आक (मदार )पौधे के चोंकाने वाले औषधीय फायदे //Medicinal Benefits of Madar Plant




   इस वनस्पति के विषय में साधारण समाज में यह भ्रान्ति फेंली हुई है कि आक का पौधा विषेला होता है तथा यह मनुष्य के लिये घातक है। इसमें किंचित सत्य जरूर है क्योकि आयुर्वेद संहिताओं मे भी इसकी गणना उपविषों में की गई है। यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में कर लिया जाये तो, उलटी दस्त होकर मनुष्य यमराज के घर जा सकता है। इसके विपरीत यदि आक का सेवन उचित मात्रा में, योग्य तरीके से, चतुर वैद्य की निगरानी में किया जाये तो अनेक रोगों में इससे बडा फायदा होता है। इसका हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है एवं यह सूर्य के समान तीक्ष्य। तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायन धर्मा हैं।
इसका रूप, रंग, पहचान
यह पौधा अकौआ एक औषधीय पादप है। इसको मदार, मंदार, आक, अर्क भी कहते हैं. इसका वृक्ष छोटा और छत्तादार होता है. पत्ते बरगद के पत्तों समान मोटे होते हैं। हरे सफेदी लिये पत्ते पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं.
इसका फूल सफेद छोटा छत्तादार होता है। फूल पर रंगीन चित्तियाँ होती हैं. फल आम के तुल्य होते हैं जिनमें रूई होती है। आक की शाखाओं में दूध निकलता है। वह दूध विष का काम देता है. आक गर्मी के दिनों में रेतिली भूमि पर होता है। चौमासे में पानी बरसने पर सूख जाता है।
इसके 9 अद्भुत फ़ायदे
– आक का दूध पाँव के अँगूठे पर लगाने से दुखती हुई आँख अच्छी हो जाती है। बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से जाते रहते हैं। बर्रे काटे में लगाने से दर्द नहीं होता। चोट पर लगाने से चोट शाँत हो जाती है।
– जहाँ के बाल उड़ गये हों वहाँ पर आक का दूध लगाने से बाल उग आते हैं। लेकिन ध्यान रहे इसका दूध आँख में नहीं जाना चाहिए वर्ना आँखें खराब हो जाती है। उपरोक्त कोई भी उपाय अपनी ज़िम्मेदारी पर सावधानी से ही करें।
आक के पौधे की पत्ती को उल्टा (उल्टा का मतलब पत्ते का खुदरा भाग) कर के पैर के तलवे से सटा कर मोजा पहन लें. सुबह और पूरा दिन रहने दे रात में सोते समय निकाल दें. एक सप्ताह में आपका शुगर लेवल सामान्य हो जायेगा. साथ ही बाहर निकला पेट भी कम हो जाता है।
– आक की जड को पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग अच्छा हो जाता है. आक की जड छाया में सुखा कर पीस लेवे और उसमें गुड मिलाकर खाने से शीत ज्वर शाँत हो जाता है.
– आक की जड 2 सेर लेकर उसको चार सेर पानी में पकावे जब आधा पानी रह जाय तब जड निकाल ले और पानी में 2 सेर गेहूँ छोडे जब जल नहीं रहे तब सुखा कर उन गेहूँओं का आटा पिसकर पावभर आटा की बाटी या रोटी बनाकर उसमें गुड और घी मिलाकर प्रतिदिन खाने से गठिया बाद दूर होती है। बहुत दिन की गठिया 21 दिन में अच्छी हो जाती है।
– आक का हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है। यह सूर्य के समान तीक्ष्ण तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायनधर्मा हैं। कहीं-कहीं इसे ‘वानस्पतिक पारद’ भी कहा गया है। आक के कोमल पत्ते मीठे तेल में जला कर अण्डकोश की सूजन पर बाँधने से सूजन दूर हो जाती है. तथा कडुवे तेल में पत्तों को जला कर गरमी के घाव पर लगाने से घाव अच्छा हो जाता है।
– इसके कोमल पत्तों के धुंए से बवासीर शाँत होती है. आक के पत्तों को गरम करके बाँधने से चोट अच्छी हो जाती है. सूजन दूर हो जाती है. आक की जड के चूर्ण में काली मिर्च पिस कर मिला ले और छोटी छोटी गोलियाँ बना कर खाने से खाँसी दूर होती है।
– आक की जड की राख में कडुआ तेल मिलाकर लगाने से खुजली अच्छी हो जाती है. आक की सूखी डँडी लेकर उसे एक तरफ से जलावे और दूसरी ओर से नाक द्वारा उसका धूँआ जोर से खींचे सिर का दर्द तुरंत अच्छा हो जाता है।
– आक का पत्ता और ड्ण्ठल पानी में डाल रखे उसी पानी से आबद्स्त ले तो बवासीर अच्छी हो जाती है। आक की जड का चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करने से उपदंश (गर्मी) रोग अच्छा हो जाता है। उपदंश के घाव पर भी आक का चूर्ण छिडकना चाहिये। आक ही के काढे से घाव धोवे।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार



पीपल के पत्तों से डेंगू बुखार का इलाज // Treatment of dengue fever with peepal leaves



पपीते के पत्ते के जूस से करें डेंगू का इलाज, 

आसपास के इलाकों में डेंगू के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरी इलाज के अलावा, लोगों को कुछ ऐसे घरेलू उपायों की जानकारी होनी ज़रूरी है, जो उन्हें इस ख़तरनाक बीमारी से बचाव दे। ऐसा ही एक घरेलू उपाय है, पपीते के पत्तों का जूस। कुछ लोगों को लगता है कि ये बात किसी अफवाह से ज्यादा कुछ नहीं है, जबकि कुछ लोग इसे अचूक इलाज मानते हैं। तो क्या है सच? आइये जानते हैं।

सच या अफवाह

कुछ वैज्ञानिक दस्तावेज़ों में ये दावा किया गया है कि पपीते के पत्तों का जूस शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के रिसर्च सेंटर में डॉक्टर नाम डैंग ने एक अध्ययन में पपीते के पत्तों के जूस के फायदों के बारे में बताया है। उन्होंने अध्ययन में पाया कि पपीते के पत्तों का जूस कैंसर से लड़ने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है और इम्यूनिटी बढ़ा सकता है। इन पत्तियों से मलेरिया और कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज भी मुमकिन है। श्रीलंका के एक फीज़िशियन डॉक्टर सनथ हेट्टिज ने पाया कि पपीते के पत्ते का जूस डेंगू का इलाज कर सकता है। उनका पेपर श्रीलंकन जर्नल ऑफ फैमिली फिज़िशियन में साल 2008 में प्रकाशित हुआ था।

कैसे करता है काम?

पपीते के पत्तियों में कायमोपापिन (chymopapin ) और पापेन (papain) जैसे एंजाइम पाए जाते हैं, डॉक्टर सनथ हेटिज के मुताबिक, ये तत्व प्लेटलेट काउंट सामान्य करते हैं, ब्लड क्लॉट को बेहतर बनाते हैं, लिवर को ठीक से काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, इस तरह से डेंगू के मरीज़ को रिकवर होने में मदद मिलती है।

पेट दर्द मे घरेलू उपाय

इस्तेमाल का तरीका

पपीते के पेड़ से पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। डॉक्टर हेट्टिज के मुताबिक, भारत में पाए जाने वाले रेड लेडी पपीते के पेड़ की पत्तियां ज्यादा प्रभावशाली होती हैं। याद रखने वाली बात ये है कि ऐसे पत्तों का इस्तेमाल करना चाहिए जो न ज्यादा नए हो और न ही ज्यादा पुराने।
पत्तों को साफ पानी से धो लें। लकड़ी की ओखली में पत्तों को बिना पानी, नमक या चीनी डाले कूटें। फिर कुटी हुई पत्तियों से जूस निकालकर दो बार दिन में पियें। डॉक्टर हेट्टिज के मुताबिक, वयस्क को दिन में दो बार 10 एमएल जूस पीना चाहिए और 5 से 12 साल के बच्चे को दिन में दो बार 2.5 एमएल जूस देना चाहिए।

मरीज़ को कब जूस देना सही

डॉक्टर सनथ के मुताबिक, मरीज़ को जितनी जल्दी हो सके पपीते के पत्ते का जूस देना शुरू कर देना चाहिए। इसका मतलब ये है कि जब मालूम चले कि डेंगू का पहला लक्षण सामने आ रहा है (जब प्लेटलेट्स 150000 से नीचे जाने लगे)। ये बाद की स्टेज में भी फायदेमंद होता है, लेकिन अगर स्थिति बहुत खराब हो जाए, अंग काम करना बंद करदे तो इसका ज्यादा फायदा नहीं होता।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


विक्स वेपोरब लगाने के चौकाने वाले फायदे




     बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े तक विक्स वेपोरब इस्तेमाल करते हैं। सर्दी, खांसी, जुकाम या बदन दर्द होने पर विक्स वेपोरब इस्तेमाल किया जाता है। इसे इस्तेमाल करने से रोगी को जल्द से जल्द आराम मिल जाता है। सिरदर्द या जुकाम होने पर या बाम काफी आराम देता है।
लेकिन क्या आपने सर्दी-जुकाम के अलावा भी विक्स वेपोरब के उपयोगों के बारे में जाना है? शायद नहीं! लेकिन आज हम आपको विक्स वेपोरब के उन प्रयोगों के बारे में बताएंगे, जिन्हें जानने के बाद आप विक्स वेपोरब के ‘फैन’ हो जाएंगे।


सायनस ,नाक की हड्डी  बढ़ने के उपचार

मुंहासों का इलाज -

सुनने में यह थोड़ा अजीब लगता है, पर वेपोरब त्वचा की साफ सफाई में फायदेमंद होता है। दिन में कई बार इसे मुहांसे पर लगाएं। इससे मुहांसे की समस्या दूर हो जाएगी।

अनचाहे दागों के लिए -

अपने गले, घुटने, कोहनी और कान के पीछे विक्स वेपोरब लगाएं। यह कीट पतंगों को आपसे दूर रखेगा। खाने के टेबल से मक्खी को दूर रखने के लिए वेपोरब का बोतल खोलकर रख दें। आपको नहीं लगता कि यह सबसे अच्छा ईको-फ्रेंडली तरीका है?

