महिलाओं के लिए शेविंग टिप्स // Shaving tips for women

                                                        

      आजकल पुरुष और महिलाएं दोनों ही अनचाहे बालों को हटाने के लिए शेविंग विधि का अधिक उपयोग करने लगी है. धीरे धीरे इस विधि का प्रचलन महिलायों के बीच बढ़ने के कई कारण है, जैसे इससे न केवल वैक्सिंग से होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है बल्कि इस विधि में समय भी नहीं लगता. आजकल की व्यस्त दिनचर्या में किसी के पास अधिक समय नहीं होता, सबको अपना हर एक पल बचाना अच्छा लगता है. विशेषकर कामकाजी महिलाये तो अधिकतर शेविंग विधि को ही प्राथमिकता देती है. क्यूंकि उन्हें अपने घर के साथ साथ अपने ऑफिस के काम को भी पूरा करना होता है. और शेविंग से बड़ी आसानी व जल्दी से अनचाहे बालों से निजात पाया जा सकता है, अतः 80% कामकाजी महिलायों द्वारा तो यह एक बेहतर उपाय माना जाता है.


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   सर्द इलाको की अपेक्षा गर्म देशों में इस तरह की विधियों को अपनाकर अनचाहे बालों को हटाकर स्वच्छ और तरोताज़ा महसूस करने का अहसास बढ़ जाता है. शेविंग विधि के सन्दर्भ में एक बहुत प्रचलित भ्रान्ति है, जिसके रहते अधिकतर महिलाएं इस विधि को अपनाने में हिचकती है. वो यह कि शेव करने से नये आने वाले बाल अपेक्षाकृत अधिक कड़े, मोटे और काले होते है. इसके साथ साथ यह भी कि इससे त्वचा अधिक कड़ी हो जाती है. इसके विपरीत तथ्य तो यह है कि बालों की मोटाई, उनका रंग तथा उनकी संरचना जिस तत्व (हेयर फौलिकल) पर निर्भर करता है वो हमारी त्वचा के नीचे बीच की परत में स्थित होता है. जोकि शेविंग करने से प्रभावित ही नहीं हो सकता. अतः शेविंग करने से बालों की संरचना में कोई अंतर नहीं आता है. बल्कि जिन महिलायों की त्वचा अधिक संवेदनशील हो उन महिलायों को तो शेविंग विधि का ही प्रयोग करना चाहिए क्यूंकि संवेदनशील त्वचा पर वैक्स का प्रयोग करने से उस पर रेशिस पड़ सकते है.


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     शेव करने से त्वचा रुखी व पपड़ीदार नहीं होती, बल्कि इससे उपरी मृत त्वचा हट जाती है और नई त्वचा झलकती है. हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि हम सही प्रकार का रेजर प्रयोग कर रहे है. सदैव महिलायों के लिए बने रेजर का प्रयोग करें क्यूंकि महिलायों के बाल पुरुषों के मुकाबलें कोमल व मुलायम होते है. महिलायों के लिए शेव करने के लिए अलग तरह के अर्थात अलग डिज़ाईन के रेजर जो विशेषकर महिलायों के उपयोग के लिए होते है, बाज़ार में उपलब्ध होते है. रेजर भी दो तरह के होते है, एक इलेक्ट्रोनीक रेजर जिनका बार बार उपयोग किया जा सकता है और एक डिस्पोजेबल रेजर होते है. यदि आप डिस्पोजेबल रेजर का प्रयोग कर रहे है तो ध्यान रहे कि उसका उपयोग आप एक या दो बार से ज्यादा न करें.

