29.5.17

वृषण (अंडकोश)में सूजन और दर्द के घरेलू आयुर्वेदिक इलाज /Pain in Testicles






अंडकोष क्‍या है
अंडकोष यानी टेस्टिस पुरुषों में पायी जाने वाली एक थैली है। अंडकोष की थैली के अंदर दो अंडकोष होते हैं। अंडकोष लाखों छोटे-छोटे शुक्राणु कोशिकाएं पैदा करते हैं और उन्हें सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा ये टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन भी बनाते हैं, एक ऐसा हार्मोन जिसके कारण लड़के शुक्राणु पैदा करते हैं। साथ ही टेस्‍टोस्‍टेरॉन मांसपेशियों और बालों के लिए जरूरी होता है। इसे मर्दाना हार्मोन भी कहते हैं।

अंडकोष को इंग्लिश में Scrotum कहा जाता है जो की एक पतली थैली के रूप में आदमी के लिंग के नीचे स्थित होती है| इस थैली में दो बहुत ही जरुरी अंग पाए जाते हैं जिन्हें हम testicles कहते हैं और जिनमें वीर्य का उत्पादन होता है| वैसे तो अंडकोष मोटी और मजबूत त्वचा का बना होता है लेकिन फिर भी कई प्रकार के रोग या बीमारी इसे ग्रसित कर सकते हैं और उनमें से सबसे ज्यादा पुरुषों को अंडकोष में दर्द और सूजन का सामना करना पड़ता है| अंडकोष में दर्द और सूजन right या left side अथवा दोनों और हो सकता है| पुरुष को अपने जीवन की किसी भी अवस्था में इस दर्द और सुजन का सामना करना पड़ सकता है|
अंडकोष का दर्द धीरे और लम्बे समय तक भी हो सकता है और कई लोगों में ये दर्द बहुत जयादा तेज भी हो सकता है| सही समय पर इस समस्या का निदान न होने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं| इसलिए यदि आपके अंडकोष में तेज दर्द और सूजन है तो आपको तुरंत किसी अच्छे urologist से मिलकर उसका इलाज करवा लेना चाहिए| लेकिन यदि आपकी प्रॉब्लम जयादा सीरियस नहीं है तो आप कुछ घरेलु नुस्खे अपनाकर pain और swelling को कम कर सकते हैं| लेकिन सबसे पहले अंडकोष में दर्द और सूजन करने वाले कारणों के बारे में थोड़ी जानकारी बढ़ा ली जाये|
वो कारण जो अंडकोष में दर्द और सुजन के लिए जिम्मेदार होते हैं
अंडकोष में दर्द और सूजन के कुछ प्रचलित कारणों में से कुछ नीचे दिए गये हैं | जरुरी नहीं की आपकी बीमारी के लिए ये ही कारण जिमेदार हों| इसलिए सही कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर से मिलना अनिवार्य हैं|
Inguinal hernia – इसे groin hernia भी कहते हैं| इसमें छोटी आंत या fatty tissue का कुछ भाग आपके अंडकोष में आकर दर्द और सूजन पैदा करता है| यह हर्निया अकसर भारी बोझ उठाने के कारण होता है| अकसर लोग gym में सीधे ही भारी भरकम बोझ उठा लेते हैं और हर्निया का शिकार हो जाते हैं|
Torsion – इस कंडीशन में आपकी स्पेर्मटिक कोर्ड मुड जाती है या ट्विस्ट हो जाती है और जिसके कारण आपके testes की और जाने वाला रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है| इसमें रोगी को बहुत तेज दर्द होता है| समय रहते इसका इलाज न हो तो permanent damageभी हो सकता है| यह एक आपातकालीन स्तिथि होती है|
Epididymitis – इसमें आपकी epididymis में inflammation या सोअज हो जाती है| Epididymis एक तुबे जैसी संरचना होती है जो की आपके दोनों testes के पीछे की और स्थित होती है| Epididymitis में रोगी को अंडकोष में असहनीय दर्द होता है| epididymis में inflammation होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे चोट लग जाना, बैक्टीरिया द्वारा संक्रमण. sexually transmitted disease जैसे chlamydia and gonorrhea आदि| Epididymitis ज्यादातर 18 से 36 वर्ष के लोगों में ज्यादा देखने को मिलता है|
Orchitis – इस रोग में आपके testes में inflammation हो जाता है जो की बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के कारण होता है| ये inflammation एक ओर या दोनों ओर हो सकता है| इसमें अंडकोष में सुजन और दर्द रहने लगता है| यह ज्यादातर 45 या उससे बड़ी उम्र के पुरषों में अधिक देखने को मिलता है|
इनके अलावा अंडकोष में सूजन, दर्द और irritation के कई और कारन होते हैं जैसे अंडकोष में पानी भरना, हर्निया सर्जरी के बाद भी दर्द कुछ महीनों तक रहता है| इनके अलावा prostatitis, गांठ का होना, पथरी और मम्प्स होना भी दर्द और सूजन के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं|
अंडकोष में सूजन और दर्द का इलाज / निदान
देखिये चूँकि यह पुरषों की बहुत ही sensitive स्थान होता है इसलिए कभी भी खुद डॉक्टर बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए खास कर तब जब तेज दर्द और दुसरे लक्षण जैसे चक्कर आना, जी मिचलाना, बुखार होना या गुप्तांग से गड़े पदार्थ का स्त्राव या लिंग से खून आना आदि हों | सही समय पर सही कारण का पता चलना और सटीक इलाज आपको आगे होने वाली परेशानी से बचा सकता है| लेकिन यदि आपको लगता है की आपकी प्रॉब्लम सीरियस नहीं है और बस हल्का फुल्का दर्द महसूस हो रहा है तो आपको कुछ घेरलू नुस्खे और सावधानियाँ अपनाकर उस दर्द से मुक्ति पा सकते हैं| नीचे कुछ जरुरी बातें बताई गयी हैं|
घरेलू आयुर्वेदिक उपाय 

