मुख की दुर्गंध के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार

                                             


     किसी व्यक्ति की स्माइल से उस व्यक्ति के व्यक्तित्व पर दुसरे के सामने अच्छा इम्प्रैशन पड़ता है | आपकी छोटी सी मुस्कराहट और हँसी बड़े बड़े काम कर सकती है लेकिन बहुत बार लोग खुल कर हस नहीं पाते जिसके दो मुख्य कारण हो सकते हैं दांतों का पीलापन और मुंह या सांस की बदबू |
ऐसे में आपके दोस्त आपसे दूर रहना शुरू कर देते हैं आपके दोस्त आपको बता भी नहीं पाते की आपके मुंह से दुर्गंध आ रही है | ऐसे में आपका आत्मविशवास कम होने लगता है आप अपने चाहने वालों से दूर हो जाते हैं | लोग आपकी पीठ पीछे आपका मजाक बनाने लगते हैं | ऐसे में आपको अपने आत्मविश्वास को बनाये रखना है |
सबसे पहले आपको जानने की कोशिश करनी है की क्या आपके मुह से badboo आ रही है | इसके लिए आप अपने मुह से कुछ दूरी पर अपना दायाँ हाथ रखकर मुह से सांस छोड़ें | इससे सांस आपके नाक तक पहुंचेगी और आपको पता चल जाएगा की आपके मुह से badbu आ रही है या नहीं | आप अपना हाथ भी सूंघकर देखे इससे आपको पता चल जाएगा की साँसों से दुर्गन्ध आ रही है या नहीं |

बदबूदार पदार्थ खाना (प्याज,लहसुन)
दवाओं का प्रयोग करने के दौरान
तम्बाकू वाले पदार्थ इस्तेमाल करने से

कब्ज की समस्या
लीवर से जुडी कोई बीमारी
बहुत कम पानी पीना
पेट से जुडी कोई समस्या
टोन्सिल की समस्या के कारन
मुहं में इन्फेक्शन
दांतों की समस्या
ब्रश नहीं करना
जीभ की सफाई नहीं करना


मुख की  बदबू दूर करने ke उपाय

लौंग मुह और दांतों की बहुत सी समस्याओं में लाभकारी होती है | मुह से बदबू आने पर लौंग को चबाने से बदबू नहीं आएगी और दांत में दर्द दांत की सेंसिटिविटी की समस्या से भी छुटकारा मिलता है |

छोटी इलाइची :

अगर आपको कहीं बाहर जाना है और आप चाहते हैं आपके मुह से बदबू की जगह खुशबू आये तो घर के kitchen में मौजूद छोटी इलाइची भी एक कारगर उपाय है | छोटी इलायची चबाने से मुह से दुर्गन्ध नहीं आती है |


गेहूं के जवारे का रस :

गेहूं के जवारे का रस पायरिया और मुह से आने वाली दुर्गन्ध को दूर करने का अच्छा उपाय है | इसलिए गेहू के जवारे का रस पिने से भी मुह की बदबू से छुटकारा मिलता है |

निम्बू का रस :

निम्बू के रस से मुह में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया मर जाते हैं क्यूंकि निम्बू का रस एंटी बैक्टीरियल की तरह से काम करता है | इसे प्रयोग करने के लिए एक गिलास पानी में कुछ बुँदे निम्बू का रस मिला ले और इस पानी से दिन में दो बार कुल्ला करने से मुह से बदबू आनी बंद हो जाएगी |

दालचीनी का प्रयोग :

घर में इस्तेमाल की जाने वाली दालचीनी मुह और साँसों में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को ख़तम करने का काम भी करती है | इसे इस्तेमाल करने के लिए दालचीनी और थोड़ी सी अजवायन को पानी में उबाल लें और इस पानी से दिन में दो बार गरारे और कुल्ला करें |

नीम और बबूल :

नीम में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो मुह में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को ख़तम करने में सक्षम है | इसलिए रोजाना नीम या बबूल का दातुन करने से भी मुह की बदबू से छुटकारा मिलता है | नीम के पत्तों को पानी में उबाल कर उस पानी से गरारे करने से भी muh ki badboo दूर होती है |

पानी से 

शरीर के किसी भी हिस्से से बदबू आने का मतलब है शरीर में विषेले पदार्थों का जमा होना | शरीर में विषेले पदार्थों के जमा होने से रोकने के लिए जरूरी है हमारा लीवर और किडनी सही तरह से काम करते रहे | इनकी कार्यप्रणाली और विषेले पदार्थो को शरीर से बाहर निकालने के लिए दिन में 8 से 10 गिलास पानी पिए इससे भी मुह की दुर्गन्ध से छुटकारा मिलेगा |

