16.2.17

खिरनी के गुण फायदे उपचार

    
    ग्रीष्म ऋतु में निंबोली के समान आकार में दिखाई देने वाला एक फल बाजारों में ग्रामीणों द्वारा बेचते हुए देखा जा सकता है उसे खिरनी कहते है वास्तव में खिरनी लोक में प्रचलित नाम है आयुर्वेद में खिरनी का नाम क्षिरिणी है इसी का अपभ्रंश नाम खिरनी हो गया क्षिरिणी का अर्थ क्षीर (दूध) युक्त इसके फलों एवं पत्तों को तोड़ने पर दूध निकलता है गुणों के आधार पर यह फलों का राजा है एवं प्राचीनकाल में राजाओं द्वारा इसका सेवन किया जाता था अत: इसे आयुर्वेद में राजदान, राजफल एवं फलाध्यक्ष (फलों का राजा ) आदि नाम से भी जाना जाता है सेपोटेसी कुल के इस वृक्ष का वानस्पतिक नाम मनीलकरा हेक्सेंड्रा है एवं इसके विशाल वृक्षों को मध्य प्रदेश के मांडू क्षेत्रों में देखा जा सकता है जो की राजाओं का स्थान था आजकल इसके बीजों को उगाकर जब वह दो से ढाई फुट का हो जाए तब उसे काटकर उस में चीकू की कलम प्रत्यारोपित की जा रही है जिससे बहुत स्वादिष्ट चीकू का फल उत्पन्न होता है ।
खिरनी या माइमोसॉप्स हेक्जैंड्रा (Mimosops hexandra) ४०-५० फुट ऊँचा घना वृक्ष है, जो उत्तरी भारत में स्वत: उगता है, अथवा उगाया जाता है। इसमें पीले छोटे फल लगते हैं, जो खाने में काफी मीठे और स्वादिष्ठ होते हैं। वृक्ष की छाल औषधि के कार्य में आती है। बीज से तेल निकाला जाता है। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत होती है।
खिरनी का पेड़ भारत में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु आदि जगहों में होता है। खिरनी का पेड़ बहुत बड़ा होता है। इसके फल नीम के फल जैसे होते है। उन्हें खिरनी कहते हैं। खिरनी बहुत मीठा और गरम होता है और इसमें दूध भी होता है। खिरनी के पेड़ की लकड़ी मजबूत और चिकनी होती है।
खिरनी के पेड़ पर सितम्बर से दिसम्बर के महीनों में फूल उगते हैं और अप्रैल से जून के महीनें में फल लगते हैं। बारीश आने पर इसका मौसम पूरा होता है। बरसात की छीटे पड़ते ही इसके फल में कीड़े पड़ जाते हैं। खिरनी का पेड़ काफी सालों तक टिका रहता है खिरनी के पेड़ कई हजारों साल पुराने तक देखे गये हैं।आयुर्वेदानुसार इसके फल शरीर में शीतलता लाते है मधुर स्निग्ध एवं पचने में भारी होता है ।
फल धातुवर्धक , शुक्रजनन , क्षय रोग , वात रोग नाशक होता है ।
मद , मूर्छा , मोह , भ्रांति , दाह, तृषा , (प्यास) को नष्ट करता है इसके फल पित्त नाशक होने से रक्त पित्त रोग में लाभ पहुंचाते है
फल शरीर को मोटा करने वाले होते है अत: दुर्वल व्यक्तियों के लिए यह हितकारी है ।
इसके फलों में प्रोटीन ०.४८%, वसा २०४२%, कार्बोहाईड्रेट २७.७७ % खनिज लवन ०.७५ % , इसके अतिरिक्त कैल्शियम ०.८३ % फास्फोरस १७ एवं लौह ०.८२ मि.ग्रा./१०० ग्रा.होता है कुछ विटामिन्स जैसे ए, बी,एवं सी भी पाए जाते है इसके बीजों से निकलने वाले तेल को खाद्य तेल के रूप में भी प्रयोग किया जाता है इसकी छाल का काढ़ा ज्वर नाशक होता है इसके पके फलों को सुखाने पर वे ड्रायफ्रूट का अच्छा विकल्प हो सकते है तो आप भी खिरनी का सेवन करे एवं राजा बन जाइए और कम से कम एक पौधा जरुर लगाइए ।
मानसिक असंतोष, नींद में स्त्री और जल से भय आदि स्वप्न, जल से होने वाले पेट संबंधित रोग, मातृप्रेम में कमी हो तो ऐसा जातक चंद्र ग्रह से पीडित होगा। इन्हें खिरनी की जड़ को सफेद कपड़े में बांधकर किसी भी पूर्णमाशी को सायंकाल गले में धारण करना चाहिए।यदि चंद्र अनिष्ट फल दे रहा हो तो सोमवार को खिरनी की जड़ सफेद डोरे में बांध कर धारण करें
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