14.8.17

शुगर का अचूक इलाज इन्सुलिन प्लांट से



गलत खानपान और शारीरिक गतिशीलता की कमी की वजह से आजकल बढ़ते मोटापे और मधुमेह की समस्या बहुत आम हो चली है। प्राय: देखा जा रहा है कि आजकल हर कोई व्यक्ति इस डर से मीठे से परहेज करने लगा है कि कहीं उसे भी मधुमेह अपनी चपेट में ना ले बैठे।
बीमारी - 
मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो ताउम्र साथ रहती है। हां, शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित जरूर किया जा सकता है लेकिन इससे पूरी तरह पीछा छुड़ा लिया जाए, ऐसा संभव नहीं है।
इंसुलिन का सहारा - 
वे लोग जिनकी शुगर काफी ज्यादा बढ़ जाती है, उन्हें दवाइयों के साथ-साथ इंसुलिन का सहारा भी लेना पडता है। इंसुलिन का एक बार प्रयोग कर हम शरीर को उसका आदी बना लेते हैं, जिसके चलते संबंधित व्यक्ति को नियमानुसार इंसुलिन लेना ही पड़ता है।
शरीर में शुगर -
 नियमित रूप से इंसुलिन और मधुमेह की दवा लेने वाले रोगियों के लिए आज हमारे पास एक अच्छी खबर है। वो खबर यह है कि पौधे की पत्तियां खाकर ही आप अपने शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। आपको दवाई या इंसुलिन के इंजेक्शन लगवाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।
कॉसटस इग्नेउस -

 कॉसटस इग्नेउस नाम के पौधे को लोग इंसुलिन के पौधे के नाम से जानते हैं। हो सकता है आपको ये सभी बातें मिथ्या लगें लेकिन सच यह है कि आधुनिक विज्ञान भी इस इंसुलिन के पौधे के गुणों पर अपनी मुहर लगा चुका है।
हाइ डाइबटीज - 
इस हर्बल पौधे के पत्तियों का सेवन करने से हाइ डाइबटीज को भी अपने नियंत्रण में किया जा सकता है।
दो प्रकार की डाइबटीज - 
जानकारों के अनुसार शरीर में डाइबटीज दो प्रकार से होती है। एक होती है टाइप वन डाइबटीज और दूसरी टाइप टू डाइबटीज।
टाइप वन डाइबटीज - 
टाइप वन डाबटीज के अंतर्गत रोगी का शरीर इंसुलिन हार्मोन नहीं बना पाता। इसलिए उस व्यक्ति को ताउम्र इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है। डाइबटीज के करीब 10 प्रतिशत रोगियों में ही टाइप वन पाया जाता है।
टाइप टू डाइबटीज - 
वहीं दूसरी ओर टाइप टू डाइबटीज के अंतर्गत व्यक्ति का शरीर इंसुलिन तो बनाता है लेकिन उसकी मात्रा पर्याप्त नहीं होती। इन रोगियों के ही शरीर में दवा या इंजेक्शन, किसी के भी जरिए इंसुलिन पहुंचाया जाया है।
हॉर्मोन -
 विशेषज्ञों के अनुसार डाइबटीज टू से पीड़ित रोगियों की संख्या करीब 80 प्रतिशत है। इंसुलिन पौधे के पत्तों का नियमित रूप से सेवन करने से पैंक्रियाज में हॉर्मोन बनाने वाली ग्रंथि के बीटा सेल्स मजबूत होते हैं।
पैंक्रियाज - 
जिसके परिणामस्वरूप पैंक्रियाज ज्यादा मात्रा में इंसुलिन बनाता है, जिसके चलते अतिरिक्त दवा की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती।
इंसुलिन की जरूरत -
 इंसुलिन के बारे में अब तक हमने आपको बहुत कुछ बता दिया लेकिन कहीं ना कहीं आपके दिमाग में यह सवाल भी कौंध रहा होगा कि आखिर हमारे शरीर को इंसुलिन की इतनी जरूरत क्यों होती है?

चलिए इस सवाल का जवाब भी हम आपको देते हैं और आपकी जिज्ञासा को शांत करने की कोशिश करते हैं।
दैनिक जीवन - दैनिक जीवन के कार्यों को पूरा करने के लिए हमारे शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। हमारे भोजन में शामिल कार्बोहाइड्रेट्स इसी ऊर्जा की पूर्ति करते हैं।
कार्बोहाइड्रेट्स - 
कार्बोहाइड्रेट्स, ग्लूकोज बनकर हमारे खून में मिलता है लेकिन अकेले कार्बोहाइड्रेट्स हमारे शरीर में ऊर्जा की पूर्ति नहीं कर सकते, उन्हें इंसुलिन नामक हार्मोन की आवश्यकता अवश्य पड़ती है।
ग्लूकोज -
दरअसल अकेले ग्लूकोज हमारे शरीर में मौजूद कोशिकाओं के अंदर नहीं पहुंच सकता, इंसुलिन से मिलकर ही ग्लूकोज हमारे शरीर के अंदर घुलता है।
शुगर का स्तर - 
आप कह सकते हैं कि इंसुलिन एक ऐसी चाबी की तरह है, जिसके जरिए ग्लूकोज शरीर के भीतर घुलता है। इस हार्मोन की कमी की वजह से ग्लूकोज कोशिकाओं तक पहुंच नहीं पाता और शरीर में शुगर का स्तर बढ़ जाता है और अंतत: व्यक्ति डाइबटीज से पीड़ित हो जाता है।
नर्सरी - 
राह हमने दिखा दी, इसपर चलने की जिम्मेदारी अब आपकी। किसी अच्छी नर्सरी में जाइए और वहां जाकर इन्सुलिन का ये पौधा खरीद लें।
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