स्ट्रेच मार्क्स हटाए -

आप स्ट्रेच मार्क पर विक्स वेपोरब लगाएं। नियमित रूप से ऐसा करने पर आपको दो हफ्ते में परिणाम नजर आने लगेगा।

फटी एडियों के लिए

विक्स - वेपोरब फटी एडियों को ठीक कर सकती है, सर्दियों में यह हाथों के लिये मॉइस्‍चराइजर का काम कर सकती है और तो और यह स्‍ट्रेच मार्क को भी हटा सकती है।

मच्छर को भगाए -

अपने कपड़े और त्वचा पर थोड़ा सा विक्स वेपोरब लगाएं। इससे मच्छर आपसे दूर रहेगा।

साइनस सिरदर्द -

वेपोरब साइनस सिरदर्द का एक अच्छा घरेलू उपचार है। वेपोरब को नाक के नीचे लगाएं और गहरी सांस लें। इसमें पाए जाने वाले मेंथॉल से सिरदर्द से आराम मिलेगा।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार





मक्खन खाने के स्वास्थ्य लाभ //Health benefits of eating butter




     वर्तमान जीवनशैली में, हम वसायुक्त सभी चीजों को अपनी डाइट से बाहर करते जा रहे हैं। मक्खन की बात करें, तो कभी पुराने जमाने में रोटी के साथ ढेर सारा मक्खन सुबह के नाश्ते में शामिल किया जाता था, आज हम उसे पूरी तरह से नजरअंदाज करने लगे हैं। लेकन क्या आप जानते हैं, कि मक्खन खाने के भी अपने ही कुछ फायदे हैं।
मक्खन हर घर मे पाया जाता है। इसे उपयोग हम खाने में करते है। इसमें कैलोरिज की मात्रा ज्यादा होती है। अगर इसे हर रोज खाया जाए तो इसे आपका वजन काफी ज्यादा बढ़ भी सकता है। पर इसके बहुत से ऐसे गुण शामिल है जो कि हमारी सेहत के लिए अच्छे है। इसमें विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स ज्यादा मात्रा में मौजूद है इसलिए यह छोटे बच्चों के बढ़ने के लिए बहुत ही फायदेमंद है। जिनको लिवर संबंधी समस्या होती है, उनके लिए बटर में पका खाना सुपाच्य होता है। आज हम आपको मक्खन से सेहत के लिए फायदों के बारे में बताएगे।
* दिमागी विकास
मक्खन खाने से बच्चों का दिमागी विकास अच्छा रहता है और आंखो की रौशनी ठीक रहती है। इसीलिए अपने बच्चों को खाने में दूध और मक्खन जरूर दें।
*बुखार में राहत
यदि बुखार की समस्या हो या पुराना बुखार हो तो ऐसे में मक्खन खाने से फायदा मिलता है या फिर मक्खन में शहद मिलाकर खाने से भी बुखार में राहत मिलती है।

*दिल संबंधी रोग
दिल संबंधी बीमारीयों के लिए मक्खन फायदेमंद होता है। मक्खन खाने से दिल की बीमारी का खतरा कम रहता है। जिसके कारण हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है।

* एनर्जी लेवल बढाए
बटर को खाने के बाद हमारे शरीर में फैट में परिवर्तित हो जाता है अौर जरुर पड़ने पर यह हमारे एनर्जी लेवल को बढाता हैं।
. *त्वचा में चमक
मक्खन को चेहरे पर लगाने से त्वचा कोमल बनती है अौर चेहरे में निखार आता है।
*पाइल्स
गाय के दूध का मक्खन और तिल को मिलाकर खाने से पाइल्स की समस्या में लाभ होता है। इसके अलावा मक्खन में शहद व खड़ी शक्कर मिलाकर खाने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है।

