24.6.17

अनुलोम विलोम प्राणायाम करने की विधि और फायदे



अनुलोम विलोम एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राणायाम है| इस प्राणायाम में सांस लेने की क्रिया को बार बार किया जाता है| अनुलोम का मतलब होता है सीधा और विलोम का मतलब होता है उल्टा। इस प्राणायाम याने की अनुलोम विलोम में नाक के दाएं छिद्र से सांस को खींचते हैं, और बायीं नाक के छिद्र से सांस को बाहर निकालते है।
अनुलोम विलोम प्राणायम को नाड़ी शोधक प्राणायम के नाम से भी जान जाता है| इस आसान को करने के लिए उम्र का बंधन नहीं है, हर उम्र के व्यक्ति इसका लाभ उठा सकते है| इसे नियमित रूप से करने पर शरीर की सारी नाडि़यां शुद्ध व निरोग रहती हैं। इसके अलावा इस आसान को करने से सर्दी, जुकाम व दमा में भी काफी राहत मिलती है|
अनुलोम विलोम प्राणायाम करने की विधि
अनुलोम विलोम प्राणायम को करने के लिए किसी भी स्तिथि जैसे सुखासन, सिद्धासन या फिर वज्रासन में बैठें।
 
अनुलोम विलोम आसन की शुरुवात हमेशा नाक के बाये छिद्र से करनी है|
सबसे पहले हाथो की उंगलियो की सहायता से नाक का दाया छिद्र बंद करें व बाये छिद्र से लंबी सांस लें|

इसके पश्चात बाये छिद्र को बंद करके, दाये वाले छिद्र से लम्बी सांस को छोड़े|
इस प्रक्रिया को कम से कम 10-15 मिनट तक दोहराइए|
सांस लेते समय आपको अपना ध्यान दोनो आँखो के बीच मे स्थित आज्ञा चक्र पर एकत्रित करना होता है|
बस लम्बी लम्बी साँसे लेते जाइये और मन में ओम मंत्र का जाप करते जाइये|
शुरुवात में इसे योग प्रशिक्षक के निर्देश में किया जाए तो बेहतर है।
यदि आप एनीमिया से पीड़ित है तो इसे करने से पहले चिकित्सक से उचित सलाह ले|
साँस को छोड़ने और लेने का काम सहजता से करे| गलत तरीके से या फिर जल्दी बाजी में इसे करने से उल्टा शरीर को नुकसान होता है|
अनुलोम-विलोम प्राणायाम को करते वक्त तीन क्रियाएँ की जाती है| पूरक, कुम्भक और रेचक। इसको नियमित रूप से 10 मिनट करने पर भी स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते है|
नियमित तौर पर इस योग को करने से फेफड़े मजबूत बनते हैं।
अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने से एलर्जी और सभी प्रकार की चर्म समस्याए खत्म हो जाती है|
अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से शरीर में रक्त का संचार सुधरता है| यह ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करने में सहायक है|
वजन घटाने के लिए भी यह बेहद फायदेमंद है| इस प्राणायाम को करने से शरीर की चर्बी घटती है और मोटापा भी कम होता है|
 
सर्दियों में शरीर का तापमान कम होने से सर्दी जुखाम जैसी समस्याए होती है, लेकिन यदि इस योग को ठंडी के दिन में किया जाये तो हमारे शरीर का तापमान संतुलित रहता हैं।
इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है| और मधुमेह जैसी समस्याए खत्म हो जाती है|
इसे ब्रेन ट्युमर जैसी समस्याए ठीक हो जाती है और यादास्त (मेमोरी) भी बढ़ती है|
इससे सायनस की समस्या ठीक हो जाती है और टाँन्सीलस की परेशानी में भी आराम मिलता है|
इसे करने से आर्थराटीस, कार्टीलेज घीसना जैसी बीमारियाँ भी ठीक हो जाती है|
वृद्धावस्था में अनुलोम विलोम करने से यह आपको स्वस्थ और निरोग रखने में मदद करता है। इसे करने से गठिया और जोड़ो का दर्द ठीक हो जाता है|
सावधानी-यदि आप कमजोर और एनीमिया से पीड़ित है। तो शुरुवात में सांस लेने और छोड़ने में परेशानी आ सकती है| इसलिए शुरुवात में इस क्रिया को 4 से 5 बार ही रखे|
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