6.5.17

मूत्र रोगों के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार / Domestic Ayurvedic treatment of urinary diseases


मूत्र रोग के उपचार के लिए सबसे पहले लक्षण की ओर ध्यान देना चाहिए . उसी के आधार पर सही कारण का पता चल पायेगा . इसके बाद ही उपचार करना चाहिए . बच्चों में यह बहुत कम और बड़ों में अधिकाँश होता है . वृद्धावस्था में इसकी संभावना बढ़ जाती है . अगर सुरुआत में इसके लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए तो सामान्य संक्रमण से लेकर पुरुष ग्रंथि तक में कैंसर की सम्भावना बन सकती है . महिलाओं में मूत्र रोग संक्रमण गर्भाशय तक पहुँच सकता है . इसके बहुत घातक परिणाम हो सकते हैं जीवन दूभर हो सकता है . इस लेख में हम लक्षणों से सुरुआत कर कारण और मूत्र रोग के घरेलु एवं आयुर्वेदिक उपचार पर बात करेंगे .
मूत्र रोग संक्रमण के सामान्य लक्षण
पेशाब का बूँद बूँद कर होना और खुलकर न होना .
कमर और उसके आस पास और आगे पीछे दर्द होना .
पेशाब के साथ,पहले या बाद में खून का आना , इससे पेशाब हलके लाल या काले रंग की हो जाती है .
अत्यधिक दुर्गन्ध युक्त पेशाब होना
थकान के साथ बुखार आना .
भूंख न लगना और कब्ज महसूस होना .
मूत्र त्यागते समय मूत्र मार्ग में पीड़ा और जलन होना .
बार बार प्यास लगना .
थोड़ी थोड़ी देर पर पेशाब लगना .
गर्भवती स्त्रियों में मूत्राशय दब जाने से प्रदाह हो जाना .

 
मूत्र रोग के विभिन्न कारण-
बच्चों में अधिकतर पेशाब के बार बार होने और खुलकर न होने की समस्या आती है . ऐसा मीठा (शक्कर ) ज्यादा खा लेने और पर्याप्त पानी न पीने से होता है . ऐसा बड़ों में भी संभव है .
युवावस्था में सही समय पर मूत्र त्याग न करना और रोके रखना मूत्राशय और मूत्र नली में संक्रमण का कारण बन सकता है . जैसे आप किसी जरुरी मीटिंग में हों तो पेशाब लगने पर रोक लेते हैं और मीटिंग के ख़तम होने का इन्तजार करते हैं .
युवा लड़कियों और महिलाओं में घर से बहार होने पर शर्म और संकोचवश सही समय पर मूत्र त्याग न करना .
मुत्रेंद्रिय की साफ़ सफाई का ध्यान न रखना .
मधुमेह ( डायबिटीज ) रोगियों के मूत्र रोग बहुत जल्द हो जाते हैं .
सम्भोग के समय पेट पर अत्यधिक दबाव पड़ने से बैक्टीरिया मूत्राशय में आ सकते हैं , ऐसा महिलाओं में अधिकार होता है .
आनुवांशिक क्षय रोग होना , चिंता एवं तनाव होना , हिस्टीरिया (महिलाओं में ) , शराब पीना , सर्दी लगना , लीवर की समस्याएँ भी इसका कारण हो सकती है .
प्राप्त लक्षणों के आधार पर इसका उपचार किया जा सकता है और कारणों को ध्यान में रखकर सावधानियां / परहेज भी ध्यान में रखने चाहिए . इसके घरेलु और आयुर्वेदिक उपचार आगे दिए गए हैं .
मूत्र रोगों के  उपचार-
एक लीटर पानी में ४० ग्राम प्याज के टुकड़े काट कर मिला लें . इसे तब तक उबालें तब तक मिश्रण तिहाई रह जाए . इसे छान लें और शहद मिलाकर दिन में ३ बार पिलायें . इससे पेशाब खुलकर और बिना रुकावट आने लगता है . अगर पेशाब आना रुक गया है तो फिर से आने लगता है .
*२०० मिली खीरे या ककड़ी के रस में एक बड़ा चम्मच नीम्बू का रस और एक चम्मच शहद मिला कर पीने से मूत्र रोग में आराम मिलता है . इसे हर ३ घंटे के बाद लें .