सरसों का तेल :

सरसों के तेल और नमक का मिश्रण मुह और दांतों सम्बंधित समस्याओं को दूर करने का जबरदस्त नुस्खा है | इसे इस्तेमाल करने के लिए हथेली पर थोडा सा सरसों का तेल लेकर इसमें नमक मिला लें और उंगली के साथ दांतों पर मसाज करें | इससे भी मुह की दुर्गन्ध से छुटकारा मिलेगा |

बेकिंग सोडा :

बेकिंग सोडे को पानी में डालकर कुल्ला करे | बेकिंग सोडा मुह में बदबू पैदा करने वाले कीटाणुओं से लड़ता है और मुह की बदबू से छुटकारा दिलाता है |

सेब का सिरका :

सेब का सिरका भी मुह से आने वाली बदबू को दूर करने का अच्छा उपाय है | मुह से बदबू आने की स्थिति में पानी में थोडा सा सेब का सिरका मिला कर गरारे करें | इससे साँसों की बदबू से छुटकारा मिलता है |


ग्रीन टी :

ग्रीन टी में एंटी ओक्सिडेंट गुण पाए जाते हैं | ग्रीन टी के सेवन से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और मुह की बदबू से छुटकारा मिलता है | Bad breathing problem को दूर करने के लिए दिन में एक से दो कप ग्रीन टी का सेवन मुह के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है |

तुलसी के पत्ते :

तुलसी बहुत सी बिमारियों को दूर करने का अच्छा उपाय है | मुह की समस्याएँ, गले की समस्याएँ और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में तुलसी बहुत कारगर है | मुह और सांसो की बदबू को दूर करने के लिए तुलसी की पत्तियों को चबा कर खाए इससे मुह की बदबू से छुटकारा मिलता है |

सौंफ :

खाने खाने के बाद कुल्ला जरूर करें और मुह की दुर्गन्ध को दूर करने के लिए सौंफ और मिश्री को मिलाकर खाने से हाजमा सही रहता है और मुह से खाने की दुर्गन्ध भी नहीं आती |
मुह से आने वाली बदबू अगर पेट की समस्या की वजह से है तो रात को त्रिफला चूर्ण का इस्तेमाल करें | दिन में दो बार ब्रश करें और रात को सोने से पहले ब्रश जरूर करें | ज्यादा सख्त तारों वाला ब्रश का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए | खाना खाने के बाद कुल्ला करें जिससे खाना मुह में नहीं रहेगा जो सड़ कर बदबू पैदा नहीं करेगा |

मूंग की दाल के स्वास्थ्य लाभ // Health Benefits of Moong Dal


                                                       


    मूंग की दाल सिर्फ बीमारी में ही नहीं बल्कि हेल्थ को मेंटेन करने के लिए भी जरूरी है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और फास्फोरस होता है। इस दाल के पापड़, लड्डू और हलवा भी बनता है। इस दाल को अपनी डाइट में शामिल करने से मसल्स मजबूत होती हैं और एनीमिया दूर होता है।

  जरूरी नहीं कि स्‍वाद में जो अच्‍छा हो, वो स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक भी हो। अक्‍सर ऐसा ही होता है, जो चीज खाने में बिल्‍कुल अच्‍छी नहीं लगती है वो गुणों से भरपूर ही होती है। स्‍वादिष्‍ट भोजन करने से पहले हर किसी को शरीर के विकास के लिए विटामिन और खनिज की जरूरत होती है। आयुर्वेद के चिकित्सक डॉ. सत्य प्रकाश मिश्र के मुताबिक दालों में सबसे पौष्टिक दाल, मूंग की होती है, इसमें विटामिन ए, बी, सी और ई की भरपूर मात्रा होती है। साथ ही पौटेशियम, आयरन, कैल्शियम की मात्रा भी मूंग में बहुत होती है। इसके सेवन से शरीर में कैलोरी भी बहुत नहीं बढ़ती है। अगर अंकुरित मूंग दाल खाएं तो शरीर में कुल 30 कैलोरी और 1 ग्राम फैट ही पहुंचता है।
स्‍प्राउट खाने से होता है स्‍वास्‍थ्‍य लाभ: अंकुरित मूंग दाल में मैग्‍नीशियम, कॉपर, फोलेट, राइबोफ्लेविन, विटामिन, विटामिन सी, फाइबर, पोटेशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन बी -6, नियासिन, थायमिन और प्रोटीन होता है। मूंग की दाल के स्‍प्राउट ऐसे ही कुछ लाभकारी गुण निम्‍न प्रकार है। मूंग की दाल के स्‍प्राउट में ग्‍लूकोज लेवल बहुत कम होता है इस वजह से मधुमेह रोगी इसे खा सकते हैं।