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इसके अलावा शेविंग करते समय और भी अनेक बातों को ध्यान में रखना जरूरी होता है. जैसे :-
1.. शरीर के जिस हिस्से पर शेव की है उस हिस्से को सुखाकर, उस पर तुरंत कोई मोइश्चराइजर लगायें. इसके बाद थोड़ा टेलकॉम पाउडर छिडकें.
2. सर्दियों की अपेक्षा गर्मियों के दिनों में बालों की वृद्धि अधिक तेजी से होती है, ऐसे में गर्मियों में कम दिनों के अंतराल पर अर्थात ३ या ४ दिन बाद रेजर का प्रयोग करना पड़ सकता है, ऐसे में त्वचा को आद्रता/नमी पहुंचाना न भूलें. हलके हाथों से चलायें.
3. कभी भी रुखी त्वचा पर रेजर न चलायें. रुखी त्वचा पर रेजर चलाने से एक तो आपको शेविंग करने में दिक्कत आ सकते है और दूसरा शेविंग के बाद आपकी त्वचा और रुखी लग सकती है.
4. हमेशा स्नान करने के बाद ही शेविंग करें. बालों को दो से तीन मिनट गर्म पानी में भिगोने से बाल तकरीबन 70% तक मुलायम हो जाते है. इससे उन्हें साफ़ करने में आसानी हो जाती है.
5. शेव करने वाले स्थान पर साबुन का प्रयोग न करने तो अधिक अच्छा होगा, इसके अलावा आप कोई भी शेविंग फोम्म क्रीम या किसी शैम्पू का प्रयोग कर सकती है. ऐसा करने से त्वचा पर रेजर आसानी से चलेगा और त्वच भी रुखी नहीं लगेगी.
6. शरीर के संवेदेनशील अंगो पर शेव करने के लिए शेविंग माध्यम (फोम आदि) का उपयोग करें, और यदि आवश्यकता हो तो उस स्थान पर आप शेविंग माध्यम का दुबारा इस्तेमाल कर सकती है.
7. शरीर के कुछ कठिन क्षेत्र जैसे घुटने, कोहनियाँ, एडियाँ आदि जहां पर हड्डी त्वचा के काफी नजदीक होती है और वहां कटने का डर अधिक होता है, उन हिस्से को बाद के लिए छोड़ दें. उन पर शेविंग माध्यम लगाकर अपेक्षाकृत ज्यादा देर के लिए छोड़ दें, इससे बाल हटाना आसन हो जाता है. 
8. रेजर का प्रयोग करने के बाद उसे तुरंत धो लें तथा सुखा भी दें. रेजर को हमेशा साफ़ करके ही रखना चाहिए, ताकि अगली बार उसे पुनः प्रयोग करने से आपको किसी प्रकार की एलर्जी न हो.


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9. रेजर के ब्लेड के किनारों को तौलिए या टिश्यू पेपर आदि से नहीं पौंछना चाहिए, ऐसा करने से ब्लेड के किनारे खराब हो जाते है. साथ ही ब्लेड का धार कम होने पर उसे अवश्य बदल दें.
10. इस बात का ध्यान रखे कि शेविंग करते समय रेजर को १०. एक और बात जिस पर आपको विशेष ध्यान देना चाहिए वो यह कि कभी भी किसी और द्वारा प्रयोग किये हुए रेजर का प्रयोग नहीं करना चाहिए. और ना ही अपना रेजर किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए देना चाहिए, ऐसा करना न केवल आपको बल्कि दूसरे व्यक्ति को भी नुकसान पहुंचा सकता है.
11. रेजर को चलाने की दिशा बालों के उगने की दिशा के विपरीत होनी चाहिए. अर्थात जिस हिस्से पर आप शेव करना चाह रहे है यदि उस हिस्से पर बालों की दिशा उपर से नीचे की ओर है तो वहाँ रेजर को उपर से नीचे की ओर न चलाकर बालों के विपरीत नीचे से उपर की ओर चलाये.

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इलायची के फायदे ,उपयोग // Benefits of Cardamom,

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 इलायची का आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। प्राचीन काल से ही इलाइची का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता रहा है। इलाइची के इस्तेमाल ना सिर्फ भोजन और व्यंजनों को और स्वादिष्ट बनाया जाता है बल्कि इसके इस्तेमाल से आपको कई स्वस्थ लाभ भी होते हैं।
     एक इलायची बहुत कुछ कर सकती है। जी हां दोस्तों सिर्फ 6 दिन सोते वक्त दो इलायची खाने से ऐसा चमत्कार होता है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। 
अब हम आपको इलाइची से होने वाले स्वस्थ लाभ के बारे में बताएंगे कि कैसे रात में सोने से पहले इलाइची खाना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। 
 
