानी पी लें। इसके अलावा गुलाब के फूल भी ल्‍यूकोरिया को दूर करने में बहुत मददगार होते हैं। गुलाब के फूलों को छाया में अच्छी तरह से सुखा लें, फिर इसे बारीक पीसकर बने पाउडर को लगभग 3 से 5 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह और शाम दूध के साथ लेने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) से छुटकारा मिलता है।
और मुलहठी
नीम योनि गंध और ल्यूकोरिया के इलाज के लिए बहुत प्रभावी है। यह एंटीसेप्टिक गुण योनि संक्रमण और ल्‍यूकोरिया के कारण होने वाली खुजली और अन्य समस्‍याओं को दूर करता है। नीम की छाल और बबूल की छाल को समान मात्रा में मोटा-मोटा कूटकर, इसके चौथाई भाग का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम सेवन करने से श्वेतप्रदर में लाभ मिलता है। इसके अलावा मुलहठी को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में लेकर पानी के साथ सुबह-शाम पीने से श्वेतप्रदर की बीमारी नष्ट हो जाती है।
सफेद मूसली अगर आपको सफेद पानी की समस्या है और आप इससे छुटकारा पाना चाहते है तो आपको बता दें कि इसके लिए सफेद मूसली का चूर्ण बहुत उपयोगी है। इसके लिए आपको सफेद मूसली का चूर्ण और ईसबगोल मिलाकर लेना है। इससे जल्द ही आपको आराम मिलेगा।
मेथी के बीज
मेथी के बीज को योनि में पीएच स्‍तर में सुधार लाने और एस्‍ट्रोजन स्‍तर को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, मेथी प्राकृतिक प्रतिरक्षा बूस्टर के रूप में काम करते हैं। मेथी-पाक या मेथी-लड्डू खाने से श्वेतप्रदर से छुटकारा मिल जाता है और शरीर तंदुरुस्‍त बना रहता है। गर्भाशय कमजोर होने पर योनि से पानी की तरह पतला स्राव होता है। लेकिन मेथी का सेवन करने से गर्भाशय की गन्दगी को बाहर निकलने में मदद मिलती है। गुड़ व मेथी का चूर्ण 1-1 चम्मच मिलाकर कुछ दिनों तक खाने से प्रदर बंद हो जाता है।
नागकेशर इसको लेने के लिए आप केसर और छाछ का इस्तेमाल कर सकते है। अगर आपको सफेद पानी की शिकायत है तो आपको इसके सेवन से राहत मिलेगी ये आपके लिए फायदेमंद है। ये सफेद पानी की समस्या को जड़ से खत्म कर देता है। इसलिए इसका उपयोग जरूर करें।
गाजर अगर आपको लिकोरिया की शिकायत है को आपको गाजर, मूली और चुकंदर के रस का सेवन करना चाहिए। ये आपकी बीमारी के लिए रामबाण इलाज है। इसके सेवन से आपको लिकोरिया रोग से छुटकारा मिलेगा। इसको एक रामबाण इलाज माना जाता है।
ईसबगोल
ईसबगोल अगर आपको सफेद पानी की समस्या है तो आपको बता दें कि आपको ईसबगोल को दूध के साथ मिलाकर पीना है। ऐसा करने से आपको सफेद पानी में आराम मिल जाएगा। ये एक असरदार घरेलू उपाय है।
जामुन

अगर आपको सफेद पानी की शिकायत है तो आपको बता दें कि आपको इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। जामुन की छाल को आप सुखा ले और इसको पीस लें। इसके चुर्ण को आप दिन में तीन बार सेवन करें। ऐसा करने से आपको सफेद पानी की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।
केला 
अगर आपको सफेद पानी की शिकायत है तो आपको पके हुए केले को चीनी के साथ मिलाकर खाना चाहिए। ऐसा करने से कुछ ही दिनों में आपके सफेद पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। इसका सेवन करना लाभदायक है। ऐसा करने से आपकी समस्या जल्द ही खत्म हो जाएगी।
उपचार और भी हैं-
हर दिन कच्चा टमाटर खाना शुरू करें.
सुबह-शाम 2 चम्मच प्याज का रस और उतनी हीं मात्रा में शहद मिलाकर पिएँ.
जीरा भूनकर चीनी के साथ खाने से फायदा होगा.
आंवले का रस और शहद लगातार 1 महीने तक सेवन करें. इससे श्वेत प्रदर ठीक हो जायेगा.
हर दिन केला खाएँ, इसके बाद दूध में शहद डालकर पिएँ. इसके आपकी सेहत भी अच्छी होगी और श्राव के कारण होने वाली कमजोरी भी दूर होगी. कम-से-कम तीन महीने तक यह उपाय करें, दूध के ठंडा हो जाने के बाद उसमें शहद डालें.
कच्चे केले की सब्जी खाएँ.अगर आपके शरीर में खून की कमी है, तो खून बढ़ाने के लिए हरी सब्जियाँ, फल, चुकन्दर इत्यादि खाएँ.
1 केला लें, उसे बीच से काट लें. उसमें 1 ग्राम फिटकरी भर दें, इसे दिन या रात में एक बार खाएँ. लेकिन ध्यान रखें कि अगर दिन में खाना शुरू किया तो, दिन में हीं खाएँ. और अगर रात में खाना शुरू किया हो, तो रात में हीं खाएँ.
तले-भूने चीज या मसालेदार चीज नहीं के बराबर खाएँ.
योनी की साफ-सफाई का ध्यान रखें.
मैदे से बनी चीजें न खाएँ.
एक बड़ा चम्मच तुलसी का रस लें, और उतनी हीं मात्रा में शहद लें. फिर इसे खा लें. इससे आपको आराम मिलेगा.
अनार के हरे पत्ते लें, 25-30 पत्ते…. 10-12 काली मिर्च के साथ पीस लें. इसमें आधा ग्लास पानी डालें, फिर छानकर पी लीजिए. ऐसा सुबह-शाम करें.
भूने चने में खांण्ड (गुड़ की शक्कर) मिलाकर खाएँ, इसके बाद 1 कप दूध में देशी घी डाल कर पिएँ.
10 ग्राम सोंठ का, एक कप पानी में काढ़ा बनाकर पिएँ. ऐसा एक महीने तक करें.
पीपल के 2-4 कोमल पत्ते लेकर, पीस लें. फिर इसे दूध में उबालकर पिएँ.
1 चम्मच आंवला चूर्ण लें और 2-3 चम्मच शहद लें. और इन्हें आपस में मिलाकर खाएँ. ऐसा एक महीने तक करें.
खूब पानी पिएँ.
सिंघाड़े के आटे का हलुआ और इसकी रोटी खाएँ.
3 ग्राम शतावरी या सफेद मूसली लें, फिर इसमें 3 ग्राम मिस्री मिलाकर, गर्म दूध के साथ इसका सेवन करें.
नागरमोथा, लाल चंदन, आक के फूल, अडूसा चिरायता, दारूहल्दी, रसौता, इन सबको 25-25 ग्राम लेकर पीस लें. पौन लीटर पानी में उबालें, जब यह आधा रह जाय तो छानकर उसमें 100 ग्राम शहद मिलाकर दिन में दो बार 50-50 ग्राम सेवन करें.
माजू फल, बड़ी इलायची और मिस्री को बराबर मात्रा में पीस लें. एक सप्ताह तक दिन में तीन बार लें. एक सप्ताह के बाद फिर दिन में एक बार 21 दिन तक लें.

पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि




घुटनों की ग्रीस कम होने और दर्द की आयुर्वेदिक घरेलू चिकित्सा


उम्र बढ़ने के साथ-साथ घुटनों की ग्रीस कम होने लगती है। लेकिन आजकल कम उम्र की महिलाओं को भी इस समस्‍या से जूझना पड़ता है। अगर किसी के घुटनों की ग्रीस खत्म हो चुकी हो और उनका चलना, उठना और सीढ़ी चढ़ना मुश्किल हो गया हो तो परेशान होने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि आज हम इस आर्टिकल में कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्‍हें रेगुलर खाने से आप अपने घुटनों की ग्रीस को आसानी से बढ़ा सकती हैं। तो चलिए किस बात की आइए ऐसी ही 3 चीजों के बारे में जानें। लेकिन सबसे पहले ये जान लें कि आखिर घुटनों में ग्रीस कम होने का असली कारण क्‍या है?

घुटनों की ग्रीस कम होने के कारण
रात को जागने की आदत
अधिक चिंता करना
गिरने से चोट लगना
अधिक वजन होना
कब्ज रहना
खाना जल्दी-जल्दी खाने की आदत
फास्ट-फूड का अधिक सेवन
तली हुई चीजें बहुत ज्‍यादा खाना
कम मात्रा में पानी पीना या खड़े होकर पानी पीना
बॉडी में कैल्शियम की कमी
अखरोट-
घुटनों की ग्रीस बढ़ाने के लिए अखरोट काफी फायदेमंद होता है। आप हर रोज दो अखरोट का सेवन जरूर कीजिये। ऐसा करने से घुटनों का ग्रीस बढ़ने लगता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि अखरोट में प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन ई, बी-6, कैल्शियम और मिनरल भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा अखरोट में एंटी-ऑक्‍सीडेंट के साथ-साथ ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। यह एक प्रकार का फैट है जो सूजन को कम करने में हेल्‍प करता है।
हरसिंगार के पत्‍ते-
हरसिंगार जिसे पारिजात और नाइट जैस्मिन भी कहते हैं। इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। इसके पौधे आपको अपने घर के आस-पास भी देखने को मिल जाएंगे। इस पेड़ के पत्‍ते जोड़ों के दर्द को दूर करने और घुटनों की ग्रीस बढ़ाने में मददगार होते हैं। इसके पत्तों में टेनिक एसिड, मैथिल सिलसिलेट और ग्लूकोसाइड होता है ये द्रव्य औषधीय गुणों से भरपूर हैं। घुटनों की ग्रीस बढ़ाने के लिए हरसिंगार के 3 पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें। फिर इस पेस्ट को 1 बड़े गिलास पानी में मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं। जब पानी आधा से भी आधा रह जाये तब इसे छानकर हल्‍का ठंडा करके पियें। इस काढ़े का सेवन सुबह खाली पेट करें।
नारियल पानी -
खाली पेट नारियल का पानी पीने से भी घुटनों में लचीलापन आता है। एक महीना इस उपाय को करके देखें। आपको बहुत फायदा मिलेगा! जरूरी विटामिन और मिनरल के अलावा यह मैग्नीज जैसे तत्वों से भरपूर है। सूखने के दौरान इसमें नेचुरल ऑयल बनने लगता है जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करता है।अन्य उपाय -
1. कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर बनाए पैड से सिंकाई करने से घुटने के दर्द में आराम मिलता है।
2. भोजन में दालचीनी, जीरा, अदरक और हल्दी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करें। गर्म तासीर वाले इन   पदार्थों  के सेवन से घुटनों की सूजन और दर्द कम होता है।
3. मेथी दाना, सौंठ और हल्दी बराबर मात्रा में मिला कर तवे या कढ़ाई में भून कर पीस लें। रोजाना एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम भोजन करने के बाद गर्म पानी के साथ लें।
4. रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच मेथी के पिसे दानों में एक ग्राम कलौंजी मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लें। दोपहर और रात में खाना खाने के बाद आधा-आधा चम्मच लेने से जोड़ मजबूत होंगे और किसी प्रकार का दर्द नहीं होगा।
5. सुबह खाली पेट लहसुन की एक कली दही के साथ खाएं।
6. हल्दी चूर्ण, गुड़, मेथी दाना पाउडर और पानी सामान मात्रा में मिलाएं। थोड़ा गर्म करके इनका लेप रात को घुटनों पर लगाएं और पट्टी बांधकर लेटें।
7. अलसी के दानों के साथ दो अखरोट की गिरी सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।
8. बराबर मात्रा में नीम और अरंडी के तेल को हल्का गर्म करके सुबह-शाम जोड़ों पर मालिश करें।
9. मालिश के लिए आप इन चीजों से भी तेल बना सकते हैं। 50 ग्राम लहसुन, 25 ग्राम अजवायन और10 ग्राम लौंग 200 ग्राम सरसों के तेल में पका कर जला दें। ठंडा होने पर कांच की बोतल में छान कर रख लें। इस तेल से घुटनों या जोड़ों की मालिश करें।
10. गेहूं  के दाने के आकार का चूना दही या दूध में घोलकर दिन में एक बार खाएं। इसे 90 दिन तक लेने से कैल्शियम की कमी दूर होगी।


पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि




पित्ताशय मे पथरी (Gallstones) का घरेलु,आयुर्वेदिक इलाज


गॉल ब्लाडर में पथरी (gallstones)बनना एक भयंकर पीडादायक रोग है। इसे ही पित्त पथरी कहते हैं। पित्ताषय में दो तरह की पथरी बनती है। प्रथम कोलेस्ट्रोल निर्मित पथरी। दूसरी पिग्मेन्ट से बनने वाली पथरी। ध्यान देने योग्य है कि लगभग ८०% पथरी कोलेस्ट्रोल तत्व से ही बनती हैं।वैसे तो यह रोग किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन महिलाओं में इस रोग के होने की सम्भावना पुरुषों की तुलना में लगभग दूगनी हुआ करती है।पित्त लिवर में बनता है और इसका भंडारण गॉल ब्लाडर में होता है।यह पित्त वसायुक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। जब इस पित्त में कोलेस्ट्रोल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है,तो पथरी निर्माण के लिये उपयुक्त स्थिति बन जाती है। प्रेग्नेन्सी,मोटापा,मधुमेह,,अधिक बैठे रेहने की जीवन शैली, तेल घी अधिकता वाले भोजन,और शरीर में खून की कमी से पित्त पथरी रोग होने की सम्भावना बढ जाती है। गर्दन के दर्द के घरेलू उपाय दो या अधिक बच्चों की माताओं में भी इस रोग की प्रबलता देखी जाती है। अब मैं कुछ आसान घरेलू नुस्खे प्रस्तुत कर रहा हूं जिनका उपयोग करने से इस भंयकर रोग से होने वाली पीडा में राहत मिल जाती है और निर्दिष्ट अवधि तक इलाज जारी रखने पर रोग से मुक्ति मिल जाती है।
१) गाजर और ककडी का रस प्रत्येक १०० मिलिलिटर की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीयें। अत्यन्त लाभ दायक उपाय है।
२) नींबू का रस ५० मिलिलिटर की मात्रा में सुबह खाली पेट पीयें। यह उपाय एक सप्ताह तक जारी रखना उचित है।
३) हल्दी - पथरी के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपचार है। यह एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेट्री (प्रदाहनाशक) होती है। हल्दी पित्त, पित्त यौगिकों और पथरी को आसानी से विघटित कर देती है। ऐसा माना जाता है कि एक चम्मच हल्दी लेने से लगभग 80 प्रतिशत पथरी खत्म हो जाती हैं।
४) चुकंदर, नाशपाती और सेब का रस- इन रसों के द्वारा पथरी का प्राकृतिक तरीके से प्रभावी उपचार किया जा सकता है। विभिन्न रस जैसे चुकंदर का रस, नाशपाती का रस और सेब का रस लीवर को स्वच्छ करते हैं। पथरी बनने से रोकने के लिए इन तीनों रसों के मिश्रण का सेवन करें।


* ५) सूरजमुखी या ओलिव आईल ३० मिलि खाली पेट पीयें।इसके तत्काल बाद में १२० मिलि अन्गूर का रस या निम्बू का रस पीयें। यह प्रक्रिया 3 हफ़्तों तक जारी रखने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं।
६) पुदीना- यह पित्त तथा अन्य पाचक रसों के प्रवाह को उत्तेजित करता है। इसमें टेरपिन नामक यौगिक पाया जाता है जो प्रभावी रूप से पथरी को विघटित करता है। आप पुदीने की पत्तियों को उबालकर पिपरमेंट टी भी बना सकते हैं। पथरी एक लिए यह एक प्रभावी घरेलू उपचार है।
७) नीबू का रस नीबू का रस या खट्टे फलों का रस पित्ताशय में कोलेस्ट्राल को जमा होने से रोकता है तथा इस प्रकार पथरी बनने से बचाव करता है। दिन में तीन बार नीबू का रस लें।
८) नाशपती का फ़ल खूब खाएं। इसमें पाये जाने वाले रसायनिक तत्व से पित्ताषय के रोग दूर होते हैं।
९) चुकंदर, खीरा और गाजर का रस पित्ताशय की थैली को साफ और मजबूत करने और लीवर की सफाई के लिए चुकंदर का रस, ककड़ी का रस और गाजर के रस को बराबर मात्रा में मिलाये। यह संयोजन आपको पेट और खून की सफाई में भी मदद करता है। खीरे में मौजूद उच्च पानी सामग्री और गाजर में विटामिन सी की उच्च मात्रा मूत्राशय से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है। नसों में होने वाले दर्द से निजात पाने के तरीके
१०) विटामिन सी याने एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर का इम्युन सिस्टम मजबूत बनता है। विटामिन सी शरीर के कोलेस्ट्राल को पित्त अम्ल में परिवर्तित करती है जो पथरी को विघटित करता है। आप विटामिन सी संपूरक ले सकते हैं या ऐसे खाद्य पदार्थ खा सकते हैं जिनमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में हो जैसे संतरा, टमाटर आदि। पथरी के दर्द के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपचार है।

११) इसबगोल एक उच्च फाइबर आहार, पित्ताशय की थैली की पथरी के इलाज के लिए बहुत आवश्यक है। इसबगोल घुलनशील फाइबर का अच्‍छा स्रोत होने के कारण पित्त में कोलेस्ट्रॉल को बांधता है और पथरी के गठन को रोकने में मदद करता है। आप इसे अपने अन्‍य फाइबर युक्त भोजन के साथ या रात को बिस्‍तर पर जाने से पहले एक गिलास पानी के साथ ले सकते हैं।
१२) अरंडी का तेल यह पथरी को रोकने और कम करने में सहायक होता है। इसमें प्रदाहनाशक गुण होता है तथा यह दर्द को कम करता है। प्रतिरक्षा और लसिका प्रणाली पर कैस्टर ऑइल का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जहाँ पित्ताशय होता है उस स्थान पर हलके हाथों से कैस्टर ऑइल से मालिश करें।
१३) लाल शिमला मिर्च- 2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पथरी की समस्‍या कम करता है। एक लाल शिमला मिर्च में लगभग 95 मिलीग्राम विटामिन सी होता है, यह मात्रा पथरी को रोकने के लिए काफी होती है। इसलिए अपने आहार में शिमला मिर्च को शामिल करें। 
१४) ऐप्पल सीडर विनेगर की अम्लीय प्रकृति लीवर को कोलेस्ट्राल बनाने से रोकती है जो अधिकाँश पथरियों का कारण होता है। यह पथरी को विघटित करने तथा दर्द को समाप्त करने में सहायक होता है।
१५) पित्त पथरी रोगी भोजन में प्रचुर मात्रा में हरी सब्जीयां और फ़ल शामिल करें। ये कोलेस्ट्रोल रहित पदार्थ है।
१६) तली-गली,मसालेदार चीजों का परहेज जरुरी है।
१७) शराब,चाय,काफ़ी एवं शकरयुक्त पेय हानिकारक है।
१८) एक बार में ज्यादा भोजन न करें। ज्यादा भोजन से अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रोल निर्माण होगा जो हानिकारक है।

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि



विशिष्ट परामर्श- 


माडर्न चिकित्सा मे गॉल स्टोन की कोई सफल औषधि नहीं होने से सर्जरी द्वारा रोगी के पित्ताशय को ही निकाल दिया जाता है जिसके दुष्परिणाम जीवन भर भुगतने पड़ते हैं| वैध्य श्री दामोदर 98267-95656 जड़ी बूटियों की औषधि से बड़ी पित्त पथरी का सफलता से ईलाज कर रहे हैं| आपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ती| यह पेट दर्द ,गैस होना ,जी घबराना कब्ज आदि लक्षणो मे भी रामबाण औषधि है|






