13.9.17

मधुमेह (डायबीटीज़) की खोजपूर्ण जानकारी,कारण और घरेलू उपचार // Information on diabetes, causes and home remedies



क्या है मधुमेह-
जब रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो उसे मधुमेह रोग कहते हैं। खाली पेट होने पर रक्त में सामान्य तौर पर शर्करा का स्तर 110 मिग्रा से कम और 75 ग्राम ग्लूकोज पीने के दो घंटे बाद 140 मिग्रा से कम हो तो यह सामान्य होता है। लेकिन मधुमेह की स्थिति में खाली पेट रक्त शर्करा का स्तर 126 और 75 ग्राम ग्लूकोज पीने के 2 घंटे बाद 200 मिग्रा से अधिक होता है।मधुमेह के मुख्य लक्षण
थकान, कमजोरी, पैरों में दर्द, क्योंकि ग्लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता।
पैर का घाव ठीक न होना और गैंग्रीन का रूप ले लेना।
अधिक पेशाब और भूख लगना।
तेजी से वजन गिरना।
बार-बार चश्मे का नंबर बदलना।
जननांगों में खुजली और संक्रमण होना।
हृदय आघात, मस्तिष्क आघात का होना।
डायबिटीज के मरीजों को अब अपनी शुगर (रक्त शर्करा) को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का इंजेक्शन बार-बार नहीं लगाना पड़ेगा। इंसुलिन पंप से उनकी यह समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। डायबिटोलोजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा ने बताया कि कई बच्चों को डायबिटीज की बीमारी जन्म से ही सौगात में मिलती है। इन बच्चों को रोज-रोज इंसुलिन के इंजेक्शन लगवाना काफी कष्टप्रद होता है। इन बच्चों को इंजेक्शन से निजात दिलाने के लिए इंसुलिन पंप एक कारगर उपाय है। इंसुलिन पंप बच्चों के साथ हर उम्र के लोग लगवा सकते हैं।
क्या है इंसुलिन पंप
डॉ. शर्मा के अनुसार इंसुलिन पंप एक पेजर के आकार का उपकरण है। इसमें एक इंसुलिन वायल फिट हो जाता है। यह उपकरण एक पतली नीडिल और इंफ्यूजन सेट के माध्यम से शरीर से जुड़ा रहता है। यह पंप शरीर के लिए आवश्यक इंसुलिन रक्त में मिलाता रहता है। इसके लिए अलग से इंसुलिन के इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं होती। इसकी खास बात यह है कि यह शरीर में बनने वाले इंसुलिन की तरह ही प्राकृतिक इंसुलिन की सप्लाई करता
क्या हैं मधुमेह के शुरुआती लक्षण
मधुमेह के शुरूआती लक्षणों की पहचान अगर हो जाए तो इसका इलाज बहुत ही जल्दी और आसानी से हो सकता है। आजकल मधुमेह एक आम समस्या बन गई है। कई लोगों में यह बीमारी शुरू में हो जाती है लेकिन, उनको इस बात का पता नहीं चल पाता है जिसके कारण यह बीमारी बहुत ही खतरनाक हो जाती है। दरअसल डायबिटीज लाइफस्टाइल संबंधी या वंशानुगत बीमारी है। जब शरीर में पैंक्रियाज नामक ग्रंथि इंसुलिन बनाना बंद कर देती है तब मधुमेह की समस्या होती है। इंसुलिन ब्लड में ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मदद करता है। आइए हम आपको बताते हैं कि मधुमेह के शुरूआती लक्षण क्या हैं।
मधुमेह के शुरूआती लक्षण –
थकान महसूस होना -
डायबिटीज होने पर इसके शुरुआती दिनों में आपको सारा दिन थकान महसूस होगी। हर रोज भरपूर नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही आपको ऐसा लगेगा कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है और शरीर में थकान सी महसूस होगी। इससे यह पता चलता है की खून में शुगर का लेवल लगातार बढ़ रहा है।
लगातार पेशाब लगना –
मधुमेह होने पर बार-बार पेशाब आने लगता है। जब शरीर में ज्यादा मात्रा में शुगर इकट्ठा हो जाता है तो यह पेशाब के रास्ते से बाहर निकलता है, जिसके कारण मधुमेह रोगी को बार-बार पेशाब लगने की शिकायत शुरू हो जाती है।