सोरायसिस(छाल रोग) के आयुर्वेदिक उपचार 


*प्रजनन क्षमता
प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए मक्खन का बहुत लाभकारक माना जाता है। यह शरीर में गर्मी बढ़ाता है।
* बटर खाने से अच्छी नींद आती है
जब भी अापके काम करने के बाद में थकावट होती है तो एेसे में रात के खाने में बटर जरुर खाएं। इसे खाने से अच्छी नींद आती है क्योंकि इसमें सेलेनियम होता है।
*हड्डियों के लिए
मक्खन में कैल्शियम और विटामिन्स के साथ मिनिरल्स भी पूरी मात्रा में रहते हैं जो हड्डियों को मजबूत और शक्तिशाली बनाते हैं। जो लोग आस्टियोपोरोसि की समस्या से परेशान हों वे मक्खन का सेवन जरूर करें।
दांतों को भी मजबूत बनाता है
मक्खन दांतों को भी मजबूत बनाता है।इसलिए दातो की मजबूती के लिए मक्खन का सेवन जरुर करे
*दमा में
मक्खन में मौजूद सैचुरेटेड फैट्स फेफड़ों की मदद करते हैं और दमा के मरीजों के लिए भी इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है।
*अच्छा मूड
मक्खन में अधिक मात्रा में सेलेनियम होता है, जिससे खाने से हमारा नर्वस सिस्टम अच्छा रहता है। जब हम इसे गरमा-गरम सब्जी में डाल कर खाते है तो इसे गेखते ही हमारा मूड अच्छा हो जाता है अौर सब्ज़ी खाने में स्वाद भी लगती है।
*विटामिन डी
मक्खन में विटामिन डी की मात्रा ज्यादा पार्इ जाती हैं इसीलिए इसे नाश्ते में नही खाना चाहिए। मक्खन को चेहरे पर लगाने से त्वचा कोमल बनती है अौर चेहरे में निखार आता है।
* थायराइड
मक्खन थायराइड ग्रंथि को ठीक करने के लिए बहुत ही फायदेमंद है क्योंकि इसमें विटामिन ए की मात्रा अधिक पार्इ जाती हैं। अगर आप सोचते है कि इसे खाने से आपका वजन बढ जाएगा तो एेसी नही है।
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार






शुगर का अचूक इलाज इन्सुलिन प्लांट से



गलत खानपान और शारीरिक गतिशीलता की कमी की वजह से आजकल बढ़ते मोटापे और मधुमेह की समस्या बहुत आम हो चली है। प्राय: देखा जा रहा है कि आजकल हर कोई व्यक्ति इस डर से मीठे से परहेज करने लगा है कि कहीं उसे भी मधुमेह अपनी चपेट में ना ले बैठे।
बीमारी - 
मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो ताउम्र साथ रहती है। हां, शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित जरूर किया जा सकता है लेकिन इससे पूरी तरह पीछा छुड़ा लिया जाए, ऐसा संभव नहीं है।
इंसुलिन का सहारा - 
वे लोग जिनकी शुगर काफी ज्यादा बढ़ जाती है, उन्हें दवाइयों के साथ-साथ इंसुलिन का सहारा भी लेना पडता है। इंसुलिन का एक बार प्रयोग कर हम शरीर को उसका आदी बना लेते हैं, जिसके चलते संबंधित व्यक्ति को नियमानुसार इंसुलिन लेना ही पड़ता है।

रोग व क्‍लेश दूर करने के आसान मंत्र

शरीर में शुगर -
 नियमित रूप से इंसुलिन और मधुमेह की दवा लेने वाले रोगियों के लिए आज हमारे पास एक अच्छी खबर है। वो खबर यह है कि पौधे की पत्तियां खाकर ही आप अपने शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। आपको दवाई या इंसुलिन के इंजेक्शन लगवाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।




कॉसटस इग्नेउस -

 कॉसटस इग्नेउस नाम के पौधे को लोग इंसुलिन के पौधे के नाम से जानते हैं। हो सकता है आपको ये सभी बातें मिथ्या लगें लेकिन सच यह है कि आधुनिक विज्ञान भी इस इंसुलिन के पौधे के गुणों पर अपनी मुहर लगा चुका है।
हाइ डाइबटीज - 
इस हर्बल पौधे के पत्तियों का सेवन करने से हाइ डाइबटीज को भी अपने नियंत्रण में किया जा सकता है।
दो प्रकार की डाइबटीज - 
जानकारों के अनुसार शरीर में डाइबटीज दो प्रकार से होती है। एक होती है टाइप वन डाइबटीज और दूसरी टाइप टू डाइबटीज।
टाइप वन डाइबटीज - 
टाइप वन डाबटीज के अंतर्गत रोगी का शरीर इंसुलिन हार्मोन नहीं बना पाता। इसलिए उस व्यक्ति को ताउम्र इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है। डाइबटीज के करीब 10 प्रतिशत रोगियों में ही टाइप वन पाया जाता है।
टाइप टू डाइबटीज - 
वहीं दूसरी ओर टाइप टू डाइबटीज के अंतर्गत व्यक्ति का शरीर इंसुलिन तो बनाता है लेकिन उसकी मात्रा पर्याप्त नहीं होती। इन रोगियों के ही शरीर में दवा या इंजेक्शन, किसी के भी जरिए इंसुलिन पहुंचाया जाया है।
हॉर्मोन -
 विशेषज्ञों के अनुसार डाइबटीज टू से पीड़ित रोगियों की संख्या करीब 80 प्रतिशत है। इंसुलिन पौधे के पत्तों का नियमित रूप से सेवन करने से पैंक्रियाज में हॉर्मोन बनाने वाली ग्रंथि के बीटा सेल्स मजबूत होते हैं।
पैंक्रियाज - 
जिसके परिणामस्वरूप पैंक्रियाज ज्यादा मात्रा में इंसुलिन बनाता है, जिसके चलते अतिरिक्त दवा की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती।
इंसुलिन की जरूरत -
 इंसुलिन के बारे में अब तक हमने आपको बहुत कुछ बता दिया लेकिन कहीं ना कहीं आपके दिमाग में यह सवाल भी कौंध रहा होगा कि आखिर हमारे शरीर को इंसुलिन की इतनी जरूरत क्यों होती है?
चलिए इस सवाल का जवाब भी हम आपको देते हैं और आपकी जिज्ञासा को शांत करने की कोशिश करते हैं।
दैनिक जीवन - दैनिक जीवन के कार्यों को पूरा करने के लिए हमारे शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। हमारे भोजन में शामिल कार्बोहाइड्रेट्स इसी ऊर्जा की पूर्ति करते हैं।

गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज

कार्बोहाइड्रेट्स - 
कार्बोहाइड्रेट्स, ग्लूकोज बनकर हमारे खून में मिलता है लेकिन अकेले कार्बोहाइड्रेट्स हमारे शरीर में ऊर्जा की पूर्ति नहीं कर सकते, उन्हें इंसुलिन नामक हार्मोन की आवश्यकता अवश्य पड़ती है।
ग्लूकोज -
दरअसल अकेले ग्लूकोज हमारे शरीर में मौजूद कोशिकाओं के अंदर नहीं पहुंच सकता, इंसुलिन से मिलकर ही ग्लूकोज हमारे शरीर के अंदर घुलता है।
शुगर का स्तर - 
आप कह सकते हैं कि इंसुलिन एक ऐसी चाबी की तरह है, जिसके जरिए ग्लूकोज शरीर के भीतर घुलता है। इस हार्मोन की कमी की वजह से ग्लूकोज कोशिकाओं तक पहुंच नहीं पाता और शरीर में शुगर का स्तर बढ़ जाता है और अंतत: व्यक्ति डाइबटीज से पीड़ित हो जाता है।
नर्सरी - 
राह हमने दिखा दी, इसपर चलने की जिम्मेदारी अब आपकी। किसी अच्छी नर्सरी में जाइए और वहां जाकर इन्सुलिन का ये पौधा खरीद लें।


आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

   




बथुआ खाने के अद्भुत फायदे //The wonderful benefits of eating Bathua



बथुआ खाने के होते हैं नीचे लिखे जबरदस्त फायदे- 

सफेद दाग होने पर
• बथुआ की सब्जी खाने से सफेद दाग में लाभ होता है। इसका रस निकालकर सफेद दागों पर लगाने से सफेद दाग ठीक हो जाते हैं।
• बथुआ को रोजाना उबालकर निचोड़कर इसका रस निकालकर पी लें और इसकी सब्जी बनाकर खायें। बथुए के उबले हुए पानी से त्वचा को धोयें। बथुए के कच्चे पत्तों को पीसकर निचोड़ लें और उसका रस निकाल लें। 2 कप बथुए के पत्तों के रस में आधा कप तिल का तेल मिलाकर हल्की-हल्की आग पर रख दें। जब रस पूरी तरह जल जाये और बस तेल बाकी रह जाये तो तेल को छानकर शीशी में भर लें और रोजाना सफेद दागों पर लगायें। लगातार यह तेल लगाने से समय तो ज्यादा लगेगा पर सफेद दाग ठीक हो जायेंगे।

बंद नाक खोलने और कफ़ निकालने के अनुपम नुस्खे

बथुआ (Bathua/चाकवत) रुचिकर, पाचक, रक्तशोधक, दर्दनाशक, त्रिदोषशामक, शीतवीर्य तथा बल एवं शुक्राणु वर्धक है | वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार बथुए में लौह, सोना, क्षार, पारा, कैरोटिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, प्रोटीन, वसा तथा विटामिन ‘सी’ व ‘बी – २’ पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं | बथुआ नेत्र, मूत्र व पेट संबंधी विकारों में विशेष लाभदायी है | बथुए की सब्जी, रस या उसका उबाला हुआ पानी पीने से पेट, यकृत, तिल्ली व गुर्दे (किडनी) से संबधित अनेक प्रकार के रोग, बवासीर व पथरी के रोग में लाभ होता है |
बथुए का साग :
बथुए का साग बनाते समय कम-से-कम मसाले व घी – तेल का प्रयोग करना चाहिए | गाय के घी व जीरे का छौंक लगाकर सेंधा नमक डाल के बनाया गया बथुए का साग खाने से नेत्रज्योति बढती है | आँखों की लाली व सूजन उतर जाती है |
यह अमाशय को ताकत देता है | इससे कब्ज दूर होता है और वायुगोला व सिरदर्द भी मिट जाता है | शरीर में शक्ति आती है व स्फूर्ति बनी रहती है |