* मूंग की दाल को उत्तम आहार माना गया है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त करती है और पेट में ठंडक पैदा करती है, जिससे पाचन और पेट में गर्मी बढ़ने की समस्या नहीं होती।
*मूंग की दाल के स्‍प्राउट में ओलियोसाच्‍चाराइडस होता है जो पॉलीफिनॉल्‍स से आता है। ये दोनों की घटक, गंभीर रोगों से लड़ने की क्षमता को प्रबल करते हैं। कैंसर के रोगी भी इसका सेवन आराम से कर सकते हैं।
*मूंग की दाल में ऐसे गुण होते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देते हैं और उसे बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं। इसमें एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफलामेट्री गुण होते हैं, जो शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाते हैं।
*मूंग की दाल के स्‍प्राउट में शरीर के टॉक्सिक को निकालने के गुण होते हैं। इसके सेवन से शरीर में विषाक्‍त तत्‍वों में कमी आती है।

*कब्ज की समस्या होने पर मूंग की छिलके वाली दाल का सेवन बेहद लाभप्रद होता है, इसके सेवन से पेट साफ होने में मदद मिलती है।
*शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर मूंग दाल का सेवन लाभकारी होता है, यह अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को शरीर से हटाने में मददगार होती हैवजन कम करने की चाह रखने वालों के लिए मूंगदाल का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है, इसमें 100 से भी कम कैलोरी होती है और इसे खाने के बाद पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है जिससे आप अतिरिक्त कैलोरी नहीं लेते।

टांगों मे होने वाली ऐंठन और दर्द के उपचार

                                     


कमजोरी की वजह से अक्सर महिलाओं को रात के समय पैरों या फिर टांगों में ऐंठन पड़ने की समस्या हो जाती है। वैसे तो इसका कोई खास कारण नहीं है लेकिन शारीरिक कमजोरी, उठने-बैठने का गलत तरीका और बैलेंस डाइट की अनदेखी इसकी वजहें हो सकती है। कई बार को टांगों में होने वाली इस ऐंठन से थोडी देर में आराम मिल जाता है लेकिन लगातार इस तरह की समस्या बनी रहे तो आगे चलकर दिक्कत हो सकती है। इससे बचने के लिए दवाइयां खाने से बेहतर है कि घरेलू तरीकों को अपनाया जाए।
कैल्शियम से भरपूर आहार का सेवन
यह हड्डियों से जुड़ी कमजोरी मानी जाती है। इससे छुटकारा पाने के लिए कैल्शियम से भरपूर आहारों का सेवन करना शुरु करें। हर रोज कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करने से फायदा मिलता है। दूध,हरी पत्तेदार सब्जियां,फल और सूप को डाइट में शामिल करें।

गर्म दूध का सेवन

हर रोज रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध का सेवन करें। इसे बैस्ट सुपरफूड्स में से एक माना गया है। इसके सेवन से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। इससे ऐंठन की समस्या से निजात मिलती है।  
 
*गुनगुने पानी से स्नान भी टांगों की ऐंठन से आराम दिलाने में मददगार है। इससे मांसपेशियों की ऐंठन से आराम मिलता है। तुरंत राहत पाने के लिए आप पैरों के लिए हॉट पैड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

रोजाना खाएं केला

केले में मौजूद कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए लाभकारी है। इसमें बहुत से पोषक तत्व शरीरिक कमजोरी को दूर करने में मददगार है। ऐंठन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए हर रोज केले का सेवन करें।

सरसों के तेल की मसाज

सरसों के तेल में एसिटीक एसिड किसी भी तरह की दर्द से राहत पाने में मददगार है। इससे कोई साइड इफैक्ट भी नहीं होता। इस तेल को गुनगुना करके इससे पैरों की मसाज करें।

खूनी या बादी बवासीर के मस्सो का इलाज

                                                          


