करेले के स्वास्थ्य लाभ



                                         
करेले को प्राकर्तिक रूप में ही खाना चाहिए इसमें किसी प्रकार की अन्य चीज को नहीं मिलाना चाहिए ,अगर आपके इसके सभी गुणों का लाभ उठाना चाहते है तो। क्योंकि काफी लोग करेले का कड़वापन दूर करने के लिए इसे छीलकर, काटकर, नमक लगाकर धो- कर खाने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार से खाए जाने वाले करेले के सभी गुण निकल जाते हैं | करेले का कड़वेपन ही रोगों को दूर भगाता है, इसी कड़वेपन की वजह से यह मधुमेह (Diabetes) रोगियों को लाभ पहुचाता है |
करेले में फास्फोरस काफी मात्रा में पाया जाता है इसीलिए यह दाँत, मस्तिष्क, हड्डी, ब्लड और अन्य शारीरिक अंगो के लिए जरुरी फास्फोरस की पूर्ति करता है |
करेला का रस दर्द दूर करता है, शरीर में शक्ति पैदा करता है। करेले के जूस को खाली पेट पीना अधिक लाभदायक है। ताकि यह अच्छी तरह से शरीर के द्वारा सोख लिया जाए |
अगर आपको खाँसी, कफ, गले में खराश की बीमारी हो तो बिना घी या तेल से बनी करेले की सब्जी खाएं आप स्वाद के अनुसार इसमें सेंधा नमक और पिसी कालीमिर्च भी डाल सकते है |
करेला का जूस कफ, पीलिया, मधुमेह, और बुखार आदि रोगों में लाभदायक है| साथ ही यह रक्त साफ़ करता है|
करेले का जूस संक्रमण दूर करने वाला और शरीर में गर्मी बढ़ाने वाला होता है। करेला स्वाद में भले ही कड़वा हो लेकिन सेहत के लिए यह किसी टॉनिक से कम नहीं हैं। करेले में ऐसे तत्व मौजूद हैं जो कि हमारे लिए बहुत लाभदायक है। इसके सेवन या इसका जूस पीने से कई बीमारियों की संभावनाओं को खत्म किया जा सकता है। इसे बहुत-सी दवाईयों को बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। यहां जानिए करेले खाने के फायदे:

डायबिटीज के रोगियों के लिए -

टाइप 4 डायबिटीज के मरीजों के लिए करेले का जूस पीना बहुत ही फायदेमंद है। इंसुलिन की उचित मात्रा न होने पर ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है जो टाइप 2 डायबिटीज के लिए जिम्मेदार हैं। करेला का जूस ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। डायबिटीज के रोगियों को एक चौथाई कप करेले के रस में इतना ही गाजर का रस मिलाकर पिलाना चाहिए। इससे ब्लड शुगर का लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है। सुबह के समय करेला का जूस पीना बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। करेले में मोमर्सिडीन और चैराटिन जैसे एंटी-हाइपर ग्लेसेमिक तत्व पाए जाते हैं।

खून की कमी दूर करता है-

महिलाओं में हिमोग्लोबिन की समस्या बहुत ही आम हैं लेकिन आयरन से भरपूर सब्जियों का सेवन करना सबसे ज्यादा फायदेमंद हैं। दिन में एक बार करेले की सब्जी खाने या इसका जूस पीने से हीमोग्लोबिन की कमी को दूर किया जा सकता हैं। साथ ही खून भी साफ होता है।

पथरी रोगियों के हितकारी-

पथरी रोगियों को दो करेले का रस पीने और करेले की सब्जी खाने से आराम मिलता है। इससे पथरी गलकर धीरे-धीरे बाहर निकल जाती है। 20 ग्राम करेले के रस में शहद मिलाकर पीने से पथरी गल कर पेशाब के रास्ते निकल जाती है।

जोड़ों में दर्द -

 करेले के पत्तों के जूस या करेले के जूस से मालिश करें। करेले की चटनी पीसकर गठिया के सूजन पर लेप करें। जल्द ही आराम मिलेगा |