*गर्म दूध में गुड मिलाकर पीने से पेशाब खुलकर आने लगता है . इसे दिन में २ बार एक एक गिलास लें .
*अगर दर्द हो रहा हो तो हर १५ मिनट पर पानी या तरल पदार्थ दें .
*गुर्दे की खराबी की वजह से अगर पेशाब न बन रहा हो तो ६० ग्राम मूली का रस दे , इससे जलन और दर्द में भी रहत मिलती है .
*पानी खूब पिए जिससे शरीर में पानी की कमी न होने पाए . सामान्य रूप से दुर्गन्ध युक्त मूत्र , पीला मूत्र और जलन इससे काबू में रहते हैं . सर्दियों में ८ और गर्मियों में १६ गिलास पानी जरुर पियें .
*मूली के पत्तों का रस १०० मिली की मात्रा में दिन में ३ बार देने पर मूत्र रोग में बहुत लाभ होता है .
*पेशाब रुक रुक कर आ रहा हो तो शलगम और कच्ची मूली काट कर खाएं . रस भी पी सकते हैं .
*आधा गिलास गाजर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर दिन में दो बार पीने से पेशाब की जलन में राहत मिलती है .
*दिन में २ बार ५० ग्राम कच्चा नारियल खाने से मूत्र साफ़ होता है .
*आधा गिलास मट्ठा लें , उसमें आधा गिलास जौ का माड़ मिलाएं . इस मिश्रण में ५ मिली नीम्बू का रस मिलाकर पीने से मूत्र के रास्ते के सभी रोग नष्ट होते हैं .
 
*केले के तने का रस ४ चम्मच और २ चम्मच घी मिलाकर दिन में २ बार पीने से रुका हुआ पेशाब आने लगता है . यह मूत्र रुक जाने पर बेहतरीन उपाय है .
*नीबू के बीजों को पीसकर नाभि के ऊपर रखकर ठंडा पानी डालने से रुका हुआ पेशाब आने लगता है .
*नीम्बू अपनी अम्लीय और क्षारीय दोनों प्रकृति के कारण मूत्राशय में उपस्थित जीवाणुओं को ख़तम कर देता है . नीम्बू का रस पीने से रक्तयुक्त पेशाब में लाभ होता है .
*जीरा और चीनी सामान मात्रा में लेकर पीस लें . इसे २ चम्मच दिन में ३ बार लेने से रुका हुआ पेशाब आने लगता है .
*१२५ मिली पलक के रस में नारियल का पानी मिलाकर पीने से पेशाब की जलन में लाभ होता है .
ताज़ी भिन्डी को बारीक काटकर दो गुने पानी में उबाल लें . तिहाई रह जाने पर छान लें . यह काढ़ा दिन में दो बार पीने पर प्रदाह में होने वाले पेट दर्द में लाभकारी है .
*आधा गिलास चावल के माड़ में स्वादानुसार चीनी मिलकर दो बार पीने पर रुका पेशाब खुलकर आने लगता है 
*पेशाब के समय दर्द हो रहा है और रक्त भी आ रहा है तो सोंठ को पीस – छान कर दूध में मिसरी के साथ पिलाने पर लाभ होता है .
*सौंफ को पानी के साथ उबालकर ठंडा कर लें . इसे दिन में ३ बार थोडा थोडा पीने से मूत्र रोग में रहत मिलती है .
*छोटी इलायची को पीसकर दूध के साथ लेने से मूत्र जी जलन में लाभ के साथ मूत्र खुलकर आता है .
*पेशाब में खून आना , दर्द , बेचैनी और जलन में धनियाँ बहुत गुणकारी है . रात में खाली हांडी में आधा किलो उबलता पानी डालकर उसमें ३० ग्राम अधकचरा कुटा धनियाँ डाल दें . सुबह इसे मसलकर छान लें और इसमें ३० ग्राम बताशे डाल कर मिला दें . इसके पांच हिस्से करके दिन में पांच बार पिलायें .
*पेशाब बार बार होने पर ३ दाना मुनक्का, २ दाना पिस्ता और ५ दाना काली मिर्च कुचलकर सुबह शाम खाने से इस समस्या से छुटकारा मिलता है .


