7.3.17

गुडमार के घरेलू आयुर्वेदिक प्रयोग उपचार


    गुड़मार या मेषश्रृंगी एक बहुत उपयोगी जड़ी-बूटी है। आयुर्वेद में इसके पत्तों और जड़ को औषधीय रूप से प्रयोग किया जाता है। जैसा की नाम से ही पता चलता है, यह जड़ी-बूटी गुड़ अर्थात मीठेपन को नष्ट करती है। इसका सेवन मधुमेह में बढ़ी हुई रक्तशर्करा को कम करता है। यह मधुमेह, जिसे डायबिटीज भी कहा जाता है, के उपचार में प्रभावी है। गुड़मार के पत्ते स्वाद में कुछ नमकीन-कड़वे होते हैं तथा इन्हें चबाने पर जीभ की स्वाद करने की क्षमता कुछ समय के लिए नष्ट हो जाती है। इसी कारण इसे मधुनाशनी भी कहा जाता है। इस बेल का नाम गुडमार संभवतः इसलिए पड़ा होगा कि इसे खाने के बाद यदि आप मीठा खाते है तो आपको मीठे स्वाद की अनुभूति नहीं होती. ये गुडमार के सक्रिय तत्व (Gymnemic acid) के कारण होता है जो जीव्हा के उन तंतुओं को थोड़े समय के लिये शिथिल कर देता हैं जो हमें मिठास या कड़वाहट की अनुभूति कराते हैं. इसकी पत्ती को खा लेने पर किसी भी मीठी चीज का स्वाद लगभग एक से दो घंटे तक के लिए समाप्त हो जाता है व गुड़ या चीनी की मिठास पानी के समान स्वादहीन लगती है. इसी प्रकार, इसे खाने के बाद कड़वी चीज़ें भी कड़वी नहीं लगती.यह जड़ी-बूटी बहुत सी एंटी-डायबिटिक दवाओं की एक महत्वपूर्ण घटक है।
 गुड़मार पाउडर Gudmar Leaf Powder के सेवन से शुगर नियंत्रण में रहती है। गुड़मार प्लाज्मा, रक्त, वसा और प्रजनन अंगों पर काम करता है। यह मूत्रल और भूख बढ़ाने वाला है। इसके पत्तों, जड़ के चूर्ण और काढ़े को अकेले ही या अन्य जड़ी-बूटियों के साथ प्रयोग किया जाता है। चरक संहिता के अनुसार, यह स्तन के दूध से दुर्गन्ध को दूर करती है। यह विरेचक है। इसका पौधा, कड़वा कसैला, तीखा, उष्ण, सूजन दूर करने वाला, पीड़ानाशक, पाचक, यकृत टॉनिक, मूत्रवर्धक, उत्तेजक, कृमिनाशक, विरेचक, ज्वरनाशक और गर्भाशय टॉनिक है।
गुड़मार (वानस्पतिक नाम: Gymnema sylvestre ) एक औषधीय पौधा है जो भारत सहित श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, कोरिया, ताइवान का देशज है. यह बेल (लता) के रूप में होता है. इसमें कोई शक नहीं कि, मीठे कड़वे स्वाद को दबाने वाली गुडमार एक उत्तम योगवाही वनस्पति है. योगवाही का अर्थ है; ऐसी वनस्पति या औषधि जो अन्य आहारों के पाचन (Digestion) को बढ़ाये. A substance that increases bio availability of food. तीसरा, ये मूत्रल (diuretic) भी होती है. इन तीन गुणों के चलते गुडमार का उपयोग औषधियों में उनकी योगवाही क्षमता बढ़ाने व उनके कड़वेपन को कम करने के लिये होता है. 
मूत्रल गुण के कारण इसका उपयोग उच्च रक्तचाप व पथरी इत्यादि रोगों में भी किया जाता है. इसकी जड़ों को विषहर माना जाता है.
‘गुड़मार’ का उपयोग प्राचाीन काल से मधुमेह के रोगियों के लिए किया जाता रहा है। मधुमेह की चिकित्सा में दी जाने वाली आयुर्वेदिक औषधियों में गुड़मार प्रमुख घटक द्रव्य के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। मधुमेह के अलावा इक्षुमेह में भी यह लाभ करता है। इस व्याधि में सामान्यतः शर्करा की जिस मात्रा का शरीर में चयापचय हो जाता है तथा पेशाब में शर्करा उत्सर्जित नहीं होती उसी मात्रा में शर्करा तथा स्टार्च का सेवन करने पर पेशाब में शर्करा निकलने लगती है। 
 
