शारीरिक ताकत बढ़ाने का अनमोल नुस्खा //recipe for increasing physical strength



    अक्सर लोग अपनी हस्त मेथुन  और व्यभिचारी आदतों   जैसी नादानियों के चलते शारीरिक शक्ति खो देते हैं, यहां तक उनका अपने शरीर, मन और मस्तिष्क पर कंट्रोल नहीं रहता। ऐसे समय में आर्युवेद की कुछ चीजें आपके लिए बेहद काम आती है। आज हम आपको एक ऐसी ही ताकतवर खुराक की रेसिपी बता रहे हैं जिसे पुराने जमाने में राजा, महाराजा ताकत पाने के लिए खाया करते थे।
आवश्यक सामग्री
उरद दाल - 400 ग्राम
घी - 400 ग्राम
बूरा या
पिसी मिश्री - 300 - 400 ग्राम
काजू, किशमिश, बादाम - 100 ग्राम (सभी मिला कर वजन)
पिस्ते - एक टेबल स्पून (लगभग दस ग्राम )
छोटी इलाइची - 10 नग


लड्डू ऐसे बनाएं-


सबसे पहले उडद की दाल साफ कर 3 से 4 घंटे के लिए पीने के पानी में भिगो दीजिए। भिगने के बाद दाल को हल्का मोटा पीस लीजिए और कढ़ाई में देसी घी में लगातार चमचे से चलाते हुए भूनें। दाल को ब्राउन होने तक भूनना हैं। अब दाल में बूरा मिला लें। इसके बाद काजू, बादाम, पिस्ता को बारीक काट लें, इलायची को छील कर उसका पाउडर बना लें। अब इन सभी चीजों को भुनी हुई दाल में डाल दें। अब लड्डू बनने के लिए मिश्रण तैयार हो गया है। मिश्रण को हाथ में लेकर छोटे-छोटे लड्डू बना लीजिए। जब ये लड्डू सूख जाएं तो इन सभी लड्डुओं को एयरटाइट कंटेनर में भर कर रख लें।

ऐसे करें सेवन-

रोज सुबह भूखे पेट एक लड्डू पी कर दूध पीने से शरीर की हर तरह की कमजोरी दूर हो जाती है। साथ ही शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी ठंडक मिलती है जिससे दिमाग तेज होता है। 

स्पाइजेलिया का होम्योपैथिक उपयोग



स्नायु-शूल (दर्द) की दवा – 
इस औषधि का क्षेत्र स्नायु के शूल, अर्थात् दर्द के ऊपर विशेष रूप से है। हृदय, सिर, चेहरे, आंख के दर्द के ऊपर इसका मुख्य-प्रभाव है। हृदय-शूल तथा शिर शूल जो दायीं आंख के ऊपर आकर जम जाय – इन दोनों में इसका विशेष प्रयोग होता है। इन्हीं की यहां चर्चा की जायेगी।
हृदय-शूल (Pain in the heart) – 
हृदय शूल के लिये यह अमूल्य-औषधि है। इस औषधि का हृदय का दर्द इतना ‘तेज’ होता है जितना कैक्टस में और इतना ‘उग्र’ होता है जितना कैक्टस और डिजिटेलिस दोनों में नहीं होता। स्पाइजेलिया का हृदय शूल इतना उग्र होता है कि कपड़ों के भीतर से हृदय धड़कता दीखता है, सारी छाती हिलती दीखती है, और कुछ दूरी से हृदय धड़कता सुनाई भी पड़ता है। हृदय के हाल ही के दौर पर ही इसका प्रभाव नहीं होता, परन्तु हृदय के पुराने वैल्व्यूलर-रोग में भी जिसमें तेज आवाज और उग्र धड़कन होती है इससे लाभ होता है। 
डॉ० नैश लिखते हैं कि हृदय की धड़कन के उग्र दौरों को उन्होंने इससे शीघ्र शांत होते देखा है। इस प्रकार के हृदय के शूल में रोगी केवल दाईं तरफ और सिर ऊंचा करके ही लेट सकता है। ऐन्जाइना पैक्टोरिस जो हृदय का रोग है, और जिसमें हृदय का दर्द सीने से प्रारम्भ होकर बायें कन्धे और बायीं बांह तक फैल जाता है, उसमें भी यह विशेष लाभदायक है।
शिर:शूल (Neuralgic headache) – 
सिर-दर्द, चेहरे का दर्द तथा आंखों के दर्द में इस औषधि का प्रमुख स्थान है। सिर-दर्द प्राय: एक तरफ होता है। प्रात: काल सूर्य के उदय के साथ यह शुरू होता है, ज्यों-ज्यों सूर्य चढ़ता जाता है त्यों-त्यों यह बढ़ता जाता है, और सूर्य के अस्त होने के साथ यह समाप्त हो जाता है। यह दर्द सिर की गुद्दी से उठता है, सिर पर चढ़कर बायीं आंख के ऊपर जाकर ठहर जाता है। नैट्रम म्यूर और टैबेकम में भी सिर-दर्द सूर्य के उदय तथा अस्त के साथ बढ़ता और घटता है। स्पाइजेलिया में जिस आंख के ऊपर दर्द जमता है उसमें से पानी निकलने लगता है। चैलीडोनियम में दर्द बायीं आंख पर जमता है, और उसमें से पानी की धार बहा करती है। स्पाइजेलिया में रोगी को किसी तरफ भी देखने के लिए सारा सिर फिराना पड़ता है।
शक्ति तथा प्रकृति –
 स्पाइजेलिया 6 , स्पाइजेलिया 30 (हरकत, शोर-गुल, आंख हिलाने से रोग बढ़ता है; ठंड, नमी तथा बरसात से रोग बढ़ता है; औषधि ‘सर्द’-प्रकृति के लिए है। 

सर्दियों के मौसम मे हितकारी आहार



    ठंड के मौसम में सर्दी के असर से बचने के लिए लोग गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन शरीर को चाहे कितने ही गर्म कपड़ों से ढक लिया जाए ठंड से लड़ने के लिए बॉडी में अंदरूनी गर्मी होनी चाहिए। शरीर में यदि अंदर से खुद को मौसम के हिसाब से ढालने की क्षमता हो तो ठंड कम लगेगी और कई बीमारियां भी नहीं होंगी। यही कारण है कि ठंड में खानपान पर विशेष रूप से ध्यान देने को आयुर्वेद में बहुत महत्व दिया गया है। सर्दियों में यदि खानपान पर विशेष ध्यान दिया जाए तो शरीर संतुलित रहता है और सर्दी कम लगती है।
आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में जानिए कुछ ऐसे ही खाने की चीजों के बारे में

बाजरा-
कुछ अनाज शरीर को सबसे ज्यादा गर्मी देते है। बाजरा एक ऐसा ही अनाज है। सर्दी के दिनों में बाजरे की रोटी बनाकर खाएं। छोटे बच्चों को बाजरा की रोटी जरूर खाना चाहिए। इसमें कई स्वास्थ्यवर्धक गुण भी होते है। दूसरे अनाजों की अपेक्षा बाजरा में सबसे ज्यादा प्रोटीन की मात्रा होती है। इसमें वह सभी गुण होते हैं, जिससे स्वास्थ्य ठीक रहता है। ग्रामीण इलाकों में बाजरा से बनी रोटी व टिक्की को सबसे ज्यादा जाड़ो में पसंद किया जाता है। बाजरा में शरीर के लिए आवश्यक तत्व जैसे मैग्नीशियम,कैल्शियम,मैग्नीज, ट्रिप्टोफेन, फाइबर, विटामिन- बी, एंटीऑक्सीडेंट आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

बादाम-

बादाम कई गुणों से भरपूर होते हैं। इसका नियमित सेवन अनेक बीमारियों से बचाव में मददगार है।अक्सर माना जाता है कि बादाम खाने से याददाश्त बढ़ती है, लेकिन यह ड्राय फ्रूट अन्य कई रोगों से हमारी रक्षा भी करता है। इसके सेवन से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है, जो सर्दियों में सबसे बड़ी दिक्कत होती है। बादाम में डायबिटीज को निंयत्रित करने का गुण होता है। इसमें विटामिन – ई भरपूर मात्रा में होता है।

