शहद खाने के स्वास्थ्य लाभ



शहद या मधु हमेशा से रसोई में इस्तेमाल होने वाला एक स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ रहा है, साथ ही सदियों से एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में भी उसका इस्तेमाल होता है। दुनिया भर में हमारे पूर्वज शहद के कई लाभों से अच्छी तरह परिचित थे। एक औषधि के रूप में उसका इस्तेमाल सबसे पहले सुमेरी मिट्टी के टेबलेटों में पाया गया है जो करीब 4000 साल पुराने हैं। लगभग 30 फीसदी सुमेरी चिकित्सा में शहद का इस्तेमाल होता था। भारत में शहद सिद्ध और आयुर्वेद चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण अंग है जो चिकित्सा की पारंपरिक पद्धतियां हैं। प्राचीन मिस्र में इसे त्वचा और आंखों की बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता था और जख्मों तथा जलने के दागों पर प्राकृतिक बैंडेज के रूप में लगाया जाता था।
शहद का मीठा स्वाद तो आप सभी ने चखा ही होगा, लेकिन क्या आप इसके चमत्कारी फायदों के बारे में जानते हैं? शहद को मधु भी कहा जाता है, जो लाजवाब स्वाद के साथ-साथ औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। एक गुणकारी आयुर्वेदिक औषधी के रूप में इस स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है। इसके जीवाणु-रोधी तत्व मानवीय शरीर को शुद्ध करने का का शहद एक ऐसी एंटीबायोटि‍क औषधि है, जो पूर्णत: प्राकृतिक है। स्वास्थ्य से लेकर सुंदरता तक, इसके पास हर समस्या का समाधान उपलब्ध है।
आजकल चिकित्सा समुदाय में शहद पर काफी वैज्ञानिक शोध चल रहा है जो हमारे पूर्वजों द्वारा सोचे गए शहद के तमाम प्रयोगों की जांच कर के उन्हें पुष्ट कर रहा है।
शहद आपके खून के लिए अच्छा है
शहद शरीर पर अलग-अलग तरह से असर डालता है, जो इस पर निर्भर करता है कि आप उसका सेवन कैसे करते हैं। अगर शहद को गुनगुने पानी में मिलाकर पिया जाए तो उसका खून में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की संख्या पर लाभदायक असर पड़ता है। लाल रक्त कोशिकाएं मुख्य रूप से शरीर के विभिन्न अंगों तक खून में ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। शहद और गुनगुने पानी का मिश्रण खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है, जिससे एनीमिया या खून की कमी की स्थिति में लाभ होता है। आयरन की कमी यानी एनीमिया की स्थिति तब आती है जब आहार में लौह तत्व को कम मात्रा में ग्रहण किया जाता है या शरीर उसे पर्याप्त रूप से सोख नहीं पाता। इससे रक्त की ऑक्सीजन ढोने की क्षमता प्रभावित होती है। ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम होने से थकान, सांस फूलना और कई बार उदासी और दूसरी समस्याएं होती हैं। शहद रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को बढ़ाते हुए इन समस्याओं को कम कर सकता है।
खून में ऑक्सीजन का होना बेहद जरूरी होता है। आपका शरीर कितना स्वस्थ है या बीमारी के बाद कितनी जल्दी खुद को ठीक कर पाता है, यह आपके खून में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा पर निर्भर करता है। खासकर महिलाओं को इस मामले में खास ख्याल रखने की जरूरत होती हैं, क्योंकि उन्हें हर महीने मासिकचक्र से गुजरना पड़ता है। चूंकि हर महीने उनके शरीर से एक खास मात्रा में खून बाहर निकल जाता है, इसलिए एनेमिया की संभावना उनमें पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा पाई जाती है। अगर मस्तिष्क को उचित मात्रा में खून नहीं मिलेगा तो शरीर और दिमाग को जैसा काम करना चाहिए, वे वैसे नहीं कर पाएंगे।
शहद : रक्तचाप में फायदेमंद
शहद का नियमित सेवन सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है। अगर आपको निम्न रक्तचाप की शिकायत है और अगर आप नीचे बैठे-बैठे अचानक उठने की कोशिश करते हैं तो आपको चक्कर आ जाते हैं। निम्न रक्तचाप का मतलब दिमाग में ऑक्सीजन का कम मात्रा में पहुंचना है। इसी तरह से अगर आप अपना सिर नीचे करते हैं और आपको चक्कर आते हैं तो इसका मतलब है कि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है। या तो उच्च रक्तचाप की वजह से या फिर ऑक्सीजन की कमी की वजह से आपको चक्कर आते हैं।
शहद का सेवन हमारे शरीर के इन असंतुलनों को दूर करता है। शरीर में रक्त का दबाव शरीर की जरूरतों पर निर्भर करता है। लोगों को लगता है कि उच्च रक्तचाप एक बीमारी है, लेकिन सच्चाई यह नहीं है। दरअसल, शरीर अपनी जरूरतों के हिसाब से खून का दबाव तय करता है। अगर किसी कारण वश शरीर को सामान्य रूप से ज्यादा ऑक्सीजन या पोषक तत्वों की जरूरत होती है या फिर खून की गुणवत्ता वैसी नहीं होती, जैसी होनी चाहिए तो शरीर का खून पंप करने वाला पंपिंग सिस्टम ज्यादा खून पंप करना शुरू कर देता है। इसके लिए अंगों में शीघ्र और तेज प्रवाह के लिए दिल तेजी से खून को पंप करता है, जिससे खून का दबाव बढ़ता है।
निम्न रक्तचाप के पीछे भी वजह होती है, जैसे शरीर को ही निम्न दबाव की जरूरत हो सकती है या फिर जन्मजात वजहों से ही दिल इतना मजबूत नहीं होता कि वह शरीर की जरूरत के मुताबिक ज्यादा खून पंप कर पाए। ये भी हो सकता है कि शरीर के परिसंचरण तंत्र यानी सर्कुलेटरी सिस्टम में कोई दिक्कत हो अथवा खून की रासायनिक संरचना के चलते ऐसा हो रहा हो। अकसर एक साथ कई वजहों के चलते ऐसा होता है। ठीक इसी तरह उच्च रक्तचाप के कई परिणाम सामने आते हैं, लेकिन शुरु में तो उच्च रक्तचाप खुद ही एक परिणाम है- यह एक परिणाम है, कारण नहीं है।
योग का नियमित अभ्यास करने वाले व शरीर को खास तरह की प्रक्रिया में ढालने वाले लोगों के लिए अपने सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। शहद का नियमित सेवन इस संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको अपेक्षा कृत ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है।
 दिल की देखभाल में फायदेमंद
एक अनार का ताजा रस लेकर उसमें एक बड़ा चम्मच शहद मिलाएं। रोजाना सुबह खाली पेट लें।
खजूर में सुई चुभाते हुए उसमें छेद करें। उसे शहद में डुबा दें और दिन में दो बार 2-4 खजूर खाएं।
कीमोथैरेपी में असरदायक
इसके भी कुछ प्रारंभिक प्रमाण हैं कि शहद कीमोथैरेपी के मरीजों में श्वेत रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की संख्या को कम होने से रोक सकता है। एक छोटे प्रयोग में कीमोथैरेपी के दौरान कम डब्ल्यूबीसी संख्या के जोखिम वाले 40 फीसदी मरीजों में उपचार के तौर पर दो चम्मच शहद पीने के बाद वह समस्या फिर से नहीं उभरी।
सर्दी जुकाम के लिए शहद के उपचार
अगर आप सर्दी-जुकाम से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं या आपको हर सुबह बंद नाक से जूझना पड़ता है, तो नीम, काली मिर्च, शहद और हल्दी का सेवन काफी फायदेमंद हो सकता है। यहां कुछ सरल उपचार दिए गए हैं:
विकल्प 1:
काली मिर्च के 10 से 12 दानों को दरदरा कूट लें और उन्हें दो छोटे चम्मच शहद में रात भर भिगो कर रखें। सुबह खूब अच्छी तरह चबाते हुए काली मिर्च के दाने खा लें। आप शहद में थोड़ा हल्दी भी मिला सकते हैं।
विकल्प 2:
नीम के पत्तों का पेस्ट बना लें और उस पेस्ट से एक कंचे के आकार की गोली बनाएं। उस गोली को शहद में डुबाकर हर सुबह खाली पेट निगल लें। अगले 60 मिनट तक कुछ न खाएं ताकि नीम आपके शरीर में फैल जाए। इससे दूसरी तरह की एलर्जी जैसे त्वचा या किसी खाद्य पदार्थ से होने वाली एलर्जी में भी लाभ मिलता है। नीम में बहुत से औषधीय गुण हैं और यह आदत बहुत ही लाभदायक है। अगर आपको नीम के सामान्य पत्ते ज्यादा कड़वे लगते हैं, तो नीम के कोमल पत्तों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
शहद पाचन में मदद करता है
शहद कब्ज, पेट फूलने और गैस में लाभकारी होता है क्योंकि यह एक हल्का लैक्सेटिव है। शहद में प्रोबायोटिक या सहायक बैक्टीरिया भी प्रचुर मात्रा में होते हैं जो पाचन में मदद करते हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाते हैं और एलर्जी को कम करते हैं। टेबल शुगर की जगह शहद का इस्तेमाल आंतों में फंगस से पैदा हुए माइकोटॉक्सिन के विषैले प्रभावों को कम करता है।
मधुमेह के दौरान शहद
क्या मधुमेह के मरीजों के लिए शहद फायदेमंद है? यह सवाल आपको थोडे़ समय के लिए भ्रमित कर सकता है, लेकिन हम आपको बता दें कि डायबिटीज के मरीज इसका सेवन कर सकते हैं। मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए आप कई प्रकार से शहद का सेवन कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल
एक चम्मच शहद के साथ तीन चम्मच तुलसी, नीम और हल्दी पाउडर को अच्छी तरह मिला लें।
रोज सुबह एक चम्मच खाली पेट लें।
इस प्रक्रिया को एक महीने तक दोहराएं।
इसके अलावा आप आधा चम्मच शहद एक चम्मच दही के साथ ले सकते हैं।
कैसे है लाभदायक
हनी में काफी मात्रा में माइक्रो न्यूट्रिएंट पाए जाते है, जो मधुमेह के पीड़ित लोगों के लिए काफी फायदेमंद माने गए हैं। नियमित रूप से इसका सेवन हाइपरग्लेसेमिया (उच्च रक्त शर्करा) को कम कर देता है (4)। हाइपरग्लेसेमिया वो स्थिति होती है, जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। इस स्थित में शरीर में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है।
कोलेस्ट्रॉल को करता है कम
कोलेस्ट्रॉल एक वसा जैसा पदार्थ है, जो शरीर की सभी कोशिकाओं में पाया जाता है। यह शरीर में हार्मोंस को विकसित करने और कोशिकाओं को स्वस्थ्य रखने में मदद करता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा शरीर के लिए घातक साबित हो सकती है। कोलेस्ट्रॉल के बढ़ जाने के कारण खून गाढ़ा हो जाता है और हार्ट अटैक व अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है । यहां हम बता रहे हैं कि कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए किस प्रकार करें शहद का इस्तेमाल।
कैसे करें इस्तेमाल
आप ग्राइंडर की मदद से एक प्याज का रस निकाल लें और उसमें शहद (आवश्यकता अनुसार) घोल लें। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए इस मिश्रण को रोज सुबह-शाम लें।
आप प्याज की जगह दालचीनी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। दालचीनी पाउडर (तीन चम्मच) को गर्म पानी (एक गिलास) के साथ शहद (तीन चम्मच) मिलाकर पीने से बढ़ते कोलेस्ट्रॉल पर काबू पाया जा सकता है।
यह प्रक्रिया आप 15 दिनों तक दोहराएं।
कैसे है लाभकारी
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है। हनी में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नहीं होती और इसका दैनिक सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को काफी कम कर देता है। शहद में पोटेशियम और सोडियम जैसे महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए लाभदायक होते हैं 