पेशाब का इंफेक्शन खत्म करता है
अगर आपको पेशाब एक संक्रमण है तो आपको इलायची का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। इसके निरंतर इस्तेमाल से पेशाब का इन्फेक्शन भी ठीक हो जाता है।

हाजमे को दुरुस्त रखता है
अक्सर देखा गया है कि लोगो में खान पान को लेकर चाव होने के बावजूद वे खाने से परहेज़ करते हैं। ऐसा करने कि मुख्य वजह है उनका हाजमा दुरुस्त ना होना। ऐसे में अगर व्यक्ति लगातार इलायची का प्रयोग करता है तो उसका हाजमा दुरुस्त हो जायेगा। एक शोध में ऐसा पाया गया है कि इलाइची पाचन तंत्र को सुधरने में बेहद कारगर है।


वजन बढ़ाने में मदद करता है

अगर आपका वजन नहीं बढ़ रहा है तो इलायची का प्रयोग आपके लिए नए दरवाज़े खोल सकता है। एक शोध में पाया गया कि इलायची का प्रयोग आपकी भूख को बढ़ाता है। इलाइची खाने से आपकी भूख भी बढ़ेगी और आपका पाचन तंत्र भी दुरुस्त होगा जिससे आप भोजन को बेहतर तरीके से पचा सकेंगे।

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आक ,मदार के टोटके

                                                                     
                                                 


   तंत्र शास्त्र, यह भले ही प्राचीन गुप्त विद्याओं में शुमार रहा है, लेकिन कलियुग में जब ना तो किसी के पास सात्विक क्रियाओं के परिणाम हासिल करने का धैर्य बचा है और ना ही हिम्मत। इसलिए तंत्र विद्याओं के सहारे मनुष्य जीवन की बहुत सी परेशानियों को सुलझाया जा सकता है बशर्ते उनपर विश्वास किया जाए।
तांत्रिक क्रियाओं में बहुत सी ऐसी चीजों का सहारा लिया जाता है तो सामान्य तौर पर आपको उपोअलब्ध होते हैं।

 किसी को वश में करना हो या किसी को गंभीर बीमारी से निजात दिलवानी हो, पति को किसी दूसरी स्त्री के चंगुल से छुड़ाना हो या किसी को बड़ी समस्या से छुटकारा दिलवाना हो... इन सभी कार्यों में तांत्रिक विद्याओं का सहारा लिया जाता है। नारियल से लेकर हल्दी तक... इन सभी का अलग-अलग तरीके से प्रयोग किया जाता है। लेकिन हम आपको सफेद आक के पौधे बारे में बताएंगे जिसका प्रयोग तांत्रिक क्रियाओं की काट के तौर पर किया जाता है।
सफेद आक का पौधा अन्य सामान्य आक के पौधों से अलग होता है, तांत्रिक क्रियाओं से बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जानकारों के अनुसार जिस घर में यह पौधा लगा होता है उस घर पर कोई बुरी नजर नहीं लगती और वह काली शक्तियों से भी मुक्त रहता है। उस घर में रहने वाले लोगों पर किसी जादू-टोने का असर नहीं होता।

इस पौधे से भी ज्यादा शक्तिशाली और प्राभावी होती है इससे निर्मित गणेश जी की प्रतिमा। तंत्र शास्त्र के अनुसार अगर आक के इस पौधे से गणेश जी की प्रतिमा बनवाकर, विशि-विधान से उसकी पूजा-अर्चना की जाए तो ये सभी कष्ट कर लेते है। लेकिन इस पूजा के नियम होते हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है, इनके बिना अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हो पाता।
* मदार की जड़:- रविपुष्प नक्षत्र में लाई गई मदार की जड़ को दाहिने हाथ में धारण करने से आर्थिक समृधि में वृद्धि होती हैं।

* मदार की जड़:- 

रविपुष्प में उसकी मदार की जड़ को बंध्या स्त्री भी कमर में बंधे तो संतान होगी।
 मदार की जड़ कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय हेतु आर्द्रा नक्षत्र में आक की जड़ लाकर तावीज की तरह गले में बांधें।



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