25.5.17

कान के अंदर बजने वाली घंटी और विभिन्न प्रकार की आवाज को रोकने के उपाय


तेज़ आवाज़ पर संगीत सुनने से कानों में अतिसूक्ष्म धमनियों के सिरे को क्षति पहुंचनें से लगातार घंटी सुनाई देती है जिसे टिनिटस (tinnitus) भी कहतें हैं। टिनिटस धमनियों के क्षतिग्रस्त होने या परिसंचरण तंत्र (circulatory system) में समस्या होने के कारण होता है।[१] हालांकि, कानों में घंटी बजने को रोक थाम कर के बचा जा सकता है, फिर भी कान को क्षति पहुंचने पर भी इसका इलाज किया जा सकता है। दिये गए सलाह और संकेत पढ़ें और लाभ उठाएँ।
टिनिटस के लक्षणों में आपके कानों में इस प्रकार की फैंटम (निचले से ऊँचे स्वर की) ध्वनियाँ आती हैं:
घंटी बजना
भिनभिनाहट
दहाड़ना
खटखटाना
फुफकारना
सीटी बजना
जोर से चिल्लाने की आवाज
कारण
कई प्रकार की चिकित्सीय स्थितियाँ टिनिटस उत्पन्न कर सकती हैं या बदतर कर सकती हैं। कई मामलों में, निश्चित कारण कभी मालूम नहीं पड़ता।
भीतरी कान की कोशिकाओं की क्षति।
आपके भीतरी कान में सूक्ष्म नाजुक बालों का होना।
आपके कान के भीतर की नसों को प्रभावित करने वाली चोटें या स्थितियाँ।
श्रवण शक्ति की आयु सम्बन्धी हानि।
उच्च या जोरदार शोर की चपेट।
कान के मैल का अवरोध।
हृदय या रक्तवाहिनियों के रोग।
मस्तिष्क में गठानें (ब्रेन ट्यूमर्स)।
महिलाओं में होने वाले हार्मोन सम्बन्धी परिवर्तन।
थाइरोइड सम्बन्धी असामान्य स्थितियाँ।
माइग्रेन सम्बन्धी सिरदर्द।
कानों में क्षणिक घंटी बजने का उपचार
टिनिटस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए कुछ सामान्य चीजें हैं, जो आप स्वयं कर सकते हैं। इनमें हैं:
व्यायाम नियमित करें और विश्रांति हेतु समय निकालें।
पार्श्व ध्वनियों का स्तर निम्न रखें जैसे खिड़की का खुला होना या रेडियो का चालू होना।
धनिये के बीजयुक्त प्राकृतिक चाय टिनिटस से उत्पन्न परेशानी को कम करती है।

सिर को थपथपाने के उपाय का प्रयोग करें: आप किसी संगीत समारोह से घर वापस आ रहें हैं और आपके कानों से घंटी की आवाज़ नहीं बंद हो रही हो, तो यह कौकलिया में छोटे बालों को नुकसान पहुंचने के कारण धमनियों में सूजन, जलन और उत्तेजना उत्पन्न होती है। सिर को थपथपाने से ये लगातार आने वाली कष्टकर आवाज़ बंद हो सकती है।
कानों को अपनी हथेली से बंद करें। उँगलियाँ सिर के पीछे वाले हिस्से पर टिका लें। दोनों हाथों की मध्यमा उंगली सिर के पीछे एक दूसरे के सामने करें।अपनी प्रथमा उंगली को मध्यमा उंगली पर रखें।
चुटकी बजाने के तरीके से, अपनी प्रथमा उंगली को मध्यमा उंगली से सरका कर चुटकी की तरह सिर के नीचे वाले हिस्से पर थपथपाएँ। उँगलियों के सिर पर लाग्ने से ढोल जैसी आवाज़ आती है। ये काफी तेज़ होती है। ये सामान्य है।
ऊपर दिये गए तरीके से आप सिर के पीछे 40 से 50 बार चुटकी बजाएँ। 40 से 50 बार बजाने के बाद देखें कि घंटी कि आवाज़ कम हुई की नहीं।
 