बर्फ से सेकें
यदि अंडकोष में दर्द हो रहा हो तो बर्फ के टुकड़े से इसकी सिंकाई कीजिए, इससे आपको आराम मिलेगा। बर्फ के टुकड़े से अंडकोष की सिंकाई 10-15 मिनट तक करने से दर्द कम हो जाता है। यह एक प्रकार का अस्‍थायी उपचार है जिसमें तुरंत आराम मिलता है।खेलों में चोट से बचने के लिए protective कप और supporter जरुर पहने|
Epididymitis, पथरी, और संक्रमण की स्तिथि में अपने डॉक्टर से जरुरी दर्द निवारक दवा जैसे brufen, aspirin, paracetamol आदि और एंटीबायोटिक्स लिखवाकर नियमित रूप से लें|
कम कोलेस्ट्रॉल वाला खाना खाइए और दिन भर में ढेर सारा पानी पीजिये|
STD से बचने के लिए संभोग से पहले जरुरी सावधानियाँ बरतें|
हल्दी का लेप अंडकोष के बढ़ने यानि सूजन को कम करने में आपकी मदद कर सकता है|
अदरक के रस में शहद मिलकर पिने से लाभ मिलता है इसी प्रकार टमाटर, सेंधा नामक और अदरक का सलाद के रूप में सेवन करने से भी फायदा होता है|
अंडकोष में दर्द और सुजन से ग्रसित लोगों को डॉक्टर सबसे पहले आराम लेने की सलाह जरूर देता हैं| आपको सभी कार्य छोड़कर कुछ दिन bed rest लेना चाहिए| कोई ऐसा काम न करें जिससे आपके अंडकोष पर pressure पड़े|
गरम पानी से स्‍नान
टेस्टिकल्‍स के दर्द को कम करने के लिए गरम पानी से स्‍नान कीजिए। इसके अलावा बॉथ टब में पानी गरम करके आप थोड़ी देर तक बॉथ टब में रहने से भी दर्द कम हो जाता है। हल्‍के गरम पानी से सिंकाई भी कर सकते हैं।सामान्य दर्द और सुजन को आप बर्फ की सहायता से ख़तम कर सकते हैं| आपको बर्फ का टुकड़ा रुमाल या तौलिए में लपेटना है और दर्द वाली जगह पर कुछ मिनट्स के लिए लगाना है| ऐसा आपको हर 2 घंटे के 