बवासीर के मस्सो पर लगाने के लिए तेल
एरंडी के तेल को थोड़ा गर्म कर आग से नीचे उतार कर उसमे कपूर मिलाकर व घोलकर रख ले। अगर कपूर की मात्रा १० ग्राम हो तो अरंडी का तेल ८० ग्राम होना चाहिए। मतलब ८ गुना अगर कपूर ५ ग्राम हैं तो तेल ४० ग्राम।
पाखाना करने के बाद मस्सो को धोकर और पोछकर इस तेल को दिन में दो बार नर्मी से मस्सो पर इतना मलें की मस्सो में शोषित हो जायें। इस तेल की नर्मी से मालिश से मस्सो की तीव्र शोथ, दर्द, जलन, सुईयां चुभने को आराम आ जाता ही और निरंतर प्रयोग से मस्सो खुश्क हो जाते है।
बवासीर के मस्से सूजकर संगर की भांति मोटे हो जाते है और कभी-कभी गुदा से बाहर निकल आते है। ऐसी अवस्था में यदि उन पर इस तेल को लगाकर अंदर किया जाये तो दर्द नही होता और मस्से नरम होकर आसानी से गुदा के अंदर प्रवेश किये जा सकते है।
 
सहायक उपचार.

बवासीर की उग्र अवस्था में भोजन में केवल दही और चावल, मूंग की खिचड़ी ले। देसी घी प्रयोग में लाएं। मल को सख्त और कब्ज न होने दे। अधिक तेज मिर्च-मसालेदार, उत्तेजक और गरिष्ठ पदार्थो के सेवन से बचे।
खुनी बवासीर में छाछ या दही के साथ कच्चा प्याज ( या पीसी हुयी प्याज की चटनी ) खाना चहिए।
रक्तस्रावी बवासीर में दोपहर के भोजन के एक घटे बाद आधा किलो अच्छा पपीता खाना हितकारी है।
बवासीर चाहे कैसी भी हो बड़ी हो अथवा खुनी, मूली भी अक्सीर है। कच्ची मूली ( पत्तो सहित ) खाना या इसके रस का पच्चीस से पचास ग्राम की मात्रा से कुछ दिन सेवन बवासीर के अतिरिक्त रक्त के दोषो को निकालकर रक्त को शुद्ध करता है।

बवासीर में विशेष

बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।
एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी ( जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन ) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से बचना परम आवश्यक है।

जेतून के तेल के अनजाने फायदे


                                                        


1. त्वचा के लिए जैतून का तेल बहुत फायदेमंद है। रोजाना चेहरे पर इसकी मसाज करने से त्वचा की झुर्रियां समाप्त हो जाती हैं और त्वचा में नमी और चमक बनी रहती है।
2. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध के अनुसार जैतून का तेल आंत में होने वाले कैंसर से बचाव करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

3. विटमिन ए, बी, सी, डी और ई के साथ-साथ जैतून के तेल में आयरन और पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो बालों की कोमलता और मजबूती बढ़ाने में मदद करते हैं। यह ओलेइक एसिड और ओमेगा-9 फैटी एसिड का भी अच्छा स्रोत है।
4.जैतून के तेल में फैटी एसिड की पर्याप्त मात्रा होती है जो हृदय रोग के खतरों को कम करती है। मधुमेह रोगियों के लिए यह काफी लाभदायक है। शरीर में शुगर की मात्रा को संतुलित बनाए रखने में इसकी खास भूमिका है। इसलिए आहार में भी इस तेल का प्रयोग किया जाता है।
5. लंबे समय तक जैतून के तेल को आहार में शामिल करने पर यह शरीर में मौजूद वसा को खुद ब खुद कम करने लगता है। इससे आपका मोटापा कम होता है, वह भी हेल्दी तरीके से।
6.जैतून के तेल में कैल्शि‍यम की काफी मात्रा पाई जाती है, इसलिए भोजन में इसका उपयोग या अन्य तरीकों से इसे आहार में लेने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से निजात मिलती है।