बथुआ के गुण 

★ बथुआ जल्दी हजम होता है, यह खून पैदा करता है। इससे गर्म स्वभाव वालों को अत्यंत फायदा होता है।
★ यह प्यास को शांत करता है।
★ इसके पत्तों का रस गांठों को तोड़ता है, यह प्यास लाता है, सूजनों को पचाता है और पथरी को गलाता है।
★ छोटे-बड़े दोनों प्रकार के बथुवा क्षार से भरे होते हैं यह वात, पित्त, कफ (बलगम) तीनों दोषों को शांत करता है,
★ आंखों को अत्यंत हित करने वाले मधुर, दस्तावर और रुचि को बढ़ाने वाले हैं।
★ शूलनाशक, मलमूत्रशोधक, आवाज को उत्तम और साफ करने वाले, स्निग्ध पाक में भारी और सभी प्रकार के रोगों को शांत करने वाले हैं।
★ चिल्ली यानी लाल बथुआ गुणों में इन दोनों से अच्छा है। लाल बथुआ गुणों में बथुए के सभी गुणों के समान है।
★ बथुवा, कफ (बलगम) और पित्त को खत्म करता है।
★ प्रमेह को दबाता है, पेशाब और सुजाक के रोग में बहुत ही फायदेमंद है।

विभिन्न रोगों में सहायक बथुआ-

1. पेट के रोग में : जब तक बथुआ की सब्जी मिलती रहे, रोज इसकी सब्जी खांयें। बथुए का उबाला हुआ पानी पीयें। इससे पेट के हर प्रकार के रोग लीवर (जिगर का रोग), तिल्ली, अजीर्ण (पुरानी कब्ज), गैस, कृमि (कीड़े), दर्द, अर्श (बवासीर) और पथरी आदि रोग ठीक हो जाते हैं।
2. पथरी : 1 गिलास कच्चे बथुए के रस में शक्कर मिलाकर रोज पीने से पथरी गलकर बाहर निकल जाती है।
3. कब्ज : बथुआ आमाशय को ताकत देता है और कब्ज को दूर करता है। यह पेट को साफ करता है। इसलिए कब्ज वालों को बथुए का साग रोज खाना चाहिए। कुछ हफ्ते लगातार बथुआ का साग खाते रहने से हमेशा होने वाला कब्ज दूर हो जाता है।

*हाइड्रोसील(अंडकोष वृद्धि) के  घरेलू  और होम्योपैथिक उपचार

4. जुंए :
• बथुआ के पत्तों को गर्म पानी में उबालकर छान लें और उसे ठंडा करके उसी पानी से सिर को खूब अच्छी तरह से धोने से बाल साफ हो जायेंगे और जुएं भी मर जायेंगी।
• बथुआ को उबालकर इसके पानी से सिर को धोने से जुंए मर जाती हैं और सिर भी साफ हो जाता है।
5. मासिक-धर्म की रुकावट : 
2 चम्मच बथुआ के बीज को 1 गिलास पानी में उबालें। उबलने पर आधा पानी बचने पर इसे छानकर पीने से रुका हुआ मासिक-धर्म खुलकर आता है।
रोजाना बथुए का साग खाने से आंखों की सूजन दूर हो जाती है।
7. सफेद दाग, दाद, खुजली, फोड़ा, कुष्ठ और त्वचा रोग में : बथुआ उबालकर निचोड़कर इसका रस पीये और सब्जी साग बना कर खायें। बथुए के उबले हुए पानी से त्वचा को धोयें। बथुआ के कच्चे पत्ते पीसकर निचोड़कर रस निकालें। 2 कप रस में आधा कप तिल का तेल मिलाकर हल्की आग पर गर्म करें। जब रस खत्म होकर तेल रह जाये तब छानकर किसी साफ साफ शीशी में सुरक्षित रख लें और त्वचा पर रोज लगायें। इस प्रयोग को लम्बे समय तक करने से सफेद दाग, दाद, खुजली, फोड़ा, कुष्ठ और त्वचा रोग के सारे रोग दूर हो जाते हैं।