अन्तराल में करना है|
यौन बीमारियों से बचाव
टेस्टिक्‍स में दर्द के लिए यौन संचारित बीमारियां भी जिम्‍मेदार हैं। यदि इनसे बचा जाये तो इसके कारण टेस्टिस में होने वाले दर्द से बचाव संभव है। इसलिए यौन संबंध बनाते वक्‍त ध्‍यान रखें और कंडोम का इस्‍तेमाल करें।

डॉक्टर या किसी जानकार की सलाह के अनुसार सही नाप का supporter या लंगोट का इस्तेमाल करें| इससे आपके अंडकोष को प्रयाप्त सहारा मिलेगा और दर्द में राहत|
कभी भी भारी भरकम बोझ न उठाएं और यदि जरुरी हो तो अपने फॅमिली members की मदद लें|

होम्योपैथिक उपाय -


अंडकोष की सूजन व दर्द(TESTICLES ORCHITIS AND NEURALGIA)
परिचय-
प्रमेह एवं गर्मी रोग के कारण अंडकोष और उसे ढकने वाली झिल्ली में सूजन व जलन पैदा होती है। अंडकोष में जलन होने पर पेशाब करते समय सफेद रंग का पदार्थ निकलता है। धीरे-धीरे अंडकोष सूजकर कठोर व बड़ा हो जाता है। वैसे तो अंडकोष फुल जाने पर किसी तरह का कष्ट नहीं होता है लेकिन सूजन अधिक दिनों तक रहने से अंडकोष पक जाता है।
रोग और उसमें प्रयोग की जाने वाली औषधियां :-
पल्सेटिला :-
यदि अंडकोष की सूजन की नई अवस्था हो तो इस औषधि का प्रयोग करें। किसी प्रकार की दवाईयों के प्रयोग से गोनोरिया को दबा देने के कारण से अंडकोष सूज गया हो तो पल्सेटिला औषधि की 30 शक्ति का सेवन करना हितकारी होता है।यदि अंडकोष बढ़ गया हो, उन्हें छुने से दर्द हो, काला-लाल़ हो गया हो, वीर्य वाहिनी (वीर्य नलिकाएं) में दर्द हो और दर्द जांघों तक फैल रहा हो तो ऐसी स्थिति में उपचार के लिए पल्सेटिला औषधि का प्रयोग किया जा सकता है। अगर गोनोरिया के दबाने से यह रोग हुआ हो और उसके दबने से पहले पीला नीला स्राव हुआ हो तो उपचार के लिए पल्सेटिला औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना लाभकारी होता है।
ऐकोनाइट :-
यदि अंडकोष में सूजन होने के साथ बुखार रहता हो और रोगी बेचैनी महसूस करता हो तो उसके इस रोग का उपचार ऐकोनाइट औषधि की 30 शक्ति से करना चाहिए। अंडकोष की नई प्रदाह में पल्सेटिला औषधि की 3x या एकोनाइट औषधि की 6 शक्ति का प्रयोग करने से जलन व सूजन दूर होती है विशेषकर बुखार रहने पर।
बेलाडोना :-
अंडकोष की सूजन में यदि स्नायुमण्डल अत्यंत उत्तेजित हो और तीव्र दर्द हो तो बेलाडोना औषधि का सेवन करना चाहिए।यदि अंडकोष सूज जाने के साथ ही वह गर्म व लाल हो गया हो तो बेलाडोना औषधि का उपयोग करने से सूजन व लाली दूर होती है।