7. जैतून के तेल को मेकअप रिमूवर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके प्रयोग से त्वचा रूखी भी नहीं होती और त्वचा का रंग गोरा होता है। यह त्वचा को पोषण प्रदान करता है।
8. जैतून के तेल में संतृप्त वसा लगभग ना के बराबर होता है जिससे यह आपके शुुगर लेवल को नियंत्रि‍त करता है। साथ ही इसे खाने से बॉर्डर लाइन डायबीटिज होने का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है।
9. जैतून के तेल में एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा भी काफी होती है। इसमें विटामिन ए, डी, ई, के और बी-कैरोटिन की मात्रा अधिक होती है। इससे कैंसर से लड़ने में आसानी होती है साथ ही यह मानसिक विकार दूर कर आपको जवां बनाए रखने में भी मदद करता है
10.इसमें संतृप्त वसा की मात्रा कम होती है जिससे शरीर में कॉलेस्टेरोल की मात्रा को भी संतुलित बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे हृदयाघात का खतरा काफी कम हो जाता है।

    मालिश के लिए नारियल और सरसों के तेल के साथ-साथ जैतून के तेल को भी बेहतर माना जाता है.
प्राचीन काल से ही जैतून के तेल (ऑलिव ऑयल) को अत्यधिक गुणकारी एवं स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है. यह तेल बालों, त्वचा एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हुआ है. ऐसा माना जाता है कि नवजात शिशु की जैतून के तेल की मालिश करने से वह रोगमुक्त हो जाता है. यह तेल विभिन्न कार्यों जैसे खाना बनाने, त्वचा की मालिश, हाथ-पैर के दर्द आदि के काम में भी लाया जा सकता है.जैतून के तेल की सिर पर नियमित रूप से मालिश करने से बाल मजबूत एवं घने होते हैं, साथ ही साथ बालों का झड़ना व बालों में दोमुँहें होने की समस्या का भी निवारण हो जाता है.
इसे बालों में कंडीशनर की तरह प्रयोग में लाया जा सकता है जिससे डैंड्रफ की समस्या का समाधान होता है व बाल मुलायम हो जातें हैं. 

• इसकी आँखों के चारों ओर मालिश से आँखों के नीचे काले घेरे एवं दाग नहीं होते. इससे रतौंधी की समस्या भी दूर होती है.
• जैतून के तेल में विटामिन E भरपूर मात्रा में पाए जाने के कारण यह त्वचा को कई बाहरी कारकों से सुरक्षित रखता है एवं त्वचा की सेंसिटिविटी को कम करता है.• जैतून के तेल की शरीर पर मालिश, शरीर को स्फूर्तिदायक एवं स्वस्थ बनाती है. इसका नित्य प्रयोग त्वचा की झुर्रियों एवं काले धब्बों को खत्म कर त्वचा को सौन्दर्यवान बनाता है.
• इसकी नियमित मालिश से शरीर पर कील, मुँहासे, दाग-धब्बे आदि नहीं होते. इसके अतिरिक्त यह स्किन कैंसर एवं स्किन सम्बन्धी अन्य बीमारियों के निवारण में भी सहायक सिद्ध होता है.
• जैतून के तेल का प्रयोग फेसपैक, बॉडी लोशन एवं स्क्रब के रूप में भी किया जाता है. इसके प्रयोग से त्वचा पर निखार आता है व त्वचा कोमल एवं मुलायम होती है.

• इसमें विटामिन्स एवं मिनरल्स होने के कारण यह त्वचा के अंदर जाकर उसे खूबसूरत बनाता है. इसकी मालिश शरीर को स्फूर्तिदायक एवं दिमाग को तनावमुक्त करती है।
• जैतून के तेल की मालिश से त्वचा को पोषण मिलता है. इससे वह रूखी व शुष्क नहीं होती एवं त्वचा पर चमक बनी रहती है. इसके प्रयोग से त्वचा साफ़ हो जाती है.
 
इसकी मालिश से नवजात शिशु की हड्डियाँ मजबूत होतीं हैं. इसकी नियमित मालिश बच्चे को बढ़ने में सहायता प्रदान करती है.
• नहाने के थोड़ी देर बाद जैतून के तेल की मालिश करने से त्वचा का कालापन दूर हो जाता है एवं त्वचा दमकने लगती है.

• इसकी मालिश से होठों के फटने की समस्या भी दूर होती है व होंठ मुलायम होते है. जैतून के तेल की मालिश से नाखूनों में मजबूती और चमक भी आती है.
इस तरह जैतून के तेल की मालिश कई तरह से शरीर के लिए लाभप्रद है.
 • रात को सोने से पहले पैर की एड़ियों एवं जोड़ों पर जैतून का तेल मलने से एड़ियों व जोड़ों का दर्द दूर होता है. इससे एड़ियाँ कोमल व मुलायम होतीं हैं.