एंटी-एजिंग
शहद में एंटी-एजिंग गुण होते हैं, जो स्किन में होने वाली झुर्रियों और रिकंल्स की समस्या को रोक देता है। इसके साथ ही शहद खाने या लगाने से मृत कोशिकाओं में जान आ जाती है।
सांवलापन करें दूर
गोरी रंगत पाने के लिए शहद, दूध, पपीता और मिल्क पाउडर मिलाकर चेहरे पर लगाएं और फिर सूखने पर चेहरा धो लें। रोजाना इस पैक को लगाने से त्वचा की रंगत निखर जाएगी।
बालों से जुड़ी समस्याएं
शहद में जैतून का तेल मिक्स करके रात को सोने से पहले बालों के किनारों और स्कैलप पर लगाएं। सुबह बालों को शैम्पू से धोएं। हफ्ते में कम से कम 2 बार ऐसा करने से आपकी दो-मुंहे बाल, डैंड्रफ और रूखे-बेजान बालों की समस्या दूर हो जाएगी।
वजन करे कम
एक स्टडी में बताया गया है कि शहद भूख को नियंत्रित करता है, जिससे वजन कम होता है। स्टडी में यह भी बताया गया है कि रात को सोने से पहले शहद का सेवन करने से ज्यादा कैलोरी बर्न होती हैं। इसके अलावा आप चाय, कॉफी या किसी भी वेट लूज ड्रिंक में चीनी की बजाए शहद का इस्तेमाल करें। इससे वजन कंट्रोल में रहेगा।
हड्डियों को करता है मजबूत
हनी का इस्तेमाल आंतरिक और बाहरी दोनों रूपों में किया जा सकता है। औषधीय गुणों से परिपूर्ण शहद महिलाओं को होने वाली हड्डियों की समस्याओं में खासकर कारगर है।
आप दो चम्मच हनी सुबह और रात में सोने से पहले ले सकते हैं।
या फिर आप हनी (दो चम्मच) एक गिलास गर्म पानी के साथ ले सकते हैं।
शहद (एक चम्मच) को आप दूध (एक गिलास) के साथ भी ले सकते हैं। दूध में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों के लिए जरूरी है। आप रात को सोने से पहले यह मिश्रण ले सकते हैं।
ट्यूलैंग शहद को रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को होनी वाली ऑस्टियोपोरोसिस तकलीफ का उपचार करने में कारगर माना गया है। शहद में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व हड्डियों के लिए काफी लाभदायक होते हैं
। ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी स्थिति होती है, जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
.बढ़ाता है रोग प्रतिरोधक क्षमता
रोग प्रतिरोधक क्षमता सुधारने और उसे बढ़ाने के लिए शहद का सेवन किया जा सकता है। जानिए, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए शहद का सेवन कैसे करें ?
कैसे करें इस्तेमाल
एक कप गर्म पानी में एक चम्मच हनी और आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं।
कैसे है लाभदायक
हनी के एंटीऑक्सीडेंट और जीवाणुरोधी गुण पाचन तंत्र में सुधार करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट का एक बड़ा स्रोत है, जो शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने में मदद करता है
कटने, जलने और घाव के लिए शहद
कटने, जलने या घाव के लिए शहद का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है। नीचे जानिए, धाव व चोट के लिए शहद के इस्तेमाल करने का तरीका।
कैसे करें इस्तेमाल
सबसे पहले चोट या घाव की जगह को साफ पानी से धो लें और कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें।
अब शहद को घाव पर अच्छी तरह लगाएं और पट्टी बांध लें।
शहद का प्रयोग उतना करें, जिससे कि घाव या चोट सही से ढक जाए।
पांच-छह घंटे बाद शहद लगाने की प्रक्रिया फिर से दोहराएं। अगर चोट गंभीर है, तो आप डॉक्टर के पास जरूर जाएं।
कैसे है लाभदायक
यह प्राकृतिक पदार्थ घाव और चोट को भरने के लिए एक प्रभावशाली औषधी के रूप में कार्य करता है। शहद का इस्तेमाल शरीर के किसी भाग के जल (बर्न्स) जाने पर भी किया जाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और हिलिंग तत्व संक्रमण को रोकने का काम करते हैं
शहद त्वचा और सिर की खाल के संक्रमणों से लड़ता है।
त्वचा और सिर की खाल के लिए भी शहद बहुत फायदेमंद होता है। 30 मरीजों पर किए गए एक छोटे स्तर के अध्ययन, जिसमें सेबोरिक डर्माटाइटिस और रूसी के उपचार पर शहद के प्रभावों की जांच की गई थी, इसमें प्रतिभागियों ने हर दूसरे दिन 2-3 मिनट तक अपने समस्याग्रस्त क्षेत्रों पर पतले अपरिष्कृत(अनप्रोसेस्ड) शहद से हल्की मालिश की। शहद को तीन घंटे तक छोड़ दिया गया, फिर गुनगुने पानी से धो दिया गया। सभी मरीजों को इस उपचार से लाभ दिखा। एक सप्ताह के भीतर खारिश में राहत मिली और स्केलिंग गायब हो गई, दो सप्ताह में जख्म गायब हो गए। मरीजों के बाल गिरने की समस्या में भी सुधार आया। इसके अलावा जिन मरीजों ने सप्ताह में एक बार शहद लगाते हुए छह माह तक उपचार जारी रखा, उन्हें यह समस्या दोबारा नहीं हुई।

शहद चीनी से कम नुकसानदायक है
शरीर पर सफेद चीनी के हानिकारक प्रभावों के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। शहद उसका एक बढ़िया विकल्प है जो उतना ही मीठा है मगर उसका सेवन अहानिकर है। हालांकि शहद के रासायनिक तत्वों में भी सिंपल शुगर होती है मगर वह सफेद चीनी से काफी भिन्न होती है। उसमें करीब 30 फीसदी ग्लूकोज और 40 फीसदी फ्रक्टोज होता है यानि दो मोनोसेकाराइड या सिंपल शुगर और 20 फीसदी दूसरे कांप्लेक्स शुगर होते हैं। शहद में एक स्टार्ची फाइबर डे‍क्सट्रिन भी होता है। यह मिश्रण शरीर में रक्त शर्करा का स्तर संतुलित रखता है।
खांसी में फायदेमंद
साल 2012 में हुई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रोजाना 2 चम्मच शहद खाने से खांसी में आराम मिलता है।साथ ही इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होने के कारण इसका सेवन इंफेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया को भी खत्म करता है।
शहद बच्चों को गहरी नींद सोने में मदद करता है
कई अध्ययनों के शुरुआती नतीजे दर्शाते हैं कि शहद से बच्चों की नींद गहरी हो सकती है। माता-पिता की राय पर आधारित इस अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि शहद से रात के समय बच्चों में खांसी कम हुई और उन्हें अधिक गहरी नींद सोने में मदद मिली।
ध्यान में रखने लायक बातें
जो शहद गहरे रंग का होता है, उसमें ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट होते हैं।
शहद खराब नहीं होता और उसे ठीक से बंद करके रखने पर लंबे समय तक रखा जा सकता है।
पुरातत्वविज्ञानियों को मिस्र के प्राचीन शहर थेब्स में फेरों की कब्रों में और तूतनखामन की कब्र में शहद के सीलबंद जार मिले हैं। यह पता नहीं चला है कि पुरातत्वविज्ञानियों ने उस शहद का क्या किया!
एक साल से कम उम्र के शिशुओं को शहद नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि उसमें बोटुलिज्म बैक्टीरिया के जीवाणु हो सकते हैं जिसकी वजह से शिशु बीमार हो सकता है। ये जीवाणु धूल और मिट्टी में पाए जाते हैं, जो शहद में जा सकते हैं। शिशु का शरीर इस तरह के संक्रमण से अपना बचाव करने के लिए तैयार नहीं होता है।
एक और ध्यान रखने लायक बात यह है कि मधुमेह के मामले में शहद सफेद चीनी से बहुत अलग नहीं है। दोनों ही रक्त शर्करा का स्तर बढ़ाते हैं और मधुमेह के रोगियों को दोनों में उतना ही ध्यान रखना चाहिए।
आयुर्वेद और सिद्ध में शहद का इस्तेमाल
शायद किसी ने शहद के लाभों को इतनी गहराई में नहीं खोजा है, जितना कि भारतीयों ने। शहद मानवजाति के लिए प्रकृति का उपहार माना गया और उसे हर रसोईघर का एक अनिवार्य अंग समझा गया। 12 महीने से ज्यादा उम्र के किसी भी व्यक्ति के लिए उसे आहार का एक अहम हिस्सा माना गया। शहद को एक सुपाच्य खाद्य पदार्थ माना जाता था जिसे इंसान आसानी से पचा सकते हैं। आयुर्वेद और सिद्ध दोनों पद्धतियों में शहद का एक इस्तेमाल औषधियों के एक वाहक के रूप में किया गया। शहद के साथ मिलाने पर औषधि आसानी से और तेजी से शरीर में समा जाती है और रक्त प्रवाह के द्वारा पूरे शरीर में फैल जाती है। कहा जाता है कि शहद किसी औषधि की क्षमता को भी बरकरार रखती है और उसके असर को लंबा करती है।
सिद्ध ग्रंथों में ऊष्णता संबंधी समस्याओं, अत्यधिक कफ, उल्टी, गैस समस्याओं और रक्त में अशुद्धियों के उपचार के अंग के रूप में शहद को लेने का सुझाव दिया गया है। सिद्ध ग्रंथों में सात अलग-अलग तरह के शहद की पहचान की गई है, जिसमें घने पहाड़ी वनों, जिन्हें मलयतन या पहाड़ी शहद कहा जाता है, से एकत्रित शहद को सबसे ज्यादा औषधीय महत्व का माना जाता है। इस शहद में कई औषधीय पौधों के गुण होते हैं, जिनसे मधुमक्खियां रस या पराग लेती हैं।
शहद के प्रयोग और पारंपरिक उपचार
शहद जल
एक गिलास सामान्य तापमान वाले जल में 1 से 3 छोटे चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार लेने पर ऊतकों को पोषण मिलता है और नर्वस सिस्टम की कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है।
एक गिलास गुनगुने पानी में दो-तीन छोटे चम्मच शहद मिलाकर लेने से तत्काल शक्ति मिलती है और वजन कम करने में मदद मिलती है।

गुड खाने के स्वास्थ्य लाभ



भारत में ज्यादातर लोग भोजन के बाद गुड़ लेना पसंद करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वाद के साथ-साथ इसमें सेहत के कई राज छुपे हैं। गुड़ आपकी पेट से संबंधित बीमारियों को दूर करता है। इससे पाचन तंत्र मजबूत बनता है और त्वचा में भी निखार आता।
गुड़ स्‍वाद का ही नहीं बल्‍कि सेहत का भी खजाना है. ऐसा इसलिए कहा जाता है क्‍योंकि अकसर डॉक्‍टर बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए मीठे खासतौर से चीनी से दूर रहने की सलाह देते हैं, लेकिन गुड़ के साथ ऐसा कोई बंधन नहीं है. गुड़ न सिर्फ खाने में टेस्‍टी है बल्‍कि यह कई औषध‍िय गुणों से भरपूर है. यह एक ऐसा सुपर फूड है जिसके फायदों के बारे बहुत कम लोग ही जानते हैं. आमतौर पर लोग सर्दियों के मौसम में ही इसका प्रयोग करते हैं, जबकि इसे साल भर खाया जा सकता है और शरीर को इसे ढेरों लाभ भी मिलते हैं. इसे आपको अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए
ब्लड प्रेशर करे नियंत्रित-
गुड़ में सोडियम और पोटेशियम पाए जाते हैं। ये शरीर में एसिड की मात्रा को कंट्रोल करने में सहायक होते हैं जिस वजह से ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है।
पेट के लिए गुणकारी
गुड़ पेट से संबंध‍ित कई समस्‍याओं का रामबाण इलाज है. अगर आपको गैस या एसिड‍िटी की श‍िकायत है तो गुड़ खाने से लाभ म‍िलेगा. वहीं, गुड़, सेंधा नमक और काला नमक मिलाकर खाने से खट्टी डकारों से छुटकारा मिल जाता है. भोजन के बाद गुड़ खाने से डाइजेशन अच्‍छा रहता है. गुड़ खाने से भूख भी खुलती है.
 दूर करे खून की कमी
गुड़ आयरन का बहुत बड़ा स्रोत है. अगर आपका हिमोग्‍लोबिन कम है तो रोजाना गुड़ खाने से तुरंत लाभ मिलने लगेगा. गुड़ खाने से शरीर में लाल रक्‍त कोश‍िकाओं की मात्रा बढ़ जाती है. यही वजह है कि प्रेग्‍नेंट महिलाओं को डॉक्‍टर गुड़ खाने की सलाह देते हैं. एनिमिया के मरीजों के लिए तो गुड़ अमृत के समान है.
शरीर बनेगा मजबूत और एक्टिव
गुड़ शरीर को मजबूत और एक्टिव बनाए रखता है. शरीरिक कमजोरी दूर करने के लिए दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से ताकत आती है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है. अगर आपको दूध नहीं पसंद है तो एक कप पानी में पांच ग्राम गुड़, थोड़ा सा नींबू का रस और काला नमक मिलाकर सेवन करने से आपको थकान महसूस नहीं होगी.
त्‍वचा की देखभाल
आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि गुड़ आपकी त्‍वचा को साफ रख उसकी देखभाल में अहम भूमिका निभाता है. गुड़ शरीर से हानिकारक टॉक्‍सिन बाहर निकालने में मददगार है. इससे आपकी त्‍वचा साफ और स्‍वस्‍थ बनी रहती है. रोजाना गुड़ खाने से मुंहासों से छुटकारा मिल जाता है और चेहरा ग्‍लो करने लगता है.
टिप्पणियां
सर्दी-जुकाम में कारगर
गुड़ सर्दी-जुकाम भगाने में काफी असरदार है. काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-जुकाम में आराम मिलत है. अगर किसी को खांसी की श‍िकायत है तो उसे चीनी के बजाए गुड़ खाना चाहिए. गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर खाने से गले की खराश और जलन में राहत मिलती है.
जोड़ो में ना होने दे दर्द-
सर्दियां आते ही लोगों को जोड़ो के दर्द की शिकायत होने लगती है। गुड़ आपको इस दर्द से राहत दिलाता है। आप गुड़ को अदरक के साथ खा सकते हैं या चाहे तो एक ग्लास दूध के साथ भी आप इसे ले सकते हैं। ये हड्डियों को मजबूत बनाता है।
आंखों के लिए फायदेमंद
गुड़ का सेवन आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है. गुड़ खाने से आंखों की कमजोरी दूर होती है. यही नहीं गुड़ आंखों की रोशनी बढ़ाए रखने में बहुत मददगार है.
दिमाग के लिए गुणकारी
गुड़ आपके मूड को अच्‍छा बनाने का काम भी करता है. यही नहीं अगर आपको माइग्रेन की श‍िकायत है तो रोजाना गुड़ खाने से बहुत फायदा होगा. नियमित रूप से गुड़ खाने से आपका दिमाग मजबूत बना रहेगा और याद्दाश्‍त भी अच्‍छी रहेगी.
आसानी से पचाता है खाना-
गुड़ पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। इसे खाने से पेट में गैस नहीं बनती और ना ही कब्ज की शिकायत रहती है।
पीरिड्स के दर्द से राहत-
पीरिड्स के दौरान अक्सर महिलाएं चिड़चिड़ी हो जाती हैं। गुड़ का सेवन आपको इस चिड़-चिड़ेपन से दूर रखता है और दर्द से भी राहत दिलाता है।
कान का दर्द मिटाए-
गुड़ को घी के साथ गर्म करके खाएं इससे कान का दर्द छूमंतर हो जाएगा।
गले की खराश करे दूर-
गुड़ को अदरक के साथ गर्म करके खाने से गले की खराश दूर होती है।
लिवर के लिए-
ये हमारे खून से हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकालता है और शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर बनाता है। इससे हमारा लिवर स्वास्थ बना रहता है।
आयरन का स्त्रोत-
गुड़ में आयरन की भरपूर मात्रा पाई जाती है। एनिमिया से ग्रस्त लोगों के लिए ये बहुत फायदेमंद रहता है।
मिटाए थकान-
जब भी आप थकान महसूस करें तो गुड़ खा लें। ये हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
दमा मरीजों के लिए-
गुड़ में एंटी एलर्जिक गुण पाए जाते हैं। इस वजह से ये अस्थमा रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होता है। आप गुड़ और तिल के लड्डू बनाकर खा सकते हैं। साथ ही ये शरीर के तापमान को भी नियंत्रित करता है।

अजवाईन के गुण व स्वास्थ्य लाभ


अजवाइन ऐसी चीज है, जो न सिर्फ आपके खाने का जायका बढ़ाती है, बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी ठीक रखती है। यही कारण है कि भारतीय भोजन में अजवाइन का अधिक इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, पेट में दर्द होने या गैस बनने पर बड़े-बुजुर्ग भी एक चुटकी अजवाइन खाने की सलाह देते हैं। यकीनन, यह सलाह काम आती है और असमय उठे पेट दर्द से राहत मिलती है।
अजवाइन (Ajwain) को हमने हमेशा ही घरों में मसाले के रूप में उपयोग करते हुए देखा है। लेकिन अजवाइन एक औषधीय जड़ी बूटी है इसलिए आपको अजवाइन के फायदे, गुण, लाभ और नुकसान की पूरी जानकारी आपको होना चाहिए। क्‍योंकि भारत जैसे देशों में अजवाइन को विशेष मसाले के रूप में व्‍यापक रूप से उपयोग किया जाता है। अजवाइन के फायदे विशेष रूप से पाचन या पेट संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए जाने जाते हैं। अजवाइन का इस्‍तेमाल कई प्रकार की समान्‍य और गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए किया जाता है।
अजवाइन के स्‍वास्‍थ्‍य लाभों में पेट के दर्द, ऐंठन, आंत्र की गैस, अपच, उल्टी, दस्त, साँस लेने में परेशानी और पेट का भारीपन, स्पर्म की कमी को दूर करने वाली, वीर्य को बढ़ाने वाली, दिल के लिए फायदेमंद, कफ को दूर करने वाली, गर्भाशय को उत्तेजना देने वाली, बुखार को दूर करने वाली, उल्टी, पेट के रोग, जोड़ो मे दर्द इन सब समस्याओं को दूर करने वाली एक बहुत ही अच्छी औषधि है। जो विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के लिए यह एक सामान्य घरेलू उपाय है। यह दस्‍त, कब्‍ज, किड़नी की समस्‍या, सर्दी, खुजली, यौन कमजोरी, मासिक धर्म की परेशानियों आदि को भी ठीक कर सकती है। 
हम सभी अजवाइन का उपयोग मसाले के रूप में करते हैं जबकि आयुर्वेद इसे औषधी मानता है। अजवाइन का वैज्ञानिक नाम ट्रेकिस्पर्मम अम्मी (Trachyspermum ammi) है। अजवाइन का पौधा छोटा झाड़ी की तरह दिखाई देता है जो आमतौर पर हरे रंग का होता है। अलग अलग जगहों पर अजवाइन को कई नामों से जाना जाता है जैसे कि विशप के खरपतवार, थाइमोल के बीज या अजवाइन, तेलुगु में इसे वामु, तमिल में ओमम, मलयालम में अयोधमकम और कन्नड़ में ओम कलुगलु आदि नामों से जाना जाता है। अजवाइन के बीज आकार में छोटे और हल्‍के हरे रंग के होते हैं जो भोजन का स्‍वाद बढ़ाने और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छे होते हैं।
अजवाइन की तासीर
अपने विशेष स्‍वाद और गुणों के कारण अजवाइन का उपयोग विभिन्‍न प्रकार की औषधी और पूरक औषधी के रूप में किया जाता है। अजवाइन की तासीर गर्म होती है जिसके कारण अजवाइन का स्‍वाद तीखा होता है। इन्‍हीं गुणों के कारण ही अजवाइन का उपयोग विशेष रूप से सर्दी से बचने और गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं के लिए किया जाता है।
अजवाईन के स्वास्थ्य लाभ-
स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त करने के लिए अजवाइन का उपयोग कई प्रकार से किया जाता है। अजवाइन के फायदे संक्रामण से फैलने वाली बीमारियों को रोकने में मदद करते हैं। इसके अलावा अजवाइन के फायदे महिला स्‍वास्‍थ्‍य और पुरुषों के लिए भी होते हैं। पुरुषों और महिलाओं में कामेच्‍छा को बढ़ाने के लिए अजवाइन का उपयोग प्राचीन समय से किया जा रहा है। इसके अलावा यह महिलाओं में होने वाले हार्मोन असंतुलन को भी नियंत्रित करने में सहायक होता है। आइए विस्‍तार से जानते हैं मानव स्‍वास्‍थ्‍य के औषधीय अजवाइन के फायदे क्‍या हैं।
यौन कमजोरी दूर करे
आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन के बीज का सेवन यौन कमजोरी को दूर करने में मदद कर सकता है। जो लोग यौन कमजोरी का समना करते हैं उनके लिए यह एक प्रभावी औषधी है। इसके लिए आपको अजवाइन के बीज और कुछ इमली के बीजों को शुद्ध मक्खन में भूनना है। इसके बाद इस मिश्रण को पीस कर एक पाउडर बना लें। इस मिश्रण की 1 चम्‍मच मात्रा 1 गिलास दूध और शहद के साथ नियमित रूप से सेवन करें। यह आपकी यौन इच्‍छा में कमी को दूर कर यौन स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने में मदद करता है। अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त करने के लिए आप इसे प्रतिदिन रात में सोने से पहले सेवन करें।
कब्‍ज को ठीक करे
पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए अजवाइन का उपयोग किया जा सकता है। विशेष रूप से अजवाइन कब्‍ज की समस्‍या का प्रभावी इलाज कर सकती है। अजवाइन के औषधीय गुण पेट में होने वाले असंतुलन का ठीक कर मल त्‍याग को आसान बनाने मे सहायक होता है। यदि आप कब्‍ज रोगी हैं तो अजवाइन के गुणों से लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।
अपच, दस्त और गैस में
100 ग्राम पीसी हुई अजवाइन में 15 ग्राम पिसा हुआ सेंधा नमक मिलाकर चूर्ण बनाएं। इसकी आधा-आधा चम्मच दो बार खाने के बाद पानी में मिलकर पी लें। इस तरह अपच, दस्त और गैस अजवाइन का सेवन से सभी में लाभ होंगे।
डायबिटीज में
रोज सुबह उठने पर अजवाइन का पानी पीने से डायबिटीज की समस्या दूर होती है। सुबह उठकर आप अजवाइन का पानी का सेवन करेंगे तो ऐसा करने से डायबिटीज की समस्या कुछ ही समय बाद दूर हो जाएगी।\
खट्टी डकारों के लिए
अजवाइन का सेवन करने के लिए अजवाइन, सेंधा नमक, हींग और सूखे आवलें को लेकर सबको एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 1 ग्राम की मात्रा को सुबह और शाम के समय शहद के साथ लेने पर जो खट्टी डकार आ रही थी उनका आना बंद हो जाता है।
हृदय के लिए
पारंपरिक रूप से मसाले के रूप में उपयोग की जानेवाल अजवाइन हृदय के लिए लाभकारी होती है। नियमित रूप से उपभोग करने पर यह दिल संबंधी बीमारियों से हमे बचा सकती है। आप अपने हृदय को स्‍वस्‍थ रखने के लिए अजवाइन के बीज को गर्म पानी के साथ सेवन कर सकते हैं। इसके लिए आप आप 1 चम्‍मच अजवाइन लें और इसे 1 गिलास पानी कुछ देर के लिए गर्म करें। फिर इसे ठंडा करके सीधे ही पी लें। अजवाइन का पानी सीने के दर्द को ठीक करने में भी फायदा मिलता है। सीने के दर्द से जल्‍दी राहत पाने के लिए आप 1 चम्‍मच अजवाइन के साथ गुड़ का भी सेवन कर सकते हैं।
महिलाओं के लिए
कैरम बीजों का उपयोग महिला स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में भी मदद करता है। महिलाओं के लिए मासिक धर्म चक्र की समस्‍याएं बहुत ही कष्‍टदायक होती है। लेकिन अजवाइन के औषधीय गुण महिलाओं को मासिक धर्म के समय होने वाली परेशानियों से बचा सकते हैं। अजवाइन के बीज एक तंत्रिका टॉनिक के रूप में कार्य करते हैं। इस तरह से यह महिलाओं को होने वाली मासिक ऐंठन से छुटकारा दिला सकता है। इस तरह से अजवाइन के बीज के फायदे महिलाओं के लिए लाभकारी होते हैं।
स्‍तनपान के लिए
जो महिलाएं स्‍तनपान करा रही हैं उनके लिए अजवाइन का उपयोग फायदेमंद होता है। अजवाइन का उपयोग स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध उत्‍पादन की क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। इसके लिए उन्‍हें अजवाइन और सौंफ के बीज को पानी में मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसके लिए वे 1 चम्‍मच सौंफ और 1 चम्‍मच अजवाइन को रात में 1 गिलास पानी में भिगों दें और फिर अगली सुबह इसका सेवन करें। यह मिश्रण गर्भाशय को साफ करने और दूध उत्‍पादन को बढ़ाने में सहायक होता है। इस तरह से स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अजवाइन के औषधीय गुण लाभकारी होते हैं।
मासिक धर्म में
अगर मासिक धर्म में अधिक दर्द होता हो तो 4 चम्मच कच्ची अजवाइन और 2 चम्मच सेंधा नमक पीसकर, मिलाकर मासिक धर्म के दिनों में आधा-आधा चम्मच तीन बार रोजाना लें। दर्द बंद होने पर इसे लेना छोड़ दें।
अजवाइन और नींबू
पेट संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए प्राचीन समय से ही अजवाइन का उपयोग किया जा रहा है। आप पेट से संबंधित समस्‍याओं को दूर करने के लिए 3 चम्‍मच अजवाइन के बीजों को नींबू के रस में मिलाकर छाया में सुखा लें। जब ये बीज अच्‍छी तरह से सूख जाएं तो आप इन्‍हें पीस कर पाउडर बना लें। इसमें आप अपने स्‍वादानुसार थोड़ा सा काला नमक मिला दें। इसे दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। इस औषधी का सेवन कर आप भूख की कमी, पेट फूलना और अन्‍य पेट की समस्‍याओं को दूर करने में सहायक होता है। इस तरह से आप अपने पेट को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए अजवाइन और नींबू का उपयोग कर सकते हैं।
सर्दी में नाक बंद
अजवाइन में तेल होता हैं जो नाक में जमे बैक्टीरिया को ख़त्म कर देता है। बैक्टीरिया के ख़त्म हो जाने पर नाक खुल जाती हैं। सर्दी में नाक बंद होने पर अजवाइन का इस्तेमाल करने के लिए किसी बर्तन में पानी और तीन चम्मच अजवाइन डालकर उबालें। जब भाप निकलने लगे तब तौलिए से सिर ढककर मुंह को बर्तन के पास जितनी गर्मी सहन हो, उतनी दुरी पर रखें। भाप को नाक से सांस लेते हुए खींचें और मुंह खोलकर सांस बाहर निकालें इस तरह भाप में सांस लेने से नाक खुल जायेगी। और सर्दी के कारण होने वाला सिरदर्द या साइनस का दर्द भी ठीक हो जायेगा।
अजवाइन और गुड़
सर्दी होना शरीर की अशुद्धियों को साफ करने के लिए अच्‍छा है। लेकिन यह आपके स्‍वास्‍थ्‍य और व्‍यक्तिगत जीवन में परेशानियों का भी कारण बन सकती है। लेकिन आप अजवाइन का उपयोग कर सामान्‍य सर्दी के लक्षणों को दूर कर सकते हैं। अजवाइन का उपयोग सर्दी के दौरान आने वाली बलगम को आसानी से साफ कर नाक की रूकावट से बचा सकता है। इसके लिए आपको अजवाइन के बीज और गुड़ को गर्म करें। इस मिश्रण को प्रतिदिन दो बार 2-2 चम्‍मच सेवन करें। यह आपकी सर्दी और स्‍वांश संबंधी समस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर कर सकती है।
दांत और कान दर्द
कान और दांत में होने वाला दर्द बहुत ही कष्‍टदायक होता है। आप इस प्रकार के दर्द को दूर करने के लिए अजवाइन का फायदेमंद उपयोग कर सकते हैं। इस समस्‍या से बचने के लिए अजवाइन तेल की 2 बूंदें ही काफी हैं। दांत के दर्द का उपचार करने के लिए 1 चम्‍मच अजवाइन और नमक के पानी से कुल्‍ला करने से लाभ मिल सकता है। इसके अलावा आप दर्द से छुटकारा पाने के लिए अजवाइन को जलाएं और इसका धुआं मुंह में लें। यह दांत दर्द का प्रभावी इलाज है इसके अलावा आप अजवाइन के पानी का उपयोग माउथ वॉश के रूप में भी कर सकते हैं।
अजवाइन और जीरा
पेट में गैस बनना आमतौर पर सामान्‍य जीवन को प्रभावित करता है। इसका उपचार करने के लिए अजवाइन का प्रयोग फायदेमंद होता है। इसके लिए आप 1 चम्‍मच अजवाइन बीज और 1 चम्‍मच जीरा को मिलाएं। नियमित रूप से अदरक पाउडर के साथ इस मिश्रण का सेवन करने से आपको पेट की गैस से राहत मिल सकती है। यह प्राकृतिक उपचार अपच से संबंधित सभी प्रकार की समस्‍याओं को दूर करने का सबसे अच्‍छा तरीका है। आप भी अजवाइन और जीरा के लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।
अजवाइन की चाय
यदि आप अस्‍थमा रोगी हैं तो अस्‍थमा के लक्षणों को कम करने के लिए अजवाइन की चाय का सेवन करें। प्रभावी तरीके से अजवाइन की चाय अस्‍थमा का इलाज कर सकती है। इसके लिए आप 1 कप पानी में अजवाइन के कुछ बीज लें और इसे उबालें। इसके बाद इसे छानकर इसका सेवन करें। अतिरिक्‍त स्‍वाद और लाभ बढ़ाने के लिए आप इसमें शहद भी शामिल कर सकते हैं। यह तुरंत ही सर्दी से राहत दिलाने में भी सहायक होती है। यह ब्रोंकाइटिस और अस्‍थमा के इलाज में बहुत ही फायदेमंद होती है। इस तरह से आप अस्‍थमा का घरेलू उपचार करने के लिए अजवाइन की चाय का उपयोग कर सकते हैं।
गठिया का उपचार
औषधीय गुणों से भरपूर अजवाइन गठिया का इलाज करने में सहायक होता है। अजवाइन में 2 प्रकार के विशेष गुण होते हैं जो उन्‍हें गठिया के प्रभाव करने में सक्षम बनाते हैं। अजवाइन में एंटीबायोटिक गुण होते हैं जो लालिमा को कम करते हैं और सूजन से राहत दिलाते हैं। दूसरा गुण संवेदनहारी गुण है जो दर्द और सूजन दोनों से राहत दिलाते हैं। आप गठिया के घरेलू इलाज के लिए अजवाइन का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप अजवाइन के बीजों को पीस कर पाउडर बना लें। इस पाउडर को पानी में मिलाकर पेस्‍ट बनायें और अपने जोड़ों में लगाएं। विकल्‍प के रूप में आप टब में अजवाइन बीज डालें और अच्‍छी तरह से बीजों के फूलने के बाद अपने जोड़ों को टब में ड़बोएं। यह गठिया के दर्द और सूजन दोनो से राहत दिलाने में मदद करता है।
कान दर्द
कान दर्द की समस्या से राहत दिलाने में अजवाइन खास भूमिका निभाती है। अजवाइन में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो इस समस्या से राहत दिलाने में मदद करते हैं। अगर आपको कान दर्द की समस्या ज्यादा है, तो दो चम्मच तिल के तेल में दो चम्मच अजवाइन और एक चम्मच लहसुन डालकर तेल के लाल होने तक गर्म करें। फिर इसे ठंडा करके कुछ बूंदें कान में डालें। यह तेल कान में फुंसी होने पर भी लाभ पहुंचा सकता है
अजवाइन की खुराक
अजवाइन एक औषधी है जिसका सेवन हमें औषधी के अनुसार ही करना चाहिए।
क्‍योंकि अधिक या कम मात्रा में सेवन करने से हमें पर्याप्‍त लाभ प्राप्‍त नहीं हो पाते हैं।
इसके लिए हमें निश्चित मात्रा में अजवाइन का सेवन करना चाहिए।
सामान्‍य रूप से स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति को प्रतिदिन 1 से 3 ग्राम अजवाइन का सेवन करना चाहिए।
यदि चिकित्‍सीय खुराक ली जा रही है तो अजवाइन की मात्रा 2 से 4 ग्राम प्रतिदिन होनी चाहिए।
यदि आप अजवाइन के पानी का सेवन करते हैं तो इसकी मात्रा 10 से 100 मिली ग्रा. प्रतिदिन होना चाहिए।
सामान्‍य रूप से अजवाइन का सेवन करने पर यह सुरक्षित है
सावधानी-
लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में अजवाइन के दुष्‍प्रभाव भी हो सकते हैं।
गर्भवती महिलाओं को अजवाइन का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। क्‍योंकि ऐसा माना जाता है कि गर्म तासीर होने के कारण यह गर्भपात का कारण बन सकती है।
बच्‍चों के लिए अजवाइन की सही खुराक निश्चित नहीं की जा सकती है। लेकिन फिर भी आपको सलाह दी जाती है कि बच्‍चों को भी बहुत ही कम या नियंत्रित मात्रा में अजवाइन का सेवन करना च‍ाहिए।
यदि आप खून को पतला करने संबंधी दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो इस दौरान अजवाइन का सेवन न करें। यह आपके रक्‍त को और अधिक पतला बना सकता है।
थाइमोल की अच्‍छी मात्रा होने के कारण कुछ लोगों को अजवाइन का सेवन करने या उपयोग करने से त्‍वचा में जलन, खुजली या चकते आदि की समस्‍या हो सकती है।
अधिक मात्रा में अजवाइन का सेवन करने से चक्‍कर आना, उल्‍टी और मतली आदि की परेशानी भी हो सकती है।
कुछ लोगों को अजवाइन का अधिक मात्रा में सेवन पेट दर्द, मुंह के छाले और जलन आदि का अनुभव करा सकता है।

