21/2/17

विदारीकंद के गुण ,औषधीय उपयोग






    आज हम आपको विदारीकन्द के एक ऐसे प्रयोग के बारे में बताने जा रहे है जो पूर्ण रूप से महारसायन है जिसके उपयोग से आप अपने शरीर में अदिव्तीय काम शक्ति को प्रज्वलित कर सकते है | विदारीकन्द के बारे में अगर आप नहीं जानते है तो हम आपको बता देते है की यह एक औषधीय लता है जो हिमालय के तराई क्षेत्रो में , नदी नालो के किनारे देखने को मिलती है | इसकी जड़ निचे जमीन के अन्दर होती है जिसमे कई कंद होते है यही कंद औषध उपयोग में लिए जाते है | जड़ पर उपस्थित इन कंद को ही विदारी के फल कह सकते है | ये मधुयष्टी ( मुलेठी ) के फल के जैसे ही स्वाद वाले होते है |

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

   विदारीकन्द के कंद का चूर्ण ही औषध प्रयोग में लिया जाता है | यह पुरुषो के लिए एक उत्तम बलवर्द्धक , वीर्य वर्द्धक और शुक्रमेह को रोकने वाली औषधि है | वात , पित्त , शोथ , धातुक्षय , कमजोरी, शीघ्रपतन , नपुंसकता और यौन दुर्बलता में इसका रसायन की तरह उपयोग करने से 100% परिणाम प्राप्त होता है | विदारीकन्द आसानी से किसी भी पंसारी की दुकान से प्राप्त की जा सकती है | इसका प्रयोग बच्चो , स्त्रियों और पुरुषो में सुदृढ़ और बलशाली बनाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है | उचित समय तक प्रयोग करने से जीवनी शक्ति अर्थात उम्र को बढाने में भी उपयोगी सिद्ध होती है |विदारीकंद (Vidarikand) का प्रयोग निम्नलिखित बीमारियों, स्थितियों और लक्षणों के उपचार, नियंत्रण, रोकथाम और सुधार के लिए किया जाता है:
बाल समस्याओं
त्वचा रोगों
नेत्र संक्रमण
एसिडिटी
रक्ताल्पता
पोस्ट वितरण गर्भाशय दर्द
मासिक धर्म संबंधी विकार


*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

रजोनिवृत्ति सिंड्रोम
गर्भाशय कमजोरी
रक्तस्राव विकार
अत्यधिक गर्मी
आयुर्वेद के द्वारा यौन रोग, यौन दुर्बलता, आंशिक व नपुंसकता का सही रूप से इलाज किया जा सकता है। 

आयुर्वेद के अंदर मुख्य चिकित्सा ग्रंथ चरक संहिता, सुश्रुत संहिता में संभोग शक्ति को बढ़ाने जैसे कार्य करने के अंदर आने वाला यौन विकार व यौन दुर्बलता से संबंध रखने वाले सभी कारण तथा अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग तरह की औषधि से इलाज करना बताया गया है। यदि यौन दुर्बलता का पूरे भरोसे व शांति के साथ इसका उपचार किया जाए तो इसका सम्पूर्ण इलाज किया जा सकता है।
*शीघ्रपतन की समस्या होने पर 50 ग्राम गोखरू, 50 ग्राम ताल मखाना, 50 ग्राम सतावर, 50 ग्राम विदारीकन्द, 50 ग्राम अश्वगंधा, 50 ग्राम विधारा, 50 ग्राम सफ़ेद चिरमिटी, 100 ग्राम मिश्री को मिलाकार बारीक़ चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को 4-5 की मात्रा में सुबह नाश्ते और रात्रि भोजन के बाद लगातार 40 दिनों तक लेने से शीघ्रपतन की समस्या में लाभ मिलता है

प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र समस्या का 100% अचूक ईलाज 

*विदारीकन्द का चूर्ण 2.5 ग्राम को गूलर के 15 मिली रस में मिलाकर सुबह शाम दूध से लेने पर दीर्घ आयु पुरुष भी मैथुन में सक्षम हो जाते हैं !
*विदारीकन्द का चूर्ण 2.5 ग्राम को गूलर के 15 मिली रस में मिलाकर सुबह शाम दूध से लेने पर अधिक उम्र वाले पुरुष भी मैथुन में सक्षम हो जाते हैं !
:*लगभग 6 ग्राम की मात्रा में विदारीकन्द के चूर्ण को लगभग 10 ग्राम गाय के घी में और लगभग 20 ग्राम शहद में मिलाकर गाय के दूध के साथ लेने से शरीर में ताकत आती है। इसका सेवन लगातार 40 दिनों तक करना चाहिए।


मस्सों को जड़ से ख़त्म करने के रामबाण आयुर्वेदिक उपचार

वे आयुर्वेदिक योग जो यौन दौर्बल्य व नपुंसकता की स्थिति नही आने देते वाजीकारक योग कहलाते हैं।
वैद्यक चमत्कार चिन्तामणि नामक पुस्तक के अनुसार
सुन्दरि विदारिकायाः सम्यक् स्वरसेन भवति चूर्णम।
सर्पिः क्षौद्रसमेतं लीढ्वा रसिको दशांगना समयेत्।।

अर्थात विदारीकन्द को कूट पीस कर खूब बारीक चूर्ण करके इसे विदारीकन्द के ही रस में भिगो कर सुखा लें इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा में आधा चम्मच देशी घी और घी से तीन गुना यानि कि ढेड़ चम्मच शहद मिला कर चाट लें और ऊपर से एक गिलास मीठा कुनकुना दूध पी लें।इस प्रकार लगातार 60 दिन सेवन करने के उपरान्त यौन दौर्बल्य व नपुंसकता अवश्य ही मिट जाएगी।जो लोग शादी शुदा हैं उनके लिए यह योग नव यौवन प्रदान करने वाला है। यह बहुत ही सस्ता बनाने में सरल व शरीर को मजबूत व टिकाऊ बना देने वाला योग है ।
स्तनों में दूध की कमी –
 जिन प्रसवोतर महिलाओं के स्तनों में दूध सही मात्रा में नहीं बनता वे इसके चूर्ण 4 ग्राम चूर्ण को सुबह – शाम मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करे | नियमित 15 दिन के उपयोग से स्तनों में दूध की कमी दूर हो जाएगी और शरीर भी तंदरुस्त रहेगा |

धतूरा के औषधीय उपयोग

अधिक रक्तस्राव – 
जिन महिलाओंको मासिक धर्म के समय अधिक मात्रा में रक्त स्राव होता है वे इस औषधि का उपयोग कर के देखे , राहत मिलेगी | इसके लिए एक चम्मच चूर्ण को थोड़े से घी और शक्कर के साथ मिलाकर सुबह – शाम चाटने से जल्द ही अधिक मासिकस्राव की समस्या ख़त्म हो जाएगी |
दुर्बल बच्चो के लिए –
 शारीरक रूप से दुर्बल बच्चो पर भी इस औषधि का अच्छा असर पड़ता है | कृष शरीर वाले बच्चो को 2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह शाम चूर्ण चटाने से बच्चो का शरीर बलवान होता है एवं शरीर सुडोल भी बनता है |
यकृत और तिल्ली वृद्धि
 यकृत और तिल्ली की वर्द्धि में एक चम्मच विदारीकन्द के चूर्ण को शहद के साथ चाटने से यकृत और तिल्ली की  वृद्धि कम हो जाती है |
एक टिप्पणी भेजें