चर्म रोग-

त्वचा के रोगों में करेले की सब्जी नियमित खाने से लाभ होता है। त्वचा में खुजली होने पर – रक्त में जब अम्लता की मात्रा ज्यादा हो जाती है तब खुजली चलती है। करेले के जूस चौथाई कप और इतना ही पानी मिलाकर रोजाना दो बार पियें तथा करेले के जूस में 10 बूंद लहसुन का जूस तथा चार चम्मच सरसों का तेल मिलाकर मालिश करें। करेले के जूस इसी प्रकार पीने से घमौरियाँ, फुंसियाँ ठीक हो जाती हैं।

रक्तशोधक-

 60 ग्राम करेले के जूस में थोड़ा-सा पानी मिलाकर रोजाना कुछ दिनों तक सेवन करने से शरीर का दूषित रक्त साफ हो जाता है। इससे पाचनशक्ति, यकृत की शक्ति बढ़ती है।
करेले के 15 पत्ते धोकर छोटे-छोटे टुकड़े करके एक गिलास पानी में उबालें। आधा पानी रहने पर इसे छान कर पीने से रक्त साफ होता है|

भूख बढ़ाने मे सहायक-

भूख कम लगने या नहीं लगने की समस्या है तो करेले का सेवन उसके लिए फायदेमंद साबित होगा। करेले के जूस को रोजाना पीने या करेले की सब्जी खाने से पाचन क्रिया सही रहती है, जिससे भूख बढ़ती है।

त्वचा रोग में भी लाभकारी -

करेले में मौजूद बिटर्स और एल्केलाइड तत्व रक्त शोधक का काम करते हैं। करेले की सब्जी खाने और मिक्सी में पीस कर बना लेप रात में सोते समय हाथ-पैर पर लगाने से फोड़े-फुंसी और त्वचा रोग नहीं होते। दाद, खाज, खुजली, सियोरोसिस जैसे त्वचा रोगों में भी करेले के रस में नींबू का रस मिलाकर पीना फायदेमंद है।

कैंसर से बचाता है -

कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए करेला सहायक होता है। इसका जूस पीने और इसके गुदे को पानी में उबालकर पीने से कैंसर जैसी भयानक बीमारी की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पैरों में जलन होने पर करेले के पत्तों के जूस की मालिश करने से लाभ होता है। इसके लिए आप करेले के जूस का भी इस्तमाल कर सकते हैं। करेले के जूस या करेला पीसकर जले हुए पर लेप करने से जलन शान्त हो जाती है। तलवों की जलन पर लगाने से भी लाभ होता है।

एसिडिटी -

आधा कप करेले के जूस को चौथाई कप पानी में एक चम्मच पिसा हुआ आंवला पाउडर मिलाकर रोजाना तीन बार पीने से एसिडिटी में लाभ होता है।

सूजन-

(1) आधा कप करेले का रस, चौथाई चम्मच पिसी हुई सोंठ, थोड़ा-सा पानी मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से सूजन ठीक हो जाती है।
गले में सूजन-सूखा करेला सिरके में पीसकर गर्म करके गले पर लेप करने से गले की सूजन मिट जाती है।

मुंह के छाले–

 एक गिलास पानी में आधा कप करेले के जूस को लेकर जरा-सी फिटकरी मिलाकर रोजाना दो बार कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं। एक चम्मच जूस में थोड़ी सी चीनी मिलाकर चार बार पियें |

मोटापा -

 आधा कप करेले का रस, आधा कप पानी में मिलाकर उसमें एक नींबू (Lemon) निचोड़कर प्रात: खाली पेट पीते रहने से मोटापा कम होता है। मात्रा- एक-दो करेले के जूस (karela juice) को आधा कप पानी में मिलाकर लें।

करेले के उपयोग– 

करेले के जूस , उबालकर, सेंककर, सब्जी और अचार आदि बनाकर सेवन किया जा सकता है।

कब्ज़ (constipation)- 

करेला कब्ज़ दूर करता है। करेले का मूल अरिष्ट (extraction), जो होम्योपैथी में “मोमर्डिका कैरन्शिया” नाम से मिलता है, को 10 बूंद चार चम्मच पानी में मिलाकर प्रतिदिन चार बार देने से कब्ज़ दूर हो जाती है।