आँव रोग (पेचिश) के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

8. फोड़े : 
बथुए को पीसकर इसमें सोंठ और नमक मिलाकर गीले कपड़े में बांधकर कपड़े पर गीली मिट्टी लगाकर आग में सेंकें। सेंकने के बाद इसे फोड़े पर बांध लें इस प्रयोग से फोड़ा बैठ जायेगा या पककर जल्दी फूट जायेगा।
9. जलन : 
आग से जले अंग पर कच्चे बथुए का रस बार-बार लगाने से जलन शांत हो जाती है।
10. गुर्दे के रोगों में : 
गुर्दे के रोग में बथुए का साग खाना लाभदायक होता है अगर पेशाब रुक-रुककर आता हो, या बूंद-बूंद आता हो, तो बथुए का रस पीने से पेशाब खुलकर आता है।
11. पेशाब के रोग : 
आधा किलो बथुआ और 3 गिलास पानी लेकर उबालें, और फिर पानी छान लें। बथुए को निचोड़कर पानी निकालकर यह भी छाने हुए पानी में मिलाकर लें। इसमें स्वादानुसार नींबू, जीरा, जरा-सी कालीमिर्च और सेंधानमक मिलाकर पी जायें। इस प्रकार तैयार किया हुआ पानी दिन में 3 बार पीयें। इससे पेशाब में जलन, पेशाब कर चुकने के बाद होने वाला दर्द ठीक हो जाता है। दस्त साफ आते हैं। पेट की गैस, अपच (भोजन न पचना) दूर होती है। पेट हल्का लगता है। उबले हुए पत्ते भी दही में मिलाकर खाने से बहुत ही स्वादिष्ट लगते हैं।
12. जलने पर : 
• बथुए के पत्तों पर पानी के छींटे मारकर पीस लें और शरीर के जले हुए भागों पर लेप करें इससे जलन मिट जाती है और दर्द भी समाप्त होता है।
• शरीर के किसी भाग के जल जाने पर बथुआ के पत्तों को पीसकर लेप करने से जलन मिट जाती है।
13. शरीर का शक्तिशाली होना : 
बथुआ को साग के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। पत्तों के साग में बथुआ का साग सबसे अधिक फायदेमंद और सेहतमंद होता है। इसका सेवन निरंतर रूप से करने से मनुष्य की मर्दानगी बढ़ती है, खून में वृद्धि होती है, याददाश्त तेज होती है, आमाशय मजबूत होता है, पथरी से बचाव होता है, कब्ज और पेट में होने वाली जलन से छुटकारा मिल जाता है। हरे बथुए का सेवन अधिक लाभकारी होता है। अगर हरा बथुआ न मिले तो इसे सूखाकर रोटी में मिलाकर खाने से बहुत लाभ मिलता है।
14. यकृत : 
एक गिलास रस में शहद मिलाकर रोज पीने से पथरी टूटकर निकल जाती है | इससे यकृत की क्रियाशीलता भी बढती है |
15. दस्त :
 बथुआ के पत्तों को लगभग 1 लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर रख लें, फिर उसे 2 चम्मच की मात्रा में लेकर उसमें थोड़ी-सी चीनी मिलाकर 1 चम्मच रोजाना सुबह और शाम पिलाने से दस्त में लाभ मिलता है।
16. कष्टार्तव (मासिक-धर्म का कष्ट के साथ आना) : 
5 ग्राम बथुए के बीजों को 200 मिलीलीटर पानी में खूब देर तक उबालें। उबलने पर 100 मिलीलीटर की मात्रा में शेष रह जाने पर इसे छानकर पीने से मासिक-धर्म के समय होने वाली पीड़ा नहीं होती है।
    इस लेख के माध्यम से दी गयी जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है|
17. बवसीर (अर्श) : 
बथुआ का साग और बथुआ को उबालकर उसका पानी पीने से बवासीर ठीक हो जाती है।
18. जिगर का रोग : 
बथुआ, छाछ, लीची, अनार, जामुन, चुकन्दर, आलुबुखारा, के सेवन करने से यकृत (जिगर) को शक्ति मिलती है और इससे कब्ज भी दूर हो जाती है।
19. आमाशय की जलन :
 बथुआ को खाने से आमाशय की बीमारियों से लड़ने के लिए रोगी को ताकत मिलती है।
20. अम्लपित्त के लिए :
 बथुआ के बीजों को पीसकर चूर्ण बनाकर 2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ पीने से आमाशय की गंदगी साफ हो जाती है और यह पित्त को बाहर निकाल देता है।
21. प्रसव पीड़ा : 
बथुए के 20 ग्राम बीज को पानी में उबालकर, छानकर गर्भवती स्त्री को पिला देने से बच्चा होने के समय पीड़ा कम होगी।
22.  नकसीर : 
नकसीर (नाक से खून बहना) के रोग में 4-5 चम्मच बथुए का रस पीने से लाभ होता है।
23. त्वचा के रोग के लिए : 
चमड़ी के रोगों में बथुए को उबालकर निचोड़ लें और इसका रस निकाल कर पी लें और सब्जी को खा लें। बथुए के उबले हुए पानी से चमड़ी को धोने से भी त्वचा के रोगों में लाभ होता है। बथुए के कच्चे पत्तों को पीसकर और निचोडकर उसका रस निकाल लें। इस 2 कप रस में आधा कप तिल का तेल मिलाकर हल्की-हल्की आग पर पका लें। जब रस जलकर तेल ही बचा रह जाये तो इसे छानकर त्वचा के रोगों पर काफी समय तक लगाने से लाभ होता है।
24.  खाज-खुजली :
• रोजाना बथुए को उबालकर निचोड़कर इसका रस निकालकर पीयें और सब्जी खायें। इसके पानी से त्वचा को धोने से भी खाज-खुजली में लाभ होता है।
• 4 भाग कच्चे बथुए का रस और 1 भाग तिल का तेल मिलाकर गर्म कर लें जब पानी जलकर सिर्फ तेल रह जाये तो उस तेल की मालिश करने से खुजली दूर हो जाती है।
25.  अनियमित मासिकस्राव : 
50 ग्राम बथुआ के बीजों को लेकर लगभग आधा किलो पानी में उबालते हैं। जब यह पानी 250 मिलीलीटर की मात्रा में रह जाए तो उसका सेवन करना चाहिए। इसे तीन दिनों तक नियमित रूप से सेवन करने से माहवारी खुलकर आने लगती है।
26.  पेट के सभी प्रकार के रोग : 
बथुआ की सब्जी मौसम के अनुसार खाने से पेट के रोग जैसे- जिगर, तिल्ली, गैस, अजीर्ण, कृमि (कीड़े) और बवासीर ठीक हो जाते हैं।