अत्यधिक प्यास लगना –
मधुमेह रोगी को बार-बार प्या स लगती है। चूंकि पेशाब के रास्ते से शरीर का पानी और शुगर बाहर निकल जाता है जिसके कारण हमेशा प्यास लगने जैसी स्थिति बनी रहती है। लोग अक्सर इस बात को हल्के में ले लेते हैं और समझ ही नहीं पाते कि उनकी बीमारी की शुरुआत अब हो चुकी है।
आंखें कमज़ोर होना-
मधुमेह रोग की शुरूआत में आंखों पर काफी प्रभाव पडता है। डायबिटीज के मरीज में रोग की शुरूआत में ही आंखों की रोशनी कम होने लगती है और धुंधला दिखाई पडने लगता है। किसी भी वस्तु को देखने के लिए उसे आंखों पर ज़ोर डालना पडता है।
अचानक वज़न कम होना –
मधुमेह रोग की शुरूआत में ही अचानक वज़न तेजी से कम होने लगता है। सामान्य दिनों की अपेक्षा आदमी का वजन एकाएक कम होने लगता है।
जोर से भूख लगना -
डायबिटीज के मरीज का वजन तो कम होता है लेकिन भूख में बढोतरी भी होती है। अन्य दिनों की अपेक्षा आदमी की भूख कई गुना बढ जाती है। बार-बार खाना खाने की इच्छा होती है।
घाव का जल्दी न भरना –
अगर आपके शरीर में चोट या कहीं घाव लग जाए और यह जल्दी ना भरे, चाहे कोई छोटी सी खरोंच क्यों ना हो, वह धीरे-धीरे बडे़ घाव में बदल जाएगी और उसमें संक्रमण के लक्षण साफ-साफ दिखाई देने लगेंगे।
तबियत खराब रहना -
डायबिटीज मरीज के शरीर में किसी भी तरह का संक्रमण जल्दी से ठीक नही होता है। अगर आपको वायरल, खॉसी-जुकाम या कोई भी बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाए तो आपको राहत नहीं मिलेगी। छोटे-छोटे संक्रमण जो आसानी से खुद ठीक हो जाते हैं बढे घाव बन जाते हैं।
त्वचा के रोग होना –
मधुमेह की शुरूआत में त्वचा संबंधी कई रोग होने शुरू हो जाते हैं। त्वचा के सामान्य संक्रमण बडे घाव बन जाते हैं।
आनुवंशिक कारण –
आपके परिवार में किसी अन्य सदस्य को भी मधुमेह की समस्या रही हो तब भी आपको सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि यह एक आनुवांशिक बीमारी है।
हालांकि डायबिटीज को पूरी तरह से खत्म तो नहीं किया जा सकता लेकिन इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि अपने डॉक्टर से सलाह लें और समय-समय पर शुगर लेवल का चेकअप करवाते रहें।

जिम जाने से पुरूषों में मधुमेह का खतरा कम
लंदन: नियमित रूप से जिम जाने से पुरूषों में मधुमेह का खतरा कम हो सकता है एक नये अध्ययन में यह बात कही गयी है।
हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार शरीर को दुरूस्त कर पुरूष टाइप 2 मधुमेह का खतरा कम कर सकते हैं।
इस शोध में पाया गया कि नियमित रूप से वजन कम करने की कसरत करने से टाइप 2 मधुमेह का खतरा 34 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
डेली मेल की खबर के अनपुसार एरोबिक कसरतों से, जैसे तेज चलने या दौड़ने से, और भी ज्यादा फायदा हो सकता है।
हॉवर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के पोषण विशेषज्ञ प्रोफेसर फ्रैंक हू ने कहा, ‘इस अध्ययन से पता चलता है कि वजन कम करने से मधमुह का खतरा कम हो सकता है।’ इस शोध के लिए 32,000 अमेरिकियों का स्वास्थ्य संबंधी अध्ययन किया गया जिसमें उनके सवास्थ्य पर जीवनशैली के प्रभावों की जांच की गयी। (
टीवी देखने वाले उम्रदराज लोगों मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है|
मेलबहै|है|र्न: वैज्ञानिकों ने आस्ट्रेलिया में अधिक टीवी देखने वाले उम्रदराज लोगों को चेतावनी दी है कि इससे उनमें टाइप-2 मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के अध्ययन में पाया गया कि 60 साल से अधिक उम्र के आस्ट्रेलियाई प्रतिदिन औसतन चार घंटे टीवी देखते हैं जबकि उनसे कम उम्र के लोग करीब तीन घंटे ही रोजाना टीवी देखते हैं।