*सेब खाने से रात में बार बार पेशाब जाने से आराम मिलता है .
*मसूर की दाल खाने से बार बार पेशाब में आराम मिलता है .
*२५ ग्राम अजवाइन , ५० ग्राम काला तिल और १०० ग्राम गुड मिलाकर इसे 8 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम लेने से पेशाब में जलन और बहुमूत्र जैसे रोग ठीक हो जाते हैं .
*बरगद के पेड़ के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से पेशाब में जलन और रूकावट से छुटकारा मिलता है .
*सात दिनों तक पके केले का नाश्ता करें . इससे पेशाब खुलकर आएगा और मूत्र विकार दूर होंगे .
*सुबह शाम तिल के लड्डू खाने से बार बार पेशाब की समस्या से छुटकारा मिलता है .
*चमेली के पत्तों का रस पीने से मूत्र विकार दूर होता है .
*बिस्तर पर पेशाब करने की आदत पड़ने पर रोज छुहारा खाना चाहिए .
*सौंफ के रस में थोड़ी हींग डालकर पीने से पेशाब की रूकावट दूर होती है .
*आधा कप नाशपाती का रस रोजाना पीने से कुछ ही दिनों में सभी मूत्र रोग दूर हो जाते हैं .
*१०० ग्राम पीसी हल्दी, २५० ग्राम काले टिल और १०० ग्राम पुराने गुड को कूटकर और तवे पर सुखा भून लें . इसे रोजाना एक चम्मच सुबह के समय पानी के साथ लेने पर सभी मूत्र रोग दूर हो जाते हैं .
*फालसे खाने और उसका शरबत पीने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है .
*अन्नानास का रस व शरबत पीने से पेशाब की जलन की समस्या से छुटकारा मिलता है .
*दालचीनी के सेवन से रुका हुआ पेशाब खुल जाता है और पेशाब में पस आना बंद हो जाता है . इसके लिए तीन बार आधा चम्मच दालचीनी पावडर पानी के साथ फांकना लाभकारी होता है .
*२ चम्मच दालचीनी पावडर और १ चम्मच शहद को हलके गर्म पानी में घोल लें . इसके सेवन से मूत्राशय के रोग नष्ट हो जाते हैं .
*जामुन की गुठली का चूर्ण रोजाना १-२ चम्मच ठन्डे पानी से लेने पर पेशाब में सुगर जाना बंद हो जाता है .
*खीरे या ककड़ी के बीजों के साथ काली मिर्च मिलाकर पीने से रुका हुआ पेशाब फिर से आने लगता है .
*पेशाब में जलन होने पर ठन्डे पानी में नीम्बू का रस मिलकर पीने से लाभ होता है .
*हरी दूब की जड़ का काढ़ा पीने से पेशाब के समय होने वाले कष्ट और जलन से छुटकारा मिलता है .
*हरी दूब को मिसरी के साथ पीसकर और छानकर पीने से पेशाब में खून आना बंद हो जाता है .
*पीसी इलायची शहद के साथ खाने पर पेशाब करते समय होने वाला दर्द और जलन दूर होता है . छोटी पीसी इलायची को नारियल के पानी , निर्मली और शक्कर मिलकर पीने से जल्दी लाभ होता है .
*बड़ी इलायची और शोरे को १० -१० ग्राम की मात्र में पीसकर ४ – ४ ग्राम दूध के साथ सुबह शाम खाने से पेशाब की जलन से छुटकारा मिलता है .
*तेजपत्ता का चूरन खाने से मूत्र में सुगर का जाना बंद हो जाता है और खून में सुगर की मात्र कम हो जाती है .
*बबूल की कच्ची फली को चाय में सुखा लें . उसके बाद घी में तलकर चूर्ण बना लें . इस चूर्ण को ३ -३ ग्राम की मात्रा में लेने पर बहुमूत्र में लाभ मिलता है .
*तरबूज के बीचों को गर्म पानी में पीसकर और छानकर पीने से पेशाब करने में कष्ट या जलन से छुटकारा मिलता है और पथरी में भी लाभ होता है ..
*अंगूर के रस में शहद मिलाकर पीने से बार बार पेशाब आना कम होता है .
*गन्ने का रस रोज पीने से पेशाब की रूकावट दूर होती है .
*सीताफल की जड़ को पानी में घिसकर पीने से रुका हुआ पेशाब आने लगता है .
*एक पका केला खाकर आंवले के रस में चीनी मिलाकर पीने से पेशाब आने लगता है .
*१० ग्राम धनिये को रात में पानी में भिगोकर और छानकर पीने से पेशाब की पेशाब की जलन दूर होती है .
*हरे धनिये के पत्तों के रस में २ चम्मच रस मिलकर पीने से मूत्र रोग में लाभ होता है .



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