26.6.17

फेफड़े को तंदुरुस्त रखने के योग आसन:Yoga posture of keeping lungs fit




    अपने फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए आपको धूम्रपान से दूर रहना चाहिए ये तो आपको मालूम ही होगा। लेकिन इसके अलावा आप अपने फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए योग का सहारा भी ले सकते हैं। योग आपकी छाती की मांसपेशियों को मज़बूत करता है, आपके फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है और साथ ही, आप बेहतर तरीके से ऑक्सीजन ले सकते हैं। सेलेब्रिटी योग एक्सपर्ट सुनैना रेखी कुछ ऐसे योग के आसन बता रही हैं जिनके लगातार अभ्यास से आप अपने फेफड़ों का स्वास्थ्य बेहतर बना सकते हैं।
मत्स्यासन
मत्स्यासन शरीर में रक्त के संचरण में मदद करता है जिससे सभी अंगों तक रक्त पहुं पाता है। यह गहरी सांस लेने के लिए प्रेरित करता है जिसकी वजह से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं। इस आसन को करने से सांस के सभी रोगों में फायदा होता है।
विधि
• पेट के बल सीधा लेट जाएं।
• पैर सीधे रखें और हाथ बगल में सीधे फैला लें।
 
• एक-एक करके दोनों तरफ के कूल्हे को उठाकर हाथ उनके नीचे रख लें।
• सांस बाहर छोड़ते हुए अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाएं।
• अपनी छाती को ऊपर उठाएं और गर्दन को पीछे की तरफ मोड़ दें।
• कुछ सेकेंड्स के लिए इसी मुद्रा में रहें, फिर वापस आराम से लेट जाएं।
योग मुद्रा
योग की इस मुद्रा से रक्त का प्रवाह फेफड़ों की तरफ होता है जिससे फेफड़ों की कोशिकाओं से टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं। इस आसन से आपको शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाने व ध्यान केंद्रित करने में भी मदद मिलती है।
• अपनी दाएं हाथ की कलाई बाएं हाथ से पीछे ले जाकर पकड़ें।
• अंदर सांस लें, कंधों को खींचकर पीछे की और रखें और छाती को बाहर की ओर ले जाएं।
• अब सांस बाहर निकालते हुए आगे की तरफ झुकें। अपने माथे को दाएं घुटने से छुएं।
• अब सांस अंदर लेते हुए शुरुआती मुद्रा में आ जाएं।
• इस मुद्रा को फिर से बाएं घुटने के साथ करें।

नाड़ी शोधन प्राणायाम

इस गहन श्वसन तकनीक का आपके श्वसन प्रणाली में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसा देखा गया है कि इस आसन का अभ्यास करने से अस्थमा के मरीजों को काफी आराम हुआ है।
• रीढ़ की हड्डी और कंधों को सीधा करके बैठें। रखें। गर्दन सीधी और ठोड़ी थोड़ी नीचे झुकी हुई हो। आंखें बंद रखें।
• अब सीधे हाथ की दोनों पहली उंगलियां ललाट पर रखें। गहरी श्वास लेकर अपनी सांसों को सामान्य करें। अपने अंगूठे को दायीं नासिका पर और अंतिम दोनों उंगलियों को बायीं नासिका पर रखें।


• दायीं नासिका को अंगूठे से बंद करके बायीं नासिका से श्वास को अंदर लें। इसके बाद बायीं नासिका को भी बंद करें।
• इस अवस्था को आंतरिक कुंभक कहा जाता है, ऐसा कुछ ही क्षण करें। फिर दायीं नासिका से अंगूठे को हटा कर श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालें, इस समय बायीं नासिका बंद हो।
• अपना ध्यान श्वास पर ही रखें। इसी प्रक्रिया को अब उल्टा करें। बायीं नासिका को बंद करके दायीं से श्वास भरें ओर बायीं निकालें। इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम का एक पूरा राउंड कहा जाता है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन
यह आसन विशेष रूप से आपके फेफड़ों की सांस लेने और ऑक्सिजन को अधिक समय तक रोकने की क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। साथ ही यह रीढ़ को आराम देता है और पीठ दर्द या पीठ संबंधी परेशानियों से निजात दिलाता है।
विधि
• पैरों को सामने की तरफ फैलाकर बैठ जाएं, रीढ़ तनी हो और दोनों पैर एक-दूसरे से लगे हों।
• अपने बाएँ पैर को मोड़ें और उसकी एड़ी को पुष्टिका के दाएं हिस्से की और ले जाएं।


• अब दाएं पैर को बाएँ पैर की ओर लाएं और बायाँ हाथ दाएं घुटनों पर और दायाँ हाथ पीछे ले जाएं।
• कमर, कन्धों और गर्दन को इस क्रम में दाईं और मोड़ें।
• लम्बी साँसे लें और छोड़ें।
• शुरुआती मुद्रा में आने के लिए सांस छोड़ना जारी रखें, पहले पीछे स्थित दाएं हाथ को यथावत लाएं, फिर कमर सीधी करें, फिर छाती और अंत में गर्दन।
• अब इसी प्रक्रिया को दूसरी दिशा में करें।
पद्म सर्वांगासन
पद्म सर्वांगासन आपके रक्त को शुद्ध करता है और आपके फेफड़ों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन भेजता है। इस आसन को करते हुए आपको सांस लेने की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।
विधि
• सलंब सर्वांगासन से शुरुआत करें।
• जब आप सांस बाहर छोड़ें, घुटने मोड़ लें और वो भी इस प्रकार की आपकी दाहिनी एड़ी बायीं जांघ पर और बाई एड़ी दाहिनी जांघ पर हो।
• सांस अंदर लें और अब पैरों को छत की तरफ फैलाएं। कोशिश करें कि कूल्हे आगे की तरफ हों और घुटने एक दूसरे के करीब।
• कुछ देर इसी मुद्रा में रहें फिर पैर खोल लें और धीरे धीरे शरीर को नीचे की तरफ ले आएं।
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