अदरक-

क्या आप जानते हैं कि रोजाना के खाने में अदरक शामिल कर बहुत सी छोटी-बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है। सर्दियों में इसका किसी भी तरह से सेवन करने पर बहुत लाभ मिलता हैै। इससे शरीर को गर्मी मिलती है और डाइजेशन भी सही रहता है|

सब्जियां-

अपनी खुराक में हरी सब्जियों का सेवन करें। सब्जियां, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और गर्मी प्रदान करती है। सर्दियों के दिनों में मेथी, गाजर, चुकंदर, पालक, लहसुन बथुआ आदि का सेवन करें। इनसे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

तिल-

सर्दियों के मौसम में तिल खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। तिल के तेल की मालिश करने से ठंड से बचाव होता है। तिल और मिश्री का काढ़ा बनाकर खांसी में पीने से जमा हुआ कफ निकल जाता है। तिल में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे, प्रोटीन, कैल्शियम, बी कॉम्प्लेक्स और कार्बोहाइट्रेड आदि। प्राचीन समय से खूबसूरती बनाए रखने के लिए तिल का उपयोग किया जाता रहा है।

मूंगफली-

100 ग्राम मूंगफली के भीतर ये तत्व मौजूद होते हैं: प्रोटीन- 25.3 ग्राम, नमी- 3 ग्राम, फैट्स- 40.1 ग्राम, मिनरल्स- 2.4 ग्राम, फाइबर- 3.1 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट- 26.1 ग्राम, ऊर्जा- 567 कैलोरी, कैल्शियम – 90 मिलीग्राम, फॉस्फोरस 350 मिलीग्राम, आयरन-2.5 मिलीग्राम, कैरोटीन- 37 मिलीग्राम, थाइमिन- 0.90 मिलीग्राम, फोलिक एसिड- 20मिलीग्राम। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनिरल्स आदि तत्व इसे बेहद फायदेमंद बनाते हैं। यकीनन इसके गुणों को जानने के बाद आप कम से कम इस सर्दियों में मूंगफली से टाइमपास करने का टाइम तो निकाल ही लेंगे।



ओमेगा 3 फैटी एसिड-

सर्दियों में ओमेगा – 3 फैटी एसिड सबसे अच्छा फूड होता है। यह मुख्य रूप से मछलियों में पाया जाता है। सर्दियों में दिनों में मछली का सेवन करें, इससे शरीर को गर्मी मिलती है। इसमें जिंक भरपूर मात्रा में होता है है। इसलिए यह शरीर का इम्युनिटी पॉवर बढ़ाता है व बीमारियों को दूर रखता है।

रसीले फल न खाएं-

सर्दियों के दिनों में रसीले फलों का सेवन न करें। संतरा, रसभरी या मौसमी आपके शरीर को ठंडक देते है। जिससे आपको सर्दी या जुकाम जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

शहद-

शरीर को स्वस्थ, निरोग और उर्जावान बनाए रखने के लिए शहद को आयुर्वेद में अमृत भी कहा गया है। यूं तो सभी मौसमों में शहद का सेवन लाभकारी है, लेकिन सर्दियों में तो शहद का उपयोग विशेष लाभकारी होता है। इन दिनों में अपने भोजन में शहद को जरूर शामिल करें। इससे पाचन क्रिया में सुधार होगा और इम्यून सिस्टम पर भी असर पड़ेगा।

बादाम-
बादाम कई गुणों से भरपूर होते हैं। इसका नियमित सेवन अनेक बीमारियों से बचाव में मददगार है।अक्सर माना जाता है कि बादाम खाने से याददाश्त बढ़ती है, लेकिन यह ड्राय फ्रूट अन्य कई रोगों से हमारी रक्षा भी करता है। इसके सेवन से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है, जो सर्दियों में सबसे बड़ी दिक्कत होती है। बादाम में डायबिटीज को निंयत्रित करने का गुण होता है। इसमें विटामिन – ई भरपूर मात्रा में होता है।