27. पेट के कीड़ों के लिए :

• बथुआ को उबालकर उसका आधा कप रस निकालकर पीने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
• 1 कप कच्चे बथुआ के रस में इच्छानुसार नमक मिलाकर रोजाना पीने से पेट के कीड़ें खत्म हो जाते हैं।
• बथुआ के बीजों को पीसकर 1 चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से पेट के कीड़े दूर हो जाते हैं।
• बथुए का रस निकालकर पीने से पेट के कीड़ें मर जाते हैं।
• 1-1 चम्मच बथुए का रस रोजाना सुबह और शाम बच्चों को पिलाने से उनके पेट मे कीड़े नहीं होते हैं।
• बथुए के बीज को 1 चम्मच पिसे हुए शहद में मिलाकर चाटने से भी लाभ होता है तथा रक्तपित्त का रोग भी ठीक हो जाता है।
28. प्लीहा वृद्धि (तिल्ली) : 
बथुए को उबालकर उसका उबला हुआ पानी पीने या कच्चे बथुए के रस में नमक डालकर पीने से तिल्ली (प्लीहा) बढ़ने का रोग ठीक हो जाता है।
29. हृदय रोग : 
बथुए की लाल पत्तियों को छांटकर उसका लगभग आधा कप रस निकाल लें। इस रस में सेंधानमक डालकर सेवन करने से दिल के रोगों में आराम आता है।
30. पीलिया का रोग :
 100 ग्राम बथुए के बीज को पीसकर छान लें। 15-16 दिन तक रोजाना सुबह आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से पीलिया का रोग दूर हो जाता है।
31. दाद के रोग में : 
बथुए को उबालकर निचोड़कर इसका रस पी लें और इसकी सब्जी खा लें। उबले हुए पानी से त्वचा को धोएं। बथुए के कच्चे पत्तों को पीसकर, निचोड़कर उसका रस निकाल लें। 2 कप रस में आधा कप तिल का तेल मिलाकर हल्की-हल्की आग पर पका लें। जब रस जल जायें और बस तेल बाकी रह जाये तो तेल को छानकर शीशी में भर लें और त्वचा के रोगों में लम्बे समय तक लगाते रहने से दाद, खाज-खुजली समेत त्वचा के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।
32. विसर्प-फुंसियों का दल बनना : 
बथुआ, सौंठ और नमक को एक साथ पीसकर इसके लेप को गीले कपड़े में बांधकर इसके ऊपर मिट्टी का लेप कर दें और इसे आग पर रख कर सेंक लें। फिर इसे खोलकर गर्म-गर्म ही फुंसियों पर बांध लें। इससे फुंसियों का दर्द कम होगा और मवाद बाहर निकल जायेगी।
33.  कब्ज : 
• बथुआ(Bathua) की सब्जी बनाकर रोजाना खाते रहने से कब्ज की शिकायत कभी नहीं होती है। बथुआ आमाशय को ताकत देता है और शरीर में ताकत व स्फूर्ति लाता है।
• बथुआ को उबालकर उसमें इच्छानुसार चीनी मिलाकर एक गिलास सुबह और शाम पीने से कब्ज में आराम मिलता है।
• बथुआ के पत्तों का 2 चम्मच रस को रोजाना पीने से कब्ज दूर हो जाती है।
• बथुआ का साग, रस और इसका उबला हुआ पानी पीने से कब्ज ठीक हो जाती है।
• बथुआ और चौलाई की पकी सब्जी को मिलाकर सेवन करने से कब्ज समाप्त हो जाती है।
34. .घुटनों का दर्द: 
बथुए के पानी से दर्द्वाले घुटने का सेंक करें और बथुए की सब्जी खायें | इससे कुछ सप्ताह में ही घुटनों का दर्द ठीक हो जाता है |
किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार