12.3.17

शिशु रोगों की घरेलू चिकित्सा नुस्खे


छोटा शिशु जब किसी व्याधि से ग्रस्त होता है, तब बड़ी परेशानी होती है, क्योंकि बच्चा बोल नहीं सकता तो यह बता नहीं पाता कि उसे तकलीफ क्या है। वह सिर्फ रोने की भाषा जानता है और रोए जाता है।
माँ बेचारी परेशान हो जाती है कि बच्चा रो क्यों रहा है, इसे चुप कैसे किया जाए, क्योंकि वह बच्चे को बहलाने और चुप करने की जितनी कोशिश करती है, बच्चा उतना ही रोता जाता है। यहाँ कुछ ऐसी व्याधियों की घरेलू चिकित्सा प्रस्तुत की जा रही है, जो बच्चे के रोने का कारण होती है।

कान दर्द :
छोटा शिशु कान की तरफ हाथ ले जाकर रोता हो तो माँ अपने दूध की 2-2 बूँद कानों में टपका दे। यदि कान दुखने से बच्चा रोता होगा तो चुप हो जाएगा, क्योंकि कान का दर्द मिट चुका होगा। 


बिस्तर में पेशाब
यह आदत कई बच्चों में होती है और बड़े होने तक बनी रहती है | ऐसे बच्चों को 1 कप ठंडे फीके दूध में 1 चम्मच शहद घोल कर सुबहशाम 40 दिन तक पिलाना चाहिए । और तिलगुड़ का एक लड्डू रोज खाने को देना चाहिए | बच्चे को समझा दें कि खूब चबाचबा कर खाए | शहद वाला 1 कप दूध पीने को दें |
सिर्फ 1 लड्डू रोज सवेरे खाना पर्याप्त है | लाभ न होने तक सेवन कराएं और चाहें तो बाद में भी सेवन करा सकते हैं | बच्चे को पेशाब करा कर सुलाना चाहिए और चाय पीना बंद कर देना चाहिए | शाम होने के बाद गरम पेय या शीतल पेय पीने से भी प्रायः बच्चे सोते हुए पेशाब कर देते हैं |
पेट दर्द :
पेट में दर्द होने से शिशु रो रहा हो तो पेट का सेक कर दें और पानी में जरा सी हींग पीसकर पतला-पतला लेप बच्चे की नाभि के चारों तरफ गोलाई में लगा दें, आराम हो जाएगा।
पेट के कीड़े :
छोटे बच्चों को अकसर पेट में कीड़े हो जाने की शिकायत हो जाया करती है। नारंगी के छिलके सुखाकर कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें, वायविडंग को भी कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें। दोनों को बराबर मात्रा. में लेकर मिला लें।
इस मिश्रण को आधा चम्मच (लगभग 3 ग्राम) गर्म पानी के साथ बच्चे को दिन में एक बार, तीन दिन तक, सेवन करा कर चौथे दिन एक चम्मच केस्टर ऑइल दूध में डालकर पिला दें। दस्त द्वारा मरे हुए कीड़े बाहर निकल जाएँगे।
   छोटे बच्चों की गुदा में चुरने कीड़े हो जाते हैं, जो गुदा में काटते हैं, जिस से बच्चा रोता है, सोता नहीं | मिट्टी के तेल में जरा सी रुई डुबो कर इस फाहे को बच्चे की गुदा में फंसा देने से चुरने कीड़े मर जाते हैं और बच्चे को आराम मिल जाता है |
काग ( कउआ) का गिरना
पहचान – इस रोग में गले के पास अंदर की तरफ जो काग होता है, उसमे सूजन आ जाती है तथा भयानक दर्द होता है |
* यदि प्यास भी बहुत लगती हो तो पीपल की छाल को जलाकर थोड़े पानी में बुझाकर पानी पिलाये | इससे प्यास भी जाती रहेगी और काग को भी लाभ होगा |
*काली मिर्च और चूल्हे की मिट्टी पीसकर अंगूठे पर लगाकर काग को उठा देने से वह फिर से नही गिरता |
दस्त ठीक न होना – 
सौफ को अच्छी प्रकार पीस कर छानकर उसमे शक्कर मिलाकर खिलायें | इससे दस्त साफ़ जायेगा|
खांसी – 
 दानेदार मक्के का भुट्टा जलाकर उसमे शहद या नमक मिलाकर खिलाने से खांसी ठीक हो जाती है |
बच्चों का सूखा रोग–
आज कल यह रोग बच्चो में प्राय: देखा जाता है | इसके लिए अद्भुत औषधि यह है कि रविवार या मंगलवार के दिन बंन भोगी की पत्तिया उखाड़ लावे और उस पत्ती को दोनों हाथों से मल-मल के उसके अर्क को बच्चो के कानो में चार बूंद टपकावे तथा सिर के तालू पर, हाथ पैर के उंगलियों के नहो में तथा पैर के तालू में अच्छी तरह लगा दे और थोड़ा पूरे शरीर में लगा दे | इससे सुखा रोग अवश्य दूर हो जाएगा |
बच्चों की मिर्गी –
 बारह दिन तक काली मिर्च गाय के दूध में भिगोवे रखे फिर निकाल कर सुखा दे | जब मिर्गी का दौरा हो तो पानी में घिसकर उसका हुलास दे | इससे दौरा बंद हो जायेगा |
बच्चों की आँखों में सुर्खी–
 फिटकरी भूनकर तीन मासा फिटकरी में एक तोला गाय का मक्खन मिला दे | मक्खन को पानी से सात बार धो लें | सोते समय आँखों पर दो-तीन बार लेप करे | इससे सुर्खी जाती रहेगी और आंख साफ़ हो जायेगी
 
बच्चों का डब्बा रोग
1. मूंगे को गरम करके दोनों भौहों के बीच में दाग देने से तुरंत फायदा होता है |
2. पेट के ऊपर बकायन के पत्ते गरम करके बाँधने से शीघ्र लाभ होगा |
3. पेट के ऊपर अंडी का तेल मलने से बच्चे की पसली चलनी बंद हो जाएगी |
काली खांसी – 
तवे की स्याही खुरच कर पानी में मिलाने से काली खांसी जाती रहती है|
बुखार – दिन में तीन बार एक एक रत्ती सत्त-गिलोय दें | इससे हर प्रकार का बुखार जाता रहेगा |
बच्चों के दांत – 
शहद के साथ भुना हुआ सुहागा मिलाकर मसूढ़ों पर मलने और चटाने से दांत आसानी से निकलते है |
एक टिप्पणी भेजें