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि अधिक टीवी देखने वाले लोगों में उपापचयी लक्षण विकसित होने के खतरे बढ़ जाते हैं।
यूक्यू स्कूल ऑफ पोपुलेशन हेल्थ के डॉ. पॉल गार्डिनर के नेतृत्व में किया गया अध्ययन अपनी तरह का पहला अध्ययन है जिसके तहत सुस्त व्यवहार और बुजुर्गों पर टीवी देखने के असर की जांच की गई। गार्डिनर ने बताया कि अभी तक अधिकांश अध्ययन बच्चों के बैठने और टीवी देखने के बारे में ही किए गए थे। (एजेंसी)
मधुमेह से बचने के लिए लोगों को रोजाना कम से कम चार कप चाय पीनी चाहिए ।
लंदनः बिट्रेन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मधुमेह से बचने के लिए लोगों को रोजाना कम से कम चार कप चाय पीनी चाहिए ।
अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने यूरोप में टाइप-2 से पीड़ित 12000 से अधिक चाय की आदत वाले लोगों के बारे में जानकारी इकट्ठी की। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया कि रोजाना चार कप चाय पीने वालों में मधुमेह का जोखिम 20 प्रतिशत कम था।
अध्ययन में पाया गया कि अधिक चाय पीने वालों में जोखिम काफी कम था जबकि एक से तीन कप चाय पीने वालों में यह जोखिम अधिक था । शोधकर्ताओं ने हालांकि, आगाह किया कि दूध और चीनी मिली चाय का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए खराब है ।
अध्ययन करने वाले जर्मनी के हेनरिख विश्वविद्यालय के क्रिश्चियन हर्डर ने बताया, मोटापा टाइप-2 मधुमेह का एक बड़ा कारण है लेकिन खानपान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसमें चाय भी शामिल है । (एजेंसी)
मधुमेह की बीमारी से बचना सादा पानी पीना शुरू कर दें।
लंदन : मधुमेह के रोगियों के लिए एक अच्छी खबर है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अगर आप मधुमेह की बमारी से बचना चाह रहे हैं तो उर्जावर्धक पेयों और जूस से दूर रहें एवं सादा पानी पीना शुरू कर दें।
हार्वड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने कहा कि चीनी मिश्रित पानी से सादा पानी कहीं अधिक गुणकारी है और मधुमेह में लाभदायक है। करीब एक दशक से 83 हजार महिलाओं के पीने के आदतों पर नजर रखने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि मीठा पेय पदार्थ पीने वाले लोगों की अपेक्षा जो सादा पानी पीते हैं उनमें मधुमेह होने का खतरा आठ प्रतिशत कम होता है।
मुख्य शोधकर्ता डाक्टर फ्रैंक हू ने कहा कि इससे पता चलता है कि चीनी मिश्रित पेय पदार्थ मधुमेह के खतरे को बढ़ाता है।
मधुमेह से बचना चाहते हैं तो धीमे खाएं।
लंदन: अगर आप मधुमेह से बचना चाहते हैं तो धीमे खाएं। इस बात का खुलासा एक नए अध्ययन में किया गया है। लिथुवानियन यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो लोग तेजी से खाना खाते हैं उनमें टाइप-2 मधुमेह विकसित होने का खतरा वैसे लोगों की तुलना में ढाई गुना अधिक होता है जो भोजन का स्वाद ले-लेकर खाते हैं।
यह पूर्व में किए गए शोध की तर्ज पर है जिसमें तेजी से खाना खाने और मोटापा के बीच संबंध पाया गया था। लेकिन पहली बार लोगों के खाने की गति की पहचान टाइप टू मधुमेह होने के लिए स्वतंत्र खतरे के कारक के तौर पर की गई है। (एजेंसी)
लंदन: जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम रहता है, उन्हें मधुमेह होने का खतरा अधिक है। यह बात एक नए अध्ययन में कही गई। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के इस परिणाम से यह भी समझने में मदद मिलती है कि आखिर क्यों उम्र बढ़ने के साथ मधुमेह का जोखिम बढ़ जाता है। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ-साथ पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर घटता जाता है।
विश्वविद्यालय के बयान के मुताबिक एडिनबर्ग के अंत:स्राविका इकाई के केरी मैकइंस ने कहा कि इस अध्ययन से पता चलता है कि टेस्टोस्टेरॉन के कम स्तर से मधुमेह का जोखिम रहता है, चाहे पुरुष का वजन कुछ भी क्यों न हो।(एजेंसी)
सिडनी : मोटे और 'टाइप-2' प्रकार के मधुमेह से पीड़ित लोग अब बड़ी आसानी से दिल के दौरे के खतरे को कम कर सकते हैं। एक नए के अनुसार अगर ऐसे लोग अपना वजन छह किलोग्राम तक भी घटाते हैं, तो उनकी धमनियों की कठोरता 20 प्रतिशत तक कम हो जाती है। मधुमेह से पीड़ित लोगों को दिल का दौरा पड़ने का खतरा छह गुना ज्यादा होता है। मधुमेह से हुई कुल मौतों में से 68 प्रतिशत मौतों का कारण धमनियों की कठोरता पाया गया है।
विज्ञान पत्रिका 'डायबीटिज एंड वैस्कुलर डिजीज रिसर्च' की रिपोर्ट के अनुसार ग्रारवेन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च के सहायक प्रोफेसर कैथरीन सामारास और सैंट विन्सेंट्स अस्पताल के क्रिस्टोफर हेवर्ड ने अध्ययन में बताया कि धमनी कठोरता का सीधा संबंध सूजन और संक्रमण या बीमारी के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के साथ है। ग्रारवेन इंस्टीट्यूट और सैंट विन्सेंट्स अस्पताल के बयान के मुताबिक यह अध्ययन 'टाइप-2' प्रकार के मधुमेह से पीड़ित मोटे लोगों के एक समूह पर आधारित है। सभी प्रतिभागियों को 24 हफ्तों तक कैलोरी रहित आहार दिया गया।
समारास ने बताया कि अध्ययन से पता चला, ‘मोटापा, टाइप-2 प्रकार का मधुमेह और धमनियों की कठोरता सभी प्रतिरक्षी कोशिकाओं के संचलन और वसा ऊतकों के सक्रियण जैसी उत्तेजक स्थिति से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह पहला ऐसा अध्ययन है, जिसमें वजन घटाने से धमनी कठोरता में कमी आने के संबंध का पता चला है।
नींद मधुमेह
वाशिंगटन: यदि रात में नींद के लिए आपको काफी मशक्कत करनी पड़ती है तो आपको ध्यान देने की जरुरत है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ऐसा है तो आपको मधुमेह, मोटापा के खतरे का सामना करना पड़ सकता है।
बोस्टन में ब्रिघम एंड वीमेंस अस्पताल के अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जो लोग प्रति दिन पांच घंटे से कम नींद लेते हैं उनके मेटाबोलिक रेट में बड़ा बदलाव आता है। यहां तक कि एक साल में 4.5 से 5.5 किलो वजन का इजाफा हो जाता है। जब यह लंबे समय तक यह जारी रहता है तो मोटापा, मधुमेह का खतरा मंडराने लगता है।
अध्ययन को अंजाम देने वाले न्यूरोलॉजिस्ट और नींद विशेषज्ञ ओरफेयू बक्सटन कहते हैं, ‘तीन या चार वर्ष के भीतर ही आप मोटे हो जाते हैं।’ करीब छह सप्ताह तक बक्सटन और उनके सहयोगियों ने इसका अध्ययन किया। शोध से तीन सप्ताह पहले लोगों को 10 घंटे सोने को कहा गया। इसके बाद फिर 28 घंटे के अंदर करीब पांच घंटे तक नींद लेने को कहा गया। इस दौरान इंसुलीन और ग्लूकोज स्तर का पता लगाया गया।
लंदन : डायटिंग के दौरान गर्भधारण करने वाली महिलाओं के बच्चों में मोटापा और टाइप-2 मधुमेह होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं।
ब्रिटेन में मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि हालांकि उन्होंने यह शोध भेड़ों पर किया है लेकिन यह मनुष्यों के लिए भी सही हो सकता है। शोधकर्ता डॉक्टर एनी व्हाइट का कहना है कि शोध से यह बात सामने आयी है कि कैसे हमारा व्यवहार आने वाली पीढ़ी में मोटापे और मधुमेह पर असर डाल सकता है।
डॉक्टरों ने बताया, ‘इस शोध से जुड़वा बच्चों में होने वाली मधुमेह की समस्या के लिए नयी समझ विकसित हो सकती है । इसके परिणाम यह भी बताते हैं कि डायटिंग की अवस्था में गर्भधारण करने पर उससे पैदा होने वाला बच्चा बाद में मोटापे का शिकार हो सकता है।’ टीम ने इसके लिए भेड़ को गर्भधारण के वक्त कम भोजन दिया था। (एजेंसी)
सफेद चावल खाने से मधुमेह
लंदन : हार्वर्ड के एक नए अनुसंधान में कहा गया है कि अगर आप रोज एक बड़ा बाउल सफेद चावल खाते हैं तो आपको टाइप-2 मधुमेह होने का खतरा सामान्य से 11 प्रतिशत ज्यादा होता है। लेकिन आहार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी जल्दी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए।
इस अनुसंधान का परिणाम ‘ब्रिटिश मेडिकल जर्नल’ में प्रकाशित हुआ है। इसके लिए अनुसंधानकर्ताओं ने 22 वर्ष की अवधि में 3,50,000 लोगों का अध्ययन किया। शोध आरंभ होने के वक्त किसी को भी मधुमेह की शिकायत नहीं थी।
‘हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ और ‘हार्वर्ड मेडिकल स्कूल’ की टीम ने इसके लिए एशिया के दो देशों चीन और जापान तथा पश्चिम के दो देशों अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लोगों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि रोज एक बड़ा बाउल सफेद चावल खाने से टाइप-2 मधुमेह का खतरा 11 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
डेली टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, आहार विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिकों को इस निष्कर्ष पर पहुंचने में जल्दीबाजी नहीं करनी चाहिए। अभी तक इस अनुसंधान में सभी बातों की पुष्टि नहीं हुई है। (एजेंसी)
धूम्रपान मधुमेह
टोक्यो : यदि धूम्रपान करते हैं तो हो जाइए सावधान। नेशनल कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं के एक दल ने अपने शोध में पाया है कि धूम्रपान छोड़ने के पांच साल बाद तक भी सिगरेट पीने वालों के मुधमेह की चपेट में आने का खतरा बना रहता है।
40 से 69 आयु वर्ग के 59 हजार लोगों पर 1990 से 2003 के बीच किए गए शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि धूम्रपान करने वालों के मधुमेह की चपेट में आने की आशंका अधिक रहती है।
धूम्रपान छोड़ने के पांच साल बाद भी सिगरेट पीने वाले महिलाओं और पुरूषों में इस बीमारी के उभरने की संभावना 2. 84 फीसदी होती है। लेकिन पांच साल के बाद सिगरेट छोड़ने वालों को धूम्रपान का खतरा धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों के समान ही होता है।
मधुमेह रोज चार कप कॉफी पीना मधुमेह के खतरे का कम
लंदन : क्या आप मधुमेह के खतरे को कम करना चाहते हैं तो दिन में चार कप कॉफी पिएं। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि रोज चार कप कॉफी पीना मधुमेह के खतरे का कम कर सकता है।
पहले के अध्ययनों से पता चला था कि कॉफी पीने से मुधमेह का खतरा कम होता है लेकिन इसके परिणामों को लेकर विरोधभास था कि क्या यह कैंसर जैसी दीर्घकालीक बीमारियों को बढ़ावा देता है।
अब यूरोप की एक टीम ने दावा किया है कि हर दिन सामान्य मात्रा में काफी पीने वाले लोगों में मधमेह (टाइप टू) का खतरा उन लोगों की तुलना में काफी कम हो सकता है जो कभी-कभी इसे पीते हैं या कभी नहीं पीते।
तीन कप चाय हमें दिल के दौरे और टाइप-2 मधुमेह जैसी बीमारियों से सुरक्षित रख सकती है।