पेट दर्द का घरेलू ,आयुर्वेदिक नुस्खों से इलाज


                                                                                    

पेट में पीडा abdominal colic होने की व्याधि वक्ष(छाती) से तलपेट के मध्य के क्षेत्र में किसी भी जगह मेहसूस हो सकती है।यह पीडा कुछ समय के लिये मामूली किस्म की अथवा लम्बे समय तक होने वाली गंभीर प्रकार की हो सकती है। पेट दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं।पेट में स्थित लिवर,गाल ब्लाडर ,आमाषय,पेनक्रियास(अग्नाषय)और आतों में विकार आ जाने से पेट दर्द पैदा होता है। एक या अधिक अंग प्रभावित होते हैं।पेट दर्द के मुख्य कारण कब्ज का होना, अपच, ज्यादा गैस बनना, आमाषय और आंतों में व्रण बन जाना, आंत्र पुच्छ प्रदाह होना, गाल ब्लाडर अथवा किडनी में पथरी निर्माण होना ,विषाक्त भोजन सेवन करना आदि हैं
पेट दर्द निवारण के लिये निम्न उपचार लाभदायक सिद्ध होते हैं-
१) पेट दर्द मे हींग का प्रयोग लाभकारी है। २ ग्राम हींग थोडे पानी के साथ पीसकर पेस्ट बनाएं। नाभी पर और आस पास यह पेस्ट लगावें । लेटे रहें। इससे पेट की गैस निष्कासित होकर दर्द में राहत मिल जाती है।
२) अजवाईन तवे पर सेक लें । काला नमक के साथ पीसकर पावडर बनाएं। २-३ ग्राम गरम पानी के साथ दिन में ३ बार लेने से पेट का दर्द दूर होता है।

) जीरा तवे पर सेकें। २-३ ग्राम की मात्रा गरम पानी के साथ ३ बार लें। इसे चबाकर खाने से भी लाभ होता है।
४) पुदिने और नींबू का रस प्रत्येक एक चम्मच लें। अब इसमें आधा चम्मच अदरक का रस और थोडा सा काला नमक मिलाकर उपयोग करें। यह एक खुराक है। दिन में ३ बार इस्तेमाल करें।
५) सूखा अदरक मुहं मे चूसने से पेट दर्द में राहत मिलती है।
६) कुछ पेट दर्द के रोगी बिना दूध की चाय पीने से पेट दर्द में आराम मेहसूस करते हैं।
७) अदरक का रस नाभी स्थल पर लगाने और हल्की मालिश करने से उपकार होता है।
८) अगर पेट दर्द एसिडीटी (अम्लता) से हो रहा हो तो पानी में थोडा सा मीठा सोडा डालकर पीने से फ़ायदा होता है।
९) पेट दर्द निवारक चूर्ण बनाएं। भुना हुआ जीरा, काली मिर्च, सौंठ( सूखी अदरक) लहसून, धनिया,हींग सूखी पुदीना पत्ती , सबकी बराबर मात्रा लेकर महीन चूर्ण बनावें। थोडा सा काला नमक भी मिश्रित करें। भोजन पश्चात एक चम्मच की मात्रा मामूली गरम जल से लें। पेट दर्द में आशातीत लाभकारी है।



१०) हरा धनिया का रस एक चम्मच शुद्ध घी मे मिलाकर लेने से पेट की व्याधि दूर होती है।
छोटे स्तनों को बड़े और आकर्षक बनाने के उपाय 
१०) अदरक का रस और अरंडी का तेल प्रत्येक एक चम्मच मिलाकर दिन में ३ बार लेने से पेट दर्द दूर होता है।

) अदरक का रस एक चम्मच,नींबू का रस २ चम्मच में थोडी सी शकर मिलाकर प्रयोग करें । पेट दर्द में उपकार होता है। दिन में २-३ बार ले सकते हैं।
१२) अनार पेट दर्द मे फ़ायदे मंद है। अनार के बीज निकालें । थोडी मात्रा में नमक और काली मिर्च का पावडर बुरकें। दिन में दो बार लेते रहें।

भटकटैया (कंटकारी)के गुण,लाभ,उपचार

१३) मैथी के बीज पानी में गलाएं। पीसकर पेस्ट बनाएं। यह पेस्ट २०० ग्राम दही में मिलाकर दिन में दो बार लेने से पेट के विकार नष्ट होते हैं
१४) इसबगोल के बीज दूध में ४ घंटे गलाएं। रात को सोते वक्त लेते रहने से पेट में मरोड का दर्द और पेचिश ठीक होती है।
१५) सौंफ़ में पेट का दर्द दूर कर
ने के गुण है। १५ ग्राम सौंफ़ रात भर एक गिलास पानी में गलाएं। छानकर सुबह खाली पेट पीयें।। बहुत गुणकारी उपचार है।
16) आयुर्वेद के अनुसार हींग दर्द निवारक और पित्तव‌र्द्धक होती है। छाती और पेट दर्द में हींग का सेवन बेहद लाभकारी होता है। छोटे बच्चों के पेट में दर्द होने पर  थोडी सी हींग को एक चम्मच पानी में घोलकर पका लें। फिर बच्चे की नाभि के चारों लगा दें। कुछ देर बाद दर्द दूर हो जाता है।

१७) नींबू के रस में काला नमक, जीरा, अजवायन चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पीने से पेट दर्द से आराम मिलता है

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि




शल्लकी ,लोबान के आयुर्वेदिक गुण फायदे


शालाकी (sallaki) को लोबान (Loban) भी कहते हैं। प्रायः लोबान (शालाकी) का इस्तेमाल घरों में पूजा-पाठ के दौरान धूप जलाने में किया जाता है।बहुत सारे लोग लोबान (शालाकी) के बारे में जानते भी होंगे और अनेकों बार लोबान को प्रयोग में भी लाए होंगे, लेकिन आपको यह नहीं पता होगा कि लोबान एक बहुत ही उत्तम जड़ी-बूटी भी है और लोबान के फायदे से कई रोगों को ठीक कर सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, जोड़ों के दर्द और सूजन की परेशानी, ल्यूकोरिया, कब्ज और बवासीर सहित कई रोगों में शालाकी के इस्तेमाल से फायदे मिलते हैं।
शल्‍लकी नाम से आप परिचित हों या ना हों पर आप लोबान को जरूर जानते होगें। शल्‍लकी को भारत और इससे लगे अन्‍य देशों में लोबान के नाम से जाना जाता है। लोबान को बोसवेलिया सेरेटा (Boswellia Serrata) से प्राप्‍त किया जाता है जो विभिन्‍न प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यओं को दूर करने में हमारी सहायता करती है। शल्‍लकी के फायदे पाचन को स्‍वस्‍थ्‍य रखने, प्रतिरक्षा को बढ़ाने, गठिया का इलाज करने, कैंसर की रोकथाम करने, त्‍वचा को स्‍वस्‍थ रखने और तनाव को कम करने के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा भी शल्‍लकी के बहुत से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते हैं।
इस जड़ी बूटी या औषधी का उपयोग करने से पहले यह पता होना चाहिए कि शल्‍लकी क्‍या है। शल्‍लकी एक प्रकार की गोंद है जिसे बोसवेलिया सेराटा (Boswellia Serrata) के पेड़ से प्राप्‍त किया जाता है। इस औषधी को लोबान का तेल (Frankincense oil) के नाम से भी जाना जाता है जो बुसेरेसिया पौधों के परिवार से संबंधित है। यह इन पेड़ों के तनों से राल के रूप में प्राप्‍त अर्क होता है। इस प्रकार से प्राप्‍त होने वाली लोबान में ऐसे घटक मौजूद होते हैं जो हमारे स्‍वस्‍थ्‍य के लिए बेहद प्रभावी होते हैं।
फायदे  गठिया के लिए
आयुर्वेदिक गुणों के कारण प्राचीन समय से ही शल्‍लकी का उपयोग शारीरिक समस्‍याओं को दूर करने के लिए किया जा रहा है। जानकारों के अनुसार शल्‍लकी के फायदे गठिया के दर्द और सूजन को दूर करने में मदद करते हैं। शल्‍लकी का उपयोग कर बनाई गई दवाओं का नियमित सेवन गठिया के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। क्‍योंकि शल्‍लकी में ऐसे गुण होते हैं साइटोकिन्‍स सहित अन्‍य हानिकाराक एंजाइमों के विकास को रोकने में सहायक होते हैं। ये एंजाइम गठिया में जोड़ों के दर्द और सूजन का कारण बन सकते हैं। इस तरह से शल्‍लकी या इससे बने उत्‍पादों का सेवन करने से लोगों के जीवन की गुणवत्‍ता में सुधार कर सकता है।
आँखों के रोग में शालाकी के फायदे
शालाकी (लोबान) के रस में चीनी एवं शहद मिलाकर काजल की तरह आँखों में लगाएं। इससे आँख आने की परेशानी में लाभ होता है।
फायदे त्‍वचा के लिए
औषधीय गुणों से भरपूर शल्‍लकी के फायदे केवल स्‍वास्‍थ्‍य के लिए ही नहीं होते हैं। बल्कि लोबान के फायदे त्‍वचा के लिए भी होते हैं। शल्‍लकी में त्‍वचा की रक्षा करने वाले कुछ एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं। जो बाहरी संक्रमण और बैक्‍टीरिया से त्‍वचा कोशिकाओं की रक्षा करने में प्रभावी होते हैं। त्‍वचा की सूजन और जलन आदि समस्‍याओं के उपचार के लिए आयुर्वेद में शल्‍लकी बहुत ही लोकप्रिय औषधी है। इसके अलावा और सौंदर्य विकास के लिए भी शल्‍ल्‍की का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह त्‍वचा की टोन को सुधारने, झुर्रियों को कम करने, चेहरे के दाग धब्‍बों को ठीक करने आदि में भी प्रभावी होती है।
तनाव कम करे
बहुत सी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का कारण हमारा तनाव हो सकता है। क्‍या आप तनाव प्रबंधन के लिए शल्‍लकी के फायदे जानते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी की शल्‍लकी के लाभ तनाव को कम करने में हमारी मदद कर सकते हैं। आयुर्वेद में शल्‍लकी का उपयोग शुगंधित औषधी के रूप में किया जाता है। यह तनाव को कम करने और चिंता के स्‍तर को कम करने में सहायक होती है। इसकी खुशबू में ऐसे घटक होते हैं जो मस्तिष्‍क में जाकर तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन को नियंत्रत करते हैं। साथ ही यह नींद की गुणवत्‍ता को भी सुधारने में सहायक होते हैं। इस तरह से आप भी शल्‍लकी की खुशबू का उपयोग कर अपने तनाव को कम करने का प्रयास कर सकते हैं।
पाचन के लिए
बोसवेलिया सेराटा हमारी पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में सहायक होता है। शल्‍लकी में मौजूद औषधीय गुण सीधे ही आंतों की सूजन कम करने में प्रभावी होते हैं। आंतों की सूजन पाचन सहित पेट संबंधी बहुत सी समस्‍याओं का प्रमुख कारण हो सकता है। शल्‍लकी का इस्‍तेमाल पाचन के लिए और पेट संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए लाभकारी होता है। इसके अलावा नियमित रूप से सेवन करने पर शल्‍लकी गैस्ट्रिक अल्‍सर, कब्‍ज, अपचन, पेट की ऐंठन, दस्‍त और सूजन आदि के लक्षणों को कम करने में सहायक होता है। आप भी शल्‍लकी के फायदे प्राप्‍त करने के लिए पूरक के रूप में बोसवेलिया का उपभोग कर सकते हैं।
सिरदर्द के लिए
हम मे से अधिकांश लोग सिर दर्द की समस्‍या से परेशान रहते हैं। लेकिन इस समस्‍या से छुटकारा पाने के लिए शल्‍लकी का उपयोग किया जा सकता है। लोबान में ऐसे गुण होते हैं जो मस्तिष्‍क कोशिकाओं की सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। आयुर्वेद में हुए एक अध्‍ययन में पाया गया कि यह अधिकांश रोगियों में सिर के दर्द को जल्‍दी और प्रभावी रूप से ठीक कर सकता है। बोसवेलिया सेराटा में एनाल्‍जेसिक गुण होते हैं। इसलिए यह सिर दर्द और सूजन संबंधी समस्‍याओं से बचने के लिए लोबान के तेल या इसके अर्क का सेवन लाभकारी होता है।
घावों का इलाज
प्राचीन समय में घावों का पारंपरिक इलाज करने के लिए शल्‍लकी का उपयोग किया जाता था। अध्‍ययनों की माने तो शल्‍लकी में एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-फ्लामेटरी गुण होते हैं। जिसके कारण घावों में शल्‍लकी का उपयोग करने से यह उपचार प्रक्रिया को गति देता है। इसके अलावा इसमें मौजूद पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ घावों के संक्रमण को फैलने से भी रोकते हैं। आप घावों का उपचार करने के लिए शल्‍लकी का सेवन भी कर सकते हैं। आप इसे पूरक आहार के साथ या पेय पदार्थों के साथ उपभोग कर सकते हैं। इस तरह से शल्‍लकी के फायदे घावों और चोट का इलाज करने में प्रभावी होते हैं।
मधुमेह का उपचार
मधुमेह एक गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या है यह न केवल एक बीमारी है बल्कि यह कई बीमारियों का कारण भी बन सकता है। मधुमेह के उपचार के लिए बहुत सी प्राकृतिक जड़ी बूटीयों का उपयोग किया जाता है जिनमें शल्‍लकी भी शामिल है। शल्‍लकी में ब्‍लड शुगर के स्‍तर को कम करने वाले गुण होते हैं। शुगर पेशेंट के लिए शल्‍लकी के अर्क का सेवन करना बहुत ही लाभकारी होता है।
कोलेस्ट्रॉल कम करे
शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल की उच्‍च मात्रा हानिकारक हो सकती है जिसे नियंत्रित करना आवश्‍यक है। आप लोबान का उपयोग कर कोलेसट्रॉल को कम कर सकते हैं। शल्‍लकी के औषधीय गुण शरीर में खराब कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने और अच्‍छे कोस्‍ट्रॉल के स्‍तर को बढ़ाने में सहायक होते हैं। 
दर्द कम करे
प्राचीन समय में पीड़ानाशक के रूप में शल्‍लकी का बेहद उपयोग किया जाता था। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि शल्‍लकी के गुण दर्द को कम करने में प्रभावी होते हैं। इसी कारण आज भी बहुत सी पीड़ानाशक दवाओं में शल्‍लकी का व्‍यापक उपयोग किया जा रहा है। शल्‍लकी में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। ये गुण शरीर में दर्द को उत्‍तेजित करने वाले एंजाइमों और यौगिकों के उत्‍पादन को बाधित करने में सहायक होते हैं। इस प्रकार के एंजाइम विशेष रूप से जोड़ों और मांसपेशियों को टारगेट करते हैं। इसके अलावा कम या मध्‍यम मात्रा में शल्‍लकी का सेवन करने के फायदे शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में भी प्रभावी होते हैं।
उपयोग कैसे करें
में शल्‍लकी का उपयोग अलग-अलग स्‍थानों पर अलग-अलग प्रकार से किया जाता है। जैसा कि आप जानते हैं कि शल्‍लकी बोसवेलिया पेड़ की गोंद या राल है जिससे परिष्‍क्रत करने और सुखाने के बाद उपयोग किया जाता है। कुछ लोग इसकी सुगंध लेने के लिए इसे जलाते हैं। लेकिन बहुत सी स्वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के लिए इसका मौखिक रूप से सेवन भी किया जाता है।
ठोस रूप में सेवन करने के अलावा शल्‍लकी को तरल पेय के रूप में भी सेवन किया जा सकता है। यह शुद्ध अर्क के अलावा खाद्य पदार्थों में संयोजित भी किया जा सकता है। आप अपनी मौखिक समस्‍याओं को दूर करने के लिए मॉउथवॉस के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं। दर्द या सूजन वाली जगह पर इसका लेपन भी किया जा सकता है। बहुत सी महिलाएं अपने सौंदर्य उत्‍पादों में भी शल्‍लकी का उपयोग करती हैं। धार्मिक अनुष्‍ठानों में इस जड़ी बूटी का उपयोग एक प्रकार की धूप के रूप में भी किया जाता है।
सावधानी-
अन्‍य औषधीय जड़ी बूटीयों की तरह ही शल्‍लकी के फायदे और नुकसान होते हैं। यह इसके उपयोग करने के तरीके और मात्रा पर निर्भर करता है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में शल्‍लकी का उपयोग करने के नुकसान भी हो सकते हैं। आइए जाने शल्‍लकी का उपयोग करने के किस प्रकार के नुकसानों की संभावना होती है।
बहुत से लोग शल्‍लकी के प्रति संवेदनशील होते हैं जिसके कारण उन्‍हें गैस्‍ट्रोइंटेस्‍टाइनल समस्‍याएं, त्‍वचा की समस्‍याएं आदि हो सकते हैं।
अधिक मात्रा में शल्‍लकी का उपयोग करने पर त्‍वचा में चकते, खुजली और दाने आ सकते हैं।
बोसवेलिया सेराटा का अधिक मात्रा में सेवन करने पर पेट की आंतों में सूजन और ऐंठन के साथ ही दस्‍त और मतली आदि की समस्‍या हो सकती है।
यदि अधिक सांध्रता में शल्‍लकी का उपयोग त्‍वचा के ऊपर किया जाता है तो यह त्‍वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि शल्‍लकी सौंदर्य उत्पादों की तैयारी में एक सामान्‍य घटक है। लेकिन इसका उपयोग करने से कुछ लोगों को एलर्जी के रूप में त्‍वचा की सूजन या खुजली हो सकती है। हालांकि इसकी संभावना बहुत ही कम होती है।
अधिक मात्रा में उपभोग करने पर शल्‍लकी यकृत के कार्य और स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित कर सकता है।

कसावा के फायदे और उपयोग



कसावा एक जड़ युक्‍त खाद्य पदार्थ है जिसके अनेक फायदे होते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि कसावा के लाभ हेल्थ के अलावा आपकी त्वचा और बालों के लिए भी होते हैं। कसावा स्‍ट्रार्च से भरी हुई कंद या जड़ें होती हैं जिनका उपयोग विभिन्‍न प्रकार की बीमारियों का प्राकृतिक उपचार करने के लिए किया जाता है। कसावा रूट का इस्‍तेमाल कर आप अपनी बालों और त्‍वचा संबंधी परेशानियों का भी घरेलू उपाय कर सकते हैं। कसावा में औषधीय गुण होते हैं हालांकि कसावा की कुछ प्रजातियां प्रकृति में जहरीली होती है। लेकिन उचित मात्रा में उपयोग करने पर यह आपको कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिला सकता है।
कसावा एक जड़ वाली सब्‍जी है जो कसावा झाड़ी के जड़ वाला हिस्‍सा है। कसावा का लैटिन नाम मनिहट एस्‍कुलेंटा (Manihot esculenta) है। यह आलू और रतालू की तरह ही कंद वाली फसल है। कवासा पौधे की जड़ें शकरकंद की तरह ही होती हैं। लोग कसावा की पत्तियों को भी खा सकते हैं। प्राचीन समय से ही कसावा की जड़ों का उपयोग खाद्य रूप में किया जा रहा है। लेकिन अध्‍ययनों के अनुसार जैसे जैसे इसके पोषक तत्‍वों और औषधीय गुणों का पता चला वैसे ही कसावा का इस्‍तेमाल स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त करने के लिए किया जाने लगा।
मनिहट एस्‍कुलेंटा को सामान्‍य रूप से कसावा के नाम से जाना जाता है। यह एक झाड़ीनुमा पौधे होते हैं। कसावा का पौधा यूफोरबीएसे (Euphorbiaceae) परिवार से संबंधित होता है। कसावा प्‍लांट एक बारहमासी पौधा है जिसका व्‍यवसायिक उद्देश्‍य हेतू व्‍यापक रूप से उत्‍पादन किया जा सकता है। उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में इसे एक वार्षिक फसल के रूप में उगाया जाता है। इस पौधे की जड़ें कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्रोत होती हैं। कसावा को मुख्‍य रूप से उबालकर खाया जाता है। लेकिन कसावा की जड़ों में मौजूद स्‍ट्रार्च को निकालकर साबूदाना या टैपिओका बनाया जाता है।
कसावा एक औषधीय पौधा है जिसकी जड़ों में कैलोरी, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, विटामिन और अन्‍य खनिज पदार्थ होते हैं। कसावा की पत्तियों में भी कैल्शियम, आयरन, वसा और प्रोटीन की अच्‍छी मात्रा होती है। इन पोषक तत्‍वों की मौजूदगी के कारण कसावा के फायदे हमें शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाने में मदद कर सकते हैं। स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के साथ ही कसावा का इस्‍तेमाल आपको त्‍वचा और बालों संबंधी समस्‍याओं से बचा सकता है।
कसावा मीठी और कड़वी नसलों में मिलता है। अन्य कन्द-जड़ों की तरह इसमें भी कुछ वषैले पदार्थ उपस्थित होते है, जिनकी मात्रा कड़वी नसलों में मीठी नसलों से कई अधिक होती है। खाने से पहले इसे सही प्रकार से तैयार करना आवश्यक है वरना इससे साइनाइड विष-प्रभाव हो सकता है, जिससे घेंघा रोग, गतिभंग और लकवा होने की सम्भावना है। कुछ क्षेत्रों में किसान कड़वी नसलों को उगाना पसंद करते हैं क्योंकि नाशीजीव और पशु उन्हें खाना पसंद नहीं करते और उनके फ़सलों की चोरी भी कम होती है।
मोटापा दूर करे-
उन लोगों को कसावा खाने से फायदा हो सकता है जो अपना वजन घटाना चाहते हैं। मोटापा कम करने वाले लोगों के लिए कसावा का सेवन करना एक प्राकृतिक उपचार हो सकता है। जो आसानी से उनके वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। कसावा में कैलोरी और फैट बहुत ही कम मात्रा में होते हैं। साथ ही इसमें फाइबर की अच्‍छी मात्रा होती है जिसके कारण यह वजन घटाने वाले खाद्य पदार्थ के रूप में प्रभावी योगदान दे सकता है। क्‍योंकि उच्‍च फाइबर का सेवन करने से भूख को नियंत्रित करने में मदद मिलती है जो आपके बार-बार और अधिक मात्रा में भोजन करने को रोक सकता है। इस तरह से आप कसावा का सेवन कर अपने वजन को कम करने के घरेलू उपाय को आजमा सकते हैं।
पाचन के लिए
पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए कसावा सबसे अच्‍छे उत्‍पादों में से एक है। कसावा के फायदे इसमें मौजूद अघुलनशील फाइबर की उच्‍च मात्रा के कारण होते हैं। फाइबर पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखने और आंतों से मल को आसानी से परित करने में सहायक होते हैं। कसावा का नियमित सेवन कर मल में थोक बढ़ाकर आंतों में मौजूद विषाक्‍तता को प्रभावी रूप से दूर करने में मदद मिलती है। यदि आप भी पाचन संबंधी समस्‍याओं जैसे कब्‍ज, अपच, दस्‍त और पेट में ऐंठन आदि से परेशान हैं तो कसावा का सेवन कर सकते हैं। यह आपके पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
कैंसर के लिए
कैंसर एक गंभीर बीमा‍री है जिसका उपचार नहीं बल्कि बचाव पर विशेष ध्‍यान दिया जाना चाहिए। कसावा के फायदे आपको कैंसर की संभावना से बचा सकते हैं। कसावा में मौजूद पोषक तत्‍व और औषधीय गुण उन फ्री रेडिकल्‍स से हमारे शरीर को बचाते हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। कसावा की पत्तियों में विटामिन B17 (Amygdalin) होता है जो लाल रक्‍त कोशिकाओं को उत्‍तेजित करने में मदद करते है। लाल रक्‍त कोशिकाओं की क्षति के कारण कैंसर होने की संभावन अधिक होती है। यदि आप भविष्‍य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचना चाहते हैं तो कसावा एक अच्‍छा विकल्‍प हो सकता है।
सिरदर्द के लिए
सिर दर्द होना एक सामान्‍य समस्‍या है जिससे अधिकांश लोग प्रभावित होते हैं। लेकिन लंबे समय तक सिर का दर्द बने रहना एक गंभीर समस्‍या हो सकती है। ऐसी स्थिति में कसावा का सेवन करना आपको लाभ दिला सकता है। आप कसावा की जड़ या पत्तियों की मदद से सिरदर्द का घरेलू उपचार कर सकते हैं। इसके लिए आपको केवल 60 ग्राम कसावा की जड़ या पत्तियों की आवश्‍यकता होती है। आप इन्‍हें 1 से 2 घंटों के लिए पानी में डुबो कर रखें इसके बाद ब्‍लेंडर की मदद से इसका जूस बनाएं। इस जूस का दिन में दो बार सेवन करना आपको सिर दर्द से छुटकारा दिला सकता है।
मांसपेशियों के लिए
यदि आप अपनी सेहत के प्रति सचेत हैं तो आप अपने आहार में कसावा के आटे को विशेष रूप से शामिल कर सकते हैं। क्‍योंकि कसावा फ्लोर शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक होता है। कसावा में प्रोटीन की पर्याप्‍त मात्रा होती है जो मांसपेशीय कोशिकाओं के विकास और स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में विशेष योगदान देता है। कसावा की 1 सर्विंग में 2 ग्राम प्रोटीन होता है जो आपकी दैनिक आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने के लिए पर्याप्‍त होता है। नियमित रूप से कसावा का सेवन कर आप अपनी शारीरिक बनावट बेहतर बनाने के साथ ही शरीर की शक्ति को भी बढ़ा सकते हैं।
रक्‍तचाप कम करे
उच्‍च रक्‍तचाप रोगी के लिए कसावा फ्लोर का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। कसावा के आटे में रक्‍तचाप को नियंत्रित करने की क्षमता होती है। कसावा में फाइबर की अच्‍छी मात्रा होती है साथ ही कसावा में पोटेशियम भी होता है। जो रक्‍त वाहिकाओं को आराम दिलाने और रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाने में सहायक होता है। कसावा का सेवन करना विशेष रूप से महिलाओं के लिए फायदेमंद होता है।
बुखार के लिए
मध्‍यम ठंडी तासीर होने के कारण कसावा के फायदे आपको बुखार के लक्षणों से राहत दिला सकते हैं। कसावा की पत्तियों से बने काढ़े का सेवन करने से शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही इस काढ़े का सेवन करना बुखार के दौरान होने वाली कमजोरी और दर्द को भी कम करने में प्रभावी होता है। नियमित रूप से कसावा और इसके अर्क का सेवन करना रोग प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने में भी अहम योगदान दे सकता है। यदि आप भी बुखार से परेशान हैं तो कसावा पत्तों के काढ़े का सेवन कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।
घाव उपचार में
यदि आप किसी चोट या घाव का उपचार करना चाहते हैं तो कसावा का इस्‍तेमाल किया जा सकता है। अगर घाव में इसे लगाया जाता है तो यह एलोवेरा की तरह काम करता है। घाव का इलाज करने के लिए आप कसावा की पत्तियों को पीस कर पेस्‍ट बनाए और घाव पर लगाएं। कसावा के पत्तों में पोषक तत्‍वों की उच्‍च मात्रा होती है जो संक्रमण को रोकने में मदद करता है। साथ ही यह घाव उपचार की प्रक्रिया को भी तेज करता है।
दस्‍त का इलाज करे
फाइबर और अन्‍य पोषक तत्‍वों की मौजूदगी के कारण कसावा के फायदे पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करते हैं। ठीक इस‍ी तरह से दस्‍त जैसी स्थितियों के लिए कसावा के अर्क का सेवन किया जा सकता है। यदि आप दस्‍त से परेशान हैं तो कसावा को अच्‍छी तरह से साफ करे लें। इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और इसे पानी में उबालें। अच्‍छी तरह से उबालने के बाद आप इसे ठंडा होने दें। दस्‍त के लक्षणों को कम करने के लिए आप इस अर्क का दिन में दो बार सेवन करें। ऐसा करने से आपको दस्‍त की समस्‍या से छुटकारा मिल सकता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं को विटामिन सी और फोलेट की विशेष आवश्‍यकता होती है। कसावा के पौधे में ये दोनों ही घटक पर्याप्‍त मात्रा में होते हैं। इसलिए गर्भवती महिलाएं अपने साप्‍ताहिक आहार में कसावा के आटे को शामिल कर सकती हैं। इसके अलावा कसावा की पत्तियों को काटकर सलाद या अन्‍य व्‍यंजनों के साथ उपयोग किया जा सकता है।
आंखों के लिए
औषधीय गुणों से भरपूर कसावा का उपयोग सब्‍जी के रूप में भी किया जा सकता है। नियमित रूप से कसावा का सेवन कर आप कुछ विशेष प्रकार के विटामिन और खनिजों को प्राप्‍त कर सकते हैं। घटकों हमें विशेष आवश्‍यकता होती है जो हमारी आंखों को स्‍वस्‍थ रखने में मदद कर सकते हैं। कसावा में विटामिन ए की अच्‍छी मात्रा होती है। विटामिन ए हमारी आंखों की रोशनी को बढ़ाने और देखने की क्षमता में सुधार कर सकता है। यदि आप भी अपनी आंखों को स्‍वस्‍थ रखना चाहते हैं तो कसावा का उपयोग कर सकते हैं।
मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए
आप अपने मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाने और दिमाग तेज करने के लिए भी कसावा का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। चूंकि कसावा कार्बोहाइड्रेट का सबसे अच्‍छा स्रोत होता है। इसलिए नियमित रूप से कसावा का सेवन करना आपको अतिरिक्‍त ऊर्जा दिलाने में सहायक होता है। भोजन के रूप में कसावा का इस्‍तेमाल करना आपके मस्तिष्‍क की कार्य क्षमता को बढ़ाने में भी अहम योगदान देता है। कसावा की 1 सर्विंग में दैनिक जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है। जो आपके दैनिक उपभोग के लिए पर्याप्‍त है।
त्‍वचा के निशान हटाये
आप अपने चेहरे में मौजूद मुंहासों के दाग और धब्‍बों को दूर करने के लिए भी कसावा का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यदि आप नियमित रूप से दिन में दो बार कसावा के पेस्‍ट को प्रभावित क्षेत्र में लगाते हैं तो कुछ ही दिनों में दाग धब्‍बे दूर हो सकते हैं।
त्‍वचा को गोरा बनाने के लिए
आप अपने चेहरे की त्‍वचा को गोरा और सुंदर बनाने
के लिए कसावा का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। कसावा के छिलके का उपयोग स्किन एक्‍सफोलिएटर (skin exfoliator) के रूप में कर सकते हैं। आप इन छिलकों को लें और इनका पेस्‍ट बनाकर स्‍क्रब के रूप में उपयोग कर सकते हैं। आप इस पेस्‍ट को अपने चेहरे पर कुछ समय के लिए लगा कर रखें और फिर ठंडे पानी से अपने चेहरे को धो लें। अच्‍छे परिणाम प्राप्त करने के लिए आप इस उपाय को सप्‍ताह में 3 बार उपयोग कर सकते हैं।
हेयर फाल को कम करे
महिला हो या पुरुष आज लगभग सभी लोग बाल झड़ने की समस्‍या से परेशान हैं। लेकिन आप इस समस्‍या का समाधान करने के लिए कसावा का उपयोग कर सकते हैं। कसावा का इस्‍तेमाल आपके बालों की जड़ों को अतिरिक्‍त पोषण दिलाने और स्‍कैल्प को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है। परिणामस्‍वरूप आप अपने बालों को झड़ने से बचा सकते हैं।
कसावा को कैसे खाएं
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कसावा एक प्रकार का कंद होता है। आप अपने आहार में कसावा को कई रूपों में उपयोग कर सकते हैं। साबूदना खाना सेहत के लिए अच्‍छा होता है। साबूदाना कसावा से ही बनाया जाता है। हालांकि जड़ के रूप में ताजा कसवा भी खाने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है। आप कसावा के चिप्‍स बना सकते हैं जिनहें नारियल के तेल में फ्राई करके खाया जा सकता है। इसके अलावा आप आलू की तरह ही कसावा की जड़ों को उबालकर विभिन्‍न प्रकार के व्‍यंजन बना सकते हैं। यदि आप मीठा खाना पसंद करते हैं तो कसावा का उपयोग करके आप स्‍वादिष्‍ट हलवा भी तैयार कर सकते हैं।