अर्श रोग (Piles)- 

करेले के जूस को 5-8 ग्राम की मात्रा में लेकर उसमे थोड़ी सी चीनी मिलाकर लेने से अर्श रोग में होने वाले रक्तस्त्राव रूक जाता है | करेले की जड़ को घिस कर मस्सो पर लगाने से Piles से राहत मिलती है |
करेले के जूस में काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर दोपहर के खाने के साथ पीने से पेट के लगभग सभी रोगों से मुक्ति मिलती हैं |

प्लीहा बढ़ने की समस्या होने पर लगातार एक कप करेले के जूस को पीने से लाभ मिलता है |
अस्थमा के रोगियों को करेले की सब्जी नियमित रूप से खाने से लाभ मिलता हैं |
छोटे बच्चो को करेले की सब्जी नियमित रूप से खानी चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद फास्फोरस उनके बढ़ते दिमाग के लिए बहुत जरुरी होता है

यकृत (Liver) और पेट के लिए करेले के लाभ –

 अगर छोटे बच्चों को (3 से 8 वर्ष) आधा चम्मच करेले के जूस प्रतिदिन पिलाया जाये तो बच्चों लिवर ठीक रहता है। और पेट से सम्बंधित बीमारिया भी नहीं होती है जैसे गैस, अपच आदि।
करेले के पत्तों के जूस से “Intestinal Worms” और उल्टी में लाभ होता है।
पथरी ठीक करने के लिए -दो करेलों का रस को एक कप छाछ में मिलाकर रोजाना दो बार पियें जब तक पथरी निकल नहीं जाए। करेले के पत्तों का जूस पीने से पेशाब अधिक आता है।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


वायरल फीवर के घरेलू नुस्खे ,आहार और बुखार की कमजोरी दूर करने के उपाय


                                                      

    मौसम में बदलाव के साथ ही शरीर में भी कई प्रकार के बदलाव शुरू हो जाते हैं और गर्मी में मौसम नमीयुक्त और चिपचिपा होने लगता है। इस मौसम में वायरल बुखार से ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं। वायरस से होने वाला बुखार, गला दर्द व नाक बहने की समस्याएं ज्यादा लेकर आता है। यह बुखार बच्चों व बडों को समान रूप से प्रभावित करता है। वायरल में संक्रमण की स्थिति कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक रह सकती है। वायरल में कई लोग खाना-पीना छोड देते हैं। लेकिन खाना छोडने से बीमारी और बढ सकती है। इसलिए जहां तक संभव हो वायरल में खूब खाना खाएं और डिहाइडेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएं।
वायरल बुखार में खाने के फायदे
वायरल बुखार तभी होता है जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए खान-पान का उचित ध्यान रखना चाहिए। अगर सेहतमंद ओर प्रोटीन युक्त खाना खाया जाए तो शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता खुद निर्मित हो जाती है। सादा, ताजा खाना ही खाएं क्योंकि है वीफूड आसानी से पच नहीं सकते हैं। रखे हुए खाने को गर्म करके ही खाएं क्योंकि इससे सभी बैक्टीरिया समाप्त हो जाते हैं। खाने में अदरक, लहसुन, हींग, जीरा, काली मिर्च, हल्दी और धनिये का प्रयोग अवश्य करें क्योंकि इनमे पाए जाने वाले तत्व पाचन शक्ति को बढाते हैं और वायरल के कीटाणुओं से लडते हैं।