लंदन: अक्सर हम में बहुत से लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि एक दिन में कितने कप चाय का सेवन किया जाए। हालही में शोधकर्ताओं ने नए अध्ययन में दावा किया है कि रोजाना तीन कप चाय हमें दिल के दौरे और टाइप-2 मधुमेह जैसी बीमारियों से सुरक्षित रख सकती है।
समाचार पत्र 'डेली मेल' के अनुसार एक अध्ययन से पता चला है कि नियमित रूप से चाय पीना रक्त शर्करा और खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर दिल की बीमारियों के जोखिम को घटाता है। यह बात दूध वाली और दूध रहित चाय दोनों पर लागू होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार चाय के इतने बड़े पैमाने पर लाभ उसके फ्लेवोनोइड तत्च (हृदय रोगों से बचाने वाला एंटीऑक्सीडेंट तत्व) की वजह से है।
चाय का एक प्याला आपको 150 से 200 एमजी फ्लेवोनोइड तत्च प्रदान करता है और यह हमारे आहार में एंटीऑक्सीडेंट्स का सर्वश्रेष्ठ स्त्रोत है।
विज्ञान पत्रिका 'न्यूट्रीशन बुलेटिन' के अनुसार एक दिन में दूध रहित चाय के तीन या उससे अधिक कप आपको दिल की बीमारियों से बचाते हैं, जबकि दो या उससे अधिक कप टाइप-2 मधुमेह से बचाते हैं।
अध्ययन के सह लेखक और 'टी एडवाइजरी पैनल' (टीएपी) के सदस्य पोषण विशेषज्ञ कैरी रूक्सटोन ने कहा, इस लोकप्रिय पेय के जितने लाभ हमें मालूम हैं, वास्तव में चाय के उससे कहीं ज्यादा फायदे हैं। बारह सप्ताहों तक चले इस अध्ययन में 87 प्रतिभागियों को शामिल किया गया।
इसके साथ ही शोध से पता चला कि रोजना तीन कप चाय पीने से प्रतिभागियों में हृदय सम्बंधी बीमारियों के जोखिम में सुधार आया।
चाय मे पाया जाने वाला फ्लेवोनोइड तत्च सूजन को नियंत्रित करने और रक्त के अधिक थक्के जमने के जोखिम को कम करने जैसी बहुत सी चीजों में सहायक है।
मधुमेह की शुरूआत संभवत: आंत से होती है ।
वाशिंगटन : वैज्ञानिकों ने ऐसे सबूत मिलने का दावा किया है कि मधुमेह संभवत: आंतों से जन्म लेता है । इस खोज से इस बीमारी के इलाज में आगे जाकर काफी मदद मिलने की उम्मीद जगी है । वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल आफ मेडिसिन के एक दल का कहना है कि रक्त शर्करा को नियंत्रित करने संबंधी समस्या संभवत: आंत से शुरू होती है । अपने शोध में वैज्ञानिकों ने चूहों का अध्ययन किया जो आंत में फैटी एसिड सिंथेस बनाने में सक्षम नहीं होते हैं ।
एफएएस एक एंजाइम होता है जो लिपिड्स के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है । एफएएस को इंसुलिन द्वारा नियंत्रित किया जाता है और जो लोग मधुमेह की बीमारी से पीड़ित होते हैं उनका एफएएस विकृत होता है । चूहों की आंतों में इस एंजाइम के बिना भयंकर जलन शुरू हो गयी जो मधुमेह का शक्तिशाली संकेत है ।
chitrप्रमुख शोधकर्ता क्ले सीमनकोविच ने कहा कि मधुमेह की शुरूआत संभवत: आंत से होती है । जब लोगों में इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो जाती है तो एफएएस उचित ढंग से काम नहीं कर पाता और इससे जलन होती है और उसके बदले में मधुमेह उत्पन्न हो जाता है । इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता वजन बढ़ने पर होती है । ’
विटामिन डी के कम स्तर वाले मोटे बच्चों मेंमधुमेह
लंदन : नए अध्ययन में दावा किया गया है कि विटामिन डी के कम स्तर वाले मोटे बच्चों में टाइप-2 मधुमेह विकसित होने का खतरा अधिक होता है।
डलास स्थित यूनीवर्सिटी आफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि निम्न विटामिन डी स्तर मोटे बच्चों में इंसूलिन प्रतिरोधक अधिक होता है जिसका मतलब है कि वे खाद्य पदार्थों से शंकर को उर्जा में तब्दील करने के लिए इंसूलिन का ठीक तरीके से प्रयोग नहीं कर सकते।
टाइप 2 मधुमेह उस समय होता है जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसूलिन नहीं बनता या जब कोशिकाओं में इंसूलिन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है।
लंदन : हृदयरोग और मधुमेह जैसे रोगों से बचने के लिए सादा और स्वास्थ्यवर्धक आहार की काफी बड़ी भूमिका है। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि अगर आप एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर केला, सेब, आदि सादा और स्वास्थ्यवर्धक आहार लेते रहते हैं तो आप इन रोगों का खतरा टाल सकते हैं।
अध्यनकर्ताओं ने पाया है कि एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर आहार लेने वाले लोगों में हृदयरोग का खतरा तो कम होता ही है कोलस्ट्रोल और ब्लड शुगर का स्तर भी नियंत्रण में रहता है।
‘डेली एक्सप्रेस’ की खबरों के मुताबिक एंटीऑक्सिडेंट शरीर में नुकसानदेह मॉलीक्युल से लड़ने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक साल तक के अध्ययन के बाद यह आकलन सामने आया है। (एजेंसी)
लंदन : मधुमेह पीड़ित लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि जल्द ही वे इसका इलाज ढूंढ निकालने वाले हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार पैन्क्रियाज अर्थात अग्नायशय को नियंत्रित कर इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ेगी। इलिनोइस विश्वविद्यालय के दल ने स्टेम कोशिकाओं की मदद से मधुमेह पीड़ित व्यक्ति के टी सेल को मधुमेह के प्रति रक्षक बनाने की तैयारी की है। ‘बी एम सी’ मेडिकल जर्नल के अनुसार, इस विधि से 38 प्रतिशत तक इंसुलिन की जरूरत को कम किया जा सकेगा।
व्यक्ति टाइप 1 मधुमेह से तब पीड़ित होता है जब प्रतिरोधक प्रणाली इंसुलिन पैदा करने वाली बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देती है और ग्लुकोज के स्तर अनियंत्रित हो जाता है। इस दल का नेतृत्व करने वाले डॉ योंग झाओ ने कहा कि यह मधुमेह के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
सेहत के लिहाज से गाय का दूध फायदेमंद मधुमेह से लड़ने में
पालमपुर: सेहत के लिहाज से गाय का दूध फायदेमंद तो है ही, अब एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि हिमाचल प्रदेश में पली-बढ़ी गाय के दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन हृदय की बीमारी, मधुमेह से लड़ने में कारगर और मानसिक विकास में सहायक होता है।
चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में पशुचिकित्सा सूक्ष्मजैविकी विभाग के शोधार्थियों ने बताया, 'पहाड़ी' गाय की नस्ल की दूध में ए-2 बीटा प्रोटीन ज्यादा मात्रा में पाया जाता है और यह सेहत के लिए काफी अच्छा है।' उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 43 पहाड़ी गायों पर किए जा रहे अध्ययन में यह बात सामने आई है।
लगभग 97 फीसदी मामलों में यह पाया गया कि इन गायों के दूध में ए-2 बीटा प्रोटीन मिलता है जो हृदय की बीमारी, मधुमेह और मानसिक रोग के खिलाफ सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हॉलस्टीन और जर्सी नस्ल की गायों में यह प्रोटीन नहीं पाया जाता। इन गायों में ए-1 जीन पाया जाता है जो इन बीमारियों को मदद पहुंचाता है। ए-1 जीन स्थानीय गायों के दूध में हमेशा मौजूद नहीं होता लेकिन इसे नकारा भी नहीं जा सकता।

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