मधुमेह रोग होने पर कुछ लक्षण प्रकट होते हैं, जैसे- मुंह सूखना, अधिक प्यास लगना, अधिक भूख लगना, अधिक मात्रा में पेशाब आना ;खास कर रात कोद्ध, शरीर में कमजोरी, थकावट और सुस्ती बनी रहना, शरीर में फोड़े-फुंसी और खुजली होना, आदि। जब रक्त में शर्करा 160-180 उहध् कस के स्तर से अधिक हो जाती है तब यह मूत्र में उत्सर्जित होने लगती है, जिस से जहां पेशाब की जाती है वहां चींटे लगने लगते हैं। पेशाब गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है तथा बार-बार आता है। इन दोनों व्याधियों में ‘गुड़मार’ अर्क के लेने से इन लक्षणों में कमी आती है तथा भोजन से शर्करा बनने की प्रक्रिया पर अंकुश लगता है।
गुड़मार पाउडर के लाभ Health Benefits of Gudmar / Gurmar / Gymnema Powder :
यह पंक्रियास की सेल्स का रीजनरेशन कराती है।
यह शरीर में ग्लोकोज़ के उपयोग को सही करती है।
यह आंत से शुगर के अवशोषण को रोकती है।
यह हृदय के लिए टॉनिक Cardiotonic है।
यह मूत्रल Diuretic है।
यह कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली Hypocholesterolemic और ट्राइग्लिसराइड के लेवल को कम करती है।
यह विरेचक Laxative है।
यह गर्भाशय के लिए टॉनिक Uterotonic है।
यह कफ, पित्त, सांस लेने में तकलीफ, आँखों में दर्द आदि को दूर करती है।
यह सूजन, यकृत-वृद्धि, अपच, कब्ज़, पीलिया, पाइल्स, कृमि ब्रोंकाइटिस, विषम ज्वर, मासिक न आना, पथरी, त्वचा रोग और आँखों के रोगों में प्रयोग की जाती है।
यह डायबिटीजरोधी Antidiabetic है।
यह खून में ग्लूकोज के लेवल को कम करती है।
यह इन्सुलिन बहाव को बढ़ाती है।
यह मोटापा दूर करने वाली Antiobesity हर्ब है।
यह बुखार को कम Antipyretic करती है।
यह कड़वी Bitter है।
 
औषधीय मात्रा Recommended Dosage of Gudmar Leaf powder and Gudmar Root Powder :
गुड़मार की जड़ को अस्थमा, कफ, हृदय के रोग, त्वचा के रोग, पेशाब के रोग, रक्त विकार और प्रमेह के उपचार में प्रयोग किया जाता है।
इसको लेने की औषधीय मात्रा 1-2 ग्राम तथा काढ़े को 30- 50 ml की मात्रा में लिया जा सकता है।
काढ़ा बनाने के लिए 30 -50 g पाउडर को 200 ml पानी में उबाला जाता है जब तक पानी चौथाई रह जाए। इसे फिर छान कर पीया जाता है।
गुड़मार के पत्ते 🌿 
को दर्द, शोष, पाइल्स, अस्थमा, हृदय के रोगों, कफ, कृमि, कुष्ठ, आँखों के रोग, घाव, दांतों के कीड़ों, प्रमेह, और डायबिटीज के उपचार में प्रयोग किया जाता है।
गुड़मार पत्ती को लेने की औषधीय मात्रा 3-6 ग्राम (सूखा पाउडर), १-२ टेबलस्पून (ताज़ी पत्तियां) है।
गुड़मार अर्क - गुड़मार की पत्तियों को चौगुने जल में भिगो कर विशेष विधि से इस का अर्क खींच लिया जाता है। दिन में दो बार डेढ़-डेढ़ तोला की मात्रा में सेवन करने से यह यकृत ;स्पअमतद्ध की शर्करा बनाने की प्रक्रिया का दमन कर रक्त में शर्करा के बढ़े हुए स्तर को कम करता है।
गुड़मार चूर्ण - 
इस की पत्तियों का चूर्ण आधा चम्मच प्रातः सांय शहद या गाय के दूध के साथ दिया जाता है। इस से यकृत की क्रिया में सुधार होता है,  , जिस से अप्रत्यक्ष रूप से यकृत में ग्लूकोज का ग्यायकोजन के रूप में संचय होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
योग - 
गुड़मार पत्तियॉं 50 ग्राम, ग्राम, जामुन की गुठलियों की मींगी 50 ग्राम, बेल के सूखे पत्ते (बिल्व पत्र) 50 ग्राम तथा नीम की सूखी पत्तियां 50 ग्राम, बबूल की छाल का चूर्ण 20ग्राम , दालचीनी 40ग्राम करेले के बीजों का चूर्ण 20ग्राम , श्यामा तुलसी 20 ग्राम । सब को कूट-पीस कर कपड़-छन कर शीशी में भर लें। बाजार से मिलने वाली हर्बल में तथा औषधि को खरीदते समय , या किसी बगीचे से चयन करते समय उसकी गुणवत्ता का ध्यान रखें|मात्रा - 2-3 ग्राम (लगभग आधा छोटा चम्मच( मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ फांक लेना चाहिए।
लाभ - 
रक्त में शर्करा बढ़ना या मूत्र में शर्करा जाना, दोनों पर ही यह योग शीघ्र अंकुश लगाता है। अग्नाशय और यकृत पर इस का ऐसा अच्छा प्रभाव पड़ता है कि मधुमेह रोग के दुष्प्रभावों में कमी आती है।
परहेज़ -
 इन औषधियों का सेवन करते समय अगर आप मीठी चीज़ें, खटाई, तले पदार्थ और लाल मिर्च विशेषकर आलू , तथा चावल का प्रयोग कम करते हैं, तो लाभ शीघ्र ही होगा।
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