इंतज़ार करें: 
बहुत तेज़ आवाज़ में संगीत सुनने के फलस्वरूप कानों में घंटी बजनें लगती है, और कुछ घंटों में बंद हो जाती है। आप उससे ध्यान हटाएँ जैसे कि आराम करें या ऐसी किसी चीज़ से दूर रहें जिससे ये समस्या और न बढ़े।
कानों मेँ घंटी बजने की दीर्घकालिक बीमारी का उपचार
*चिकित्सक की सलाह लें: अधिकतर, टिनीटस (tinnitus) या कान में घंटी बजनें की समस्या किसी अन्य बीमारी के इलाज के फलस्वरूप उत्पन्न हो सकती है। इसका इलाज करने से कानों में घंटी बजना कम ही नहीं बल्कि पूरी तरह भी समाप्त हो सकती है।
*आप अपने चिकित्सक से कानों की मैल (wax) को साफ करवाएँ। वैकल्पिक रूप से, आप भी बड़ी सवधानी के *साथ कान का मैल साफ कर सकतें हैं। कानों से मैल साफ करवाने के बाद आपको टिनीटस की बीमारी से आराम मिलेगा।
*चिकित्सक को अपनी रक्त वाहिनी (blood vessels) दिखाएँ। कमजोर हुई रक्त वाहिनियों की अवस्था से टिनीटस की बीमारी और बिगड़ सकती है।
*चिकित्सक से अपनी दवाई के संबंध में पुनः जांच करवा लें। अगर आप कोई दवाई लेते हैं तो डॉक्टर को
टिनीटस को आवाज़ प्रतिबंधित कर के रोक सकते हैं: विभिन्न प्रकार से आवाज़ को प्रतिबंधित कर, चिकित्सक घंटी की आवाज़ को बंद कर सकतें हैं। इन उपायों में विभिन्न प्रकार के उपकरण और विधियां बताई गई हैं।
व्हाइट नौइज़ मशीन (white noise machine) का उपयोग करें। “व्हाइट नौइज़ मशीन’ गिरती बारिश और हवा बहने जैसी प्रष्ठभूमि वाली आवाज़े निकालती है। ऐसी मशीन से निकली आवाज़ कानों में घंटी बजने की आवाज़ को डूबा सकती है।
*पंखा, नमी करने वाली मशीन (humidifier), नमी कम करने वाली मशीन (dehumidifier) और एयर कनडीशनर (A.C.) भी “व्हाइट नौइज़ मशीन” के समान काम करते हैं।

 
मासकिंग डिवाइस (कानों को ढकने वाला उपकरण) का प्रयोग करें। इसे कान पर लगा कर निरंतर ध्वनि उत्पन्न की जा सकती है, जिससे परेशान करने वाली घंटी की आवाज़ को दबाया जा सकता है।
कानों में सुनने की मशीन (hearing aids) लगाएँ। टिनीटस के साथ यदि आपको कम सुनाई पड़ता हो, तो इस उपकरण का ज़्यादा असर होता है । ज़रूर बताएं, कहीं यह किसी दवाई के दुष्प्रभाव से तो नहीं हो रहा।
टिनीटस रोग के लक्षण को दवाई लेने से सुधार सकतें हैं: दवाई लेने के बावजूद घंटी की आवाज़ से पूर्ण रूप से छुटकारा नहीं मिलता, बल्कि यदि दवाई प्रभावशाली है, तो घंटी की आवाज़ कम सुनाई पड़ेगी।
डॉक्टर से एंटिडिप्रेसेंट के लिए परामर्श लें। गंभीर टिनीटस के लिए एंटिडिप्रेससेंट काफी कारगर सिद्ध होते हैं, परंतु इसके कुछ अनुचित दुष्प्रभाव होते हैं जैसे कि, मुँह सूखना, आँखों में धुंधलापन छाना, कब्ज़ एवं दिल के रोग।
एल्प्राज़ोलम लेने के लिए डॉक्टर से परामर्श लें। जनक्स (xanax) के नाम से प्रचलित, टिनिटस बुज़जिंग कम करने में अल्प्राजोलम काफी कारगर सिद्ध होती है, लेकिन इसकी लत लगने के, तथा अन्य दुष्प्रभाव होते हैं।
जिंकगो का प्रयोग करें: भोजन के साथ जिंकगो (ginkgo) के रस का दिन में तीन बार सेवन करने से सिर और गर्दन में खून का बहाव बढ़ जाता है, जिससे रक्तचाप से उत्पन्न घंटी बजना, कम हो जाता है।[३] जिंकगो का प्रयोग दो महीने करने के बाद उसके प्रभाव का आंकलन करें।
टिनिटस की रोकथाम