रोडोडेन्ड्रन :-
अंडकोष की पुरानी सूजन की अवस्था में जब अंडकोष की सूजन कठोर होकर सूख जाए और रोगी को ऐसा महसूस हो जैसे कि अंडकोष को कुचल दिया गया हो। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए रोडोडेन्ड्रन औषधि की 6 शक्ति का प्रयोग करना लाभदायक होता है।
ऑरम-मेट :-
अंडकोष की पुरानी सूजन का प्रभाव यदि दाईं ओर की वीर्य वाहिनी (वीर्य नलिकाएं) में हो एवं उसमें दर्द हो तो ऑरम मेट औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
क्लेमेटिस :-
गोनोरिया के दब जाने के कारण यदि अंडकोष सूज गया हो तो पहले पल्सेटिला औषधि का सेवन करें। यदि पल्सेटिला औषधि से सूजन दूर न हो तो क्लेमैटिस औषधि की 3 से 30 शक्ति का सेवन करें। अंडकोष की सूजन में ऐसे लक्षण जिसमें रोगी को अधिक कष्ट होता है, सर्दी लगती है, अंडकोष कठोर हो जाता है, दर्द होता है तथा रोग के लक्षण रात को व बिस्तर की गर्मी से बढ़ते हैं। इस तरह के लक्षणों में रोगी को क्लेमैटिस औषधि की 3 से 30 शक्ति का सेवन कराना चाहिए।यदि प्रमेह रोग के कारण अंडकोष सूज गया हो और उसमें जलन हो तो क्लेमेटिस औषधि की 3 से 6 शक्ति का सेवन करना चाहिए।

कोनायम :-
अंडकोष में खून प्रवाहित करने वाली नाड़ियों के अन्दर खून जमा होने के कारण शारीरिक शक्ति कम होना एवं संवेदनशीलता कम होना आदि लक्षण। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए कोनायम औषधि की 30 से 200 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।नपुंसकता के करने होने वाले अंडकोष की सूजन व जलन को दूर करने के लिए कोनायम औषधि की 3 शक्ति से उपचार करना चाहिए।
मर्क-बिन :-
उपदंश के कारण यदि अंडकोष की सूजन हुई हो तो उपचार के लिए मर्क-बिन 2x मात्रा का प्रयोग करना लाभकारी होता है।

स्पंजिया :-
अंडकोषों की सूजन कठोर हो जाने पर स्पंजिया औषधि की 3 से 30 शक्ति का सेवन करना लाभकारी होता है

विशेषकर अंडकोष की पुरानी सूजन की अवस्था में। वीर्य वाहिनी की सूजन व अंडकोष में दर्द होना आदि लक्षणों में स्पंजिया औषधि की 3 से 30 शक्ति का सेवन करना लाभदायक होता है।अंडकोष की पुरानी सूजन की अवस्था में यदि सुई चुभने की तरह दर्द हो तो स्पंजिया औषधि की 2x मात्रा का उपयोग करना फायदेमंद होता है।ऊपर बताए गए औषधियों के अतिरिक्त अंडकोष की सूजन को दूर करने के लिए बीच-बीच में अन्य औषधियों का भी प्रयोग कर सकते हैं जो इस प्रकार हैं- आर्निका की 6, सिलिका की 6, हिपर की 30, सिपिया की 30, सल्फर की 30 या मर्क-3 आदि।
अंडकोष में दर्द होना :-
आरम-मेट :-
अंडकोष में दर्द होने पर ऑरम-मेट औषधि की 30 शक्ति का सेवन करना हितकारी होता है।स्नायु-शूल की तरह यदि अंडकोष में दर्द हो तो आरम-मेट औषधि की 200 शक्ति का प्रयोग करना उचित होता है।
हैमामेलिस :-
अंडकोष में दर्द के कारण स्वप्नदोष होना, मन उदास रहना, चिड़चिड़ा हो जाना, स्वास्थ्य सम्बंधी चिंता से खिन्न रहना आदि। इस तरह के लक्षणों में हैमामेलिस औषधि की 6 शक्ति का प्रयोग करना हितकारी होता है।अगर रोगी का अंडकोष सूज गया हो तथा बुखार हो गया हो, अंडकोष कड़ा होने के साथ रोगी अच्छा महसूस न कर रहा हो तो उसे हैमामेलिस औषधि की 2x मात्रा सेवन कराना चाहिए तथा हैमामेलिस- मदर टिंचर को 15 गुना अधिक पानी में मिलाकर अंडकोष पर लगाना चाहिए।

अविकसित अंडकोष :-
जिन बच्चों के अंडकोष का पूर्ण विकास नहीं हो पाता है उसका कद छोटा रह जाता है। ऐसे में अंडकोष का विकास रुक जाने पर ऑरम-मेट औषधि की 3 शक्ति 0.30 ग्राम की मात्रा में सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से अंडकोष का पूर्ण विकास होता है।

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