वायरल बुखार में क्या-क्या खाएं

मौसमी संतरा व नीबूं खाएं जिसमें विटामिन-सी और वीटा कैरोटींस होता है जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
वायरल फीवर होने पर डाई फूड खूब खाना चाहिए। डाई फूड में जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
लहसुन में कैल्सियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और खनिज तत्व पाए जाते हैं। इससे सर्दी, जुकाम, दर्द, सूजन और त्वचा से संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं। लहसुन घी या तेल में तलकर चटनी के रूप में भी प्रयो‍ग किया जा सकता है।
खूब पानी पियें। इससे डिहाइडेशन के अलावा शरीर पर हमला करने वाले माइक्रो आर्गेनिज्म को बाहर निकालने में मदद मिलती है।
तुलसी के पत्ते में खांसी, जुकाम, बुखार और सांस संबंधी रोगों से लडने की शक्ति है। बदलते मौसम में तुलसी के पत्तियों को उबालकर या चाय में डालकर पीने से नाक और गले के इंफेक्शन से बचाव होता है।
वायरल बुखार में हरी और पत्तेदार सब्जियों का अधिक मात्रा में प्रयोग करें। क्योंकि हरी सब्जियों में पानी की मात्रा ज्यादा होती है जिससे डिहाइडेशन नहीं होता है।
टमाटर, आलू और संतरा खाएं। इनमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
वायरल में दही खाना बंद न करें क्योंकि दही खाने से बैक्टीरिया से लडने में सहायता मिलती साथ ही यह पाचन क्रिया को सही रखता है। पेट खराब, आलसपन और बुखार को दूर करता है।
वायरल में गाजर खाएं, इसमें केरोटीन पाया जाता है जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढती है और कीटाणुओं से लडने में मदद मिलती है।
अधिक मात्रा में केले और सेब का सेवन करें। इन दोनों ही में अधिक मात्रा में पोटैसियम पाई जाती है जो ऐसा इलेक्ट्रोलाइट है दस्‍त समाप्‍त होती है।
वयरल बुखार में खाना खूब खाएं लेकिन खाने का गलत कंबीनेशन कभी ना लें। मसलन अगर आप दही खा रहे हैं तो हैवी नॉनवेज या नींबू अथवा कोई खटटी चीज ना खाएं। ठंडे और तरल पेय पदार्थों का सेवन न करें क्योंकि वे शरीर में पानी रोकते हैं और असंतुलन होता है। वायरल होने पर दिमाग पर बिलकुल जोर ना लगाएं क्योंकि ऐसा करने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होगी और वायरल ज्यादा दिनों तक रह सकता है।
वायरल होने से वाले शरीर में कुछ इस तरह के लक्षण दिखते हैं जैसे, गले में दर्द, खांसी, सिर दर्द, थकान, जोड़ों में दर्द के साथ ही उल्टी और दस्त होना, आंखों का लाल होना और माथे का बहुत तेज गर्म होना आदि. बड़ों के साथ यह वायरल फीवर बच्चों में भी तेजी से फैलता है.
इन घरेलू उपचार से आप इस इंफेक्शन से राहत पा सकते हैं...

1. हल्दी और सौंठ का पाउडर

अदरक में एंटी आक्सिडेंट गुण बुखार को ठीक करते हैं. एक चम्मच काली मिर्च का चूर्ण, एक छोटी चम्मच हल्दी का चूर्ण और एक चम्मच सौंठ यानी अदरक के पाउडर को एक कप पानी और हल्की सी चीनी डालकर गर्म कर लें. जब यह पानी उबलने के बाद आधा रह जाए तो इसे ठंडा करके पिएं. इससे वायरल फीवर से आराम मिलता है.

2. तुलसी का इस्तेमाल

तुलसी में एंटीबायोटिक गुण होते हैं जिससे शरीर के अंदर के वायरस खत्म होते हैं. एक चम्मच लौंग के चूर्ण और दस से पंद्रह तुलसी के ताजे पत्तों को एक लीटर पानी में डालकर इतना उबालें जब तक यह सूखकर आधा न रह जाए. इसके बाद इसे छानें और ठंडा करके हर एक घंटे में पिएं. आपको वायरल से जल्द ही आराम मिलेगा.

3. धनिया की चाय

धनिया सेहत का धनी होता है इसलिए यह वायरल बुखार जैसे कई रोगों को खत्म करता है.वायरल के बुखार को खत्म करने के लिए धनिया चाय बहुत ही असरदार औषधि का काम करती है.

4. मेथी का पानी

आपके किचन में मेथी तो होती ही है.मेथी के दानों को एक कप में भरकर इसे रात भर के लिए भिगों लें और सुबह के समय इसे छानकर हर एक घंटे में पिएं. जल्द ही आराम मिलेगा.

5. नींबू और शहद

नींबू का रस और शहद भी वायरल फीवर के असर को कम करते हैं. आप शहद और नींबू का रस का सेवन भी कर सकते हैं.
अक्सर लंबे समय से चले आ रहे बुखार या ज्यादा श्रम करने के बाद शरीर एकदम सुस्त सा महसूस करता है। शरीर में कमजोरी आने से इसका सीधा असर हमारी कार्यक्षमता पर पड़ता है। शहरी जीवन भागदौड़ भरा होता है जबकि वनांचलों में आदिवासियों की जीवनचर्या बेहत नियमित होती है साथ ही इनके भोजन और जीवनशैली में वनस्पतियों का बेजा इस्तमाल होता है और शायद यही वजह है जिससे वनवासियों की औसत आयु आम शहरी लोगों से ज्यादा होती है।लगातार कंप्यूटर पर बैठे रहना, खानपान के समय में अनियमितता और तनाव भरा जीवन मानसिक और शारीरिक तौर से थका देता है।

गोंद शारीरिक ऊर्जा के लिए उत्तम -

पीपल के पेड़ से निकलने वाली गोंद को शारीरिक ऊर्जा के लिए उत्तम माना जाता है। मिश्री या शक्कर के साथ पीपल की करीब 1 ग्राम गोंद मात्रा लेने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और यह थकान मिटाने के लिए एक कारगर नुस्खा माना जाता है। प्रतिदिन इसका सेवन करते रहने से बुजुर्गों की सेहत भी बनी रहती है।

 दैनिक आहार के रूप में अपनाए पेजा -

पातालकोट (मप्र) जैसे दूरगामी आदिवासी अंचलों में प्रो-बायोटिक आहार “पेजा” दैनिक आहार के रूप में सदियों से अपनाया जाता रहा है और इसका भरपूर सेवन भी किया जाता है। पेजा एक ऐसा व्यंजन है जो चावल, छाछ, बारली (जौ), निंबू और कुटकी को मिलाकर बनाया जाता है। आदिवासी हर्बल जानकार इस आहार को कमजोरी, थकान और बुखार आने पर अक्सर रोगियों को देते हैं। पके हुए चावल, जौ और कुटकी को एक मिट्टी के बर्तन में डाल दिया जाता है और इसमें छाछ मिला दी जाती है जिससे कि यह पेस्ट की तरह गाढ़ा बन जाए। इस पूरे मिश्रण पर स्वादानुसार नींबू का रस और नमक मिलाकर अंधेरे कमरे में रख दिया जाता है। दो दिनों के बाद इसे फेंटकर एक खास व्यंजन यानि पेजा तैयार हो जाता है। भोजन के वक्त एक कटोरी पेजा का सेवन जरूरी माना जाता है और ये बेहद स्वादिष्ट भी होता है।

लटजीरा के पौधे रस

लटजीरा के संपूर्ण पौधे के रस (4 मिली प्रतिदिन) का सेवन तनाव, थकान और चिढ़चिढ़ापन दूर करता है साथ ही इसकी वजह से नींद नहीं आने की समस्या में भी राहत मिलती है। सेवन करने से निश्चित फायदा मिलता है। टमाटर के साथ फराशबीन का सूप शरीर में अक्सर होने वाली थकान, ज्यादा पसीना आना और कमजोरी दूर करने के लिए आदिवासी टमाटर के साथ फराशबीन को उबालकर सूप तैयार करते हैं और दिन में दो बार चार दिनों तक देते हैं, माना जाता है कि यह सूप शक्तिवर्धक होता है।

कद्दू के बीज फायदेमंद

ग्रामीण इलाकों में जी मचलना, थकान होना या चिंतित और तनावग्रस्त व्यक्ति को कद्दू के बीजों को शक्कर के साथ मिलाकर खिलाया जाता है। कद्दू के करीब 5 ग्राम बीज और इतनी ही मात्रा में मिश्री या शक्कर की फांकी मारी जाए तो बेहद फायदा होता है। ये मानसिक तनाव भी दूर करते हैं। 

आलू- बुखारे का करें सेवन -

आलू- बुखारे के सेवन से शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं, कब्जियत दूर होती है और पेट की बेहतर सफाई होती है। इन फलों में पाए जाने वाले फ़ाईबर्स और एंटी ऑक्सिडेंट्स की वजह से पाचन क्रिया ठीक तरह से होती है और शरीर की कोशिकाओं में मेटाबोलिज़्म की क्रिया सुचारू क्रम में होती है। इन फलों में सिट्रिक एसिड पाया जाता है जो कि थकान दूर करने में सहायक होता है और इसके सेवन से लीवर यानि यकृत तथा आंतो की क्रियाविधियां सुचारू रहती हैं अत: आलू-बुखारा खाने से शरीर में जमा अतिरिक्त वसा या ज्यादा वजन कम करने में मदद होती है और व्यक्ति शारीरिक तौर पर बेहद स्वस्थ महसूस करता है। 

दूब घास/दूर्वा का प्रतिदिन करें सेवन

आदिवासियों के अनुसार दूब घास/दूर्वा का प्रतिदिन सेवन शारीरिक स्फूर्ति प्रदान करता है और शरीर को थकान महसूस नहीं होती है। करीब 10 ग्राम ताजी दूर्वा को एकत्र कर साफ धो लिया जाए और इसे एक गिलास पानी के साथ मिलाकर ग्राईंड कर लिया जाए और पी लिया जाए, यह शरीर में ताजगी का संचार लाने में मददगार होती है। वैसे आधुनिक विज्ञान के अनुसार भी दूब घास एक शक्तिवर्द्धक औषधि है क्योंकि इसमें ग्लाइकोसाइड, अल्केलाइड, विटामिन `ए´ और विटामिन `सी´ की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है।

दूध के साथ लें शहद -

शहद को दूध के साथ मिलाकर लिया जाए तो हृदय, दिमाग और पेट के लिए फ़ायदेमंद होता है। नींबू पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से ये शरीर को ऊर्जा और ठंडक प्रदान करता है। आदिवासियों का मानना है कि यदि शहद का सेवन प्रतिदिन किया जाए तो ये शरीर को चुस्त दुरुस्त रखने में काफ़ी मदद करता है साथ ही शारीरिक ताकत को बनाए रखकर थकान दूर करता है।

कच्चे आलू का रस लें -

हम जानते हैं कि आलू में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। कच्चे आलू को कुचलकर एक चम्मच रस तैयार किया जाए और इसे दिन में कम से कम चार बार लिया जाए। आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार आलू का रस रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है और कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता शरीर को मिल जाती है। आलू की मदद से कमजोरी, थकान और ऊर्जा की कमी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उबले आलूओं का सेवन भी थकान दूर भगाने में बेहद कारगर होता है। 

थकान मिटाए तुलसी

पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकार तुलसी को थकान मिटाने वाली एक औषधि मानते हैं, इनके अनुसार अत्यधिक थकान होने पर तुलसी के पत्तियों और मंजरी के सेवन से थकान दूर हो जाती है। तरबूजे के छिलकों का मुरब्बा तरबूज के छिलकों की आंतरिक सतह को काटकर आदिवासी इनका मुरब्बा तैयार करते हैं, माना जाता है कि यह बेहद शक्तिवर्धक होता है। इसके छिलकों को बारीक काटकर सुखा लेते हैं और चूर्ण तैयार कर लिया जाता है। माना जाता है कि इस चूर्ण की आधी चम्मच मात्रा प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेने से शरीर में ताकत का संचार होता है और कई तरह की व्याधियों में राहत भी मिलती है, कुल मिलाकर ये पूर्ण रूप से सेहत दुरुस्ती के लिए कारगर होता है।

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फास्ट फूड हानिकारक है तंदुरुस्ती के लिए


      आज हर बड़े और छोटे शहरों के हर गली और नुक्कड़ में मेढ़क के छाते की तरह फास्ट फूड जॉइन्ट पनपता जा रहा है। बड़े-बूढ़े और जवान सभी वहाँ भीड़ लगाकर अपने भूख को शांत करने के लिए व्यस्त रहते हैं। यह आश्चर्य की बात है कि ऐसा क्या है जो इन जॉइन्ट को इतना लोकप्रिय बना रहा है। क्या वहाँ का खाना स्वादिष्ट और पुष्टिकारक होता है? फास्ट फूड वास्तविक रूप में है क्या? फास्ट फूड शब्द का मतलब वह खाना जो ज़ल्दी बनता भी है और तुरन्त परोसा भी जा सकता है। फास्ट फूड शब्द को 1951 में मरिअम वेबस्टर के शब्दकोश से पहचान मिली।

सही में फास्ट फूड है क्या?

जो खाना कम समय में तैयार हो सके उसको फास्ट फूड कहते हैं। रेस्तरां या स्टोर में जो खाना पकाया रहता है और सिर्फ गर्म करके परोसा जाता है वही इसका सही अर्थ है। ले जाने के लिए फास्ट फूड पैकेज में भी पाया जाता है।
यह खाना साधारणतः दुकान में पाए जाता हैं, जो स्टॉल/बूथ की तरह होते हैं, जहाँ आश्रय का स्थान या बैठने का स्थान नहीं होता है। उन्हें क्विक सर्विस रेस्तरां भी कहते हैं। फूड स्टफ का रेस्तरां चेन भी होता है जो केंद्र स्थल से फूड स्टफ विशेष विक्रय अधिकार दुकान तक भेजते हैं।

फास्ट फूड प्रतिष्ठित कैसे हुआ

पका हुआ खाना का विक्रय शहरी विकास से संबंधित है। समय आजकल के लिए सबसे महंगा ज़रूरत का समान बन गया है। लोगों के पास बैठकर संपूर्ण खाना खाने का समय नहीं है। विशेषकर काम करनेवालों के लिए जो दोपहर के खाने के वक्त कुछ जल्दी से चबाकर पेट भर लेना चाहते हैं, वे फास्ट फूड ज़्वाइंट में जाना पसंद करते हैं।
आजकल लोग अलग रहना ज़्यादा पसंद करते हैं, संगठित परिवार के जगह। एकल परिवार में दोनों पति-पत्नी काम करते हैं, उनके पास चूल्हे के पास जाकर खाना बनाने का समय कम होता है। ऐसे परिवार बाहर से खाना मँगाकर खाना पसंद करते हैं, जहाँ खर्चा थोड़ा होता है या घर में दे जाने के लिए कुछ नहीं लगता है।

फास्ट फूड आधुनिक युग का विकास नहीं है

मध्य युग से ही फास्ट फूड का पता चलता है, जहाँ वेन्डर द्वारा पका हुआ माँस, फ्लान, पाईस, पेस्ट्रीस, वेफर, वेफल्स, पैनकेक लंदन और पैरिस जैसे शहर में बेचे जाते थे। अविवाहित लोग जो अकेले रहते थे, वे ही ज़्यादातर ग्राहक होते थे, जिन्हें खुद खाना बनाना पड़ता था। वे क्वाटर में रहते थे और वे किचन की सुविधा उपभोग करने में असमर्थ थे उन्हें फास्ट फूड खाकर ही पेट भरना पड़ता था। यात्री और तीर्थयात्री को धार्मिक जगहों पर फास्ट फूड खाकर भूख को संतुष्ट करना पड़ता है। प्रथम विश्व युद्ध के बाद मोटरगाड़ी की सुविधा आम लोगों को मिली, इस तरह कुछ चलयमान रेस्तरां का भी आर्विभाव हुआ।

इस तरह के दुकान में कैसा खाना मिलता है 

ज़्यादातर आधुनिक वाणिज्यिक फास्ट-फूड से संसाधित होते हैं जो मानक उत्पादक के तरीके और पाकशैली में मानक सामग्री डालकर बड़ी मात्रा में पकाये जाते हैं। उनको कार्टन या प्लास्टिक में रैप करके दिया जाता है जिससे उत्पादक का खर्चा कम पड़ता है। मुख्यतः फास्ट फूड का मेनू संसाधित सामग्री से बनता है और केंद्र स्थल से अलग-अलग दुकान में जाता है, जहाँ गरम करके परोसा जाता है, या तो डीप फ्राई करके, माइक्रोवेव में या जल्दी एकत्र करके दिया जाता है। इस तरह उत्पादक को मार्केट में क्वालिटी और नाम बनाए रखने में सहायता होती है ।

फास्ट फूड खाने से हानि और लाभ

वे खाने की बजाय फास्ट फूट का सेवन ज्यादा पसंद करते हैं। आर्युवेद में फास्ट फूड को स्वास्थ्य के लिए जहर कहा गया है। आज इस लेख के जरिये हम आपको फास्ट फूड के सेवन से होने वाले नुकसान और इसके फायदे के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

दिल संबंधी रोग

शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ने के लिए फास्टफूड काफी हद तक जिम्मेदार होता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से दिल संबंधी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। वहीं दूसरी तरफ वजन बढ़ने से भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
 
मोटापे की समस्या

फास्ट फूड में कैलोरी और शुगर की मात्रा ज्यादा होती है। इसके ज्यादा सेवन से आपका वजन बढ़ने लगता है। पोषक तत्वों की कमी के कारण फास्ट शरीर को नुकसान पहुंचाता है। फास्ट फूड का संयमित सेवन आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता।

थकान

फास्ट फूड खाने वाले व्यक्तियों या बच्चों को थकान बहुत जल्दी होने लगती है। फास्ट फूड के सेवन से आपका पेट को एकदम भर जाता है लेकिन इसमें पोषक तत्वों की कमी के कारण पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन आदि नहीं होने के कारण आपका शरीर में विटामिन की कमी हो जाती है। ऐसे में थोड़ा चलने पर ही आपको थकान होने लगती है।

तनाव

यदि आप भूख लगने पर फास्ट फूड के सेवन को तरजीह देते हैं तो यह आपके तनाव का कारण भी बन सकता है। जो लोग अपने जीवन में ज्यादा फास्ट फूड का सेवन करते हैं, उनके तनाव का स्तर उतना ही ज्यादा होता है।

डायबिटीज

फास्ट फूड के सेवन से टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा काफी ज्यादा रहता है। टाइप 2 डायबिटीज फास्ट फूड और जंक फूड के सेवन, बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल, असमय खाने और शारीरिक रूप से कम एक्टिव रहने के कारण होती है।

कैंसर

हाल हीं में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक शुगर और फैट से भरे फास्ट फूड का सेवन करने से पेट से संबंधित कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। एक अन्य शोध के मुताबिक फास्ट फूड प्रोस्टेट कैंसर का भी कारण है।

फास्ट फूड की अच्छाई

मिलने में सुविधाजनक

फास्ट फूड हर गली-मोहल्ले में आसानी से मिलने वाला खाद्य पदार्थ है। अधिकतर रेस्टोरेंट तो फास्ट फूड की फ्री होम डिलीवरी भी करते हैं। हाइवे और रास्ते पर फास्ट फूड रेस्टोरेंट के ड्राइव-थ्रू काउंटर बने हुए हैं, इनसे आप बिना किसी देरी के फास्ट फूड लेकर खा सकते हैं। यदि आप एकदम पेट भरने के लिए कुछ खाना चाहते हैं तो ऐसे में फास्ट फूड एक बेहतर विकल्प है।

रुपये और समय की बचत

फास्ट फूड गली और चौराहों पर आराम से मिलने के कारण पौष्टिक खाने के मुकाबले काफी सस्ता भी होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक घर में बने खाने के मुकाबले फास्ट फूड काफी सस्ता होता है। वहीं समय की बात करें तो फास्ट फूड अन्य भोजन के मुकाबले आसानी से मिल और बन जाता है तो इस कारण इसे खाने से समय की भी बचत हो जाती है।


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