उन स्थितियों से बचें जिन से कॉक्लिया के क्षतिग्रस्त होने से टिनिटस होता है: क्योंकि टिटिटस का उपचार कठिन होता है, इसलिए इस बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका कि इससे बचें, या इसे और बुरा होने न दें। निम्न से टिनिटस के लक्षण बढ़ सकते हैं:
*तेज़ ध्वनि। संगीत के कार्यक्रम इसके प्रमुख दोषी हैं, परंतु हवाईजहाज, निर्माण कार्य, यातायात, गोली की आवाज़, पटाखे इत्यादि तेज़ आवाज़ इसके लिए हानिकारक हो सकते हैं।
*तैरना: तैरते समय पानी और क्लोरीन कान में फंस सकते हैं, जिससे टिनिटस बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए तैरते समय कान के प्लग (earplugs) का प्रयोग करें।
*अपने तनाव को दूर करने के लिए बाहर घूमने जाएँ: अगर आप तनाव से ग्रसित हैं तो लगातार कानों में घंटी बजने कि समस्या और भी बढ़ सकती है। अपने तनाव से बचनें के लिए व्यायाम, ध्यान और मालिश द्वारा रोगोपचार किया जा सकता है
*अल्कोहल, कैफीन और निकोटीन का कम से कम सेवन करें: इन सब से धमनियों पे दबाव पड़ने के कारण ये तन जातीं हैं। ये कान के भीतरी भाग में होता है। लक्षण कम करने के लिए तंबाकू, अल्कोहल, कॉफी और कैफीन युक्त चाय का सेवन न करें।
नमक का प्रयोग न करें: 
नमक, शरीर में खून का बहाव, कमजोर करता है, जिससे रक्तचाप और टिनिटस बढ़ सकते हैं।
परामर्श
कान में बजती घंटी को रोकने के लिए शरीर की प्रतिरक्षित व्यवस्था (immune system) को मजबूत करने का प्रयास करना होगा। ये आपको संक्रमण और बीमारियों से बचने में मदद करता है, जिससे कान में परेशान करने वाली ध्वनि कम हो सकती है। स्वास्थ में सुधार का मतलब है टिनिटस में भी सुधार। स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, जिसमें पौष्टिक आहार, निरंतर और उपयुक्त व्यायाम एवं भरपूर निद्रा शामिल हो
परहेज और आहारलेने योग्य आहार
रक्तसंचार को बढ़ाने हेतु ढेर सारा ताजा अन्नानास खाएँ।
लहसुन के गंधरहित कैप्सूल लें या उन्हें भोजन में पका लें। लहसुन सूजन घटाने और संचार बढ़ाने इन दोनों कार्यों में सहायक होता है।
अपने कच्चे फल, हरी सब्जियों और पकी दालों (फलियों) के सेवन को बढ़ाएं। यह आहार विटामिनों, एमिनो एसिड्स और वनस्पतिजन्य यौगिकों से समृद्ध होता है जो भीतरी कान की सूजन को कम करने में सहायक होते हैं।
सूखे फल और मेवों का सेवन करें. ये भी टिनिटस को प्राकृतिक रूप से कम करने में लाभकारी होते हैं।इनसे परहेज करें
नमक का प्रयोग कम करें और कैफीनयुक्त पेय पदार्थ ना लें।
धूम्रपान और शराब के प्रयोग को कम करें क्योंकि ये आपके कानों की ध्वनि को प्रभावित करते हैं।
एस्पिरिन (एसिटाइलसेलिसिलिक एसिड) का प्रयोग ना करें जो कि सैलिसिलिक एसिड से बनती है। एस्पिरिन के कारण कुछ लोगों के कानों में घंटी बजने की ध्वनि उत्पन्न होती पाई गई है।
 
योग और व्यायाम
अपने मुँह को जितना सम्भव हो खोलें, और फिर अपने हाथ को ठोढ़ी पर रखकर, अपने मुँह को और चौड़ा करें। इस स्थिति में 30 सेकंड रहें।
मुँह को सहायता द्वारा खोलना जबड़े को खोले वाले व्यायाम के समान कार्य करता है। अपना मुँह खोलें, फिर दो उँगलियों से सामने के निचले दांतों जकड़ें। अपने मुँह को कुछ और खोलें और कुछ सेकंड तक इस स्थिति में बने रहें। 10 बार दोहराएँ।
अपने मुँह को ढीला और हल्का खोलें, और अपने जबड़े को दाहिनी तरफ जितना हो सके ले जाएँ। अपनी बाईं मुट्ठी जबड़े के विरुद्ध रखें और 30 सेकंड तक दाहिनी और जबड़े को बनाए रखने के लिए दबाव डालें। इसके बाद दाहिनी मुट्ठी का प्रयोग बाएँ जबड़े पर करें। इसे चार बार दोहराएँ और ऐसा दिन में कुल चार बार करें।
कांच के सामने खड़े हों, दांतों को जोर से भींच लें, मध्य के दोनों दांतों की निचले जबड़े पर स्थिति पर एकाग्र हों। जबड़े को बाएँ या दाएँ घुमाए बिना, दोनों दांतों को केंद्र में रखते हुए, अपने मुँह को धीरे-धीरे खोलें। इसे दिन में 10 बार करें।
योग
टिनिटस के लक्षणों को दूर करने वाले योगासनों में हैं:
अधोमुख श्वानासन
उष्ट्रासन
मत्स्यासन
नावासन
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