इमली के बीज के स्वास्थ्य लाभ



इमली एक स्‍वादिष्‍ट खाद्य पदार्थ है। लेकिन क्‍या आप इमली के बीज के फायदे जानते हैं। बेशक हम बहुत से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त करने के लिए इमली का उपयोग करते हैं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की इमली के बीजों में भी औषधीय गुण होते हैं। प्राचीन समय से ही इमली के बीजों को भूनकर उपयोग किया जा रहा है जो बहुत सी बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। इमली बीज के फायदे मधुमेह को रोकने, पाचन को ठीक करने, कैंसर का उपचार करने, दांतों को मजबूत बनाने, गठिया का इलाज करने और दस्‍त को ठीक करने के लिए होते हैं। इस लेख आप इमली बीज के फायदे जान सकते हैं।
आपके द्वारा उपभोग की जाने वाली इमली न केवल स्‍वादिष्‍ट होती है बल्कि औषधीय गुणों वाली भी होती है। अक्‍सर हम लोग इमली का उपयोग करने के बाद इमली के बीजों को फेंक देते हैं। लेकिन इमली के बीजों के फायदे जानकर आप ऐसा नहीं करेगें। क्‍योंकि इमली के बीज स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद तो होते ही हैं साथ ही यह आपकी त्‍वचा संबंधी बहुत सी समस्‍याओं को भी दूर कर सकते हैं। आप इमली के बीजों को सुखा कर या पाउडर बनाकर उपयोग कर सकते हैं। आइए जाने किन स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के लिए इमली के बीज का उपयोग किया जा सकता है।

कफ या गले के संक्रमण से देते हैं राहत
इमली के बीजों का पाउडर और अदरक का जूस एक साथ मिलाकर लेने से कफ या गले के संक्रमण से राहत मिलती है।
इमली के बीज मुँह में होने वाली किसी भी प्रकार की समस्या का भरपूर इलाज करते हैं।
अगर आपको मुँह से बदबू आने की समस्या है तो ऐसे में आपको इमली के बीजों से बना हुआ माउथवाश का इस्तेमाल करना चाहिए।
आप घर पर भी इमली के बीजों का माउथवाश तैयार कर सकते हैं।
इसके लिए, इमली के बीजों को पानी में उबाल लें।
10-15 मिनट तक उबालने के बाद आप इसे थोड़ी देर ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
इसके बाद आप सुबह शाम इस माउथवाश से कुल्ली कर सकते हैं।
सर्दी खांसी का उपचार
मौसम परिवर्तन और गलत खान-पान के कारण आप सर्दी और जुकाम का शिकार हो सकते हैं। लेकिन सर्दी के लक्षणों को कम करने के लिए आप इमली के बीजों का उपयोग कर सकते हैं। इमली के बीज का रस एक अच्‍छा माउथ वॉश हो सकता है। आप अपने गले की खराश से राहत पाने के लिए इमली बीज के पानी से गरारे करें। इसके अलावा इमली बीज का पानी सर्दी, खांसी और अन्‍य गले के संक्रमण से बचा सकता है। आप इस पानी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें अदरक और दालचीनी को भी मिला सकते हैं।
मधुमेह के लिए
जो लोग मधुमेह रोगी हैं उनके लिए इमली के बीज किसी औषधी से कम नहीं है। इमली के बीज रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में मदद करते हैं। मधुमेह रोगी के द्वारा इमली के बीजों का सेवन शरीर में इंसुलिन उत्‍पादन को बढ़ाता है। शरीर में उच्‍च रक्‍त शर्करा के कारण ही मधुमेह रोग होता है। इमली के बीज अल्‍फा-एमाइलेज गुणों से भरपूर होते हैं जो रक्‍त शर्करा के उचित प्रबंधन में मदद करते हैं। इस तरह से मधुमेह के लक्षणों को कम करने के लिए इमली के बीज फायदेमंद होते हैं।
पाचन के लिए
यदि आप अपच जैसी समस्‍याओं से परेशान हैं तो इमली के बीज फायदेमंद हो सकते हैं। इमली के बीज से बनाए गए काढ़े का उपयोग अपच को ठीक करने और पित्‍त उत्‍पादन को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा इमली के बीजों में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है जो पाचन संबंधी क्रिया में मदद करते हैं। नियमित रूप से इमली के बीजों का उपभोग स्‍टामाटाइटिस (stomatitis) और कब्‍ज जैसी समस्‍याओं से छुटकारा दिला सकता है। यदि आप पेट संबंधी समस्‍याओं को दूर करना चाहते हैं तो इमली के बीजों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
त्‍वचा के लिए
आप अपनी त्‍वचा की समस्‍याओं को दूर करने के लिए प्राकृतिक उपायो को अपनाना चाहिए। इमली के बीज के फायदे त्‍वचा को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में मदद करते हैं। इमली के बीज से बनाया हुआ अर्क त्‍वचा की लोच को बढ़ाने, त्‍वचा को हाइड्रेट रखने और त्‍वचा को कोमल बनाने में मदद करता है। इमली बीज के अर्क में हयालूरोनिक एसिड होता है जो कि त्‍वचा की झुर्रियों और ठीक रेखाओं को दूर करने में मदद करता है। इमली के बीज पानी में घुलनशील होते हैं इसलिए इनका उपयोग सीरम, जैल, फैशियल टोनर और मॉइश्‍चराइजर के रूप में किया जाता है। इमली के बीजों का उपयाग एंटी-एजिंग फॉमूर्ला के रूप में भी काम करता है। यदि आपको भी त्‍वचा संबंधी इसी प्रकार की कोई समस्‍या हों तो आप इमली बीज के पाउ
डर का उपयोग कर लाभ ले सकते हैं।
गठिया का इलाज
एंटी-इंफ्लामेटरी गुणों के कारण इमली के बीज हमारे लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं। इन्‍हीं गुणों के कारण ही प्राचीन समय से इमली बीज का उपयोग गठिया के दर्द और इससे जुड़ी समस्‍याओं को दूर करने के लिए किया जा रहा है। नियमित रूप से इमली के बीज का सेवन जोड़ों में स्‍नेहन को बढ़ावा देता है। इसके लिए आप भुने हुए इमली के बीज के पाउडर को पानी के साथ दिन में दो बार सेवन कर सकते हैं। यह गठिया के दर्द से राहत दिला सकता है। यदि आप भी गठिया से प्रभावित हैं तो इमली बीज के पाउडर का उपयोग कर सकते हैं।
आंखों के लिए
आप अपनी आंखों की सुरक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए इमली के बीज का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इमली के बीजों में औषधीय गुण होते हैं। आप इमली बीज का रस निकालें और अपनी आंखों को मॉइस्‍चराज रखने के लिए आई ड्राप की तरह उपयोग करें। यह आंखों के संक्रमण जैसे आंख आना (conjunctivitis) और इसी तरह की समस्‍याओं को दूर करने में मदद करता है। इमली के बीजों में पॉलीसेकेराइड (polysaccharides) होते हैं जो आंख की रक्षा करने में मदद करते हैं।
हृदय के लिए लाभकारी हैं इमली के बीज
इमली के बीजों में पोटैशियम की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। पोटेशियम रक्तचाप को संतुलित रखता है जिससे कि शरीर में हाईपरटेंशन का स्तर नियमित रहता है।
हाइपरटेंशन का स्तर नियमित रहने से नसों में रक्त का प्रवाह सही से बना रहता है। इस तरह हृदय को अतिरिक्त मात्रा में कार्य करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है और न ही उस पर किसी प्रकार का कोई भी प्रेशर पड़ता है।
यही कारण है कि इमली के बीजों में हृदय रोगों को पछाड़ने की क्षमता होती है।
गर्भावस्‍था के लिए
फाइबर की अधिक मात्रा के कारण गर्भवती महिलाओं को इमली के बीजों का सेवन लाभकारी होता है। यह महिला स्‍वास्‍थ्‍य के साथ ही भ्रूण के लिए उपयोगी माना जाता है। इसलिए गर्भावस्‍था के दौरान पाचन समस्‍याओं जैसे कब्‍ज आदि के लिए इमली बीज सेवन करने की सलाह दी जाती है
दांतों के लिए
स्‍वस्‍थ्‍य और मजबूत दांत सभी की इच्‍छा होती है। लेकिन क्‍या आपको पता है कि इमली के बीज दांतों के लिए फायदेमंद होते हैं। इमली बीज के पाउडर का उपयोग दांतों और मसूढ़ों को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में मदद करते हैं। यदि आपके दांत कमजोर हैं, या आप अधिक मात्रा में धूम्रपान करते हैं तो यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इमली के बीज निकोटीन या टार्टर की परत को दूर करने में मदद करते हैं जो दांतों की विशेष समस्‍या होती है। नियमित रूप से उपयोग किया जाने पर इमली बीज का पाउडर चाय, कॉफी, सोडा और धूम्रपान के कारण दांतों के पीलेपन को भी हटाने में मदद करते हैं। इस तरह से आप भी अपने दांतों को मजबूत करने के लिए इमली बीज के पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
हड्डियों के लिए इमली के बीजों के फायदे
हड्डियों के लिए इमली के बीज किसी वरदान से कम नहीं हैं। जब हड्डियों में मोच आ जाए या हड्डी फ्रैक्चर हो जाए तो ऐसे में इमली के बीजों से बनाया गया लेप इस समस्या का समाधान करता है।
जिस जगह पर फ्रैक्चर हो रहा हो वहाँ पर इमली के बीजों से बनाया गया पेस्ट लेप के रूप में लगा दें। यह न सिर्फ़ फ्रैक्चर हुई हड्डी को ठीक करने का कार्य करता है बल्कि दर्द से भी काफ़ी हद तक राहत देता है।
कैंसर की संभावनाओं को कम करते हैं इमली के बीज
इमली के बीजों से बनाया गया जूस कैंसर की संभावनाओं से छुटकारा देता है। इमली के बीजों में एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज़ पाई जाती हैं।
इन प्रॉपर्टीज़ के कारण शरीर में ट्यूमर कोशिकाएं या एक्स्ट्रा कोशिकाएँ नहीं बनने पाती हैं। इस तरह शरीर को कैंसर की संभावनाओं से राहत मिलती है।
*एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का हर तीसरा आदमी अवसाद का शिकार है।नपुंसकता और शीघ्र पतन जैसी बीमारियाँ हो जाने से व्यक्ति मन ही मन में बहुत ही परेशान रहता है और किसी को बता भी नहीं पाता है
वीर्य जल्दी गिरने मे 
आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी बोतल में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।
पाउडर कैसे बनाएं-
200 ग्राम इमली के बीज को घर पर भून लें। फिर इनको कूटकर छिलका निकाल लें। इसमें 200 ग्राम मिश्री मिला लें और कांच के बर्तन में रख दें।
या फिर
200 ग्राम बीजों को चार दिन पानी में भिगोकर रखें और फिर छिलके उतार कर छाया में सुखाएं। सूखने पर पीसकर 200 ग्राम मिश्री मिलाकर रख लें।
यूज कैसे करें-
इस पाउडर में से एक चम्मच डेली गर्म दूध से लें।
फायदे
◆ यह कैल्शियम और मिनरल से भरपूर होता है इसलिए हड्डियों को मजबूत करता है और जोड़ों की समस्या को भी ठीक करता है।
◆ यह कमजोरी और पुरुषों से संबधित सभी प्रकार की समस्याओं को दूर करता है।
◆ यह महिलाओं के सफेद पानी या व्हाइट डिस्चार्ज की प्रॉब्लम में भी बहुत लाभदायक है।
लेकिन कुछ लोगों के लिए इनका उपयोग हानिकारक हो सकता है।
सावधानी-
फाइबर की उच्‍च मात्रा होने के कारण अधिक मात्रा में इमली बीज का सेवन पेट संबंधी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है।
जो लोग रक्‍त पतला करने के लिए दवाओं का सेवन कर रहे हैं उन्‍हें इमली के बीज का सेवन नहीं करना चाहिए।
क्‍योंकि यह दवाओं के प्रभाव को कम कर सकता है।
यदि आप तनाव को कम करने वाली दवाओं का सेवन कर रहे हैं तब भी इमली के बीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। क्‍योंकि इमली के बीज सेरोटोनिन विषाक्‍तता (serotonin toxicity) हो सकती है।

कफ (बलगम)निकालने के घरेलू आयुर्वेदिक उपाय


छाती एव गले में जमे कफ का इलाज के नुस्खे और बलगम के उपाय:- 
अक्सर देखा गया है बदलते मौसम के कारण इन्फेक्शन, सर्दी जुखाम, ठंड लगना और वायरल फीवर के चलते गले में कफ की समस्या होने लगती है। जिसके कारण नाक का लगातार बहाना और सीने एव गले में किसी चीज़ का जमा हुआ लगना साथ ही सांस लेने में परेशानी महसूस होना और गले में खराश खिचखिच होने की समस्या हे कफ के लक्षण होते है। इस समस्या का उपचार करने के लिए लोग ज्यादा तर दवा या फिर सिरप का सहार लेते है लेकिन आप आसानी से बलगम का इलाज देसी और आयुर्वेदिक नुस्खे की मदद से कर सकते है। घरेलु उपाय से किये जाने वाले इलाज के साइड इफ़ेक्ट ना के बराबर होते है जिससे आपको इलाज करने में और भी आसानी होती है। हम आपको इस लेख में बतायेगे की छाती और गले के कफ का इलाज घरेलु उपचार से कैसे करेकफ निकालने के घरेलू उपाय जुकाम और अन्‍य ऊपरी श्वसन संक्रमण के लक्षणों को कम कर सकते हैं। कफ का आना कोई गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या नहीं है लेकिन कफ बनने का कारण लोगों की असुविधा का कारण बन सकता है। लेकिन यदि समय पर कफ का इलाज या कफ निकालने के लिए घरेलू उपाय समय पर न लिए जाएं तो गंभीर स्थिति बन सकती है। कफ (बलगम) निकालने के उपाय अपनाकर आप ब्रोन्कियल नलियों को अवरूद्ध होने और जलन को रोक सकते हैं। कफ निकालने के घरेलू उपाय आमतौर पर गले की सफाई, लगातार खांसी, नाक से पानी आना, सांस लेने में दिक्‍कत और शारीरिक कमजोरी आदि को दूर कर सकते है। छाती में कफ जमने पर क्‍या करें एक सामान्‍य प्रश्‍न है।
कफ एक मोटा और चिपचिपा पदार्थ होता है जिसे बलगम भी कहा जाता है। कफ अक्‍सर बीमार होने या जुकाम होने के दौरान गले में जमा हो जाता है। संक्रमण और प्रतिरक्षा शक्ति में कमी कफ बनने का कारण हो सकता है। हालांकि कफ या बलगम झिल्‍ली आपके श्वसंन तंत्र की रक्षा करने और स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने में सहायक होते हैं। मानव शरीर में कफ मुंह, नाक, गला, साइनस और फेफड़ों आदि में मुख्‍य रूप से होता है। कफ चिपचिपा होता है ताकि यह धूल एलर्जी और वायरस आदि को बीच में ही रोक ले। सामान्‍य रूप से कफ पतला होता है लेकिन यदि कफ अधिक गाढ़ा है तो यह जांच कराने योग्‍य है।
छाती में कफ जमने का कारण
बीमार होने के दौरान सीने में सूजन और जकड़न का अनुभव होता है। ऐसा छाती में कफ जमने का कारण होता है। छाती में कफ जमना और इसके अन्‍य लक्षणों में घरघराहट, नींद लेने में कठिनाई, गले में खराश आदि हैं। कफ का निकलना भी अक्‍सर खांसी के साथ होता है। हालांकि छाती में कफ जमना सामान्‍य है लेकिन कुछ स्थितियों में अधिक मात्रा में कफ का जमाव चिंता का कारण बन सकता है। छाती में कफ जमने के कारणों में शामिल हैं :
एसिड रिफ्लेक्‍स (acid reflux)
एलर्जी (allergies)
दमा (asthma)
बैक्‍टीरियल और वायरल संक्रमण (bacterial and viral infections)
क्रोनिक ब्रोंकाइटिस (chronic bronchitis)
क्रोनिक ऑब्‍सट्रक्टिव पल्‍मोनरी डिसीज (COPD)
सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis)
कफ निकालने के घरेलू उपाय
कफ या बलगम अक्‍सर खांसी के साथ आता है। आप छाती और गले में जमा कफ निकालने के घरेलू उपाय से इस समस्‍या को दूर कर सकते हैं। खांसी और बलगम आने का प्रमुख कारण वायरस या संक्रमण होता है। हालांकि यह कुछ दिनों में सामान्‍य रूप से ठीक हो जाता है। हालांकि आप इसके इलाज के लिए अपने डॉक्‍टर से संपर्क कर सकते हैं। सामान्‍य रूप से डॉक्‍टर कफ का कोई इलाज नहीं कर सकते हैं। लेकिन वे इसके लक्षणों को कम करने के लिए कुछ दवाएं दे सकते हैं। हालांकि कफ का इलाज करने के लिए आप घरेलू उपाय अपना सकते हैं। जो इस प्रकार हैं।
अदरक की चाय
अदरक में एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। जिसके कारण नियमित रूप से अदरक की चाय का सेवन करने पर यह प्रतिरक्षा को मजबूत करने के साथ ही मौजूद संक्रमण और विषाणुओं के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है। अदरक की चाय का सेवन करना आपके शरीर को हाइड्रेट रखने और गले की सूजन को दूर करने में मदद कर सकता है। आप कफ नाशक के रूप में अदरक की चाय का उपयोग कर सकते हैं।
लौंग की चाय
अध्‍ययनों से पता चलता है कि थाइम और लौंग (thyme and clove) दोनो में रोगाणुरोधी गुण होते हैं। इन दोनों औषधीयों के तेल टिंचर्स के रूप में काम करते हैं जो ऊपरी श्वसन संक्रमण को रोकने में प्रभावी होते हैं। कफ का इलाज करने के लिए आप उबलते पानी में अजवाइन फूल और लौंग की पत्तियां या लौंग को मिलाएं और 10 मिनिट तक पकाएं। इसके बाद इस पेय पदार्थ को ठंडा होने दें और फिर इसका सेवन करें। दिन में 1-2 कप लौंग की चाय पीने से कफ की मात्रा को कम किया जा सकता है।
गर्म पानी से स्नान
श्वसन तंत्र में ऊपरी संक्रमण को दूर करने के लिए आप भाप और गर्म शॉवर का उपयोग कर सकते हैं। भाप लेना बलगम का इलाज कर सकता है। कफ और खांसी के घरेलू उपचार के लिए भी भाप लेना सबसे अच्‍छा तरीका होता है। ऐसा करने पर आप अपने श्वसन तंत्र को शुष्‍क होने से बचा सकते हैं। इसके अलावा स्‍टीम शॉवर लेने से छाती में जमा बलगम को निकालने में भी मदद मिलती है। इसके लिए आप कम से कम 5 मिनिट तक भाप लें या गर्म शॉवर का उपयोग करें। आप अपनी स्थिति और आवश्‍यकता के अनुसार दोहरा भी सकते हैं। ऐसा करने से आपको कफ संबंधी समस्‍याओं से राहत मिल सकती है।
नींबू का रस
कफ के जमा होने से जकड़न, जलन, सूजन और दर्द जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। लेकिन गले में बलगम का इलाज नींबू के रस से किया जा सकता है। नींबू का रस गले में जमा बलगम को ढ़ीला और कमजोर करने में सहायक होता है। जिससे कफ को आसानी से बाहर किया जा सकता है। इसके अलावा नींबू के रस में विटामिन सी होता है जो जीवाणुरोधी है।
बलगम का इलाज करने के लिए आप 1 गिलास गर्म पानी में 2 चम्‍मच नींबू का रस और 1 बड़ा चम्‍मच शहद मिलाएं। इस मिश्रण का सेवन दिन में कम से कम 2-3 बार करें। ऐसा करने पर कफ उत्‍पादन को कम किया जा सकता है। इसके अलावा विकल्‍प के रूप में आप नींबू के टुकड़े में काली मिर्च पाउडर और नमक को छिड़कें और फिर नींबू को चूसें। ऐसा करने से कफ आसानी से आपके गले से बाहर निकल सकता है।
नमक का पानी
यदि आप अधिक मात्रा में कफ निकलने जैसी समस्‍या से परेशान हैं तो नमक के पानी का उपयोग करें। नमक का पानी कफ निकालने का तरीका है जो बहुत ही प्रभावी है। इसके लिए आप गर्म पानी में नमक को मिलाएं और गरारे करें। ऐसा करने से कफ आसानी से निकल सकता है। इसके अलावा गले में होने वाले दर्द और सूजन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में भी नमक का पानी बहुत ही प्रभावी होता है। नमक में मौजूद गुण और एंटीऑक्‍सीडेंअ बैक्‍टीरिया को नष्‍ट करने में मदद करते हैं जो आपके गले के संक्रमण का प्रमुख कारण होते हैं। बलगम का इलाज करने के लिए आप 1 गिलास गुनगुने पानी में ½ चम्‍मच नमक घोलें और इस पानी से गरारे करें। आप इस उपाय को दिन में अपनी सुविधा के अनुसार कई बार कर सकते हैं।
बच्‍चों का कफ निकालने के उपाय
सर्दी, खांसी और कफ जैसी समस्‍याएं बच्‍चों को सबसे अधिक होती हैं। लेकिन यह समस्‍याएं किसी भी उम्र में किसी भी व्‍यक्ति को हो सकती हैं। ऐसा मुख्‍य रूप से कमजोर प्रतिरक्षा शक्ति के कारण होता है। लेकिन यदि आप स्‍वयं और अपने बच्‍चों को पर्याप्‍त मात्रा में विटामिन सी का सेवन कराते हैं तो इस समस्‍या से बचा जा सकता है। विटामिन सी एक एंटीऑक्‍सीडेंट है जो फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव को कम करने और वायरल संक्रमण से लड़ने में सहायक होता है। विटामिन सी का पर्याप्‍त सेवन आपकी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है। कफ निकालने के उपाय में आप संतरे या नारंगी का सेवन कर सकते हैं। इसके लिए नियमित रूप से प्रतिदिन 2 से 3 गिलास संतरे का जूस पीने पर आपको कफ और सर्दी के लक्षणों को दूर करने में मदद मिल सकती है।
हाइड्रेट रहें 
 यदि आप सर्दी से या कफ जैसी समस्‍या से परेशान हैं तब शरीर में पानी की कमी होना आम है। लेकिन यह पानी की कमी आपके शरीर को अन्‍य नुकसान भी पहुंचा सकता है। ऐसी स्थिति में आप अपने शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए नियमित रूप से पानी पीना, स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक पेय पदार्थों और अन्‍य जड़ी बूटी युक्‍त चाय या तरल पदार्थ का सेवन कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके गले की सूजन और चिड़चिड़ाहट आदि को रोका जा सकता है। साथ ही औषधीय जड़ी बूटी युक्‍त चाय का सेवन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करने में सहायक होता है।
हल्‍दी
हल्‍दी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो बलगम के उत्‍पादन करने वाले बैक्‍टीरिया को नष्‍ट करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा हल्‍दी
1 गिलास गर्म दूध में 1 चम्‍मच हल्‍दी पाउडर मिलाएं। इस मिश्रण को रात में सोने से पहले और सुबह के समय खाली पेट सेवन करें। इसके अलावा आप दिन में 2-3 बार 1 गिलास गर्म पानी में 1 चम्‍मच हल्‍दी पाउडर को घोल कर सेवन करें। यह भी आपको कफ दूर करने में मदद कर सकता है। का नियमित सेवन हमारी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है। कफ दूर करने के घरेलू उपाय में आप हल्‍दी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
लाल मिर्च
लाल मिर्च नाक, गले और छाती में जमा होने वाले कफ को आसानी से दूर करने में मदद करती है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि लाल मिर्च की तासीर गर्म होती है इसके अलावा अपनी उत्‍तेजक प्रकृति के कारण यह सीने में दर्द को कम करने में भी सहायक होती है।
सर्दी या बलगम के लक्षणों को कम करने के लिए आप 1 चौथाई लाल मिर्च पाउडर, ¼ अदरक का पेस्‍ट, 1 चम्मच शहद और 2 बड़े चम्‍मच सेब के सिरका को मिलाकर सेवन करें। इस मिश्रण का सेवन करने से कफ के उत्‍पादन को कम करने में मदद करता है।
प्‍याज का रस
प्‍याज में एंटीबायोटिक और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। जिसके कारण गले के संक्रमण को दूर करने में प्‍याज का रस प्रभावी होता है। इसके अलावा प्‍याज में मौजूद अन्‍य घटक प्रतिरक्षा प्रणाली को भी स्‍वस्‍थ रखने में सहायक होते हैं। आप कफ निकालने के लिए प्‍याज के रस का उपयोग कर सकते हैं।
इसके लिए आप मध्‍ययम आकार की प्‍याज लें और इसे अच्‍छी तरह से धो कर साफ कर लें। फिर इस प्‍याज को बारीक काट लें। बारीक कटी हुई 2 चम्‍मच प्‍याज लें और इसमें 2 चम्‍मच चीनी मिला कर कुछ देर के लिए रख दें। ऐसा करने पर प्‍याज और चीनी के मिश्रण से एक तरल पदार्थ प्राप्त होता है। इस तरल पदार्थ की 1 चम्‍मच मात्रा हर 2 से 3 घंटे के बाद सेवन करें। आप इस मिश्रण 2 से 3 दिनों के लिए फ्रिज में स्‍टोर करके भी रख सकते हैं।
छाती में जमा कफ निकाले शहद
शहद में एंटीवायरल, जीवाणुरोधी और एंटीफंगल गुण होते हैं जो कफ के कारण गले के दर्द, सूजन और अन्‍य समस्‍याओं को दूर करने में प्रभावी होते हैं। शहद कफ निकालने का सबसे अच्‍छा घरेलू उपाय है साथ ही प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है। कफ का इलाज करने के लिए आपको शहद का नियमित सेवन करना चाहिए।
1 चम्‍मच शहद में 1 चुटकी कालीमिर्च पाउडर मिलाएं। काली मिर्च गले के संक्रमण को दूर करने में मदद करती है। जबकि शहद श्‍लेष्‍म झिल्‍ली को शांत करता है। नियमित रूप से 1 सप्‍ताह तक दिन में दो बार इस मिश्रण का सेवन करने पर यह कफ को प्रभावी रूप से कम कर सकता है।

मेथी खाने के स्वास्थ्य लाभ और नुकसान



सर्दियां आते ही बाजार में मेथी बहुतायत नजर आने लगती है। सब्जी से लेकर पराठे तक में इसका प्रयोग किया जाता है। जहां यह खाने में स्वादिष्ट है, वहीं आयुर्वेद के नजरिए से भी इसके कई फायदे हैं। पौष्टि‍क और स्वास्थ्यवर्धक मेथी आपकी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कर सकती है।भारत में सदियों से इसके पत्ते और दानों को आयुर्वेदिक औषधि के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। इसका पौधा दो-तीन फुट लंबा होता है और इसकी फली में छोटे-छोटे पीले-भूरे रंग के सुगंधित दाने होते हैं। भूमध्य क्षेत्र, दक्षिण यूरोप और पश्चिम एशिया में इसकी खेती बहुतायत में होती है
भारत में क्षेत्रवार के अनुसार मेथी को अलग-अलग नामों से बुलाया जाता है। जहां हिंदी, गुजराती, मराठी, बंगाली और पंजाबी में इसे मेथी कहते हैं, वहीं संस्कृत में इसका नाम मेथिका है। कन्नड़ में इसे मेन्तिया, तेलुगु में मेंतुलु, तमिल में वेंडयम, मलयालम में वेन्तियम, अंग्रेजी में फेनुग्रीक और लेटिन में त्रायिगोनेल्ला फोएनम ग्रीकम के नाम से जाना जाता है।
जोड़ों के दर्द में
घर के बड़े बुजुर्गों को आपने सर्दियों में मेथी और मेवे के लड्डू खाते जरूर देखा होगा। इसका प्रमुख कारण है, कि मेथी का सेवन आपको जोड़ों के दर्द की परेशानी से भी मुक्ति दिलाता है। इसके बीज हों या फिर पत्ति‍यां, दोनों ही जोड़ों के दर्द में समान रूप से फायदेमंद है।
डायबिटीज :
शुगर के मरीजों को अक्सर अपनी डाइट में मेथी के दाने शामिल करने के लिए कहा जाता है। इसके सेवन से शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
कैसे है फायदेमंद
टाइप-2 डायबिटीज के लिए मेथी के दाने किस तरह से फायदेमंद है, इस पर वैज्ञानिकों ने कई शोध किए, जिसके सकारात्मक प्रभाव नजर आए । शोध में पाया गया कि मेथी के दाने में घुलनशील फाइबर होता है, जो पाचन की क्रिया को धीरे कर देता है। यह कार्बोहाइड्रेट के पाचन और अवशोषण की दर को कम कर देता है। मेथी के दाने रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करते हैं और इंसुलिन की संवेदनशीलता को बेहतर करते हैं।
ह्रदय के लिए :
ह्रदय बेहतर तरीके से काम कर सके, उसके लिए मेथी के सेवन की सलाह दी जाती है। जो लोग नियमित रूप से मेथी का सेवन करते हैं, उन्हें दिल का दौरा पड़ने की आशंका कम होती है और अगर दौरा पड़ भी जाए, तो जानलेवा स्थिति से बचा जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद
विभिन्न शोधों में पाया गया है मृत्यु दर के पीछे दिल का दौरा एक प्रमुख कारण होता है। यह तब होता है, जब ह्रदय की धमनियों में रुकावट आ जाती है। वहीं, मेथी के दाने इस स्थिति से बचाने में सक्षम होते हैं। अगर दिल का दौरा पड़ भी जाए, तो ऑक्सीडेटिव तनाव को पैदा होने से रोकते हैं। ह्रदयाघात के दौरान ऑक्सीडेटिव तनाव की स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। साथ ही मेथी के बीच शरीर में रक्त प्रवाह को संतुलित रखते हैं, जिस कारण धमनियों में किसी भी प्रकार की रुकावट पैदा नहीं होती
कोलेस्ट्रॉल :
शोध के अनुसार मेथी के दानों में कोलेस्ट्रॉल को कम करने की क्षमता है। खासकर, यह एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को शरीर से खत्म करने में कारगर है।
कैसे है फायदेमंद
मेथी के दानों में नारिंगेनिन नामक फ्लेवोनोइड होता है। यह रक्त में लिपिड के स्तर को कम कर सकने में सक्षम होता है। साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जिस कारण मरीज का उच्च कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है
आर्थराइटिस का दर्द :
उम्र बढ़ने के साथ-साथ जोड़ों में सूजन आने लगती है, जिस कारण असहनीय दर्द होता है। इसे जोड़ों का दर्द या फिर आर्थराइटिस कहा जाता है। इससे निपटने के लिए मेथी रामबाण नुस्खा है, जिसे सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा है।
कैसे है फायदेमंद
मेथी में एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। ये गुणकारी तत्व जोड़ों की सूजन को कम करके आर्थराइटिस के दर्द से राहत दिलाते हैं। मेथी में आयरन, कैल्शियम और फास्फोरस भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसलिए, मेथी के सेवन से हड्डियों व जोड़ों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और स्वस्थ व मजबूत रहते हैं । मेथी के दानों में पेट्रोलियम ईथर एक्सट्रैक्ट नामक यौगिक भी पाया जाता है। साथ ही लिनोलिक व लिनोलेनिक एसिड भी होता है। इसलिए, मेथी दाने जोड़ों व हड्डियों में होने वाले दर्द से भी राहत दिला सकते हैं।
कैंसर :
कई अध्ययनों में पाया गया है कि मेथी के दानों से निकला तेल कैंसर से लड़ने में सहायक होता है।
कैसे है फायदेमंद
कैंसर पर किए गए कई अध्ययनों से खुलासा हुआ है कि मेथी में कैंसर से निपटने की क्षमता होती है। मेथी के दाने से निकले तेल में एंटीकैंसर गुण होते हैं, जो कैंसर सेल के प्रभाव को कम कर सकते हैं। मेथी के अर्क का सेवन करने से प्रतिरक्षा तंत्र पहले से ज्यादा सक्रिया हो जाता है और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देता है
पाचन तंत्र :
आजकल हमारा खान-पान जिस तरह को हो गया है, उसके चलते हमारा पाचन तंत्र लगातार खराब हो रहा है। साथ ही पेट से जुड़ी अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं। इससे निपटने के लिए मेथी का सेवन करना बेहतर उपाय है।
कैसे है फायदेमंद
बदहजमी, कब्ज, एसिडिटी और गैस जैसी समस्याओं को मेथी के सेवन से दूर किया जा सकता है। कब्ज और अल्सर के कारण खराब हुए पाचन तंत्र को ठीक करने में मेथी कारगर घरेलू नुस्खा है। मेथी के दानों में अत्यधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जिस कारण यह भोजन को पचाकर पाचन तंत्र को बेहतर करता है। साथ ही यह प्राकृतिक ल्यूब्रिकेंट है, जो पेट व आंतों को चिकना व आरामदायक बना कब्ज जैसी बीमारियों को दूर करता है । इसके सेवन से मल सामान्य होकर आसानी से शरीर से बाहर निकल जाता है। इतना ही नहीं मेथी के दाने एपेंडिक्स के दौरान पेट में जमा हुई गंदगी को भी साफ करने का काम करते हैं। इस प्रकार मेथी दाने पेट की बीमारियों से राहत दिलाते हैं।
बेहतर किडनी :
कई वैज्ञानिक शोधों में इस बात का दवा किया गया है कि किडनी के लिए मेथी फायदेमंद है। मेथी को अपने भोजन में शामिल करने से किडनियां अच्छी तरह काम कर पाती हैं।
कैसे है फायदेमंद
मेथी के दानों में पॉलीफेनोलिक फ्लेवोनोइड पाया जाता है, जो किडनी को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। साथ ही यह किडनी के आसपास एक रक्षा कवच का निर्माण करता है, जिससे इसके सेल नष्ट होने से बच जाते हैं (13)। अगर शरीर में एंटीऑक्सीडेंट का स्तर कम हो जाए, तो ऑक्सीडेटिव तनाव का प्रभाव बढ़ जाता है, जो किडनी पर असर डालता है। इस कारण से भी मेथी का सेवन करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि मेथी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है।
लिवर :
शरीर के सभी अंग अच्छी तरह से काम करते रहें, उसके लिए जरूरी है कि लिवर स्वस्थ रहे। लिवर शरीर से सभी विषैले जीवाणुओं को बाहर निकालने का काम करता है। अगर लिवर खराब हो जाए, तो सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। लिवर पर सबसे बुरा असर शराब पीने से होता है। शराब पीने से लिवर की काम करने की क्षमता कम हो जाती है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि मेथी के दाने लिवर को शराब के बुरे प्रभाव से बचाते हैं।
कैसे है फायदेमंद
शराब हर लिहाज से सेहत के लिए खराब है। अगर आप चाहते हैं कि लिवर अच्छी तरह काम करे, तो शराब से तौबा करना ही बेहतर है। वहीं, जिनका लिवर शराब पीने से प्रभावित हुआ है, उनके लिए मेथी के दाने कारगर साबित हो सकते हैं । मेथी के दाने में पॉलीफेनोलिक तत्व होता है, जो लिवर को नष्ट होने से बचाता है। लिवर के लिए मेथी दाने  कारगर इलाज हैं।
एंटी एजिंग :
समय के साथ-साथ चेहरे पर बढ़ती उम्र का असर साफ नजर आने लगता है। ऐसे में मेथी का प्रयोग फायेदमंद हो सकता है। यह त्वचा के लिए गुणकारी औषधि है।
सामग्री
एक चम्मच मेथी के दाने
एक चम्मच साधारण योगर्ट
प्रयोग की विधि
मेथी के दानों को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रखें।
अगली सुबह इन्हें योगर्ट में मिलाकर तब तक ग्राइंट करें, जब तक कि पेस्ट न बन जाए।
अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं।
करीब 30 मिनट बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें।
कैसे है फायदेमंद
शरीर में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव के कारण ही चेहरे पर बढ़ती उम्र का असर नजर आता है। मेथी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो इन फ्री रेडिकल्स को बेअसर कर देते हैं (16)। वहीं, योगर्ट में लैक्टिक एसिड होता है, जो मृत त्वचा को हटाने का काम करता है। साथ ही त्वचा को मखमली व मुलायम बनाता है
कील-मुंहासे :
जिन्हें अक्सर कील-मुंहासों की शिकायत रहती है, उन्हें मेथी का प्रयोग जरूर करना चाहिए। मुंहासों को खत्म करने में मेथी मददगार साबित हो सकती है।
सामग्री
चार कप पानी
चार चम्मच मेथी के दाने
प्रयोग की विधि
मेथी के दाने रातभर के लिए पानी में भिगकर रखें।
अगले दिन इन्हें पानी में डाल दें और धीमी आंच पर 15 मिनट उबलने दें।
इसके बाद पानी को छान लें और सामान्य होने दें।
अब सूती कपड़े को इस पानी में भिगोकर दिन में दो बार अपने चेहरे पर लगाएं। अगर पानी बच जाए, तो उसे फ्रिज में रख सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद
मेथी के दानों में डायोसजेनिन जैसे जरूरी तत्व होते हैं, जिसमें एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। इस कारण से मेथी मुंहासों को जड़ से खत्म कर सकती है
मासिक धर्म में फायदेमंद :
हर महिला को मासिक धर्म के दौरान असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। मेथी के दाने इससे राहत दिलाने में कारगर काम करते हैं। साथ ही मासिक धर्म से जुड़ी अन्य समस्याओं से भी राहत दिलाते हैं।
कैसे है फायदेमंद
मेथी के दानों में एंटीइंफ्लेमेटरी व एनाल्जेसिक गुण पाए जाते हैं। वैज्ञानिक शोधों में इस बात की पुष्टि की गई है कि मेथी के ये गुणकारी तत्व मासिक धर्म में होने वाली हर तरह की पीड़ा से राहत दिला सकते हैं । इतना ही नहीं, मेथी के दानों से बना पाउडर भी दर्द को कम कर सकता है और थकावट, सिरदर्द व जी-मिचलाना जैसी समस्याओं को कम करता है। मेथी में सेपोनिन्स व डायोसजेनिन तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर में एस्ट्रोजन की तरह काम करते हैं। ये मासिक धर्म के समय महिलाओं को होने वाले पेट दर्द से राहत दिलाते हैं।
पेट में कीड़े
पेट में कीड़े होने पर भी मेथी आपके लिए एक सटीक उपचार है। अधि‍कांशत: बच्चों में यह समस्या होती है। ऐसे मेथी की पत्त‍ियों का रस निकालकर, बच्चे को एक चम्मच प्रतिदि‍न पिलाने पर कृमि समाप्त हो जाते हैं।
बढ़ता है स्तन-दूध :
स्तनपान करा रहीं महिलाओं को मेथी का सेवन जरूर करना चाहिए, इससे स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ती है। एशिया में शिशुओं को स्तनपान कराने वाली कई माताएं इसका प्रयोग करती हैं।
कैसे है फायदेमंद
मेथी प्राकृतिक औषधि की तरह काम करती है। इसे फाइटोएस्ट्रोजन का प्रमुख स्रोत माना गया है। यह स्तपान कराने वाली माताओं में दूध के स्तर को बढ़ाने में मदद करती है । मेथी के दाने की चाय पीने से भी स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ सकती है। माना जाता है कि मेथी में मैग्नीशियम और जरूरी विटामिन्स होते हैं, जो माताओं में दूध की गुणवत्ता को बढ़ा देते हैं। इसलिए, यह दूध पीने से नन्हे शिशु को भी जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं और उसका वजन अच्छा होता है|
रक्तचाप में सुधार :
उच्च रक्तचाप कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है। रक्तचाप अधिक होने पर ह्रदय रोग हो सकते हैं। इससे निपटने के लिए मेथी का सेवन किया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद
उच्च रक्तचाप का एक मुख्य कारण सोडियम है। जब डाइट में इसकी मात्रा बढ़ती है, तो रक्तचाप अधिक हो जाता है। इसलिए, मेथी का सेवन करने की सलाह दी जाती है। एक चम्मच मेथी के दाने में सिर्फ सात मिलीग्राम सोडियम होता है। वहीं, इसके मुकाबले ¼ चम्मच नमक में 581 मिलीग्राम सोडियम होता है। साथ ही मेथी के दानों में अधिक मात्रा में फाइबर होता है। फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं 
दिल का दौरा ;
मेथी की सब्जी का नित्य सेवन करना, दिल की बीमारियों को भी दूर रखने में मदद करता है। यह दिल का दौरा पड़ने की संभावना को बेहद कम कर देता है, और आप अपने हृदय को रख सकते हैं बिल्कुल स्वस्थ।
वजन नियंत्रण :
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो मेथी आपकी मदद कर सकती है। इसे आप अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
कैसे है फायदेमंद
मेथी के दाने शरीर में फैट को जमा नहीं होने देते। साथ ही ये लिपिड और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म के स्तर में सुधार लाते हैं, जिससे वजन कम होने लगता है
डैंड्रफ :
डैंड्रफ होना एक आम समस्या और यह किसी को भी हो सकता है। यह समस्या ज्यादातर सर्दियों में होती है। इस समस्या के लिए मेथी का प्रयोग किया जा सकता है।
सामग्री
दो चम्मच मेथी के दाने
एक चम्मच नींबू का रस
एक चम्मच नारियल का दूध
प्रयोग की विधि
मेथी के दानों को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रख दें।
अगली सुबह मेथी के दानों को पीसकर पेस्ट बना लें।
इस पेस्ट में नींबू और नारियल का दूध मिला दें।
फिर इस पेस्ट को बालों की जड़ों पर लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें।
इसके बाद बालों की अच्छी तरह मालिश करें और फिर बालों को शैंपू से धो दें।
कैसे है फायदेमंद
डैंड्रफ मुख्य रूप से सूखे व संक्रमण युक्त स्कैल्प पर होता है। ऐसे में मेथी के दाने इसे ठीक करने में मदद करते हैं
बालों का झड़ना
हम आपको बता दें, कि मेथी की पत्ति‍यां भी आपके बालों के लिए बहुत लाभकारी साबित होंगे। इसकी पत्तियां पीसकर बालों में लगाने से बाल काले, घने व चमकदार होते हैं। साथ ही बालों का झड़ना भी रूक जाता है।
*आयुर्वेद में कहा गया है कि मेथी के दानों की तासीर गर्म होती है। इसका सीधे सेवन करने से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। इसलिए, मेथी के दानों को कुछ समय के लिए पानी में भिगोकर रखना चाहिए, ताकि उसकी गर्माहट कम हो जाए। इसके बाद मेथी के दानों को प्रयोग में लाना चाहिए।
मेथी के दानों को एक-दो मिनट के लिए मध्यम आंच पर भून लें और फिर इसे सब्जी या फिर सलाद के ऊपर डाल दें। इससे न सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ेगा, बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिलेंगे।
एक चम्मच मेथी के दानों को रातभर पानी में भिगोकर रखें और अगली सुबह एक गिलास पानी के साथ इनका सेवन करें। जिस पानी में मेथी के दानों को भिगोया था, आप सुबह खाली पेट उसका भी सेवन कर सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह फायदेमंद साबित हो सकता है।
मेथी के दानों को रातभर पानी में भिगोकर रखने के बाद एक कपड़े में बांधकर रख दें। कुछ दिन ऐसे ही रखने के बाद मेथी के दाने अंकुरित हो जाएंगे। अब आप इसे सलाद में मिलाकर सेवन कर सकते हैं। मेथी का इस तरह से सेवन करना सेहत के फायदेमंद है।
सर्दियों में लगभग हर घर में मेथी के पराठे और रोटियां बनाई जाती हैं। मेथी का इस प्रकार से सेवन करने से भी शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति होती है।
बुखार होने पर मेथी दाने की हर्बल चाय पीने से फायदा होता है। पानी में मेथी के दाने डालकर उसे उबालें। स्वाद के लिए इसमें नींबू और शहद मिला सकते हैं।
मेथी दाने से बना तेल भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। इससे कई प्रकार की औषधियों का निर्माण होता है।
मेथी के दाने कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद करते हैं। कब्ज के रोगी को रोज सुबह-शाम एक चम्मच मेथी दाने का सेवन करना चाहिए।
इसमें कोई दो राय नहीं कि मेथी के दाने सेहत के लिए लाजवाब हैं। इसे अपने भोजन में शामिल करने से कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं, लेकिन इतने फायदों के साथ-साथ इसके नुकसान भी हैं। कुछ मामलों में इसके सेवन से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

 मेथी से नुकसान 
डायबिटीज : बेशक डायबिटीज के मरीजाें को मेथी का सेवन करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसका अधिक सेवन करने से परेशानी भी हो सकती है। मेथी को जरूर से ज्यादा लेने पर रक्त में शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है।
शरीर व मूत्र से दुर्गंध : अमूमन बैक्टीरिया या फिर किसी संक्रमण के कारण शरीर से बदबू आने लगती है, लेकिन कुछ मामलों में मेथी भी इसका कारण बन सकती है। अधिक मात्रा में मेथी का सेवन करने से शरीर व मूत्र से दुर्गंध आने लगती है।
दस्त : हालांकि, पाचन तंत्र के लिए मेथी के दाने अच्छे होते हैं, लेकिन कई बार यह दस्त का कारण भी बन जाते हैं। जरूर से ज्यादा मेथी खाने से पेट खराब हो सकता है और दस्त लग जाते हैं। अगर स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसे खाने से पेट खराब होता है, तो उससे शिशु को भी दस्त लग सकते हैं। इसलिए, ऐसे कोई लक्षण नजर आते ही इसका सेवन बंद कर दें।
हाइपोग्लाइसीमिया : मेथी के दानों के सेवन से कुछ माताओं को हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है। इसमें रक्तचाप बेहद कम हो जाता है, जिससे मस्तिष्क तक ग्लूकोज की पर्याप्त रूप से आपूर्ति नहीं हो पाती है। इस स्थिति में मस्तिष्क को क्षति हो सकती है या फिर मृत्यु भी हो सकती है।
गर्भाशय संकुचन : जैसा कि इस लेख में पहले बताया गया है कि मेथी दाने की तासीर गर्म होती है। अगर गर्भवती महिला इसका अधिक सेवन करती है, तो समय से पहले गर्भाशय संकुचन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। मेथी के दानों में ऑक्सीटोसिन होता है, जो गर्भाशय संकुचन का कारण बनता है। इसलिए, गर्भवती महिलाएं मेथी दाने का सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें।
एलर्जी : कुछ लोगों को मेथी दाने के सेवन से एलर्जी हो सकती है। यह एलर्जी चेहरे पर सूजन के तौर पर नजर आ सकती है। वहीं, कुछ को शरीर पर रैशेज हो सकते हैं, सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है और कुछ बेहोश तक हो जाते हैं। इसके अलावा, कई लोगों को मेथी के सेवन से छाती में दर्द जैसी शिकायत होने लगती है। यह तासीर में गर्म होती है, इसलिए कुछ लोगों को बवासीर, गैस व एसिडिटी तक की शिकायत हो जाती है। साथ ही अगर कोई किसी बीमारी के लिए दवा खा रहा है, तो वो मेथी के दानों का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर ले।
बच्चों के लिए हानिकारक : बच्चों के लिए मेथी दाने को सुरक्षित नहीं माना गया है। यह तो हम पहले ही बता चुके हैं कि इसे खाने से दस्त लग सकते हैं। वहीं, इसकी हर्बल चाय पीना भी बच्चों के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि इससे उनकी मस्तिष्क की क्षमता पर असर पड़ सकता है। इसलिए, बेहतर यही है कि मेथी के सप्लीमेंट्स बच्चों को न दें। अगर देना ही चाहते हैं, तो सब्जियों में डालकर दे सकते हैं।
पुरुषों के लिए : जो पुरुष अस्था से पीड़ित हैं, उन्हें मेथी का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। इस अवस्था में मेथी खाने से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। वहीं, जिन्हें थायराइड है, उन्हें भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए। थायराइड से ग्रस्त ऐसे कई पुरुषों के केस सामने आए हैं, जिन्होंने मेथी का सेवन किया था और उन्हें कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा।

जानिए तांबे की अंगूठी पहिनने के स्वास्थ्य लाभ


लोग अपने ग्रहों की शांति और दोषों को दूर करने के लिए तरह-तरह की धातु की अंगुठियां पहनते हैं। सभी ग्रहों के लिए अलग-अलग धातु होते हैं। सभी ग्रहों का राजा सूर्य होते हैं। ज्योतिषशास्त्र में तांबे को सूर्य की धातु माना गया है। सूर्य से संबंधित सभी रोगों को दूर करने के लिए लोग तांबे की अंगूठी पहनते हैं। आइए जानते हैं तांबे की अंगूठी के पहनने से होने वाले लाभ के बारे में..ज्योतिष में नौ ग्रह बताए गए हैं और सभी ग्रहों की अलग-अलग धातु है। ग्रहों का राजा सूर्य है और सूर्य की धातु है तांबा। हिन्दू धर्म में सोना, चांदी और तांबा, ये तीनों धातुएं पवित्र मानी गई हैं। इसीलिए पूजा-पाठ में इन धातुओं का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा इनकी अंगूठी भी काफी लोग पहनते हैं।
1. तांबे की अंगूठी पेट से संबंधित सभी समस्याओं में काफी फायदेमंद है यह पेट दर्द, पाचन में गड़बड़ी और एसिडिटी की समस्याओं में फायदा पहुंचाती है। इसके अलावा अगर आप पेचिश की समस्या से परेशान हैं तो तांबे की अंगूठी इस समस्या में आपकी काफी मदद कर सकती है।
2.तांबे की अंगूठी लगातार हमारे शरीर के संपर्क में रहती है। जिससे तांबे के औषधीय गुण शरीर को मिलते हैं। इससे खून साफ होता है।

3. जिस प्रकार तांबे के बर्तन में रखा पानी स्वास्थ्य को लाभ पहुंचात है, ठीक उसी प्रकार तांबे की अंगूठी से भी फायदा मिलता है।
4. तांबे की अंगूठी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। ये हाई ब्लड प्रेशर या लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसके अलावा इस अंगूठी को पहनकर आप शरीर के सूजन को भी कम कर सकते हैं।
5.तांबे की अंगूठी सूर्य की उंगली यानी रिंग फिंगर में पहननी चाहिए। इससे कुंडली में सूर्य के दोषों का असर कम हो सकता है।
6. सूर्य के साथ ही तांबे की अंगूठी से मंगल के अशुभ असर भी कम हो सकते हैं
7. तांबे की अंगूठी के असर से पेट से जुड़ी बीमारियों में भी राहत मिल सकती है।
8. तांबा लगातार त्वचा के संपर्क में रहता है, जिससे त्वचा की चमक बढ़ती है।
9. आयुर्वेद के अनुसार तांबे के बर्तनों का उपयोग करने से हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यही लाभ तांबे की अंगूठी पहनने से भी मिलता है।
10. तांबे की अंगूठी के प्रभाव से सूर्य का बल बढ़ता है, जिससे हमें सूर्य देव की कृपा से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलता है।
11. तांबे की अंगूठी शरीर की गर्मी को कम करने में मदद करता है। इसे पहनने से शारीरिक और मानसिक तनाव कम होता है। इसके साथ ही गुस्से पर नियंत्रण होता है. ये अंगूठी तन और मन दोनों को शांत रखने में मदद करता है।

गरम दूध के साथ गुड़ खाने के स्वास्थ्य लाभ





दूध और गुड़ को व्यक्तिगत रूप से शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक माना गया हैं। लेकिन जब यह दोनों एक साथ मिल जाते हैं तो यह और भी फायदेमंद हो जाता है। भारत में हमेशा ही लोग चीनी की जगह गुड़ खाने की सलाह देते हैं ताकि परिष्कृत चीनी के हानिकारक प्रभाव से बचा सके। गर आप दूध के साथ गुड़ का सेवन करना भी शुरू कर दें तो यह सोने पर सुहागा की तरह काम करता है।गुड़ का सेवन करना शरीर के लिए फायदेमंद होता है। अगर आप गरम दूध के साथ गुड़ का सेवन करते है, तो शरीर की सभी कमियां पूरी हो सकती है। आपको बतादे की गुड़-दूध के इस पेय में अधिक मात्रा में सुक्रोज, ग्लूकोज, खनिज लवन आदि सभी पोषक तत्व पाए जाते है। 
गुड़, स्वाद के साथ ही सेहत का भी खजाना है। इसका सेवन करने से न सिर्फ मुंह का स्वाद नहीं बदलना ब्लकि इससे कई बीमारियों से मुक्ति भी पाई जा सकती है। हम में से कई लोगों ने अपने घर में बुजुर्गों को देखा होगा कि वे दोपहर या रात का खाना खाने के बाद गुड़ का एक टुकड़ा मुंह में डाल कर पानी पीते थे। साथ ही वे हमें भी गुड़ खाने की हमेशा सलाह भी दिया करते थे। ऐसा इसलिये क्‍योंकि गुड़ के कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ हैं। इसे नियमित रूप से खाने से मासिकधर्म दर्द, घुटनों के दर्द और अस्‍थमा में आराम मिलता है। जिस दिन आप बहुत ज्‍यादा थके हुए हों, उस दिन पानी के साथ गुड़ का सेवन करें और फिर देंखे ये आपको कैसे फायदा पहुंचाता है। इसी तरह से गुड़ का दूध के साथ सेवन करने से काफी फायदा मिलता है।
1. रक्त को शुद्ध करे- 
दूध में गुड़ मिलाकर पीने से खून साफ होता है। जिससे फोड़े-फुंसी और घाव होने की आशंका कम हो जाती है।
गुड़ रक्‍त को अच्‍छी प्रकार से शुद्ध करता है। इसे रोजाना अपने आहार में शामिल करें।

2. पेट ठीक रखे- 
पाचन क्रिया से जुड़ी सभी समस्‍याओं को गुड़ खा कर दूर किया जा सकता है। पाचन क्रिया के लिए गुड़ बेहतर तरीके से काम करता है। दूध में गुड़ मिलाकर पीने से पाचन क्रिया बेहतर रहती है। इसके रोजाना सेवन से कब्ज की समस्या भी नहीं होती है। इसके अलावा यदि आप जोड़ों में दर्द है तो भी इसका सेवन आपके लिए लाभकारी रहेगा।
3. जोड़ों का दर्द दूर करे- 
गुड़ खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। अगर रोजाना गुड़ का एक छोटा पीस अदरक के साथ मिला कर खाया जाए तो जोड़ों में मजबूती आएगी और दर्द दूर होगा।
4. खूबसूरती बढ़ाए- 
इसे खाने से त्‍वचा मुलायम और स्‍वस्‍थ बनती है। बाल भी अच्‍छे हो जाते हैं। साथ ही मुंहासे और एक्‍ने भी ठीक हो जाते हैं।
5. पीरियड्स के दर्द से आराम- 
महिलाओं के लिए दूध में गुड़ मिलाकर पीने के कई फायदे हैं। दूध में गुड़ मिलाकर पीने से पीरियड्स अनियमित नहीं होते हैं और दर्द भी कम होता है। गुड़ महिलाओं के लिए सार्वभौमिक उपाय है, जिनको मासिक धर्म दर्द है।पीरियड्स में दर्द होता है तो महिलाओं को इसका सेवन जरुर करना चाहिये। पीरियड शुरु होने के 1 हफ्ते पहले 1 चम्‍मच गुड़ का सेवन रोजाना करें।
6. रक्त को शुद्ध करे- 
गुड़ रक्‍त को अच्‍छी प्रकार से शुद्ध करता है। इसे रोजाना अपने आहार में शामिल करें। 
7. थकान दूर करने के लिये-
 रोजाना 3 चम्‍मच गुड़ दिन में तीन बार खाएं।
8. अस्‍थमा के लिये- 
अगर आप को अस्थमा की दिक्कत है तो घर में गुड़ और काले तिल के लड्डू बना कर खाएं और इसके बाद एक ग्लास गरम दूध का सेवन करें।
9. मोटापा नहीं बढ़ता- 
गुड़ को अगर दूध या चाय में शक्‍कर की जगह पर डाला जाए तो मोटापा नहीं बढ़ता क्‍योंकि शक्‍कर का सेवन आपको मोटा कर सकती है।क्या आप मोटापे से ग्रस्त हैं और दूध या चाय में चीनी को परहेज करते हैं? तो आप दूध के साथ गुड़ लेना शुरू करें। कैल्शियम समृद्ध दूध के साथ पोटेशियम समृद्ध गुड़ आपके मोटापे को कम कर देगा। दूध के साथ गुड़ के सबसे अच्छे स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए इसे नियमित रूप से लें।
10. प्रेगनेंसी में एनीमिया नहीं होता- 
अधिकांश महिलाएं खून की कमी को पूरा करने के लिए गोलियां लेती हैं लेकिन गुण एनीमिया को रोकने के लिए अच्छी दवा हैं। गुड़ के साथ एक गिलास दूध गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से लड़ने में मदद करता हैइसके अलावा गर्भवती महिलाओं को थकावट और कमजोरी ज्यादा होती है। ऐसे में उन्हें दूध में गुड़ मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है।
11. मासपेशियों की मजबूती के लिये- 
रोजाना एक गिलास में थोड़ा सा गुड़ डाल कर पियें, लाभ होगा।
12.अपनी प्रतिरक्षा को बढ़ाने के लिए एक गिलास दूध के साथ गुड़ को मिलाकर सबसे अच्छी और आसान विधि है। दोनों अवयव मानव शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा में वृद्धि करने में मदद करते हैं।
13.बचपन से हम सुनते आए हैं कि मजबूत हड्डियों को पाने के लिए दूध सबसे अच्छा विकल्प है। हड्ड़ियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए भी दूध में गुड़ मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है। कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर दूध तथा गुड़ में मौजूद आयरन जोड़ों को मजबूत बनाता है। इससे जोड़ों के दर्द से काफी आराम मिलता है। इसके अलावा अदरक के साथ भी गुड़ खाने से काफी फायदा मिलता है।